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Viruses in Hindi | वायरस हिंदी में

Viruses in Hindi | वायरस हिंदी में :


  • वायरस एक प्रकार का मालवेयर (malware) है जो कंप्यूटर, मोबाइल उपकरणों, और अन्य डिजिटल सिस्टम में संक्रमण करता है। ये स्व-संक्रामक प्रोग्राम होते हैं जो स्वयं को अन्य प्रोग्रामों, फाइलों, या बूट सेक्टर्स में जोड़कर फैलते हैं। 
  • वायरस कंप्यूटर सिस्टम के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं, डेटा को नुकसान पहुंचा सकते हैं, और सुरक्षा में गंभीर खतरें पैदा कर सकते हैं।
  • वायरस एक गंभीर समस्या है जो कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों के लिए हानिकारक हो सकता है। वायरस से बचाव के लिए उचित सुरक्षा उपायों का पालन करना आवश्यक है। एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर, फायरवॉल, और सॉफ़्टवेयर अपडेट के साथ-साथ उपयोगकर्ता की सतर्कता वायरस के संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर सकती है। 
  • इसके अलावा, डेटा का नियमित बैकअप लेना भी महत्वपूर्ण है ताकि किसी भी प्रकार की हानि की स्थिति में डेटा को पुनर्स्थापित किया जा सके।
mechanism of virus in Hindi | वायरस का कार्यप्रणाली :

वायरस की कार्यप्रणाली सामान्यतः निम्नलिखित चरणों में विभाजित की जाती है:

  • संक्रमण: वायरस एक सिस्टम में तब प्रवेश करता है जब कोई उपयोगकर्ता संक्रमित फाइल या प्रोग्राम चलाता है। यह ई-मेल अटैचमेंट, डाउनलोड की गई फाइलें, या संक्रमित मीडिया (जैसे USB ड्राइव) के माध्यम से हो सकता है।
  • प्रतिक्रिया: एक बार जब वायरस सिस्टम में प्रवेश करता है, तो यह अपनी पहचान छिपा सकता है और धीरे-धीरे फैलने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। कई वायरस तब तक निष्क्रिय रहते हैं जब तक कि कोई विशेष स्थिति या समय नहीं आता है।
  • नुकसान: वायरस सामान्यतः डेटा को नुकसान पहुँचाने, सिस्टम की गति को धीमा करने, या सिस्टम में अन्य वायरस डालने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। कुछ वायरस उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत जानकारी चुराने या सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए भी कार्य कर सकते हैं।
  • प्रसार: वायरस एक संक्रमित सिस्टम से दूसरे सिस्टम में फैलने के लिए विभिन्न विधियों का उपयोग करते हैं। यह ई-मेल के माध्यम से भेजे गए फाइलों, नेटवर्क कनेक्शनों, या इंटरनेट पर साझा की गई फाइलों के द्वारा किया जा सकता है।
Types of Viruses in Hindi | वायरस के प्रकार :

विभिन्न प्रकार के वायरस होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • फाइल इन्फेक्टर वायरस (File Infector Virus): ये वायरस स्व-संक्रामक होते हैं और किसी प्रोग्राम या फाइल के साथ संलग्न हो जाते हैं। जब उपयोगकर्ता उस प्रोग्राम को चलाता है, तो वायरस सक्रिय हो जाता है।
  • बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus): ये वायरस कंप्यूटर के बूट सेक्टर में स्थित होते हैं और सिस्टम के शुरू होने पर सक्रिय होते हैं। ये कंप्यूटर के प्रारंभिक स्टेज में लोड होते हैं, जिससे उन्हें पहचानना कठिन हो जाता है।
  • मैक्रो वायरस (Macro Virus): ये वायरस आमतौर पर दस्तावेज़ों, जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट वर्ड या एक्सेल फाइलों में पाए जाते हैं। जब दस्तावेज़ खोला जाता है, तो वायरस सक्रिय हो जाता है।
  • वर्म्स (Worms): वर्म्स एक प्रकार का वायरस है जो नेटवर्क के माध्यम से फैलता है। यह बिना किसी मानव हस्तक्षेप के अपने आप को अन्य सिस्टम में भेज सकता है।
  • ट्रोजन हॉर्स (Trojan Horse): ट्रोजन वायरस एक वैध प्रोग्राम के रूप में दिखते हैं, लेकिन इनमें हानिकारक कोड छिपा होता है। जब उपयोगकर्ता इसे इंस्टॉल करता है, तो यह सिस्टम को संक्रमित कर देता है।

Effect of viruses in Hindi | वायरस के प्रभाव :

वायरस के संक्रमण के कई प्रभाव हो सकते हैं, जैसे:

  • डेटा हानि: वायरस महत्वपूर्ण डेटा को हानि पहुँचा सकते हैं या उसे मिटा सकते हैं।
  • प्रदर्शन में कमी: वायरस सिस्टम के प्रदर्शन को धीमा कर सकते हैं, जिससे उपयोगकर्ताओं को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • सुरक्षा में खामियाँ: वायरस उपयोगकर्ता की व्यक्तिगत जानकारी चुरा सकते हैं, जैसे पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड विवरण, आदि।
  • अनधिकृत एक्सेस: कुछ वायरस सिस्टम पर अनधिकृत पहुँच प्राप्त कर सकते हैं और उसे दूरस्थ रूप से नियंत्रित कर सकते हैं।

Security of Viruses in Hindi | वायरस से सुरक्षा :

वायरस से सुरक्षा के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

  • एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर: एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है। यह नियमित रूप से वायरस स्कैन करता है और संक्रमित फाइलों को पहचानता है।
  • फायरवॉल का उपयोग: फायरवॉल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने में मदद करता है। यह अनधिकृत एक्सेस को रोकता है और नेटवर्क पर ट्रैफ़िक की निगरानी करता है।
  • सॉफ़्टवेयर अपडेट: अपने ऑपरेटिंग सिस्टम और सॉफ़्टवेयर को नियमित रूप से अपडेट रखना चाहिए। ये अपडेट सुरक्षा खामियों को भरने में मदद करते हैं।
  • संवेदनशीलता: अनजान ई-मेल अटैचमेंट और डाउनलोड की गई फाइलों पर ध्यान देना आवश्यक है। केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही फाइलें डाउनलोड करें।
  • डेटा बैकअप: नियमित रूप से डेटा का बैकअप लेना चाहिए, ताकि यदि कोई वायरस डेटा को नुकसान पहुँचाता है, तो उसे पुनर्स्थापित किया जा सके।

In this Chapter

Viruses in Hindi | वायरस हिंदी में
What is Network Security in Hindi
Model of Network & Cryptography in Hindi
MANET in Hindi | मोबाइल ऐड-हॉक नेटवर्क क्या है
Web Security in Hindi | वेब सिक्यूरिटी हिंदी में
Email Security in Hindi | ईमेल सुरक्षा हिंदी में
Phishing in Hindi | फिशिंग हिंदी में
SET(Secure Electronics Transactions) in Hindi | सिक्योर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन हिंदी में
Cyber Ethics in Hindi | साइबर नैतिकता हिंदी में
Server Management in Hindi | सर्वर प्रबंधन हिंदी में
VPN in Hindi | VPN हिंदी में
Malware in Hindi | मालवेयर हिंदी में
DDOS in Hindi | डीडीओस हिंदी में
Botnet in Hindi | बोटनेट हिंदी में
Backdoor Attack in Hindi | बैकडोर अटैक हिंदी में
Hash Function in Hindi | हैश फंक्शन हिंदी में
IP Security in Hindi | आई.पी. सिक्योरिटी हिंदी में
IP Spoofing in Hindi | IP स्पूफिंग हिंदी में
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SSL in Hindi | SSL हिंदी में
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