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Deadlock Thrashing in Hindi

Deadlock Thrashing in Operating System in Hindi | ऑपरेटिंग सिस्टम में  डेडलॉक थ्रैशिंग  हिंदी में : 



  • डेडलॉक थ्रैशिंग एक ऐसी स्थिति है जहाँ सिस्टम के संसाधन अत्यधिक बर्बाद हो जाते हैं और प्रक्रियाएँ उपयोगी कार्य करने में विफल रहती हैं क्योंकि सिस्टम लगातार पेजिंग, स्वैपिंग या डेडलॉक रिकवरी जैसी प्रक्रियाओं में फंसा रहता है। 
  • यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब सिस्टम पर बहुत अधिक लोड हो जाता है और उपलब्ध संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग नहीं हो पाता। थ्रैशिंग के कारण सिस्टम की परफॉर्मेंस अत्यधिक घट जाती है और अंततः सिस्टम डेडलॉक जैसी स्थितियों में फंस सकता है। इसे रोकने के लिए उचित संसाधन प्रबंधन और एल्गोरिदम की आवश्यकता होती है।
  • डेडलॉक थ्रैशिंग एक गंभीर समस्या है, जो सिस्टम की परफॉर्मेंस को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। इससे बचने के लिए उपयुक्त संसाधन प्रबंधन, मल्टीप्रोग्रामिंग की सीमा और बेहतर मेमोरी प्रबंधन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए।

  थ्रैशिंग की स्थिति में, प्रक्रियाओं के लिए संसाधनों का उचित आवंटन और उपयोग अत्यंत आवश्यक हो जाता है ताकि सिस्टम स्थिर और सुचारू रूप से काम कर सके।


डेडलॉक थ्रैशिंग क्या है? (What is Deadlock Thrashing?)

  • थ्रैशिंग तब होती है जब सिस्टम में इतनी अधिक स्वैपिंग (Swapping) या पेजिंग (Paging) हो जाती है कि CPU का अधिकांश समय इसी प्रक्रिया में चला जाता है और वास्तविक कार्य बहुत कम हो पाता है।
  • जब सिस्टम पर काम कर रही प्रक्रियाओं की संख्या बढ़ जाती है और उनके लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होते, तो प्रक्रियाएँ अपने पेजेस को लगातार मेमोरी से स्वैप इन और स्वैप आउट करती रहती हैं। इससे पेज फॉल्ट (Page Fault) की संख्या बहुत बढ़ जाती है, और सिस्टम की परफॉर्मेंस गिर जाती है।

थ्रैशिंग की स्थिति में:

  • प्रक्रियाएँ लगातार स्वैपिंग करती हैं: सिस्टम की RAM में जब जगह नहीं बचती, तो प्रक्रिया के कुछ हिस्सों को डिस्क पर स्वैप आउट किया जाता है और नई प्रक्रियाएँ मेमोरी में लाने के लिए पुरानी प्रक्रियाओं को बाहर किया जाता है।
  • CPU की उपयोगिता घट जाती है: क्योंकि CPU वास्तविक काम करने की बजाय लगातार पेजिंग और स्वैपिंग में व्यस्त रहता है, जिससे कार्य की उत्पादकता बहुत कम हो जाती है।
  • सिस्टम धीमा हो जाता है: पेजिंग और स्वैपिंग का निरंतर चक्र सिस्टम को अत्यधिक धीमा कर देता है, और परिणामस्वरूप उपयोगकर्ता अनुभव में गिरावट आती है।

Causes of Deadlock Thrashing in Operating System in Hindi | डेडलॉक थ्रैशिंग के कारण : 

डेडलॉक थ्रैशिंग कई कारणों से हो सकता है, जिनमें से मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • मेमोरी की अपर्याप्तता (Insufficient Memory): जब सिस्टम में प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त मुख्य मेमोरी नहीं होती, तो स्वैपिंग की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इससे CPU का अधिक समय पेजिंग और स्वैपिंग में बर्बाद होता है, और वास्तविक काम कम हो पाता है।
  • अत्यधिक मल्टीप्रोग्रामिंग (Excessive Multiprogramming): जब सिस्टम में बहुत अधिक प्रक्रियाएँ एक साथ चलाई जाती हैं, तो CPU और मेमोरी पर भार बढ़ जाता है। इससे स्वैपिंग और पेजिंग की जरूरत बढ़ती है, और थ्रैशिंग की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • संसाधन प्रतिद्वंद्विता (Resource Contention): जब कई प्रक्रियाएँ एक ही संसाधन के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं, तो उन्हें संसाधन प्राप्त करने के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है। इससे प्रक्रियाओं के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और थ्रैशिंग की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • प्रक्रिया की जरूरतों का गलत अनुमान (Incorrect Process Needs): जब सिस्टम में प्रक्रियाओं को आवंटित संसाधनों का गलत आकलन किया जाता है, तो उन्हें मेमोरी में अधिक पेजेस की जरूरत पड़ सकती है। इससे लगातार स्वैपिंग और पेजिंग होती रहती है और थ्रैशिंग उत्पन्न होता है।

Effects of Deadlock Thrashing in Operating System in Hindi | डेडलॉक थ्रैशिंग के प्रभाव : 

डेडलॉक थ्रैशिंग के कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं, जो सिस्टम की परफॉर्मेंस और कार्यक्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं:

  • प्रदर्शन में भारी गिरावट (Severe Performance Degradation): थ्रैशिंग की स्थिति में CPU का अधिकतर समय स्वैपिंग में बर्बाद होता है। इसके कारण सिस्टम में वास्तविक कार्य करने की क्षमता बहुत कम हो जाती है।
  • लंबी प्रतिक्रिया समय (Increased Response Time): थ्रैशिंग के दौरान सिस्टम के संसाधन अत्यधिक व्यस्त हो जाते हैं, जिससे प्रक्रियाओं को आवश्यक संसाधन प्राप्त करने में अधिक समय लगता है। इसका परिणाम यह होता है कि उपयोगकर्ता को प्रतिक्रिया मिलने में बहुत देर लगती है।
  • प्रोडक्टिविटी का ह्रास (Reduced Productivity): थ्रैशिंग की स्थिति में सिस्टम उत्पादकता बहुत कम हो जाती है क्योंकि प्रक्रियाएँ बार-बार स्वैपिंग और पेजिंग में लगी रहती हैं, और उनका वास्तविक काम करने का समय बहुत कम हो जाता है।
  • सिस्टम हैंग या क्रैश (System Hang or Crash): अत्यधिक थ्रैशिंग से सिस्टम संसाधनों की पूरी तरह से बर्बादी हो सकती है, जिसके परिणामस्वरूप सिस्टम हैंग हो सकता है या फिर पूरी तरह से क्रैश हो सकता है।

Methods to Avoid Deadlock Thrashing in Operating System in Hindi | डेडलॉक थ्रैशिंग से बचने के उपाय : 

थ्रैशिंग से बचने के लिए कुछ प्रभावी उपाय निम्नलिखित हैं:

  • मल्टीप्रोग्रामिंग की सीमा (Limit Multiprogramming): सिस्टम पर एक साथ चलने वाली प्रक्रियाओं की संख्या को सीमित करके थ्रैशिंग से बचा जा सकता है। जब सिस्टम पर कम प्रक्रियाएँ चलेंगी, तो पेजिंग और स्वैपिंग की आवश्यकता कम होगी और संसाधनों का सही ढंग से उपयोग हो सकेगा।
  • वर्किंग सेट मॉडल का उपयोग (Use Working Set Model): वर्किंग सेट मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक प्रक्रिया के लिए उसकी आवश्यक मेमोरी पहले से ही आवंटित हो। इससे यह सुनिश्चित होता है कि प्रक्रिया को स्वैपिंग और पेजिंग में बार-बार न जाना पड़े। यह थ्रैशिंग को रोकने का एक प्रभावी तरीका है।
  • स्वैपिंग की सीमा (Limit Swapping): स्वैपिंग की प्रक्रिया को सीमित करके भी थ्रैशिंग को रोका जा सकता है। इसके लिए सिस्टम में मेमोरी प्रबंधन एल्गोरिदम को संशोधित किया जा सकता है ताकि स्वैपिंग कम से कम हो और मेमोरी का कुशलतापूर्वक उपयोग हो।
  • प्राथमिकता आधारित संसाधन आवंटन (Priority-Based Resource Allocation): प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर संसाधन आवंटित किए जा सकते हैं, ताकि महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को पहले संसाधन प्राप्त हो सकें और वे थ्रैशिंग में न फंसे। इससे सिस्टम की परफॉर्मेंस बेहतर हो सकती है।


 Deadlock Avoidance Strategies in Operating System in Hindi | डेडलॉक से बचने की रणनीतियाँ :

  • डेडलॉक से बचने की रणनीतियाँ, जैसे बैंकर एल्गोरिथ्म (Banker’s Algorithm), थ्रैशिंग से बचने में मदद कर सकती हैं। ये एल्गोरिदम सुनिश्चित करते हैं कि सिस्टम में संसाधनों का कुशलतापूर्वक उपयोग हो और किसी भी प्रक्रिया को संसाधन न मिलने की स्थिति न बने।
  • पेज रिप्लेसमेंट एल्गोरिदम का उपयोग (Use of Page Replacement Algorithms): बेहतर पेज रिप्लेसमेंट एल्गोरिदम का उपयोग करके थ्रैशिंग की स्थिति को कम किया जा सकता है। जैसे कि Least Recently Used (LRU) और First-In, First-Out (FIFO) एल्गोरिदम पेज फॉल्ट की संख्या को कम करने में मदद करते हैं, जिससे थ्रैशिंग की संभावना घटती है।

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