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Digital Signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर क्या है

Digital Signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर  क्या है :


  • डिजिटल सिग्नेचर एक क्रिप्टोग्राफिक तकनीक है जिसका उपयोग किसी डिजिटल दस्तावेज़ या संदेश की प्रामाणिकता, अखंडता और वैधता को सत्यापित करने के लिए किया जाता है। 
  • यह एक इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर है, जो यह सुनिश्चित करता है कि संदेश या दस्तावेज़ को उसके असली प्रेषक द्वारा भेजा गया है और इसमें किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। 
  • डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग आजकल विभिन्न क्षेत्रों में होता है, जैसे ई-मेल सिग्नेचर, सॉफ्टवेयर वितरण, वित्तीय लेनदेन और कानूनी दस्तावेज़ों के प्रमाणीकरण में।
  • डिजिटल सिग्नेचर आधुनिक डिजिटल संचार और लेनदेन के लिए एक अत्यधिक महत्वपूर्ण और विश्वसनीय उपकरण है। यह न केवल दस्तावेज़ों और संदेशों की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि यह प्रेषक की पहचान और डेटा की अखंडता को भी बनाए रखता है।
  • डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग लगातार बढ़ रहा है, विशेष रूप से ई-कॉमर्स, बैंकिंग, और कानूनी प्रक्रियाओं में, क्योंकि यह सुरक्षित, विश्वसनीय और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है।

Principle of digital signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर का सिद्धांत :

  • डिजिटल सिग्नेचर सार्वजनिक कुंजी क्रिप्टोग्राफी (Public Key Cryptography) पर आधारित है। इसमें दो प्रकार की कुंजियों का उपयोग होता है:
  • प्राइवेट की (Private Key): यह कुंजी सिग्नेचर करने वाले के पास होती है और इसे गुप्त रखा जाता है। इसका उपयोग डिजिटल सिग्नेचर बनाने के लिए किया जाता है।
  • पब्लिक की (Public Key): यह कुंजी सार्वजनिक होती है और इसे सभी के साथ साझा किया जा सकता है। इसका उपयोग सिग्नेचर के सत्यापन के लिए किया जाता है।
  • डिजिटल सिग्नेचर बनाने और सत्यापित करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया जाता है:

Process of Digital Signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर की प्रक्रिया :

1. सिग्नेचर निर्माण (Digital Signature Generation):

  • मैसेज या दस्तावेज़ का हैश करना: सबसे पहले, जिस मैसेज या दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करना है, उसका हैश वैल्यू निकाला जाता है। हैश वैल्यू मैसेज का एक संक्षिप्त रूप होता है, जो निश्चित लंबाई का होता है और किसी भी छोटे बदलाव से यह पूरी तरह बदल जाता है। इस प्रक्रिया में हैशिंग एल्गोरिदम (जैसे SHA-256) का उपयोग किया जाता है।
  • प्राइवेट की का उपयोग: अब प्राइवेट की का उपयोग करके इस हैश वैल्यू को एन्क्रिप्ट किया जाता है। इस एन्क्रिप्टेड हैश को ही डिजिटल सिग्नेचर कहा जाता है। यह सिग्नेचर संदेश के साथ भेजा जाता है।

2. सिग्नेचर सत्यापन (Digital Signature Verification):

  • मूल मैसेज का हैश निकालना: रिसीवर सबसे पहले प्राप्त हुए मैसेज या दस्तावेज़ का हैश वैल्यू निकालेगा, ठीक उसी तरह जैसे सिग्नेचर बनने के समय निकाला गया था।
  • पब्लिक की का उपयोग: फिर रिसीवर, प्रेषक की सार्वजनिक कुंजी का उपयोग करके प्राप्त किए गए डिजिटल सिग्नेचर को डिक्रिप्ट करता है। डिक्रिप्ट करने पर उसे मैसेज का मूल हैश वैल्यू प्राप्त होता है, जिसे प्राइवेट की से एन्क्रिप्ट किया गया था।
  • दोनों हैश वैल्यू की तुलना: अब रिसीवर दोनों हैश वैल्यू (मूल और डिक्रिप्ट की गई) की तुलना करता है। यदि दोनों वैल्यू समान होती हैं, तो इसका मतलब है कि मैसेज में कोई बदलाव नहीं किया गया है और यह असली प्रेषक द्वारा भेजा गया है।

Advantages  of digital signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर के लाभ :

  • प्रामाणिकता (Authenticity): डिजिटल सिग्नेचर यह सुनिश्चित करता है कि मैसेज या दस्तावेज़ को असली प्रेषक द्वारा भेजा गया है। पब्लिक की का उपयोग करके प्रेषक की पहचान सत्यापित की जा सकती है।
  • अखंडता (Integrity): डिजिटल सिग्नेचर यह सुनिश्चित करता है कि दस्तावेज़ या मैसेज को भेजने के बाद उसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। यदि मैसेज के किसी भी हिस्से में बदलाव किया जाता है, तो हैश वैल्यू बदल जाती है, जिससे यह पता चलता है कि डेटा से छेड़छाड़ की गई है।
  • अस्वीकरण (Non-repudiation): डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से यह साबित किया जा सकता है कि प्रेषक ने वास्तव में संदेश भेजा है, क्योंकि केवल उसी के पास प्राइवेट की होती है। इस तरह, प्रेषक यह दावा नहीं कर सकता कि उसने संदेश नहीं भेजा।
  • कानूनी मान्यता: कई देशों में डिजिटल सिग्नेचर को कानूनी मान्यता प्राप्त है और इसे इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ों और अनुबंधों के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है।

Uses of digital signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर के उपयोग :

  • ई-मेल सिग्नेचर: ई-मेल में डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि ई-मेल को असली प्रेषक द्वारा भेजा गया है और इसके कंटेंट से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है।
  • सॉफ्टवेयर वितरण: सॉफ्टवेयर कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर पर डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग करती हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सॉफ्टवेयर को बिना किसी बदलाव के वितरित किया गया है और वह विश्वसनीय है।
  • वित्तीय लेनदेन: बैंकिंग और अन्य वित्तीय सेवाओं में डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग लेन-देन की प्रामाणिकता और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
  • कानूनी दस्तावेज़: कानूनी अनुबंधों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों में डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग होता है, जिससे दस्तावेज़ की वैधता और अखंडता बनी रहती है।

Challenges of digital signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर की चुनौतियाँ :

  • प्राइवेट की की सुरक्षा: डिजिटल सिग्नेचर की सुरक्षा पूरी तरह से प्राइवेट की पर निर्भर करती है। यदि प्राइवेट की किसी के हाथ लग जाती है, तो वह सिग्नेचर को जाली बना सकता है। इसलिए प्राइवेट की की सुरक्षा अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
  • क्रिप्टोग्राफिक हमले: यदि क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम कमजोर होते हैं, तो हैकर हैश वैल्यू या एन्क्रिप्शन को तोड़ सकता है और संदेश की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
  • सर्टिफिकेट की आवश्यकता: डिजिटल सिग्नेचर के लिए डिजिटल सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है, जो प्रमाणित करता है कि पब्लिक की वास्तव में प्रेषक की है। इस सर्टिफिकेट की वैधता और भरोसेमंदता भी महत्वपूर्ण होती है।



In this Chapter

Digital Signature in Hindi | डिजिटल सिग्नेचर क्या है
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