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Paging in Hindi

Paging in Operating System in Hindi | ऑपरेटिंग सिस्टम में पेजिंग हिंदी में  : 



  • पेजिंग (Paging) एक महत्वपूर्ण मेमोरी मैनेजमेंट तकनीक है जिसका उपयोग ऑपरेटिंग सिस्टम में किया जाता है ताकि मुख्य मेमोरी (RAM) को छोटे-छोटे हिस्सों में विभाजित किया जा सके। इसका मुख्य उद्देश्य फ्रेगमेंटेशन (Fragmentation) की समस्या को हल करना और मेमोरी आवंटन को 

  • अधिक कुशल बनाना है। पेजिंग का उपयोग वर्चुअल मेमोरी (Virtual Memory) सिस्टम में भी किया जाता है, जहाँ बड़ी प्रक्रियाओं को छोटे-छोटे पृष्ठों (pages) में विभाजित किया जाता है, जिन्हें मुख्य मेमोरी में भौतिक पृष्ठों (physical pages) पर लोड किया जाता है।
  • पेजिंग एक शक्तिशाली मेमोरी मैनेजमेंट तकनीक है जो ऑपरेटिंग सिस्टम को प्रक्रिया के पृष्ठों को मुख्य मेमोरी के फ्रेम में कुशलता से प्रबंधित करने की अनुमति देती है। इसके विभिन्न प्रकार हैं, जिनमें सिंगल-लेवल पेजिंग, मल्टी-लेवल पेजिंग, इनवर्टेड पेजिंग, और डिमांड पेजिंग शामिल हैं। 
  • पेजिंग मेमोरी का बेहतर उपयोग करने में सहायक है, लेकिन इसके साथ कुछ ओवरहेड और विलंब भी जुड़ा हुआ है।


पेजिंग क्या है? (What is Paging?)

  • पेजिंग एक मेमोरी मैनेजमेंट स्कीम है, जिसमें प्रक्रिया की लॉजिकल मेमोरी (logical memory) को छोटे-छोटे स्थिर आकार के ब्लॉकों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें पृष्ठ (Pages) कहा जाता है। 
  • इसी प्रकार, मुख्य मेमोरी को भी समान आकार के ब्लॉकों में विभाजित किया जाता है, जिन्हें फ्रेम (Frames) कहा जाता है। पेजिंग तकनीक का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी पृष्ठ किसी भी फ्रेम में लोड किया जा सकता है, जिससे आंतरिक फ्रेगमेंटेशन (Internal Fragmentation) कम होता है।

Key Concepts of Paging in Operating System in Hindi | पेजिंग की मुख्य अवधारणाएँ : 

1. पृष्ठ (Pages): यह लॉजिकल मेमोरी के छोटे-छोटे भाग होते हैं। एक प्रक्रिया की पूरी मेमोरी को पृष्ठों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक पृष्ठ का आकार समान होता है और यह आमतौर पर 4KB या 8KB के होते हैं, लेकिन यह सिस्टम की डिजाइन पर निर्भर करता है।

2. फ्रेम (Frames): यह मुख्य मेमोरी के छोटे-छोटे ब्लॉक्स होते हैं, जिनका आकार पृष्ठों के आकार के समान होता है। फ्रेम वह जगह होती है जहाँ पृष्ठों को लोड किया जाता है। फ्रेम की संख्या फिजिकल मेमोरी के आकार पर निर्भर करती है।

3. पेज टेबल (Page Table): पेज टेबल वह डेटा संरचना है जिसका उपयोग लॉजिकल पते (logical addresses) को भौतिक पते (physical addresses) में अनुवादित करने के लिए किया जाता है। जब कोई प्रक्रिया मेमोरी में कोई पृष्ठ एक्सेस करना चाहती है, तो पेज टेबल से उस पृष्ठ का फ्रेम नंबर प्राप्त किया जाता है, और उस फ्रेम के आधार पर भौतिक पता निकाला जाता है।

Example of Paging Key  in Operating System in Hindi | पेजिंग का उदाहरण :

मान लीजिए कि एक प्रणाली में 4KB का पृष्ठ आकार है और कोई प्रक्रिया 16KB मेमोरी की आवश्यकता रखती है। इस स्थिति में प्रक्रिया की मेमोरी को 4 पृष्ठों में विभाजित किया जाएगा (16KB / 4KB = 4 pages)। अब मुख्य मेमोरी में ये पृष्ठ किसी भी फ्रेम में स्टोर किए जा सकते हैं। उदाहरण के लिए:

  • पेज 0 को फ्रेम 5 में स्टोर किया गया
  • पेज 1 को फ्रेम 2 में स्टोर किया गया
  • पेज 2 को फ्रेम 7 में स्टोर किया गया
  • पेज 3 को फ्रेम 4 में स्टोर किया गया
इस प्रकार, पेज टेबल इस मैपिंग को स्टोर करती है, जिससे लॉजिकल से भौतिक पते में अनुवाद किया जा सके।

Types of Paging in Operating System in Hindi | पेजिंग के प्रकार :

पेजिंग की कई प्रकार की स्कीम्स होती हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं:

1. सिंगल-लेवल पेजिंग (Single-Level Paging): इस प्रकार की पेजिंग में, केवल एक पेज टेबल का उपयोग किया जाता है, जो सीधे लॉजिकल पते से भौतिक पते को मैप करता है। इसका उपयोग छोटे सिस्टमों में होता है, जहाँ पेज टेबल छोटी होती है और इसे आसानी से मुख्य मेमोरी में स्टोर किया जा सकता है।

  • लाभ: सरल और जल्दी से अनुवाद।
  • हानि: यदि पेज टेबल बहुत बड़ी हो जाती है, तो इसे मैनेज करना कठिन हो जाता है।

2. मल्टी-लेवल पेजिंग (Multi-Level Paging): यदि पेज टेबल बहुत बड़ी हो जाती है, तो इसे प्रबंधित करना कठिन हो जाता है। इसलिए पेज टेबल को भी पृष्ठों में विभाजित किया जाता है। इस प्रकार की पेजिंग को मल्टी-लेवल पेजिंग कहा जाता है। इसमें पेज टेबल का अनुवाद कई स्तरों में किया जाता है।

  • लाभ: बड़ी पेज टेबल को भी आसानी से प्रबंधित किया जा सकता है।
  • हानि: अनुवाद की प्रक्रिया में विलंब हो सकता है, क्योंकि कई स्तरों से गुजरना पड़ता है।

3. इनवर्टेड पेजिंग (Inverted Paging): इस पद्धति में, प्रत्येक पेज टेबल एंट्री मुख्य मेमोरी के फ्रेम के अनुसार बनाई जाती है, न कि प्रक्रिया के पृष्ठों के अनुसार। इसका उपयोग तब किया जाता है जब बहुत बड़ी मुख्य मेमोरी हो और प्रक्रिया की पेज टेबल बहुत बड़ी हो जाए।

  • लाभ: मेमोरी का कुशल उपयोग।
  • हानि: पृष्ठ अनुवाद की जटिलता बढ़ जाती है।

4. डिमांड पेजिंग (Demand Paging): इस प्रकार की पेजिंग में, प्रक्रिया के सभी पृष्ठों को एक साथ मुख्य मेमोरी में लोड नहीं किया जाता। केवल उन्हीं पृष्ठों को लोड किया जाता है, जिनकी आवश्यकता होती है। यदि कोई पृष्ठ आवश्यक होता है और वह मेमोरी में उपलब्ध नहीं है, तो पेज फॉल्ट (Page Fault) उत्पन्न होता है और उसे डिस्क से लोड किया जाता है।

  • लाभ: मेमोरी का कुशल उपयोग, क्योंकि केवल आवश्यक पृष्ठ ही लोड होते हैं।
  • हानि: पेज फॉल्ट होने पर निष्पादन में देरी हो सकती है।

5. वर्चुअल पेजिंग (Virtual Paging): यह एक तकनीक है, जिसमें प्रोसेस को ऐसा अनुभव कराया जाता है जैसे उसकी पूरी मेमोरी मुख्य मेमोरी में है, जबकि वास्तव में केवल आवश्यक पृष्ठ ही मुख्य मेमोरी में होते हैं और शेष पृष्ठ डिस्क में संग्रहीत होते हैं। यह वर्चुअल मेमोरी सिस्टम में उपयोग होता है।

  • लाभ: बड़ी प्रक्रियाओं को सीमित मेमोरी में निष्पादित किया जा सकता है।
  • हानि: पेज फॉल्ट और डिस्क I/O के कारण प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

Advantages of Paging in Operating System in Hindi | पेजिंग के लाभ :

  • फ्रेगमेंटेशन की समस्या का हल (Eliminates Fragmentation): पेजिंग में, लॉजिकल मेमोरी के पृष्ठ और मुख्य मेमोरी के फ्रेम एक समान आकार के होते हैं, जिससे आंतरिक फ्रेगमेंटेशन की समस्या नहीं होती।
  • मेमोरी का कुशल उपयोग (Efficient Memory Usage): पेजिंग में प्रक्रिया के केवल आवश्यक पृष्ठों को ही मुख्य मेमोरी में लोड किया जाता है, जिससे मेमोरी का कुशल उपयोग होता है और अन्य प्रक्रियाओं के लिए अधिक स्थान उपलब्ध होता है।
  • वर्चुअल मेमोरी का समर्थन (Supports Virtual Memory): पेजिंग वर्चुअल मेमोरी के उपयोग को समर्थन देती है, जिससे बड़ी प्रक्रियाओं को भी सीमित मुख्य मेमोरी में निष्पादित किया जा सकता है।
  • लचीले मेमोरी आवंटन (Flexible Memory Allocation): पेजिंग में, प्रक्रियाओं के पृष्ठों को मुख्य मेमोरी में कहीं भी स्टोर किया जा सकता है, जिससे मेमोरी आवंटन लचीला हो जाता है।

Disadvantages of Paging in Operating System in Hindi | पेजिंग की नुकसान  :

  • पेज टेबल ओवरहेड (Page Table Overhead): प्रत्येक प्रक्रिया के लिए पेज टेबल को बनाए रखने की आवश्यकता होती है। यदि पेज टेबल बहुत बड़ी हो जाती है, तो इसे मुख्य मेमोरी में संग्रहीत करना मुश्किल हो सकता है और इससे मेमोरी की खपत बढ़ जाती है।
  • पेज फॉल्ट (Page Faults): जब किसी आवश्यक पृष्ठ को मुख्य मेमोरी में लोड नहीं किया जाता है और पेज फॉल्ट होता है, तो इसे डिस्क से लोड करने में समय लगता है, जिससे प्रक्रिया की गति धीमी हो जाती है।
  • अनुवाद में विलंब (Translation Delay): पेज टेबल का उपयोग करके लॉजिकल पते को भौतिक पते में अनुवाद करने में कुछ समय लगता है। यदि मल्टी-लेवल पेजिंग का उपयोग किया जाता है, तो यह विलंब और बढ़ सकता है।
  • आंतरिक फ्रेगमेंटेशन (Internal Fragmentation): हालांकि पेजिंग बाहरी फ्रेगमेंटेशन को समाप्त करता है, आंतरिक फ्रेगमेंटेशन की समस्या रह सकती है क्योंकि अंतिम पृष्ठ का कुछ हिस्सा खाली रह सकता है।

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