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Delhi Sultanate in Hindi: दिल्ली सल्तनत: प्रशासन, बलबन का राजत्व और अलाउद्दीन खिलजी के बाजार सुधार

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय इतिहास (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Delhi Sultanate in Hindi: दिल्ली सल्तनत: प्रशासन, बलबन का राजत्व और अलाउद्दीन खिलजी के बाजार सुधार - मध्यकालीन भारत: प्रशासन और संस्कृति
  • • अवलोकन: Quick Answer: Delhi Sultanate in Hindi: दिल्ली सल्तनत (1206-1526 ई.) का वास्तविक संस्थापक इल्तुतमिश था, जिसने तुर्कान-ए-चहलगानी (चालीसा), इक्ता प्रथा और...
Quick Answer: Delhi Sultanate in Hindi: दिल्ली सल्तनत (1206-1526 ई.) का वास्तविक संस्थापक इल्तुतमिश था, जिसने तुर्कान-ए-चहलगानी (चालीसा), इक्ता प्रथा और चांदी का टंका व तांबे का जीतल चलाया। बलबन ने सुल्तान की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए राजत्व सिद्धांत (नियाबत-ए-खुदाई, जिल्ले-इलाही), सिजदा व पाबोस और रक्त-लौह नीति अपनाई। अलाउद्दीन खिलजी ने विशाल स्थाई सेना के लिए दीवान-ए-रियासत और शहना-ए-मंडी के जरिए कठोर बाजार नियंत्रण लागू किया और घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया (चेहरा) दर्ज करने की प्रथा को सख्ती से लागू किया। मुहम्मद तुगलक ने राजधानी परिवर्तन और सांकेतिक मुद्रा जैसे 5 असफल प्रयोग किए।

1. दिल्ली सल्तनत का उदय और इल्तुतमिश का सुदृढ़ीकरण (Consolidation of the Sultanate)

तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में पृथ्वीराज चौहान की पराजय के बाद भारत में तुर्क सत्ता की नींव पड़ी। 1206 ई. में कुतुबुद्दीन ऐबक ने गुलाम वंश की स्थापना की, किंतु सल्तनत का वास्तविक संस्थापक शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (1210–1236 ई.) था। उसने लाहौर के स्थान पर दिल्ली को राजधानी बनाया, 1229 ई. में बगदाद के खलीफा से 'मंशूर' (मान्यता पत्र) पाया और ख्वारिज्म के राजकुमार जलालुद्दीन मंगबरनी को शरण न देकर सल्तनत को चंगेज खान के हमले से बचाया।

इल्तुतमिश के तीन प्रमुख संस्थागत योगदान थे:

  1. तुर्कान-ए-चहलगानी (चालीसा दल): 40 वफादार तुर्क गुलाम अमीरों का एक विशिष्ट प्रशासनिक गुट, जो शासन संचालन में सुल्तान की रीढ़ था।
  2. इक्ता व्यवस्था (Iqta System): इक्ता पहले से था, पर इल्तुतमिश ने इसे संगठित रूप दिया। साम्राज्य को छोटे-बड़े भू-खंडों (इक्ता) में बांटकर सैन्य अधिकारियों (मुक्ती या वली) को सौंपा गया। इक्तादार वहां से भू-राजस्व वसूल कर अपना वेतन और तयशुदा सैनिक रखते थे और शेष अधिशेष राशि (फवाजिल) शाही खजाने में जमा कराते थे।
  3. सिक्का व्यवस्था: उसने 175 ग्रेन का चांदी का 'टंका' और तांबे का 'जीतल' चलाया, जो पूरे सल्तनत काल के बुनियादी सिक्के बने। (उसे 'शुद्ध अरबी सिक्के चलाने वाला पहला सुल्तान' भी कहा जाता है।)
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2. बलबन का राजत्व सिद्धांत और रक्त व लौह की नीति (Balban's Theory of Kingship)

चालीसा दल के षड्यंत्रों को कुचलकर गयासुद्दीन बलबन (1266–1287 ई.) सुल्तान बना। उसने सुल्तान के पद की प्रतिष्ठा और निरंकुश सत्ता को फिर से स्थापित करने के लिए फारसी परंपराओं पर आधारित राजत्व सिद्धांत (Theory of Kingship) प्रतिपादित किया:

अवधारणा / सिद्धांत शाब्दिक अर्थ और दार्शनिक स्वरूप प्रशासनिक व दरबारी प्रभाव
नियाबत-ए-खुदाई सुल्तान पृथ्वी पर 'ईश्वर का प्रतिनिधि' है। सुल्तान के कार्यों पर किसी अमीर या दरबारी को उंगली उठाने का अधिकार नहीं।
जिल्ले-इलाही (ज़िल्लल्लाह) सुल्तान 'ईश्वर की छाया' है। सुल्तान का हृदय ईश्वरीय कृपा का भंडार है, जिससे उसका आदेश सर्वोपरि है।
सिजदा और पाबोस सिजदा: दंडवत झुकना; पाबोस: सुल्तान के कदम चूमना। दरबार में कठोर अनुशासन, अमीरों के अहंकार को तोड़ना और नवरोज उत्सव मनाना।
रक्त और लौह की नीति (Blood & Iron) विद्रोहियों और अपराधियों के प्रति बहुत निर्मम नीति। दिल्ली के चारों ओर मेवातियों के उपद्रव को जंगलों की कटाई और सामूहिक कत्लेआम से शांत किया; पश्चिमोत्तर सीमा पर मंगोलों से रक्षा के लिए दुर्ग बनवाए।

बलबन ने चालीसा गुट को पूरी तरह समाप्त कर दिया और साम्राज्य में गुप्तचरों का जाल बिछाया जिन्हें 'बरीद' कहा जाता था। सैन्य संगठन को मजबूत करने के लिए दीवान-ए-अर्ज (सैन्य विभाग) को सुदृढ़ किया।

3. अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण व्यवस्था और सैन्य सुधार (Market Regulations & Army)

अलाउद्दीन खिलजी (1296–1316 ई.) सल्तनत का प्रथम सुल्तान था जिसने दक्षिण भारत (देवगिरि, वारंगल, द्वारसमुद्र, मदुरै) पर सफल विजय अभियान (मलिक काफूर के नेतृत्व में) चलाए। मंगोलों के लगातार हमलों से बचाव के लिए उसने बड़ी स्थाई सेना रखी (फरिश्ता के अनुसार 4,75,000 घुड़सवार; इतिहासकार इस संख्या को बढ़ा-चढ़ाकर मानते हैं)। इसके लिए उसने ऐतिहासिक बाजार नियंत्रण नीति लागू की:

बाजार / विभाग नियंत्रक अधिकारी नियम, मूल्य निर्धारण और कार्यव्यवस्था
मंडी (अनाज बाजार) शहना-ए-मंडी (मलिक कबूल) गेहूं, चावल, जौ आदि के दाम सरकारी आदेश से तय। किसानों को 50% लगान नकद या जिंस में देना होता था। सरकारी गोदामों में आपातकाल के लिए अनाज संचित किया जाता था।
सराय-ए-अदल (वस्त्र व विनिर्मित माल) दीवान-ए-रियासत (पूरी बाजार व्यवस्था का विभाग) रेशम, सूती कपड़ा, शक्कर, घी और तेल का विशेष सरकारी बाजार। मुल्तानी व्यापारियों को अग्रिम ऋण दिया गया।
पशु व दास बाजार विशेष मुंशी व गुप्तचर घोड़ों, मवेशियों और दासों की श्रेणियों के अनुसार निश्चित दाम। बिचौलियों (दलालों) पर सख्त प्रतिबंध।
गुप्तचर व्यवस्था बरीद और मुन्हियान (गुप्त सूचना देने वाले) बरनी के अनुसार तौल जांचने के लिए सुल्तान छोटे लड़कों को सामान खरीदने भेजता था; कम तौलने पर दुकानदार के शरीर से उतना ही मांस काटने का दंड था।

सैन्य व लगान सुधार: अलाउद्दीन ने सैनिकों को इक्ता के बदले नकद वेतन दिया (एक घोड़े वाले सवार का सालाना वेतन 234 टंका; कुछ स्रोत 243 टंका भी लिखते हैं)। घोड़ों की अदला-बदली रोकने के लिए दाग (घोड़े पर शाही मोहर) और सैनिकों की फर्जी हाजिरी रोकने के लिए चेहरा (हुलिया रजिस्टर) अनिवार्य किया। भूमि की पैमाइश बिस्वा केंद्र से कराई और लगान (खराज) उपज का 50% तय किया और बकाया लगान वसूलने के लिए दीवान-ए-मुस्तखराज बनाया।

4. मुहम्मद बिन तुगलक के पांच महत्वाकांक्षी प्रयोग (Experiments of Muhammad bin Tughlaq)

मुहम्मद बिन तुगलक (1325–1351 ई.) मध्यकाल का सर्वाधिक विद्वान (खगोल, गणित, चिकित्सा, दर्शन का ज्ञाता) सुल्तान था, किंतु व्यवहारिकता और धैर्य के अभाव में उसकी योजनाएं असफल रहीं:

  1. दोआब में कर वृद्धि (शासन के शुरुआती साल, लगभग 1326-27 ई.): गंगा-यमुना के उपजाऊ क्षेत्र में कर बढ़ाया, किंतु उसी समय भीषण अकाल पड़ा। किसानों ने विद्रोह किया। बाद में सुल्तान ने कृषि सुधार के लिए दीवान-ए-अमीर-ए-कोही विभाग बनाया और किसानों को 'सोंधर' (तकावी ऋण) बांटे।
  2. राजधानी परिवर्तन (1327 ई.): मंगोल हमलों से सुरक्षा और दक्षिण भारत पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राजधानी दिल्ली से देवगिरि ले गया और उसका नाम दौलताबाद रखा। पूरी जनता को दिल्ली से दौलताबाद जाने का आदेश दिया गया। मार्ग में सैकड़ों लोग मारे गए। असुविधा देखकर फिर से दिल्ली लौटने का आदेश दिया।
  3. सांकेतिक मुद्रा (Token Currency, 1329–30 ई.): विश्व में चांदी की कमी के कारण उसने तांबे और कांसे के सिक्के जारी किए और उनका मूल्य चांदी के टंका के बराबर घोषित किया। किंतु टकसाल पर सरकारी एकाधिकार न होने से हर घर में नकली सिक्के बनने लगे। अंततः शाही खजाने से चांदी देकर सभी तांबे के सिक्के वापस खरीदने पड़े।
  4. खुुरासान अभियान: मध्य एशिया जीतने के लिए 3.7 लाख सैनिकों की भर्ती कर 1 वर्ष का अग्रिम वेतन दिया, किंतु वहां राजनीतिक स्थिति बदलते ही अभियान रद्द करना पड़ा।
  5. कराचिल अभियान: हिमालय के कराचिल (कुमाऊं-गढ़वाल/कांगड़ा क्षेत्र) में सेना भेजी (इब्नबतूता के अनुसार चीनी दखल रोकने के लिए; कुछ इतिहासकार इसे पहाड़ी कबीलों के खिलाफ अभियान मानते हैं)। पहाड़ों में बारिश, बीमारी और स्थानीय हमलों से लगभग पूरी सेना नष्ट हो गई।

मोरक्को का यात्री इब्नबतूता 1333 ई. में भारत आया और 1334 ई. में दिल्ली दरबार पहुंचा, जिसे सुल्तान ने दिल्ली का काजी नियुक्त किया। इब्नबतूता ने अपने यात्रा वृत्तांत 'रेहला' में इसका सजीव वर्णन किया है।

5. फिरोज शाह तुगलक के सुधार और सल्तनत का केंद्रीय प्रशासनिक स्वरूप (Firoz Tughlaq & Central Organs)

फिरोज शाह तुगलक (1351–1388 ई.) ने जन कल्याणकारी कार्य किए:

  • नहरों का निर्माण: यमुना, सतलज और घग्गर क्षेत्र में नहरें बनवाईं (अफीफ के अनुसार 5 बड़ी नहरें) और सिंचाई कर 'हक-ए-शर्ब' (उपज का 10%) लगाया।
  • कल्याणकारी विभाग: गरीबों की मदद और मुस्लिम कन्याओं के विवाह के लिए दीवान-ए-खैरात, दासों के प्रबंध के लिए दीवान-ए-बंदगान (1.8 लाख दास), और मुफ्त इलाज के लिए दार-उल-शिफा (अस्पताल) की स्थापना की।
  • कर सुधार: 24 कष्टप्रद करों को समाप्त कर केवल 4 शरीयत-सम्मत कर (खराज, जकात, खुम्स, जजिया) लगाए। पहली बार ब्राह्मणों पर भी जजिया कर लगाया।

सल्तनत के 4 केंद्रीय मंत्रालय:
1. दीवान-ए-वजारत: वजीर (प्रधानमंत्री व वित्त विभाग)।
2. दीवान-ए-अर्ज: आरिज-ए-मुमालिक (सैन्य भर्ती, निरीक्षण व वेतन)।
3. दीवान-ए-इंशा: दबीर-ए-खास (शाही पत्राचार व आदेश)।
4. दीवान-ए-रिसालत: धार्मिक मामले और अनुदान (कुछ इतिहासकार इसे विदेश विभाग मानते हैं)।

तराइन के युद्ध और चौहानों की पृष्ठभूमि के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजपूत राज्यों की जागीर-राजस्व व्यवस्था से तुलना के लिए मध्यकालीन राजस्थान की सामंती व्यवस्था पढ़ें।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • इल्तुतमिश को दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक माना जाता है, जिसने चांदी का टंका, तांबे का जीतल और इक्ता व्यवस्था शुरू की।
  • बलबन ने सुल्तान के पद की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए 'नियाबत-ए-खुदाई' व 'जिल्ले-इलाही' का राजत्व सिद्धांत और सिजदा-पाबोस परंपरा चलाई।
  • अलाउद्दीन खिलजी ने मंगोलों से बचाव के लिए विशाल सेना बनाई और वस्तुओं के दाम नियंत्रित करने के लिए 'बाजार नियंत्रण व्यवस्था' लागू की।
  • सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए अलाउद्दीन ने घोड़ों को दागने (दाग) और सैनिकों का हुलिया (चेहरा) दर्ज करने की प्रथा लागू की।
  • मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि विकास के लिए 'दीवान-ए-अमीर-ए-कोही' की स्थापना की और मोरक्को यात्री इब्नबतूता उसके दरबार में आया था।

RAS Prelims MCQ

  1. दिल्ली सल्तनत में चालीसा दल (तुर्कान-ए-चहलगानी) का गठन और चांदी के 'टंका' सिक्के का प्रचलन किस सुल्तान ने किया था?
    A) कुतुबुद्दीन ऐबक
    B) शम्सुद्दीन इल्तुतमिश
    C) गयासुद्दीन बलबन
    D) अलाउद्दीन खिलजी
    उत्तर: B) शम्सुद्दीन इल्तुतमिश
    कारण: इल्तुतमिश ने सल्तनत को संगठित करने के लिए 40 तुर्क सरदारों का चालीसा दल बनाया और टंका व जीतल सिक्के चलाए।
  2. राजत्व के 'दैवीय सिद्धांत' (नियाबत-ए-खुदाई और जिल्ले-इलाही) और दरबार में सिजदा और पाबोस प्रथा की शुरुआत किस सुल्तान ने की थी?
    A) इल्तुतमिश
    B) बलबन (Balban)
    C) जलालुद्दीन खिलजी
    D) फिरोज तुगलक
    उत्तर: B) बलबन (Balban)
    कारण: बलबन ने सुल्तान को ईश्वर की छाया (जिल्ले-इलाही) घोषित कर निरंकुश प्रतिष्ठा के लिए फारसी दरबारी शिष्टाचार सिजदा व पाबोस अनिवार्य किया।
  3. अलाउद्दीन खिलजी की बनाई बाजार नियंत्रण व्यवस्था के तहत अनाज मंडी के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी को क्या कहा जाता था?
    A) दीवान-ए-रियासत
    B) शहना-ए-मंडी (Shahna-i-Mandi)
    C) मुहतसिब
    D) आरिज-ए-मुमालिक
    उत्तर: B) शहना-ए-मंडी (Shahna-i-Mandi)
    कारण: अनाज बाजार का प्रमुख नियंत्रक 'शहना-ए-मंडी' होता था (पूरी व्यवस्था दीवान-ए-रियासत के अधीन थी), जिसे अलाउद्दीन ने खाद्यान्नों के तय दाम लागू करने का दायित्व सौंपा था।
  4. सैन्य व्यवस्था में भ्रष्टाचार और फर्जी हाजिरी रोकने के लिए 'दाग' (घोड़ों को दागना) और 'चेहरा' (सैनिकों का हुलिया) की प्रथा किसने शुरू की?
    A) बलबन
    B) अलाउद्दीन खिलजी
    C) शेरशाह सूरी
    D) अकबर
    उत्तर: B) अलाउद्दीन खिलजी
    कारण: अलाउद्दीन खिलजी ने नकद वेतन वाली बड़ी स्थाई सेना रखी और दाग व हुलिया (चेहरा) व्यवस्था अनिवार्य की; बाद में शेरशाह और अकबर ने इसे अपनाया।
  5. मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के सर्वांगीण विकास और तकावी ऋण वितरण के लिए जो नया विभाग बनाया, उस विभाग का नाम क्या था?
    A) दीवान-ए-अर्ज
    B) दीवान-ए-अमीर-ए-कोही (Diwan-i-Amir-i-Kohi)
    C) दीवान-ए-मुस्तखराज
    D) दीवान-ए-इंशा
    उत्तर: B) दीवान-ए-अमीर-ए-कोही (Diwan-i-Amir-i-Kohi)
    कारण: मुहम्मद बिन तुगलक ने परती भूमि को उपजाऊ बनाने और किसानों को ऋण देने के लिए दीवान-ए-अमीर-ए-कोही विभाग स्थापित किया था।
  6. प्रसिद्ध अफ्रीकी (मोरक्को) यात्री इब्नबतूता किसके शासनकाल में भारत आया और उसने किस यात्रा ग्रंथ की रचना की?
    A) अलाउद्दीन खिलजी, तारीक-ए-फिरोजशाही
    B) मुहम्मद बिन तुगलक, किताब-उल-रेहला (Rihla)
    C) फिरोज तुगलक, फुतूहात-ए-फिरोजशाही
    D) सिकंदर लोदी, तबकात-ए-नासिरी
    उत्तर: B) मुहम्मद बिन तुगलक, किताब-उल-रेहला (Rihla)
    कारण: इब्नबतूता 1333 ई. में भारत आया, 1334 में दिल्ली पहुंचा और मुहम्मद बिन तुगलक ने उसे दिल्ली का काजी बनाया; उसका अरबी यात्रा वृत्तांत 'रेहला' कहलाता है।
  7. दिल्ली सल्तनत के किस सुल्तान ने पहली बार गैर-मुस्लिमों के साथ-साथ 'ब्राह्मणों पर भी जजिया कर' आरोपित किया था?
    A) कुतुबुद्दीन ऐबक
    B) बलबन
    C) अलाउद्दीन खिलजी
    D) फिरोज शाह तुगलक
    उत्तर: D) फिरोज शाह तुगलक
    कारण: फिरोज शाह तुगलक ने शरीयत के नियमों को सख्ती से लागू करते हुए ब्राह्मणों को भी जजिया कर के दायरे में शामिल किया था।
  8. सल्तनत काल में भू-राजस्व व्यवस्था के तहत 'इक्ता' (Iqta) से क्या तात्पर्य था?
    A) धार्मिक दान में दी गई भूमि
    B) अधिकारियों को वेतन के एवज में सौंपा गया क्षेत्रीय राजस्व अधिकार
    C) सुल्तान की प्रत्यक्ष व्यक्तिगत भूमि
    D) बंजर चारागाह भूमि
    उत्तर: B) अधिकारियों को वेतन के एवज में सौंपा गया क्षेत्रीय राजस्व अधिकार
    कारण: इक्तादारों (मुक्ती) को भू-क्षेत्र का लगान वसूलने और सैनिक बनाए रखने का प्रशासनिक अधिकार दिया जाता था।
  9. फिरोज शाह तुगलक ने युद्ध बंदियों और दासों की देखभाल के लिए जो विशेष विभाग बनाया, उस विभाग का नाम क्या था?
    A) दीवान-ए-खैरात
    B) दीवान-ए-बंदगान (Diwan-i-Bandagan)
    C) दार-उल-शिफा
    D) दीवान-ए-कजा
    उत्तर: B) दीवान-ए-बंदगान (Diwan-i-Bandagan)
    कारण: फिरोज तुगलक के पास लगभग 1.8 लाख गुलाम थे जिनकी शिक्षा और शिल्प प्रशिक्षण के लिए दीवान-ए-बंदगान बनाया गया था।
  10. दिल्ली सल्तनत में सेना की भर्ती, साजो-सामान, निरीक्षण और वेतन से संबंधित केंद्रीय सैन्य विभाग कहलाता था:
    A) दीवान-ए-वजारत
    B) दीवान-ए-अर्ज (Diwan-i-Arz)
    C) दीवान-ए-इंशा
    D) दीवान-ए-रिसालत
    उत्तर: B) दीवान-ए-अर्ज (Diwan-i-Arz)
    कारण: दीवान-ए-अर्ज सैन्य विभाग था जिसका प्रमुख 'आरिज-ए-मुमालिक' होता था।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. बलबन के 'रक्त और लौह' (Blood and Iron) की नीति का क्या उद्देश्य था? (20 शब्द)
    उत्तर: आंतरिक विद्रोहियों (विशेषकर मेवातियों व डाकुओं) का कठोर दमन करना, तुर्क अमीरों में भय पैदा करना और मंगोल हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करना।
  2. अलाउद्दीन खिलजी की 'दाग' और 'चेहरा' व्यवस्था क्या थी? (20 शब्द)
    उत्तर: सेना में भ्रष्टाचार रोकने के लिए अच्छे नस्ल के घोड़ों पर राजकीय मुहर लगाना 'दाग' और सैनिकों की व्यक्तिगत शारीरिक पहचान दर्ज करना 'चेहरा' कहलाता था।
  3. मुहम्मद बिन तुगलक की 'सांकेतिक मुद्रा' क्यों विफल रही? (20 शब्द)
    उत्तर: राजकीय टकसाल पर कड़ा नियंत्रण न होने से जनता ने घर-घर तांबे और कांसे के जाली सिक्के ढाल लिए, जिससे व्यापार ठप हो गया।
  4. सल्तनत कालीन केंद्रीय प्रशासन के चार प्रमुख मंत्रालयों के नाम लिखिए। (20 शब्द)
    उत्तर: 1. दीवान-ए-वजारत (वित्त), 2. दीवान-ए-अर्ज (सैन्य), 3. दीवान-ए-इंशा (शाही पत्राचार), 4. दीवान-ए-रिसालत (धार्मिक मामले; कुछ के अनुसार विदेश विभाग)।
  5. फिरोज तुगलक की नहर निर्माण व्यवस्था का क्या महत्व था? (20 शब्द)
    उत्तर: उसने सतलज और यमुना से नहरें निकालकर हरियाणा और दिल्ली क्षेत्र में खेती बढ़ाई और 10% सिंचाई कर (हक-ए-शर्ब) से आय पाई।

Long Questions (5–10 marks)

  1. अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण नीति के उद्देश्यों, प्रशासनिक कार्यव्यवस्था और इसके आर्थिक प्रभावों का समालोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: अलाउद्दीन खिलजी के बाजार सुधार मध्यकालीन आर्थिक इतिहास का अनूठा प्रयोग थे:
    1. उद्देश्य: मंगोल आक्रमणों से सुरक्षा और साम्राज्य विस्तार के लिए कम वेतन पर बड़ी स्थाई सेना को संतुष्ट रखना और राजकोष पर वित्तीय बोझ कम करना।
    2. कार्यव्यवस्था: दिल्ली में तीन पृथक बाजार (मंडी, सराय-ए-अदल, पशु-दास बाजार) बनाए गए। आवश्यक वस्तुओं की दरें स्थायी तय की गईं। व्यापारियों का 'दीवान-ए-रियासत' में पंजीकरण, खाद्यान्न का राजकीय भंडारण और गुप्तचरों (बरीद, मुन्हियान) के जरिए निगरानी रखी गई। कम तौलने पर मांस काटने का क्रूर नियम था।
    3. प्रभाव: सैनिकों व दिल्ली की जनता को महंगाई से राहत मिली, किंतु किसानों पर 50% लगान और कठोर वसूली से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का शोषण हुआ। अलाउद्दीन की मृत्यु के साथ यह कृत्रिम नियंत्रण बिखर गया।
  2. मुहम्मद बिन तुगलक की दूरदर्शी योजनाओं की असफलता के अंतर्निहित कारणों का विश्लेषण कीजिए और स्पष्ट कीजिए कि क्या वह सचमुच 'पागल सुल्तान' था? (100 शब्द)
    उत्तर: मुहम्मद बिन तुगलक की योजनाएं अपने समय से बहुत आगे की थीं, किंतु अमल की कमियों से विफल रहीं:
    1. योजनाओं की तार्किकता: राजधानी परिवर्तन (दौलताबाद) दक्षिण पर नियंत्रण के लिए भौगोलिक रूप से सही था; सांकेतिक मुद्रा विश्व में चांदी की कमी का आधुनिक समाधान थी; दोआब में कर वृद्धि राजस्व विस्तार का सामान्य उपाय था।
    2. असफलता के कारण: धैर्य का अभाव, कठोर नौकरशाही की उदासीनता, योजना लागू करने में समय की गलत कैलकुलेशन (जैसे दोआब में अकाल के समय कर वसूली), और जाली सिक्कों की रोकथाम के उपायों का अभाव।
    3. मूल्यांकन: वह पागल नहीं था बल्कि एक प्रखर, दूरदर्शी किंतु अव्यावहारिक विचारक था जिसमें परिस्थिति के अनुसार लचीलापन नहीं था। एलफिंस्टन जैसे इतिहासकारों का उसमें 'पागलपन का अंश' देखना उसकी असफलता की बढ़ा-चढ़ाकर की गई व्याख्या है।

FAQs

प्रश्न: दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला मुस्लिम शासक कौन थी?
उत्तर: इल्तुतमिश की पुत्री 'रजिया सुल्तान' (1236–1240 ई.) दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला सुल्तान थी।

प्रश्न: क्या अलाउद्दीन खिलजी की बाजार नियंत्रण व्यवस्था पूरे भारत में लागू थी?
उत्तर: नहीं, समकालीन इतिहासकार जियाउद्दीन बरनी के अनुसार अलाउद्दीन की बाजार नियंत्रण व्यवस्था मुख्य रूप से राजधानी दिल्ली और उसके निकटवर्ती छावनी क्षेत्रों तक ही दायरे में थी।

प्रश्न: बलबन ने किस ईरानी त्यौहार को मनाना अनिवार्य किया था?
उत्तर: बलबन ने फारसी नववर्ष के उत्सव 'नवरोज' (Nauroz) को दरबारी ठाठ-बाट के साथ मनाना प्रारंभ किया था।

प्रश्न: दीवान-ए-मुस्तखराज विभाग का क्या कार्य था?
उत्तर: अलाउद्दीन खिलजी के बनाए दीवान-ए-मुस्तखराज का कार्य भू-राजस्व अधिकारियों और किसानों पर बकाया लगान की सख्ती से वसूली करना था।

प्रश्न: सल्तनत काल में 'खराज' और 'खुम्स' में क्या अंतर था?
उत्तर: 'खराज' भूमि कर (भू-राजस्व) था, जो मुख्य रूप से गैर-मुस्लिम किसानों से लिया जाता था, जबकि 'खुम्स' युद्ध में लूटे गए धन का हिस्सा था (सामान्यतः 1/5 भाग राज्य का और 4/5 सैनिकों का, जिसे अलाउद्दीन ने उलट दिया था)।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • टंका (चांदी, 175 ग्रेन) और जीतल (तांबा): इल्तुतमिश; चालीसा दल: इल्तुतमिश।
  • नियाबत-ए-खुदाई, जिल्ले-इलाही, सिजदा-पाबोस, नवरोज: बलबन।
  • बाजार नियंत्रण, दीवान-ए-रियासत, शहना-ए-मंडी, दीवान-ए-मुस्तखराज: अलाउद्दीन खिलजी।
  • दीवान-ए-अमीर-ए-कोही और सांकेतिक मुद्रा (1329-30 ई.): मुहम्मद बिन तुगलक।
  • इब्नबतूता: मुहम्मद बिन तुगलक के समय, दिल्ली का काजी, ग्रंथ 'रेहला'।
  • दीवान-ए-खैरात, दीवान-ए-बंदगान, हक-ए-शर्ब, ब्राह्मणों पर जजिया: फिरोज तुगलक।
  • सैन्य विभाग दीवान-ए-अर्ज का प्रमुख: आरिज-ए-मुमालिक।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Delhi Sultanate in Hindi: दिल्ली सल्तनत।
भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रम में Delhi Sultanate in Hindi: दिल्ली सल्तनत: प्रशासन, बलबन का राजत्व और अलाउद्दीन खिलजी के बाजार सुधार एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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