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Virtual Memory with demand Paging in Hindi

Virtual Memory with Demand Paging in Operating System in Hindi | वर्चुअल मेमोरी और डिमांड पेजिंग : 

वर्चुअल मेमोरी (Virtual Memory) एक अत्यंत महत्वपूर्ण तकनीक है जो किसी कंप्यूटर को उसकी भौतिक (Physical) मेमोरी की सीमा से अधिक मेमोरी का उपयोग करने की अनुमति देती है। यह प्रक्रिया वर्चुअल मेमोरी के माध्यम से की जाती है, 
जिसमें हार्ड डिस्क के कुछ हिस्सों को अस्थायी रूप से RAM की तरह इस्तेमाल किया जाता है। वर्चुअल मेमोरी के साथ काम करने के लिए पेजिंग (Paging) की एक तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिसमें डेटा को छोटे-छोटे पेजों में विभाजित किया जाता है और RAM में लाया जाता है।

वर्चुअल मेमोरी में डिमांड पेजिंग (Demand Paging) एक विशेष तकनीक है, जिसमें केवल उन पेजों को ही मेमोरी में लाया जाता है जिनकी किसी प्रक्रिया को वास्तविक समय में आवश्यकता होती है। इस तकनीक से मेमोरी का कुशल उपयोग होता है और सिस्टम की प्रदर्शन क्षमता में वृद्धि होती है।

Overview of Virtual Memory in Operating System in Hindi | वर्चुअल मेमोरी का अवलोकन : 

वर्चुअल मेमोरी उपयोगकर्ता को यह महसूस कराती है कि सिस्टम के पास भौतिक मेमोरी से अधिक मेमोरी उपलब्ध है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें प्रोग्राम के डेटा और कोड का एक हिस्सा RAM में रखा जाता है, जबकि बाकी हिस्सा हार्ड डिस्क पर रहता है। जब किसी प्रोग्राम को RAM में मौजूद डेटा की आवश्यकता होती है, तो उसे पेज के रूप में हार्ड डिस्क से RAM में लाया जाता है।

  • वर्चुअल मेमोरी के कार्य करने का तरीका:
  • प्रोग्राम का पूरा डेटा RAM में नहीं रखा जाता है।
  • इसे छोटे-छोटे पेजों में विभाजित किया जाता है।
  • पेजों को आवश्यकता पड़ने पर ही RAM में लाया जाता है।
  • इसका उपयोग मुख्य रूप से मल्टीटास्किंग और बड़ी एप्लिकेशन को हैंडल करने में किया जाता है।

डिमांड पेजिंग क्या है? (What is Demand Paging?)

डिमांड पेजिंग (Demand Paging) वर्चुअल मेमोरी का एक उप-तंत्र है, जिसमें केवल आवश्यक पेजों को ही मेमोरी में लाया जाता है। जब कोई प्रक्रिया किसी पेज को एक्सेस करती है और वह पेज RAM में उपलब्ध नहीं होता है, तो एक पेज फॉल्ट उत्पन्न होता है। इस स्थिति में, ऑपरेटिंग सिस्टम उस पेज को हार्ड डिस्क से RAM में लाकर प्रोसेस को आगे चलाने देता है।

डिमांड पेजिंग यह सुनिश्चित करता है कि सिस्टम में मेमोरी का कुशलतापूर्वक उपयोग हो और केवल उन पेजों को मेमोरी में लाया जाए जिनकी वास्तविक समय में आवश्यकता हो। इस प्रकार, मेमोरी पर अनावश्यक भार नहीं पड़ता।

Components of Demand Paging in Operating System in Hindi | डिमांड पेजिंग के घटक : 

  • वर्चुअल एड्रेस स्पेस: यह एक प्रक्रिया द्वारा उपयोग की जाने वाली संपूर्ण मेमोरी होती है, जिसमें हर पेज का एक वर्चुअल एड्रेस होता है।
  • पेज टेबल (Page Table): इसमें वर्चुअल पेज का मैपिंग भौतिक पेज (RAM में) के साथ होता है। यदि पेज RAM में उपलब्ध नहीं होता, तो यह पेज टेबल में चिह्नित किया जाता है।
  • स्वैप स्पेस (Swap Space): यह हार्ड डिस्क का वह हिस्सा होता है जिसे अस्थायी रूप से पेजों को स्टोर करने के लिए RAM की जगह उपयोग किया जाता है।
  • पेज फॉल्ट (Page Fault): जब प्रोसेस को आवश्यक पेज RAM में नहीं मिलता, तो पेज फॉल्ट उत्पन्न होता है, जिसके बाद पेज को डिस्क से RAM में लाया जाता है।
Working of Demand Paging  in Operating System in Hindi | डिमांड पेजिंग का कार्य सिद्धांत :

  • डिमांड पेजिंग मुख्यतः पेज फॉल्ट हैंडलिंग (Page Fault Handling) पर आधारित है। जब कोई प्रक्रिया किसी पेज को एक्सेस करती है जो RAM में उपलब्ध नहीं है, तो पेज फॉल्ट उत्पन्न होता है। इस स्थिति में, ऑपरेटिंग सिस्टम निम्नलिखित चरणों के अनुसार कार्य करता है:

  • पेज फॉल्ट का पता लगाना (Detecting Page Fault):जब एक पेज फॉल्ट उत्पन्न होता है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम इस फॉल्ट को पहचानता है और पेज को RAM में लाने की प्रक्रिया शुरू करता है।
  • स्वैप इन ऑपरेशन (Swap-In Operation): उस पेज को स्वैप स्पेस से (जो हार्ड डिस्क पर होता है) RAM में लाया जाता है।
  • मेमोरी में जगह बनाना (Making Space in Memory): यदि RAM में पहले से ही पर्याप्त पेज भरे हुए हैं, तो एक पेज रिप्लेसमेंट एल्गोरिदम का उपयोग किया जाता है ताकि एक पुराना पेज हटाकर नया पेज लाया जा सके।
  • पेज को RAM में लाना (Loading the Page into RAM):आवश्यक पेज को RAM में लाया जाता है और पेज टेबल को अपडेट किया जाता है।
  • प्रोसेस को फिर से शुरू करना (Restarting the Process): पेज फॉल्ट का समाधान होने के बाद प्रोसेस उसी पॉइंट से फिर से शुरू होती है, जहां वह रुकी थी।
Page Fault Handling  in Operating System in Hindi | पेज फॉल्ट हैंडलिंग :

डिमांड पेजिंग में पेज फॉल्ट एक सामान्य घटना है। जब पेज RAM में उपलब्ध नहीं होता, तो निम्नलिखित चरण अपनाए जाते हैं:

चरण 1: पेज फॉल्ट का पता लगाना (Page Fault Detection): ऑपरेटिंग सिस्टम पेज फॉल्ट का पता लगाता है जब प्रोसेसर उस पेज को एक्सेस करता है जो RAM में नहीं है।
चरण 2: आवश्यक पेज को डिस्क से RAM में लाना (Bringing Required Page from Disk to RAM): पेज को स्वैप स्पेस (हार्ड डिस्क) से RAM में लाया जाता है।
चरण 3: पेज रिप्लेसमेंट एल्गोरिदम का उपयोग (Using Page Replacement Algorithm): यदि RAM में जगह नहीं है, तो पेज रिप्लेसमेंट एल्गोरिदम का उपयोग करके किसी अन्य पेज को हटाया जाता है ताकि नया पेज RAM में लाया जा सके।
चरण 4: प्रोसेस को फिर से चालू करना (Resuming the Process): जब पेज RAM में लाया जाता है, तो प्रोसेस को वहीं से चालू किया जाता है जहां पेज फॉल्ट हुआ था।


Advantages of Demand Paging  in Operating System in Hindi | डिमांड पेजिंग के लाभ : 

  • मेमोरी का कुशल उपयोग (Efficient Use of Memory): डिमांड पेजिंग केवल उन्हीं पेजों को मेमोरी में लाती है जिनकी आवश्यकता होती है, जिससे मेमोरी का कुशल उपयोग होता है।
  • प्रोसेस की स्पीड में सुधार (Improvement in Process Speed): इस तकनीक से सिस्टम अधिक एप्लिकेशन को एक साथ चला सकता है क्योंकि हर प्रोसेस को संपूर्ण मेमोरी में लोड करने की आवश्यकता नहीं होती।
  • मल्टीटास्किंग में सहायक (Supports Multitasking): डिमांड पेजिंग मल्टीटास्किंग को कुशलता से हैंडल करती है, जिससे कई प्रक्रियाएं एक साथ चल सकती हैं।
  • कम मेमोरी की आवश्यकता (Less Physical Memory Required): चूंकि प्रत्येक पेज को तब ही मेमोरी में लाया जाता है जब उसकी आवश्यकता होती है, इसलिए सिस्टम को बहुत अधिक RAM की आवश्यकता नहीं होती।
Disadvantages of Demand Paging in Operating System in Hindi | डिमांड पेजिंग की हानियाँ : 

  • पेज फॉल्ट्स की संख्या में वृद्धि (Increase in Page Faults):चूंकि पेजों को आवश्यकता पड़ने पर ही लाया जाता है, पेज फॉल्ट्स की संख्या बढ़ सकती है, जिससे सिस्टम की प्रदर्शन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • स्वैपिंग ओवरहेड (Swapping Overhead): यदि पेज फॉल्ट्स की संख्या अधिक हो जाती है, तो पेजों को लगातार स्वैप इन और स्वैप आउट करना पड़ता है, जिससे सिस्टम की गति धीमी हो सकती है।
  • डिस्क पर दबाव (Pressure on Disk): डिमांड पेजिंग में लगातार पेजों को स्वैप इन और स्वैप आउट करने के कारण डिस्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे डिस्क का पहनावा जल्दी हो सकता है।
  • पेज रिप्लेसमेंट एल्गोरिदम की जटिलता (Complexity of Page Replacement Algorithms):पेज रिप्लेसमेंट एल्गोरिदम को लागू करना कठिन हो सकता है, और यदि गलत एल्गोरिदम चुना जाता है, तो यह सिस्टम की प्रदर्शन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।






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