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Maratha Empire in Hindi: मराठा साम्राज्य: छत्रपति शिवाजी का प्रशासन और राजस्व व्यवस्था

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय इतिहास (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Maratha Empire in Hindi: मराठा साम्राज्य: छत्रपति शिवाजी का प्रशासन और राजस्व व्यवस्था - मध्यकालीन भारत: प्रशासन और संस्कृति
  • • अवलोकन: Quick Answer: Maratha Empire in Hindi: मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज (1630-1680 ई.) ने दक्कन में छापामार युद्ध पद्धति (गनीमी कावा) क...
Quick Answer: Maratha Empire in Hindi: मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज (1630-1680 ई.) ने दक्कन में छापामार युद्ध पद्धति (गनीमी कावा) के जरिए मुगलों और बीजापुर को चुनौती देकर स्वतंत्र हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की। जून 1665 में आमेर (जयपुर) के मिर्जा राजा जयसिंह के साथ ऐतिहासिक पुरंदर की संधि हुई। 6 जून 1674 को रायगढ़ दुर्ग में पंडित गागाभट्ट के हाथों उनका राज्याभिषेक हुआ जहां उन्होंने "छत्रपति" और "हैंदव धर्मोद्धारक" की उपाधि ली। उनके प्रशासन का आधार 8 मंत्रियों की अष्टप्रधान परिषद (पेशवा, अमात्य आदि) थी। राजस्व में अन्नाजी दत्तो की काठी पैमाइश, और स्वराज्य के बाहर के क्षेत्रों से चौथ (1/4) और सरदेशमुखी (1/10) कर प्रमुख थे।

1. छत्रपति शिवाजी महाराज का उत्कर्ष और प्रारंभिक सैन्य अभियान (Rise of Shivaji Maharaj)

दक्कन की सह्याद्रि पहाड़ियों में मराठा अस्मिता और 'हिंदवी स्वराज्य' के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज (1630–1680 ई.) का जन्म शिवनेरी दुर्ग में शाहजी भोंसले और माता जीजाबाई के घर हुआ। उनके प्रारंभिक व्यक्तित्व निर्माण में माता जीजाबाई और दादोजी कोंडदेव का गहरा प्रभाव रहा; परंपरा समर्थ गुरु रामदास को भी उनका प्रेरक मानती है।

शिवाजी ने छापामार युद्ध कौशल (गनीमी कावा) विकसित किया। उनके प्रमुख प्रारंभिक अभियान नीचे दिए गए थे:

  • प्रारंभिक दुर्ग विजय: 1646 में तोरण दुर्ग जीता, इसके बाद चाकन, कोंडाना (सिंहगढ़) और पुरंदर पर अधिकार किया। 1656 में जावली जीती और रायरी का किला लेकर उसे 'रायगढ़' के रूप में मजबूत करवाया (बाद में यही राजधानी बना)।
  • अफजल खान का वध (1659 ई.): प्रतापगढ़ की तलहटी में शिवाजी ने बाघ-नख से बीजापुर के सेनापति अफजल खान का वध कर दिया।
  • शाइस्ता खान पर हमला (1663 ई.): दक्षिण के मुगल सूबेदार शाइस्ता खान के पुणे स्थित लाल महल पर रात में छापा मारा; भागते हुए शाइस्ता खान की उंगलियां कट गईं।
  • सूरत की लूट: मुगलों के व्यापारिक बंदरगाह सूरत पर शिवाजी ने दो बार (1664 और 1670 ई.) धावा बोलकर भारी संपत्ति अर्जित की।
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2. पुरंदर की संधि (1665 ई.) और रायगढ़ में राज्याभिषेक (Treaty of Purandar & Coronation)

सूरत की लूट और शाइस्ता खान की दुर्गति से कुपित होकर औरंगजेब ने अपने सबसे कुशल कूटनीतिज्ञ आमेर (राजस्थान) के मिर्जा राजा जयसिंह और दिलेर खान के नेतृत्व में विशाल मुगल सेना दक्षिण भेजी। जयसिंह ने पुरंदर दुर्ग को घेर लिया और शिवाजी को संधि के लिए विवश किया।

घटना / संधि तिथि और प्रमुख व्यक्तित्व शर्तें, प्रावधान और ऐतिहासिक परिणाम
पुरंदर की संधि 11 जून 1665 ई.; शिवाजी और मिर्जा राजा जयसिंह (आमेर, राजस्थान) 1. शिवाजी ने 23 दुर्ग (लगभग 4 लाख हूण वार्षिक आय वाले) मुगलों को सौंप दिए; उनके पास 12 दुर्ग (लगभग 1 लाख हूण आय) बचे।
2. शिवाजी के अल्पवयस्क पुत्र शंभाजी को मुगल दरबार में 5,000 का मनसब दिया गया।
3. शिवाजी ने बीजापुर के विरुद्ध मुगलों की सैन्य सहायता करने का वचन दिया।
आगरा यात्रा और पलायन मई 1666 ई.; आगरा का मुगल दरबार जयसिंह के पुत्र रामसिंह के आश्वासन पर शिवाजी आगरा दरबार पहुंचे, जहां 5,000 के मनसबदारों की कतार में खड़ा कर अपमानित किया गया। विरोध करने पर जयपुर भवन में नजरबंद किया गया, जहां से वे मिठाई के टोकरों में छिपकर नाटकीय रूप से भाग निकले।
भव्य राज्याभिषेक (Coronation) 6 जून 1674 ई.; रायगढ़ दुर्ग (महाराष्ट्र) काशी के प्रकांड विद्वान पंडित विश्वेश्वर (गागाभट्ट) ने वैदिक रीति से विधिवत राज्याभिषेक कराया। शिवाजी ने 'छत्रपति', 'क्षत्रिय कुलावतंस' और 'हैंदव धर्मोद्धारक' (हिंदू धर्म का उद्धारक) की उपाधि ली और 'राज्याभिषेक संवत' और 'शिवराई' व 'हूण' सिक्के चलाए।

3. अष्टप्रधान मंत्रिपरिषद: प्रशासनिक स्वरूप (Shivaji's Ashtapradhan Council)

शिवाजी ने शासन संचालन के लिए 8 प्रमुख मंत्रियों की एक सलाहकार परिषद बनाई जिसे 'अष्टप्रधान' कहा जाता था। ये मंत्री केवल सम्राट के प्रति उत्तरदायी थे और कोई भी पद वंशानुगत नहीं था। सभी मंत्रियों को नकद वेतन दिया जाता था:

अष्टप्रधान का पद विभागीय कार्य और दायित्व सैन्य अनिवार्यता की स्थिति
1. पेशवा (मुख्य प्रधान) प्रधानमंत्री; संपूर्ण शासन की देखरेख, राजा की अनुपस्थिति में राज्य का कार्यभार। सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना अनिवार्य था।
2. अमात्य (मजूमदार) वित्त और राजस्व मंत्री; राज्य की समस्त आय-व्यय का लेखा-जोखा और जांच। सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना अनिवार्य था।
3. सेनापति (सर-ए-नौबत) सशस्त्र सेना का सर्वोच्च सेनापति; सैनिकों की भर्ती, रसद और युद्ध कमान। विशुद्ध सैन्य अधिकारी।
4. मंत्री (वाकियानवीस) राजा के दैनिक कार्यों और दरबार का रिकॉर्ड रखना; गुप्तचर सूचनाएं और राजा की सुरक्षा। सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना अनिवार्य था।
5. सचिव (शुरू-नवीस / सुरनीस) राजकीय पत्राचार, शाही फरमानों का मसौदा और परगनों के हिसाब की जांच। सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना अनिवार्य था।
6. सुमंत (दबीर) विदेश मंत्री; विदेशी राजदूतों से भेंट, गुप्तचर सूचनाएं और संधि वार्ताओं का संचालन। सैन्य अभियानों का नेतृत्व करना अनिवार्य था।
7. न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश; दीवानी और फौजदारी मुकदमों का हिंदू विधि के अनुसार फैसला। सैन्य कार्य से पूर्ण मुक्त (युद्ध में नहीं जाता था)।
8. पंडितराव (दानाध्यक्ष) धार्मिक मामले और दान-पुण्य; विद्वानों का सम्मान और धर्मभ्रष्टों का प्रायश्चित। सैन्य कार्य से पूर्ण मुक्त (युद्ध में नहीं जाता था)।

4. राजस्व सुधार: अन्नाजी दत्तो की काठी, चौथ और सरदेशमुखी (Revenue Administration)

शिवाजी का भू-राजस्व सुधार मलिक अंबर की व्यवस्था से प्रेरित था:

  • जागीरदारी प्रथा का अंत: शिवाजी ने जागीरदारी प्रथा बंद कर दी और अधिकारियों (कारकुन) के जरिए सीधे किसानों से संपर्क साधा।
  • भूमि की पैमाइश: राजस्व अधिकारी अन्नाजी दत्तो ने भूमि की नाप के लिए मानक छड़ी 'काठी' तैयार की (5 हाथ और 5 मुट्ठी)। 20 काठी × 20 काठी (वर्ग) = 1 बीघा और 120 बीघा = 1 चावर।
  • लगान की दर: अनुमानित उपज का लगभग 2/5 भाग (40%) राज्य लेता था और बाकी किसान के पास रहता था; दूसरे उपकर हटाए गए। किसानों को बीज और बैल के लिए तकावी ऋण दिया जाता था।
  • चौथ और सरदेशमुखी: ये कर स्वराज्य के बाहर पड़ोसी मुगल/बीजापुर क्षेत्रों से वसूले जाते थे:
    • चौथ: उस क्षेत्र के कुल राजस्व का एक-चौथाई (25% या 1/4 भाग) होता था, जिसके बदले सुरक्षा का वचन दिया जाता था।
    • सरदेशमुखी: कुल राजस्व का इसके अलावा 10वां भाग (10% या 1/10 भाग) होता था, जो शिवाजी के वंशानुगत सरदेशमुख होने के दावे पर लिया जाता था।

5. सैन्य संगठन, नौसेना और दुर्ग प्रबंधन (Military, Navy & Fort Administration)

शिवाजी की सेना कठोर अनुशासन पर आधारित थी:

  1. घुड़सवार सेना: इसके दो भाग थे: बारगीर (जिन्हें राज्य से घोड़े व हथियार मिलते थे) और सिलेदार (जो स्वयं के घोड़े लाते थे)। 25 घुड़सवारों पर एक हवलदार होता था।
  2. पैदल सेना: मावली पहाड़ी सैनिकों से बनी पैदल सेना; पैदल और घुड़सवार दोनों के अलग-अलग 'सर-ए-नौबत' (प्रमुख) होते थे।
  3. मराठा नौसेना: शिवाजी को 'भारतीय नौसेना का जनक' कहा जाता है। उन्होंने पुर्तगाली और सिद्दी खतरों से सुरक्षा के लिए नौसैनिक बेड़ा बनाया, मालवण के पास सिंधुदुर्ग (निर्माण 1664 से) बनवाया और विजयदुर्ग (पुराना शिलाहार दुर्ग) को मजबूत किया।
  4. दुर्ग प्रबंधन: दुर्ग मराठा राज्य की जीवन रेखा थे। गद्दारी रोकने के लिए प्रत्येक किले पर तीन जातियों के अधिकारी तैनात किए जाते थे: हवलदार (सैन्य कमान, मराठा), सबनीस (लेखा-जोखा, ब्राह्मण), और कारखानानीस (रसद-भंडार, कायस्थ)।

मिर्जा राजा जयसिंह और आमेर के कछवाहा वंश के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पढ़ें। राजस्थान के किलों से तुलना के लिए राजस्थान की कला, दुर्ग और त्यौहार देखें।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • जून 1665 में छत्रपति शिवाजी और आमेर के मिर्जा राजा जयसिंह के मध्य ऐतिहासिक 'पुरंदर की संधि' संपन्न हुई थी।
  • 6 जून 1674 को रायगढ़ दुर्ग में काशी के प्रकांड पंडित गागाभट्ट ने शिवाजी महाराज का वैदिक राज्याभिषेक कराया था।
  • शिवाजी के केंद्रीय प्रशासन में 8 मंत्रियों की परिषद 'अष्टप्रधान' थी जिसका नेतृत्व पेशवा (प्रधानमंत्री) करता था।
  • अष्टप्रधान में 'न्यायाधीश' और 'पंडितराव' केवल दो ऐसे मंत्री थे जिन्हें युद्ध या सैन्य अभियानों में भाग लेने से छूट प्राप्त थी।
  • मराठे स्वराज्य के बाहर के पड़ोसी क्षेत्रों से सुरक्षा के बदले जो कर लेते थे, वह 'चौथ' (1/4 भाग) कहलाता था।

RAS Prelims MCQ

  1. जून 1665 में छत्रपति शिवाजी महाराज और मुगल सेनापति मिर्जा राजा जयसिंह (आमेर, राजस्थान) के मध्य कौन सी ऐतिहासिक संधि हुई थी?
    A) बड़गांव की संधि
    B) पुरंदर की संधि (Treaty of Purandar)
    C) सूरत की संधि
    D) बेसिन की संधि
    उत्तर: B) पुरंदर की संधि (Treaty of Purandar)
    कारण: 11 जून 1665 को पुरंदर की संधि हुई जिसके तहत शिवाजी ने 23 दुर्ग मुगलों को सौंपे और 12 अपने पास रखे।
  2. 6 जून 1674 को रायगढ़ दुर्ग में छत्रपति शिवाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक कराने वाले काशी के प्रकांड विद्वान कौन थे?
    A) पंडित विश्वेश्वर उर्फ गागाभट्ट (Gaga Bhatt)
    B) समर्थ गुरु रामदास
    C) दादोजी कोंडदेव
    D) संत तुकाराम
    उत्तर: A) पंडित विश्वेश्वर उर्फ गागाभट्ट (Gaga Bhatt)
    कारण: बनारस के प्रकांड पंडित गागाभट्ट ने शिवाजी को सूर्यवंशी क्षत्रिय घोषित कर उनका राज्याभिषेक कराया था।
  3. शिवाजी के 'अष्टप्रधान' मंत्रिपरिषद में राज्य के वित्त और आय-व्यय के लेखा परीक्षण का कार्यभार किस मंत्री के पास होता था?
    A) पेशवा
    B) अमात्य अथवा मजूमदार (Amatya)
    C) सुमंत
    D) वाकियानवीस
    उत्तर: B) अमात्य अथवा मजूमदार (Amatya)
    कारण: अमात्य (मजूमदार) आधुनिक वित्त मंत्री के समान था जो समस्त राजकीय आय-व्यय का हिसाब रखता था।
  4. शिवाजी की अष्टप्रधान परिषद में वे दो मंत्री कौन से थे जिन्हें सैन्य अभियानों का नेतृत्व करने से पूर्णतः छूट प्राप्त थी?
    A) पेशवा और अमात्य
    B) न्यायाधीश और पंडितराव (दानाध्यक्ष)
    C) सचिव और सुमंत
    D) सेनापति और वाकियानवीस
    उत्तर: B) न्यायाधीश और पंडितराव (दानाध्यक्ष)
    कारण: न्यायाधीश (न्याय विभाग) और पंडितराव (धार्मिक दान) को छोड़कर शेष सभी 6 मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सेना का नेतृत्व करना पड़ता था।
  5. मराठों के जीते या पड़ोसी मुगल/बीजापुर क्षेत्रों से सुरक्षा की गारंटी के बदले वसूले जाने वाले 'चौथ' का अनुपात कितना था?
    A) कुल उपज का 1/3 भाग
    B) कुल भू-राजस्व का 1/4 भाग (25%)
    C) कुल राजस्व का 1/10 भाग (10%)
    D) कुल राजस्व का 1/2 भाग (50%)
    उत्तर: B) कुल भू-राजस्व का 1/4 भाग (25%)
    कारण: चौथ पड़ोसी राज्यों से लिया जाने वाला 25% (1/4) कर था जिसके बदले मराठे उन पर आक्रमण न करने की गारंटी देते थे।
  6. महाराष्ट्र के वंशानुगत सर्वोच्च प्रधान (सरदेशमुख) होने के नाते शिवाजी महाराज पड़ोसी क्षेत्रों पर जो एक्स्ट्रा 10% कर लगाते थे, वह क्या कहलाता था?
    A) चौथ
    B) सरदेशमुखी (Sardeshmukhi)
    C) जकात
    D) मोकासा
    उत्तर: B) सरदेशमुखी (Sardeshmukhi)
    कारण: सरदेशमुखी 1/10 (10%) का एक और कर था जो शिवाजी के वंशानुगत सरदेशमुख होने के दावे पर वसूला जाता था।
  7. शिवाजी के प्रशासन में भूमि की वास्तविक पैमाइश के लिए मानक मापने वाली छड़ी 'काठी' का विकास किस राजस्व अधिकारी ने किया था?
    A) मोरोपंत पिंगले
    B) अन्नाजी दत्तो (Annaji Datto)
    C) रामचंद्र नीलकंठ
    D) हंबीरराव मोहिते
    उत्तर: B) अन्नाजी दत्तो (Annaji Datto)
    कारण: अष्टप्रधान में सचिव रहे अन्नाजी दत्तो ने काठी आधारित भूमि सर्वेक्षण कराया था।
  8. मराठा घुड़सवार सेना में 'बारगीर' और 'सिलेदार' में मुख्य अंतर क्या था?
    A) बारगीर तोपची थे और सिलेदार पैदल सैनिक
    B) बारगीरों को राज्य की ओर से घोड़े व अस्त्र मिलते थे, जबकि सिलेदार अपने स्वयं के घोड़े लाते थे
    C) बारगीर विदेशी थे और सिलेदार स्थानीय
    D) बारगीर केवल गुप्तचर थे
    उत्तर: B) बारगीरों को राज्य की ओर से घोड़े व अस्त्र मिलते थे, जबकि सिलेदार अपने स्वयं के घोड़े लाते थे
    कारण: बारगीर नियमित राज्य-पोषित अश्वारोही सैनिक थे, जबकि सिलेदार स्वतंत्र अनुबंध वाले सैनिक थे।
  9. शिवाजी के दुर्ग प्रशासन में धोखे और गद्दारी से बचाव के लिए किले के आंतरिक रसद, बारूद और अनाज भंडार का प्रभारी किस अधिकारी को बनाया जाता था?
    A) हवलदार (मराठा)
    B) सबनीस (ब्राह्मण)
    C) कारखानानीस (प्रभु / कायस्थ)
    D) सर-ए-नौबत
    उत्तर: C) कारखानानीस (प्रभु / कायस्थ)
    कारण: प्रत्येक किले पर सत्ता संतुलन के लिए तीन जातियों के प्रमुख होते थे: हवलदार (सैन्य), सबनीस (लेखा) और कारखानानीस (भंडार)।
  10. पुर्तगाली और सिद्दी खतरों से कोंकण तट की रक्षा के लिए छत्रपति शिवाजी ने मालवण के पास समुद्र में कौन सा जलदुर्ग बनवाया था?
    A) जंजीरा
    B) सिंधुदुर्ग (Sindhudurg)
    C) दीव
    D) गोलकुंडा
    उत्तर: B) सिंधुदुर्ग (Sindhudurg)
    कारण: सिंधुदुर्ग का निर्माण 1664 में शिवाजी ने शुरू करवाया; जंजीरा सिद्दियों के पास रहा और शिवाजी उसे कभी नहीं जीत पाए।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. पुरंदर की संधि (1665 ई.) की दो प्रमुख शर्तें क्या थीं? (20 शब्द)
    उत्तर: 1. शिवाजी ने 4 लाख हूण आय वाले 23 दुर्ग मुगलों को सौंपे। 2. शंभाजी को 5,000 का मनसब मिला और शिवाजी ने बीजापुर विरुद्ध सहायता का वचन दिया।
  2. शिवाजी की 'अष्टप्रधान परिषद' का स्वरूप क्या था? (20 शब्द)
    उत्तर: यह 8 मंत्रियों की गैर-वंशानुगत सलाहकार परिषद थी (पेशवा, अमात्य, सेनापति आदि), जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी था।
  3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' में अंतर स्पष्ट कीजिए। (20 शब्द)
    उत्तर: चौथ पड़ोसी राज्य से सुरक्षा व आक्रमण न करने के बदले लिया जाने वाला 25% (1/4) कर था, जबकि सरदेशमुखी वंशानुगत अधिकार के तहत 10% (1/10) कर था।
  4. शिवाजी की छापामार युद्ध व्यवस्था (गनीमी कावा) क्या थी? (20 शब्द)
    उत्तर: सह्याद्रि के जंगलों और संकरे दर्रों में शत्रु को अचानक घेरकर प्रहार करना, रसद लूटना और आमने-सामने के युद्ध से बचकर सुरक्षित पहाड़ों में लौट जाना।
  5. मराठा दुर्ग प्रबंधन में तीन अधिकारियों की व्यवस्था क्यों की गई थी? (20 शब्द)
    उत्तर: भ्रष्टाचार और गद्दारी रोकने के लिए एक ही किले पर हवलदार (सैन्य), सबनीस (लेखा) और कारखानानीस (भंडार) का त्रि-स्तरीय नियंत्रण बनाया गया था।

Long Questions (5–10 marks)

  1. छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रशासनिक सिद्धांतों, विशेष रूप से अष्टप्रधान और नागरिक शासन व्यवस्था का परीक्षण कीजिए और स्पष्ट कीजिए कि यह मुगल निरंकुशता से किस प्रकार भिन्न थी। (100 शब्द)
    उत्तर: शिवाजी का प्रशासन जन-कल्याणकारी स्वराज्य पर आधारित था:
    1. अष्टप्रधान की भूमिका: मंत्रियों के विभाग (वित्त, गृह, विदेश, सेना) स्पष्ट रूप से बंटे थे। राजा निरंकुश होते हुए भी धर्मशास्त्र और मंत्रिपरिषद से परामर्श करता था। पद वंशानुगत न होकर योग्यता पर आधारित थे और नकद वेतन मिलता था।
    2. जागीरदारी का निषेध: मुगलों की तरह जागीरें न देकर नकद वेतन दिया गया, जिससे शक्तिशाली सामंतों के विद्रोह की संभावना समाप्त हुई।
    3. न्याय और सहिष्णुता: मुगलों के विपरीत शिवाजी ने गैर-मुस्लिमों पर कोई धार्मिक कर नहीं लगाया। उन्होंने कुरान और मस्जिदों का सम्मान किया और सेना में महिलाओं और बच्चों को बंदी बनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।
    4. स्थानीय प्रशासन: राज्य को प्रान्तों (सर-सूबा) और तरफों में बांटकर योग्य कारकुनों के जरिए प्रजा से सीधा संपर्क साधा गया।
  2. शिवाजी के भू-राजस्व सुधारों और सैन्य संगठन (थलसेना, दुर्ग व नौसेना) की प्रमुख विशेषताओं का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: भू-राजस्व सुधार:
    - वैज्ञानिक नाप: अन्नाजी दत्तो की मानक 'काठी' से बीघे में भूमि नापी गई। राज्य का हिस्सा अनुमानित उपज का लगभग 40% (2/5) तय हुआ और दूसरे उपकर हटाए गए।
    - चौथ व सरदेशमुखी: स्वराज्य के बाहर के मुगल क्षेत्रों से 25% चौथ और 10% सरदेशमुखी वसूल कर स्वराज्य पर वित्तीय बोझ डाले बिना सेना का खर्च निकाला गया।
    सैन्य संगठन:
    1. घुड़सवार सेना: राज्य की ओर से पोषित बारगीरों को नियमित नकद वेतन और सख्त अनुशासन में रखा गया; लूट का पूरा माल सरकारी खजाने में जमा कराना अनिवार्य था।
    2. दुर्ग प्रबंधन: किलों को स्वराज्य की माता माना गया। हवलदार, सबनीस और कारखानानीस के परस्पर जांच-संतुलन से मुगलों के भारी प्रलोभनों के बावजूद किले अभेद्य रहे।
    3. नौसेना: विदेशी व्यापारिक कंपनियों पर नजर रखने और कोंकण तट की रक्षा के लिए स्वदेशी नौसेना खड़ी कर शिवाजी ने दूरदर्शिता का परिचय दिया।

FAQs

प्रश्न: छत्रपति शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु कौन थे?
उत्तर: परंपरा के अनुसार समर्थ गुरु रामदास शिवाजी के आध्यात्मिक गुरु माने जाते हैं (इतिहासकारों में इस पर मतभेद है), जबकि संत तुकाराम के भक्ति उपदेशों का भी उनके जीवन पर गहरा प्रभाव था।

प्रश्न: पुरंदर की संधि के समय मुगल सेनापति कौन था?
उत्तर: मुगल सेनापति आमेर (जयपुर, राजस्थान) के कछवाहा शासक 'मिर्जा राजा जयसिंह' थे, जिन्होंने औरंगजेब की ओर से संधि की थी।

प्रश्न: शिवाजी ने बीजापुर के किस कुख्यात सेनापति का वध बाघ-नख से किया था?
उत्तर: शिवाजी ने 1659 ई. में प्रतापगढ़ की तलहटी में बीजापुर के सेनापति 'अफजल खान' का वध बघनखे से किया था।

प्रश्न: 'शिवराई' और 'हूण' क्या थे?
उत्तर: 1674 में राज्याभिषेक के अवसर पर शिवाजी के जारी किए गए सिक्के—'हूण' सोने का सिक्का था और 'शिवराई' तांबे का सिक्का था।

प्रश्न: शिवाजी की मृत्यु किस वर्ष और किस दुर्ग में हुई थी?
उत्तर: छत्रपति शिवाजी महाराज की मृत्यु 3 अप्रैल 1680 को 50 वर्ष की आयु में उनकी राजधानी रायगढ़ दुर्ग में हुई थी।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • शिवाजी का जन्म 1630 में शिवनेरी दुर्ग में हुआ; मृत्यु 3 अप्रैल 1680, रायगढ़।
  • पुरंदर की संधि: 11 जून 1665, मिर्जा राजा जयसिंह (आमेर) से; 23 किले मुगलों को, 12 शिवाजी के पास।
  • राज्याभिषेक: 6 जून 1674, रायगढ़, गागाभट्ट ने कराया; उपाधि 'छत्रपति' और 'हैंदव धर्मोद्धारक'।
  • अष्टप्रधान में पेशवा सबसे बड़ा मंत्री; न्यायाधीश और पंडितराव को सैन्य सेवा से छूट।
  • अमात्य = वित्त, सुमंत = विदेश, सचिव = पत्राचार, सेनापति = सर-ए-नौबत।
  • चौथ = 1/4 और सरदेशमुखी = 1/10 (स्वराज्य के बाहर के क्षेत्रों से)।
  • किले पर तीन अधिकारी: हवलदार (मराठा), सबनीस (ब्राह्मण), कारखानानीस (प्रभु / कायस्थ)।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Maratha Empire in Hindi: मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज (1630-1680 ई.) ने दक्कन में छापामार युद्ध पद्धति (गनीमी कावा) के जरिए मुगलों और बीजापुर को चुनौती देकर स्वतंत्र हिंदवी स्वराज्य की स्थापना की।
भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रम में Maratha Empire in Hindi: मराठा साम्राज्य: छत्रपति शिवाजी का प्रशासन और राजस्व व्यवस्था एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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