BCA / B.Tech 17 min read

IPv4 in Hindi | IPv4 क्या है?

IPv4 in Hindi | IPv4 क्या है?


  • IPv4 (Internet Protocol Version 4) इंटरनेट प्रोटोकॉल का चौथा संस्करण है, जो इंटरनेट पर डिवाइसों के बीच डेटा ट्रांसमिशन को सक्षम करने के लिए सबसे व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला प्रोटोकॉल है। 
  • यह नेटवर्क की सबसे बुनियादी तकनीकों में से एक है, और इसका उपयोग नेटवर्किंग में कई वर्षों से किया जा रहा है। IPv4 आज भी अधिकांश नेटवर्कों में कार्य करता है, हालांकि इसे धीरे-धीरे IPv6 द्वारा प्रतिस्थापित किया जा रहा है, जो कि इसका अगला संस्करण है। 
  • IPv4 का उपयोग इंटरनेट पर किसी भी डिवाइस को पहचानने और उसे नेटवर्क के माध्यम से डेटा भेजने के लिए किया जाता है।
  • IPv4 इंटरनेट प्रोटोकॉल की सबसे पुरानी और सबसे प्रमुख तकनीकों में से एक है, जिसने इंटरनेट की नींव रखी और इसे दुनिया भर में फैला दिया। हालांकि इसके कुछ सीमाएँ हैं, विशेष रूप से एड्रेस स्पेस की कमी, लेकिन इसके बावजूद, यह आज भी इंटरनेट और नेटवर्किंग की दुनिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  •  IPv6 के आगमन के साथ, IPv4 को धीरे-धीरे प्रतिस्थापित किया जा रहा है, लेकिन यह प्रक्रिया कुछ और समय तक चलेगी। IPv4 का सरल और स्थिर डिजाइन इसे अभी भी एक भरोसेमंद तकनीक बनाता है।

IPv4 क्या है?

  • IPv4 एक संख्यात्मक एड्रेसिंग सिस्टम है, जो 32-बिट की एड्रेस स्पेस का उपयोग करता है। यह 1980 के दशक में विकसित किया गया था और यह नेटवर्किंग में एक मूलभूत तकनीक बन गया है। IPv4 एड्रेस का फॉर्मेट 4 डेसिमल नंबर्स का होता है, जो प्रत्येक 8-बिट्स (एक ऑक्टेट) को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, एक IPv4 एड्रेस कुछ इस प्रकार होता है: 192.168.0.1।

हर IP एड्रेस को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है:

  • नेटवर्क आईडी (Network ID): यह IP एड्रेस के शुरुआती हिस्से को दर्शाता है और नेटवर्क के हिस्से को पहचानने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • होस्ट आईडी (Host ID): यह IP एड्रेस के अंतिम हिस्से को दर्शाता है और नेटवर्क में विशेष डिवाइस (जैसे कंप्यूटर, राउटर, सर्वर आदि) की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है।

IPv4 Addressing in Hindi | IPv4 एड्रेसिंग

IPv4 एड्रेसिंग प्रणाली के माध्यम से, प्रत्येक डिवाइस को एक अद्वितीय IP एड्रेस प्रदान किया जाता है, जिससे नेटवर्क पर उस डिवाइस को पहचाना जा सके। 32-बिट स्पेस का मतलब है कि कुल 2^32 संभावित IP एड्रेस (लगभग 4.3 अरब) उपलब्ध होते हैं। IPv4 एड्रेसिंग को पांच मुख्य क्लासों में विभाजित किया गया है:

  • Class A: यह बड़े नेटवर्क्स के लिए है, जिनमें बड़ी संख्या में होस्ट्स होते हैं। Class A IP एड्रेस में पहला ऑक्टेट नेटवर्क आईडी होता है और बाकी के तीन ऑक्टेट्स होस्ट आईडी होते हैं। इसका IP एड्रेस रेंज 1.0.0.0 से 126.255.255.255 होता है।

  • Class B: यह मीडियम साइज नेटवर्क्स के लिए है। इसमें पहले दो ऑक्टेट्स नेटवर्क आईडी के लिए होते हैं और अंतिम दो ऑक्टेट्स होस्ट आईडी के लिए। इसका IP एड्रेस रेंज 128.0.0.0 से 191.255.255.255 होता है।

  • Class C: यह छोटे नेटवर्क्स के लिए है, जिनमें कम होस्ट्स होते हैं। इसमें पहले तीन ऑक्टेट्स नेटवर्क आईडी होते हैं और अंतिम ऑक्टेट होस्ट आईडी होता है। इसका रेंज 192.0.0.0 से 223.255.255.255 होता है।

  • Class D: इसका उपयोग मल्टीकास्टिंग के लिए किया जाता है, और इसका रेंज 224.0.0.0 से 239.255.255.255 होता है।

  • Class E: यह भविष्य के उपयोग या अनुसंधान के लिए आरक्षित किया गया है। इसका रेंज 240.0.0.0 से 255.255.255.255 होता है।

Main Component of IPv4 in Hindi | IPv4 के महत्वपूर्ण घटक :

  • DNS (Domain Name System): चूंकि IP एड्रेस संख्यात्मक होते हैं, जो मनुष्यों के लिए याद रखना कठिन हो सकता है। DNS का उपयोग IP एड्रेस को डोमेन नामों (जैसे www.google.com) में बदलने के लिए किया जाता है। DNS IPv4 के कामकाज को सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाता है।
  • NAT (Network Address Translation): IPv4 के एड्रेस स्पेस की सीमितता को देखते हुए, NAT का उपयोग किया जाता है, जिससे कई निजी IP एड्रेस को एक सार्वजनिक IP एड्रेस के माध्यम से इंटरनेट पर एक्सेस किया जा सकता है। यह एड्रेस की खपत को कम करने में मदद करता है और IPv4 के जीवनकाल को बढ़ाने में सहायक रहा है।
  • DHCP (Dynamic Host Configuration Protocol): DHCP का उपयोग स्वचालित रूप से डिवाइसों को IP एड्रेस असाइन करने के लिए किया जाता है। इससे नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेशन आसान हो जाता है, क्योंकि इसे मैन्युअली IP एड्रेस असाइन करने की आवश्यकता नहीं होती।

Advantages of IPv4 in Hindi | IPv4 के फायदे :

  • सरलता और स्थायित्व: IPv4 का डिजाइन सरल और आसानी से समझने योग्य है, इसलिए इसे व्यापक रूप से अपनाया गया है। इसकी प्रौद्योगिकी स्थिर और परीक्षण की गई है, जिसके कारण यह आज भी बहुत सफलतापूर्वक काम कर रहा है।
  • प्रणाली की विश्वसनीयता: IPv4 की संरचना बहुत मजबूत है और यह बड़ी संख्या में डिवाइसों और नेटवर्क्स के बीच संचार को सक्षम करती है। नेटवर्क में इसके इस्तेमाल के कई वर्षों के बाद भी यह भरोसेमंद साबित हुआ है।
  • व्यापक संगतता: IPv4 संगतता के कारण इसे दुनिया भर के विभिन्न हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म द्वारा समर्थन प्राप्त है। यह विभिन्न उपकरणों और नेटवर्क के साथ आसानी से काम करता है।

Disadvantages of IPv4 in Hindi | IPv4 के नुकसान :

  • एड्रेस स्पेस की कमी: चूंकि IPv4 केवल 32-बिट एड्रेस स्पेस का उपयोग करता है, इसमें कुल लगभग 4.3 अरब एड्रेस होते हैं। इंटरनेट के लगातार बढ़ते उपयोग और स्मार्ट डिवाइसों की संख्या में बढ़ोतरी के कारण IPv4 एड्रेस कम हो गए हैं।
  • सुरक्षा: IPv4 में इनबिल्ट सुरक्षा फीचर्स की कमी होती है, जिसके कारण इसके डेटा पैकेट्स को आसानी से हैक किया जा सकता है। हालांकि, IPsec जैसे अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का उपयोग करके इसे सुरक्षित किया जा सकता है, लेकिन यह IPv4 का मूल हिस्सा नहीं है।
  • मल्टीकास्टिंग और मोबाइल नेटवर्किंग की सीमाएँ: IPv4 की मल्टीकास्टिंग और मोबाइल नेटवर्किंग फीचर्स की सीमाएँ हैं, जो आधुनिक इंटरनेट और नेटवर्किंग आवश्यकताओं को पूरी तरह से नहीं संभाल पाते।

Future of IPv4 and evolution of IPv6 in Hindi | IPv4 का भविष्य और IPv6 का विकास :

  • IPv4 की सीमाओं को देखते हुए, IPv6 (Internet Protocol Version 6) को विकसित किया गया है, जो एड्रेस स्पेस की कमी को पूरा करता है और कई उन्नत फीचर्स प्रदान करता है। IPv6 128-बिट एड्रेसिंग का उपयोग करता है, जो कि एक लगभग अनंत संख्या में एड्रेस प्रदान करता है। साथ ही, IPv6 में सुरक्षा, ऑटो-कॉन्फ़िगरेशन, और मल्टीकास्टिंग जैसी आधुनिक नेटवर्किंग आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से हैंडल करने की क्षमता होती है।
  • हालांकि, IPv6 की शुरुआत हो चुकी है और इसे धीरे-धीरे अपनाया जा रहा है, लेकिन IPv4 अभी भी व्यापक रूप से उपयोग में है। IPv4 की अद्वितीयता, सरलता और विश्वसनीयता के कारण यह अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

In this Chapter

IPv4 in Hindi | IPv4 क्या है?
Auto Configuration Anycast in Hindi
Modified EUI-64 in Hindi | Modified EUI-64 क्या है?
Architecture of Mobile Computing in Hindi
Wireless LAN in Hindi | Wireless LAN क्या है?
Wireless User Devices in Hindi
MAC Protocol in Hindi | MAC प्रोटोकॉल क्या है?
IEEE 802.11 in Hindi | IEEE 802.11 क्या है
Mobile IP in Hindi | Mobile IP हिंदी में
Wireless TCP IP in Hindi
Unicast & Multicast Communication in Hindi
Bluetooth in Hindi | Bluetooth क्या है?
NS2 & NAM in Hindi | NS2 और NAM क्या है?
Purpose & installation of NS2 & NAM in Hindi
Background of NS2 & NAM in Hindi
Architecture of NS2 & NAM in Hindi
Interface of OTcl & C++ in Hindi
Trace Files & Formats in Hindi
Protocol Support of NS2 in Hindi
Simulation Object of NS2 & NAM in Hindi
Basic Syntax of NS2 & NAM in Hindi
Node Creation of NS2 & NAM in Hindi
Running NS2 & NAM in Hindi
Finish Procedure NS2 & NAM in Hindi
Invoking external commands within NS2 in Hindi
Nodes & Agents of NS2 & NAM in Hindi
NS2 Commands in Hindi
Creating Links in Wired Network in Hindi
Setting Link Parameters in Hindi
Sending Traffics Through NS2 Links in Hindi
Routing Protocol Support of NS2 in Hindi
Scenarios in Hindi
Additional Parameters in Hindi
Setting node positions in Hindi
God object & topography in Hindi
Protocol Support in Hindi
Scenarios in Wireless Network in Hindi
Internet क्या है? Intranet और Extranet के बीच अंतर
इंटरनेट के प्रकार | Types of Internet in Hindi
OSI Model in Hindi - OSI मॉडल क्या है और इसकी लेयर हिंदी में
Computer Network (CN) All Important Questions and Answers in Hindi (MDSU)
BCA | Computer Network | 2025 Paper | MDSU Exam Paper
Importance of Layer Model in Hindi
Network Classification in Hindi
Network Topology in Hindi
Network Switching & Component in Hindi
Ethernet in Hindi
Token Ring in Hindi
Basic working & Cabling in Hindi
What is Computer in Hindi | कंप्यूटर क्या है?
Bridges in Hindi
Router in Hindi
Gateway in Hindi
Public & Private Network in Hindi
FDMA in Hindi
BCA | CN(Computer Network) Paper | MDSU 2023 Exam Paper
What is WWW in Hindi and Introduction of WWW
CDMA,SDMA,TDMA in Hindi
Personal communication system in Hindi | PCS क्या है
Subnetting IPv4 address in Hindi
Casting in Hindi | कास्टिंग हिंदी में
Private IPv4 Addressing in Hindi
IPv4 Address Scheme in Hindi
IPv6 Addressing Scheme in Hindi
Types of IPv6 Addressing in Hindi