BCA / B.Tech 17 min read

Modified EUI-64 in Hindi | Modified EUI-64 क्या है?

Modified EUI-64 in Hindi | Modified EUI-64 क्या है ?


  • Modified EUI-64 तकनीक IPv6 नेटवर्क में ऑटोमेटिक और यूनिक एड्रेस जनरेशन के लिए एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है।
  •  यह 48-बिट MAC एड्रेस को 64-बिट इंटरफेस आइडेंटिफायर में बदलने के लिए उपयोग की जाती है, जिससे हर डिवाइस के लिए एक यूनिक IPv6 एड्रेस बनाया जा सके। 
  • हालांकि इसमें सुरक्षा और गोपनीयता से संबंधित कुछ चिंताएँ हो सकती हैं, लेकिन Privacy Extensions जैसी तकनीकों के माध्यम से इन्हें नियंत्रित किया जा सकता है। 
  • Modified EUI-64 तकनीक ने IPv6 नेटवर्क में ऑटो-कॉन्फ़िगरेशन को आसान और प्रभावी बना दिया है, जिससे बड़े नेटवर्कों का प्रबंधन और कुशल हो गया है।
  • Modified EUI-64 (Extended Unique Identifier-64) एक तकनीक है जिसका उपयोग IPv6 में ऑटो-कॉन्फ़िगरेशन (Auto-Configuration) के लिए किया जाता है।
  •  यह IPv6 एड्रेस को जनरेट करने के लिए नेटवर्क इंटरफेस के MAC (Media Access Control) एड्रेस का उपयोग करता है। IPv4 के मुकाबले IPv6 के एड्रेस स्पेस में अधिक एड्रेस होते हैं, इसलिए एक स्वचालित और 
  • अनोखे तरीके से एड्रेस असाइन करने के लिए Modified EUI-64 तकनीक का उपयोग किया जाता है। यह तकनीक लिंक-लोकल एड्रेस और अन्य प्रकार के एड्रेस को कॉन्फ़िगर करने के लिए आवश्यक होती है।
  • Modified EUI-64 का उपयोग मुख्यतः नेटवर्क इंटरफेस के लिए 64-बिट का इंटरफ़ेस आइडेंटिफायर (Interface Identifier) बनाने के लिए होता है, जो IPv6 एड्रेस के लिए आवश्यक होता है। 

इसे विस्तार से समझने के लिए पहले हमें IPv6 एड्रेसिंग और MAC एड्रेसिंग की कुछ मूलभूत जानकारियाँ लेनी होंगी।

Introduction of IPv6 Addressing in Hindi | IPv6 एड्रेसिंग की परिचय:

IPv6, IP एड्रेसिंग का अगला संस्करण है, जो IPv4 की सीमाओं को पार करता है। IPv6 एड्रेस 128-बिट लंबे होते हैं, जबकि IPv4 एड्रेस 32-बिट के होते हैं। IPv6 एड्रेस को 8 समूहों में विभाजित किया जाता है और हर समूह में 16-बिट होते हैं, जिसे हेक्साडेसिमल (Hexadecimal)
 में दर्शाया जाता है। IPv6 एड्रेस का प्रारूप इस प्रकार होता है:

2001:0db8:85a3:0000:0000:8a2e:0370:7334
IPv6 एड्रेस को दो भागों में विभाजित किया जाता है:

  • नेटवर्क प्रीफिक्स (Network Prefix): यह एड्रेस का पहला 64-बिट हिस्सा होता है, जो नेटवर्क को दर्शाता है।
  • इंटरफेस आइडेंटिफायर (Interface Identifier): यह दूसरा 64-बिट हिस्सा होता है, जो नेटवर्क के भीतर किसी विशेष डिवाइस या इंटरफेस को दर्शाता है।
  • इस 64-बिट इंटरफेस आइडेंटिफायर को Modified EUI-64 तकनीक के द्वारा जनरेट किया जाता है।

MAC एड्रेस क्या होता है?

  • MAC (Media Access Control) एड्रेस एक यूनिक एड्रेस होता है, जो नेटवर्क डिवाइस के हार्डवेयर में एम्बेडेड होता है। यह 48-बिट का होता है और हर नेटवर्क इंटरफेस कार्ड (NIC) या नेटवर्क उपकरण का एक यूनिक MAC एड्रेस होता है। MAC एड्रेस को हेक्साडेसिमल फॉर्मेट में दर्शाया जाता है, जैसे:

  • 00:1A:2B:3C:4D:5E
  • यह 6 ऑक्टेट्स (8-बिट्स के समूह) में विभाजित होता है, जिसमें पहले तीन ऑक्टेट्स OUI (Organizationally Unique Identifier) होते हैं, जो निर्माता (Manufacturer) को दर्शाते हैं, और अंतिम तीन ऑक्टेट्स डिवाइस को यूनिक आइडेंटिफाई करते हैं।

Modified EUI-64 तकनीक क्या है?

  • Modified EUI-64 एक ऐसी प्रक्रिया है जो 48-बिट MAC एड्रेस को 64-बिट के इंटरफेस आइडेंटिफायर में बदलने के लिए उपयोग की जाती है। चूंकि MAC एड्रेस केवल 48-बिट का होता है और हमें 64-बिट का इंटरफेस आइडेंटिफायर चाहिए, इसलिए Modified EUI-64 तकनीक का उपयोग करके हम इसे 64-बिट में परिवर्तित करते हैं।

यह प्रक्रिया निम्नलिखित चरणों में की जाती है:

Modified EUI-64 जनरेट करने की प्रक्रिया:

MAC एड्रेस को दो भागों में विभाजित करना:

  • सबसे पहले, 48-बिट MAC एड्रेस को दो भागों में विभाजित किया जाता है। पहले तीन ऑक्टेट्स (24-बिट्स) OUI होते हैं, और अंतिम तीन ऑक्टेट्स (24-बिट्स) डिवाइस आइडेंटिफिकेशन होते हैं।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए MAC एड्रेस 00:1A:2B:3C:4D:5E है। इसे इस प्रकार विभाजित किया जाएगा:
पहले तीन ऑक्टेट्स (OUI): 00:1A:2B
अंतिम तीन ऑक्टेट्स: 3C:4D:5E
फ्लिपिंग (उलटने) का उपयोग करना:

  • Modified EUI-64 में, OUI के पहले बाइट (पहले 8-बिट्स) के 7वें बिट को उलटा (Flip) किया जाता है। इस बिट को U/L बिट (Universal/Local bit) कहा जाता है। अगर यह बिट 0 है, तो इसका मतलब है कि एड्रेस यूनिवर्सल (Universal) है, और अगर यह 1 है, तो इसका मतलब है कि एड्रेस लोकल (Local) है। Modified EUI-64 में इसे उलटकर लोकल बिट बना दिया जाता है।
  • उदाहरण के लिए, MAC एड्रेस 00:1A:2B का बाइनरी फॉर्मेट होता है:

00000000 00011010 00101011
इसमें पहले बाइट का 7वां बिट 0 है, इसलिए इसे फ्लिप करके 1 बना दिया जाता है। नया बाइनरी फॉर्मेट होगा:

00000010 00011010 00101011
अब नया OUI 02:1A:2B बन जाता है।
FFFE को बीच में जोड़ना:

  • इसके बाद, OUI और डिवाइस आइडेंटिफिकेशन के बीच 16-बिट का एक मान FFFE जोड़ा जाता है। यह 16-बिट्स एड्रेस को 64-बिट्स में बदलने में मदद करते हैं।
  • तो, अब OUI 02:1A:2B और डिवाइस आइडेंटिफिकेशन 3C:4D:5E के बीच FFFE जोड़ा जाएगा, जिससे नया इंटरफेस आइडेंटिफायर बनेगा:

02:1A:2B:FF:FE:3C:4D:5E

नया 64-बिट इंटरफेस आइडेंटिफायर:

  • अंत में, Modified EUI-64 का उपयोग करके जनरेट किया गया 64-बिट इंटरफेस आइडेंटिफायर 02:1A:2B:FF:FE:3C:4D:5E होगा।
  • इस 64-बिट इंटरफेस आइडेंटिफायर का उपयोग IPv6 एड्रेस के होस्ट हिस्से के रूप में किया जाएगा।

Advantages & Uses of Modified EUI-64 in Hindi | Modified EUI-64 के उपयोग और लाभ:

  • ऑटो-कॉन्फ़िगरेशन: Modified EUI-64 IPv6 में Stateless Address Autoconfiguration (SLAAC) के लिए उपयोग किया जाता है, जिससे नेटवर्क डिवाइस स्वचालित रूप से अपना IPv6 एड्रेस जनरेट कर सकता है। यह बिना DHCP सर्वर के IPv6 एड्रेस असाइन करने का एक तरीका है।
  • यूनिक एड्रेस जनरेशन: Modified EUI-64 का उपयोग करके हर नेटवर्क डिवाइस के लिए एक यूनिक IPv6 एड्रेस जनरेट किया जाता है। MAC एड्रेस हर डिवाइस के लिए पहले से ही यूनिक होता है, और इसे 64-बिट में परिवर्तित करने से IPv6 नेटवर्क में एड्रेस क्लैश की संभावना बहुत कम हो जाती है।
  • कुशल एड्रेस असाइनमेंट: Modified EUI-64 तकनीक के कारण नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर को हर डिवाइस के लिए मैन्युअल रूप से IP एड्रेस असाइन करने की आवश्यकता नहीं होती। यह नेटवर्क मैनेजमेंट को आसान और कुशल बनाता है।

Modified EUI-64 के संभावित सुरक्षा चिंताएँ:

  • हालांकि Modified EUI-64 तकनीक IPv6 नेटवर्क में ऑटो-कॉन्फ़िगरेशन की सुविधा प्रदान करती है, लेकिन इसके साथ कुछ सुरक्षा चिंताएँ भी होती हैं। चूंकि यह एड्रेस डिवाइस के MAC एड्रेस पर आधारित होता है, इसलिए नेटवर्क एड्रेस से किसी डिवाइस की पहचान की जा सकती है।
  •  इससे ट्रैकिंग और गोपनीयता संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
  • इसीलिए IPv6 में गोपनीयता को बढ़ाने के लिए Privacy Extensions का उपयोग किया जाता है, जो इंटरफेस आइडेंटिफायर को रैंडमाइज करके डिवाइस की पहचान को छिपाते हैं।

In this Chapter

Modified EUI-64 in Hindi | Modified EUI-64 क्या है?
Auto Configuration Anycast in Hindi
Architecture of Mobile Computing in Hindi
Wireless LAN in Hindi | Wireless LAN क्या है?
Wireless User Devices in Hindi
MAC Protocol in Hindi | MAC प्रोटोकॉल क्या है?
IEEE 802.11 in Hindi | IEEE 802.11 क्या है
Mobile IP in Hindi | Mobile IP हिंदी में
Wireless TCP IP in Hindi
Unicast & Multicast Communication in Hindi
Bluetooth in Hindi | Bluetooth क्या है?
NS2 & NAM in Hindi | NS2 और NAM क्या है?
Purpose & installation of NS2 & NAM in Hindi
Background of NS2 & NAM in Hindi
Architecture of NS2 & NAM in Hindi
Interface of OTcl & C++ in Hindi
Trace Files & Formats in Hindi
Protocol Support of NS2 in Hindi
Simulation Object of NS2 & NAM in Hindi
Basic Syntax of NS2 & NAM in Hindi
Node Creation of NS2 & NAM in Hindi
Running NS2 & NAM in Hindi
Finish Procedure NS2 & NAM in Hindi
Invoking external commands within NS2 in Hindi
Nodes & Agents of NS2 & NAM in Hindi
NS2 Commands in Hindi
Creating Links in Wired Network in Hindi
Setting Link Parameters in Hindi
Sending Traffics Through NS2 Links in Hindi
Routing Protocol Support of NS2 in Hindi
Scenarios in Hindi
Additional Parameters in Hindi
Setting node positions in Hindi
God object & topography in Hindi
Protocol Support in Hindi
Scenarios in Wireless Network in Hindi
Internet क्या है? Intranet और Extranet के बीच अंतर
इंटरनेट के प्रकार | Types of Internet in Hindi
OSI Model in Hindi - OSI मॉडल क्या है और इसकी लेयर हिंदी में
Computer Network (CN) All Important Questions and Answers in Hindi (MDSU)
BCA | Computer Network | 2025 Paper | MDSU Exam Paper
Importance of Layer Model in Hindi
Network Classification in Hindi
Network Topology in Hindi
Network Switching & Component in Hindi
Ethernet in Hindi
Token Ring in Hindi
Basic working & Cabling in Hindi
What is Computer in Hindi | कंप्यूटर क्या है?
Bridges in Hindi
Router in Hindi
Gateway in Hindi
Public & Private Network in Hindi
FDMA in Hindi
BCA | CN(Computer Network) Paper | MDSU 2023 Exam Paper
What is WWW in Hindi and Introduction of WWW
CDMA,SDMA,TDMA in Hindi
Personal communication system in Hindi | PCS क्या है
IPv4 in Hindi | IPv4 क्या है?
Subnetting IPv4 address in Hindi
Casting in Hindi | कास्टिंग हिंदी में
Private IPv4 Addressing in Hindi
IPv4 Address Scheme in Hindi
IPv6 Addressing Scheme in Hindi
Types of IPv6 Addressing in Hindi