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Model of Network & Cryptography in Hindi

Model of Network & Cryptography in Hindi | नेटवर्क और क्रिप्टोग्राफी के मॉडल हिंदी में :


नेटवर्क और क्रिप्टोग्राफी के मॉडल एक मजबूत और सुरक्षित संचार प्रणाली का आधार होते हैं। नेटवर्क मॉडल यह निर्धारित करते हैं कि नेटवर्क कैसे काम करेगा और डेटा किस तरह से एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा, जबकि क्रिप्टोग्राफी सुरक्षा के संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

 क्रिप्टोग्राफी तकनीकों का उपयोग डेटा को एन्क्रिप्ट करके उसे सुरक्षित करने के लिए किया जाता है ताकि केवल अधिकृत उपयोगकर्ता ही डेटा को समझ सकें। इन दोनों विषयों का समन्वय एक सुरक्षित और विश्वसनीय नेटवर्क प्रणाली का निर्माण करता है।


नेटवर्क मॉडल और क्रिप्टोग्राफी एक साथ मिलकर नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए काम करते हैं। OSI और TCP/IP जैसे मॉडल यह सुनिश्चित करते हैं कि डेटा सुचारू रूप से स्थानांतरित हो, जबकि क्रिप्टोग्राफी तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि यह डेटा सुरक्षित रहे। 
जैसे-जैसे साइबर खतरों की संख्या बढ़ती जा रही है, नेटवर्क सुरक्षा में क्रिप्टोग्राफी का महत्व भी बढ़ता जा रहा है।


Network Models in Hindi | नेटवर्क मॉडल हिंदी में :  

नेटवर्क मॉडल वे संरचनात्मक ढांचे हैं जो यह निर्धारित करते हैं कि नेटवर्क के भीतर डेटा का संचार कैसे किया जाएगा। इनमें से कुछ प्रमुख नेटवर्क मॉडल निम्नलिखित हैं:

1. OSI मॉडल (Open Systems Interconnection Model):

OSI मॉडल नेटवर्क संचार के लिए एक सैद्धांतिक ढांचा है जिसे ISO (International Organization for Standardization) द्वारा विकसित किया गया था। यह 7 परतों में विभाजित है, जहां प्रत्येक परत का एक विशिष्ट कार्य होता है। 
इन परतों के माध्यम से डेटा को एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर तक स्थानांतरित किया जाता है।

  • परत 1: भौतिक परत (Physical Layer) – हार्डवेयर स्तर पर डेटा का प्रसारण करता है, जैसे केबल, स्विच, और वोल्टेज।
  • परत 2: डेटा लिंक परत (Data Link Layer) – डेटा फ्रेमिंग और एरर डिटेक्शन करता है।
  • परत 3: नेटवर्क परत (Network Layer) – डेटा पैकेट्स को गंतव्य तक पहुंचाने का कार्य करती है।
  • परत 4: परिवहन परत (Transport Layer) – एन्ड-टू-एन्ड संचार को सुनिश्चित करती है।
  • परत 5: सेशन परत (Session Layer) – सेशन की स्थापना, प्रबंधन और समाप्ति करती है।
  • परत 6: प्रेजेंटेशन परत (Presentation Layer) – डेटा को ऐसे फॉर्मेट में बदलती है जिसे ऐप्लिकेशन परत समझ सके।
  • परत 7: ऐप्लिकेशन परत (Application Layer) – उपयोगकर्ता द्वारा सीधे उपयोग की जाने वाली सेवाएं प्रदान करती है, जैसे ईमेल, FTP आदि।

2. TCP/IP मॉडल (Transmission Control Protocol/Internet Protocol Model):

TCP/IP मॉडल इंटरनेट आधारित संचार के लिए एक लोकप्रिय मॉडल है। यह OSI मॉडल से सरल है और इसमें चार परतें होती हैं:

  • एप्लिकेशन परत (Application Layer): एप्लिकेशन सेवाएं प्रदान करती है।
  • परिवहन परत (Transport Layer): डेटा संचार का नियंत्रण और एरर हैंडलिंग करती है।
  • इंटरनेट परत (Internet Layer): नेटवर्क को गंतव्य IP तक डेटा भेजने में मदद करती है।
  • नेटवर्क एक्सेस परत (Network Access Layer): डेटा को हार्डवेयर के माध्यम से भेजने के लिए जिम्मेदार होती है।

Cryptography in Network Security in  Hindi | नेटवर्क सुरक्षा में क्रिप्टोग्राफी :

क्रिप्टोग्राफी नेटवर्क सुरक्षा में एक प्रमुख भूमिका निभाती है, जिसमें डेटा को इस प्रकार परिवर्तित किया जाता है कि उसे केवल सही प्राप्तकर्ता ही समझ सके। यह तकनीक डेटा को एन्क्रिप्ट करके इसे सुरक्षित करती है। क्रिप्टोग्राफी के कई मॉडल और तकनीकें हैं, जिनका उपयोग डेटा को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है। इसे मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बांटा जा सकता है:

Symmetric Key Cryptography in Hindi | सिमेट्रिक कुंजी क्रिप्टोग्राफी :

इस क्रिप्टोग्राफी तकनीक में डेटा को एन्क्रिप्ट और डिक्रिप्ट करने के लिए एक ही कुंजी का उपयोग किया जाता है। इसका प्रमुख लाभ यह है कि यह तेज़ है, लेकिन इसमें मुख्य समस्या कुंजी के वितरण की होती है।

उदाहरण: DES (Data Encryption Standard), AES (Advanced Encryption Standard)

Asymmetric Key Cryptography in Hindi | असिमेट्रिक कुंजी क्रिप्टोग्राफी :

इसमें दो कुंजियाँ होती हैं – एक सार्वजनिक कुंजी (Public Key) और एक निजी कुंजी (Private Key)। सार्वजनिक कुंजी का उपयोग डेटा को एन्क्रिप्ट करने के लिए किया जाता है, जबकि निजी कुंजी का उपयोग उसे डिक्रिप्ट करने के लिए किया जाता है। यह कुंजी वितरण की समस्या को हल करता है, लेकिन यह सिमेट्रिक क्रिप्टोग्राफी की तुलना में धीमी होती है।

उदाहरण: RSA (Rivest–Shamir–Adleman), ECC (Elliptic Curve Cryptography)

Hashing in Hindi | हैशिंग :

हैशिंग एक प्रकार की क्रिप्टोग्राफी तकनीक है, जिसमें डेटा को एक अद्वितीय फिक्स्ड साइज की हैश वैल्यू में परिवर्तित किया जाता है। यह एकतरफा प्रक्रिया है, अर्थात् हैश से डेटा को वापस प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसका उपयोग डेटा की अखंडता की जांच के लिए किया जाता है।

उदाहरण: SHA (Secure Hash Algorithm), MD5 (Message Digest Algorithm)

Applications of Cryptography  in Hindi | क्रिप्टोग्राफी के अनुप्रयोग :

1. डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signatures):

डिजिटल हस्ताक्षर का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ों की प्रामाणिकता और अखंडता की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। यह असिमेट्रिक क्रिप्टोग्राफी पर आधारित है और यह सुनिश्चित करता है कि डेटा को प्रेषक द्वारा ही भेजा गया है और इसे बदला नहीं गया है।

2. सर्टिफिकेट अथॉरिटी (Certificate Authority - CA):

सर्टिफिकेट अथॉरिटीज डिजिटल सर्टिफिकेट जारी करने वाली संस्थाएं होती हैं, जो यह सुनिश्चित करती हैं कि वेबसाइट और सेवाएं सुरक्षित हैं और उन पर भरोसा किया जा सकता है। यह SSL/TLS प्रमाणपत्रों को जारी करती हैं, जिससे वेबसाइट और ब्राउज़र के बीच का संचार सुरक्षित हो जाता है।

3. वीपीएन (Virtual Private Network):

वीपीएन का उपयोग इंटरनेट पर सुरक्षित कनेक्शन बनाने के लिए किया जाता है। यह सार्वजनिक नेटवर्क को सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड कनेक्शन प्रदान करता है, ताकि डेटा को सुरक्षित रखा जा सके।

4. ईमेल सुरक्षा:

क्रिप्टोग्राफी तकनीकों का उपयोग ईमेल की सुरक्षा के लिए किया जाता है। PGP (Pretty Good Privacy) और S/MIME (Secure/Multipurpose Internet Mail Extensions) जैसी तकनीकें ईमेल एन्क्रिप्शन में मदद करती हैं।

नेटवर्क और क्रिप्टोग्राफी का संयोजन :

  • नेटवर्क मॉडल और क्रिप्टोग्राफी का संयोजन किसी भी नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए अत्यंत आवश्यक है। 
  • नेटवर्क मॉडल यह सुनिश्चित करते हैं कि डेटा सही ढंग से स्थानांतरित हो रहा है, जबकि क्रिप्टोग्राफी यह सुनिश्चित करती है कि डेटा सुरक्षित रूप से और अनधिकृत पहुंच से बचा हुआ है। 
  • दोनों मिलकर नेटवर्क की गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

In this Chapter

Model of Network & Cryptography in Hindi
What is Network Security in Hindi
MANET in Hindi | मोबाइल ऐड-हॉक नेटवर्क क्या है
Web Security in Hindi | वेब सिक्यूरिटी हिंदी में
Email Security in Hindi | ईमेल सुरक्षा हिंदी में
Phishing in Hindi | फिशिंग हिंदी में
SET(Secure Electronics Transactions) in Hindi | सिक्योर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन हिंदी में
Cyber Ethics in Hindi | साइबर नैतिकता हिंदी में
Server Management in Hindi | सर्वर प्रबंधन हिंदी में
VPN in Hindi | VPN हिंदी में
Malware in Hindi | मालवेयर हिंदी में
DDOS in Hindi | डीडीओस हिंदी में
Botnet in Hindi | बोटनेट हिंदी में
Backdoor Attack in Hindi | बैकडोर अटैक हिंदी में
Hash Function in Hindi | हैश फंक्शन हिंदी में
IP Security in Hindi | आई.पी. सिक्योरिटी हिंदी में
IP Spoofing in Hindi | IP स्पूफिंग हिंदी में
Proxy Server in Hindi | प्रॉक्सी सर्वर हिंदी में
SSL in Hindi | SSL हिंदी में
Viruses in Hindi | वायरस हिंदी में
Spyware in Hindi | स्पाईवेयर हिंदी में
Flooding in Hindi | फ़्लडिंग हिंदी में
Hacking in Hindi | हैकिंग हिंदी में
Buffer Overflow in Hindi | बफ़र ओवरफ़्लो हिंदी में
Information Warfare in Hindi | सूचना युद्ध हिंदी में
L2TP in Hindi | L2TP क्या है
DES in Hindi | DES क्या है
Brute-Force Attack in Hindi | ब्रूट-फोर्स अटैक हिंदी में
Active and Passive Attacks in Hindi | सक्रिय और निष्क्रिय हमले हिंदी में
Transposition Techniques in Hindi | ट्रांसपोजिशन तकनीक क्या है
Caesar Cipher in Hindi | कैसर साइफर क्या है
Avenues of Attack in Hindi | एवेन्यूज़ अटैक हिंदी में
SSH in Hindi | SSH क्या है?
Identity Theft in Hindi | पहचान की चोरी क्या है?
PGP & Hashing in Hindi | PGP और हैशिंग हिंदी में
Virus Scanner in Hindi | वायरस स्कैनर क्या है?
Virus dropper in Hindi | वायरस ड्रोपर क्या है?
Fog Computing in Hindi | फॉग कम्प्यूटिंग क्या है?
MDS & HTTPS in Hindi | MDS और HTTPS क्या है
DNS in Hindi | डोमेन नाम प्रणाली क्या है
Kerberos Protocol in Hindi | केर्बेरोस प्रोटोकॉल क्या है
Hellman Key Exchange in Hindi
Teardrop Attack in Hindi | टियरड्रॉप अटैक क्या है
Digital Signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर क्या है
Kali Linux in Hindi | काली लिनक्स क्या है
Symmetric & Asymmetric in Hindi | सिमेट्रिक और असिमेट्रिक हिंदी में
IPv4 & IPv6 in Hindi |  IPv4 vs IPv6