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Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर क्या है?

Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर क्या है?


  • वायरस स्कैनर एक सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम है जिसका मुख्य कार्य कंप्यूटर और अन्य डिवाइसों में छिपे हुए वायरस, मालवेयर, स्पाइवेयर, और अन्य हानिकारक प्रोग्रामों का पता लगाना, उन्हें हटाना या उनकी गतिविधियों को सीमित करना है। 
  • यह कंप्यूटर को वायरस और अन्य साइबर खतरों से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। वायरस स्कैनर लगातार आपके कंप्यूटर या डिवाइस पर चलने वाली फाइलों और प्रक्रियाओं की निगरानी करता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई अवांछित या संदिग्ध गतिविधि न हो।
  • वायरस स्कैनर कंप्यूटर और डिवाइस सुरक्षा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण उपकरण है। यह न केवल खतरों का पता लगाता है, बल्कि उन्हें हटाकर आपके डिवाइस को सुरक्षित रखने में भी मदद करता है। सही वायरस स्कैनर का चयन और उसका नियमित उपयोग साइबर खतरों से बचाव के लिए आवश्यक है।

Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर क्या है?



How to work Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर कैसे काम करता है?

वायरस स्कैनर मुख्य रूप से दो प्रकार से काम करता है:

  • सिग्नेचर-आधारित स्कैनिंग (Signature-based Scanning): सिग्नेचर-आधारित स्कैनिंग सबसे पुरानी और सामान्य पद्धति है, जिसमें वायरस स्कैनर ज्ञात वायरस और मालवेयर के डेटाबेस से मिलान करके फाइलों की जांच करता है। जब भी कोई वायरस स्कैनर एक नई फाइल का सामना करता है, तो वह उस फाइल की संरचना या सिग्नेचर की तुलना अपने डेटाबेस से करता है। अगर फाइल का सिग्नेचर डेटाबेस में स्टोर किए गए किसी वायरस सिग्नेचर से मेल खाता है, तो वायरस स्कैनर उसे पहचान लेता है और चेतावनी जारी करता है।

  • हीयुरिस्टिक विश्लेषण (Heuristic Analysis): इस प्रकार की स्कैनिंग के दौरान, वायरस स्कैनर फाइलों और प्रोग्रामों की व्यवहारिक गतिविधियों का विश्लेषण करता है। हीयुरिस्टिक स्कैनिंग का मुख्य उद्देश्य नए और अज्ञात खतरों का पता लगाना है, जो अभी तक वायरस डेटाबेस में नहीं जोड़े गए हैं। यह तकनीक फाइल के व्यवहार का विश्लेषण करके संभावित खतरों का पता लगाने का प्रयास करती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई प्रोग्राम असामान्य गतिविधि करता है जैसे कि बिना अनुमति के सिस्टम फाइल्स में बदलाव करना, तो वायरस स्कैनर इसे संभावित खतरे के रूप में चिह्नित कर सकता है।

Types of Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर के प्रकार

वायरस स्कैनर विभिन्न प्रकार के होते हैं, जिनका उपयोग विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार किया जाता है। नीचे वायरस स्कैनर के मुख्य प्रकार दिए गए हैं:

  • ऑन-डिमांड स्कैनर (On-demand Scanner): यह वायरस स्कैनर तभी सक्रिय होता है जब उपयोगकर्ता इसे मैन्युअली चलाता है। उपयोगकर्ता इसे किसी विशेष फाइल, फोल्डर या पूरे सिस्टम की स्कैनिंग के लिए उपयोग कर सकता है। इस प्रकार के स्कैनर को नियमित रूप से चलाना आवश्यक होता है ताकि सिस्टम में किसी भी संभावित खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।
  • ऑन-एक्सेस स्कैनर (On-access Scanner): यह प्रकार के वायरस स्कैनर लगातार बैकग्राउंड में चलता रहता है और हर नई फाइल, ईमेल या डाउनलोड की गई फाइल की तुरंत स्कैनिंग करता है। इसे रियल-टाइम स्कैनर भी कहा जाता है। जैसे ही कोई फाइल एक्सेस की जाती है, स्कैनर उसे तुरंत स्कैन करता है और यदि उसमें कोई वायरस या मालवेयर मिलता है, तो उसे हटा देता है या उसे ब्लॉक कर देता है।
  • क्लाउड-आधारित स्कैनर (Cloud-based Scanner): इस प्रकार के स्कैनर स्थानीय डिवाइस पर संसाधनों का उपयोग करने के बजाय वायरस डेटाबेस और स्कैनिंग प्रक्रिया के लिए क्लाउड सेवाओं का उपयोग करते हैं। इससे सिस्टम पर संसाधनों का कम भार पड़ता है और स्कैनिंग तेज़ होती है। साथ ही, क्लाउड-आधारित स्कैनर वायरस डेटाबेस को तुरंत अपडेट कर सकते हैं, जिससे वे नए खतरों का तेजी से पता लगा सकते हैं।
  • स्पेशलाइज्ड स्कैनर (Specialized Scanner): कुछ वायरस स्कैनर विशेष प्रकार के मालवेयर या वायरस को खोजने और हटाने के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, रूटकिट स्कैनर केवल रूटकिट मालवेयर का पता लगाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, जबकि स्पाइवेयर स्कैनर केवल स्पाइवेयर के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं।

Main Work of Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर के प्रमुख कार्य

वायरस स्कैनर न केवल खतरों का पता लगाते हैं, बल्कि उनके खिलाफ विभिन्न सुरक्षा उपाय भी प्रदान करते हैं। इनके कुछ मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:

  • स्कैनिंग और पता लगाना (Scanning and Detection): वायरस स्कैनर का मुख्य कार्य कंप्यूटर की फाइलों, फोल्डरों, और एप्लिकेशनों को स्कैन करके किसी भी संभावित वायरस, मालवेयर या स्पाइवेयर का पता लगाना है। यह स्कैनिंग मैन्युअल या स्वचालित हो सकती है।
  • संक्रमित फाइलों को आइसोलेट करना (Isolating Infected Files): जब वायरस स्कैनर किसी संक्रमित फाइल का पता लगाता है, तो वह उस फाइल को सिस्टम से अलग करके क्वारंटाइन कर देता है। क्वारंटाइन की गई फाइलों को निष्क्रिय कर दिया जाता है ताकि वे कंप्यूटर में और नुकसान न पहुंचा सकें।
  • वायरस को हटाना (Removing Viruses): जब वायरस स्कैनर किसी संक्रमित फाइल या प्रोग्राम का पता लगाता है, तो वह उसे पूरी तरह से हटाने या उसकी मरम्मत करने का प्रयास करता है। यदि मरम्मत संभव नहीं है, तो फाइल को पूरी तरह से सिस्टम से हटा दिया जाता है।
  • रियल-टाइम प्रोटेक्शन (Real-time Protection): रियल-टाइम स्कैनर सिस्टम पर हर फाइल या प्रक्रिया की लगातार निगरानी करता है और जैसे ही कोई खतरा उत्पन्न होता है, उसे तुरंत ब्लॉक कर देता है। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण सुविधा है जो उपयोगकर्ताओं को हमेशा सुरक्षित रखने में मदद करती है।
  • सिस्टम प्रदर्शन की सुरक्षा (System Performance Protection): वायरस स्कैनर न केवल खतरों का पता लगाता है, बल्कि सिस्टम के प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए भी काम करता है। यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी वायरस या मालवेयर सिस्टम की स्पीड को प्रभावित न कर सके या सिस्टम को धीमा न कर सके।

Use & Advantages of Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर के उपयोग के फायदे

  • डेटा की सुरक्षा: वायरस स्कैनर आपकी संवेदनशील जानकारी जैसे कि पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड विवरण, और अन्य व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखने में मदद करता है।
  • रियल-टाइम सुरक्षा: यह हर समय आपके कंप्यूटर की निगरानी करता है और जैसे ही कोई नया वायरस या मालवेयर प्रकट होता है, उसे तुरंत रोक देता है।
  • सिस्टम प्रदर्शन में सुधार: वायरस स्कैनर आपके कंप्यूटर को मालवेयर से बचाता है, जो आपके सिस्टम को धीमा कर सकता है या उसे क्रैश कर सकता है।
  • स्वचालित अपडेट्स: अधिकांश वायरस स्कैनर नियमित रूप से अपने वायरस डेटाबेस को अपडेट करते हैं ताकि वे नए और अधिक खतरनाक वायरस का पता लगा सकें और उनका मुकाबला कर सकें।
  • कस्टम स्कैनिंग: वायरस स्कैनर आपको यह चुनने की सुविधा देते हैं कि आप कौन से हिस्से को स्कैन करना चाहते हैं, जैसे कि कोई विशेष फोल्डर या ड्राइव।

Disadvantages of Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर की नुकसान  :

  • नए वायरस का पता लगाने में कठिनाई: यदि वायरस स्कैनर का डेटाबेस अपडेट नहीं है, तो वह नए वायरस और मालवेयर का पता लगाने में असमर्थ हो सकता है।
  • सभी खतरों का पता न लगना: वायरस स्कैनर कई बार ऐसे खतरों का पता नहीं लगा पाता जो उन्नत तकनीकों या हैकिंग टूल्स का उपयोग करते हैं।
  • सिस्टम पर भार: कुछ वायरस स्कैनर स्कैनिंग के दौरान सिस्टम पर भारी लोड डालते हैं, जिससे सिस्टम की स्पीड धीमी हो सकती है।
  • फाल्स पॉजिटिव: कभी-कभी वायरस स्कैनर किसी सुरक्षित फाइल को भी वायरस के रूप में पहचान सकता है, जिसे फाल्स पॉजिटिव कहा जाता है। इससे उपयोगकर्ता को असुविधा हो सकती है।

Tips for choosing a virus scanner in Hindi | वायरस स्कैनर चुनने के लिए सुझाव :

  • अपडेटेड डेटाबेस: हमेशा ऐसा वायरस स्कैनर चुनें जिसका डेटाबेस नियमित रूप से अपडेट होता हो ताकि वह नए खतरों का पता लगाने में सक्षम हो।
  • रियल-टाइम प्रोटेक्शन: रियल-टाइम सुरक्षा की सुविधा वाले स्कैनर को प्राथमिकता दें ताकि वह हर समय आपकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सके।
  • उपयोग में आसानी: वायरस स्कैनर ऐसा होना चाहिए जिसे आसानी से स्थापित और उपयोग किया जा सके। इसमें एक सहज और उपयोगकर्ता-मित्र इंटरफेस होना चाहिए।
  • सिस्टम पर कम लोड: वायरस स्कैनर ऐसा होना चाहिए जो स्कैनिंग के दौरान सिस्टम की स्पीड को प्रभावित न करे और सिस्टम पर कम लोड डाले।
  • ग्राहक सहायता: वायरस स्कैनर के साथ अच्छी ग्राहक सहायता और हेल्प डेस्क सेवा होनी चाहिए ताकि किसी समस्या की स्थिति में आप तुरंत सहायता प्राप्त कर सकें।

In this Chapter

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