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DES in Hindi | DES क्या है

DES in Hindi | DES (डेटा एन्क्रिप्शन स्टैंडर्ड) क्या है?


DES (Data Encryption Standard) एक सिंमेट्रिक-की एल्गोरिदम है, जिसे डेटा को सुरक्षित रूप से एन्क्रिप्ट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

 इसका विकास 1970 के दशक में अमेरिकी नेशनल ब्यूरो ऑफ़ स्टैंडर्ड्स (अब NIST) द्वारा किया गया था, और इसे 1977 में एक आधिकारिक एन्क्रिप्शन स्टैंडर्ड के रूप में अपनाया गया।

 DES का उपयोग संवेदनशील डेटा को सुरक्षित रखने और अनधिकृत पहुंच से बचाने के लिए किया जाता था।

DES अपने समय में एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रभावी एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम था, जिसने डेटा सुरक्षा में बड़ा योगदान दिया। हालांकि, तकनीकी विकास और कंप्यूटर की प्रसंस्करण शक्ति के बढ़ने के साथ, DES की कमजोरियाँ उजागर हुईं और इसे ब्रूट-फोर्स हमलों द्वारा तोड़ा जा सकता है। 

वर्तमान में, DES की जगह अधिक सुरक्षित एल्गोरिदम जैसे 3DES और AES का उपयोग किया जाता है।

 DES ने एन्क्रिप्शन की दुनिया में जो आधारशिला रखी, वह आज भी आधुनिक एन्क्रिप्शन तकनीकों के विकास में महत्वपूर्ण है।

DES एक ब्लॉक साइफर (block cipher) एल्गोरिदम है, जिसका मतलब है कि यह डेटा को एक बार में 64-बिट ब्लॉक्स में एन्क्रिप्ट करता है। यह एन्क्रिप्शन और डिक्रिप्शन दोनों के लिए एक ही सीक्रेट की (गोपनीय कुंजी) का उपयोग करता है, जिसे सिंमेट्रिक की कहा जाता है।

Features of DES in Hindi | DES की विशेषताएँ :

ब्लॉक साइफर (Block Cipher): DES एक ब्लॉक साइफर एल्गोरिदम है, जिसका अर्थ है कि यह एक समय में 64-बिट डेटा को ब्लॉक के रूप में एन्क्रिप्ट और डिक्रिप्ट करता है।

सिंमेट्रिक की एल्गोरिदम (Symmetric Key Algorithm): DES में एन्क्रिप्शन और डिक्रिप्शन दोनों के लिए एक ही कुंजी (की) का उपयोग होता है। इस प्रकार के एल्गोरिदम को सिंमेट्रिक की एल्गोरिदम कहा जाता है।

कुंजी की लंबाई (Key Length): DES में 56-बिट लंबी कुंजी का उपयोग होता है, जबकि कुल 64-बिट का ब्लॉक होता है जिसमें 8 बिट्स को पैरिटी बिट्स के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। 56-बिट की कुंजी सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रयाप्त मानी जाती थी, लेकिन समय के साथ यह कमजोर साबित हुई।

16 राउंड्स का उपयोग (16 Rounds): DES में एन्क्रिप्शन प्रक्रिया के दौरान 16 राउंड्स (चरणों) का उपयोग किया जाता है, जिनमें प्रत्येक राउंड डेटा को और अधिक जटिल बनाता है ताकि इसे डिक्रिप्ट करना कठिन हो सके।

फेस्टल संरचना (Feistel Structure): DES की एन्क्रिप्शन प्रक्रिया Feistel Structure पर आधारित है, जो डेटा को आधे हिस्सों में विभाजित करके कई बार प्रोसेस करता है। इस संरचना के कारण, DES को आसानी से डिक्रिप्ट किया जा सकता है यदि सही कुंजी ज्ञात हो।

Encryption Process of DES in Hindi |  DES की एन्क्रिप्शन प्रक्रिया :

DES की एन्क्रिप्शन प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में विभाजित होती है:

इनीशियल परम्यूटेशन (Initial Permutation - IP): सबसे पहले, 64-बिट प्लेनटेक्स्ट ब्लॉक पर एक प्रारंभिक परम्यूटेशन लागू की जाती है। इसका उद्देश्य ब्लॉक के बिट्स को एक विशेष क्रम में पुनर्व्यवस्थित करना होता है।

डेटा को विभाजित करना (Splitting the Data): इनीशियल परम्यूटेशन के बाद, 64-बिट ब्लॉक को दो हिस्सों में विभाजित किया जाता है - लेफ्ट हाफ (L0) और राइट हाफ (R0), जिनमें प्रत्येक 32-बिट का होता है।

16 राउंड्स का उपयोग: DES में 16 राउंड्स होते हैं। प्रत्येक राउंड के दौरान, राइट हाफ को एक फंक्शन के माध्यम से प्रोसेस किया जाता है और इसे लेफ्ट हाफ के साथ XOR किया जाता है। फिर लेफ्ट हाफ को राइट हाफ के स्थान पर रखा जाता है और प्रोसेस को 16 बार दोहराया जाता है।

फाइनल परम्यूटेशन (Final Permutation - FP): 16 राउंड्स के बाद, लेफ्ट और राइट हाफ को फिर से जोड़ा जाता है और अंतिम परम्यूटेशन (FP) लागू की जाती है, जिससे एन्क्रिप्टेड डेटा (साइफरटेक्स्ट) उत्पन्न होता है।

Uses & Importance of DES in Hindi | DES का महत्व और उपयोग :

DES का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों में किया जाता था:

वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions): बैंकों और वित्तीय संस्थानों में DES का उपयोग संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता था, जैसे क्रेडिट कार्ड डेटा और अन्य वित्तीय जानकारी।

सैन्य और सरकारी डेटा (Military and Government Data): DES को संवेदनशील सैन्य और सरकारी जानकारी की सुरक्षा के लिए भी अपनाया गया था, ताकि दुश्मन या हैकर संवेदनशील डेटा तक पहुंच न बना सके।

सुरक्षित संचार (Secure Communication): DES का उपयोग सुरक्षित संचार चैनल बनाने के लिए भी किया जाता था, ताकि ट्रांसमिट की जा रही जानकारी को कोई इंटरसेप्ट न कर सके।

Weakness of DES in Hindi | DES की कमजोरियाँ :

समय के साथ, DES को कुछ कमजोरियों के कारण असुरक्षित माना जाने लगा:

56-बिट कुंजी की लंबाई: DES की 56-बिट कुंजी की लंबाई अब आधुनिक मानकों के अनुसार बहुत छोटी मानी जाती है। इसे ब्रूट-फोर्स (brute-force) हमले द्वारा तोड़ा जा सकता है। 56-बिट की कुंजी के सभी संभावित संयोजनों को आज के तेज़ कंप्यूटरों द्वारा आसानी से आजमाया जा सकता है।

ब्रूट-फोर्स हमले: ब्रूट-फोर्स हमलों के माध्यम से, DES एन्क्रिप्शन को तोड़ा जा सकता है। 1990 के दशक में, एक विशेष मशीन DES को कुछ ही घंटों में तोड़ने में सक्षम थी, जिससे इसे असुरक्षित माना गया।

कुंजी रिपीटेशन: DES में कुछ खास स्थितियों में कुंजियों का दोहराव होने की संभावना होती है, जिससे इसे और भी कमजोर बनाया जा सकता है। कुंजी की पुनरावृत्ति के कारण डाटा की सुरक्षा कमजोर हो जाती है।


Development and end of DES in Hindi | DES का विकास और अंत :

DES की कमजोरियों को देखते हुए, इसे धीरे-धीरे अप्रचलित माना गया और इसकी जगह नए और अधिक सुरक्षित एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम ने ले ली। 2001 में, AES (Advanced Encryption Standard) को DES के स्थान पर अपनाया गया, जो कि अधिक सुरक्षित और तेज़ है।

Options of DES in Hindi | DES के विकल्प :

DES के कमजोर पड़ने के बाद, निम्नलिखित विकल्पों को अपनाया गया:

ट्रिपल DES (3DES): DES की कमजोरियों को दूर करने के लिए 3DES को विकसित किया गया। इसमें तीन बार DES एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता है ताकि सुरक्षा को और बढ़ाया जा सके। हालांकि 3DES ने सुरक्षा को बढ़ाया, लेकिन यह DES की तुलना में धीमा था।

AES (Advanced Encryption Standard): AES को 2001 में DES के प्रतिस्थापन के रूप में चुना गया। यह एक अधिक सुरक्षित एल्गोरिदम है, जो 128-बिट, 192-बिट, और 256-बिट की लंबाई वाली कुंजियों का उपयोग करता है। AES तेज और अधिक सुरक्षित है, और इसे आज के लगभग सभी क्षेत्रों में मानक के रूप में अपनाया गया है।

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