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Importance of Layer Model in Hindi

Importance of Computer network of Layer Model in Hindi | कंप्यूटर नेटवर्क में लेयर मॉडल का महत्व :


  • कंप्यूटर नेटवर्क में लेयर मॉडल का महत्व अत्यधिक होता है क्योंकि यह डेटा संचारण को सरल, सुव्यवस्थित और अधिक प्रभावी बनाता है। कंप्यूटर नेटवर्क में डेटा संचार प्रक्रिया काफी जटिल होती है, जिसमें कई कार्य और तकनीकी मुद्दे शामिल होते हैं। 
  • लेयर मॉडल इस प्रक्रिया को विभिन्न परतों (layers) में विभाजित करता है, जिससे प्रत्येक परत का एक विशेष कार्य होता है। इससे नेटवर्क डिज़ाइन, कार्यान्वयन, और समस्या निवारण (troubleshooting) आसान हो जाता है।
  • लेयर मॉडल के उपयोग से नेटवर्क संचार के जटिल कार्यों को आसान और व्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकता है। OSI और TCP/IP दोनों मॉडल डेटा को विभाजित करके संचार प्रक्रिया को प्रभावी और सुरक्षित बनाते हैं। 
  • इसके अलावा, यह नेटवर्क डिजाइनरों और इंजीनियरों को एक मानक फ्रेमवर्क प्रदान करता है, जिससे वे अपनी सेवाओं को अधिक सुलभ, संगठित और समस्या-मुक्त बना सकते हैं।
लेयर मॉडल का उद्देश्य:

  • मॉड्युलरिटी: लेयर मॉडल मॉड्यूलरिटी (modularity) प्रदान करता है, जहाँ हर लेयर एक निर्दिष्ट कार्य करती है। इससे किसी भी समस्या को समझना और हल करना आसान हो जाता है।
  • इंटरऑपरेबिलिटी: यह सुनिश्चित करता है कि विभिन्न विक्रेताओं के हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर एक दूसरे के साथ कार्य कर सकें।
  • मानकीकरण: यह संचार प्रक्रियाओं को मानकीकृत (standardized) करता है, जिससे अलग-अलग प्रकार के नेटवर्क सिस्टम भी एक दूसरे से संचार कर सकते हैं।
  • डिविजन ऑफ लैबर: हर लेयर अपने कार्य के लिए जिम्मेदार होती है, जिससे संपूर्ण नेटवर्क प्रक्रिया सुव्यवस्थित हो जाती है।

Types of layer model in Hindi | लेयर मॉडल के प्रकार :

कंप्यूटर नेटवर्क में दो मुख्य लेयर मॉडल प्रचलित हैं:


OSI (Open Systems Interconnection) मॉडल
TCP/IP मॉडल

1. OSI मॉडल (ओपन सिस्टम इंटरकनेक्शन मॉडल)

OSI मॉडल इंटरनेशनल ऑर्गेनाइज़ेशन फॉर स्टैंडर्डाइज़ेशन (ISO) द्वारा विकसित किया गया था। इस मॉडल में 7 लेयर होते हैं, जो इस प्रकार हैं:

फिजिकल लेयर (Physical Layer):

यह सबसे निचली लेयर होती है और इसका काम हार्डवेयर को नियंत्रित करना होता है।
उदाहरण: केबल, राउटर, स्विच, वाईफाई, फाइबर ऑप्टिक।

डेटा लिंक लेयर (Data Link Layer):

यह लेयर डेटा को फ्रेम्स (frames) में विभाजित करती है और इन्हें एरर फ्री (error-free) ट्रांसमिशन के लिए तैयार करती है।
उदाहरण: Ethernet, PPP, MAC address।

नेटवर्क लेयर (Network Layer):

यह लेयर डेटा पैकेट्स को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क तक पहुंचाने का काम करती है। इसका मुख्य कार्य राउटिंग (routing) होता है।
उदाहरण: IP address, Routers, IPv4, IPv6।

ट्रांसपोर्ट लेयर (Transport Layer):

यह लेयर एन्ड-टू-एन्ड कम्युनिकेशन (end-to-end communication) सुनिश्चित करती है। यह डेटा को सेगमेंट्स में विभाजित करती है।

उदाहरण: TCP, UDP।

सेशन लेयर (Session Layer):

यह लेयर दो डिवाइसेस के बीच सेशन बनाने, बनाए रखने, और समाप्त करने का काम करती है।

उदाहरण: NetBIOS, SAP।

प्रेजेंटेशन लेयर (Presentation Layer):

यह लेयर डेटा के फॉर्मेट और एन्कोडिंग/डीकोडिंग का कार्य करती है, ताकि एक सिस्टम का डेटा दूसरे सिस्टम पर सही तरीके से समझा जा सके।
उदाहरण: SSL, TLS, JPEG, GIF।

एप्लिकेशन लेयर (Application Layer):

यह लेयर सीधे यूजर से इंटरेक्शन करती है और एप्लिकेशन सेवाएं प्रदान करती है।
उदाहरण: HTTP, FTP, SMTP, DNS, POP3।

2. TCP/IP मॉडल

TCP/IP मॉडल इंटरनेट प्रोटोकॉल सूट (Internet Protocol Suite) पर आधारित है और यह आज के इंटरनेट में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। यह केवल 4 लेयर में विभाजित है:

नेटवर्क इंटरफेस लेयर (Network Interface Layer):

यह OSI मॉडल की फिजिकल और डेटा लिंक लेयर के बराबर होती है।

उदाहरण: Ethernet, Wi-Fi, Token Ring।

इंटरनेट लेयर (Internet Layer):

यह नेटवर्क लेयर के बराबर होती है और पैकेट्स को एक नेटवर्क से दूसरे नेटवर्क तक रूट करती है।

उदाहरण: IP, ICMP।

ट्रांसपोर्ट लेयर (Transport Layer):

यह OSI मॉडल की ट्रांसपोर्ट लेयर के बराबर होती है और डेटा को सेगमेंट्स में विभाजित करती है।
उदाहरण: TCP, UDP।

एप्लिकेशन लेयर (Application Layer):

यह OSI मॉडल की एप्लिकेशन, प्रेजेंटेशन और सेशन लेयर के बराबर होती है।

उदाहरण: HTTP, FTP, DNS, SMTP।

उदाहरण :

  • जब आप किसी वेबसाइट को ब्राउज़ करते हैं (जैसे कि www.example.com), आपका ब्राउज़र HTTP प्रोटोकॉल का उपयोग करता है, जो एप्लिकेशन लेयर में आता है।
  • HTTP सर्वर से डेटा TCP के माध्यम से ट्रांसपोर्ट लेयर पर भेजा जाता है।
  • TCP इस डेटा को सेगमेंट्स में विभाजित करता है और उसे IP के माध्यम से नेटवर्क लेयर पर भेजता है।
  • IP डेटा पैकेट्स को सही डिवाइस तक पहुंचाने के लिए राउटिंग का कार्य करता है, जो फिजिकल और डेटा लिंक लेयर के माध्यम से हार्डवेयर द्वारा पूरा किया जाता है।

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