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Chauhan Vansh: चौहान वंश और कछवाहा वंश, शाकम्भरी, अजमेर, रणथंभौर, जालोर और आमेर का इतिहास

RK

लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Chauhan Vansh: चौहान वंश और कछवाहा वंश, शाकम्भरी, अजमेर, रणथंभौर, जालोर और आमेर का इतिहास - ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (प्राचीन सभ्यता और राजवंश)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Chauhan Vansh: चौहान वंश (Chauhan Vansh) और आमेर का कछवाहा वंश राजस्थान के दो प्रमुख राजवंश रहे हैं। परंपरा के अनुसार चौहान राज्य की नींव ...
Quick Answer: Chauhan Vansh: चौहान वंश (Chauhan Vansh) और आमेर का कछवाहा वंश राजस्थान के दो प्रमुख राजवंश रहे हैं। परंपरा के अनुसार चौहान राज्य की नींव वासुदेव चौहान ने शाकम्भरी (सांभर) में रखी (डॉ. दशरथ शर्मा के अनुसार करीब 551 ईस्वी), शुरुआती राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) मानी जाती है। अजयराज ने 12वीं सदी की शुरुआत (करीब 1113 ईस्वी) में अजमेर (अजयमेरु) बसाया। विग्रहराज चतुर्थ ने दिल्ली जीती और हरकेलि नाटक लिखा। पृथ्वीराज तृतीय ने 1191 में तराइन के पहले युद्ध में मुहम्मद गोरी को हराया। रणथंभौर में हम्मीर देव (1301 का साका) और जालोर में कान्हड़देव (1311) ने अलाउद्दीन खिलजी के सामने शौर्य दिखाया। कछवाहा वंश की नींव 1137 में दुल्हराय ने रखी। भारमल ने 1562 में मुगलों से पहली संधि की। मानसिंह प्रथम, मिर्जा राजा जयसिंह (पुरंदर संधि 1665) और सवाई जयसिंह द्वितीय (जयपुर स्थापना 1727, जंतर-मंतर) ने ऐतिहासिक कार्य किए।

RAS Pre 2013 में दिल्ली-शिवालिक स्तम्भ अभिलेख किस चौहान शासक के समय का है, इस पर और सांभर झील के शाकम्भरी माता मंदिर पर सवाल आए। RAS Pre 2024 में रासो ग्रंथ और उनके लेखकों के मिलान (जैसे बीसलदेव रासो - नरपति नाल्ह) पर सवाल आया। चौहानों ने तुर्कों का मुकाबला किया, वहीं कछवाहा शासकों ने मुगलों से संबंध बनाकर स्थापत्य व साहित्य को समृद्ध किया। इस संदर्भ में आप राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन कर सकते हैं।

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चौहान वंश का उद्भव और शाकम्भरी शाखा

चंद्रबरदाई के 'पृथ्वीराज रासो' में अग्निकुंड मत मिलता है, जिसके अनुसार वशिष्ठ के आबू यज्ञ से प्रतिहार, चालुक्य, परमार और चहमान (चौहान) उत्पन्न हुए। 1170 के बिजोलिया शिलालेख में इन्हें 'वत्सगोत्रीय विप्र' (ब्राह्मण) कहा गया। जयानक और ओझा जी इन्हें सूर्यवंशी मानते हैं, जबकि टॉड ने इन्हें सीथियन माना।

चौहान वंश के संस्थापक वासुदेव चौहान माने जाते हैं। परंपरा के अनुसार इन्होंने शाकम्भरी (सांभर) क्षेत्र में राज्य बनाया (दशरथ शर्मा: करीब 551 ईस्वी)। शुरुआती राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) मानी जाती है। बिजोलिया लेख वासुदेव को सांभर झील बनने से जोड़ता है। सांभर में चौहानों की कुलदेवी शाकम्भरी माता का प्राचीन मंदिर है। गुवक प्रथम प्रतिहार शासक नागभट्ट द्वितीय के सामंत थे, और इन्हें सीकर के हर्षनाथ मंदिर से जोड़ा जाता है। चंदनराज की रानी रुद्राणी (आत्मप्रभा) योग साधिका थीं और पुष्कर में शिवजी के सामने रोज 1,000 दीप जलाती थीं।

अजमेर का चौहान वंश: प्रमुख शासक और उपलब्धियां

12वीं सदी में चौहान शक्ति का केंद्र अजमेर बना। राजस्थान के प्रमुख दुर्गों और मंदिरों के लिए राजस्थान के प्रमुख दुर्ग और मंदिर अवश्य पढ़ें।

1. अजयराज चौहान (1113 ईस्वी)

अजयराज ने करीब 1113 ईस्वी में अजयमेरु (अजमेर) बसाया और अजयमेरु दुर्ग (आज का तारागढ़, जिसे गढ़ बीठली भी कहते हैं) बनवाया। हिंदी किताबें बताती हैं कि बिशप हेबर ने इसे 'राजस्थान का जिब्राल्टर' कहा (कुछ स्रोत 'दूसरा जिब्राल्टर' नाम विलियम बैंटिक से जोड़ते हैं)। अजयराज के चांदी-तांबे के सिक्कों पर 'श्री अजयदेव' और कुछ पर रानी सोमलदेवी का नाम मिलता है।

2. अर्णोराज / आनाजी (1133–1153 ईस्वी)

अर्णोराज ने तुर्कों को हराकर चंद्रा नदी का जल रोककर 'आनासागर झील' बनवाई और पुष्कर में वराह मंदिर बनवाया। दरबार में देवबोध और धर्मघोष सूरि विद्वान थे। पुत्र जगदेव ने इनकी हत्या की।

3. विग्रहराज चतुर्थ / बीसलदेव (करीब 1150–1164 ईस्वी)

विग्रहराज चतुर्थ का काल चौहानों का स्वर्णकाल माना जाता है। जयानक के 'पृथ्वीराज विजय' में इन्हें 'कवि बांधव' (कवियों का मित्र) कहा गया है। इन्होंने तोमरों को हराकर दिल्ली अपने अधीन की। इसी काल का दिल्ली-शिवालिक स्तम्भ अभिलेख (1163-64 ईस्वी, विक्रम संवत 1220) अशोक के टोपरा स्तम्भ पर खुदा है। इसमें दावा है कि इन्होंने हिमालय से विंध्य तक का क्षेत्र जीता (RAS Pre 2013 में इसी अभिलेख पर सवाल)। इन्होंने अजमेर में संस्कृत पाठशाला बनवाई, जिसे तुर्क विजय के बाद (करीब 1192-1199) कुतुबुद्दीन ऐबक ने 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' मस्जिद में बदल दिया। विग्रहराज ने संस्कृत में 'हरकेलि' नाटक लिखा। इसके अंश इसी इमारत से मिली शिलाओं पर खुदे हैं (आज अजमेर संग्रहालय में)। दरबारी कवि सोमदेव ने 'ललित विग्रहराज' नाटक लिखा। 'बीसलदेव रासो' नरपति नाल्ह की रचना है। इन्होंने टोंक में विग्रहपुर (आज का बीसलपुर) कस्बा बसाया और वहां गोकर्णेश्वर मंदिर बनवाया (आज का बीसलपुर बांध बहुत बाद में बना)।

4. पृथ्वीराज चौहान तृतीय / राय पिथौरा (1177–1192 ईस्वी)

पृथ्वीराज तृतीय का जन्म 1166 में अन्हिलपाटन में हुआ। पिता सोमेश्वर, माता कर्पूरी देवी। 11 वर्ष (1177) में गद्दी संभाली। मंत्री कैमास सहयोगी रहे। उपाधियां: 'दल पंगुल' और 'राय पिथौरा'। इन्होंने चचेरे भाई नागार्जुन का विद्रोह दबाया, भंडानकों को हराया और 1182-83 में चंदेल राजा परमार्दिदेव के राज्य (महोबा) पर हमला किया। लोक-परंपरा में आल्हा-ऊदल इसी युद्ध से जुड़े हैं।

1191 के पहले तराइन युद्ध में पृथ्वीराज ने मुहम्मद गोरी को हराया और गोरी घायल होकर लौटा (परंपरा के अनुसार उसे दिल्ली के गोविंदराज तोमर ने घायल किया)। 1192 के दूसरे युद्ध में गोरी ने राजपूत सेना को हराया। पृथ्वीराज सरस्वती (सिरसा) के पास पकड़े गए और बाद में मारे गए। दरबारी: चंद्रबरदाई (पृथ्वीराज रासो), जयानक (पृथ्वीराज विजय), विद्यापति गौड़, जनार्दन और विश्वरूप।

रणथंभौर और जालोर के चौहान: हम्मीर देव और कान्हड़देव

तराइन के बाद चौहान शक्ति रणथंभौर और जालोर में प्रतिरोध का केंद्र बनी।

रणथंभौर शाखा: हठी हम्मीर देव

पृथ्वीराज के पुत्र गोविंदराज ने 1194 में रणथंभौर शाखा बनाई। हम्मीर देव (1282/83–1301) ने पिता जैत्रसिंह की याद में 32 खंभों की छतरी बनवाई। जलालुद्दीन खिलजी रणथंभौर जीत नहीं सका।

1301 का साका: हम्मीर ने अलाउद्दीन से बागी हुए मंगोल सरदार मुहम्मद शाह को शरण दी। इनकी हठ पर दोहा है: "सिंह सवन, सत्पुरुष वचन, कदली फलत इक बार। तिरिया तेल हम्मीर हठ, चढ़े न दूजी बार॥" अलाउद्दीन ने घेरा डाला। रणमल और रतिपाल के विश्वासघात से रसद खत्म हुई। जुलाई 1301 में हम्मीर ने केसरिया किया (मृत्यु की तारीख 10 या 11 जुलाई, दोनों मिलती हैं) और रानी रंगदेवी के नेतृत्व में जौहर हुआ (किताबों में पुत्री पद्मला का नाम भी आता है)। इसे राजस्थान का पहला साका माना जाता है। अमीर खुसरो ने लिखा: "आज कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया।" नयनचंद्र सूरि ने 'हम्मीर महाकाव्य' और चंद्रशेखर ने 'हम्मीर हठ' लिखा।

जालोर के सोनगरा चौहान: कान्हड़देव

1181 में कीर्तिपाल चौहान ने जालोर शाखा बनाई (नैणसी: 'कीतू एक महान राजपूत')। प्रमुख शासक कान्हड़देव (करीब 1292–1311) और उनके पुत्र वीरमदेव थे।

  • सिवाना का साका (1308): अलाउद्दीन खिलजी ने खुद सिवाना घेरा (घेरे में कमालुद्दीन गुर्ग भी था)। सातलदेव ने किले की रक्षा की। एक भायल सैनिक के धोखे से किले का जलाशय दूषित किया गया। सातलदेव मारे गए और जौहर हुआ। अलाउद्दीन ने सिवाना का नाम 'खैराबाद' रखा।
  • जालोर का साका (1311): अलाउद्दीन की सेना ने कमालुद्दीन गुर्ग के नेतृत्व में जालोर जीता। बीका दहिया ने धोखे से सेना को किले का असुरक्षित रास्ता बताया। कान्हड़देव और वीरमदेव मारे गए और जौहर हुआ। पद्मनाभ ने 1455 में 'कान्हड़दे प्रबंध' लिखा, जिसमें वीरमदेव और अलाउद्दीन की पुत्री फिरोजा (पिरोजा) की कथा भी है।

आमेर का कछवाहा वंश: मुगलों से संबंध और सांस्कृतिक उत्कर्ष

कछवाहा वंश स्वयं को कुश का वंशज मानता है। ध्वज पर 'यतो धर्मस्ततो जयः' अंकित था। वास्तुकला शैलियों के लिए राजस्थान की वास्तुकला और चित्रकला शैलियां देखें।

1. स्थापना और विस्तार

1137 में दुल्हराय ने दौसा को पहली राजधानी बनाया और जमवारामगढ़ में कुलदेवी जमवाय माता का मंदिर बनवाया। 1207 में कोकिलदेव ने आमेर को स्थायी राजधानी बनाया। खानवा युद्ध (1527) में पृथ्वीराज कछवाहा लड़े और आमेर को 'बारह कोठड़ी' में बांटा।

2. राजा भारमल और भगवंत दास

भारमल पहले राजपूत शासक थे जिन्होंने मुगलों की अधीनता मानी। 1562 में भारमल ने अकबर की अधीनता मानी और सांभर में पुत्री हरखा बाई (मरियम-उज-जमानी) का विवाह अकबर से किया। अकबर ने भारमल को 5000 का मनसब दिया। भगवंत दास ने पुत्री मानबाई का विवाह जहांगीर से किया (खुसरो की मां)।

3. राजा मानसिंह प्रथम (1589–1614 ईस्वी)

मानसिंह अकबर के नवरत्न थे। इन्हें 'फरजंद' उपाधि और 7,000 का सर्वोच्च मनसब मिला। 1576 हल्दीघाटी में ये मुगल सेनापति थे। इन्होंने काबुल (1585), बिहार (1587) और बंगाल (1594) में विद्रोह दबाए। बंगाल अभियान के समय जैसोर से शिला माता की प्रतिमा लाकर आमेर दुर्ग में स्थापित की (इष्टदेवी)। 1592 के आसपास आमेर महल का काम शुरू कराया, वृंदावन में गोविंद देव जी मंदिर बनवाया। रानी कनकावती ने 'जगत शिरोमणि मंदिर' बनवाया (मीराबाई की कृष्ण मूर्ति)। पुंडरीक विट्ठल ने 'रागमाला' ग्रंथ लिखा।

4. मिर्जा राजा जयसिंह (1621–1667 ईस्वी)

इन्होंने 46 वर्ष शासन कर जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब की सेवा की। शाहजहां ने इन्हें 'मिर्जा राजा' की उपाधि दी। जयसिंह ने 11 जून 1665 को छत्रपति शिवाजी महाराज से 'पुरंदर की संधि' की (शिवाजी ने 23 किले दिए)। दरबारी कवि बिहारी लाल ने 713 दोहों की 'बिहारी सतसई' लिखी। आमेर दुर्ग का गणेश पोल इन्हीं के समय बना।

सवाई जयसिंह द्वितीय: जयपुर स्थापना और खगोल विज्ञान

सवाई जयसिंह (1700–1743) को 'सवाई' की उपाधि औरंगजेब ने दी। इन्होंने सात मुगल बादशाहों का काल देखा। 1708 के देबारी समझौते में मेवाड़ राजकुमारी चंद्रकुंवरी से विवाह किया। मराठों के विरुद्ध 17 जुलाई 1734 को भीलवाड़ा में 'हुरड़ा सम्मेलन' बुलाया (अध्यक्षता जगतसिंह द्वितीय), जो विफल रहा।

जयपुर स्थापना (1727): 18 नवंबर 1727 को जयनगर (जयपुर) की स्थापना की। वास्तुकार बंगाल के विद्याधर भट्टाचार्य थे। नगर वैदिक वास्तुशास्त्र और ग्रिड पैटर्न पर बसाया गया।

जंतर-मंतर वेधशालाएं: पांच खगोलीय वेधशालाएं बनवाईं: दिल्ली (1724, पहली), जयपुर (1734, सबसे बड़ी - यूनेस्को विश्व धरोहर 2010, सम्राट यंत्र सूर्यघड़ी), उज्जैन, वाराणसी और मथुरा। इनके संरक्षण में 'जीज मुहम्मदशाही' सारणी और 'जयसिंह कारिका' ग्रंथ तैयार हुए। जगन्नाथ सम्राट ने 'सिद्धांत सम्राट' लिखा।

सांस्कृतिक कार्य: इन्होंने अश्वमेध यज्ञ कराया (पुरोहित पुंडरीक रत्नाकर; साल को लेकर स्रोतों में मतभेद है)। नाहरगढ़ दुर्ग (सुदर्शनगढ़) बनवाया, जलमहल का जीर्णोद्धार कराया और गोविंद देव जी की मूर्ति जयपुर में स्थापित कराई।

आज के जिले (41 जिले, 7 संभाग, 28 दिसंबर 2024 से): सांभर - जयपुर जिला; अजमेर-तारागढ़ - अजमेर जिला; रणथंभौर - सवाई माधोपुर जिला (भरतपुर संभाग); जालोर - जालोर जिला; सिवाना - बालोतरा जिला; दौसा - दौसा जिला; आमेर और जमवारामगढ़ - जयपुर जिला।

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प्रमुख राजवंशों की तुलनात्मक तालिका

राजवंश शाखा संस्थापक और वर्ष राजधानी कुलदेवी / इष्टदेवी प्रमुख ऐतिहासिक उपलब्धि
शाकम्भरी के चौहान वासुदेव (परंपरा: करीब 551 ईस्वी) अहिच्छत्रपुर, सांभर शाकम्भरी माता सांभर झील और चौहान वंश की स्थापना
अजमेर के चौहान अजयराज (करीब 1113 ईस्वी) अजयमेरु (अजमेर) शाकम्भरी / आशापुरा माता विग्रहराज की दिल्ली विजय, तराइन युद्ध
रणथंभौर के चौहान गोविंदराज (1194 ईस्वी) रणथंभौर दुर्ग आशापुरा माता हम्मीर देव का शरणागत धर्म, 1301 साका
जालोर के सोनगरा चौहान कीर्तिपाल (1181 ईस्वी) जालोर (स्वर्णगिरि) आशापुरा माता कान्हड़देव का शौर्य, 1308 व 1311 साके
आमेर का कछवाहा वंश दुल्हराय (1137 ईस्वी) दौसा, आमेर, जयपुर जमवाय माता, शिला माता मानसिंह सैन्य विजय, सवाई जयसिंह वेधशालाएं

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

ऐतिहासिक बिंदु शासक या संदर्भ परीक्षा के लिए मुख्य विवरण
कवि बांधव विग्रहराज चतुर्थ हरकेलि नाटक, दिल्ली विजय
दल पंगुल व राय पिथौरा पृथ्वीराज तृतीय तराइन का पहला युद्ध (1191) जीता
हठी हम्मीर हम्मीर देव चौहान मंगोल मुहम्मद शाह को शरण, 1301 साका
कान्हड़दे प्रबंध कवि पद्मनाभ जालोर के कान्हड़देव व अलाउद्दीन युद्ध ग्रंथ
7000 मनसब राजा मानसिंह प्रथम काबुल-बंगाल सूबेदार, शिला माता मंदिर
पुरंदर संधि (1665) मिर्जा राजा जयसिंह शिवाजी महाराज से 11 जून 1665 को 23 किले संधि
जयपुर स्थापना सवाई जयसिंह द्वितीय 1727 में जयपुर स्थापना, पांच वेधशालाएं

परीक्षा के लिए याद रखें

  • परंपरा के अनुसार वासुदेव चौहान (करीब 551 ईस्वी) ने सांभर में चौहान राज्य की नींव रखी; सांभर में कुलदेवी शाकम्भरी माता का मंदिर है।
  • अजयराज ने करीब 1113 ईस्वी में अजमेर बसाया और अजयमेरु दुर्ग (तारागढ़, गढ़ बीठली) बनवाया।
  • दिल्ली-शिवालिक स्तम्भ अभिलेख (1163-64) विग्रहराज चतुर्थ के समय का है; इनकी संस्कृत पाठशाला बाद में अढ़ाई दिन का झोंपड़ा बनी।
  • हम्मीर देव चौहान के समय 1301 में रणथंभौर का पहला साका हुआ।
  • कान्हड़देव और वीरमदेव ने 1311 ईस्वी में जालोर साके में बलिदान दिया।
  • राजा भारमल ने 1562 में अकबर की अधीनता मानी और सांभर में पुत्री का विवाह अकबर से किया।
  • मिर्जा राजा जयसिंह ने 11 जून 1665 को शिवाजी महाराज से पुरंदर संधि की।
  • सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1727 में जयपुर बसाया और पांच वेधशालाएं बनवाईं।

RAS Prelims MCQ

  1. बिजोलिया शिलालेख (1170 ईस्वी) सांभर झील के बनने को किस चौहान शासक से जोड़ता है?
    A) अजयराज चौहान
    B) विग्रहराज चतुर्थ
    C) वासुदेव चौहान
    D) अर्णोराज चौहान
    उत्तर: C) वासुदेव चौहान
    कारण: बिजोलिया लेख वंश के आदि पुरुष वासुदेव को सांभर झील से जोड़ता है।
  2. अजमेर की वह संस्कृत पाठशाला किस चौहान शासक ने बनवाई, जिसे बाद में 'अढ़ाई दिन का झोंपड़ा' मस्जिद बना दिया गया?
    A) अजयराज
    B) अर्णोराज
    C) विग्रहराज चतुर्थ
    D) पृथ्वीराज तृतीय
    उत्तर: C) विग्रहराज चतुर्थ
    कारण: विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव) ने यह पाठशाला बनवाई; इसकी शिलाओं पर उनका हरकेलि नाटक खुदा मिला।
  3. विग्रहराज चतुर्थ का प्रसिद्ध संस्कृत नाटक कौन सा है?
    A) ललित विग्रहराज
    B) हरकेलि
    C) प्रसन्न राघव
    D) कर्णसुंदरी
    उत्तर: B) हरकेलि
    कारण: विग्रहराज चतुर्थ ने 'हरकेलि' लिखा था।
  4. पृथ्वीराज तृतीय के महोबा (चंदेल) अभियान से लोक-परंपरा में कौन से दो वीर जुड़े हैं?
    A) जयमल और फत्ता
    B) गोरा और बादल
    C) आल्हा और ऊदल
    D) रणमल और रतिपाल
    उत्तर: C) आल्हा और ऊदल
    कारण: आल्हा-ऊदल चंदेल राजा परमार्दिदेव के सेनानायक माने जाते हैं; जयमल-फत्ता चित्तौड़ (1568) और गोरा-बादल चित्तौड़ (1303) से जुड़े हैं।
  5. 1301 में रणथंभौर साके पर किस इतिहासकार ने लिखा कि "आज कुफ्र का गढ़ इस्लाम का घर हो गया"?
    A) जियाउद्दीन बरनी
    B) अमीर खुसरो
    C) फरिश्ता
    D) अलबरूनी
    उत्तर: B) अमीर खुसरो
    कारण: अमीर खुसरो ने रणथंभौर विजय पर यह लिखा था।
  6. 'कान्हड़दे प्रबंध' ग्रंथ के रचयिता कौन हैं?
    A) कवि पद्मनाभ
    B) सारंगधर
    C) जोधराज
    D) नयनचंद्र सूरि
    उत्तर: A) कवि पद्मनाभ
    कारण: कवि पद्मनाभ ने जालोर इतिहास पर यह ग्रंथ लिखा।
  7. अकबर ने आमेर के किस शासक को 'फरजंद' उपाधि और 7000 मनसब दिया?
    A) राजा भारमल
    B) भगवंत दास
    C) मिर्जा राजा जयसिंह
    D) राजा मानसिंह प्रथम
    उत्तर: D) राजा मानसिंह प्रथम
    कारण: अकबर ने मानसिंह को यह सर्वोच्च सम्मान दिया।
  8. 11 जून 1665 को पुरंदर की संधि में मुगल सेनापति कौन थे?
    A) शाइस्ता खान
    B) राजा मानसिंह प्रथम
    C) मिर्जा राजा जयसिंह
    D) सवाई जयसिंह द्वितीय
    उत्तर: C) मिर्जा राजा जयसिंह
    कारण: मिर्जा राजा जयसिंह ने शिवाजी महाराज से पुरंदर संधि की।
  9. कवि बिहारी लाल किस आमेर नरेश के दरबारी कवि थे?
    A) सवाई जयसिंह द्वितीय
    B) राजा मानसिंह प्रथम
    C) मिर्जा राजा जयसिंह
    D) राजा भारमल
    उत्तर: C) मिर्जा राजा जयसिंह
    कारण: बिहारी लाल मिर्जा राजा जयसिंह के राजकवि थे।
  10. सवाई जयसिंह द्वितीय ने पहली खगोलीय वेधशाला किस शहर में बनाई?
    A) जयपुर
    B) दिल्ली
    C) उज्जैन
    D) वाराणसी
    उत्तर: B) दिल्ली
    कारण: सवाई जयसिंह ने पहली वेधशाला 1724 में दिल्ली में बनाई।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. विग्रहराज चतुर्थ को 'कवि बांधव' क्यों कहा जाता है? (20 शब्द)
    उत्तर: वे स्वयं 'हरकेलि' नाटक के रचयिता थे और सोमदेव जैसे कवियों को संरक्षण दिया।
  2. अर्णोराज की दो प्रमुख सांस्कृतिक उपलब्धियां बताइए। (20 शब्द)
    उत्तर: अर्णोराज ने अजमेर में आनासागर झील बनवाई और पुष्कर में वराह मंदिर बनवाया।
  3. हम्मीर देव चौहान के हठ का ऐतिहासिक कारण क्या था? (20 शब्द)
    उत्तर: हम्मीर ने मंगोल सेनापति मुहम्मद शाह को शरण देकर शरणागत रक्षा में बलिदान दिया।
  4. पुरंदर की संधि (1665) की दो मुख्य शर्तें क्या थीं? (20 शब्द)
    उत्तर: शिवाजी महाराज ने 23 दुर्ग मुगलों को सौंपे और पुत्र संभाजी को 5,000 मनसब मिला।
  5. सवाई जयसिंह द्वितीय की पांच वेधशालाएं किन शहरों में हैं? (20 शब्द)
    उत्तर: यह वेधशालाएं दिल्ली (1724), जयपुर (1734), उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में हैं।

Long Questions (5–10 marks)

  1. पृथ्वीराज चौहान तृतीय की सैनिक उपलब्धियों और तराइन युद्धों के परिणामों का मूल्यांकन कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: पृथ्वीराज चौहान तृतीय (1177–1192) ने नागार्जुन का विद्रोह दबाया, भंडानकों का दमन किया और महोबा के चंदेलों को हराया। 1191 में पहले तराइन युद्ध में गोरी को पराजित किया। 1192 के द्वितीय युद्ध में गोरी की चाल से राजपूत सेना हार गई। इस पराजय से भारत में हिंदू साम्राज्य का पतन हुआ और दिल्ली में तुर्क सल्तनत की स्थापना हुई।
  2. सवाई जयसिंह द्वितीय के खगोलीय, नगर नियोजन और सांस्कृतिक योगदान का परीक्षण कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: सवाई जयसिंह द्वितीय (1700–1743) 18वीं सदी के महान खगोलविद और दूरदर्शी शासक थे। इन्होंने 18 नवंबर 1727 को विद्याधर भट्टाचार्य के सहयोग से ग्रिड पैटर्न पर जयपुर नगर बसाया। इन्होंने दिल्ली, जयपुर, उज्जैन, वाराणसी और मथुरा में पांच जंतर-मंतर वेधशालाएं बनवाईं। जयपुर में विशाल सूर्यघड़ी 'सम्राट यंत्र' स्थित है। इन्होंने 1740 में अंतिम वैदिक अश्वमेध यज्ञ कराया, नाहरगढ़ दुर्ग बनवाया और सामाजिक सुधार किए।

FAQs

प्रश्न: चौहान वंश के संस्थापक कौन थे और राजधानी कहां थी?
उत्तर: परंपरा के अनुसार वासुदेव चौहान (करीब 551 ईस्वी) संस्थापक थे। राज्य शाकम्भरी (सांभर) क्षेत्र में था और शुरुआती राजधानी अहिच्छत्रपुर (नागौर) मानी जाती है।

प्रश्न: अजमेर शहर और तारागढ़ दुर्ग की स्थापना किसने की?
उत्तर: अजयराज चौहान ने करीब 1113 ईस्वी में अजमेर (अजयमेरु) बसाया और अजयमेरु दुर्ग (तारागढ़) बनवाया।

प्रश्न: राजस्थान का पहला साका कब और किस दुर्ग में हुआ?
उत्तर: जुलाई 1301 में रणथंभौर दुर्ग में हम्मीर देव चौहान के समय, जिसे राजस्थान का पहला साका माना जाता है।

प्रश्न: आमेर के किस शासक ने सबसे पहले मुगलों से संधि की?
उत्तर: राजा भारमल ने 1562 में अकबर की अधीनता मानी और सांभर में पुत्री हरखा बाई का विवाह अकबर से किया।

प्रश्न: जयपुर शहर की स्थापना किस तिथि को और किसने की?
उत्तर: जयपुर की स्थापना 18 नवंबर 1727 को महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने विद्याधर भट्टाचार्य के सहयोग से की थी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Chauhan Vansh: चौहान वंश (Chauhan Vansh) और आमेर का कछवाहा वंश राजस्थान के दो प्रमुख राजवंश रहे हैं।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Chauhan Vansh: चौहान वंश और कछवाहा वंश, शाकम्भरी, अजमेर, रणथंभौर, जालोर और आमेर का इतिहास एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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