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IPv4 Address Scheme in Hindi

IPv4 Address Scheme in Hindi | IPv4 एड्रेसिंग स्कीम हिंदी में :


  • IPv4 एड्रेसिंग स्कीम नेटवर्किंग की आधारभूत तकनीक है, जिसका उपयोग इंटरनेट और विभिन्न नेटवर्कों पर संचार के लिए किया जाता है। IPv4 (Internet Protocol Version 4) एड्रेसिंग सिस्टम 32-बिट का एक यूनिक एड्रेस होता है,
  •  जो किसी भी डिवाइस (कंप्यूटर, राउटर, मोबाइल) को नेटवर्क पर पहचानने और संचार स्थापित करने के लिए दिया जाता है। इस एड्रेसिंग प्रणाली का उपयोग दुनियाभर में किया जाता है और यह इंटरनेट प्रोटोकॉल के चौथे संस्करण पर आधारित है।
  • IPv4 में प्रत्येक IP एड्रेस 32-बिट का होता है, जो इसे कुल 2^32 (लगभग 4.3 अरब) अलग-अलग एड्रेस बनाने की क्षमता प्रदान करता है।
  •  हालांकि, इंटरनेट के विस्तार और तेजी से बढ़ती संख्या में नेटवर्क डिवाइस के कारण यह संख्या कम हो रही है, इसलिए IPv6 का उपयोग भी बढ़ रहा है, लेकिन IPv4 अब भी काफी प्रचलित है।
  • IPv4 एड्रेसिंग स्कीम नेटवर्किंग की मूलभूत तकनीक है, जो नेटवर्क और डिवाइसेस के बीच संचार को संभव बनाती है। क्लासफुल एड्रेसिंग के माध्यम से, विभिन्न प्रकार के नेटवर्क्स की आवश्यकताओं के अनुसार IP एड्रेस को विभाजित किया जाता है। 
  • हालांकि IPv6 का उपयोग बढ़ रहा है, लेकिन IPv4 अब भी नेटवर्किंग और इंटरनेट में मुख्य भूमिका निभा रहा है। IPv4 के बिना आधुनिक नेटवर्किंग की कल्पना करना संभव नहीं है।
  • इस उत्तर में, हम IPv4 एड्रेसिंग स्कीम, इसके क्लासेस, नेटवर्क और होस्ट भाग, और इसकी विशेषताओं पर गहराई से चर्चा करेंगे।

Structure of IPv4 Address in Hindi  | IPv4 एड्रेस की संरचना :

IPv4 एड्रेस 32-बिट लंबाई का होता है, जिसे 4 भागों (ऑक्टेट्स) में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक भाग 8-बिट्स का होता है, जिससे कुल 32-बिट का IP एड्रेस प्राप्त होता है।

उदाहरण: 192.168.10.1

इस उदाहरण में, 192.168.10.1 चार भागों में विभाजित है, जहाँ प्रत्येक भाग (ऑक्टेट) दशमलव संख्या (0 से 255 के बीच) में व्यक्त किया जाता है। कंप्यूटर इन संख्याओं को बाइनरी (0 और 1) में परिवर्तित करता है, ताकि इनका उपयोग डेटा पैकेट भेजने और प्राप्त करने में किया जा सके।

IPv4 एड्रेस के दो प्रमुख भाग:

IPv4 एड्रेस को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है:

  • नेटवर्क भाग (Network Portion): यह IP एड्रेस का वह हिस्सा होता है जो नेटवर्क को दर्शाता है। इसका उपयोग नेटवर्क की पहचान करने के लिए किया जाता है और यह यह निर्धारित करता है कि किस नेटवर्क में एक डिवाइस है।
  • होस्ट भाग (Host Portion): यह IP एड्रेस का वह हिस्सा होता है जो नेटवर्क के भीतर किसी विशिष्ट डिवाइस (होस्ट) को दर्शाता है। नेटवर्क में मौजूद प्रत्येक डिवाइस का होस्ट भाग यूनिक होता है, जिससे हर डिवाइस की पहचान अलग होती है।

Classes of IPv4 Addressing in Hindi | IPv4 एड्रेसिंग की श्रेणियाँ :

IPv4 एड्रेसिंग को विभिन्न वर्गों (क्लासेस) में विभाजित किया गया है। इसे क्लासफुल एड्रेसिंग कहा जाता है। क्लासफुल एड्रेसिंग में IP एड्रेस को पाँच अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है: क्लास A, क्लास B, क्लास C, क्लास D, और क्लास E। इनमें से क्लास A, B और C सबसे सामान्य रूप से उपयोग किए जाते हैं, जबकि क्लास D मल्टीकास्टिंग और क्लास E प्रयोगात्मक उद्देश्यों के लिए आरक्षित है।

1. क्लास A:

  • रेंज: 0.0.0.0 से 127.255.255.255
  • नेटवर्क भाग: पहले 8-बिट्स (1 ऑक्टेट)
  • होस्ट भाग: अंतिम 24-बिट्स (3 ऑक्टेट्स)
  • उपयोग: बहुत बड़े नेटवर्क्स के लिए, जैसे कि इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) द्वारा उपयोग किया जाता है।
  • होस्ट की संख्या: प्रत्येक नेटवर्क में 16,777,214 होस्ट (2^24 - 2)
  • पहले ऑक्टेट की बाइनरी रेंज: 0xxxxxxx
  • क्लास A नेटवर्क बड़े संगठनों या सेवा प्रदाताओं के लिए होते हैं, जिनके पास लाखों होस्ट्स हो सकते हैं।

2. क्लास B:

  • रेंज: 128.0.0.0 से 191.255.255.255
  • नेटवर्क भाग: पहले 16-बिट्स (2 ऑक्टेट्स)
  • होस्ट भाग: अंतिम 16-बिट्स (2 ऑक्टेट्स)
  • उपयोग: मध्यम आकार के नेटवर्क्स के लिए, जैसे कि बड़े कॉर्पोरेट नेटवर्क।
  • होस्ट की संख्या: प्रत्येक नेटवर्क में 65,534 होस्ट (2^16 - 2)
  • पहले ऑक्टेट की बाइनरी रेंज: 10xxxxxx
  • क्लास B नेटवर्क का उपयोग आमतौर पर बड़े संगठनों द्वारा किया जाता है, जिन्हें हजारों होस्ट्स की आवश्यकता होती है।

3. क्लास C:

  • रेंज: 192.0.0.0 से 223.255.255.255
  • नेटवर्क भाग: पहले 24-बिट्स (3 ऑक्टेट्स)
  • होस्ट भाग: अंतिम 8-बिट्स (1 ऑक्टेट)
  • उपयोग: छोटे नेटवर्क्स के लिए, जैसे कि छोटे व्यवसाय या घरेलू नेटवर्क।
  • होस्ट की संख्या: प्रत्येक नेटवर्क में 254 होस्ट (2^8 - 2)
  • पहले ऑक्टेट की बाइनरी रेंज: 110xxxxx
  • क्लास C नेटवर्क छोटे नेटवर्क के लिए होते हैं, जिनमें कम होस्ट होते हैं, जैसे छोटे कार्यालयों या घरों के लिए।

4. क्लास D (मल्टीकास्ट एड्रेस):

  • रेंज: 224.0.0.0 से 239.255.255.255
  • उपयोग: मल्टीकास्टिंग के लिए, जहां एक पैकेट कई डिवाइसेस को भेजा जाता है।
  • पहले ऑक्टेट की बाइनरी रेंज: 1110xxxx

5. क्लास E (आरक्षित एड्रेस):

  • रेंज: 240.0.0.0 से 255.255.255.255
  • उपयोग: प्रयोगात्मक उद्देश्यों के लिए आरक्षित।
  • पहले ऑक्टेट की बाइनरी रेंज: 1111xxxx

IPv4 एड्रेसिंग का उदाहरण :

मान लीजिए कि आपके पास 192.168.1.1 एड्रेस है, जो एक क्लास C एड्रेस है। इस एड्रेस के पहले 24 बिट्स नेटवर्क को दर्शाते हैं, जबकि अंतिम 8 बिट्स होस्ट को दर्शाते हैं।

नेटवर्क भाग: 192.168.1

होस्ट भाग: 1

  • इसका मतलब है कि यह एड्रेस 192.168.1.0 नेटवर्क का हिस्सा है, और 1 उस नेटवर्क पर होस्ट की पहचान करता है। इस प्रकार, 192.168.1.1 उस नेटवर्क में मौजूद किसी विशेष डिवाइस का यूनिक एड्रेस है।
  • सबनेट मास्क (Subnet Mask): सबनेट मास्क एक 32-बिट नंबर होता है, जिसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि IP एड्रेस के कौन से हिस्से नेटवर्क और होस्ट के लिए आरक्षित हैं। सबनेट मास्क IP एड्रेस के साथ काम करता है और नेटवर्क को छोटे सबनेट्स में विभाजित करने में मदद करता है।
  • क्लास A का सबनेट मास्क: 255.0.0.0
  • क्लास B का सबनेट मास्क: 255.255.0.0
  • क्लास C का सबनेट मास्क: 255.255.255.0
  • IPv4 में विशेष एड्रेस (Special Addresses in IPv4): IPv4 एड्रेसिंग में कुछ विशेष एड्रेस होते हैं, जो विशिष्ट उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं:
  • निजी IP एड्रेस (Private IP Addresses): इनका उपयोग प्राइवेट नेटवर्क्स (जैसे LAN) में किया जाता है। ये एड्रेस इंटरनेट पर सीधे उपयोग नहीं किए जा सकते।
  • क्लास A: 10.0.0.0 से 10.255.255.255
  • क्लास B: 172.16.0.0 से 172.31.255.255
  • क्लास C: 192.168.0.0 से 192.168.255.255
  • लोकल होस्ट एड्रेस (Localhost Address): इसका उपयोग किसी डिवाइस के स्वयं के साथ संचार के लिए किया जाता है। इसका एड्रेस 127.0.0.1 है, जो आपके कंप्यूटर को उसके स्वयं के साथ संचार करने की अनुमति देता है।
  • ब्रॉडकास्ट एड्रेस (Broadcast Address): इसका उपयोग नेटवर्क में सभी डिवाइसेस को एक साथ संदेश भेजने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, 192.168.1.255 एड्रेस एक क्लास C नेटवर्क में ब्रॉडकास्ट एड्रेस हो सकता है।
  • पब्लिक IP एड्रेस (Public IP Address): पब्लिक IP एड्रेस इंटरनेट पर उपयोग किए जाते हैं और ये इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISPs) द्वारा प्रदान किए जाते हैं। ये एड्रेस इंटरनेट पर यूनिक होते हैं और नेटवर्क डिवाइस को इंटरनेट से कनेक्ट होने की अनुमति देते हैं।



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