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Structure of Concurrent System in Hindi

Structure of Concurrent System in Operating System in Hindi | समानांतर प्रणाली की संरचना : 


समानांतर प्रणाली (Concurrent System) एक ऐसी प्रणाली होती है जहाँ कई कार्य या प्रक्रियाएँ एक साथ निष्पादित होती हैं। समानांतर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य संसाधनों का कुशल उपयोग करना और प्रोसेसिंग की गति को बढ़ाना है।
 इसे कई प्रक्रियाओं या धागों (Threads) के रूप में व्यवस्थित किया जा सकता है, जो एक साथ काम करते हैं और समान संसाधनों का उपयोग करते हैं। 
इन प्रणालियों को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि विभिन्न कार्य एक ही समय पर निष्पादित हो सकें और किसी भी संसाधन की प्रतीक्षा किए बिना काम पूरा हो सके।

समानांतर प्रणाली की संरचना जटिल होती है, लेकिन यह किसी भी आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम का अभिन्न अंग है। यह प्रणाली प्रक्रियाओं और धागों के रूप में विभिन्न कार्यों को एक साथ निष्पादित करने में सक्षम होती है।
 इसमें उचित संचार, समन्वय, संसाधन साझा करना, और समय पर प्रक्रियाओं को शेड्यूल करना महत्वपूर्ण होता है।
 समानांतर प्रणाली के सही उपयोग से प्रोसेसिंग की गति और सिस्टम की दक्षता में सुधार होता है, लेकिन इसके साथ ही डेडलॉक, रेस कंडीशन जैसी समस्याओं से बचने के लिए उचित उपाय भी आवश्यक हैं।


समानांतर प्रणाली को समझने के लिए, हमें इसकी संरचना, डिज़ाइन, और इसमें शामिल प्रमुख घटकों को जानना होगा। यह लेख उसी विषय पर केंद्रित है।

1. Structure of Concurrent System in Operating System in Hindi | समानांतर प्रणाली की संरचना हिंदी में : 

समानांतर प्रणाली की संरचना को समझने के लिए हमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण घटकों और डिज़ाइन पहलुओं पर ध्यान देना होगा:

  •  प्रक्रियाएँ (Processes) : प्रक्रिया एक स्वतंत्र निष्पादन इकाई होती है, जो प्रोग्राम का एक हिस्सा होती है और इसके लिए अपना स्वयं का संसाधन सेट (जैसे मेमोरी, CPU टाइम) होता है। समानांतर प्रणाली में एक साथ कई प्रक्रियाएँ निष्पादित होती हैं, और वे अपने काम को पूरा करने के लिए एक-दूसरे से संपर्क करती हैं। एक ऑपरेटिंग सिस्टम इन प्रक्रियाओं को मैनेज करता है और उन्हें संसाधन उपलब्ध कराता है।
  •  धागे (Threads) : धागा (Thread) किसी प्रक्रिया का एक छोटा हिस्सा होता है, जिसे लाइटवेट प्रोसेस (Lightweight Process) भी कहा जाता है। यह किसी प्रक्रिया के निष्पादन को तोड़कर छोटे हिस्सों में बाँटता है, ताकि समानांतर कार्य आसानी से किया जा सके। प्रक्रिया के विपरीत, धागे एक ही मेमोरी स्पेस साझा करते हैं, जिससे इन्हें संचार (Communication) और समन्वय (Synchronization) में मदद मिलती है। धागों का उपयोग करने से सिस्टम अधिक कुशल बनता है और CPU के समय का बेहतर उपयोग होता है।
  •  समानांतरता (Concurrency) : समानांतरता का तात्पर्य यह है कि कई प्रक्रियाएँ या धागे एक ही समय पर कार्य कर रहे होते हैं। भले ही वे वास्तव में एक ही CPU पर चल रही हों, समानांतरता की तकनीक के माध्यम से यह प्रतीत होता है कि वे सभी कार्य एक साथ हो रहे हैं। यह ऑपरेटिंग सिस्टम की योजना और संसाधनों के आवंटन की विधि पर निर्भर करता है कि किस प्रक्रिया या धागे को CPU पर कब चलाना है।
  •  संसाधन साझा करना (Resource Sharing) : समानांतर प्रणालियों में कई प्रक्रियाएँ या धागे एक ही संसाधन जैसे मेमोरी, CPU, इनपुट/आउटपुट डिवाइस इत्यादि का उपयोग कर सकते हैं। संसाधन साझा करने के लिए, इन प्रक्रियाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता होती है ताकि डेडलॉक (Deadlock) या रेस कंडीशन (Race Condition) जैसी समस्याओं से बचा जा सके। इसके लिए म्यूटेक्स (Mutex) और सेमाफोर (Semaphore) जैसी सिंक्रोनाइजेशन विधियों का उपयोग किया जाता है।
  •  संचार (Communication) : समानांतर प्रणालियों में प्रक्रियाओं या धागों के बीच संचार की आवश्यकता होती है ताकि वे एक-दूसरे के कार्यों के बारे में जानकारी साझा कर सकें। यह संचार इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन (IPC) के माध्यम से किया जाता है, जो विभिन्न तकनीकों जैसे कि मैसेज पासिंग (Message Passing), शेयर मेमोरी (Shared Memory) आदि का उपयोग करता है। IPC तकनीकें सिस्टम की संरचना और प्रक्रियाओं के बीच डेटा साझा करने के तरीके को निर्धारित करती हैं।
  •  समन्वय (Synchronization) : समानांतर प्रणाली में कई प्रक्रियाओं या धागों के बीच समन्वय होना बहुत आवश्यक है ताकि एक साथ कार्य करते समय वे सही क्रम में निष्पादित हो सकें और किसी भी संसाधन पर टकराव न हो। इसके लिए सिंक्रोनाइजेशन तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि सेमाफोर, म्यूटेक्स और मॉनिटर्स (Monitors)। ये तकनीकें सुनिश्चित करती हैं कि एक समय में केवल एक ही प्रक्रिया या धागा एक साझा संसाधन का उपयोग कर सके।

2. Types of Concurrent Systems in Operating System in Hindi | समानांतर प्रणाली के प्रकार :

  •  सहकारी समानांतरता (Cooperative Concurrency): इसमें प्रक्रियाएँ या धागे अपने आप से यह तय करते हैं कि कब उन्हें CPU छोड़ना है और दूसरे धागों या प्रक्रियाओं को मौका देना है। यह एक स्वैच्छिक प्रक्रिया होती है, जहाँ एक प्रक्रिया CPU को तब तक उपयोग करती है, जब तक वह समाप्त न हो जाए या कोई आई/ओ (I/O) ऑपरेशन न करना पड़े।
  •  प्रीएम्प्टिव समानांतरता (Preemptive Concurrency): इसमें ऑपरेटिंग सिस्टम यह तय करता है कि किस प्रक्रिया को कब CPU का उपयोग करना है। जब भी ऑपरेटिंग सिस्टम को लगता है कि किसी प्रक्रिया को CPU से हटा देना चाहिए, तो वह उसे रोक कर दूसरी प्रक्रिया को CPU दे सकता है। इस प्रक्रिया को कंटेक्स्ट स्विचिंग (Context Switching) कहा जाता है।
  •  वितरित समानांतरता (Distributed Concurrency): वितरित समानांतर प्रणाली वह प्रणाली होती है, जिसमें समानांतर प्रक्रियाएँ विभिन्न भौतिक मशीनों या सर्वरों पर चलती हैं और उन्हें एक नेटवर्क के माध्यम से एक साथ काम करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है। इस प्रकार की प्रणाली में प्रक्रियाएँ भले ही अलग-अलग जगह चल रही हों, परंतु उन्हें ऐसा प्रतीत होता है कि वे एक ही सिस्टम का हिस्सा हैं।

3.Problems in Concurrent Systems in Operating System in Hindi |  समानांतर प्रणाली में आने वाली समस्याएँ :

  •  डेडलॉक (Deadlock): डेडलॉक एक ऐसी स्थिति है जब दो या अधिक प्रक्रियाएँ एक-दूसरे के संसाधनों का इंतजार करती हैं और अंततः कोई भी प्रक्रिया अपने काम को पूरा नहीं कर पाती। यह तब होता है जब प्रक्रियाएँ आपस में ब्लॉक हो जाती हैं और किसी भी प्रक्रिया को CPU या अन्य संसाधन प्राप्त नहीं होते।
  •  रेस कंडीशन (Race Condition): रेस कंडीशन तब उत्पन्न होती है जब एक से अधिक प्रक्रियाएँ या धागे एक ही संसाधन को एक साथ एक्सेस करने का प्रयास करते हैं और उन पर सही समन्वय नहीं होता। इससे प्रक्रियाओं के परिणाम अनिश्चित हो जाते हैं। इसे हल करने के लिए म्यूटेक्स और सेमाफोर जैसी सिंक्रोनाइजेशन तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
  •  संसाधन समाप्ति (Resource Starvation): यह समस्या तब उत्पन्न होती है जब किसी प्रक्रिया को आवश्यक संसाधन लंबे समय तक नहीं मिल पाते, क्योंकि अन्य प्रक्रियाएँ उन संसाधनों का लगातार उपयोग करती रहती हैं। इससे वह प्रक्रिया निष्क्रिय हो जाती है और उसे संसाधन प्राप्त करने का मौका नहीं मिलता।


4.Design Strategies of Concurrent Systems in Operating System in Hindi |  समानांतर प्रणाली की डिजाइन रणनीतियाँ : 

  •  मल्टी-प्रोसेसिंग (Multiprocessing): यह रणनीति एक साथ कई प्रोसेसरों का उपयोग करके प्रक्रियाओं को निष्पादित करने की अनुमति देती है। यह समानांतरता को बढ़ाती है और बड़े कार्यों को छोटे कार्यों में विभाजित करके उन्हें तेज़ी से निष्पादित करती है।
  •  मल्टी-थ्रेडिंग (Multithreading): मल्टी-थ्रेडिंग एक प्रक्रिया को छोटे-छोटे धागों में विभाजित करती है, ताकि एक ही समय में कई धागे निष्पादित हो सकें। इससे संसाधनों का कुशल उपयोग होता है और प्रोसेसिंग की गति बढ़ती है।
  •  टाइम शेयरिंग (Time Sharing): यह रणनीति प्रक्रियाओं को CPU का समय छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटकर देती है, ताकि सभी प्रक्रियाओं को CPU का उपयोग करने का समान अवसर मिल सके।

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