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राजस्थान का स्थापत्य, मूर्तिशिल्प एवं चित्रशैलियाँ

दुर्ग स्थापत्य

राजस्थान अपने भव्य किलों के लिए प्रसिद्ध है। शुक्र नीति के अनुसार दुर्गों को गिरि (पहाड़ी), धान्वन (मरुस्थल), जल, वन आदि श्रेणियों में बांटा गया है।

राजस्थान के प्रमुख दुर्ग

दुर्ग स्थान प्रकार मुख्य तथ्य
चित्तौड़गढ़ चित्तौड़ गिरि दुर्ग सबसे बड़ा लिविग फोर्ट। निर्माता: चित्रांगद मोरी। 3 साके हुए (1303, 1534, 1568)। विजय स्तम्भ, कीर्ति स्तम्भ, पद्मिनी महल स्थित हैं।
कुम्भलगढ़ राजसमन्द गिरि दुर्ग निर्माता: राणा कुम्भा (शिल्पी: मंडन)। 36 किमी लंबी दीवार (भारत की महान दीवार)। अन्तः दुर्ग: कटारगढ़ (मेवाड़ की आँख)।
रणथम्भौर सवाई माधोपुर वन/गिरि हमीर देव चौहान से सम्बंधित। राजस्थान का प्रथम साका (1301)। त्रिनेत्र गणेश मंदिर।
गागरोन झालावाड़ जल दुर्ग काली सिंध और आहू नदियों के संगम पर। संत पीपा की छतरी।
सोनारगढ़ जैसलमेर धान्वन दुर्ग निर्माता: राव जैसल (1155)। पीले पत्थरों से निर्मित (स्वर्ण दुर्ग)। निर्माण में चूने का प्रयोग नहीं। ढाई साके के लिए प्रसिद्ध।
मेहरानगढ़ जोधपुर गिरि (चिड़ियाटूक) निर्माता: राव जोधा (1459)। आकृति: मयूर (मयूरध्वजगढ़)। तोपें: किलकिला, शम्भूबान।
जूनागढ़ बीकानेर धान्वन/स्थल निर्माता: राय सिंह। अनूप महल और सोने की नक्काशी के लिए प्रसिद्ध। जमीन का जेवर।
लोहागढ़ भरतपुर पारिख (खाई) निर्माता: सूरजमल (1733)। मिट्टी का किला जिसे अंग्रेज (लॉर्ड लेक) भी नहीं जीत पाए।
तारागढ़ अजमेर गिरि अन्य नाम: गढ़ बीठली। निर्माता: अजयराज।
तारागढ़ बूँदी गिरि तारे की आकृति। चित्रशाला (भित्ति चित्रों) के लिए प्रसिद्ध।

मंदिर स्थापत्य

  • किराडू (बाड़मेर): "राजस्थान का खजुराहो"। सोमेश्वर मंदिर (सोलंकी शैली)।
  • देलवाड़ा (माउंट आबू): प्रसिद्ध जैन मंदिर। विमल वसही (आदिनाथ) और लूण वसही (नेमिनाथ)। संगमरमर की बारीक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध।
  • रणकपुर (पाली): आदिनाथ जैन मंदिर। निर्माता: धरणक शाह। 1444 खम्भों का वन।
  • एकलिंगजी (उदयपुर): लकुलीश सम्प्रदाय का शिव मंदिर। निर्माता: बप्पा रावल।
  • जगत शिरोमणि (आमेर): निर्माता: कनकावती। मीरा बाई द्वारा पूजित कृष्ण की मूर्ति।
  • भंड देवरा (बारां): "हाड़ौती का खजुराहो"।

हवेली एवं जल स्थापत्य

हवेलियाँ

  • पटवों की हवेली (जैसलमेर): पत्थर की जाली और कटाई के लिए प्रसिद्ध।
  • सालिम सिंह की हवेली (जैसलमेर): 9 मंजिला हवेली।
  • शेखावाटी की हवेलियाँ: ओपन आर्ट गैलरी और भित्ति चित्रों (Frescoes) के लिए प्रसिद्ध (नवलगढ़, मंडावा, रामगढ़)।
  • बच्छावत व रामपुरिया हवेलियाँ (बीकानेर): लाल पत्थर से निर्मित।

बावड़ियाँ

  • चाँद बावड़ी (आभानेरी, दौसा): सबसे गहरी और कलात्मक बावड़ी।
  • रानीजी की बावड़ी (बूँदी): बूँदी को "बावड़ियों का शहर" कहा जाता है।

चित्रशैलियाँ

राजस्थान की चित्रकला को चार प्रमुख स्कूलों में बांटा गया है:

1. मेवाड़ स्कूल

  • उप-शैलियाँ: उदयपुर, नाथद्वारा, चावंड, देवगढ़।
  • विशेषताएँ: सबसे प्राचीन शैली। लाल-पीले रंगों की प्रधानता।
  • नाथद्वारा: पिछवाई पेंटिंग (श्रीनाथजी की मूर्ति के पीछे कपड़े पर चित्र) के लिए प्रसिद्ध। विषय: कृष्ण लीला।

2. मारवाड़ स्कूल

  • उप-शैलियाँ: जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़, अजमेर, नागौर।
  • किशनगढ़ शैली: सांवत सिंह (नागरी दास) के समय स्वर्णकाल। निहाल चंद द्वारा रचित बणी-ठणी (भारत की मोनालिसा) प्रसिद्ध चित्र है।
  • बीकानेर शैली: उस्ता कला (ऊंट की खाल पर स्वर्ण चित्रण) और मथेरण कला के लिए प्रसिद्ध।

3. हाड़ौती स्कूल

  • उप-शैलियाँ: बूँदी, कोटा।
  • बूँदी शैली: पशु-पक्षियों और वर्षा के चित्रण के लिए प्रसिद्ध।
  • कोटा शैली: शिकार के दृश्यों (रानियों द्वारा शिकार) के लिए प्रसिद्ध।

4. ढूंढाड़ स्कूल

  • उप-शैलियाँ: आमेर, जयपुर, अलवर, शेखावाटी।
  • जयपुर शैली: मुगलों का सर्वाधिक प्रभाव। साहिबराम द्वारा बनाए गए आदमकद चित्र (Portraits) प्रसिद्ध हैं।
  • अलवर शैली: सूक्ष्म चित्रण और गणिकाओं (वेश्याओं) के चित्रण के लिए प्रसिद्ध।

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