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Rajasthan ki Prachin Sabhyata: राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं और प्रमुख अभिलेख, कालीबंगा, आहड़, बैराठ, गणेश्वर और शिलालेख

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ki Prachin Sabhyata: राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं और प्रमुख अभिलेख, कालीबंगा, आहड़, बैराठ, गणेश्वर और शिलालेख - ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (प्राचीन सभ्यता और राजवंश)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ki Prachin Sabhyata: राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं (Rajasthan Ki Prachin Sabhyata) राज्य के हजारों साल पुराने इतिहास की आधारशिला ...
Quick Answer: Rajasthan ki Prachin Sabhyata: राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं (Rajasthan Ki Prachin Sabhyata) राज्य के हजारों साल पुराने इतिहास की आधारशिला हैं। घग्घर नदी घाटी में विकसित कांस्य युगीन कालीबंगा, बेड़च नदी पर ताम्र पाषाणिक आहड़, कांतली नदी पर गणेश्वर और बाणगंगा नदी पर फली-फूली बैराठ सभ्यता सबसे महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इन प्राचीन केंद्रों से मिले जुते खेत, अग्निकुंड, तांबा गलाने की भट्टियां, गोल बौद्ध मंदिर और सिक्के मानव विकास की कहानी बताते हैं। घोसुंडी, बिजोलिया और राज प्रशस्ति जैसे प्राचीन अभिलेख राजस्थान के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक इतिहास के सबसे प्रामाणिक साधन हैं।

1. राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं: कालक्रम और प्रमुख पुरातात्विक केंद्र

राजस्थान प्रागैतिहासिक काल से ही मानव बसाव का मुख्य केंद्र रहा है। अरावली और नदी घाटियों ने आदिमानव को प्राकृतिक आश्रय दिया। पुरापाषाण उपकरण बनास, बेड़च और गंभीरी घाटियों से मिले हैं। मध्य पाषाण काल में भीलवाड़ा के बागोर और बाड़मेर के तिलवाड़ा में पशुपालन शुरू हुआ। ताम्र पाषाण व कांस्य युग में धातु के ज्ञान से खेती और बस्तियों का विकास हुआ। राज्य के वर्तमान 41 जिलों और 7 संभागों में इन पुरातात्विक स्थलों की स्थिति समझना जरूरी है। जैसे गणेश्वर नीम का थाना क्षेत्र में है, जो 28 दिसंबर 2024 को नीम का थाना जिला खत्म होने के बाद फिर सीकर जिले में है। बैराठ (विराटनगर) अब कोटपूतली-बहरोड़ जिले (जयपुर संभाग) में है और ओझियाना बदनोर तहसील के साथ ब्यावर जिले (अजमेर संभाग) में चला गया है।

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आरपीएससी ने RAS में इन स्थलों से कई प्रश्न पूछे हैं। RAS Pre 2016 में महाभारत और महाभाष्य दोनों में आने वाले प्राचीन नगर (माध्यमिका) पर और भागवत संप्रदाय वाले अभिलेख (घोसुंडी) पर सवाल आए। RAS Pre 2024 में ओझियाना के उत्खननकर्ताओं पर और टी.एच. हैंडले ने किस स्थल (नलियासर) को बौद्ध कस्बा बताया, इस पर सवाल आए। विस्तृत इतिहास के लिए आप राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन भी कर सकते हैं।

सभ्यता / स्थल जिला (41 जिले) नदी उत्खननकर्ता (वर्ष) प्रमुख पुरावशेष
कालीबंगा हनुमानगढ़ घग्घर अमलानंद घोष (पहचान 1952), बी.बी. लाल, बी.के. थापर (1961-69) जुता खेत (चना-सरसों), 7 अग्निकुंड, लकड़ी नाली, भूकंप साक्ष्य, मेसोपोटामियाई मुहर
आहड़ (धूलकोट) उदयपुर आयड़ (बेड़च) अक्षय कीर्ति व्यास (1953), आर.सी. अग्रवाल, एच.डी. सांकलिया (1961-62) तांबा गलाने की भट्टी, काले-लाल बर्तन (BRW), बनासियन बुल, 6 मुद्राएं
गणेश्वर सीकर (नीम का थाना) कांतली आर.सी. अग्रवाल, विजय कुमार (खोज 1977) ताम्र संस्कृतियों की जननी, 99% शुद्ध तांबा, मछली के कांटे
बैराठ (विराटनगर) कोटपूतली-बहरोड़ (पहले जयपुर) बाणगंगा दयाराम साहनी (1936), एन.आर. बनर्जी, के.एन. दीक्षित भाब्रू शिलालेख, गोल बौद्ध मंदिर (26 लकड़ी के खंभे), 36 चांदी सिक्के (16 मिनांडर)
बागोर भीलवाड़ा कोठारी डॉ. वी.एन. मिश्र, एल.एस. लेश्निक (1967-70) पशुपालन का प्राचीनतम साक्ष्य (मध्य पाषाण), महासतियां टीला
बालाथल उदयपुर (वल्लभनगर) बेड़च वी.एन. मिश्र (1993) 11 कमरों का भवन, कुष्ठ रोग युक्त 4000 वर्ष पुराना कंकाल, कपड़ा
गिलूंड राजसमंद बनास बी.बी. लाल (1959-60), बाद में पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी-डेक्कन कॉलेज (1999-2005) पक्की ईंटों के साक्ष्य, प्रस्तर फलक उद्योग
ओझियाना ब्यावर (बदनोर तहसील; पहले भीलवाड़ा) नदी घाटी नहीं, पहाड़ी ढलान बी.आर. मीणा, आलोक त्रिपाठी (ASI जयपुर मंडल, 1999-2000) सफेद रंग से चित्रित बैल व गाय की मूर्तियां, पहाड़ी ढलान पर बस्ती (RAS 2024 प्रश्न)
माध्यमिका (नगरी) चित्तौड़गढ़ बेड़च कार्लाइल (1872), डॉ. डी.आर. भंडारकर (1915-16) शिवि जनपद सिक्के, हाथीबाड़ा चारदीवारी, वैष्णव पूजा स्थल
रेड्ड टोंक (निवाई) ढील केदारनाथ पुरी (1938-40) 3,075 चांदी के आहत सिक्के, लोहे के औजार, 'प्राचीन राजस्थान का टाटानगर'
सुनारी झुंझुनूं (खेतड़ी) कांतली राजस्थान पुरातत्व विभाग (1980-81) लोहा गलाने की प्राचीनतम धौंकनी भट्टी, लोहे के तीर

2. कालीबंगा सभ्यता: कांस्य युगीन नगरीय संस्कृति और अनूठे साक्ष्य

कालीबंगा हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी (प्राचीन सरस्वती) तट पर स्थित हड़प्पा का प्रमुख नगर था। इसका शाब्दिक अर्थ 'काली चूड़ियां' है। इसे सबसे पहले एल.पी. टैसीटोरी ने देखा था, 1952 में अमलानंद घोष ने इसे हड़प्पा स्थल के रूप में पहचाना और 1961-69 में बी.बी. लाल और बी.के. थापर ने उत्खनन किया।

कालीबंगा से दोहरे सांस्कृतिक स्तर मिले हैं। प्राक-हड़प्पा स्तर से मिला जुता हुआ खेत खुदाई में मिला दुनिया का सबसे पुराना जुता खेत माना जाता है (खेती का पहला प्रमाण नहीं)। इसकी आड़ी-तिरछी हल-रेखाएं एक साथ दो फसलें (आज की तरह चना-सरसों) उगाने का संकेत देती हैं। इसी स्तर पर करीब 2600 ई.पू. के भूकंप का साक्ष्य मिला, जिसे पुरातत्व में दर्ज सबसे पुराने भूकंपों में गिना जाता है।

विकसित हड़प्पा काल में नगर दो भागों में बंटा था: पश्चिमी गढ़ी और पूर्वी निचला नगर। दोनों भाग अलग रक्षा दीवार से सुरक्षित थे। मकान कच्ची ईंटों के होने से इसे 'दीन-हीन बस्ती' कहा गया। पक्की ईंटें कुओं, नालियों और स्नानागार में लगी थीं। जल निकासी के लिए लकड़ी की नाली लगाई गई थी।

दुर्ग टीले पर ईंटों के चबूतरे पर एक कतार में बने 7 अग्निकुंड (हवन कुंड) मिले, जो अग्नि पूजा व बलि के सूचक हैं। बालक की खोपड़ी में 6 छेद मिलने से शल्य चिकित्सा (Trepanation) का पहला साक्ष्य मिला। विदेशी व्यापार दर्शाने वाली मेसोपोटामिया की बेलनाकार मुहर और तीन प्रकार के शवाधान (पूर्ण, आंशिक, कलश शवाधान) यहां मिले।

3. आहड़ (बनास) संस्कृति: ताम्र युगीन केंद्र और संबंधित स्थल

उदयपुर में आयड़ नदी (बेड़च की ऊपरी धारा) के तट पर स्थित आहड़ संस्कृति दक्षिण-पूर्वी राजस्थान की प्रमुख ताम्र पाषाणिक संस्कृति है, जिसे बनास संस्कृति भी कहते हैं। प्राचीन काल में इसे 'ताम्रवती नगरी' और 'आघाटपुर' कहा गया, जबकि स्थानीय नाम 'धूलकोट' है। किताबों के अनुसार इसकी खोज 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास ने की। फिर राज्य पुरातत्व विभाग के आर.सी. अग्रवाल ने खुदाई की और 1961-62 में एच.डी. सांकलिया (डेक्कन कॉलेज) ने उनके साथ बड़ा उत्खनन किया।

आहड़ से तांबा गलाने की भट्टी, काले-लाल बर्तन (BRW) और पक्की मिट्टी का बनासियन बुल मिला। एक मकान में 6 चूल्हे संयुक्त परिवार दर्शाते हैं। बनास संस्कृति के अन्य प्रमुख केंद्र:

  • गिलूंड (राजसमंद): बनास नदी पर स्थित, उत्खनन 1959-60 में बी.बी. लाल ने किया; कच्ची और पक्की ईंटों के निर्माण और प्रस्तर फलक के साक्ष्य।
  • बालाथल (उदयपुर): 1993 में वी.एन. मिश्र ने उत्खनन किया; 11 कमरों का दुर्गनुमा भवन, 4000 वर्ष पुराना कुष्ठ रोग युक्त मानव कंकाल और बुना सूती कपड़ा।
  • ओझियाना (बदनोर तहसील, अब ब्यावर जिला; पहले भीलवाड़ा): ASI जयपुर मंडल के बी.आर. मीणा और आलोक त्रिपाठी ने 1999-2000 में उत्खनन किया (RAS Pre 2024 प्रश्न)। आहड़ संस्कृति के बाकी स्थल नदी घाटियों में हैं, पर यह बस्ती पहाड़ी ढलान पर है। यहां सफेद रंग से चित्रित बैल व गाय की मूर्तियां मिलीं।

4. गणेश्वर और बैराठ सभ्यता: ताम्र और लौह युगीन ऐतिहासिक केंद्र

सीकर जिले में कांतली नदी पर स्थित गणेश्वर को 'ताम्रयुगीन संस्कृतियों की जननी' और 'पुरातत्व का पुष्कर' कहा जाता है। 1977 में इसकी खोज हुई और आर.सी. अग्रवाल व विजय कुमार ने उत्खनन किया। इसका ताम्र युगीन स्तर करीब 2800 ई.पू. से शुरू माना जाता है (कुछ स्रोत 2500-2000 ई.पू. बताते हैं)। यहां 99% शुद्ध तांबे के तीर, बरछी, कुल्हाड़ियां और मछली पकड़ने के कांटे मिले। यहां से हड़प्पा को तांबा भेजा जाता था।

कोटपूतली-बहरोड़ जिले (पहले जयपुर) में बाणगंगा नदी क्षेत्र में स्थित बैराठ (विराटनगर) प्राचीन 16 महाजनपदों में मत्स्य महाजनपद की राजधानी था। पांडवों ने अज्ञातवास यहीं बिताया। 1936-37 में दयाराम साहनी ने उत्खनन किया, और 1962-63 में एन.आर. बनर्जी व कैलाशनाथ दीक्षित ने इसे आगे बढ़ाया। प्राचीन शैलियों के लिए वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला शैलियां देखें।

बैराठ के प्रमुख साक्ष्य:

  • भाब्रू शिलालेख: कैप्टन टी.एस. बर्ट ने 1840 में खोजा (कई किताबों में 1837 लिखा है); इसमें अशोक ने बुद्ध, धम्म और संघ में निष्ठा जताई। यह एशियाटिक सोसाइटी, कोलकाता में रखा है।
  • गोल बौद्ध मंदिर: बीजक की पहाड़ी पर ईंटों और 26 अष्टकोणीय लकड़ी के खंभों वाला गोल मंदिर व स्तूप मिला, जिसे भारत के सबसे पुराने बौद्ध मंदिरों में गिना जाता है।
  • सिक्के: 36 चांदी की मुद्राएं मिलीं (8 पंचमार्क और 28 हिंद-यवन सिक्के, जिनमें 16 मिनांडर के थे)।

5. राजस्थान के अन्य प्रमुख प्रागैतिहासिक और ऐतिहासिक स्थल

राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में कई प्रमुख प्राचीन स्थल मिले हैं:

  • माध्यमिका (नगरी): चित्तौड़गढ़ में बेड़च नदी पर शिवि जनपद की राजधानी। कार्लाइल (1872) व डॉ. डी.आर. भंडारकर (1915-16) ने उत्खनन किया। महाभारत व पतंजलि के महाभाष्य में उल्लेख (RAS Pre 2016 प्रश्न)। शिवि सिक्के और हाथीबाड़ा शिलालेख मिला।
  • बागोर (भीलवाड़ा): कोठारी नदी पर महासतियां टीले पर वी.एन. मिश्र और एल.एस. लेश्निक ने उत्खनन किया। यहां करीब 5000 ई.पू. के पशुपालन के साक्ष्य (भारत के सबसे पुराने साक्ष्यों में) और सूक्ष्म पाषाण औजार मिले।
  • तिलवाड़ा (अब बालोतरा जिला, पहले बाड़मेर): लूनी नदी किनारे मध्य पाषाण कालीन स्थल जहां से पशुपालन के अवशेष मिले।
  • रेड्ड (टोंक): ढील नदी पर केदारनाथ पुरी ने उत्खनन किया। यहां 3,075 चांदी के आहत सिक्के मिले। लोहे के बहुत सारे औजार मिलने से इसे 'प्राचीन राजस्थान का टाटानगर' कहा जाता है।
  • सुनारी (झुंझुनूं): कांतली नदी पर स्थित स्थल जहां लोहा गलाने की प्राचीनतम धौंकनी भट्टी मिली।
  • नलियासर (सांभर, जयपुर): कुषाण और गुप्त कालीन सिक्के और टेराकोटा कलाकृतियां मिलीं। पुरातत्वविद् टी.एच. हैंडले ने इसे एक बौद्ध कस्बा बताया था (RAS Pre 2024 प्रश्न)।

6. राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक अभिलेख और शिलालेख

शिलालेख राजस्थान के इतिहास के सबसे ठोस प्रमाण हैं, जिनसे शासकों के वंश, विजय और धार्मिक स्थिति का पता चलता है। राजस्थान के सांस्कृतिक केंद्रों की जानकारी के लिए किले, मंदिर और उत्सव पढ़ें।

शिलालेख / अभिलेख समय स्थान भाषा, लिपि ऐतिहासिक महत्व
घोसुंडी शिलालेख 2nd Century BC घोसुंडी, चित्तौड़गढ़ संस्कृत, ब्राह्मी संकर्षण-वासुदेव की पूजा के लिए पत्थर की चारदीवारी (नारायण वाटिका) बनने का उल्लेख; राजस्थान में भागवत धर्म का सबसे पुराना अभिलेखीय साक्ष्य (RAS Pre 2016 प्रश्न); गाजायन पाराशरीपुत्र सर्वतात का अश्वमेध यज्ञ।
भाब्रू शिलालेख 3rd Century BC बैराठ (कोटपूतली-बहरोड़) प्राकृत, ब्राह्मी कैप्टन बर्ट ने 1840 में खोजा (कई किताबों में 1837)। मौर्य सम्राट अशोक ने बुद्ध, धम्म, संघ में निष्ठा जताई।
बिजोलिया शिलालेख 1170 ईस्वी बिजोलिया, भीलवाड़ा संस्कृत, नागरी जैन श्रावक लोलाक ने पार्श्वनाथ मंदिर की याद में लगवाया; रचयिता गुणभद्र, लेखक कायस्थ केशव। चौहानों को 'विप्र श्रीवत्सगोत्र' कहा। प्राचीन नगर नाम।
कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति 1460 ईस्वी चित्तौड़गढ़ दुर्ग संस्कृत कवि अत्रि व महेश भट्ट। महाराणा कुंभा की उपाधियां, संगीत ग्रंथ (संगीतराज) और विजय।
राज प्रशस्ति महाकाव्य 1676 ईस्वी राजसमंद झील संस्कृत महाराणा राजसिंह के समय रणछोड़ भट्ट तैलंग रचित, 25 काले पत्थर के शिलापट्ट। सबसे बड़ा शिलालेख (प्रशस्ति) माना जाता है।
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महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताओं और अभिलेखों से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु नीचे दिए गए हैं:

परीक्षा के लिए याद रखें

  • कालीबंगा: खोज अमला नंद घोष (1952), उत्खनन बी.बी. लाल व बी.के. थापर; जुता खेत, 7 अग्निकुंड, लकड़ी नाली, भूकंप साक्ष्य।
  • आहड़: बेड़च नदी, प्राचीन नाम ताम्रवती नगरी व आघाटपुर, स्थानीय नाम धूलकोट; तांबा गलाने की भट्टी, काले-लाल बर्तन, बनासियन बुल।
  • ओझियाना (अब ब्यावर जिला, बदनोर): उत्खनन बी.आर. मीणा और आलोक त्रिपाठी (RAS 2024 प्रश्न); पहाड़ी ढलान पर आहड़ संस्कृति की बस्ती, सफेद चित्रित बैल।
  • बालाथल: उत्खनन वी.एन. मिश्र (1993); 11 कमरों का भवन, 4000 वर्ष पुराना कुष्ठ रोग युक्त कंकाल, बुना कपड़ा।
  • गणेश्वर: कांतली नदी, ताम्र संस्कृतियों की जननी, पुरातत्व का पुष्कर; 99% शुद्ध तांबे के तीर व मछली के कांटे।
  • बैराठ (अब कोटपूतली-बहरोड़ जिला): दयाराम साहनी (1936-37); भाब्रू शिलालेख (कैप्टन बर्ट), गोल बौद्ध मंदिर, 36 चांदी के सिक्के (16 मिनांडर के)।
  • माध्यमिका (नगरी): शिवि जनपद की राजधानी, पतंजलि के महाभाष्य में उल्लेख (RAS 2016 प्रश्न), उत्खनन डी.आर. भंडारकर।
  • घोसुंडी अभिलेख (2nd Century BC): राजस्थान में भागवत धर्म का सबसे पुराना साक्ष्य (RAS 2016 प्रश्न); नलियासर को टी.एच. हैंडले ने बौद्ध कस्बा बताया (RAS 2024 प्रश्न)।

RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान के किस स्थल से जुते खेत का प्राचीनतम प्रमाण मिला है?
    A) आहड़
    B) कालीबंगा
    C) गणेश्वर
    D) बैराठ
    उत्तर: B) कालीबंगा
    कारण: कालीबंगा के प्राक-हड़प्पा स्तर से जुता खेत मिला।
  2. आहड़ संस्कृति के पहाड़ी स्थल 'ओझियाना' का उत्खनन किसने किया था?
    A) बी.बी. लाल, बी.के. थापर
    B) दयाराम साहनी, एन.आर. बनर्जी
    C) बी.आर. मीणा, आलोक त्रिपाठी
    D) अक्षय कीर्ति व्यास, आर.सी. अग्रवाल
    उत्तर: C) बी.आर. मीणा, आलोक त्रिपाठी
    कारण: ASI जयपुर मंडल के बी.आर. मीणा और आलोक त्रिपाठी ने ओझियाना का उत्खनन किया (RAS Pre 2024)।
  3. राजस्थान के किस स्थल को 'ताम्रयुगीन संस्कृतियों की जननी' कहा जाता है?
    A) कालीबंगा
    B) गणेश्वर
    C) बागोर
    D) सुनारी
    उत्तर: B) गणेश्वर
    कारण: गणेश्वर में 99% शुद्ध तांबे के औजार मिले।
  4. अशोक का 'भाब्रू शिलालेख' (बैराठ) किसने खोजा था?
    A) कर्नल जेम्स टॉड
    B) कैप्टन बर्ट
    C) डॉ. डी.आर. भंडारकर
    D) दयाराम साहनी
    उत्तर: B) कैप्टन बर्ट
    कारण: कैप्टन टी.एस. बर्ट ने 1840 में यह शिलालेख खोजा (कई किताबें 1837 लिखती हैं)।
  5. राजस्थान में भागवत धर्म का सबसे प्राचीन अभिलेख कौन सा है?
    A) बिजोलिया शिलालेख
    B) घोसुंडी शिलालेख
    C) कणसवा अभिलेख
    D) घटियाला शिलालेख
    उत्तर: B) घोसुंडी शिलालेख
    कारण: घोसुंडी अभिलेख में संकर्षण और वासुदेव की पूजा के लिए पत्थर की चारदीवारी बनने का उल्लेख है।
  6. प्राचीन शिवि जनपद की राजधानी 'माध्यमिका' (नगरी) के अवशेष किस जिले में हैं?
    A) टोंक
    B) चित्तौड़गढ़
    C) भीलवाड़ा
    D) राजसमंद
    उत्तर: B) चित्तौड़गढ़
    कारण: माध्यमिका चित्तौड़गढ़ में स्थित है (RAS Pre 2016)।
  7. राजस्थान के किस मध्य पाषाण कालीन स्थल को पशुपालन के सबसे पुराने साक्ष्यों के लिए जाना जाता है और यह कोठारी नदी पर है?
    A) बागोर
    B) तिलवाड़ा
    C) बालाथल
    D) गिलूंड
    उत्तर: A) बागोर
    कारण: भीलवाड़ा का बागोर कोठारी नदी पर है और यहां करीब 5000 ई.पू. के पशुपालन साक्ष्य मिले; तिलवाड़ा लूनी पर है, बालाथल और गिलूंड ताम्र पाषाणिक स्थल हैं।
  8. 'बिजोलिया शिलालेख' (1170 ई.) में चौहानों को किस गोत्र का ब्राह्मण बताया गया है?
    A) शांडिल्य गोत्रीय
    B) भारद्वाज गोत्रीय
    C) वत्स गोत्रीय
    D) कश्यप गोत्रीय
    उत्तर: C) वत्स गोत्रीय
    कारण: इसमें 'विप्रः श्रीवत्सगोत्रे' लिखा है, यानी चौहानों को वत्स गोत्र के विप्र बताया गया है।
  9. बैराठ से मिली 36 चांदी की मुद्राओं में से मिनांडर के कितने सिक्के थे?
    A) 8 सिक्के
    B) 12 सिक्के
    C) 16 सिक्के
    D) 28 सिक्के
    उत्तर: C) 16 सिक्के
    कारण: कुल 28 हिंद-यवन सिक्कों में 16 सिक्के मिनांडर के थे।
  10. किस स्थल से तांबा गलाने की भट्टी और 'बनासियन बुल' मिला है?
    A) गणेश्वर
    B) आहड़
    C) सुनारी
    D) कालीबंगा
    उत्तर: B) आहड़
    कारण: उदयपुर के आहड़ से तांबा गलाने की भट्टी और बनासियन बुल मिला।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. कालीबंगा से प्राप्त चार मुख्य पुरातात्विक साक्ष्यों के नाम लिखिए। (20 शब्द)
    उत्तर: जुता खेत (चना-सरसों), 7 अग्निकुंड, लकड़ी की जल निकासी नाली और 6 छेद युक्त खोपड़ी (शल्य चिकित्सा)।
  2. 'बनास संस्कृति' से आप क्या समझते हैं और इसके मुख्य केंद्र कौन से हैं? (20 शब्द)
    उत्तर: मेवाड़ में बनास घाटी की ताम्र पाषाणिक संस्कृति। मुख्य केंद्र आहड़, गिलूंड, बालाथल और ओझियाना हैं।
  3. गणेश्वर सभ्यता को 'ताम्रयुगीन संस्कृतियों की जननी' क्यों कहते हैं? (20 शब्द)
    उत्तर: 2800 ई.पू. की इस ताम्र बस्ती में 99% शुद्ध तांबे के उपकरण मिले, जो हड़प्पा को भेजे जाते थे।
  4. घोसुंडी शिलालेख का राजस्थान के धार्मिक इतिहास में क्या महत्व है? (20 शब्द)
    उत्तर: दूसरी सदी ई.पू. का यह अभिलेख राजस्थान में भागवत (वैष्णव) संप्रदाय और अश्वमेध यज्ञ का सबसे पुराना अभिलेखीय साक्ष्य है।
  5. बिजोलिया शिलालेख की ऐतिहासिक उपयोगिता बताइए। (20 शब्द)
    उत्तर: यह चौहानों को वत्स गोत्रीय ब्राह्मण बताता है और प्राचीन नगरों (जाबालिपुर, शाकंभरी, श्रीमाल) के नाम स्पष्ट करता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख केंद्र के रूप में कालीबंगा के नगर नियोजन और धार्मिक मान्यताओं का मूल्यांकन कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: 1. नगर नियोजन: पश्चिमी दुर्ग और पूर्वी निचला नगर अलग रक्षा दीवारों से सुरक्षित थे। समकोण सड़कें, कच्ची ईंटों के मकान (दीन-हीन बस्ती) और लकड़ी की नाली मुख्य बातें थीं।
    2. धार्मिक विश्वास: दुर्ग टीले पर 7 अग्निकुंड अग्नि पूजा और बलि दर्शाते हैं। मंदिर या मूर्ति पूजा का साक्ष्य नहीं मिला। तीन प्रकार के शवाधान (पूर्ण, आंशिक, कलश) परलोक आस्था बताते हैं।
  2. प्राचीन राजस्थान के प्रमुख पुरातात्विक उत्खनन किस प्रकार अंतर-क्षेत्रीय और विदेशी संपर्कों को सिद्ध करते हैं? (100 शब्द)
    उत्तर: 1. विदेशी व्यापार: कालीबंगा से मेसोपोटामियाई मुहर और बैराठ से 16 मिनांडर के सिक्के विदेशी व्यापार दर्शाते हैं।
    2. धातु और व्यापार: माना जाता है कि गणेश्वर से हड़प्पा क्षेत्र को तांबा जाता था। सुनारी की लोहा गलाने की भट्टियां और रेड्ड के लोहे के औजार लौह उत्पादन बताते हैं, और रेड्ड के 3,075 आहत सिक्के व्यापार दिखाते हैं।
    3. धार्मिक प्रसार: बैराठ का बौद्ध मंदिर बौद्ध धर्म के प्रसार को और घोसुंडी अभिलेख वैष्णव धर्म की व्यापकता सिद्ध करता है।

FAQs

प्रश्न: कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ क्या है और यह किस नदी पर स्थित है?
उत्तर: कालीबंगा का अर्थ 'काली चूड़ियां' है और यह हनुमानगढ़ में घग्घर (प्राचीन सरस्वती) नदी किनारे है।

प्रश्न: राजस्थान के किस पुरातात्विक स्थल से तांबा गलाने की भट्टी मिली है?
उत्तर: उदयपुर में बेड़च घाटी स्थित आहड़ (धूलकोट) से तांबा गलाने की भट्टी मिली, जिससे इसे ताम्रवती नगरी कहा गया।

प्रश्न: सम्राट अशोक का भाब्रू शिलालेख कहां से मिला था और अब कहां सुरक्षित है?
उत्तर: भाब्रू शिलालेख कैप्टन बर्ट ने 1840 में बैराठ (अब कोटपूतली-बहरोड़ जिला) क्षेत्र से खोजा (कई किताबों में 1837)। यह अब एशियाटिक सोसाइटी कोलकाता में है।

प्रश्न: भारत का सबसे बड़ा शिलालेख कौन सा है और यह कहां स्थित है?
उत्तर: 'राज प्रशस्ति' को सबसे बड़ा शिलालेख माना जाता है। इसे रणछोड़ भट्ट तैलंग ने रचा और यह 25 काले पत्थर की शिलाओं पर खुदा है। यह राजसमंद झील की पाल पर लगा है।

प्रश्न: राजस्थान के किस स्थल को 'टाटा नगर' कहा जाता है?
उत्तर: टोंक जिले के रेड्ड को 'प्राचीन राजस्थान का टाटानगर' कहते हैं, क्योंकि यहां लोहे के बहुत सारे औजार मिले। यहीं 3,075 चांदी के आहत सिक्के भी मिले।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ki Prachin Sabhyata: राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं (Rajasthan Ki Prachin Sabhyata) राज्य के हजारों साल पुराने इतिहास की आधारशिला हैं।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Rajasthan ki Prachin Sabhyata: राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएं और प्रमुख अभिलेख, कालीबंगा, आहड़, बैराठ, गणेश्वर और शिलालेख एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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