BCA / B.Tech 13 min read

Inter process Communication in Hindi

Interprocess Communication in Operating System in Hindi  | ऑपरेटिंग सिस्टम में इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन हिंदी में : 


इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन (IPC) एक ऐसी प्रणाली है जो एक ऑपरेटिंग सिस्टम में विभिन्न प्रक्रियाओं के बीच डेटा या सूचनाओं के आदान-प्रदान को सक्षम करती है। इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन का उपयोग तब किया जाता है जब कई प्रक्रियाएँ एक साथ काम कर रही होती हैं 
और उन्हें एक-दूसरे से डेटा साझा करना या एक-दूसरे के कार्यों का समन्वय करना पड़ता है। यह संचार एक ही कंप्यूटर पर चलने वाली विभिन्न प्रक्रियाओं के बीच हो सकता है, या विभिन्न नेटवर्क पर स्थित प्रक्रियाओं के बीच हो सकता है।

IPC का मुख्य उद्देश्य एक मल्टीप्रोसेसिंग वातावरण में डेटा कंसिस्टेंसी और प्रोसेस सिंक्रोनाइजेशन सुनिश्चित करना है। यह विभिन्न प्रकार के तंत्रों जैसे मैसेज पासिंग, शेयर्ड मेमोरी, पाइप्स, सॉकेट्स आदि के माध्यम से किया जाता है।
इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन (IPC) किसी भी मल्टीप्रोसेसिंग सिस्टम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो विभिन्न प्रक्रियाओं के बीच डेटा और सूचनाओं के आदान-प्रदान को सक्षम बनाता है। IPC का उपयोग पाइप्स, साझा मेमोरी, मैसेज पासिंग, सॉकेट्स, सिग्नल्स, और संदेश कतारों जैसे विभिन्न तरीकों के माध्यम से किया जाता है।
 यह सुनिश्चित करता है कि प्रक्रियाएँ एक-दूसरे के साथ सही ढंग से संचार कर सकें और डेटा असंगतता, डेडलॉक, स्टार्वेशन जैसी समस्याओं से बचा जा सके। IPC के बिना, मल्टीप्रोसेसिंग वातावरण में प्रक्रियाओं के बीच समन्वय और संसाधनों का सही ढंग से उपयोग करना कठिन हो जाता है।


Need for Interprocess Communication in Operating System in Hindi | इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन की आवश्यकता : 

  • संसाधन साझाकरण (Resource Sharing): विभिन्न प्रक्रियाओं को संसाधन जैसे फ़ाइलें, डेटा, या डिवाइस को साझा करना पड़ता है। IPC यह सुनिश्चित करता है कि ये संसाधन सही ढंग से और सुरक्षित तरीके से साझा किए जा सकें।
  • डेटा एक्सचेंज (Data Exchange): जब कई प्रक्रियाएँ एक साथ काम करती हैं, तो उन्हें एक-दूसरे से डेटा साझा करने की आवश्यकता होती है। IPC विभिन्न प्रक्रियाओं के बीच डेटा का आदान-प्रदान करने में मदद करता है।
  • प्रोसेस सिंक्रोनाइजेशन (Process Synchronization): IPC यह सुनिश्चित करता है कि प्रक्रियाएँ एक-दूसरे के साथ समन्वयित हों ताकि कोई भी प्रक्रिया अपने कार्य के बीच में अवरोध उत्पन्न न करे और सभी प्रक्रियाएँ एकसाथ कुशलतापूर्वक काम कर सकें।
  • मॉड्यूलर प्रोग्रामिंग (Modular Programming): IPC का उपयोग करते हुए बड़ी समस्याओं को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ा जा सकता है, जहाँ हर हिस्सा एक अलग प्रक्रिया के रूप में काम करता है। ये प्रक्रियाएँ आपस में IPC के ज़रिए संचार करती हैं और बड़ी समस्याओं को हल करने में मदद करती हैं।

Methods of Interprocess Communication in Operating System in Hindi | इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन के तरीके :

IPC विभिन्न तरीकों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता है। इनमें से कुछ प्रमुख तरीके निम्नलिखित हैं:

पाइप्स (Pipes): पाइप्स एक सामान्य IPC तंत्र है, जो डेटा की एक-तरफा संचार सुविधा प्रदान करता है। इसमें एक प्रक्रिया डेटा को पाइप में लिखती है और दूसरी प्रक्रिया इसे पढ़ती है। पाइप्स का उपयोग मुख्य रूप से अभिभावक और शिशु प्रक्रियाओं के बीच डेटा साझा करने के लिए किया जाता है।

पाइप्स के दो प्रकार होते हैं:

  • अनाम पाइप (Anonymous Pipes): यह केवल एक ही मशीन पर चलने वाली प्रक्रियाओं के बीच डेटा भेजने के लिए उपयोग किया जाता है।
  • नामित पाइप (Named Pipes): यह विभिन्न मशीनों पर चलने वाली प्रक्रियाओं के बीच भी संचार करने की अनुमति देता है और यह अधिक लचीला होता है।

 साझा मेमोरी (Shared Memory) : साझा मेमोरी IPC का सबसे तेज़ तरीका है, जहाँ एक मेमोरी ब्लॉक विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा साझा किया जाता है। इसमें एक प्रक्रिया मेमोरी ब्लॉक में डेटा लिखती है और दूसरी प्रक्रिया इसे पढ़ती है। इसके लिए एक विशेष सिंक्रोनाइजेशन तंत्र की आवश्यकता होती है,
 जैसे कि सेमाफोर या म्यूटेक्स, ताकि डेटा की सुसंगतता बनी रहे।

साझा मेमोरी में एक प्रमुख लाभ यह है कि इसमें डेटा ट्रांसफर बहुत तेज होता है क्योंकि डेटा मेमोरी में सीधा एक्सेस किया जाता है। हालाँकि, इसे सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त सावधानी की आवश्यकता होती है।

 मैसेज पासिंग (Message Passing): मैसेज पासिंग एक ऐसी विधि है जिसमें एक प्रक्रिया एक संदेश (मैसेज) भेजती है और दूसरी प्रक्रिया उसे प्राप्त करती है। यह डेटा एक्सचेंज करने का सरल और सुरक्षित तरीका है क्योंकि यह प्रक्रियाओं के बीच सीधे संवाद स्थापित करता है और इसमें साझा मेमोरी की कोई आवश्यकता नहीं होती।

मैसेज पासिंग के दो प्रमुख प्रकार हैं:

  • सिंक्रोनस मैसेज पासिंग (Synchronous Message Passing): इसमें संदेश भेजने वाली प्रक्रिया तब तक रुकी रहती है जब तक कि प्राप्त करने वाली प्रक्रिया संदेश प्राप्त नहीं कर लेती।
  • असिंक्रोनस मैसेज पासिंग (Asynchronous Message Passing): इसमें संदेश भेजने वाली प्रक्रिया तुरंत आगे बढ़ सकती है, और प्राप्त करने वाली प्रक्रिया संदेश को बाद में भी प्राप्त कर सकती है।

 सॉकेट्स (Sockets): सॉकेट्स का उपयोग विभिन्न नेटवर्क्स पर स्थित प्रक्रियाओं के बीच संचार करने के लिए किया जाता है। सॉकेट्स की मदद से एक प्रक्रिया दूसरी प्रक्रिया के साथ नेटवर्क कनेक्शन स्थापित करती है और डेटा का आदान-प्रदान करती है। यह तरीका मुख्य रूप से क्लाइंट-सरवर मॉडल में उपयोग किया जाता है, जहाँ एक क्लाइंट सॉकेट के माध्यम से सरवर से जुड़ता है।

 सिग्नल्स (Signals): सिग्नल्स एक प्रक्रिया को दूसरी प्रक्रिया को कुछ घटना या स्थिति की सूचना देने के लिए उपयोग किए जाते हैं। जब एक प्रक्रिया को किसी दूसरी प्रक्रिया को सूचित करना होता है कि कोई विशेष घटना घटित हुई है, तो वह सिग्नल भेज सकती है। उदाहरण के लिए, जब कोई प्रक्रिया समाप्त हो जाती है, तो वह दूसरी प्रक्रिया को समाप्ति सिग्नल भेज सकती है।

 संदेश कतारें (Message Queues): संदेश कतारें एक ऐसी प्रणाली है जिसमें एक कतार बनाई जाती है जहाँ एक प्रक्रिया अपने संदेश डाल सकती है और दूसरी प्रक्रिया कतार से उन्हें पढ़ सकती है। यह प्रणाली दोनों प्रक्रियाओं के बीच संचार के लिए सुरक्षित और विश्वसनीय होती है। इसमें मैसेज की प्राथमिकता भी निर्धारित की जा सकती है, जिससे महत्वपूर्ण संदेशों को पहले प्रोसेस किया जा सके।

Problems in Interprocess Communication in Operating System in Hindi | इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन की समस्याएँ :

IPC के साथ कुछ समस्याएँ भी आती हैं, जिनका समाधान करना आवश्यक होता है:

  • डेटा असंगतता (Data Inconsistency): जब कई प्रक्रियाएँ एक ही डेटा या संसाधन का उपयोग करती हैं, तो डेटा असंगतता उत्पन्न हो सकती है। इसे हल करने के लिए सही सिंक्रोनाइजेशन तंत्र का उपयोग आवश्यक है।
  • डेडलॉक (Deadlock): डेडलॉक तब उत्पन्न होता है जब दो या अधिक प्रक्रियाएँ एक दूसरे के संसाधनों की प्रतीक्षा करती हैं और अंततः कोई भी आगे नहीं बढ़ पाती। IPC में डेडलॉक को रोकने के लिए डेडलॉक डिटेक्शन और रिकवरी तकनीकों का उपयोग किया जाता है।
  • स्टार्वेशन (Starvation): स्टार्वेशन तब होती है जब एक प्रक्रिया को लंबे समय तक संसाधन नहीं मिलते, जबकि अन्य प्रक्रियाएँ लगातार उनका उपयोग करती रहती हैं। इसे हल करने के लिए उचित शेड्यूलिंग और प्राथमिकता तंत्र का उपयोग किया जाता है।
  • सुरक्षा (Security): IPC के दौरान यह सुनिश्चित करना आवश्यक होता है कि प्रक्रियाएँ केवल उन्हीं डेटा और संसाधनों तक पहुँच सकें जिनकी उन्हें आवश्यकता है। किसी भी असुरक्षित या अनधिकृत एक्सेस को रोकने के लिए सही सुरक्षा तंत्र का उपयोग किया जाता है।

Examples of Interprocess Communication in Operating System in Hindi | इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन के उदाहरण :

  • वेब ब्राउज़र और वेब सर्वर का संचार: जब आप वेब ब्राउज़र के माध्यम से किसी वेबसाइट को एक्सेस करते हैं, तो ब्राउज़र एक HTTP अनुरोध भेजता है, और सर्वर एक HTTP प्रतिक्रिया के रूप में वेबसाइट का डेटा वापस भेजता है। यह संचार सॉकेट्स के माध्यम से होता है और इंटरप्रोसेस कम्युनिकेशन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम के घटकों के बीच संचार: ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न घटक, जैसे कि फाइल मैनेजमेंट, प्रोसेस शेड्यूलिंग, और मेमोरी मैनेजमेंट, एक-दूसरे के साथ IPC के माध्यम से संचार करते हैं। उदाहरण के लिए, जब एक प्रक्रिया को डेटा स्टोर करना होता है, तो वह फाइल सिस्टम से संपर्क करती है और इसे संचारित करती है।
  • क्लाउड सेवाओं के बीच डेटा आदान-प्रदान: जब आप किसी क्लाउड स्टोरेज सेवा पर फ़ाइल अपलोड करते हैं, तो बैकएंड प्रक्रियाएँ IPC के माध्यम से एक-दूसरे से डेटा का आदान-प्रदान करती हैं, ताकि आपकी फ़ाइल सही ढंग से स्टोर हो सके और अन्य उपयोगकर्ताओं द्वारा एक्सेस की जा सके।

In this Chapter

Inter process Communication in Hindi
Distributed System in Hindi
Real Time System in Hindi
System Calls in Hindi
System Program in Hindi
Structure of Operating System in Hindi
Layers Design of Structure in Hindi
Unix in Hindi
Virtual Machine in Hindi
Kernel-Based Operating System in Hindi
Process Concept in Hindi
Interacting Processes in Hindi
Threads in Hindi
Fundamental of Schedulling in Hindi
Scheduling Criteria in Hindi
Long Medium Short Term Scheduling in Hindi
Scheduling Algorithms in Hindi
Structure of Concurrent System in Hindi
Critical Region in Hindi
Critical Section in Hindi
Monitor in Hindi
Semaphores in Hindi
Semaphores Implementation & Uses in Hindi
Logical and Physical Address in Hindi
Swapping in Hindi
Contiguous Allocation in Hindi
Segmentation in Hindi
Paging in Hindi
Paging with Segmentation in Hindi
kernel Memory Allocation in Hindi
Page Replacement Algorithms in Hindi
Virtual Memory in Hindi
Virtual Memory with demand Paging in Hindi
Deadlock & Characterization in Hindi
Methods for Handling Deadlocks in Hindi
Deadlock Thrashing in Hindi
Allocation of Frames in Hindi
Virtual Memory using Segmentation in Hindi
Interprocess Communication protocol in Hindi
Network Operating System in Hindi
Design Issues in Distributed File System in Hindi
Network Structure in Hindi
Structure Distributed System in Hindi
File System and Coordination in Hindi
Linux in Hindi
Commands of Linux in Hindi | लिनक्स के कमांड्स हिंदी में
Programmer Interface & File manipulation in Hindi
Process control in Linux in Hindi
Linux Kernel & Signals in Hindi
File System in Linux in Hindi
block & inodes in Hindi
System Editor in Hindi
Character Transliteration in Hindi
ED in Hindi
Vi Editor & There Commands in Hindi
Shell Script in Hindi
Looping & Decision Making in Hindi
Variables & File name Expansion in Hindi
Array in Hindi OS
Sub Program in Hindi
C interface with Linux in Hindi
Simpel Shell Programs in Hindi
BCA Part-1 | Operating Systems | Semester-I | MDSU Exam Paper 2023 (Held in 2024)
What is Operating System (OS) in Hindi
Operating System (OS) All Important Questions and Answers in Hindi (MDSU)
BCA || Operating System 2025 Paper || MDSU Exam Paper
BCA | OS(Operating System) 2023 Paper | MDSU Exam Paper
Type of Operating System in Hindi
Goals of Operating System in Hindi
Operation of Operating system in Hindi
Resource Allocation & Functions in Hindi
class of Operating system in Hindi
Batch Processing in Hindi
Multi Processing in Hindi
Time Sharing in Hindi