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Marwar ka Itihas: मारवाड़ का इतिहास, राठौड़ वंश, राव चूण्डा, जोधा, मालदेव और बीकानेर के राव जैतसी

RK

लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Marwar ka Itihas: मारवाड़ का इतिहास, राठौड़ वंश, राव चूण्डा, जोधा, मालदेव और बीकानेर के राव जैतसी - ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (प्राचीन सभ्यता और राजवंश)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Marwar ka Itihas: मारवाड़ का इतिहास (Marwar Ka Itihas) राठौड़ राजवंश के शौर्य, कूटनीति और स्थापत्य का गौरवशाली इतिहास है। 13वीं सदी में रा...
Quick Answer: Marwar ka Itihas: मारवाड़ का इतिहास (Marwar Ka Itihas) राठौड़ राजवंश के शौर्य, कूटनीति और स्थापत्य का गौरवशाली इतिहास है। 13वीं सदी में राव सीहा ने पाली के पास इस वंश की नींव रखी। राव चूण्डा ने मण्डोर को राजधानी बनाया, राव जोधा ने 1459 ईस्वी में जोधपुर और मेहरानगढ़ बसाया, और राव मालदेव ने 52 युद्ध लड़कर मारवाड़ को सबसे बड़ा बनाया; उन्हें 'हशमत वाला राजा' कहा जाता है। बीकानेर में राव बीका ने नगर बसाया और राव जैतसी ने कामरान को हराया।

मारवाड़ का इतिहास: राठौड़ वंश की उत्पत्ति और प्रारंभिक शासक

राठौड़ शब्द संस्कृत के 'राष्ट्रकूट' शब्द से बना माना जाता है। दयालदास री ख्यात और हम्मीर महाकाव्य में राठौड़ों को सूर्यवंशी कहा गया है, जबकि जोधपुर ख्यात इन्हें कन्नौज के जयचंद का वंशज बताती है। प्राचीन राजवंशों की पृष्ठभूमि समझने के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पढ़ें।

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1. राव सीहा (संस्थापक - 13वीं सदी)

राव सीहा ने 13वीं सदी में मारवाड़ में राठौड़ राज्य की नींव रखी। उन्होंने पाली के पालीवाल ब्राह्मणों की रक्षा की और पाली व खेड को केंद्र बनाया। 1273 ईस्वी में बीठू गांव (पाली) में लड़ते हुए राव सीहा ने वीरगति पाई। बीठू शिलालेख में उनकी रानी पार्वती सोलंकी के सती होने का साक्ष्य मिलता है।

2. राव आस्थान और राव धुहड़

राव आस्थान ने खेड पर अधिकार पक्का किया। उनके पुत्र राव धुहड़ कर्नाटक से कुलदेवी चक्रेश्वरी माता की काष्ठ मूर्ति लाए और नागाणा गांव (पहले बाड़मेर, 2023 से बालोतरा जिला) में स्थापित की, जिन्हें नागणेची माता कहा जाता है।

3. राव चूण्डा (1394-1423 ई.) - मण्डोर प्राप्ति

राव चूण्डा मारवाड़ में राठौड़ सत्ता के वास्तविक संस्थापक हैं। इंदा प्रतिहारों ने तुर्कों से सुरक्षा के बदले अपनी राजकुमारी का विवाह राव चूण्डा से किया और मण्डोर दुर्ग दहेज में सौंपा। इस तरह मण्डोर राठौड़ों की पहली स्थायी राजधानी बना।

चूण्डा ने नागौर, खाटू, डीडवाना, सांभर तक राज्य बढ़ाया और सामंती व्यवस्था बनाई। 1423 ईस्वी में नागौर में भाटियों और मुल्तान की सेना से लड़ते हुए उन्होंने वीरगति पाई। ध्यान दें: चूण्डा के बाद उनकी इच्छा से छोटे बेटे कान्हा गद्दी पर बैठे, रणमल नहीं। बड़े बेटे रणमल नाराज होकर मेवाड़ चले गए और कुछ साल बाद मण्डोर के शासक बने। RAS Pre 2024 में राव चूण्डा पर कथन-आधारित प्रश्न आया था: मण्डोर दहेज में मिलना और चूण्डा का सीधा उत्तराधिकारी कौन था।

4. राव रणमल और मेवाड़ संघर्ष

मेवाड़ में रहते हुए रणमल ने अपनी बहन हंसाबाई का विवाह महाराणा लाखा से कराया। हंसाबाई के बेटे मोकल और फिर कुम्भा के समय रणमल का मेवाड़ के शासन में बड़ा दखल रहा। 1438 ईस्वी में सिसौदिया-राठौड़ संघर्ष में चित्तौड़गढ़ में रणमल की हत्या कर दी गई।

राव जोधा और मारवाड़ का सुदृढ़ीकरण

रणमल के पुत्र राव जोधा (1438-1489 ईस्वी) ने 15 वर्ष संघर्ष करके मारवाड़ संगठित किया।

आंवल-बांवल की संधि (1453 ईस्वी)

हंसाबाई की मध्यस्थता से महाराणा कुंभा और राव जोधा के बीच 1453 ईस्वी में आंवल-बांवल की संधि हुई। आंवले वाला क्षेत्र मेवाड़ और बबूल वाला क्षेत्र मारवाड़ माना गया। सोजत दोनों राज्यों की सीमा बनी। जोधा की पुत्री शृंगार देवी का विवाह कुंभा के पुत्र रायमल से हुआ। शृंगार देवी ने घोसुंडी (चित्तौड़गढ़) की बावड़ी बनवाई, जिसका लेख घोसुंडी बावड़ी अभिलेख (1504) कहलाता है।

जोधपुर और मेहरानगढ़ की स्थापना (1459 ईस्वी)

12 मई 1459 ईस्वी को राव जोधा ने जोधपुर बसाया और चिड़ियाटूंख पहाड़ी पर मेहरानगढ़ की नींव श्री करणी माता के हाथों रखवाई। दुर्ग की नींव में राजाराम कड़ेला ने जीवित समाधि दी थी। रानी जसमादे ने रानीसर तालाब बनवाया। किलों और मंदिरों के लिए कला, संस्कृति, दुर्ग और मंदिर पढ़ें।

राव गांगा और राव मालदेव का स्वर्णिम काल

राव गांगा (1515-1531 ईस्वी) ने 1527 ईस्वी के खानवा युद्ध में राणा सांगा की मदद के लिए मालदेव के साथ 4,000 सैनिक भेजे।

राव मालदेव (1531-1562 ई.): 'हशमत वाला राजा'

1531 ईस्वी में सोजत में मालदेव का राजतिलक हुआ। फारसी इतिहासकार फरिश्ता और निजामुद्दीन अहमद ने मालदेव को हिंदुस्तान का सबसे शक्तिशाली राजा माना। राजस्थान के इतिहास में उन्हें 'हशमत वाला राजा' (वैभवशाली शासक) कहा जाता है। परंपरा के अनुसार मालदेव ने 52 युद्ध लड़े और 58 परगनों पर अधिकार किया।

पाहेबा और गिरी-सुमेल का युद्ध

पाहेबा/साहेबा का युद्ध (1541-42 ई.): मालदेव ने बीकानेर के राव जैतसी को हराया। जैतसी ने वीरगति पाई और बीकानेर पर मालदेव का कब्जा हुआ।

गिरी-सुमेल का युद्ध (5 जनवरी 1544 ई.): जैतारण क्षेत्र (पहले पाली, 2023 से ब्यावर जिला) के गिरी और सुमेल गांवों के पास शेरशाह और मालदेव की सेना का सामना हुआ। शेरशाह के जाली पत्रों से मालदेव पीछे हटे, पर सेनापति जैता और कूंपा ने कुछ हजार सैनिकों के साथ भीषण हमला किया। शेरशाह मुश्किल से जीता और बोला: "मैंने मुट्ठी भर बाजरे के लिए पूरे हिंदुस्तान की सल्तनत खो दी होती।"

रूठी रानी उमादे: जैसलमेर के रावल लूणकरण की पुत्री उमादे मालदेव से रूठकर तारागढ़ (अजमेर) में रहीं और मालदेव निधन पर सती हुईं।

Table 1: मारवाड़ के प्रमुख राठौड़ शासक और मुख्य कार्य

शासक शासनकाल राजधानी प्रमुख कार्य व ऐतिहासिक देन
राव सीहा 13वीं सदी (मृत्यु 1273 ई.) पाली / खेड राठौड़ वंश के संस्थापक; बीठू में देवली स्मारक।
राव चूण्डा 1394–1423 ई. मण्डोर इंदा प्रतिहारों से मण्डोर लेकर पहली स्थायी राजधानी बनाया।
राव जोधा 1438–1489 ई. जोधपुर 1453 में आंवल-बांवल संधि; 1459 में मेहरानगढ़ बसाया।
राव मालदेव 1531–1562 ई. जोधपुर 'हशमत वाला राजा'; 1542 में बीकानेर जीता; गिरी-सुमेल (1544) में शेरशाह को कड़ी टक्कर।
राव चंद्रसेन 1562–1581 ई. जोधपुर / सिवाना 'मारवाड़ का प्रताप'; 1570 नागौर दरबार ठुकराया।
महाराजा जसवंत सिंह I 1638–1678 ई. जोधपुर धर्मत युद्ध (1658); भाषा भूषण रचा; नैणसी इनके दीवान।
वीर दुर्गादास राठौड़ 1679–1709 ई. (संघर्ष) जोधपुर 30 वर्ष युद्ध लड़कर अजीत सिंह को गद्दी दिलाई।

राव चंद्रसेन: मारवाड़ का भूला-बिसरा नायक

राव चंद्रसेन (1562-1581 ईस्वी) ने आजीवन स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। इन्हें 'मारवाड़ का प्रताप', 'महाराणा प्रताप का अग्रगामी' और 'मारवाड़ का भूला-बिसरा राजा' कहा जाता है।

नागौर दरबार (1570 ई.): अकबर ने नागौर में शुक्र तालाब बनवाया और दरबार लगाया। मुगल 1564 में ही जोधपुर ले चुके थे और चंद्रसेन भाद्राजून (अब जालोर जिला) से लड़ रहे थे। 1570 में चंद्रसेन नागौर दरबार पहुंचे, पर अकबर की चाल देखकर बिना अधीनता माने लौट आए। इसके बाद अकबर ने 1572 में जोधपुर की देखरेख बीकानेर के रायसिंह को दी। चंद्रसेन ने सिवाना (अब बालोतरा जिला) और सारण की पहाड़ियों से छापामार युद्ध जारी रखा। 1581 ईस्वी में सारण पहाड़ियों (सिचियाई) में उनका देहांत हुआ।

महाराजा जसवंत सिंह प्रथम और वीर दुर्गादास राठौड़

1638 ईस्वी में जसवंत सिंह प्रथम शासक बने। कला और महलों के लिए चित्रकला और स्थापत्य शैलियां देखें।

धर्मत का युद्ध (1658 ईस्वी) और साहित्य

उत्तराधिकार के धर्मत युद्ध में जसवंत सिंह ने औरंगजेब के खिलाफ शाही सेना का नेतृत्व किया। लौटने पर रानी जसवंतदे हाड़ी ने दुर्ग के द्वार बंद कर दिए थे। जसवंत सिंह ने 'भाषा भूषण' और 'आनंद विलास' ग्रंथ लिखे।

इनके दीवान मुहणौत नैणसी ने 'नैणसी री ख्यात' और 'मारवाड़ परगना री विगत' रचे। मुंशी देवी प्रसाद ने नैणसी को 'राजपूताने का अबुल फजल' कहा। 'मारवाड़ परगना री विगत' को 'मारवाड़ का गजेटियर' माना जाता है। 1678 ईस्वी में जमरूद में जसवंत सिंह की मृत्यु पर औरंगजेब ने कहा: "आज कुफ्र का दरवाजा टूट गया।"

वीर दुर्गादास राठौड़ और 30 वर्षीय संघर्ष

औरंगजेब ने जोधपुर को खालसा बनाकर शिशु अजीत सिंह को दिल्ली में बंधक बनाया। दुर्गादास राठौड़ ने गोरा धाय की मदद से अजीत सिंह को सुरक्षित निकाला और 30 साल (1679-1709 ईस्वी) तक मुगलों से युद्ध लड़ा। 1707 में औरंगजेब की मौत के बाद अजीत सिंह ने जोधपुर पर कब्जा किया। 1708 के देबारी समझौते (मेवाड़, मारवाड़, आमेर) के बाद मुगल बादशाह बहादुर शाह ने 1709 तक उन्हें जोधपुर का शासक मान लिया। कर्नल जेम्स टॉड ने दुर्गादास को 'राठौड़ों का यूलीसिस' कहा। 1718 ईस्वी में उज्जैन में शिप्रा तट पर इनका निधन हुआ।

बीकानेर का राठौड़ वंश: राव बीका और राव जैतसी

राव जोधा के पुत्र राव बीका ने 1465 ईस्वी में जांगल देश जाकर करणी माता के आशीर्वाद से 1488 ईस्वी में बीकानेर नगर बसाया। स्थापना के समय राव बीका के 'चंदा' (बड़ी गोल पतंग) उड़ाने की याद में स्थापना दिवस पर आज भी चंदा उड़ाया जाता है।

राव जैतसी और रातीघाटी का युद्ध (1534 ईस्वी)

1534 ईस्वी में कामरान ने बीकानेर पर आक्रमण किया। रातीघाटी में राव जैतसी ने रात्रि युद्ध में कामरान की सेना को हराकर खदेड़ दिया। कवि बीठू सूजा ने डिंगल ग्रंथ 'राव जैतसी रो छंद' में इस विजय का विवरण लिखा है। RAS Pre 2024 में 'राव जैतसी रो छंद' और कामरान पर जैतसी की विजय पर प्रश्न पूछा गया था। 1541-42 में पाहेबा युद्ध में जैतसी वीरगति पाई।

महाराजा राय सिंह और प्रशासनिक स्वरूप

राय सिंह (1574-1612 ईस्वी) ने 1589-94 में जूनागढ़ दुर्ग बनवाया और सूरजपोल पर जयमल-फत्ता की मूर्तियां लगवाईं। मुंशी देवी प्रसाद ने इन्हें 'राजपूताने का कर्ण' कहा।

वर्तमान प्रशासनिक स्थिति: राजस्थान 41 जिलों और 7 संभागों में बंटा है। ऐतिहासिक मारवाड़ (जोधपुर रियासत) आज के जोधपुर, फलोदी, पाली, ब्यावर (जैतारण क्षेत्र), बाड़मेर, बालोतरा, जालोर, नागौर और डीडवाना-कुचामन जिलों में फैला था, जबकि बीकानेर रियासत बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और चूरू जिलों में विस्तृत थी।

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Table 2: मारवाड़ और बीकानेर के प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध और संधियां

युद्ध / संधि वर्ष आमने-सामने ऐतिहासिक परिणाम
आंवल-बांवल की संधि 1453 ई. राव जोधा और महाराणा कुंभा सोजत सीमा बनी; मारवाड़-मेवाड़ शांति समझौता।
रातीघाटी का युद्ध 1534 ई. राव जैतसी बनाम कामरान जैतसी विजयी; 'राव जैतसी रो छंद' में वर्णन।
पाहेबा का युद्ध 1541-42 ई. राव मालदेव बनाम राव जैतसी मालदेव विजयी; जैतसी वीरगति पाई।
गिरी-सुमेल का युद्ध 1544 ई. शेरशाह सूरी बनाम जैता-कूंपा शेरशाह की कठिन जीत; मुट्ठी भर बाजरे वाला कथन।
धर्मत का युद्ध 1658 ई. जसवंत सिंह I बनाम औरंगजेब शाही सेना हारी; औरंगजेब का पलड़ा भारी हुआ।
देबारी समझौता 1708 ई. मेवाड़, मारवाड़ और आमेर राजपूत संघ बना; 1709 में अजीत सिंह को जोधपुर मिला।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

परीक्षा के लिए याद रखें

  • संस्थापक: मारवाड़ के राठौड़ वंश के संस्थापक राव सीहा थे, जिनकी देवली बीठू गांव में है।
  • मण्डोर प्राप्ति: राव चूण्डा ने इंदा प्रतिहारों से मण्डोर दहेज में पाकर पहली स्थायी राजधानी बनाया।
  • राव जोधा: 1453 में कुंभा से आंवल-बांवल संधि (सोजत सीमा); 1459 में चिड़ियाटूंख पहाड़ी पर मेहरानगढ़ की नींव करणी माता से रखवाई।
  • हशमत वाला राजा: राव मालदेव; फरिश्ता ने उन्हें हिंदुस्तान का सबसे शक्तिशाली राजा माना।
  • चूण्डा का उत्तराधिकारी: चूण्डा (मृत्यु 1423) के बाद कान्हा गद्दी पर बैठे, रणमल बाद में शासक बने।
  • गिरी-सुमेल युद्ध: 5 जनवरी 1544 को जैता-कूंपा के पराक्रम से शेरशाह ने बाजरे वाला कथन कहा।
  • मारवाड़ का प्रताप: राव चंद्रसेन ने 1570 नागौर दरबार ठुकराकर सिवाना से छापामार युद्ध लड़ा।
  • रातीघाटी विजय: 1534 ईस्वी में राव जैतसी ने कामरान को हराया, जिसका वर्णन 'राव जैतसी रो छंद' में है।

RAS Prelims MCQ

  1. मारवाड़ में राठौड़ वंश के संस्थापक राव सीहा का स्मारक किस स्थान पर है?
    A) मण्डोर
    B) बीठू गांव (पाली)
    C) नागाणा
    D) खेड
    उत्तर: B) बीठू गांव (पाली)
    कारण: बीठू शिलालेख में राव सीहा और रानी पार्वती के सती होने का उल्लेख है।
  2. राव चूण्डा को मण्डोर दुर्ग किस राजपूत शाखा से दहेज में मिला था?
    A) इंदा प्रतिहार
    B) भाटी राजपूत
    C) चौहान
    D) सिसौदिया
    उत्तर: A) इंदा प्रतिहार
    कारण: तुर्कों से रक्षा के लिए इंदा प्रतिहारों ने मण्डोर दुर्ग चूण्डा को सौंपा था।
  3. 1453 ईस्वी की 'आंवल-बांवल संधि' में दोनों राज्यों की सीमा किसे तय किया गया?
    A) मेड़ता
    B) अजमेर
    C) सोजत
    D) ब्यावर
    उत्तर: C) सोजत
    कारण: हंसाबाई के प्रयास से सोजत को मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा माना गया।
  4. 1459 ईस्वी में मेहरानगढ़ दुर्ग की नींव किस लोकदेवी के हाथों रखी गई?
    A) जीण माता
    B) श्री करणी माता
    C) नागणेची माता
    D) चामुंडा माता
    उत्तर: B) श्री करणी माता
    कारण: राव जोधा ने मेहरानगढ़ की नींव करणी माता (रिद्धू बाई) से रखवाई थी।
  5. राजस्थान के इतिहास में किस शासक को 'हशमत वाला राजा' कहा जाता है?
    A) राव जोधा
    B) राव मालदेव
    C) राव चंद्रसेन
    D) महाराजा जसवंत सिंह I
    उत्तर: B) राव मालदेव
    कारण: मालदेव के बड़े राज्य और ठाठ-बाट के कारण उन्हें यह नाम मिला; फरिश्ता ने भी उन्हें हिंदुस्तान का सबसे शक्तिशाली राजा माना।
  6. "मुट्ठी भर बाजरे के लिए हिंदुस्तान की सल्तनत खो देता" - यह शेरशाह ने किस युद्ध बाद कहा?
    A) पाहेबा का युद्ध
    B) गिरी-सुमेल का युद्ध (1544 ई.)
    C) खानवा का युद्ध
    D) धर्मत का युद्ध
    उत्तर: B) गिरी-सुमेल का युद्ध (1544 ई.)
    कारण: जैता और कूंपा के भीषण हमले से घबराकर शेरशाह ने यह कहा था।
  7. इतिहास में 'मारवाड़ का प्रताप' और 'प्रताप का अग्रगामी' किसे कहा जाता है?
    A) राव मालदेव
    B) वीर दुर्गादास राठौड़
    C) राव चंद्रसेन
    D) अजीत सिंह
    उत्तर: C) राव चंद्रसेन
    कारण: चंद्रसेन ने 1570 नागौर दरबार ठुकराकर आजीवन छापामार युद्ध लड़ा।
  8. राव जैतसी की कामरान पर विजय का प्रामाणिक विवरण किस ग्रंथ में है?
    A) बीकानेर री ख्यात
    B) राव जैतसी रो छंद
    C) वेलि क्रिसन रुकमणी री
    D) दलपत विलास
    उत्तर: B) राव जैतसी रो छंद
    कारण: कवि बीठू सूजा ने 1534 रातीघाटी युद्ध की विजय का वर्णन इसमें किया है।
  9. कर्नल टॉड ने किस वीर को 'राठौड़ों का यूलीसिस' कहा था?
    A) जैता और कूंपा
    B) वीर दुर्गादास राठौड़
    C) गोरा धाय
    D) मुकुंददास खींची
    उत्तर: B) वीर दुर्गादास राठौड़
    कारण: दुर्गादास के त्याग और 30 साल के सफल संघर्ष पर टॉड ने यह कहा।
  10. मुंशी देवी प्रसाद ने किसे 'राजपूताने का अबुल फजल' कहा है?
    A) कविराजा श्यामलदास
    B) मुहणौत नैणसी
    C) सूर्यमल्ल मिश्रण
    D) दयालदास
    उत्तर: B) मुहणौत नैणसी
    कारण: नैणसी ने 'मारवाड़ परगना री विगत' में सांख्यिकीय और राजस्व का प्रामाणिक ब्योरा दिया।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. आंवल-बांवल की संधि (1453 ई.) का महत्व बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: कुंभा और जोधा के बीच हुई। सोजत सीमा बनी और जोधा को पैतृक मण्डोर वापस मिला।
  2. गिरी-सुमेल युद्ध में जैता और कूंपा के योगदान को बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: मालदेव के पीछे हटने के बाद भी जैता-कूंपा ने अपने सैनिकों के साथ अफगानों पर हमला किया। इनके शौर्य से शेरशाह भयभीत हुआ।
  3. राव चंद्रसेन को 'मारवाड़ का भूला-बिसरा राजा' क्यों कहते हैं?
    उत्तर रूपरेखा: चंद्रसेन ने 1570 नागौर दरबार ठुकराकर सिवाना से संघर्ष किया, पर इन्हें उचित ख्याति नहीं मिली।
  4. मुहणौत नैणसी की कृतियों का परिचय दीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: नैणसी ने 'नैणसी री ख्यात' और 'मारवाड़ परगना री विगत' (मारवाड़ का गजेटियर) लिखी।
  5. 'राव जैतसी रो छंद' का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
    उत्तर रूपरेखा: बीठू सूजा रचित इस ग्रंथ में 1534 के रातीघाटी युद्ध में कामरान पर जैतसी की विजय दर्ज है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. राव मालदेव की राजनीतिक उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - परिचय: 1531 ईस्वी में शासक बने मालदेव को 'हशमत वाला राजा' कहा जाता है; फरिश्ता ने उन्हें हिंदुस्तान का सबसे शक्तिशाली राजा माना।
    - विजय: परंपरा के अनुसार 52 युद्ध, 58 परगने। मेड़ता, नागौर, सिवाना और 1541-42 में बीकानेर को जीता।
    - सीमाएं: बीकानेर व मेड़ता को शत्रु बनाया; हुमायूं को समय पर मदद न देना कूटनीतिक भूल रही।
    - युद्ध व निर्माण: गिरी-सुमेल में जैता-कूंपा का शौर्य; जोधपुर परकोटा व पोकरण दुर्ग बनवाया।
  2. मारवाड़ के 30 वर्षीय संघर्ष में वीर दुर्गादास राठौड़ के योगदान का परीक्षण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - पृष्ठभूमि: 1678 में जसवंत सिंह के निधन पर औरंगजेब ने जोधपुर को खालसा बनाया।
    - उद्धार: दुर्गादास ने गोरा धाय के साथ अजीत सिंह को दिल्ली से निकाला और सुरक्षित रखा।
    - कूटनीति: मेवाड़ के राजसिंह से संधि की और 30 साल छापामार युद्ध लड़कर 1709 में अजीत सिंह को शासक बनाया।
    - उपाधि: कर्नल टॉड ने 'राठौड़ों का यूलीसिस' और जनमानस ने 'अणबिंदिया मोती' कहा।

FAQs

राव जोधा ने मण्डोर के स्थान पर जोधपुर को राजधानी क्यों बनाया?

मण्डोर असुरक्षित था जहाँ घेराबंदी आसान थी। सुरक्षा के लिए जोधा ने 1459 ईस्वी में चिड़ियाटूंख पर मेहरानगढ़ बनाकर जोधपुर को राजधानी बनाया।

गिरी-सुमेल का युद्ध कब और किसके बीच हुआ?

गिरी-सुमेल का युद्ध 5 जनवरी 1544 को जैतारण क्षेत्र (अब ब्यावर जिला) में शेरशाह सूरी और राव मालदेव के सेनापति जैता-कूंपा के बीच लड़ा गया।

'रूठी रानी' कौन थीं और वे मालदेव से अलग क्यों रहीं?

रूठी रानी जैसलमेर के रावल लूणकरण की पुत्री उमादे थीं। स्वाभिमान को ठेस लगने से वे तारागढ़ (अजमेर) में रहीं और मालदेव की मृत्यु पर सती हुईं।

'राव जैतसी रो छंद' के रचयिता कौन हैं और इसका विषय क्या है?

इसके रचयिता डिंगल कवि बीठू सूजा हैं। इसमें 1534 ईस्वी में बीकानेर के राव जैतसी ने बाबर के पुत्र कामरान को रातीघाटी में हराया, इसका विवरण है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Marwar ka Itihas: मारवाड़ का इतिहास (Marwar Ka Itihas) राठौड़ राजवंश के शौर्य, कूटनीति और स्थापत्य का गौरवशाली इतिहास है।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Marwar ka Itihas: मारवाड़ का इतिहास, राठौड़ वंश, राव चूण्डा, जोधा, मालदेव और बीकानेर के राव जैतसी एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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