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Contiguous Allocation in Hindi

Contiguous Allocation in Operating System in Hindi | ऑपरेटिंग सिस्टम में  संलग्न आवंटन हिंदी में :


मेमोरी मैनेजमेंट ऑपरेटिंग सिस्टम के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। कंप्यूटर सिस्टम में जब कोई प्रोग्राम निष्पादित होता है, तो उसे मेमोरी (RAM) में डेटा और निर्देशों के लिए जगह की आवश्यकता होती है। मेमोरी में डेटा के भंडारण के लिए विभिन्न प्रकार की आवंटन विधियाँ होती हैं, जिनमें से एक प्रमुख विधि संलग्न आवंटन (Contiguous Allocation) है।

संलग्न आवंटन में, किसी प्रक्रिया या फाइल को मेमोरी के निरंतर (संलग्न) ब्लॉकों में स्टोर किया जाता है। इस प्रकार की मेमोरी आवंटन विधि का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि प्रक्रिया या फाइल को एकल और निरंतर मेमोरी ब्लॉक में स्टोर किया जाए, जिससे डेटा एक्सेस में आसानी हो और प्रदर्शन में सुधार हो सके।

संलग्न आवंटन क्या है? (What is Contiguous Allocation?)

संलग्न आवंटन (Contiguous Allocation) एक मेमोरी आवंटन तकनीक है, जिसमें किसी प्रक्रिया या फाइल के लिए मेमोरी को एक निरंतर मेमोरी ब्लॉक के रूप में आवंटित किया जाता है। इसका अर्थ है कि जब किसी प्रक्रिया को मेमोरी की आवश्यकता होती है, तो उसे एक संलग्न (निरंतर) मेमोरी क्षेत्र दिया जाता है, जहाँ पूरा डेटा या फाइल रखा जाता है। इसमें मेमोरी के सभी ब्लॉक एक-दूसरे के साथ संलग्न होते हैं और यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रक्रिया या फाइल के डेटा को अलग-अलग जगहों पर न तोड़ा जाए।

  • प्रक्रिया (Process): प्रक्रिया या फाइल की आवश्यकता: जब कोई प्रक्रिया या फाइल निष्पादित होती है या स्टोर की जाती है, तो उसे मेमोरी में जगह की आवश्यकता होती है।
  • निरंतर मेमोरी ब्लॉक का आवंटन: मेमोरी मैनेजमेंट सिस्टम संलग्न मेमोरी ब्लॉक की तलाश करता है जो प्रक्रिया या फाइल की आवश्यकताओं को पूरा कर सके।
  • मेमोरी ब्लॉक में डेटा या फाइल स्टोर करना: एक बार उपयुक्त निरंतर मेमोरी क्षेत्र मिलने के बाद, उस प्रक्रिया या फाइल के डेटा को वहां स्टोर किया जाता है।
  • उदाहरण (Example): मान लीजिए कि एक फाइल को 5 मेगाबाइट्स की मेमोरी की आवश्यकता है। अगर मेमोरी में संलग्न (निरंतर) 5 मेगाबाइट्स का क्षेत्र उपलब्ध है, तो उस फाइल को उस क्षेत्र में स्टोर किया जाएगा। अगर मेमोरी के ब्लॉक बिखरे हुए होते हैं, तो उस स्थिति में उस फाइल को संलग्न आवंटन में स्टोर नहीं किया जा सकता।

Types of Contiguous Allocation in Operating System in Hindi | संलग्न आवंटन के प्रकार : 

1. समान आकार का ब्लॉक आवंटन (Fixed-size Partitioning) :
इस विधि में, मेमोरी को पूर्व निर्धारित आकार के कई ब्लॉकों में विभाजित किया जाता है। हर प्रक्रिया को एक संलग्न ब्लॉक में स्टोर किया जाता है, जिसका आकार पहले से तय होता है। यह विधि सरल होती है, लेकिन इसमें मेमोरी की बर्बादी अधिक हो सकती है क्योंकि छोटे डेटा भी बड़े ब्लॉक में स्टोर हो सकते हैं, जिससे आंतरिक फ्रेगमेंटेशन होता है।

2. विभिन्न आकार का ब्लॉक आवंटन (Variable-size Partitioning) :
इस विधि में, मेमोरी को विभिन्न आकार के ब्लॉकों में विभाजित किया जाता है। जब किसी प्रक्रिया या फाइल को मेमोरी की आवश्यकता होती है, तो उसके आकार के अनुसार एक उपयुक्त ब्लॉक आवंटित किया जाता है। यह विधि अधिक लचीली होती है और मेमोरी का बेहतर उपयोग करती है, लेकिन इसमें बाहरी फ्रेगमेंटेशन हो सकता है, जहाँ छोटे-छोटे मेमोरी ब्लॉक अप्रयुक्त रह जाते हैं।

Advantages of Contiguous Allocation in Operating System in Hindi | संलग्न आवंटन के फायदे : 

  • सरलता (Simplicity): संलग्न आवंटन विधि सरल होती है, क्योंकि इसमें किसी प्रक्रिया या फाइल को एक निरंतर मेमोरी क्षेत्र में स्टोर किया जाता है। इसमें मेमोरी ब्लॉकों की प्रबंधन और ट्रैकिंग आसान होती है।
  • तेजी से एक्सेस (Fast Access): चूंकि डेटा संलग्न मेमोरी ब्लॉकों में रखा जाता है, इसीलिए CPU डेटा को जल्दी एक्सेस कर सकता है, जिससे फाइल या प्रक्रिया के निष्पादन की गति तेज हो जाती है।
  • सीधे और सरल नेविगेशन (Direct Navigation): चूंकि संलग्न आवंटन में डेटा एक ही स्थान पर होता है, इसीलिए फाइल सिस्टम को डेटा ब्लॉकों के बीच नेविगेट करने की जरूरत नहीं होती, जिससे डेटा को आसानी से पाया जा सकता है।
  • कम ओवरहेड (Low Overhead): संलग्न आवंटन में डेटा को स्टोर करने के लिए अतिरिक्त डेटा संरचनाओं की आवश्यकता नहीं होती, जिससे सिस्टम पर ओवरहेड कम होता है।

Disadvantages of Contiguous Allocation in Operating System in Hindi | संलग्न आवंटन की सीमाएँ : 

  • बाहरी फ्रेगमेंटेशन (External Fragmentation): संलग्न आवंटन में, मेमोरी के छोटे-छोटे टुकड़े अप्रयुक्त रह सकते हैं, क्योंकि हर प्रक्रिया को निरंतर (संलग्न) मेमोरी की आवश्यकता होती है। अगर मेमोरी में छोटे-छोटे खाली स्थान हों, तो वे प्रक्रिया की आवश्यकता को पूरा नहीं कर सकते, जिससे बाहरी फ्रेगमेंटेशन की समस्या उत्पन्न होती है।
  • प्रक्रिया की आवश्यकता के अनुसार आवंटन मुश्किल (Difficulty in Allocating According to Process Need): अगर किसी प्रक्रिया को मेमोरी में निरंतर ब्लॉक नहीं मिल पाता, तो उसे मेमोरी में स्टोर करना मुश्किल हो सकता है। इससे मेमोरी के उपयोग की दक्षता कम हो जाती है।
  • फाइल के आकार में वृद्धि पर समस्या (Problem with File Growth): अगर किसी फाइल का आकार बढ़ता है और उसे निरंतर मेमोरी ब्लॉक की आवश्यकता होती है, तो कभी-कभी पर्याप्त निरंतर स्थान न मिल पाने के कारण समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • अधिक मेमोरी बर्बादी (More Memory Wastage): अगर किसी प्रक्रिया के लिए बड़े ब्लॉक का आवंटन किया गया हो, लेकिन प्रक्रिया का डेटा छोटा हो, तो उस ब्लॉक में मेमोरी की बर्बादी होती है, जिससे आंतरिक फ्रेगमेंटेशन (Internal Fragmentation) होता है।

External Fragmentation in Contiguous Allocation in Operating System in Hindi | संलग्न आवंटन में बाहरी फ्रेगमेंटेशन : 

  • बाहरी फ्रेगमेंटेशन संलग्न आवंटन की प्रमुख समस्या है। यह तब उत्पन्न होती है, जब मेमोरी में छोटे-छोटे खाली स्थान बच जाते हैं, जो किसी प्रक्रिया की मेमोरी आवश्यकता को पूरा नहीं कर पाते। उदाहरण के लिए, अगर तीन प्रक्रियाओं के निष्पादन के बाद मेमोरी में खाली स्थान रह जाता है, लेकिन ये स्थान एक-दूसरे के पास नहीं होते, तो उस खाली स्थान का उपयोग नहीं हो पाता।
  • बाहरी फ्रेगमेंटेशन का समाधान (Solution for External Fragmentation): समझौता (Compaction): इस तकनीक में, मेमोरी के अप्रयुक्त छोटे-छोटे ब्लॉकों को एक साथ मिलाकर एक बड़ा ब्लॉक बनाया जाता है। इससे नए प्रक्रियाओं के लिए पर्याप्त निरंतर स्थान उपलब्ध हो जाता है।
  • सेगमेंटेशन और पेजिंग (Segmentation and Paging): आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम में, बाहरी फ्रेगमेंटेशन की समस्या को हल करने के लिए पेजिंग और सेगमेंटेशन जैसी मेमोरी आवंटन तकनीकों का उपयोग किया जाता है, जहाँ संलग्न आवंटन की आवश्यकता नहीं होती।

आरेख (Diagram) :

Contiguous Allocation in Hindi

  • इस आरेख में दिखाया गया है कि मेमोरी में तीन ब्लॉक्स हैं, जिनमें से दो भरे हुए हैं और एक खाली है। अगर किसी नई प्रक्रिया को निरंतर मेमोरी की आवश्यकता है, तो उसे ब्लॉक 3 में स्टोर किया जा सकता है।
  • संलग्न आवंटन (Contiguous Allocation) एक सरल और प्रभावी मेमोरी आवंटन तकनीक है, जिसका उपयोग छोटे सिस्टम और फाइल सिस्टम में किया जाता है। हालांकि इसमें बाहरी फ्रेगमेंटेशन और मेमोरी बर्बादी जैसी समस्याएँ हैं, फिर भी यह तकनीक छोटे और सरल अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त होती है।
  •  आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम में, इस विधि की जगह अधिक उन्नत विधियों जैसे पेजिंग और सेगमेंटेशन ने ले ली है, जो मेमोरी के उपयोग को अधिक कुशल बनाती हैं।

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