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IPv6 Addressing Scheme in Hindi

IPv6 Addressing Scheme in Hindi | IPv6 एड्रेसिंग स्कीम हिंदी में :



IPv6 (इंटरनेट प्रोटोकॉल वर्शन 6) एक उन्नत इंटरनेट प्रोटोकॉल है जिसे IPv4 की सीमाओं को दूर करने और इंटरनेट पर बढ़ते एड्रेस की जरूरतों को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है। IPv6 का मुख्य उद्देश्य इंटरनेट पर उपलब्ध IP एड्रेस स्पेस को बढ़ाना है, 

ताकि अधिक से अधिक उपकरणों को इंटरनेट से जोड़ा जा सके। IPv6 में 128-बिट एड्रेस स्पेस का उपयोग होता है, जो इसे IPv4 की तुलना में कहीं अधिक एड्रेस प्रदान करने की क्षमता देता है। 

इस लेख में हम IPv6 एड्रेसिंग स्कीम, इसकी संरचना, प्रकार और इसके उपयोग के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

IPv6 की आवश्यकता क्यों पड़ी?

  • IPv4 में केवल 32-बिट का एड्रेस स्पेस होता है, जो लगभग 4.3 बिलियन (4,294,967,296) एड्रेस प्रदान करता है। लेकिन, आज के समय में इंटरनेट से जुड़े उपकरणों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जैसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, स्मार्ट डिवाइसेस, और IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) डिवाइसेस। 
  • इस बढ़ती संख्या के कारण IPv4 एड्रेस की कमी हो गई है। इस समस्या का समाधान करने के लिए IPv6 विकसित किया गया, जिसमें 128-बिट का एड्रेस स्पेस है। IPv6 में इतने अधिक एड्रेस हैं कि यह कई वर्षों तक इंटरनेट पर एड्रेस की कमी की समस्या को समाप्त कर देगा।

IPv6 एड्रेसिंग स्कीम की संरचना :

IPv6 एड्रेस 128-बिट का होता है और इसे आठ 16-बिट हेक्साडेसिमल ब्लॉक्स में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक ब्लॉक को कॉलन (:) द्वारा अलग किया जाता है। IPv6 एड्रेस को सामान्यतः 16-बाइट्स (128-बिट्स) के रूप में लिखा जाता है। इसे संक्षिप्त रूप में इस प्रकार लिखा जा सकता है:

2001:0db8:85a3:0000:0000:8a2e:0370:7334

इसमें:

  • प्रत्येक ब्लॉक 16-बिट्स का होता है, जिसे हेक्साडेसिमल फॉर्म में लिखा जाता है।
  • अगर एक या अधिक ब्लॉक में शून्य होते हैं, तो उन्हें संक्षिप्त रूप में लिखा जा सकता है। जैसे:
  • 2001:db8:85a3::8a2e:370:7334 (यहाँ बीच के शून्य ब्लॉक्स को छोड़ दिया गया है)
  • IPv6 एड्रेस की लंबाई 128-बिट होने के कारण यह IPv4 के मुकाबले कहीं अधिक एड्रेस स्पेस प्रदान करता है। इसका मतलब है कि IPv6 में लगभग 340,282,366,920,938,463,463,374,607,431,768,211,456 (340 अनडेसिलियन) एड्रेस हो सकते हैं।

Types of IPv6 in Hindi | IPv6 एड्रेस के प्रकार :

IPv6 में विभिन्न प्रकार के एड्रेस होते हैं, जिनका उपयोग अलग-अलग उद्देश्य के लिए किया जाता है। मुख्य रूप से IPv6 एड्रेस के तीन प्रकार होते हैं:

यूनिकास्ट एड्रेस (Unicast Address):

यूनिकास्ट एड्रेस एकल डिवाइस (होस्ट) को निर्दिष्ट करने के लिए उपयोग किया जाता है। जब एक पैकेट यूनिकास्ट एड्रेस पर भेजा जाता है, तो वह सीधे उस विशिष्ट डिवाइस पर जाता है।
यह IPv4 के यूनिकास्ट एड्रेस के समान कार्य करता है।

यूनिकास्ट एड्रेस के अंतर्गत कुछ उप-श्रेणियाँ होती हैं:

  • ग्लोबल यूनिकास्ट एड्रेस (Global Unicast Address): यह एक सार्वजनिक एड्रेस होता है जिसे इंटरनेट पर संचार के लिए उपयोग किया जाता है।
  • लिंक-लोकल एड्रेस (Link-Local Address): यह एड्रेस केवल एक ही नेटवर्क सेगमेंट (जैसे LAN) पर मान्य होता है और इसे रूटिंग के लिए उपयोग नहीं किया जाता।
  • यूनिकास्ट लोकल एड्रेस (Unique Local Address - ULA): यह निजी IPv6 एड्रेसिंग के लिए उपयोग किया जाता है, और यह इंटरनेट पर उपयोग नहीं होता।

मल्टीकास्ट एड्रेस (Multicast Address):

  • मल्टीकास्ट एड्रेस एक ही समय में कई डिवाइसों को डेटा भेजने के लिए उपयोग किया जाता है। जब किसी नेटवर्क में एक मल्टीकास्ट एड्रेस पर पैकेट भेजा जाता है, तो वह उस एड्रेस से जुड़े सभी डिवाइसों पर पहुँचता है।
  • IPv4 में ब्रॉडकास्टिंग का उपयोग किया जाता था, लेकिन IPv6 में ब्रॉडकास्टिंग को हटाकर मल्टीकास्टिंग का उपयोग किया गया है।

एनीकास्ट एड्रेस (Anycast Address):

  • एनीकास्ट एड्रेस का उपयोग एक ग्रुप के कई डिवाइसों को एक ही एड्रेस के माध्यम से डेटा भेजने के लिए किया जाता है, लेकिन यह पैकेट केवल उस डिवाइस को जाता है जो नेटवर्क के सबसे करीब होता है।
  • इसका उपयोग आमतौर पर लोड बैलेंसिंग और फेलओवर सेवाओं के लिए किया जाता है।

Formats of IPv6 Address (Addressing Scheme) in Hindi | IPv6 एड्रेस फॉर्मेट्स (एड्रेसिंग स्कीम) :

IPv6 एड्रेस को उनकी कार्यक्षमता और उपयोगिता के आधार पर विभिन्न फॉर्मेट्स में विभाजित किया जाता है। इसके मुख्य फॉर्मेट्स इस प्रकार हैं:

1. ग्लोबल यूनिकास्ट एड्रेस (Global Unicast Address):

  • ग्लोबल यूनिकास्ट एड्रेस IPv6 एड्रेसिंग में पब्लिक IP एड्रेस होते हैं, जो इंटरनेट पर उपयोग किए जाते हैं।
  • यह एड्रेस IPv4 के पब्लिक IP एड्रेस के समान होते हैं।
  • ग्लोबल यूनिकास्ट एड्रेस को IANA (Internet Assigned Numbers Authority) द्वारा असाइन किया जाता है।
  • उदाहरण: 2001:0db8::/32

2. लिंक-लोकल एड्रेस (Link-Local Address):

  • लिंक-लोकल एड्रेस का उपयोग केवल लोकल नेटवर्क के अंदर ही होता है, और इसे इंटरनेट पर रूट नहीं किया जा सकता।
  • यह एड्रेस तब असाइन किया जाता है जब कोई डिवाइस IPv6 नेटवर्क से कनेक्ट होता है और नेटवर्क पर संचार स्थापित करता है।
  • लिंक-लोकल एड्रेस FE80::/10 से शुरू होते हैं।
  • उदाहरण: FE80::1

3. यूनिकास्ट लोकल एड्रेस (Unique Local Address - ULA):

  • यह एड्रेस IPv6 नेटवर्क के भीतर निजी संचार के लिए उपयोग किया जाता है, और इसे इंटरनेट पर उपयोग नहीं किया जाता।
  • यह IPv4 के निजी एड्रेस (जैसे 192.168.x.x) के समान होता है।
  • ULA एड्रेस FC00::/7 से शुरू होते हैं।
  • उदाहरण: FD00::1

4. मल्टीकास्ट एड्रेस (Multicast Address):

  • मल्टीकास्ट एड्रेस IPv6 नेटवर्क में एक ही समय में कई डिवाइसों को डेटा भेजने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
  • मल्टीकास्ट एड्रेस FF00::/8 से शुरू होते हैं।
  • उदाहरण: FF02::1

5. एनीकास्ट एड्रेस (Anycast Address):

  • एनीकास्ट एड्रेस IPv6 नेटवर्क में एक समूह के कई डिवाइसों को डेटा भेजने के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन डेटा केवल सबसे नजदीकी डिवाइस को जाता है।
  • एनीकास्ट एड्रेस के लिए कोई विशेष प्रारूप नहीं होता है। यह यूनिकास्ट एड्रेस की तरह होता है, लेकिन इसे नेटवर्क में कई डिवाइसों पर कॉन्फ़िगर किया जाता है।

IPv6 एड्रेस को संक्षिप्त कैसे किया जाता है?

  • IPv6 एड्रेस को अक्सर लंबा और कठिन माना जाता है, इसलिए इसे संक्षिप्त रूप में लिखा जा सकता है। IPv6 एड्रेस को संक्षिप्त करने के कुछ नियम इस प्रकार हैं:
  • लीडिंग जीरो को हटाना: किसी भी ब्लॉक के आगे लगे हुए शून्य को हटाया जा सकता है।

उदाहरण: 2001:0db8:0000:0000:0000:ff00:0042:8329 को 2001:db8::ff00:42:8329 लिखा जा सकता है।
डबल कॉलन (::) का उपयोग: एक से अधिक शून्य ब्लॉक्स को दर्शाने के लिए डबल कॉलन (::) का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, इसे एक एड्रेस में केवल एक बार ही उपयोग किया जा सकता है।

उदाहरण: 2001:0db8:0000:0000:0000:ff00:0042:8329 को 2001:db8::ff00:42:8329 लिखा जा सकता है।

Advantages of IPv6 in Hindi | IPv6 के लाभ :

IPv6 के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

  • विस्तृत एड्रेस स्पेस: IPv6 में 128-बिट एड्रेस स्पेस होता है, जिससे यह IPv4 की तुलना में कई गुणा अधिक IP एड्रेस प्रदान कर सकता है।
  • ऑटो-कॉन्फ़िगरेशन: IPv6 में लिंक-लोकल एड्रेस के माध्यम से ऑटो-कॉन्फ़िगरेशन की सुविधा होती है, जिससे डिवाइस बिना मैनुअल कॉन्फ़िगरेशन के नेटवर्क से कनेक्ट हो सकते हैं।
  • मल्टीकास्ट और एनीकास्ट: IPv6 में ब्रॉडकास्टिंग को हटाकर मल्टीकास्ट और एनीकास्ट का उपयोग किया जाता है, जिससे नेटवर्क की दक्षता बढ़ती है।
  • बिल्ट-इन सिक्योरिटी: IPv6 में IPsec (Internet Protocol Security) की डिफॉल्ट सपोर्ट होती है, जो नेटवर्क संचार को सुरक्षित बनाती है।
  • सरल हेडर संरचना: IPv6 में हेडर संरचना को सरल किया गया है, जिससे पैकेट प्रोसेसिंग तेज और प्रभावी होती है।


In this Chapter

IPv6 Addressing Scheme in Hindi
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