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Operation of Operating system in Hindi

Operation of Operating System in Hindi |  ऑपरेटिंग सिस्टम के ऑपरेशनस हिंदी में :


ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) कंप्यूटर का एक महत्वपूर्ण घटक होता है, जो कंप्यूटर हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है। यह उपयोगकर्ताओं को विभिन्न कार्यों को करने की सुविधा प्रदान करता है और कंप्यूटर के संसाधनों का कुशल प्रबंधन करता है। ऑपरेटिंग सिस्टम के संचालन (Operations) कई महत्वपूर्ण कार्यों पर आधारित होते हैं, जिनका उद्देश्य सिस्टम की दक्षता और उपयोगकर्ता अनुभव को बेहतर बनाना होता है। आइए, ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न संचालन और उनके कार्यों को विस्तार से समझें:

1. प्रोसेस मैनेजमेंट (Process Management) :

  • प्रोसेस मैनेजमेंट ऑपरेटिंग सिस्टम का एक प्रमुख कार्य है, जिसमें यह यह तय करता है कि कौन-से प्रोसेस को CPU (सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट) का उपयोग करना चाहिए, कितने समय तक करना चाहिए और किस क्रम में करना चाहिए। इसमें निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य शामिल होते हैं:
  • प्रोसेस शेड्यूलिंग (Process Scheduling) : ऑपरेटिंग सिस्टम कई प्रक्रियाओं (प्रोग्राम्स) को CPU समय का वितरण करता है। यह मल्टीटास्किंग को सक्षम बनाता है, जिससे एक साथ कई प्रोग्राम चलाए जा सकते हैं। OS विभिन्न शेड्यूलिंग एल्गोरिदम (जैसे First-Come-First-Serve, Shortest Job First, Round Robin) का उपयोग करता है।
  • प्रोसेस सिंक्रोनाइज़ेशन (Process Synchronization) : जब कई प्रक्रियाएँ एक साथ काम कर रही होती हैं, तो उन्हें सही समय पर समन्वय (Synchronization) की आवश्यकता होती है। ऑपरेटिंग सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि संसाधनों का उपयोग करते समय प्रक्रियाएँ एक-दूसरे में हस्तक्षेप न करें।
  • प्रोसेस क्रिएशन और टर्मिनेशन (Process Creation and Termination) : जब उपयोगकर्ता कोई प्रोग्राम शुरू करता है, तो OS उस प्रोग्राम के लिए एक प्रोसेस बनाता है। जब कार्य पूरा हो जाता है, तो OS उस प्रोसेस को समाप्त करता है और इसके द्वारा उपयोग किए गए संसाधन वापस लेता है।

2. मेमोरी मैनेजमेंट (Memory Management) :

  • मेमोरी मैनेजमेंट का मुख्य कार्य सिस्टम की मुख्य मेमोरी (RAM) का प्रबंधन करना होता है। इसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि विभिन्न प्रोग्रामों और प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक मेमोरी आवंटित की जाए और अनावश्यक मेमोरी वापस ली जाए।
  • मेमोरी आवंटन (Memory Allocation) : जब कोई प्रोग्राम चलता है, तो उसे मेमोरी की आवश्यकता होती है। ऑपरेटिंग सिस्टम उस प्रोग्राम को मेमोरी आवंटित करता है और जब प्रोग्राम का कार्य समाप्त हो जाता है, तो वह मेमोरी वापस ले ली जाती है।
  • वर्चुअल मेमोरी (Virtual Memory) : ऑपरेटिंग सिस्टम वर्चुअल मेमोरी का उपयोग करता है, जिससे प्रोग्राम को अधिक मेमोरी मिलती है। जब फिजिकल मेमोरी कम होती है, तो OS हार्ड ड्राइव के कुछ हिस्सों का उपयोग मेमोरी के रूप में करता है, जिससे बड़े प्रोग्राम भी सुचारू रूप से चल पाते हैं।
  • स्वैपिंग (Swapping) : जब RAM में पर्याप्त मेमोरी नहीं होती, तो ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोसेसों को स्वैप करके हार्ड ड्राइव पर स्टोर करता है और ज़रूरत पड़ने पर उन्हें वापस RAM में लाता है।

3. फाइल मैनेजमेंट (File Management) :

  • फाइल मैनेजमेंट ऑपरेटिंग सिस्टम का एक महत्वपूर्ण संचालन है, जिसमें फाइलों और डायरेक्टरी (Directories) का प्रबंधन शामिल होता है। उपयोगकर्ता डेटा और फाइलें OS के माध्यम से संग्रहीत और प्रबंधित करते हैं। इसके अंतर्गत निम्नलिखित कार्य होते हैं:
  • फाइल क्रिएशन और डिलीशन (File Creation and Deletion) : ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोगकर्ता को फाइल बनाने, संपादित करने और हटाने की सुविधा देता है।
  • फाइल एक्सेस कंट्रोल (File Access Control) : OS फाइलों तक पहुँच को नियंत्रित करता है, जिससे केवल अधिकृत उपयोगकर्ता ही किसी विशेष फाइल तक पहुंच सकते हैं। यह फाइलों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
  • डायरेक्टरी संरचना (Directory Structure) : ऑपरेटिंग सिस्टम फाइलों को व्यवस्थित रखने के लिए डायरेक्टरी संरचना प्रदान करता है। उपयोगकर्ता अपनी फाइलों को विभिन्न फोल्डर या डायरेक्टरियों में रख सकता है, जिससे उन्हें व्यवस्थित तरीके से एक्सेस किया जा सके।
  • फाइल सिस्टम मैनेजमेंट (File System Management) : ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न प्रकार के फाइल सिस्टम (जैसे FAT, NTFS, ext3) का समर्थन करता है, जो फाइलों को स्टोर और प्रबंधित करने के विभिन्न तरीके प्रदान करते हैं।

4. डिवाइस मैनेजमेंट (Device Management) :

ऑपरेटिंग सिस्टम विभिन्न हार्डवेयर उपकरणों, जैसे प्रिंटर, कीबोर्ड, माउस, डिस्प्ले स्क्रीन और स्टोरेज डिवाइस, का प्रबंधन करता है। इसके तहत निम्नलिखित कार्य होते हैं:

  • डिवाइस ड्राइवर मैनेजमेंट (Device Driver Management) : ऑपरेटिंग सिस्टम हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर के बीच एक इंटरफेस के रूप में कार्य करता है। हर हार्डवेयर डिवाइस के लिए ड्राइवर आवश्यक होते हैं, और OS इन ड्राइवरों को प्रबंधित करता है ताकि डिवाइस और कंप्यूटर के बीच सही संचार हो सके।
  • I/O मैनेजमेंट (Input/Output Management) : ऑपरेटिंग सिस्टम इनपुट और आउटपुट उपकरणों (जैसे कीबोर्ड, माउस, मॉनिटर, प्रिंटर) के साथ समन्वय करता है। यह सुनिश्चित करता है कि इन उपकरणों के बीच डेटा सही तरीके से संचारित हो।
  • डिवाइस आवंटन और डीलोकेशन (Device Allocation and Deallocation) : OS यह तय करता है कि कौन से डिवाइस का उपयोग किस प्रोसेस के लिए किया जाना चाहिए और जब उपयोग समाप्त हो जाता है, तो वह डिवाइस को दूसरे प्रोसेस के लिए उपलब्ध कराता है।

5. सुरक्षा और सुरक्षा संचालन (Security and Protection Operations) :

सुरक्षा ऑपरेटिंग सिस्टम का एक महत्वपूर्ण संचालन है, जिसका उद्देश्य सिस्टम और उपयोगकर्ता डेटा को अनधिकृत उपयोग और नुकसान से बचाना होता है। सुरक्षा प्रबंधन के अंतर्गत निम्नलिखित कार्य होते हैं:

  • यूज़र ऑथेंटिकेशन (User Authentication) : OS यह सुनिश्चित करता है कि केवल अधिकृत उपयोगकर्ता ही सिस्टम तक पहुँच सकें। इसके लिए पासवर्ड, बायोमेट्रिक पहचान, और अन्य प्रमाणीकरण विधियों का उपयोग किया जाता है।
  • एक्सेस कंट्रोल (Access Control) : ऑपरेटिंग सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि सिस्टम के संसाधनों (जैसे फाइलें, हार्डवेयर उपकरण) तक केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ही पहुंच प्राप्त हो।
  • डेटा एन्क्रिप्शन (Data Encryption) : OS उपयोगकर्ता डेटा को एन्क्रिप्ट करता है ताकि अनधिकृत पहुंच होने पर भी डेटा को पढ़ा न जा सके। इससे डेटा की सुरक्षा बनी रहती है।

6. यूज़र इंटरफ़ेस (User Interface) :

ऑपरेटिंग सिस्टम उपयोगकर्ता को कंप्यूटर के साथ संवाद करने का एक सरल और सहज इंटरफ़ेस प्रदान करता है। मुख्य रूप से दो प्रकार के इंटरफ़ेस होते हैं:

  • ग्राफिकल यूज़र इंटरफ़ेस (GUI) : इसमें उपयोगकर्ता माउस और कीबोर्ड की मदद से कंप्यूटर पर कार्य कर सकते हैं। यह विंडोज़, आइकॉन, और मैन्यू द्वारा कंप्यूटर के संचालन को सरल बनाता है।
  • कमान्ड लाइन इंटरफ़ेस (CLI) : यह टेक्स्ट आधारित इंटरफ़ेस होता है, जिसमें उपयोगकर्ता कमांड्स लिखकर ऑपरेटिंग सिस्टम को निर्देश देता है। CLI आमतौर पर उन्नत उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग किया जाता है।

7. नेटवर्क मैनेजमेंट (Network Management) :

आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम नेटवर्किंग की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे विभिन्न कंप्यूटर और उपकरण आपस में डेटा साझा कर सकते हैं। इसके तहत निम्नलिखित कार्य होते हैं:

  • डेटा ट्रांसमिशन (Data Transmission) : ऑपरेटिंग सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि नेटवर्क के माध्यम से डेटा का सही और सुरक्षित रूप से आदान-प्रदान हो।
  • नेटवर्क प्रोटोकॉल्स (Network Protocols) : OS विभिन्न नेटवर्क प्रोटोकॉल्स (जैसे TCP/IP, HTTP) का समर्थन करता है, जो नेटवर्किंग के संचालन के लिए आवश्यक होते हैं।

8. त्रुटि प्रबंधन (Error Management) :

ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर सिस्टम में होने वाली त्रुटियों का पता लगाता है और उन्हें प्रबंधित करता है ताकि सिस्टम को न्यूनतम नुकसान हो। त्रुटियों के दो प्रकार होते हैं:

  • हार्डवेयर त्रुटियाँ (Hardware Errors) : ये त्रुटियाँ हार्डवेयर डिवाइसों में होने वाली समस्याओं से उत्पन्न होती हैं। OS ऐसी त्रुटियों का पता लगाता है और आवश्यक सुधार करता है।
  • सॉफ़्टवेयर त्रुटियाँ (Software Errors) ये त्रुटियाँ सॉफ़्टवेयर प्रोग्रामों के अनुचित कार्य करने से उत्पन्न होती हैं। OS इन त्रुटियों को भी संभालता है और सिस्टम को स्थिर बनाए रखता है।


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Operation of Operating system in Hindi
Distributed System in Hindi
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Interacting Processes in Hindi
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Fundamental of Schedulling in Hindi
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Structure of Concurrent System in Hindi
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Semaphores Implementation & Uses in Hindi
Logical and Physical Address in Hindi
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Virtual Memory with demand Paging in Hindi
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