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Types of IPv6 Addressing in Hindi

Types of IPv6 Addressing in Hindi | IPv6 एड्रेसिंग प्रकार :


  • IPv6 एड्रेसिंग प्रकारों में यूनिकास्ट, मल्टीकास्ट, और एनीकास्ट जैसे विकल्प होते हैं, जो नेटवर्क में विभिन्न प्रकार के संचार के लिए उपयोग किए जाते हैं। 
  • हर प्रकार की एड्रेसिंग का अपना विशेष उपयोग होता है, और यह सुनिश्चित करता है कि डेटा को सही स्थान पर, सही समय पर, और सही तरीके से पहुँचाया जा सके। 
  • IPv6 में उपलब्ध एड्रेस स्पेस और उन्नत एड्रेसिंग तकनीकें इसे भविष्य के इंटरनेट के लिए अनिवार्य बनाती हैं।
  • IPv6 एड्रेसिंग प्रकार (Types of IPv6 Addressing) इंटरनेट प्रोटोकॉल के छठे संस्करण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। IPv6, IPv4 के उत्तराधिकारी के रूप में विकसित हुआ है और यह नेटवर्किंग जगत में अधिक एड्रेस स्पेस और बेहतर सुविधाएँ प्रदान करता है। 
  • IPv6 एड्रेसिंग सिस्टम में कई प्रकार की एड्रेसिंग विधियाँ होती हैं, जिनका उपयोग नेटवर्क में विभिन्न प्रकार के संचार के लिए किया जाता है। 

IPv6 में मुख्य रूप से तीन प्रकार के एड्रेसिंग का उपयोग किया जाता है:

  • यूनिकास्ट (Unicast)
  • मल्टीकास्ट (Multicast)
  • एनीकास्ट (Anycast)

इन सभी एड्रेसिंग प्रकारों का विशेष उपयोग होता है और ये नेटवर्क के विभिन्न भागों में डेटा भेजने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

1. यूनिकास्ट (Unicast Addressing)

यूनिकास्ट एड्रेसिंग में डेटा एक स्रोत (Source) से एक गंतव्य (Destination) तक भेजा जाता है। इसका उपयोग एक-से-एक (One-to-One) संचार के लिए किया जाता है, जहाँ डेटा पैकेट एक विशेष डिवाइस को भेजे जाते हैं। यूनिकास्ट एड्रेसिंग में कई उप-प्रकार होते हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

a. ग्लोबल यूनिकास्ट एड्रेस (Global Unicast Address)

  • विवरण: ग्लोबल यूनिकास्ट एड्रेस IPv6 का सबसे सामान्य प्रकार का एड्रेस है, जो इंटरनेट पर उपयोग किया जाता है। यह IPv4 के पब्लिक IP एड्रेस के समान है और यह इंटरनेट पर किसी भी डिवाइस के साथ संचार करने के लिए वैध होता है।
  • एड्रेस प्रारूप: ग्लोबल यूनिकास्ट एड्रेस की शुरुआत में 2000::/3 से होता है, जिसका मतलब है कि यह एड्रेस स्पेस 2000 से लेकर 3FFF तक है।
  • उपयोग: यह एड्रेसिंग बड़े नेटवर्कों में उपयोग की जाती है जहाँ नेटवर्क से बाहर के डिवाइसों के साथ संचार करना होता है।

b. लिंक-लोकल एड्रेस (Link-Local Address)

  • विवरण: लिंक-लोकल एड्रेस का उपयोग नेटवर्क के भीतर स्थानीय संचार के लिए किया जाता है। ये एड्रेस उस नेटवर्क से बाहर उपयोग नहीं किए जा सकते और इनका उपयोग केवल उस लिंक पर सीमित होता है, जिससे डिवाइस जुड़े होते हैं।
  • एड्रेस प्रारूप: लिंक-लोकल एड्रेस FE80::/10 से शुरू होते हैं, जिसका मतलब है कि यह FE80 से FEBF तक के रेंज में होते हैं।
  • उपयोग: लिंक-लोकल एड्रेस का उपयोग डिवाइसों के बीच स्थानीय संचार, राउटर के कॉन्फ़िगरेशन और स्वचालित पता असाइनमेंट के लिए किया जाता है।

c. यूनिकास्ट एड्रेस का स्वचालित कॉन्फ़िगरेशन (Stateless Address Autoconfiguration - SLAAC)

  • विवरण: SLAAC एक प्रक्रिया है जिससे IPv6 नेटवर्क पर डिवाइस स्वयं ही अपने एड्रेस को स्वचालित रूप से कॉन्फ़िगर कर सकते हैं। डिवाइस स्वयं ही अपना लिंक-लोकल एड्रेस और ग्लोबल यूनिकास्ट एड्रेस बनाते हैं।
  • उपयोग: यह तकनीक नेटवर्क में ऑटोमेशन बढ़ाने के लिए बहुत उपयोगी है, क्योंकि इसमें DHCP सर्वर की आवश्यकता नहीं होती।

d. यूनिकास्ट एड्रेस का सोलिटेड नोड मल्टीकास्ट एड्रेस (Solicited-Node Multicast Address)

  • विवरण: यह एड्रेस IPv6 नेटवर्क में Neighbor Discovery Protocol (NDP) के तहत नेटवर्क में जुड़े अन्य डिवाइसों को खोजने के लिए उपयोग होता है। प्रत्येक यूनिकास्ट एड्रेस के लिए एक सोलिटेड-नोड मल्टीकास्ट एड्रेस जुड़ा होता है।
  • उपयोग: इसका उपयोग डुप्लिकेट एड्रेस डिटेक्शन (Duplicate Address Detection) और नेटवर्क पर पड़ोसी डिवाइसों के साथ संचार के लिए किया जाता है।

2. मल्टीकास्ट (Multicast Addressing)

मल्टीकास्ट एड्रेसिंग का उपयोग एक स्रोत से एक समूह (Group) में कई डिवाइसों को डेटा भेजने के लिए किया जाता है। इसे एक-से-कई संचार (One-to-Many Communication) कहा जाता है। IPv6 में मल्टीकास्ट एड्रेसिंग का उपयोग IPv4 की तुलना में बहुत अधिक है क्योंकि यह नेटवर्क संसाधनों का कुशल उपयोग करता है।

a. मल्टीकास्ट एड्रेस प्रारूप (Multicast Address Format)

IPv6 में मल्टीकास्ट एड्रेस की शुरुआत FF00::/8 से होती है, जहाँ "FF" एड्रेस को मल्टीकास्ट एड्रेस के रूप में इंगित करता है। इसके बाद फ्लैग्स और स्कोप (Scope) का निर्धारण किया जाता है, जो यह बताता है कि मल्टीकास्ट पैकेट किस दायरे में भेजा जाएगा।

b. मल्टीकास्ट के महत्वपूर्ण स्कोप (Scopes) और फ्लैग्स

स्कोप: मल्टीकास्ट एड्रेस के स्कोप का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि पैकेट किस स्तर पर भेजे जाएंगे। स्कोप के उदाहरण:

  • 1: नोड-लोकल (Node-Local), यानी पैकेट केवल उस डिवाइस तक पहुंचेगा जो इसे भेज रहा है।
  • 2: लिंक-लोकल (Link-Local), यानी पैकेट केवल उसी लिंक (नेटवर्क सेगमेंट) पर भेजा जाएगा।
  • 5 या 8: साइट-लोकल (Site-Local) या ऑर्गनाइजेशन-लोकल (Organization-Local), जहाँ पैकेट एक विशेष साइट या संगठन के भीतर ही फैलाया जाएगा।
  • E: ग्लोबल (Global), यानी पैकेट पूरे इंटरनेट पर फैलाया जा सकता है।

c. उपयोग के क्षेत्र

मल्टीकास्ट एड्रेस का उपयोग विभिन्न नेटवर्किंग एप्लिकेशनों में किया जाता है, जैसे:

  • नेटवर्किंग प्रोटोकॉल्स: मल्टीकास्ट का उपयोग IPv6 में राउटर और डिवाइसों के बीच संचार के लिए किया जाता है, खासकर Neighbor Discovery Protocol (NDP) और राउटर विज्ञापन में।
  • विस्तृत संचार: मल्टीकास्ट एड्रेस का उपयोग बड़े नेटवर्क में लाइव डेटा ट्रांसमिशन के लिए किया जाता है, जैसे वीडियो स्ट्रीमिंग, वेबिनार्स, ऑनलाइन गेमिंग, आदि।

3. एनीकास्ट (Anycast Addressing)

एनीकास्ट एड्रेसिंग एक विशेष प्रकार की एड्रेसिंग है, जहाँ एक ही एड्रेस कई डिवाइसों को असाइन किया जाता है, और डेटा पैकेट को सबसे निकटतम या सबसे तेज उपलब्ध डिवाइस तक भेजा जाता है। यह एक-से-निकटतम संचार (One-to-Nearest Communication) का उदाहरण है।

a. एनीकास्ट एड्रेस की विशेषताएँ

  • विवरण: एनीकास्ट एड्रेस को एक ही IP एड्रेस कई स्थानों पर असाइन किया जा सकता है, और जब भी कोई डिवाइस डेटा भेजता है, तो नेटवर्क सबसे निकटतम गंतव्य (Shortest Path) का चुनाव करता है।
  • उपयोग: एनीकास्ट एड्रेसिंग का उपयोग मुख्य रूप से नेटवर्क ऑप्टिमाइजेशन, कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN), और DNS सर्वर जैसी सेवाओं में किया जाता है, जहाँ डेटा को सबसे निकटतम सर्वर तक भेजा जाता है।

b. उपयोग के उदाहरण

  • DNS सर्वर: DNS (Domain Name System) सर्वर एनीकास्ट एड्रेसिंग का उपयोग करते हैं ताकि उपयोगकर्ताओं के DNS क्वेरी का जवाब सबसे निकटतम DNS सर्वर से मिले।
  • कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क (CDN): एनीकास्ट का उपयोग कंटेंट डिलीवरी नेटवर्क्स में किया जाता है ताकि उपयोगकर्ता जिस स्थान से कनेक्ट हो रहे हैं, उसे सबसे निकटतम सर्वर से कंटेंट प्राप्त हो सके, जिससे विलंबता (Latency) कम होती है।

Advantages of IPv6 Addressing in Hindi | IPv6 एड्रेसिंग के लाभ :

IPv6 एड्रेसिंग में कई नए और उन्नत फीचर्स होते हैं जो इसे IPv4 से बेहतर बनाते हैं:

  • विशाल एड्रेस स्पेस: IPv6 में 128-बिट एड्रेस स्पेस है, जो IPv4 के 32-बिट एड्रेस स्पेस की तुलना में बहुत अधिक है। इससे अरबों नए IP एड्रेस उपलब्ध हो जाते हैं।
  • ऑटोमेटिक कॉन्फ़िगरेशन: IPv6 में SLAAC (Stateless Address Autoconfiguration) जैसी तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे डिवाइस स्वयं ही अपने एड्रेस को कॉन्फ़िगर कर सकते हैं।
  • बेहतर मल्टीकास्टिंग: IPv6 में मल्टीकास्ट एड्रेसिंग को विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है ताकि नेटवर्क में ब्रॉडकास्टिंग की आवश्यकता को समाप्त किया जा सके, जिससे नेटवर्क अधिक कुशल हो जाता है।
  • सुरक्षा: IPv6 में IPsec (Internet Protocol Security) अंतर्निहित है, जो नेटवर्किंग संचार को सुरक्षित बनाता है।
  • एनीकास्ट सपोर्ट: IPv6 में एनीकास्ट सपोर्ट IPv4 से बेहतर है, जो नेटवर्क की गति और प्रदर्शन को बढ़ाता है।

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