BCA / B.Tech 20 min read

Private IPv4 Addressing in Hindi

Private IPv4 Addressing in Hindi | इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) एड्रेसिंग हिंदी में :


  • Private IPv4 Addressing इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) एड्रेसिंग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विशेष रूप से निजी नेटवर्क के भीतर डिवाइसों के बीच संचार के लिए उपयोग किया जाता है।
  •  ये एड्रेस इंटरनेट पर सीधे उपयोग नहीं किए जाते हैं और इन्हें सार्वजनिक इंटरनेट से जुड़ने के लिए नेटवर्क एड्रेस ट्रांसलेशन (NAT) जैसी तकनीकों का सहारा लेना पड़ता है। 
  • Private IPv4 Addressing का उपयोग बड़े नेटवर्कों में, जैसे घरों, कार्यालयों और संगठनों में किया जाता है, ताकि IP एड्रेस की खपत को नियंत्रित किया जा सके और सुरक्षा बढ़ाई जा सके।
  • Private IPv4 Addressing नेटवर्किंग का एक अनिवार्य हिस्सा है, खासकर छोटे और बड़े नेटवर्कों में आंतरिक संचार और सुरक्षा के लिए। 
  • इसके माध्यम से डिवाइसों को इंटरनेट पर सीधे बिना जोड़े ही एक-दूसरे से जोड़ा जा सकता है, और NAT के माध्यम से पब्लिक इंटरनेट से भी कनेक्शन बनाया जा सकता है। Private IP एड्रेसिंग IPv4 एड्रेस स्पेस की समस्या का आंशिक समाधान है और यह सुनिश्चित करता है कि नेटवर्किंग संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो।
Private IPv4 Addressing क्या है?

  • IPv4 में, IP एड्रेस स्पेस 32-बिट होता है, जो लगभग 4.3 अरब अद्वितीय IP एड्रेस प्रदान करता है। लेकिन, इंटरनेट के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण, IPv4 एड्रेस स्पेस धीरे-धीरे कम हो रहे थे। इस समस्या को हल करने के लिए, निजी IP एड्रेसिंग का एक सेट आवंटित किया गया है, 
  • जिसे किसी भी निजी नेटवर्क में इस्तेमाल किया जा सकता है। ये एड्रेस वैश्विक (पब्लिक) नेटवर्क में मान्य नहीं होते और इंटरनेट पर सीधे उपयोग नहीं किए जा सकते।

RFC 1918 (Request for Comments) के तहत तीन निजी IP एड्रेस ब्लॉक्स को निर्दिष्ट किया गया है, जो निम्नलिखित हैं:

Class A: 10.0.0.0 से 10.255.255.255
Class B: 172.16.0.0 से 172.31.255.255
Class C: 192.168.0.0 से 192.168.255.255

इन निजी एड्रेस ब्लॉक्स का उपयोग घरों, छोटे व्यवसायों, बड़े संगठनों, या अन्य प्रकार के स्थानीय नेटवर्कों में किया जाता है, जिनका इंटरनेट से कोई सीधा संपर्क नहीं होता।

Private IPv4 एड्रेसिंग की श्रेणियाँ :

1. Class A Private IP Addressing

  • IP रेंज: 10.0.0.0 से 10.255.255.255
  • सामान्य उपयोग: बड़े नेटवर्कों में
  • होस्ट्स की संख्या: 16,777,214 होस्ट्स

Class A निजी एड्रेस का उपयोग बड़े संगठनों या बड़े नेटवर्क में किया जाता है, जिनमें हजारों डिवाइस होते हैं। इस रेंज के तहत, 10.0.0.0 से 10.255.255.255 तक के एड्रेस उपलब्ध होते हैं। ये नेटवर्क में बड़ी संख्या में होस्ट्स को समर्थन देने के लिए डिजाइन किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर, बड़े मल्टीनेशनल कंपनियों या सरकार के संगठनों में Class A IP रेंज का इस्तेमाल किया जा सकता है।

2. Class B Private IP Addressing

  • IP रेंज: 172.16.0.0 से 172.31.255.255
  • सामान्य उपयोग: मीडियम साइज नेटवर्क में
  • होस्ट्स की संख्या: 1,048,576 होस्ट्स

Class B निजी IP एड्रेस का उपयोग मध्यम आकार के नेटवर्कों में किया जाता है, जैसे बड़े कॉलेज, कैंपस नेटवर्क, या सरकारी कार्यालय। इसमें 172.16.0.0 से 172.31.255.255 तक के एड्रेस होते हैं। Class B नेटवर्क बड़े संगठनात्मक सेटअप के लिए पर्याप्त संख्या में एड्रेस प्रदान करता है, लेकिन यह Class A की तुलना में छोटा होता है।

3. Class C Private IP Addressing

  • IP रेंज: 192.168.0.0 से 192.168.255.255
  • सामान्य उपयोग: छोटे नेटवर्क, घरों, और छोटे कार्यालयों में
  • होस्ट्स की संख्या: 65,536 होस्ट्स

Class C निजी IP एड्रेस का उपयोग छोटे नेटवर्क जैसे घर, छोटे व्यवसाय या छोटे कार्यालयों में किया जाता है। इसमें 192.168.0.0 से 192.168.255.255 तक के एड्रेस शामिल होते हैं। यह रेंज सबसे सामान्य है और इसे घरेलू राउटर्स में डिफ़ॉल्ट रूप से उपयोग किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, अधिकांश घरेलू नेटवर्क का IP एड्रेस 192.168.x.x होता है।

Private IPv4 एड्रेसिंग का उपयोग

Private IP एड्रेस इंटरनेट पर सीधे मान्य नहीं होते। इसका मतलब है कि इन एड्रेस को इंटरनेट के माध्यम से एक्सेस नहीं किया जा सकता। जब कोई डिवाइस निजी IP एड्रेस का उपयोग करता है और इंटरनेट पर किसी सर्वर से कनेक्ट करना चाहता है, तो नेटवर्क एड्रेस ट्रांसलेशन (NAT) का उपयोग किया जाता है, जिससे निजी IP को सार्वजनिक IP में परिवर्तित किया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर राउटर द्वारा की जाती है।

Private IP एड्रेसिंग के उपयोग के मुख्य उदाहरण:

  • घरेलू नेटवर्क: अधिकांश घरों में उपयोग किए जाने वाले वाई-फाई राउटर्स निजी IP एड्रेसिंग का उपयोग करते हैं, जैसे 192.168.x.x। घर में सभी डिवाइस (लैपटॉप, स्मार्टफोन, टैबलेट आदि) इस निजी नेटवर्क में आपस में कनेक्ट होते हैं।
  • कार्यालय नेटवर्क: छोटे और बड़े कार्यालयों में निजी IP एड्रेसिंग का उपयोग होता है ताकि डिवाइसों के बीच आंतरिक संचार किया जा सके। यह सुरक्षा को भी बढ़ाता है, क्योंकि ये एड्रेस इंटरनेट पर सीधे उपलब्ध नहीं होते।
  • LAN (Local Area Network): किसी भी लोकल एरिया नेटवर्क में निजी IP एड्रेसिंग का उपयोग किया जाता है। जैसे, किसी संगठन के भीतर सभी कंप्यूटर एक ही प्राइवेट IP रेंज में आते हैं ताकि आंतरिक रूप से डेटा ट्रांसफर हो सके।
  • सर्वर नेटवर्क: बड़ी कंपनियाँ अपने आंतरिक सर्वर को निजी IP एड्रेसिंग से जोड़ती हैं, ताकि बाहरी दुनिया से सीधे कनेक्ट न होकर सुरक्षा बढ़ाई जा सके।

Advantages of Private IPv4 Addressing in Hindi | Private IPv4 एड्रेसिंग के फायदे :

  • सुरक्षा: निजी IP एड्रेस इंटरनेट पर सीधे उपलब्ध नहीं होते, जिससे नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ती है। यह नेटवर्क को बाहरी हमलों से सुरक्षित रखने में मदद करता है।
  • IP एड्रेस की बचत: चूंकि निजी IP एड्रेस सार्वजनिक रूप से उपयोग नहीं किए जाते, इससे IPv4 के सार्वजनिक एड्रेस स्पेस की बचत होती है। बड़ी संख्या में डिवाइस निजी एड्रेस स्पेस में ही सीमित रह सकते हैं, जिससे IPv4 एड्रेस की खपत कम होती है।
  • लोकल नेटवर्क के लिए आदर्श: निजी IP एड्रेसिंग छोटे और बड़े नेटवर्कों में आंतरिक संचार के लिए आदर्श है, क्योंकि यह बिना सार्वजनिक इंटरनेट का उपयोग किए ही डिवाइसों को एक दूसरे से जोड़ने में सक्षम है।
  • NAT के साथ काम: NAT (Network Address Translation) तकनीक के साथ, निजी IP एड्रेसिंग का उपयोग इंटरनेट से कनेक्टिविटी के लिए भी किया जा सकता है। NAT निजी IP को एक सार्वजनिक IP में बदल देता है और इस तरह डिवाइस इंटरनेट पर डेटा भेज और प्राप्त कर सकता है।

Disadvantages of Private IPv4 Addressing in Hindi | Private IPv4 एड्रेसिंग की नुकसान :

  • इंटरनेट पर सीधा उपयोग नहीं: निजी IP एड्रेसिंग का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि ये इंटरनेट पर सीधे काम नहीं कर सकते। इन्हें पब्लिक IP में बदलने के लिए NAT या प्रॉक्सी सर्वर जैसी तकनीकों की आवश्यकता होती है।
  • सीमितता: NAT और निजी IP एड्रेसिंग के कारण, एक ही सार्वजनिक IP एड्रेस को कई डिवाइस साझा करते हैं, जिससे कई बार नेटवर्क पर लोड बढ़ सकता है और प्रदर्शन पर प्रभाव पड़ सकता है।
  • IPv4 एड्रेसिंग का समाप्त होना: हालाँकि निजी IP एड्रेसिंग IPv4 एड्रेस स्पेस की समस्या को हल करने में मदद करती है, लेकिन फिर भी IPv4 एड्रेसिंग सीमित है। यही कारण है कि IPv6 को विकसित किया गया है, जो एक बहुत बड़ा एड्रेस स्पेस प्रदान करता है।

Private IPv4 Addressing और NAT :

Private IPv4 एड्रेसिंग को NAT के साथ उपयोग करना नेटवर्किंग में एक सामान्य प्रथा है। NAT का उपयोग तब होता है जब कोई डिवाइस निजी IP एड्रेस का उपयोग करते हुए इंटरनेट से कनेक्ट होता है। राउटर या गेटवे NAT के माध्यम से निजी IP को एक सार्वजनिक IP में बदलता है ताकि इंटरनेट पर डेटा ट्रांसमिशन हो सके। NAT के कई प्रकार होते हैं, जैसे:

  • स्टैटिक NAT: एक निजी IP को एक निश्चित सार्वजनिक IP से जोड़ा जाता है।
  • डायनामिक NAT: यह सार्वजनिक IP एड्रेस के एक पूल का उपयोग करता है और जरूरत के अनुसार निजी IP को पब्लिक IP में बदलता है।
  • PAT (Port Address Translation): यह एक ही सार्वजनिक IP का उपयोग करते हुए विभिन्न डिवाइसों को इंटरनेट से जोड़ता है, हर डिवाइस के लिए अलग-अलग पोर्ट नंबर का उपयोग करते हुए।

In this Chapter

Private IPv4 Addressing in Hindi
Auto Configuration Anycast in Hindi
Modified EUI-64 in Hindi | Modified EUI-64 क्या है?
Architecture of Mobile Computing in Hindi
Wireless LAN in Hindi | Wireless LAN क्या है?
Wireless User Devices in Hindi
MAC Protocol in Hindi | MAC प्रोटोकॉल क्या है?
IEEE 802.11 in Hindi | IEEE 802.11 क्या है
Mobile IP in Hindi | Mobile IP हिंदी में
Wireless TCP IP in Hindi
Unicast & Multicast Communication in Hindi
Bluetooth in Hindi | Bluetooth क्या है?
NS2 & NAM in Hindi | NS2 और NAM क्या है?
Purpose & installation of NS2 & NAM in Hindi
Background of NS2 & NAM in Hindi
Architecture of NS2 & NAM in Hindi
Interface of OTcl & C++ in Hindi
Trace Files & Formats in Hindi
Protocol Support of NS2 in Hindi
Simulation Object of NS2 & NAM in Hindi
Basic Syntax of NS2 & NAM in Hindi
Node Creation of NS2 & NAM in Hindi
Running NS2 & NAM in Hindi
Finish Procedure NS2 & NAM in Hindi
Invoking external commands within NS2 in Hindi
Nodes & Agents of NS2 & NAM in Hindi
NS2 Commands in Hindi
Creating Links in Wired Network in Hindi
Setting Link Parameters in Hindi
Sending Traffics Through NS2 Links in Hindi
Routing Protocol Support of NS2 in Hindi
Scenarios in Hindi
Additional Parameters in Hindi
Setting node positions in Hindi
God object & topography in Hindi
Protocol Support in Hindi
Scenarios in Wireless Network in Hindi
Internet क्या है? Intranet और Extranet के बीच अंतर
इंटरनेट के प्रकार | Types of Internet in Hindi
OSI Model in Hindi - OSI मॉडल क्या है और इसकी लेयर हिंदी में
Computer Network (CN) All Important Questions and Answers in Hindi (MDSU)
BCA | Computer Network | 2025 Paper | MDSU Exam Paper
Importance of Layer Model in Hindi
Network Classification in Hindi
Network Topology in Hindi
Network Switching & Component in Hindi
Ethernet in Hindi
Token Ring in Hindi
Basic working & Cabling in Hindi
What is Computer in Hindi | कंप्यूटर क्या है?
Bridges in Hindi
Router in Hindi
Gateway in Hindi
Public & Private Network in Hindi
FDMA in Hindi
BCA | CN(Computer Network) Paper | MDSU 2023 Exam Paper
What is WWW in Hindi and Introduction of WWW
CDMA,SDMA,TDMA in Hindi
Personal communication system in Hindi | PCS क्या है
IPv4 in Hindi | IPv4 क्या है?
Subnetting IPv4 address in Hindi
Casting in Hindi | कास्टिंग हिंदी में
IPv4 Address Scheme in Hindi
IPv6 Addressing Scheme in Hindi
Types of IPv6 Addressing in Hindi