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Monitor in Hindi

Monitor in Operating System in Hindi | ऑपरेटिंग सिस्टम में मॉनिटर हिंदी में :


  • ऑपरेटिंग सिस्टम में मॉनिटर (Monitor) एक उच्च स्तरीय सिंक्रोनाइजेशन तंत्र है, जिसका उपयोग प्रक्रियाओं के बीच समन्वय और म्यूचुअल एक्सक्लूज़न (Mutual Exclusion) को सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।
  •  मॉनिटर एक प्रोग्रामिंग कंस्ट्रक्ट है जो प्रोग्रामिंग लैंग्वेज के स्तर पर संसाधनों और प्रक्रियाओं को नियंत्रित करता है। इसका उद्देश्य साझा संसाधनों तक एक समय में केवल एक प्रक्रिया को पहुंचने देना होता है, ताकि डेटा असंगतता और रेस कंडीशन जैसी समस्याओं से बचा जा सके।
  • मॉनिटर एक महत्वपूर्ण सिंक्रोनाइजेशन तंत्र है जो प्रक्रियाओं के बीच समन्वय और संसाधनों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित करता है। मॉनिटर का उपयोग जटिल सिस्टम में म्यूचुअल एक्सक्लूज़न और संसाधन प्रबंधन के लिए किया जाता है,
  •  लेकिन इसे प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए उचित योजना और संरचना की आवश्यकता होती है।

Introduction to Monitor | मॉनिटर का परिचय : 

मॉनिटर को एक संरचित तरीके से संसाधनों और प्रक्रियाओं का प्रबंधन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह ऑपरेटिंग सिस्टम में म्यूचुअल एक्सक्लूज़न को लागू करता है, जिसका अर्थ है कि एक समय में केवल एक प्रक्रिया ही मॉनिटर के भीतर कोड को निष्पादित कर सकती है।

 मॉनिटर एक ओब्जेक्ट की तरह कार्य करता है, जिसमें डेटा और इससे संबंधित प्रक्रियाएँ या कार्य होते हैं, और इन कार्यों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने के लिए यह एक प्रकार का लॉकिंग सिस्टम प्रदान करता है।

Structure of Monitor in Operating System in Hindi | मॉनिटर की संरचना :

मॉनिटर की संरचना तीन मुख्य तत्वों से मिलकर बनी होती है:

  • शेयर किया गया डेटा (Shared Data): मॉनिटर में डेटा का एक सेट होता है, जिसे संसाधन के रूप में माना जाता है और यह डेटा मॉनिटर की प्रक्रियाओं द्वारा साझा किया जाता है। इसका उद्देश्य उन प्रक्रियाओं को डेटा तक नियंत्रित पहुंच प्रदान करना होता है जो मॉनिटर के अंदर काम कर रही होती हैं।

  • प्रवेश प्रक्रियाएँ (Entry Procedures): मॉनिटर में एंट्री पॉइंट्स होते हैं जिनके माध्यम से प्रक्रियाएँ मॉनिटर के अंदर प्रवेश करती हैं। ये एंट्री पॉइंट्स विशेष प्रक्रियाएँ होती हैं जिन्हें केवल मॉनिटर की सीमा के भीतर ही निष्पादित किया जा सकता है।

  • सिग्नल और वेट ऑपरेशन (Signal and Wait Operations): मॉनिटर में कंडीशन वेरिएबल्स का उपयोग किया जाता है जो प्रक्रिया के निष्पादन को नियंत्रित करते हैं। अगर कोई संसाधन उपलब्ध नहीं है, तो प्रक्रिया प्रतीक्षा करती है (wait) और जब संसाधन उपलब्ध होता है, तो उसे सिग्नल (signal) भेजा जाता है।

Functioning of Monitor in Operating System in Hindi | मॉनिटर का कार्य :

  • मॉनिटर का मुख्य कार्य म्यूचुअल एक्सक्लूज़न को लागू करना और प्रक्रिया सिंक्रोनाइजेशन को आसान बनाना है। मॉनिटर में एक समय में केवल एक ही प्रक्रिया प्रवेश कर सकती है और मॉनिटर के अंदर मौजूद डेटा या संसाधनों का उपयोग कर सकती है। जब प्रक्रिया मॉनिटर से बाहर जाती है, तो अन्य प्रक्रियाओं को मॉनिटर के अंदर प्रवेश करने की अनुमति दी जाती है।
  • मॉनिटर में कंडीशन वेरिएबल्स (Condition Variables) का उपयोग किया जाता है, जिनके माध्यम से प्रक्रिया यह तय करती है कि उसे कब संसाधन का उपयोग करने की अनुमति मिलेगी।
  • जब कोई प्रक्रिया मॉनिटर में प्रवेश करती है और उसे संसाधन नहीं मिल पाता, तो वह Wait() ऑपरेशन का उपयोग करती है।
  • जब संसाधन उपलब्ध हो जाता है, तो मॉनिटर उसे Signal() ऑपरेशन के माध्यम से सूचित करता है।

Features of Monitor in Operating System in Hindi | मॉनिटर की विशेषताएँ : 

  • म्यूचुअल एक्सक्लूज़न (Mutual Exclusion): मॉनिटर में एक समय में केवल एक ही प्रक्रिया प्रवेश कर सकती है। अन्य सभी प्रक्रियाएँ तब तक प्रतीक्षा करती हैं जब तक पहली प्रक्रिया मॉनिटर से बाहर न हो जाए।
  • कंडीशन वेरिएबल्स (Condition Variables): मॉनिटर में कंडीशन वेरिएबल्स का उपयोग किया जाता है, जो प्रक्रियाओं के बीच समन्वय सुनिश्चित करते हैं। यह संसाधनों के उचित उपयोग को नियंत्रित करते हैं।
  • लॉकिंग मैकेनिज्म (Locking Mechanism): मॉनिटर में प्रक्रियाएँ जब भी प्रवेश करती हैं, तो ऑटोमैटिक रूप से संसाधनों को लॉक कर दिया जाता है और जैसे ही प्रक्रिया मॉनिटर से बाहर निकलती है, संसाधन स्वतः अनलॉक हो जाता है।

Types of Monitors in Operating System in Hindi | मॉनिटर के प्रकार :

मॉनिटर को उनके कार्यान्वयन और उनके द्वारा प्रदान की गई सुविधाओं के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। मॉनिटर के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:

  • स्ट्रक्चर्ड मॉनिटर (Structured Monitor): यह मॉनिटर का सबसे सामान्य प्रकार है। इसमें प्रक्रियाओं के बीच समन्वय और म्यूचुअल एक्सक्लूज़न को संरचित तरीके से लागू किया जाता है।
  • स्ट्रक्चर्ड मॉनिटर में कंडीशन वेरिएबल्स का उपयोग किया जाता है, और जब किसी संसाधन का उपयोग करने की आवश्यकता होती है, तो प्रक्रिया मॉनिटर में प्रवेश करती है और संसाधन के उपलब्ध होने की प्रतीक्षा करती है।
  • नॉन-स्ट्रक्चर्ड मॉनिटर (Non-Structured Monitor): नॉन-स्ट्रक्चर्ड मॉनिटर वह होते हैं जिनमें म्यूचुअल एक्सक्लूज़न लागू करने के लिए कोई संरचित तरीका नहीं होता है।
  • इसमें मॉनिटर का उपयोग स्वतंत्र रूप से किया जाता है, और प्रक्रिया को संसाधनों का उपयोग करने की अनुमति दी जाती है चाहे संसाधन उपलब्ध हो या न हो। इस प्रकार के मॉनिटर का उपयोग बहुत कम होता है क्योंकि यह डेडलॉक और डेटा असंगतता की समस्या उत्पन्न कर सकता है।
  • कंडीशन मॉनिटर (Condition Monitor): यह मॉनिटर विशेष रूप से कंडीशन वेरिएबल्स के उपयोग पर केंद्रित होते हैं। जब कोई संसाधन उपलब्ध नहीं होता, तो प्रक्रिया प्रतीक्षा करती है और कंडीशन वेरिएबल्स के माध्यम से यह तय किया जाता है कि प्रक्रिया कब मॉनिटर में प्रवेश कर सकेगी।
  • कंडीशन मॉनिटर उन मामलों में उपयोगी होते हैं जहां प्रक्रियाओं के निष्पादन का अनुक्रम महत्वपूर्ण होता है।
  • ऑब्जेक्ट मॉनिटर (Object Monitor): यह मॉनिटर ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग में उपयोग किए जाते हैं। यहां मॉनिटर एक ऑब्जेक्ट की तरह कार्य करता है, जिसमें डेटा और प्रक्रियाएँ दोनों को एक साथ नियंत्रित किया जाता है।
  • इस प्रकार का मॉनिटर जावा जैसी ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड भाषाओं में उपयोग होता है, जिसमें ऑब्जेक्ट्स को सिंक्रोनाइज किया जाता है।

Advantages of Monitor in Operating System in Hindi | मॉनिटर के लाभ : 

  • सरलता (Simplicity): मॉनिटर सिंक्रोनाइजेशन को सरल बनाता है, क्योंकि इसमें प्रक्रियाओं के बीच समन्वय को स्वचालित रूप से नियंत्रित किया जाता है। प्रोग्रामर को मैन्युअली म्यूचुअल एक्सक्लूज़न लागू करने की आवश्यकता नहीं होती।
  • सुरक्षा (Safety):मॉनिटर म्यूचुअल एक्सक्लूज़न को सुनिश्चित करता है, जिससे डेडलॉक और रेस कंडीशन जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है। मॉनिटर केवल एक समय में एक ही प्रक्रिया को संसाधन तक पहुंचने की अनुमति देता है।
  • स्वचालित संसाधन प्रबंधन (Automatic Resource Management): मॉनिटर में प्रक्रियाओं के संसाधनों का उपयोग ऑटोमैटिक होता है। जब कोई प्रक्रिया मॉनिटर में प्रवेश करती है, तो संसाधन लॉक हो जाता है और जब वह बाहर निकलती है, तो संसाधन स्वतः अनलॉक हो जाता है।
  • कोड का पुनः उपयोग (Reusability of Code): मॉनिटर की संरचना का उपयोग बार-बार किया जा सकता है, जिससे सिस्टम के अन्य हिस्सों के साथ इसे फिर से उपयोग करना आसान हो जाता है।

Disadvantages of Monitor in Operating System in Hindi | मॉनिटर की नुकसान  : 

  • जटिलता (Complexity):मॉनिटर का उपयोग करना और इसे बड़े सिस्टम में लागू करना जटिल हो सकता है। खासकर तब जब कई प्रक्रियाएँ एक साथ काम कर रही हों और उन्हें विभिन्न मॉनिटर में समन्वित करना हो।
  • भाषा-विशिष्टता (Language-Specific):मॉनिटर कुछ विशेष प्रोग्रामिंग भाषाओं में ही उपलब्ध होते हैं, जैसे कि जावा। वे सभी भाषाओं में उपयोग नहीं किए जा सकते।
  • डिबगिंग की कठिनाई (Difficulty in Debugging):मॉनिटर का उपयोग करते समय सिस्टम की जटिलता बढ़ जाती है, जिससे इसे डिबग करना कठिन हो जाता है, विशेष रूप से तब जब विभिन्न प्रक्रियाएं एक साथ मॉनिटर का उपयोग कर रही हों।

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