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DDOS in Hindi | डीडीओस हिंदी में

DDos in Hindi | डीडॉस हिंदी में :


  • डीडॉस (DDoS) अटैक एक ऐसा साइबर हमला है, जिसमें एक सर्वर, नेटवर्क, या वेबसाइट को अत्यधिक ट्रैफिक के माध्यम से ओवरलोड किया जाता है, जिससे वह उपयोगकर्ताओं के लिए अनुपलब्ध हो जाता है। 
  • DDoS का पूरा नाम डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (Distributed Denial of Service) है। यह साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक बहुत ही गंभीर और सामान्य प्रकार का हमला है, जो किसी वेबसाइट या नेटवर्क की सेवाओं को बाधित करने के लिए किया जाता है।
  • DDoS हमला आज के डिजिटल युग में एक गंभीर और व्यापक साइबर खतरा है। यह न केवल वेबसाइट या नेटवर्क की सेवाओं को बाधित करता है, बल्कि आर्थिक और प्रतिष्ठान संबंधी नुकसान भी पहुंचा सकता है।
  •  इस प्रकार के हमलों से बचाव के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता होती है, जिसमें नेटवर्क बैंडविड्थ का विस्तार, CDN, WAF और अन्य सुरक्षा सेवाओं का उपयोग शामिल है।
  •  DDoS हमलों के प्रति सचेत रहना और उचित साइबर सुरक्षा रणनीतियों को अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
How does a DDoS attack work? DDoS अटैक कैसे काम करता है?

DDoS अटैक का उद्देश्य किसी सेवा (जैसे वेबसाइट, सर्वर, या नेटवर्क) को इतनी बड़ी संख्या में नकली ट्रैफिक भेजना है कि वह ओवरलोड हो जाए और वैध उपयोगकर्ता उसे एक्सेस न कर सकें। इस हमले में ट्रैफिक को एक ही स्रोत से नहीं, बल्कि विभिन्न कंप्यूटरों और डिवाइसेस (जिन्हें अक्सर बॉटनेट कहा जाता है) से भेजा जाता है। ये कंप्यूटर और डिवाइस आमतौर पर संक्रमित होते हैं और उन्हें एक कमांड और कंट्रोल सर्वर द्वारा नियंत्रित किया जाता है।


Steps of Attacks in DDos in Hindi | DDoS हमले के चरण:

बॉटनेट का निर्माण:

हमलावर पहले हजारों या लाखों कंप्यूटरों और इंटरनेट से जुड़े अन्य डिवाइसों को मैलवेयर द्वारा संक्रमित करता है। इन संक्रमित उपकरणों को "ज़ॉम्बी" या "बॉट्स" कहा जाता है। यह पूरा नेटवर्क जिसे हमलावर नियंत्रित करता है, बॉटनेट कहलाता है।

हमले की शुरुआत:

जब हमलावर हमला करना चाहता है, तो वह बॉटनेट के प्रत्येक कंप्यूटर को निर्देश देता है कि वे लक्षित सर्वर या वेबसाइट पर भारी मात्रा में ट्रैफिक भेजें। यह ट्रैफिक HTTP अनुरोधों, डेटा पैकेट्स, या अन्य प्रकार के नेटवर्क अनुरोधों के रूप में हो सकता है।

सर्वर का ओवरलोड होना:

जैसे ही बॉटनेट से भारी मात्रा में ट्रैफिक लक्षित वेबसाइट पर भेजा जाता है, सर्वर की संसाधन क्षमता ओवरलोड हो जाती है। इससे सर्वर धीमा हो जाता है या पूरी तरह से क्रैश कर जाता है, जिससे वैध उपयोगकर्ता वेबसाइट या सेवा तक पहुँच नहीं पाते।

सेवा का अस्थायी रूप से बंद होना:

सर्वर जब अधिक अनुरोधों को संभालने में सक्षम नहीं होता है, तो यह अस्थायी रूप से बंद हो जाता है, जिससे उपयोगकर्ताओं को "404 Not Found" या "503 Service Unavailable" जैसी त्रुटियाँ दिखाई देती हैं।

Types of DDos in Hindi | DDoS के प्रकार :

DDoS हमलों के कई प्रकार होते हैं, जो अलग-अलग तरीकों से वेबसाइट, सर्वर या नेटवर्क पर हमला करते हैं। ये मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटे जा सकते हैं:

1. वॉल्यूमेट्रिक अटैक (Volumetric Attack):

  • वॉल्यूमेट्रिक DDoS हमलों में नेटवर्क बैंडविड्थ को ओवरलोड किया जाता है। इसमें हमलावर लक्षित सर्वर पर भारी मात्रा में नकली ट्रैफिक भेजते हैं ताकि नेटवर्क की क्षमता पूरी तरह से इस्तेमाल हो जाए और वैध ट्रैफिक के लिए कोई जगह न बचे।
  • उदाहरण: UDP फ्लड, ICMP फ्लड (पिंग अटैक), DNS एम्पलीफिकेशन
  • बचाव: CDN (Content Delivery Network), बैंडविड्थ लिमिटिंग

2. प्रोटोकॉल अटैक (Protocol Attack):

  • प्रोटोकॉल DDoS हमलों में, हमलावर लक्षित सिस्टम या नेटवर्क के प्रोटोकॉल को ही कमजोर बनाकर उसे ओवरलोड करते हैं। यह हमला सिस्टम की कार्यक्षमता पर सीधे असर डालता है और सिस्टम की क्षमता को खत्म कर देता है।
  • उदाहरण: SYN फ्लड, Ping of Death, Smurf DDoS
  • बचाव: फायरवॉल, एंटी-डीडॉस सिस्टम, प्रोटोकॉल ऑप्टिमाइजेशन

3. एप्लिकेशन लेयर अटैक (Application Layer Attack):

  • इस प्रकार के DDoS हमले का उद्देश्य वेब एप्लिकेशन पर काम करने वाली सेवाओं और सॉफ्टवेयर को बाधित करना होता है। यह हमले OSI मॉडल की सातवीं परत (एप्लिकेशन लेयर) पर किए जाते हैं और अत्यधिक जटिल होते हैं।
  • उदाहरण: HTTP फ्लड, Slowloris, DNS क्वेरी फ्लड
  • बचाव: वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (WAF), एप्लिकेशन लेयर ट्रैफिक मॉनिटरिंग

Reason of DDos in Hindi | DDoS के कारण :

DDoS हमलों के पीछे विभिन्न उद्देश्य हो सकते हैं, जैसे:

  • राजनीतिक कारण (Hacktivism): कई बार DDoS हमले किसी राजनीतिक या सामाजिक आंदोलन का हिस्सा होते हैं, जिन्हें "हैक्टिविज्म" कहा जाता है। इसमें हमलावर किसी वेबसाइट या संगठन को अपने विरोध के रूप में निशाना बनाते हैं।
  • व्यापारिक प्रतिस्पर्धा: कई बार प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ एक-दूसरे की वेबसाइट को डीडॉस हमले का निशाना बना सकती हैं, जिससे उनकी सेवाओं को बाधित किया जा सके।
  • फिरौती (Ransomware DDoS): हमलावर कभी-कभी संगठनों को फिरौती की धमकी देते हैं कि अगर उन्हें भुगतान नहीं किया गया तो उनकी वेबसाइट पर DDoS हमला किया जाएगा।
  • व्यक्तिगत दुश्मनी: व्यक्तिगत दुश्मनी या नफरत के कारण भी DDoS हमले किए जा सकते हैं, जैसे कि किसी व्यक्ति या कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना।

Impact of DDos in Hindi | DDoS के प्रभाव :

  • DDoS हमले का प्रभाव व्यापक हो सकता है। यह न केवल वेबसाइट या सर्वर को अस्थायी रूप से अनुपलब्ध करता है, बल्कि इसका दीर्घकालिक प्रभाव भी हो सकता है:
  • आर्थिक नुकसान: DDoS हमले के कारण ई-कॉमर्स वेबसाइट या ऑनलाइन सेवाओं को बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हो सकता है, क्योंकि ग्राहक वेबसाइट तक नहीं पहुंच पाते और कंपनी को बिक्री में नुकसान होता है।
  • ब्रांड की प्रतिष्ठा को नुकसान: जब एक वेबसाइट या सेवा बार-बार डाउन होती है, तो ग्राहकों के बीच ब्रांड की प्रतिष्ठा खराब हो जाती है। इससे विश्वास की हानि होती है।
  • सुरक्षा जोखिम: DDoS हमले कभी-कभी एक बड़े साइबर हमले का पहला कदम होते हैं। हमलावर DDoS का उपयोग करके सुरक्षा टीम का ध्यान भटकाते हैं और फिर सिस्टम में अन्य प्रकार के साइबर हमले (जैसे डेटा चोरी) करते हैं।

teqniques of save of DDos in Hindi | DDoS से बचाव के तरीके :

DDoS हमलों से बचाव के लिए कई सुरक्षा उपायों का उपयोग किया जा सकता है। कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:

1. नेटवर्क बैंडविड्थ का विस्तार:

  • अपने नेटवर्क की बैंडविड्थ बढ़ाकर DDoS हमले के प्रभाव को कम किया जा सकता है। यदि नेटवर्क के पास अधिक बैंडविड्थ होगी, तो वह अधिक ट्रैफिक को संभालने में सक्षम होगा, और हमले के दौरान वैध उपयोगकर्ता वेबसाइट तक पहुंच सकेंगे।

2. कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN) का उपयोग:

  • CDN का उपयोग करके वेबसाइट की सामग्री को कई सर्वरों पर वितरित किया जाता है, जिससे DDoS हमले के दौरान सर्वर पर भार कम होता है। CDN ट्रैफिक को विभिन्न सर्वरों पर वितरित कर सकता है, जिससे एक सर्वर पर ट्रैफिक का ओवरलोड नहीं होता।

3. वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (WAF):

  • WAF DDoS हमलों को रोकने के लिए प्रभावी उपकरण है। यह वेब एप्लिकेशन के इनकमिंग ट्रैफिक की निगरानी करता है और संदिग्ध या हानिकारक ट्रैफिक को ब्लॉक करता है। WAF एप्लिकेशन लेयर DDoS हमलों को रोकने में मदद करता है।

4. एंटी-DDoS सेवाएं:

  • कई कंपनियाँ एंटी-DDoS सेवाएँ प्रदान करती हैं जो DDoS हमलों का मुकाबला करने के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन की गई हैं। ये सेवाएँ नेटवर्क पर आने वाले ट्रैफिक की निगरानी करती हैं और संदिग्ध ट्रैफिक को पहचानकर उसे ब्लॉक करती हैं।

5. रेट लिमिटिंग (Rate Limiting):

  • रेट लिमिटिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें वेबसाइट या सर्वर पर एक निश्चित समय में केवल एक निश्चित मात्रा में ट्रैफिक की अनुमति दी जाती है। इससे नकली ट्रैफिक को रोका जा सकता है और सर्वर को ओवरलोड होने से बचाया जा सकता है।

6. फिल्टरिंग और ब्लॉकिंग:

  • अत्यधिक ट्रैफिक वाले आईपी पते या संदेहास्पद ट्रैफिक स्रोतों को फ़ायरवॉल के माध्यम से ब्लॉक किया जा सकता है। इससे बॉटनेट द्वारा भेजे जा रहे ट्रैफिक को रोका जा सकता है।

In this Chapter

DDOS in Hindi | डीडीओस हिंदी में
What is Network Security in Hindi
Model of Network & Cryptography in Hindi
MANET in Hindi | मोबाइल ऐड-हॉक नेटवर्क क्या है
Web Security in Hindi | वेब सिक्यूरिटी हिंदी में
Email Security in Hindi | ईमेल सुरक्षा हिंदी में
Phishing in Hindi | फिशिंग हिंदी में
SET(Secure Electronics Transactions) in Hindi | सिक्योर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन हिंदी में
Cyber Ethics in Hindi | साइबर नैतिकता हिंदी में
Server Management in Hindi | सर्वर प्रबंधन हिंदी में
VPN in Hindi | VPN हिंदी में
Malware in Hindi | मालवेयर हिंदी में
Botnet in Hindi | बोटनेट हिंदी में
Backdoor Attack in Hindi | बैकडोर अटैक हिंदी में
Hash Function in Hindi | हैश फंक्शन हिंदी में
IP Security in Hindi | आई.पी. सिक्योरिटी हिंदी में
IP Spoofing in Hindi | IP स्पूफिंग हिंदी में
Proxy Server in Hindi | प्रॉक्सी सर्वर हिंदी में
SSL in Hindi | SSL हिंदी में
Viruses in Hindi | वायरस हिंदी में
Spyware in Hindi | स्पाईवेयर हिंदी में
Flooding in Hindi | फ़्लडिंग हिंदी में
Hacking in Hindi | हैकिंग हिंदी में
Buffer Overflow in Hindi | बफ़र ओवरफ़्लो हिंदी में
Information Warfare in Hindi | सूचना युद्ध हिंदी में
L2TP in Hindi | L2TP क्या है
DES in Hindi | DES क्या है
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