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राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1. राजस्थान का नामकरण

क्षेत्र / समय प्रयुक्त नाम विवरण
महाभारत काल जांगल देश
सपादलक्ष
बीकानेर और जोधपुर का क्षेत्र।
अजमेर और नागौर (चौहानों का क्षेत्र)।
जनपद काल मत्स्य
शूरसेन
शिवि
राजधानी: विराटनगर (जयपुर/अलवर)।
राजधानी: मथुरा (भरतपुर/धौलपुर/करौली)।
राजधानी: मध्यमिका (नगरी/चित्तौड़)।
माड / वल्ल जैसलमेर जैसलमेर का प्राचीन नाम।
वागड़ डूंगरपुर-बांसवाड़ा दक्षिणी राजस्थान का क्षेत्र।
हाड़ौती कोटा-बूँदी हाड़ा चौहानों का शासन।
गुर्जरत्रा दक्षिण जोधपुर गुर्जर प्रतिहारों का शासन।
अर्बुद प्रदेश सिरोही आबू के आसपास का क्षेत्र।
1800 ई. राजपूताना सर्वप्रथम जॉर्ज थॉमस ने प्रयोग किया।
1829 ई. रायथान / राजस्थान कर्नल टॉड ने 'एनल्स एंड एंटिक्विटीज' में प्रयोग किया।

2. प्राचीन सभ्यताएँ

क. पाषाणकालीन स्थल

  • बागोर (भीलवाड़ा): कोठारी नदी। भारत में पशुपालन के प्राचीनतम साक्ष्य (मध्यपाषाण)।
  • तिलवाड़ा (बाड़मेर): लूनी नदी। मध्यपाषाण कालीन स्थल।

ख. कालीबंगा (सिंधु घाटी)

  • स्थान: हनुमानगढ़, घग्घर (सरस्वती) नदी। समय: 2400-2250 ई.पू.।
  • मुख्य साक्ष्य: जुते हुए खेत (विश्व में प्राचीनतम), अग्निवेदी, लकड़ी की नालियाँ, दो टीले (दुर्ग व नगर)।

ग. आहड़ (ताम्रवती नगरी)

  • स्थान: उदयपुर, बेड़च/आयड़ नदी। नाम: धूलकोट, आघाटपुर।
  • संस्कृति: बनास संस्कृति। संयुक्त परिवार (एक घर में 4-6 चूल्हे)। काले-लाल मृदभांड।
  • व्यापार: यूनानी मुद्राएँ मिलीं। ईरान/मध्य एशिया से संबंध।

घ. बैराठ (लौह युग/मौर्य)

  • स्थान: जयपुर (विराटनगर)। पहाड़ियाँ: बीजक, भीम, मोती डूंगरी।
  • साक्ष्य: अशोक का भाब्रू शिलालेख (कैप्टन बर्ट ने खोजा), बौद्ध स्तूप, गोल मंदिर।
  • नोट: चीनी यात्री ह्वेनसांग आया था। हूण मिहिरकुल ने इसे नष्ट किया।

ङ. अन्य स्थल

  • गणेश्वर (सीकर): ताम्र सभ्यताओं की जननी।
  • सुनारी (झुंझुनूं), ईसवाल (उदयपुर), जोधपुरा (जयपुर), रढ़ (टोंक): लौह युगीन स्थल।
  • कुराड़ा (नागौर): औजारों की नगरी (तांबा)।

3. राजपूतों की उत्पत्ति

  • अग्निवंशीय सिद्धान्त: चन्दबरदाई (पृथ्वीराज रासो) के अनुसार। आबू यज्ञ कुण्ड से उत्पत्ति (प्रतिहार, परमार, चालुक्य, चौहान)।
  • वैदिक क्षत्रिय (सूर्य/चन्द्रवंशी): जी.एच. ओझा और सी.वी. वैद्य। (सर्वाधिक मान्य)।
  • विदेशी उत्पत्ति (शक/सीथियन): कर्नल टॉड, वी.ए. स्मिथ। अग्नि/अश्व/सूर्य पूजा में समानता के आधार पर।
  • गुर्जर/हूण (खज़र): डॉ. भंडारकर। इन्होंने बिजौलिया लेख के आधार पर गुहिलों (नागर) व चौहानों (वत्स) को ब्राह्मण वंशीय भी बताया।

4. प्रमुख राजवंश

क. मेवाड़ के गुहिल-सिसोदिया

  • बापा रावल: वास्तविक नाम कालभोज। 115 ग्रेन का सोने का सिक्का।
  • अल्लट: हूण राजकुमारी हरियादेवी से विवाह। आहड़ में वराह मंदिर बनवाया।
  • रावल रत्नसिंह (1303): अलाउद्दीन का आक्रमण। चित्तौड़ का प्रथम साका (पद्मिनी जौहर)। नाम खिज्राबाद रखा।
  • राणा हम्मीर: 'मेवाड़ का उद्धारक'।
  • राणा लाखा: पिछोला झील का निर्माण (बंजारे द्वारा)।
  • राणा मोकल: समिधेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार।
  • राणा कुंभा (1433-68): 'अभिनव भरताचार्य'। सारंगपुर विजय (1437) पर विजय स्तंभ। 32 किलों का निर्माण (कुंभलगढ़)। ग्रंथ: संगीत राज। शिल्पी: मंडन।
  • राणा सांगा (1509-28): 'हिन्दूपत'। युद्ध: गागरोन, खातौली, खानवा (1527) (बाबर के विरुद्ध)।
  • उदय सिंह: उदयपुर की स्थापना (1559)। 1567 अकबर का आक्रमण (जयमल-फत्ता बलिदान)।
  • महाराणा प्रताप: हल्दीघाटी (1576)दिवेर (1582) (मेवाड़ का मैराथन)। राजधानी: चावंड।
  • अमर सिंह प्रथम: जहाँगीर से प्रथम मुगल-मेवाड़ संधि (1615)।
  • राज सिंह: राजसमंद झील का निर्माण। औरंगजेब का प्रतिरोध।

ख. प्रतिहार और परमार

  • गुर्जर प्रतिहार: मण्डोर (हरिश्चन्द्र) और भीनमाल (नागभट्ट प्रथम) शाखा। प्रतापी शासक: भोज, महेन्द्रपाल।
  • परमार: आबू, मालवा, वागड़ में शासन।
    • आबू: विमलशाह (आदिनाथ मंदिर 1031)। धारावर्ष। प्रह्लादन देव (पालनपुर)।
    • मालवा: राजा भोज (चित्तौड़ में त्रिभुवन नारायण मंदिर)।
    • वागड़: राजधानी अर्थूणा (बांसवाड़ा)।

ग. चौहान वंश

  • शाकम्भरी/अजमेर: वासुदेव (551 ई.)। अजयराज (अजमेर 1113)। अर्णोराज (आनासागर)। विग्रहराज चतुर्थ (स्वर्ण काल, 'हरिकेलि' नाटक, संस्कृत पाठशाला जो बाद में ढाई दिन का झोंपड़ा बनी)।
  • पृथ्वीराज तृतीय: तराइन प्रथम (1191-विजय), द्वितीय (1192-पराजय)। चन्दबरदाई (पृथ्वीराज रासो)।
  • रणथम्भौर: हम्मीर देव (हठ)। 1301 अलाउद्दीन आक्रमण (प्रथम जौहर)।
  • जालौर (सोनगरा): कान्हड़दे। 1311 अलाउद्दीन आक्रमण।
  • हाड़ा चौहान: राव देवा (बूँदी 1241)। माधोसिंह (कोटा 1631)।

घ. राठौड़ (मारवाड़ और बीकानेर)

  • जोधपुर: राव जोधा (जोधपुर 1459)। मालदेव (गिरी-सुमेल 1544)। चन्द्रसेन (मारवाड़ का प्रताप)। मोटा राजा उदयसिंह (मुगलों की अधीनता 1583)। जसवंत सिंह (भाषा भूषण ग्रंथ)। दुर्गादास (मारवाड़ रक्षक)।
  • बीकानेर: राव बीका (1488)। लूणकर्ण। कल्याणमल (1570 में अधीनता)। रायसिंह (जूनागढ़)। अनूप सिंह (विद्वान/पुस्तकालय)।
  • किशनगढ़: सावंत सिंह (नागरीदास) - बनी-ठणी चित्रकला।

ङ. कछवाहा (आमेर/जयपुर)

  • भारमल: मुगलों से विवाह सम्बन्ध करने वाले प्रथम (1562)।
  • मानसिंह: अकबर के सेनापति (हल्दीघाटी)। शिला देवी मंदिर।
  • मिर्जा राजा जयसिंह: पुरंदर की संधि (1665, शिवाजी के साथ)।
  • सवाई जयसिंह: जयपुर स्थापना (1727)। जंतर-मंतर। अश्वमेध यज्ञ।

5. धार्मिक आन्दोलन

क. लोक देवता

  • गोगाजी: सर्प रक्षक। गोगामेड़ी (हनुमानगढ़)।
  • रामदेवजी: रूणेचा। 'रामसा पीर' (साम्प्रदायिक सद्भाव)। कामड़िया पंथ।
  • पाबूजी: ऊँटों/गायों के रक्षक। कोलू।
  • तेजाजी: सर्प रक्षक/कृषि। परबतसर (मेला)।

ख. संत

  • मीरां बाई: (1498-1546)। जन्म कुड़की। भोजराज से विवाह। कृष्ण भक्ति।
  • दादू दयाल: नरेना (जयपुर)। 'राजस्थान के कबीर'। दादू पंथ।
  • जांभोजी: विश्नोई सम्प्रदाय (29 नियम)। पर्यावरण रक्षा।
  • जसनाथजी: जसनाथी सम्प्रदाय (36 नियम)। अग्नि नृत्य।
  • दरगाह: ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (अजमेर)। हमीदुद्दीन नागौरी (नागौर)।
  • अन्य: संत पीपा (गागरोन), मावजी (बेणेश्वर-डूंगरपुर), रामचरण (रामस्नेही-शाहपुरा), लालदास (मेवात)।

6. प्रमुख ऐतिहासिक स्थल

स्थल विशेषताएँ
चित्तौड़गढ़ विजय स्तंभ, कीर्ति स्तंभ, पद्मिनी महल, मीरा मंदिर।
कुंभलगढ़ कुंभा निर्मित। कटारगढ़ (निवास)। प्रताप का जन्म स्थल।
रणकपुर जैन चौमुखा मंदिर (आदिनाथ)। 1444 खंभे। शिल्पी देपाक।
किराडू बाड़मेर। 'राजस्थान का खजुराहो'। सोलंकी शैली।
ओसियाँ जोधपुर। सूर्य मंदिर, सच्चिया माता, जैन मंदिर।
कौलवी गुफाएं झालावाड़। प्राचीन बौद्ध गुफाएं।
भीनमाल जालौर। कवि माघ की जन्मस्थली। ह्वेनसांग आया था।
शेखावाटी मंडावा, महनसर (सोने-चांदी की दुकान), नवलगढ़। हवेली भित्ति चित्र।
गलियाकोट डूंगरपुर। दाऊदी बोहरा दरगाह (सैयद फखरुद्दीन)।
नाथद्वारा श्रीनाथजी मंदिर (वल्लभ सम्प्रदाय)। पिछवाई चित्रकला।

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