BCA / B.Tech 12 min read

Kernel-Based Operating System in Hindi

Kernel-Based Operating System in Hindi | कर्नल आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम  :


कर्नल (Kernel) ऑपरेटिंग सिस्टम का एक प्रमुख घटक होता है, जो कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर के बीच मध्यस्थ का काम करता है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम का वह भाग है, जो सीधे हार्डवेयर के साथ संवाद करता है और सिस्टम की महत्वपूर्ण कार्यक्षमता को संचालित करता है। 
कर्नल का उद्देश्य हार्डवेयर संसाधनों (जैसे CPU, मेमोरी, इनपुट/आउटपुट डिवाइस) को प्रबंधित करना और विभिन्न एप्लिकेशनों को हार्डवेयर तक पहुँच प्रदान करना होता है।

कर्नल-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम को इसलिए कहा जाता है क्योंकि कर्नल इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम की रीढ़ की हड्डी होता है। यह वह कोर प्रोग्राम है जो सिस्टम के बाकी हिस्सों को चलाता है और नियंत्रित करता है। 
इस लेख में, हम कर्नल, कर्नल के प्रकार, इसकी संरचना, कार्य, और कर्नल-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम के लाभ और नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी देंगे।

कर्नल आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर सिस्टम की स्थिरता और प्रदर्शन के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण होते हैं। कर्नल हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच मध्यस्थता करता है और सिस्टम के विभिन्न घटकों को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करता है।
 विभिन्न प्रकार के कर्नल (मोनोलिथिक, माइक्रोकर्नल, हाइब्रिड, एक्जोकर्नल) ऑपरेटिंग सिस्टम के डिज़ाइन के अनुसार विभिन्न लाभ और नुकसान प्रदान करते हैं।

कर्नल की प्रभावी भूमिका और कुशल प्रबंधन के कारण आधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम, चाहे वह सर्वर हो, क्लाउड कंप्यूटिंग हो या एम्बेडेड सिस्टम्स, सभी में इसका महत्वपूर्ण योगदान है।


कर्नल क्या है? (What is Kernel?)

कर्नल ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य घटक होता है, जो सीधे हार्डवेयर के साथ संपर्क स्थापित करता है और उपयोगकर्ता के एप्लिकेशनों को हार्डवेयर तक पहुँच प्रदान करता है। इसे "ओएस का दिल" भी कहा जाता है, क्योंकि इसके बिना ऑपरेटिंग सिस्टम काम नहीं कर सकता। कर्नल की जिम्मेदारियों में मुख्यतः मेमोरी प्रबंधन, प्रोसेस मैनेजमेंट, डिवाइस मैनेजमेंट और सिस्टम कॉल हैंडलिंग शामिल होती है।

Main Roles of Kernel in Operating System in Hindi | कर्नल की मुख्य भूमिकाएँ :

  • प्रोसेस मैनेजमेंट (Process Management): कर्नल सिस्टम के भीतर चलने वाली सभी प्रक्रियाओं को प्रबंधित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक प्रक्रिया को पर्याप्त CPU समय मिले, और प्रोसेसेज़ के बीच सही तरीके से संसाधनों का आवंटन हो।
  • मेमोरी मैनेजमेंट (Memory Management): कर्नल मेमोरी का प्रबंधन करता है, यह तय करता है कि कौन सी प्रक्रिया कितनी मेमोरी का उपयोग करेगी। यह मेमोरी आवंटित और डीलोकेट करता है और वर्चुअल मेमोरी का प्रबंधन भी करता है।
  • फाइल सिस्टम मैनेजमेंट (File System Management): कर्नल हार्ड डिस्क और अन्य स्टोरेज डिवाइसों पर फाइल सिस्टम को प्रबंधित करता है। यह उपयोगकर्ता और एप्लिकेशनों को फाइलें पढ़ने और लिखने की अनुमति देता है।
  • डिवाइस मैनेजमेंट (Device Management): कर्नल हार्डवेयर डिवाइसों (जैसे कि कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, आदि) के लिए ड्राइवर प्रदान करता है और उनके संचालन को नियंत्रित करता है।
  • सिस्टम कॉल्स हैंडलिंग (System Calls Handling): कर्नल विभिन्न सिस्टम कॉल्स को हैंडल करता है, जो उपयोगकर्ता की एप्लिकेशनों द्वारा हार्डवेयर के साथ बातचीत करने के लिए की जाती हैं। यह सुरक्षा सुनिश्चित करता है और सिस्टम संसाधनों तक पहुँच को नियंत्रित करता है।

Types of Kernel in Operating System in Hindi | कर्नल के प्रकार :

विभिन्न प्रकार के कर्नल होते हैं, जो उनकी संरचना और कार्यक्षमता के आधार पर विभाजित किए गए हैं। प्रमुख कर्नल प्रकारों में निम्नलिखित शामिल हैं:

मोनोलिथिक कर्नल (Monolithic Kernel): मोनोलिथिक कर्नल का डिज़ाइन ऐसा होता है कि इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम के सभी सेवाओं और कार्यों को एक बड़े कोड बेस के भीतर रखा जाता है। यह सभी ड्राइवर, सिस्टम कॉल्स और अन्य सेवाओं को कर्नल स्पेस में चलाता है।
  • उदाहरण: Linux, Unix
  • लाभ: उच्च प्रदर्शन (Performance) क्योंकि सभी घटक एक ही स्थान पर होते हैं।
  • नुकसान: मोनोलिथिक कर्नल को बदलने के लिए बहुत अधिक जटिलता होती है और इसे डिबग (debug) करना कठिन होता है।

माइक्रोकर्नल (Microkernel) : माइक्रोकर्नल डिज़ाइन में केवल कर्नल के मुख्य कार्य जैसे प्रोसेस मैनेजमेंट और मेमोरी मैनेजमेंट को कर्नल स्पेस में रखा जाता है, जबकि अन्य सेवाएँ (जैसे ड्राइवर और फाइल सिस्टम) यूजर स्पेस में चलती हैं।
  • उदाहरण: Minix, QNX
  • लाभ: अधिक मॉड्यूलरिटी और सुरक्षित, क्योंकि सिस्टम के विभिन्न हिस्सों को अलग-अलग डिबग और अपडेट किया जा सकता है।
  • नुकसान: प्रदर्शन में गिरावट क्योंकि यूजर स्पेस और कर्नल स्पेस के बीच अधिक इंटरैक्शन होता है।

हाइब्रिड कर्नल (Hybrid Kernel): हाइब्रिड कर्नल मोनोलिथिक और माइक्रोकर्नल दोनों के तत्वों को मिलाकर बनाए जाते हैं। यह कर्नल माइक्रोकर्नल के कुछ सिद्धांतों का पालन करता है लेकिन मोनोलिथिक कर्नल के कुछ प्रमुख घटक भी शामिल करता है।
  • उदाहरण: Windows NT, MacOS
  • लाभ: मोनोलिथिक की गति और माइक्रोकर्नल की मॉड्यूलरिटी का एक अच्छा संतुलन प्रदान करता है।
  • नुकसान: संरचना जटिल हो सकती है और अधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।

एक्जोकर्नल (Exokernel): यह कर्नल डिज़ाइन का एक नया और विशिष्ट प्रकार है, जिसमें कर्नल न्यूनतम काम करता है और हार्डवेयर तक अधिकतम पहुँच एप्लिकेशन को प्रदान की जाती है। कर्नल केवल सुरक्षा और रिसोर्स आवंटन पर ध्यान देता है।
  • उदाहरण: MIT Exokernel
  • लाभ: एप्लिकेशनों को हार्डवेयर पर अधिक नियंत्रण प्रदान करता है।
  • नुकसान: जटिलता और अधिक एप्लिकेशन-लेवल कोडिंग की आवश्यकता होती है।


 Advantages of Kernel-Based Operating System  in Operating System in Hindi | कर्नल-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम के लाभ :

  • प्रदर्शन में वृद्धि (Performance Improvement): कर्नल सीधे हार्डवेयर से संवाद करता है, जिससे एप्लिकेशन को हार्डवेयर संसाधनों तक तेज़ी से पहुँच मिलती है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रदर्शन को बढ़ाता है।
  • प्रोसेस और मेमोरी मैनेजमेंट (Process and Memory Management): कर्नल प्रोसेस और मेमोरी के प्रबंधन को कुशलतापूर्वक नियंत्रित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी प्रक्रियाओं को संसाधनों का सही तरीके से आवंटन हो और किसी प्रक्रिया का अधिक मेमोरी या CPU का उपयोग न हो।
  • सुरक्षा (Security): कर्नल यूजर मोड और कर्नल मोड के बीच स्पष्ट विभाजन प्रदान करता है। यह सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि केवल कर्नल मोड में ही सिस्टम क्रिटिकल ऑपरेशन होते हैं, जिससे अनधिकृत एक्सेस को रोका जा सकता है।
  • मल्टीटास्किंग और मल्टीथ्रेडिंग (Multitasking and Multithreading): कर्नल मल्टीटास्किंग और मल्टीथ्रेडिंग को संभालता है, जिससे एक साथ कई प्रक्रियाओं और थ्रेड्स को चलाया जा सकता है। यह आधुनिक कंप्यूटिंग सिस्टम में बेहद आवश्यक है।
  • डिवाइस मैनेजमेंट (Device Management): कर्नल विभिन्न हार्डवेयर डिवाइसों (जैसे कि प्रिंटर, माउस, कीबोर्ड) के लिए ड्राइवर प्रदान करता है और उनके संचालन को नियंत्रित करता है। यह डिवाइसों के बीच डेटा ट्रांसफर को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करता है।
Disadvantages of Kernel-Based Operating System in Operating System in Hindi | कर्नल-आधारित ऑपरेटिंग सिस्टम के नुकसान :

  • सिस्टम क्रैश (System Crash): चूंकि कर्नल ऑपरेटिंग सिस्टम का केंद्रीय हिस्सा है, अगर कर्नल में कोई बग या त्रुटि हो जाती है, तो पूरे सिस्टम का क्रैश हो सकता है। मोनोलिथिक कर्नल में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
  • जटिलता (Complexity): कर्नल का डिज़ाइन और कार्यान्वयन अत्यधिक जटिल होता है। खासकर मोनोलिथिक कर्नल को डिबग और बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
  • अपडेट और मेंटेनेंस की कठिनाई (Difficulty in Update and Maintenance): मोनोलिथिक कर्नल को अपडेट करना या उसमें परिवर्तन करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि यह एक ही कोड बेस पर निर्भर करता है।
  • प्रदर्शन में गिरावट (Performance Degradation) (Microkernel): माइक्रोकर्नल और हाइब्रिड कर्नल के डिज़ाइन के कारण, यूजर स्पेस और कर्नल स्पेस के बीच बार-बार इंटरैक्शन होता है, जिससे प्रदर्शन में गिरावट हो सकती है।





In this Chapter

Kernel-Based Operating System in Hindi
Distributed System in Hindi
Real Time System in Hindi
System Calls in Hindi
System Program in Hindi
Structure of Operating System in Hindi
Layers Design of Structure in Hindi
Unix in Hindi
Virtual Machine in Hindi
Process Concept in Hindi
Interacting Processes in Hindi
Threads in Hindi
Fundamental of Schedulling in Hindi
Scheduling Criteria in Hindi
Long Medium Short Term Scheduling in Hindi
Scheduling Algorithms in Hindi
Structure of Concurrent System in Hindi
Critical Region in Hindi
Critical Section in Hindi
Inter process Communication in Hindi
Monitor in Hindi
Semaphores in Hindi
Semaphores Implementation & Uses in Hindi
Logical and Physical Address in Hindi
Swapping in Hindi
Contiguous Allocation in Hindi
Segmentation in Hindi
Paging in Hindi
Paging with Segmentation in Hindi
kernel Memory Allocation in Hindi
Page Replacement Algorithms in Hindi
Virtual Memory in Hindi
Virtual Memory with demand Paging in Hindi
Deadlock & Characterization in Hindi
Methods for Handling Deadlocks in Hindi
Deadlock Thrashing in Hindi
Allocation of Frames in Hindi
Virtual Memory using Segmentation in Hindi
Interprocess Communication protocol in Hindi
Network Operating System in Hindi
Design Issues in Distributed File System in Hindi
Network Structure in Hindi
Structure Distributed System in Hindi
File System and Coordination in Hindi
Linux in Hindi
Commands of Linux in Hindi | लिनक्स के कमांड्स हिंदी में
Programmer Interface & File manipulation in Hindi
Process control in Linux in Hindi
Linux Kernel & Signals in Hindi
File System in Linux in Hindi
block & inodes in Hindi
System Editor in Hindi
Character Transliteration in Hindi
ED in Hindi
Vi Editor & There Commands in Hindi
Shell Script in Hindi
Looping & Decision Making in Hindi
Variables & File name Expansion in Hindi
Array in Hindi OS
Sub Program in Hindi
C interface with Linux in Hindi
Simpel Shell Programs in Hindi
BCA Part-1 | Operating Systems | Semester-I | MDSU Exam Paper 2023 (Held in 2024)
What is Operating System (OS) in Hindi
Operating System (OS) All Important Questions and Answers in Hindi (MDSU)
BCA || Operating System 2025 Paper || MDSU Exam Paper
BCA | OS(Operating System) 2023 Paper | MDSU Exam Paper
Type of Operating System in Hindi
Goals of Operating System in Hindi
Operation of Operating system in Hindi
Resource Allocation & Functions in Hindi
class of Operating system in Hindi
Batch Processing in Hindi
Multi Processing in Hindi
Time Sharing in Hindi