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PGP & Hashing in Hindi | PGP और हैशिंग हिंदी में

PGP & Hashing in Hindi | PGP और हैशिंग हिंदी में  :


  • आज के डिजिटल युग में, सूचना और डेटा की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। जब हम किसी ईमेल, दस्तावेज़ या अन्य संवेदनशील डेटा को ऑनलाइन भेजते हैं, तो उसे सुरक्षित रखना जरूरी होता है ताकि वह बीच में किसी अनधिकृत व्यक्ति के हाथ न लगे। 
  • इस प्रक्रिया में PGP (Pretty Good Privacy) और हैशिंग (Hashing) जैसी तकनीकें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • PGP और हैशिंग दोनों ही साइबर सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। PGP डेटा की गोपनीयता और प्रमाणिकता को सुनिश्चित करता है, जबकि हैशिंग डेटा की अखंडता की जांच करता है।
  • इन दोनों तकनीकों का सही तरीके से उपयोग करके हम अपने डेटा और संदेशों को सुरक्षित रख सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उन्हें केवल वही व्यक्ति देख सके जो उन्हें देखना चाहता है।
इस लेख में हम PGP और हैशिंग को विस्तार से समझेंगे, उनके उपयोग और सुरक्षा में उनके महत्व पर चर्चा करेंगे।

PGP (Pretty Good Privacy) – संक्षिप्त परिचय

  • PGP (Pretty Good Privacy) एक लोकप्रिय डेटा एन्क्रिप्शन विधि है, जिसका उपयोग ईमेल, फाइल्स, संदेशों और डेटा की सुरक्षा के लिए किया जाता है। इसे 1991 में फिल ज़िमरमैन (Phil Zimmermann) द्वारा विकसित किया गया था, और तब से यह डेटा एन्क्रिप्शन और सिग्नेचर के लिए मानक बन गया है।
  • PGP का मुख्य उद्देश्य संदेशों को एन्क्रिप्ट (Encrypt) और डिक्रिप्ट (Decrypt) करना है, ताकि उन्हें केवल सही प्राप्तकर्ता ही पढ़ सके। इसके अलावा, PGP का उपयोग डिजिटल सिग्नेचर के लिए भी किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि संदेश सही व्यक्ति द्वारा भेजा गया है और इसे बीच में किसी ने बदला नहीं है।

Main Component of PGP in Hindi | PGP के मुख्य घटक:

  • एन्क्रिप्शन (Encryption): PGP में संदेश को सुरक्षित करने के लिए उसे एन्क्रिप्ट किया जाता है। यह प्रक्रिया एक सार्वजनिक कुंजी (Public Key) का उपयोग करके होती है, जिसे प्राप्तकर्ता के पास भेजा जाता है। संदेश को पढ़ने के लिए प्राप्तकर्ता को अपनी निजी कुंजी (Private Key) का उपयोग करना पड़ता है।
  • डिक्रिप्शन (Decryption): प्राप्तकर्ता द्वारा अपनी निजी कुंजी (Private Key) का उपयोग करके एन्क्रिप्टेड संदेश को वापस सामान्य रूप में (Plaintext) डिक्रिप्ट किया जाता है।
  • डिजिटल सिग्नेचर (Digital Signature): PGP डिजिटल सिग्नेचर भी प्रदान करता है, जो यह प्रमाणित करता है कि संदेश भेजने वाला व्यक्ति सही है। डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से यह भी सुनिश्चित होता है कि संदेश के बीच में किसी ने छेड़छाड़ नहीं की है।

PGP कैसे काम करता है?

PGP सार्वजनिक कुंजी क्रिप्टोग्राफी (Public Key Cryptography) और संपन्न कुंजी क्रिप्टोग्राफी (Symmetric Key Cryptography) का संयोजन करता है। इसके काम करने का तरीका इस प्रकार है:

  • एन्क्रिप्शन प्रक्रिया: सबसे पहले, संदेश को एक संपन्न कुंजी (Symmetric Key) का उपयोग करके एन्क्रिप्ट किया जाता है। इस कुंजी को भी सार्वजनिक कुंजी (Public Key) से एन्क्रिप्ट किया जाता है।
  • प्राप्तकर्ता, जिसने पहले से अपनी सार्वजनिक कुंजी प्रदान की है, वह संदेश की कुंजी को डिक्रिप्ट करता है और फिर उस कुंजी का उपयोग करके संदेश को पढ़ता है।
  • डिजिटल सिग्नेचर: जब कोई व्यक्ति संदेश भेजता है, तो वह अपने निजी कुंजी का उपयोग करके संदेश के साथ डिजिटल सिग्नेचर भी जोड़ता है। प्राप्तकर्ता उस सिग्नेचर को भेजने वाले की सार्वजनिक कुंजी से सत्यापित करता है। इस तरह, संदेश की प्रमाणिकता की जांच की जाती है।

Advantages of PGP in Hindi | PGP के लाभ:

  • सुरक्षा और गोपनीयता: PGP आपके संदेशों को एन्क्रिप्ट करता है, जिससे केवल सही प्राप्तकर्ता ही उसे पढ़ सके। इसके अलावा, यह संदेश की गोपनीयता को बनाए रखता है।
  • प्रमाणिकता: डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से यह सुनिश्चित होता है कि संदेश सही व्यक्ति द्वारा भेजा गया है और किसी ने इसे बीच में बदला नहीं है।
  • विस्तारित उपयोग: PGP का उपयोग केवल ईमेल के लिए नहीं, बल्कि किसी भी डेटा या फ़ाइल की सुरक्षा के लिए किया जा सकता है।

हैशिंग (Hashing) – संक्षिप्त परिचय

  • हैशिंग एक क्रिप्टोग्राफिक तकनीक है जिसका उपयोग डेटा या संदेश की पहचान के लिए एक यूनिक (अद्वितीय) फ़िंगरप्रिंट या कोड जनरेट करने के लिए किया जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें डेटा को एक निश्चित लंबाई के अल्फ़ान्यूमेरिक स्ट्रिंग में बदल दिया जाता है, जिसे हैश वैल्यू या हैश कहा जाता है।
  • हैशिंग का मुख्य उद्देश्य डेटा की सत्यता की जांच करना होता है। इसका उपयोग पासवर्ड सुरक्षित रखने, संदेश की अखंडता (Integrity) की जांच करने और डिजिटल हस्ताक्षरों के साथ किया जाता है।

Main Component of Hashing in Hindi | हैशिंग के मुख्य घटक:

  • अपरिवर्तनीयता (Immutability): एक बार जब डेटा को हैश कर दिया जाता है, तो उसे उसके मूल रूप में पुनः प्राप्त नहीं किया जा सकता। यानी हैशिंग एक एकतरफा प्रक्रिया होती है।
  • यूनिक आउटपुट (Unique Output): हैशिंग में एक ही इनपुट के लिए हमेशा एक ही आउटपुट उत्पन्न होता है, लेकिन थोड़ा सा बदलाव भी हैश वैल्यू को पूरी तरह से बदल देता है। इसे एवलॉन्च इफ़ेक्ट (Avalanche Effect) कहा जाता है।
  • फिक्स्ड आउटपुट: चाहे इनपुट डेटा कितना भी बड़ा हो, हैशिंग हमेशा एक निश्चित आकार का आउटपुट उत्पन्न करता है। उदाहरण के लिए, MD5 हैशिंग एल्गोरिद्म हमेशा 128-बिट आउटपुट उत्पन्न करता है, और SHA-256 हमेशा 256-बिट आउटपुट।

हैशिंग कैसे काम करता है?

  • हैशिंग एल्गोरिदम (जैसे MD5, SHA-1, SHA-256) डेटा के हर बिट को एक निश्चित तरीके से प्रोसेस करता है और उसे एक निश्चित आकार के हैश में बदल देता है। हैशिंग के कुछ प्रमुख उपयोग हैं:
  • पासवर्ड स्टोरेज: जब उपयोगकर्ता किसी वेबसाइट पर पासवर्ड सेट करता है, तो वह पासवर्ड सीधे स्टोर नहीं किया जाता। उसकी हैश वैल्यू को स्टोर किया जाता है। जब उपयोगकर्ता लॉगिन करता है, तो उसका पासवर्ड फिर से हैश किया जाता है और उसे पहले से स्टोर की गई हैश से मिलाया जाता है।
  • संदेश अखंडता: हैशिंग का उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है कि संदेश या डेटा को बीच में किसी ने बदला नहीं है। संदेश की हैश वैल्यू को जनरेट किया जाता है, और इसे प्राप्त करने वाले इसे पुनः हैश करके जांचते हैं कि डेटा बदल गया है या नहीं।
  • डिजिटल सिग्नेचर: डिजिटल सिग्नेचर में संदेश की हैश वैल्यू को भेजने वाले की निजी कुंजी से एन्क्रिप्ट किया जाता है, जिससे प्राप्तकर्ता इसे सत्यापित कर सके कि संदेश सही है।

Types of Hashing in Hindi | हैशिंग के प्रकार:

  • MD5 (Message Digest Algorithm 5): यह सबसे पुराना और लोकप्रिय हैशिंग एल्गोरिदम है, जो 128-बिट आउटपुट उत्पन्न करता है। हालांकि, अब इसे सुरक्षा के लिए असुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसके कोलिज़न (Collision) की संभावना होती है।
  • SHA (Secure Hash Algorithm): यह अधिक सुरक्षित और व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला हैशिंग एल्गोरिदम है। SHA-256 एक लोकप्रिय संस्करण है, जो 256-बिट आउटपुट उत्पन्न करता है और इसे सुरक्षा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
Advantages of Hashing in Hindi | हैशिंग के लाभ:

  • डेटा अखंडता की जांच: हैशिंग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेटा या संदेश में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है।
  • सुरक्षित पासवर्ड स्टोरेज: हैशिंग का उपयोग पासवर्ड स्टोर करने के लिए किया जाता है, जिससे पासवर्ड को सीधे स्टोर न करके उसकी हैश को स्टोर किया जाता है।
  • तेज़ प्रोसेसिंग: हैशिंग एल्गोरिदम बहुत तेज़ होते हैं और बड़े डेटा को भी कुछ ही समय में प्रोसेस कर सकते हैं।

Relation Beetween PGP & Hashing in Hindi | PGP और हैशिंग के बीच संबंध:

  • PGP और हैशिंग दोनों का उपयोग डेटा की सुरक्षा और उसकी अखंडता सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है। PGP में एन्क्रिप्शन और डिजिटल सिग्नेचर की प्रक्रिया में हैशिंग का उपयोग किया जाता है।
  • उदाहरण के लिए, जब कोई संदेश PGP के माध्यम से भेजा जाता है, तो संदेश की हैश वैल्यू (उदाहरण के लिए SHA-256) जनरेट की जाती है और इसे एन्क्रिप्ट किया जाता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि संदेश के बीच में किसी ने बदलाव नहीं किया है।

In this Chapter

PGP & Hashing in Hindi | PGP और हैशिंग हिंदी में
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Model of Network & Cryptography in Hindi
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Email Security in Hindi | ईमेल सुरक्षा हिंदी में
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