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Bridges in Hindi

Bridge in Computer Network in Hindi | कंप्यूटर नेटवर्क में ब्रिज हिंदी में :


  • ब्रिज (Bridge) कंप्यूटर नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण उपकरण है जिसका उपयोग नेटवर्क सेगमेंट को जोड़ने और डेटा ट्रांसमिशन को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है। यह दो या दो से अधिक लोकल एरिया नेटवर्क (LANs) को जोड़ता है ताकि वे एक बड़े नेटवर्क की तरह काम कर सकें। 
  • ब्रिज नेटवर्क के विभिन्न भागों के बीच डेटा के ट्रांसफर को नियंत्रित करता है और नेटवर्क के समग्र प्रदर्शन में सुधार करता है। इस लेख में, हम ब्रिज के कार्य, प्रकार, लाभ, सीमाएं और इसके उपयोग पर विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे।
  • ब्रिज एक महत्वपूर्ण नेटवर्किंग डिवाइस है जो छोटे और मध्यम आकार के नेटवर्क में डेटा ट्रांसमिशन को सुचारू और व्यवस्थित करता है। यह नेटवर्क के ट्रैफ़िक को नियंत्रित करने, टकराव को कम करने और नेटवर्क की समग्र गति में सुधार करने में सहायक होता है। 
  • हालाँकि, बड़े और जटिल नेटवर्क के लिए स्विच और राउटर जैसे उपकरण अधिक प्रभावी हो सकते हैं। ब्रिज की सीमाओं के बावजूद, यह नेटवर्किंग की दुनिया में एक महत्वपूर्ण उपकरण बना हुआ है, खासकर जहाँ छोटे नेटवर्क का संचालन होता है।

Introduction Bridge in Computer Network in Hindi | ब्रिज का परिचय:

  • ब्रिज नेटवर्क उपकरणों के बीच डेटा के ट्रांसमिशन का प्रबंधन करता है। इसका मुख्य कार्य नेटवर्क को छोटे, प्रबंधनीय भागों (सेगमेंट्स) में विभाजित करना और केवल आवश्यक डेटा को संबंधित सेगमेंट में भेजना होता है।
  •  यह उपकरण OSI मॉडल की डेटा लिंक लेयर (Layer 2) पर काम करता है और MAC एड्रेस का उपयोग करके डिवाइसों के बीच डेटा ट्रांसफर का प्रबंधन करता है।
  • ब्रिज नेटवर्क ट्रैफ़िक को नियंत्रित करता है और सुनिश्चित करता है कि एक सेगमेंट से आने वाला डेटा दूसरे सेगमेंट में तभी पहुंचे, जब वह आवश्यक हो। इससे नेटवर्क पर अनावश्यक ट्रैफ़िक कम हो जाता है और ट्रांसमिशन की गति में सुधार होता है।

Work of Bridge in Computer Network in Hindi | ब्रिज की कार्यप्रणाली:

ब्रिज का काम डेटा पैकेट्स को पढ़ना और उन्हें सही नेटवर्क सेगमेंट तक पहुंचाना है। इसकी कार्यप्रणाली इस प्रकार है:

  • डेटा पैकेट का निरीक्षण: जब ब्रिज को एक डेटा पैकेट प्राप्त होता है, तो वह पैकेट में दिए गए गंतव्य MAC एड्रेस को पढ़ता है।
  • सेगमेंट चयन: ब्रिज यह तय करता है कि गंतव्य एड्रेस किस नेटवर्क सेगमेंट में स्थित है। यदि वह एड्रेस उसी सेगमेंट में होता है जहाँ से डेटा आया है, तो ब्रिज उस पैकेट को फ़िल्टर कर देता है और आगे नहीं भेजता। लेकिन यदि गंतव्य एड्रेस दूसरे सेगमेंट में होता है, तो ब्रिज उस पैकेट को उस सेगमेंट में भेज देता है।
  • ट्रांसमिशन: ब्रिज पैकेट को सही सेगमेंट में भेजता है, जिससे डेटा केवल उन उपकरणों तक पहुंचता है, जिन्हें इसकी आवश्यकता होती है, और बाकी नेटवर्क पर ट्रैफ़िक नहीं बढ़ता।

Types of Bridge in Computer Network in Hindi | ब्रिज के प्रकार:

ब्रिज मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं, जो उनके कार्य और उपयोग के आधार पर भिन्न होते हैं:

  •  साधारण ब्रिज (Simple Bridge): साधारण ब्रिज सबसे बुनियादी प्रकार का ब्रिज है। यह दो नेटवर्क सेगमेंट्स को जोड़ता है और MAC एड्रेस का उपयोग करके डेटा को फ़िल्टर करता है। यह डेटा ट्रांसफर को नियंत्रित करने में मदद करता है, लेकिन इसमें उन्नत कार्यक्षमताएँ नहीं होती हैं।
  •  मल्टीपोर्ट ब्रिज (Multiport Bridge): मल्टीपोर्ट ब्रिज एक साथ कई नेटवर्क सेगमेंट्स को जोड़ सकता है। इसमें कई पोर्ट होते हैं, जिससे यह विभिन्न नेटवर्क्स के बीच डेटा को ट्रांसफर और फ़िल्टर करने की क्षमता रखता है। यह बड़े नेटवर्क सेटअप्स के लिए उपयोगी होता है।
  •  पारदर्शी ब्रिज (Transparent Bridge): पारदर्शी ब्रिज नेटवर्क में मौजूद होता है, लेकिन उपयोगकर्ताओं के लिए यह अदृश्य होता है। यह बिना किसी कॉन्फ़िगरेशन के काम करता है और स्वचालित रूप से नेटवर्क पर डिवाइसों के MAC एड्रेस को सीखता है और उसी आधार पर डेटा को फ़िल्टर करता है।

Advantages of Bridge in Computer Network in Hindi | ब्रिज के लाभ:

  •  नेटवर्क सेगमेंटेशन: ब्रिज नेटवर्क को छोटे सेगमेंट्स में विभाजित करता है। यह नेटवर्क ट्रैफ़िक को नियंत्रित करता है और अनावश्यक ट्रैफ़िक को कम करता है, जिससे नेटवर्क की समग्र प्रदर्शन क्षमता में वृद्धि होती है।
  •  डेटा ट्रांसफर में सुधार: ब्रिज केवल उन डेटा पैकेट्स को फ़ॉरवर्ड करता है, जिन्हें आवश्यक सेगमेंट में भेजने की आवश्यकता होती है। इससे नेटवर्क पर टकराव (Collision) की संभावना कम होती है और ट्रांसमिशन की गति बढ़ जाती है।
  •  कम लागत: ब्रिज का उपयोग बड़े नेटवर्क को छोटे भागों में विभाजित करने के लिए किया जाता है, जिससे महंगे उपकरणों की आवश्यकता कम हो जाती है। यह अन्य नेटवर्क डिवाइसों जैसे राउटर की तुलना में कम लागत पर उपलब्ध होता है।
  •  सुरक्षित नेटवर्किंग: ब्रिज नेटवर्क के प्रत्येक सेगमेंट के बीच डेटा के प्रवाह को नियंत्रित करता है, जिससे अनधिकृत डेटा ट्रांसमिशन की संभावना कम होती है। यह नेटवर्क सुरक्षा में भी सहायक होता है।

Disadvantages of Bridge in Computer Network in Hindi | ब्रिज की सीमाएँ:

  •  सीमित ट्रैफ़िक प्रबंधन: हालांकि ब्रिज ट्रैफ़िक को फ़िल्टर करता है, लेकिन यह बड़े और जटिल नेटवर्क पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकता है। यह केवल MAC एड्रेस के आधार पर फ़िल्टरिंग करता है, और इसके पास IP लेयर की सूचनाओं को प्रबंधित करने की क्षमता नहीं होती है।
  •  धीमी डेटा गति : ब्रिज के माध्यम से डेटा ट्रांसमिशन धीमा हो सकता है, खासकर जब बहुत सारे नेटवर्क सेगमेंट जुड़े होते हैं। इससे नेटवर्क की गति में कमी आ सकती है, विशेषकर तब जब कई डिवाइस एक साथ डेटा भेज रहे हों।
  •  व्यापक नेटवर्क के लिए अनुपयुक्त: ब्रिज का उपयोग छोटे या मध्यम आकार के नेटवर्क में बेहतर होता है। बड़े और व्यापक नेटवर्क में, जैसे कि वाइड एरिया नेटवर्क (WAN), ब्रिज उतना प्रभावी नहीं होता। बड़े नेटवर्क के लिए राउटर या स्विच का उपयोग अधिक उपयुक्त होता है।

 Uses of Bridge in Computer Network in Hindi | ब्रिज का उपयोग:

ब्रिज का उपयोग विभिन्न प्रकार के नेटवर्क सेटअप्स में किया जा सकता है:

  • घर और छोटे व्यवसायों में: घर और छोटे व्यवसायों के लिए, जहां कुछ कंप्यूटर और डिवाइस जुड़े होते हैं, ब्रिज का उपयोग प्रभावी हो सकता है। यह कम लागत में नेटवर्क ट्रैफ़िक को प्रबंधित करने में मदद करता है।
  • कॉर्पोरेट नेटवर्क में: बड़े व्यवसायों में, जहाँ कई विभागों के बीच नेटवर्किंग की आवश्यकता होती है, ब्रिज का उपयोग नेटवर्क सेगमेंट को विभाजित करने के लिए किया जाता है।
  • लोकल एरिया नेटवर्क (LAN): LAN के भीतर ब्रिज का उपयोग विभिन्न कार्यस्थलों को जोड़ने और डेटा ट्रांसमिशन को प्रबंधित करने के लिए किया जाता है।
ब्रिज और अन्य नेटवर्क डिवाइसों की तुलना:

ब्रिज की तुलना स्विच और राउटर जैसे अन्य नेटवर्किंग उपकरणों से की जा सकती है:

  • ब्रिज बनाम स्विच: स्विच एक उन्नत डिवाइस है जो कई पोर्ट्स के माध्यम से विभिन्न नेटवर्क सेगमेंट को जोड़ता है। स्विच अधिक तेज़ और प्रभावी डेटा ट्रांसमिशन करता है और प्रत्येक डिवाइस के MAC एड्रेस को अलग-अलग पोर्ट्स पर याद रखता है, जबकि ब्रिज में यह क्षमता सीमित होती है।
  • ब्रिज बनाम राउटर: राउटर नेटवर्क की IP लेयर पर काम करता है और विभिन्न नेटवर्क्स के बीच डेटा को मार्गदर्शित करता है। राउटर बड़े और जटिल नेटवर्क्स के लिए उपयुक्त होते हैं, जबकि ब्रिज छोटे नेटवर्क्स में उपयोगी होते हैं।

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