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Mewar ka Itihas: मेवाड़ का इतिहास, गुहिल-सिसोदिया वंश, महाराणा कुम्भा, सांगा और प्रताप

RK

लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Mewar ka Itihas: मेवाड़ का इतिहास, गुहिल-सिसोदिया वंश, महाराणा कुम्भा, सांगा और प्रताप - ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (प्राचीन सभ्यता और राजवंश)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Mewar ka Itihas: मेवाड़ का इतिहास (Mewar Ka Itihas) गुहिल और सिसोदिया राजपूत वंश के शौर्य और स्वाधीनता का गौरवशाली इतिहास है। 734 ईस्वी मे...
Quick Answer: Mewar ka Itihas: मेवाड़ का इतिहास (Mewar Ka Itihas) गुहिल और सिसोदिया राजपूत वंश के शौर्य और स्वाधीनता का गौरवशाली इतिहास है। 734 ईस्वी में बप्पा रावल ने मान मोरी को हराकर चित्तौड़ में गुहिल सत्ता स्थापित की। 1227 ईस्वी में रावल जैत्रसिंह ने भूताला युद्ध जीतकर चित्तौड़ को राजधानी बनाया। 1303 ईस्वी में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण पर रावल रतनसिंह का बलिदान और जौहर (परंपरा में रानी पद्मिनी) चित्तौड़ का पहला साका बना। 1326 ईस्वी में राणा हम्मीर ने सिसोदिया शाखा बनाई। महाराणा कुम्भा ने विजय स्तम्भ बनवाया। राणा सांगा ने खानवा में मुगलों को ललकारा। महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी (1576 ई.) और दिवेर (1582 ई.) में स्वाधीनता का बिगुल फूंका। 41 जिलों की व्यवस्था में यह क्षेत्र मुख्य रूप से उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा जिलों में फैला है।
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मेवाड़ का इतिहास: गुहिल और सिसोदिया वंश का उद्भव

मेवाड़ का प्राचीन नाम मेदपाट, प्राग्वाट और शिवि जनपद (राजधानी माध्यमिका/नगरी) मिलता है। गुहिल वंश की नींव 566 ईस्वी में गुहादित्य ने रखी। इसी वंश की शाखा सिसोदिया कहलाई। राजस्थान की पृष्ठभूमि के लिए पढ़ें राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि (Historical Background of Rajasthan)। दुर्गों के लिए पढ़ें राजस्थान के प्रमुख दुर्ग, मंदिर और सांस्कृतिक विरासत और कला के लिए देखें राजस्थान की स्थापत्य और चित्रकला शैलियां।

मेवाड़ के महाराणा स्वयं को सूर्यवंशी और एकलिंगजी का दीवान मानते हैं। कुल वाक्य है: "जो दृढ़ राखे धरम को, तिही राखे करतार"। मेवाड़ के राज्य चिह्न (coat of arms) में सूर्य के साथ एक राजपूत और एक भील योद्धा दिखते हैं।

गुहिल वंश के प्रमुख शासक: बप्पा रावल से रावल रतनसिंह

गुहिल वंश के शासकों ने बाहरी आक्रांताओं को खदेड़कर मेवाड़ राज्य को सुदृढ़ शक्ति बनाया:

  • बप्पा रावल (734 ईस्वी): मूल नाम कालभोज था। हरित ऋषि के आशीर्वाद से 734 ईस्वी में मान मोरी को हराकर चित्तौड़ जीता, नागदा राजधानी बनाई और कैलाशपुरी (उदयपुर) में एकलिंगजी मंदिर बनवाया। परंपरा के अनुसार उन्होंने अरब आक्रमणकारियों का सफल मुकाबला किया।
  • अल्लट: आहड़ को दूसरी राजधानी बनाया, वराह मंदिर बनवाया और राज्य में नौकरशाही बनाई। हूण राजकुमारी हरियादेवी से विवाह किया।
  • रावल जैत्रसिंह (1213–1253 ईस्वी): 1227 ईस्वी में भूताला युद्ध में दिल्ली सुल्तान इल्तुतमिश को हराया। नागदा नष्ट होने पर चित्तौड़गढ़ को स्थायी राजधानी बनाया। जयसिंह सूरि के ग्रंथ 'हम्मीर मद मर्दन' में इसका वर्णन है। इनके काल को मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्णकाल कहा जाता है।
  • रावल समरसिंह: 1299 ईस्वी में गुजरात जा रही अलाउद्दीन खिलजी की सेना से दंड (हर्जाना) लेकर मेवाड़ को बचाया। पुत्र कुंभकरण ने नेपाल में गुहिल वंश स्थापित किया।
  • रावल रतनसिंह और पहला साका (1303 ईस्वी): अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 में घेरा डालकर चित्तौड़ जीता। रतनसिंह वीरगति को प्राप्त हुए और महिलाओं ने जौहर किया। रानी पद्मिनी और गोरा-बादल की कथा मुख्य रूप से जायसी के 'पद्मावत' (1540) से आती है; इतिहासकार इसकी ऐतिहासिकता पर एकमत नहीं हैं। खिलजी ने चित्तौड़ बेटे खिज्र खां को सौंपकर 'खिजराबाद' नाम रखा। अमीर खुसरो ने 'खजाइन-उल-फुतुह' में और जायसी ने 'पद्मावत' में इसका वर्णन किया।

सिसोदिया वंश की स्थापना: राणा हम्मीर से राणा मोकल

खिलजी के पतन के बाद मेवाड़ की बागडोर सिसोदिया शाखा के हाथ आई:

  • राणा हम्मीर (1326–1364 ईस्वी): सिसोदा गाँव के हम्मीर ने 1326 ईस्वी में जैसा को हराकर चित्तौड़ जीता। हम्मीर को 'मेवाड़ का उद्धारक' और कुम्भलगढ़ प्रशस्ति में 'विषम घाटी पंचानन' कहा गया। सिंगोली युद्ध में मुहम्मद बिन तुगलक को हराया और चित्तौड़ में अन्नपूर्णा माता का मंदिर बनवाया।
  • महाराणा लाखा (1382–1421 ईस्वी): जावर में चांदी की खानें निकलीं और पिछोला झील बनी। पुत्र कुंवर चूण्डा ने भीष्म प्रतिज्ञा कर राजत्याग किया और सलूम्बर का ठिकाना पाया।
  • महाराणा मोकल (1421–1433 ईस्वी): चित्तौड़ के समीधेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। 1433 ईस्वी में चाचा और मेरा ने मोकल की हत्या कर दी।

महाराणा कुम्भा (1433–1468 ई.): सांस्कृतिक स्वर्णकाल, स्थापत्य और साहित्य

महाराणा कुम्भा का काल मेवाड़ का सांस्कृतिक स्वर्णयुग कहलाता है। RAS Pre 2013 में कुम्भा की रचनाओं पर और RAS Pre 2016 में कुम्भा के दरबारी विद्वानों पर और संगीत ग्रंथ-लेखक जोड़ी (संगीत राज) पर प्रश्न पूछे गए।

1437 ईस्वी में सारंगपुर युद्ध में मालवा के महमूद खिलजी प्रथम को हराकर 'विजय स्तम्भ' बनवाया। 1453 में मारवाड़ के राव जोधा से आंवल-बांवल संधि कर सीमा तय की। 1456 में मालवा और गुजरात के सुल्तानों ने चंपानेर की संधि कर मेवाड़ बांटने की योजना बनाई; कुम्भा ने बदनोर (1457) में जीतकर इसे विफल किया। कुम्भा को अभिनव भरताचार्य, हिंदू सुरत्राण, हाल गुरु, दान गुरु उपाधियां मिलीं।

कुम्भा ने 84 में से 32 दुर्ग बनवाए। 9 मंजिला विजय स्तम्भ (122 फीट) के शिल्पी जैता, नापा, पोमा, पूंजा थे और प्रशस्तिकार अत्रि व महेश भट्ट थे। कुम्भलगढ़ दुर्ग शिल्पी मंडन की देखरेख में बना (कटारगढ़ को मेवाड़ की आंख कहते हैं)। रणकपुर जैन मंदिर शिल्पी देपाक के निर्देशन में 1444 खंभों पर बना। कुम्भा ने 'संगीत राज' (5 रत्नकोश: पाठ्य, गीत, वाद्य, नृत्य, रस), संगीत मीमांसा, सूड़ प्रबंध, सुधा प्रबंध, कामराज रतिसार और गीत गोविंद पर रसिकप्रिया टीका लिखी। ध्यान दें: 'नृत्य रत्नकोश' संगीत राज का ही हिस्सा है, इसलिए यह भी कुम्भा की रचना गिना जाता है। मंडन (प्रासाद मंडन, रूप मंडन), उनके भाई नाथा (वास्तु मंजरी), मंडन के बेटे गोविंद (कलानिधि), कान्ह व्यास (एकलिंग महात्म्य), टिल्ला भट्ट और जैन मुनि सुंदर सूरि इनके दरबार में थे। (मुनि जिनविजय 20वीं सदी के विद्वान थे, कुम्भा के दरबारी नहीं।)

Table 1: महाराणा कुम्भा के ग्रंथ, स्थापत्य और दरबारी विद्वान

क्षेत्र रचनाकार / शिल्पी ग्रंथ या स्मारक मुख्य बिंदु
संगीत शास्त्र महाराणा कुम्भा संगीत राज (5 रत्नकोश) पाठ्य, गीत, वाद्य, नृत्य, रस रत्नकोश
संगीत टीका महाराणा कुम्भा रसिकप्रिया, सूड़ प्रबंध, सुधा प्रबंध गीत गोविंद पर रसिकप्रिया टीका
वास्तु ग्रंथ मंडन प्रासाद मंडन, रूप मंडन, राजवल्लभ कुम्भलगढ़ के सूत्रधार; मूर्तिकला ग्रंथ
गृह वास्तु नाथा वास्तु मंजरी पारंपरिक गृह निर्माण शास्त्र
शिखर शास्त्र गोविंद कलानिधि, द्वारदीपिका मंदिर शिखरों के शास्त्रीय नियम
इतिहास कान्ह व्यास एकलिंग महात्म्य पहला भाग 'राजवर्णन' कुम्भा ने लिखा
प्रशस्ति अत्रि और महेश भट्ट कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति अत्रि ने शुरू किया, महेश ने पूरा किया
विजय स्तम्भ जैता, नापा, पोमा, पूंजा विजय स्तम्भ (चित्तौड़) सारंगपुर विजय पर बना 9 मंजिला स्मारक

राणा सांगा (1509–1528 ई.): पाती परवन और प्रमुख युद्ध

राणा सांगा 1509 ईस्वी में गद्दी पर बैठे। शरीर पर 80 घाव होने से टॉड ने इन्हें 'सैनिकों का भग्नावशेष' कहा। सांगा ने खातोली (1517 ई.) और बाड़ी (1518 ई.) में इब्राहिम लोदी को हराया। 1519 में गागरोन युद्ध में मालवा के महमूद खिलजी द्वितीय को हराकर ससम्मान मुक्त किया। 16 फरवरी 1527 को बयाना युद्ध में बाबर की सेना को हराया।

17 मार्च 1527 को खानवा का युद्ध हुआ। सांगा ने 'पाती परवन' परंपरा से सभी राजाओं को निमंत्रण भेजा। हसन खां मेवाती, महमूद लोदी, मालदेव, पृथ्वीराज और मेदिनी राय साथ लड़े। बाबर ने तोपों व तुलुगमा से जीत पाई। सांगा के घायल होने पर सादड़ी के झाला अज्जा ने राजमुकुट पहना। 30 जनवरी 1528 को कालपी में सांगा का देहांत हुआ। मांडलगढ़ (भीलवाड़ा जिला) में सांगा की समाधि-छतरी बनी है।

Table 2: मेवाड़ के प्रमुख ऐतिहासिक युद्ध (1227 से 1582 ईस्वी)

युद्ध का नाम वर्ष मेवाड़ शासक विरोधी पक्ष परिणाम और महत्व
भूताला युद्ध 1227 ई. रावल जैत्रसिंह इल्तुतमिश जैत्रसिंह जीते; चित्तौड़ राजधानी बनी
चित्तौड़ घेराव 1303 ई. रावल रतनसिंह अलाउद्दीन खिलजी खिलजी जीता; पहला साका
सारंगपुर युद्ध 1437 ई. महाराणा कुम्भा महमूद खिलजी प्रथम कुम्भा जीते; विजय स्तम्भ बना
खातोली युद्ध 1517 ई. राणा सांगा इब्राहिम लोदी सांगा जीते; लोदी सेना हारी
गागरोन युद्ध 1519 ई. राणा सांगा महमूद खिलजी द्वितीय सांगा जीते; सुल्तान बंदी बना
बयाना युद्ध 1527 ई. राणा सांगा बाबर की सेना सांगा जीते; मुगल सेना भागी
खानवा युद्ध 1527 ई. राणा सांगा बाबर बाबर जीता; सांगा घायल
हल्दीघाटी युद्ध 1576 ई. महाराणा प्रताप मानसिंह (अकबर) अकबर प्रताप को बंदी न बना सका
दिवेर युद्ध 1582 ई. महाराणा प्रताप सुल्तान खां प्रताप जीते; 36 चौकियां मुक्त

महाराणा प्रताप (1540–1597 ई.): हल्दीघाटी, दिवेर और चावंड राजधानी

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुम्भलगढ़ के बादल महल में हुआ। पिता उदयसिंह और माता जयवंताबाई थीं। बचपन का नाम 'कीका' था। 28 फरवरी 1572 को गोगुंदा में राजतिलक हुआ। अकबर ने चार दूत भेजे: जलाल खां (1572), मानसिंह (1573), भगवंत दास (1573) और टोडरमल (1573)। प्रताप ने स्वाधीनता नहीं छोड़ी।

18 जून 1576 को हल्दीघाटी युद्ध लड़ा गया। मानसिंह सेनापति थे। प्रताप की हरावल में हाकिम खां सूर और चंदावल में पूंजा भील थे। चेतक के घायल होने पर झाला बीदा ने मुकुट पहनकर प्रताप को सुरक्षित निकाला और वीरगति पाई। बलीचा में चेतक की छतरी बनी है। अबुल फजल ने इसे 'खमनोर का युद्ध', बदायूंनी ने 'गोगुंदा का युद्ध' और टॉड ने 'मेवाड़ की थर्मोपल्ली' कहा।

भामाशाह ने आर्थिक संबल दिया। अक्टूबर 1582 में दिवेर युद्ध में अमरसिंह ने सुल्तान खां को मारा और 36 चौकियां मुक्त कराईं। टॉड ने इसे 'मेवाड़ का मैराथन' कहा। 1585 में चावंड को राजधानी बनाया (1585-1615 तक रही)। यहाँ निसारदीन ने 1605 में रागमाला बनाई। चावंड सराड़ा तहसील में है, जो 2023 में उदयपुर से अलग होकर सलूम्बर जिले में आई; दिसंबर 2024 के बाद भी सलूम्बर 41 जिलों में बना हुआ है। 19 जनवरी 1597 को चावंड में देहांत हुआ; पास के बांडोली गांव में 8 खंभों की छतरी बनी है।

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महाराणा राजसिंह (1652–1680 ई.) और राजप्रशस्ति

महाराणा राजसिंह ने 1679 में जजिया कर का विरोध किया। किशनगढ़ की चारुमती से विवाह किया। मारवाड़ के अजीत सिंह और दुर्गादास को शरण दी। श्रीनाथजी की मूर्ति को सिहाड़ (Nathdwara) में और द्वारकाधीश की मूर्ति को कांकरोली में स्थापित कराया।

राजसमंद झील की नौचौकी पाल पर 25 काले संगमरमर पत्थरों पर रणछोड़ भट्ट तैलंग ने संस्कृत में 'राजप्रशस्ति' (24 सर्ग) लिखी, जिसे भारत का सबसे बड़ा शिलालेख माना जाता है (राजस्थान की कई किताबें इसे विश्व का सबसे बड़ा भी लिखती हैं)। पत्थरों पर खुदाई महाराणा जयसिंह के समय 1687 में पूरी हुई। बप्पा रावल से राजसिंह तक का इतिहास दर्ज है। राजसिंह को 'विजयकटकातु' कहा गया।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

परीक्षा के लिए याद रखें

  • बप्पा रावल (734 ई.): मान मोरी को हराकर चित्तौड़ जीता, नागदा राजधानी और एकलिंगजी मंदिर बनवाया।
  • रावल जैत्रसिंह (1227 ई.): भूताला युद्ध में इल्तुतमिश को हराया और चित्तौड़ को राजधानी बनाया।
  • पहला साका (1303 ई.): खिलजी का घेराव, रतनसिंह वीरगति, जौहर, चित्तौड़ का नया नाम खिजराबाद।
  • राणा हम्मीर (1326 ई.): सिसोदिया शाखा बनाई, 'विषम घाटी पंचानन' उपाधि, सिंगोली में तुगलक को हराया।
  • महाराणा कुम्भा: सारंगपुर विजय (1437 ई.) पर विजय स्तम्भ बनवाया; संगीत राज (5 रत्नकोश) और रसिकप्रिया लिखी।
  • राणा सांगा: खातोली, बाड़ी, गागरोन, बयाना और खानवा (1527 ई., पाती परवन) के ऐतिहासिक युद्ध लड़े।
  • महाराणा प्रताप: जन्म 1540 (कुम्भलगढ़), राजतिलक 1572 (गोगुंदा), हल्दीघाटी 1576, दिवेर 1582, देहांत 1597 (चावंड)।
  • राजप्रशस्ति: राजसमंद झील की पाल पर 25 काले पत्थरों पर रणछोड़ भट्ट तैलंग रचित, भारत का सबसे बड़ा शिलालेख माना जाता है।

RAS Prelims MCQ

  1. भूताला युद्ध (1227 ई.) में इल्तुतमिश को हराकर चित्तौड़ को राजधानी किसने बनाया?
    A) बप्पा रावल B) रावल जैत्रसिंह C) समरसिंह D) रतनसिंह

    सही उत्तर: B) रावल जैत्रसिंह

    कारण: इल्तुतमिश को हराकर चित्तौड़ को राजधानी बनाया।

  2. कुम्भलगढ़ प्रशस्ति में किस शासक को 'विषम घाटी पंचानन' कहा गया है?
    A) महाराणा कुम्भा B) राणा लाखा C) राणा हम्मीर D) राणा सांगा

    सही उत्तर: C) राणा हम्मीर

    कारण: कुम्भलगढ़ प्रशस्ति (1460) में सिसोदिया शाखा के संस्थापक हम्मीर को यह उपाधि दी गई।

  3. महाराणा कुम्भा के संगीत ग्रंथ 'संगीत राज' के कितने रत्नकोश हैं?
    A) 3 B) 4 C) 5 D) 7

    सही उत्तर: C) 5

    कारण: इसके 5 रत्नकोश: पाठ्य, गीत, वाद्य, नृत्य, रस।

  4. चित्तौड़गढ़ स्थित विजय स्तम्भ के प्रमुख वास्तुकार कौन थे?
    A) मंडन B) जैता, नापा, पोमा, पूंजा C) अत्रि D) देपाक

    सही उत्तर: B) जैता, नापा, पोमा, पूंजा

    कारण: शिल्पी जैता व पुत्रों ने विजय स्तम्भ बनाया।

  5. इनमें से कौन सी पुस्तक शिल्पी मंडन की रचना नहीं है?
    A) प्रासाद मंडन B) रूप मंडन C) वास्तु मंजरी D) राजवल्लभ

    सही उत्तर: C) वास्तु मंजरी

    कारण: वास्तु मंजरी मंडन के भाई नाथा ने लिखी थी।

  6. राणा सांगा ने 1519 ईस्वी में गागरोन युद्ध में मालवा के किस सुल्तान को हराया था?
    A) महमूद खिलजी प्रथम B) महमूद खिलजी द्वितीय C) मुजफ्फर शाह D) दिलावर खां

    सही उत्तर: B) महमूद खिलजी द्वितीय

    कारण: गागरोन में सांगा ने खिलजी द्वितीय को हराया।

  7. खानवा युद्ध (1527 ई.) में सांगा के घायल होने पर राजमुकुट किसने पहना?
    A) झाला अज्जा B) झाला बीदा C) हसन खां मेवाती D) मालदेव

    सही उत्तर: A) झाला अज्जा

    कारण: सादड़ी के झाला अज्जा ने राजमुकुट पहना।

  8. अकबर ने महाराणा प्रताप के पास जो चार दूत भेजे, उनका सही क्रम क्या है?
    A) मानसिंह, जलाल खां, टोडरमल, भगवंत दास
    B) जलाल खां, मानसिंह, भगवंत दास, टोडरमल
    C) जलाल खां, भगवंत दास, मानसिंह, टोडरमल
    D) मानसिंह, भगवंत दास, जलाल खां, टोडरमल

    सही उत्तर: B) जलाल खां, मानसिंह, भगवंत दास, टोडरमल

    कारण: 1572 में जलाल खां, 1573 में मानसिंह, भगवंत दास, टोडरमल गए।

  9. कर्नल जेम्स टॉड ने मेवाड़ के किस युद्ध को 'मेवाड़ का मैराथन' कहा?
    A) हल्दीघाटी युद्ध B) दिवेर का युद्ध C) चावंड का युद्ध D) खानवा युद्ध

    सही उत्तर: B) दिवेर का युद्ध

    कारण: 1582 में दिवेर विजय पर टॉड ने मैराथन कहा।

  10. राजसमंद झील की पाल पर 25 काले पत्थरों पर उत्कीर्ण 'राजप्रशस्ति' के रचयिता कौन थे?
    A) कान्ह व्यास B) रणछोड़ भट्ट तैलंग C) भट्ट सदाशिव D) चक्रपाणि मिश्र

    सही उत्तर: B) रणछोड़ भट्ट तैलंग

    कारण: 24 सर्गों का यह शिलालेख रणछोड़ भट्ट ने लिखा।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. रावल जैत्रसिंह के शासनकाल का ऐतिहासिक महत्व बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: 1227 ईस्वी में भूताला युद्ध में इल्तुतमिश को हराया और नागदा उजड़ने पर चित्तौड़गढ़ को स्थायी राजधानी बनाया। डॉ. दशरथ शर्मा ने इनके काल को प्रारंभिक मेवाड़ का स्वर्णकाल कहा।
  2. राणा हम्मीर को 'विषम घाटी पंचानन' क्यों कहते हैं?
    उत्तर रूपरेखा: 1326 ईस्वी में विषम परिस्थितियों में चित्तौड़ जीतकर सिसोदिया शाखा बनाई। अदम्य शौर्य के कारण कुम्भलगढ़ प्रशस्ति में उन्हें यह उपाधि मिली।
  3. महाराणा कुम्भा के ग्रंथ 'संगीत राज' के पांचों रत्नकोशों के नाम लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: 5 रत्नकोश: पाठ्य, गीत, वाद्य, नृत्य और रस रत्नकोश।
  4. खानवा युद्ध में राणा सांगा की 'पाती परवन' प्रथा क्या थी?
    उत्तर रूपरेखा: युद्ध में विदेशी आक्रांता के विरुद्ध सभी राजाओं को पत्र लिखकर संयुक्त मोर्चे में आमंत्रित करने की प्राचीन परंपरा।
  5. राजप्रशस्ति महाकाव्य पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: राजसमंद झील की नौचौकी पाल पर 25 काले पत्थरों पर रणछोड़ भट्ट तैलंग रचित संस्कृत महाकाव्य (24 सर्ग); भारत का सबसे बड़ा शिलालेख माना जाता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. महाराणा कुम्भा की राजनीतिक विजयों और सांस्कृतिक उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा: सारंगपुर युद्ध (1437 ई.) जीतकर विजय स्तम्भ बनवाया। 1453 में राव जोधा से आंवल-बांवल संधि; 1456 की चंपानेर संधि (मालवा-गुजरात) को बदनोर (1457) में विफल किया। 32 दुर्गों का निर्माण (कुम्भलगढ़, अचलगढ़)। संगीत राज (5 रत्नकोश) और रसिकप्रिया रची। शिल्पी मंडन, नाथा, गोविंद और कान्ह व्यास को संरक्षण दिया।
  2. मुगल सत्ता के विरुद्ध महाराणा प्रताप के स्वाधीनता संघर्ष के चरणों का परीक्षण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा: 1572 में अकबर के दूतों को नकारा। 1576 में हल्दीघाटी में हाकिम खां सूर, पूंजा भील, झाला बीदा संग लड़े। भामाशाह से संबल पाया। 1582 में दिवेर युद्ध (मेवाड़ का मैराथन) जीतकर 36 चौकियां मुक्त कराईं। 1585 में चावंड को राजधानी बनाया।

FAQs

मेवाड़ के गुहिल राजवंश की कुलदेवी और कुलदेवता कौन हैं?

कुलदेवता एकलिंगजी (कैलाशपुरी, उदयपुर), कुलदेवी बाण माता (चित्तौड़गढ़) और आराध्य देवी अन्नपूर्णा माता हैं।

विजय स्तम्भ और कीर्ति स्तम्भ प्रशस्ति के वास्तुकार और रचयिता कौन थे?

विजय स्तम्भ के वास्तुकार शिल्पी जैता व पुत्र नापा, पोमा, पूंजा थे। प्रशस्ति अत्रि व महेश भट्ट ने लिखी।

हल्दीघाटी युद्ध को विभिन्न इतिहासकारों ने क्या नाम दिए हैं?

अबुल फजल ने 'खमनोर', बदायूंनी ने 'गोगुंदा', टॉड ने 'मेवाड़ की थर्मोपल्ली' और डॉ. श्रीवास्तव ने 'बादशाह बाग' कहा।

दिवेर के युद्ध (1582 ईस्वी) को 'मेवाड़ का मैराथन' क्यों कहा जाता है?

दिवेर युद्ध (1582 ई.) में सुल्तान खां को हराकर मुगलों की चौकियां उखाड़ीं और मेवाड़ मुक्ति का मार्ग खोला, इसलिए टॉड ने इसे मैराथन कहा।

वर्तमान 41 जिलों की व्यवस्था में ऐतिहासिक मेवाड़ के प्रमुख स्थल किन जिलों में स्थित हैं?

चित्तौड़गढ़ दुर्ग चित्तौड़गढ़ में; कुम्भलगढ़, हल्दीघाटी, दिवेर राजसमंद में; एकलिंगजी, आहड़, गोगुंदा उदयपुर में; चावंड सलूम्बर जिले में; और सांगा की छतरी मांडलगढ़ (भीलवाड़ा) में है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Mewar ka Itihas: मेवाड़ का इतिहास (Mewar Ka Itihas) गुहिल और सिसोदिया राजपूत।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Mewar ka Itihas: मेवाड़ का इतिहास, गुहिल-सिसोदिया वंश, महाराणा कुम्भा, सांगा और प्रताप एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको Mewar ka Itihas: मेवाड़ का इतिहास, गुहिल-सिसोदिया वंश, महाराणा कुम्भा, सांगा और प्रताप के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
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