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Mughal Administration और Mansabdari System in Hindi: मुगल प्रशासन, मनसबदारी व्यवस्था और भू-राजस्व व्यवस्था

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय इतिहास (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Mughal Administration और Mansabdari System in Hindi: मुगल प्रशासन, मनसबदारी व्यवस्था और भू-राजस्व व्यवस्था - मध्यकालीन भारत: प्रशासन और संस्कृति
  • • अवलोकन: Quick Answer: Mughal Administration और Mansabdari System in Hindi: मुगल प्रशासनिक व्यवस्था की ठोस नींव सम्राट अकबर (1556-1605 ई.) ने रखी। केंद्रीय स्तर ...
Quick Answer: Mughal Administration और Mansabdari System in Hindi: मुगल प्रशासनिक व्यवस्था की ठोस नींव सम्राट अकबर (1556-1605 ई.) ने रखी। केंद्रीय स्तर पर दीवान (वित्त), मीर बख्शी (सैन्य प्रमुख व मनसबदार नियंत्रक), मीर सामां (शाही घराना) और सद्र-उस-सुदूर (धार्मिक अनुदान) मुख्य थे। साम्राज्य सूबों (प्रांत), सरकारों (जिले) और परगनों में विभाजित था। अकबर ने मनसबदारी व्यवस्था को संगठित रूप दिया (1573-74 में दाग व्यवस्था के साथ; 1595-96 से जात और सवार के दोहरे पद: जात = व्यक्तिगत पद व वेतन, सवार = घुड़सवारों की संख्या); जहांगीर ने इसमें दु-अस्पा सिह-अस्पा जोड़ा। 1580 में राजा टोडरमल ने आईन-ए-दहशाला व्यवस्था लागू की, जिसमें 10 वर्षों के औसत उत्पादन के आधार पर 1/3 भाग नकद लगान लिया जाता था और भूमि पोलज, परौती, चाचर व बंजर में बंटी थी।
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1. मुगल केंद्रीय प्रशासन और प्रमुख प्रशासनिक पिलर (Mughal Central Administration)

मुगल शासन व्यवस्था एक केंद्रीयकृत निरंकुश राजतंत्र थी जिसमें सम्राट समस्त सैनिक, प्रशासनिक और न्यायिक शक्तियों का सर्वोच्च केंद्र था। केंद्रीय स्तर पर चार प्रमुख मंत्री (विभाग) सबसे अहम थे:

केंद्रीय पद / अधिकारी विभागीय उत्तरदायित्व प्रशासनिक अधिकार और कार्य
दीवान अथवा वजीर दीवान-ए-आला (वित्त विभाग) साम्राज्य की आय-व्यय, लगान निर्धारण और शाही खजाने का सर्वोच्च नियंत्रक।
मीर बख्शी सैन्य प्रशासन विभाग सेना की भर्ती, मनसबदारों का विवरण, घोड़ों के दाग का निरीक्षण और वेतन प्रमाण पत्र (सरखत) जारी करना।
मीर सामां शाही कारखाना विभाग राजमहल की आवश्यकताओं और राजकीय निर्माण कारखानों का प्रबंधन।
सद्र-उस-सुदूर धार्मिक मामले और दान विभाग धार्मिक अनुदान (मदद-ए-माश) बांटना; कई बार मुख्य काजी (काजी-उल-कुजात) का पद भी इसी के पास रहता था।

2. प्रांतीय और स्थानीय प्रशासनिक structure (Provincial & Local Hierarchy)

प्रशासन की सुगमता के लिए अकबर ने 1580 ई. में संपूर्ण साम्राज्य को 12 सूबों (प्रांतों) में विभाजित किया, जो अकबर के अंतिम वर्षों में दक्कन जीत के बाद 15 हुए और औरंगजेब के समय लगभग 21 हो गए।

प्रशासनिक स्तर प्रमुख अधिकारी मुख्य कार्य और दायित्व
सूबा (प्रांत) सूबेदार व प्रांतीय दीवान सूबेदार कानून व्यवस्था देखता था, जबकि स्वतंत्र प्रांतीय दीवान राजस्व वसूली करता था।
सरकार (जिला) फौजदार और अमलगुजार फौजदार कानून व्यवस्था देखता था, अमलगुजार भू-राजस्व का मूल्यांकन व वसूली करता था।
परगना (तहसील) शिकदार, आमिल और कानूनगो शिकदार शांति बनाए रखता था, आमिल लगान वसूलता था और कानूनगो भूमि रिकॉर्ड रखता था।
ग्राम (गांव) मुकद्दम और पटवारी मुकद्दम गांव का मुखिया होता था और पटवारी भूमि का लेखा-जोखा रखता था।

3. मनसबदारी व्यवस्था: जात, सवार और दु-अस्पा सिह-अस्पा (The Mansabdari System)

मनसबदारी व्यवस्था को अकबर ने धीरे-धीरे विकसित किया। दस-दस के क्रम में सेना बांटने का विचार चंगेज खान की मंगोल परंपरा से आया था। ज्यादातर इतिहासकार इसकी शुरुआत 1567 ई. के आसपास मानते हैं; 1573-74 ई. में दाग व्यवस्था लागू होने के साथ इसे पक्का संगठित रूप मिला (परीक्षा की किताबों में 1571/1575 भी लिखा मिलता है)। यह मुगलों की सैनिक और असैनिक (नागरिक) नौकरशाही की रीढ़ थी:

  • मनसब का अर्थ: अरबी शब्द 'मनसब' का अर्थ पद, दर्जा या श्रेणी होता है। प्रत्येक सरकारी अधिकारी और सेनापति को एक निश्चित मनसब दिया जाता था। यह पद वंशानुगत नहीं था।
  • द्विपद व्यवस्था (Zat and Sawar): 1595-96 ई. (अकबर के शासन का 40वां वर्ष) में मनसब को दो भागों में बांटा गया:
    • जात (Zat): यह मनसबदार के व्यक्तिगत दर्जे, पद प्रतिष्ठा और उसके व्यक्तिगत वेतन को तय करता था।
    • सवार (Sawar): यह दर्शाता था कि उस मनसबदार को राज्य की सेवा के लिए कितने घुड़सवार सैनिक रखने अनिवार्य हैं। अकबर के समय सवार संख्या आमतौर पर जात संख्या से ज्यादा नहीं होती थी।
  • दहबिस्ती नियम (Dah-bisti Rule): नियम था कि हर 10 सवारों के पास 20 घोड़े हों (3 सवार × 3 घोड़े, 4 × 2, 3 × 1 = 20), ताकि युद्ध में थके या घायल घोड़े को बदला जा सके।
  • दाग और चेहरा: घोड़ों की अदला-बदली रोकने के लिए उन पर शाही दाग लगाया जाता था और सैनिकों की शारीरिक पहचान का 'चेहरा' रजिस्टर में दर्ज होता था।
  • दु-अस्पा सिह-अस्पा (Du-aspa Sih-aspa): जहांगीर ने मनसबदारी में यह नवाचार किया। इसके तहत मनसबदार के 'जात' पद को बढ़ाए बिना ही उसके 'सवार' दर्जे को दोगुना (दु-अस्पा - दो घोड़े) या तिगुना (सिह-अस्पा - तीन घोड़े) कर दिया जाता था, जिससे राज्य को ज्यादा घुड़सवार मिलते थे।
  • जागीरदारी संकट: मनसबदारों को वेतन या तो नकद (नकदी) दिया जाता था या भू-क्षेत्र के राजस्व अधिकार (जागीर) के रूप में। औरंगजेब के समय और उसके बाद मनसबदारों की संख्या बहुत बढ़ने और जागीरें कम पड़ने से 'जागीरदारी संकट' (बेजागीरी) पैदा हुआ।

4. राजा टोडरमल की दहशाला व्यवस्था और जब्ती व्यवस्था (Dahsala & Zabti Revenue System)

मुगल साम्राज्य की वित्तीय स्थिरता का सबसे बड़ा आधार भू-राजस्व था। अकबर के प्रसिद्ध दीवान (वित्त मंत्री) राजा टोडरमल की देखरेख में 1580 ईस्वी में 'आईन-ए-दहशाला' व्यवस्था लागू हुई:

  • दहशाला का सिद्धांत: पिछले 10 वर्षों (1570-71 से 1579-80 ई.) की अलग-अलग फसलों के औसत उत्पादन और औसत स्थानीय बाजार भाव का calculation किया गया। इस 10 वर्षीय औसत का एक-तिहाई (1/3 भाग) राज्य के लगान के रूप में नकद तय कर दिया गया।
  • जब्ती व्यवस्था (Zabti System): इसमें भूमि की वास्तविक पैमाइश (नाप) की जाती थी। अकबर ने पुरानी रस्सी वाली जरीब की जगह लोहे के छल्लों से जुड़े बांस के टुकड़ों वाली जरीब ('तनाब') का इस्तेमाल शुरू कराया, जिससे मौसम में रस्सी के फैलने-सिकुड़ने की गलती खत्म हुई। नाप का मानक unit बीघा था।

5. भूमि का वैज्ञानिक वर्गीकरण और लगान वसूली (Land Classification & Modes of Assessment)

आईन-ए-अकबरी के अनुसार, खेती की निरंतरता और उर्वरता के आधार पर भूमि को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया था:

भूमि की श्रेणी उर्वरता और जुताई की आवृत्ति भू-राजस्व की स्थिति
1. पोलज (Polaj) अति उपजाऊ भूमि, जिसमें हर वर्ष नियमित रूप से फसल ली जाती थी और उसे कभी परती नहीं छोड़ा जाता था। सर्वाधिक राजस्व दायक भूमि, हर वर्ष नियमित कर।
2. परौती (Parauti) वह भूमि जिसकी उर्वरता बनाए रखने के लिए उसे 1 या 2 वर्ष के लिए खाली (परती) छोड़ दिया जाता था। जुताई होने पर ही पोलज के समान कर लिया जाता था।
3. चाचर (Chachar) वह भूमि जो 3 से 4 वर्षों तक बिना जुताई के खाली पड़ी रही हो। फिर से खेती शुरू करने पर प्रथम वर्ष रियायती लगान, फिर धीरे-धीरे पूर्ण दर।
4. बंजर (Banjar) अनुपजाऊ या बीहड़ भूमि, जो 5 या उससे अधिक वर्षों से बंजर पड़ी हो। खेती योग्य बनाने के लिए विशेष प्रोत्साहन और न्यूनतम सांकेतिक कर।

लगान निर्धारण की अन्य प्रणालियों में कनकूत (खड़ी फसल का अनुमान लगाना) और बंटाई / गल्ला-बख्शी (फसल कटने पर अनाज का बंटवारा: खेत-बंटाई, लंक-बंटाई, रास-बंटाई) शामिल थीं। किसानों को अकाल या प्राकृतिक आपदा के समय 'तकावी' ऋण दिए जाते थे।

मुगल व्यवस्था का राजपूत राज्यों पर असर समझने के लिए मध्यकालीन राजस्थान की प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था (सामंतवाद) और आमेर-मुगल संबंधों की पृष्ठभूमि के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पढ़ें।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • मुगल काल में केंद्रीय स्तर पर सैन्य विभाग और मनसबदारों के वेतन प्रमाणीकरण का सर्वोच्च अधिकारी 'मीर बख्शी' था।
  • अकबर ने 1580 ईस्वी में संपूर्ण साम्राज्य को 12 सूबों (प्रांतों) में विभाजित कर प्रांतीय प्रशासन का मानकीकरण किया था।
  • मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' पद मनसबदार के व्यक्तिगत वेतन व सामाजिक प्रतिष्ठा को और 'सवार' पद आवश्यक घुड़सवारों की संख्या को दर्शाता था।
  • मुगल सम्राट जहांगीर ने मनसबदारी व्यवस्था में 'दु-अस्पा सिह-अस्पा' (दोहरे व तिहरे घुड़सवार) की नई श्रेणी जोड़ी थी।
  • 1580 ईस्वी में राजा टोडरमल की देखरेख में 10 वर्षों के औसत उत्पादन के आधार पर 'आईन-ए-दहशाला' व्यवस्था लागू हुई।

RAS Prelims MCQ

  1. मुगल केंद्रीय प्रशासन में सैन्य विभाग का प्रमुख अधिकारी जो मनसबदारों का विवरण रखता था और वेतन प्रमाण पत्र (सरखत) जारी करता था, कहलाता था:
    A) दीवान-ए-आला
    B) मीर बख्शी (Mir Bakshi)
    C) मीर सामां
    D) सद्र-उस-सुदूर
    उत्तर: B) मीर बख्शी (Mir Bakshi)
    कारण: मीर बख्शी सैन्य विभाग का प्रधान था जो सैनिकों की भर्ती, दाग-चेहरा निरीक्षण और मनसबदारों के वेतन संबंधी आदेश जारी करता था।
  2. अकबर की शुरू की गई 'मनसबदारी व्यवस्था' के तहत 'जात' और 'सवार' क्रमशः किसे प्रदर्शित करते थे?
    A) घुड़सवारों की संख्या और व्यक्तिगत पद
    B) व्यक्तिगत ओहदा/वेतन और रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या
    C) तोपों की संख्या और पैदल सैनिक
    D) जागीर का आकार और वार्षिक कर
    उत्तर: B) व्यक्तिगत ओहदा/वेतन और रखे जाने वाले घुड़सवारों की संख्या
    कारण: 'जात' मनसबदार के व्यक्तिगत स्तर व वेतन को और 'सवार' उसके अधीन रखे जाने वाले अनिवार्य घुड़सवारों की संख्या को दर्शाता था।
  3. मनसबदारी व्यवस्था में मनसबदार के 'जात' दर्जे को बढ़ाए बिना उसके 'सवार' पद को दोगुना या तिगुना करने के लिए 'दु-अस्पा सिह-अस्पा' नियम किस मुगल शासक ने शुरू किया?
    A) अकबर
    B) जहांगीर (Jahangir)
    C) शाहजहां
    D) औरंगजेब
    उत्तर: B) जहांगीर (Jahangir)
    कारण: जहांगीर ने सैन्य आवश्यकता पूरी करने के लिए मनसबदारों के सवार को दु-अस्पा (दो घोड़े) व सिह-अस्पा (तीन घोड़े) करने की प्रथा चलाई।
  4. अकबर के वित्त मंत्री राजा टोडरमल की 1580 ईस्वी में लागू की गई प्रसिद्ध भू-राजस्व व्यवस्था का क्या नाम था?
    A) बटाई व्यवस्था
    B) आईन-ए-दहशाला (Dahsala System)
    C) नस्क व्यवस्था
    D) इजारेदारी व्यवस्था
    उत्तर: B) आईन-ए-दहशाला (Dahsala System)
    कारण: दहशाला व्यवस्था 1570-80 के 10 वर्षों के औसत उत्पादन और भाव पर आधारित लगान पद्धति थी।
  5. मुगल काल में आईन-ए-अकबरी के अनुसार उस अति उपजाऊ भूमि को क्या कहा जाता था जिसमें प्रतिवर्ष बिना रुके नियमित फसलें उगाई जाती थीं?
    A) पोलज (Polaj)
    B) परौती
    C) चाचर
    D) बंजर
    उत्तर: A) पोलज (Polaj)
    कारण: पोलज वह भूमि थी जिसे कभी परती (खाली) नहीं छोड़ा जाता था और जिससे प्रतिवर्ष नियमित रूप से पूरा राजस्व मिलता था।
  6. मुगल प्रांतीय प्रशासन में 'सरकार' (जिले) के स्तर पर शांति-व्यवस्था बनाए रखने वाला सर्वोच्च सैन्य अधिकारी कौन था?
    A) सूबेदार
    B) फौजदार (Faujdar)
    C) अमलगुजार
    D) शिकदार
    उत्तर: B) फौजदार (Faujdar)
    कारण: जिले (सरकार) में कानून-व्यवस्था और सैन्य कमान फौजदार के पास होती थी, जबकि राजस्व वसूली अमलगुजार करता था।
  7. मनसबदारी व्यवस्था में 'दहबिस्ती नियम' (Dahbisti Rule) का मूल उद्देश्य क्या था?
    A) 10 सैनिकों पर 10 घोड़े रखना
    B) प्रत्येक 10 सवारों के पीछे 20 घोड़े रखना ताकि थके घोड़ों को बदला जा सके
    C) 10% लगान में छूट देना
    D) सैनिकों को 10 माह का वेतन देना
    उत्तर: B) प्रत्येक 10 सवारों के पीछे 20 घोड़े रखना ताकि थके घोड़ों को बदला जा सके
    कारण: युद्ध में घोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने के लिए 10 सवारों पर औसतन 20 स्वस्थ घोड़े रखने का नियम था।
  8. मुगल काल में सम्राट के व्यक्तिगत घरेलू जीवन, राजमहल के अंतःपुर और शाही कारखानों के प्रबंध का प्रभारी मंत्री कौन कहलाता था?
    A) मीर बख्शी
    B) मीर सामां / खान-ए-सामां
    C) मुहतसिब
    D) दीवान-ए-तन
    उत्तर: B) मीर सामां / खान-ए-सामां
    कारण: मीर सामां (खान-ए-सामां) शाही घराने के खर्च, भंडार और शाही कारखानों का प्रमुख था; तोपखाना मीर आतिश के पास था।
  9. भूमि की वास्तविक पैमाइश (नाप) करके भू-राजस्व तय करने की मुगलकालीन पद्धति को क्या कहा जाता था?
    A) कनकूत व्यवस्था
    B) जब्ती व्यवस्था (Zabti System)
    C) गल्ला-बख्शी
    D) चौथ व्यवस्था
    उत्तर: B) जब्ती व्यवस्था (Zabti System)
    कारण: जब्ती व्यवस्था में लोहे की कड़ियों वाली बांस की जरीब (तनाब) से भूमि नापकर तय दरों से कर लिया जाता था।
  10. मुगल काल में जो भूमि 3 से 4 वर्षों तक बिना जुताई के खाली (परती) पड़ी रहती थी, उसे किस श्रेणी में रखा गया था?
    A) पोलज
    B) परौती
    C) चाचर (Chachar)
    D) बंजर
    उत्तर: C) चाचर (Chachar)
    कारण: 3 या 4 वर्ष खाली रहने वाली भूमि चाचर कहलाती थी, जबकि 1-2 वर्ष खाली रहने वाली परौती और 5 वर्ष से अधिक वाली बंजर थी।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. मनसबदारी व्यवस्था में 'जात' और 'सवार' में मूल अंतर स्पष्ट कीजिए। (20 शब्द)
    उत्तर: जात मनसबदार के व्यक्तिगत ओहदे, सामाजिक प्रतिष्ठा और वेतन को निर्धारित करता था, जबकि सवार उसके रखे जाने वाले आवश्यक घुड़सवारों की संख्या तय करता था।
  2. मुगलकालीन 'आईन-ए-दहशाला' व्यवस्था क्या थी? (20 शब्द)
    उत्तर: 1580 में राजा टोडरमल की लागू की गई व्यवस्था, जिसमें 10 वर्षों के औसत उत्पादन व बाजार भाव का 1/3 भाग नकद लगान के रूप में तय किया गया।
  3. मुगल प्रशासन में 'मीर बख्शी' के दो प्रमुख कार्य लिखिए। (20 शब्द)
    उत्तर: 1. सेना का संगठन, भर्ती और मनसबदारों के घोड़ों के दाग का निरीक्षण। 2. सैनिकों और मनसबदारों के वेतन प्रमाण पत्र (सरखत) जारी करना।
  4. जहांगीर की शुरू की गई 'दु-अस्पा सिह-अस्पा' प्रथा क्या थी? (20 शब्द)
    उत्तर: मनसबदार के 'जात' दर्जे को बढ़ाए बिना उसके 'सवार' कोटे को दोगुना (दु-अस्पा) या तिगुना (सिह-अस्पा) कर घुड़सवारों की संख्या बढ़ाना।
  5. मुगल काल में भूमि के चार प्रमुख वर्गीकरण कौन से थे? (20 शब्द)
    उत्तर: 1. पोलज (हर वर्ष खेती), 2. परौती (1-2 वर्ष परती), 3. चाचर (3-4 वर्ष परती), 4. बंजर (5 वर्ष या अधिक समय से अनुपजाऊ)।

Long Questions (5–10 marks)

  1. अकबर की मनसबदारी व्यवस्था की बनावट, कार्यपद्धति और इसके गुण-दोषों का विस्तृत परीक्षण कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: मनसबदारी व्यवस्था मुगल साम्राज्य की सैन्य व प्रशासनिक रीढ़ थी:
    1. बनावट: यह गैर-वंशानुगत योग्यता आधारित एकल नौकरशाही थी जिसमें नागरिक व सैन्य दोनों अधिकारी शामिल थे। पद 'जात' (वेतन-प्रतिष्ठा) और 'सवार' (सैनिक कोटा) पर आधारित था।
    2. कार्यपद्धति: सैनिकों के हुलिया (चेहरा) और घोड़ों के शाही चिह्नांकन (दाग) से फर्जीवाड़े पर रोक लगी। वेतन नकद अथवा जागीर के रूप में दिया जाता था।
    3. गुण: कबीलाई और जातीय निष्ठाएं समाप्त हुईं; बादशाह को राजकोष से सीधे वेतन दिए बिना हर समय बड़ी घुड़सवार सेना उपलब्ध रही।
    4. दोष: सैनिक अपने मनसबदार के प्रति वफादार थे, सम्राट के प्रति नहीं। औरंगजेब के समय मनसबदारों की संख्या अत्यधिक बढ़ने और जागीरों की कमी से 'जागीरदारी संकट' पैदा हुआ जिसने साम्राज्य के पतन का मार्ग प्रशस्त किया।
  2. राजा टोडरमल की भू-राजस्व सुधारों (दहशाला व जब्ती व्यवस्था) का किसानों और साम्राज्य की वित्तीय स्थिरता पर क्या प्रभाव पड़ा? समालोचनात्मक विवेचना कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: टोडरमल के राजस्व सुधार मध्यकालीन भारत के सर्वाधिक वैज्ञानिक सुधार थे:
    1. साम्राज्य को वित्तीय स्थिरता: 10 वर्षों (1570-80) के औसत उत्पादन और बाजार भाव के आधार पर लगान 1/3 तय होने से राज्य को वार्षिक आय का अग्रिम और निश्चित अनुमान हो गया, जिससे वित्तीय अनिश्चितता खत्म हुई।
    2. किसानों को लाभ: लोहे के छल्लों वाली बांस जरीब (तनाब) से सटीक नाप हुई, जिससे भ्रष्ट अमीन किसानों को ठग नहीं सकते थे। लगान की दरें पहले से तय थीं, इसलिए स्थानीय अधिकारियों की मनमानी रुकी।
    3. प्राकृतिक आपदा में राहत: अकाल या बाढ़ में लगान माफी और बीज-बैल के लिए 'तकावी ऋण' देने का प्रावधान था।
    4. सीमाएं: लगान नकद चुकाने की बाध्यता के कारण किसानों को फसल औने-पौने दामों में स्थानीय साहूकारों (बनिया) को बेचनी पड़ती थी, जिससे वे ग्रामीण ऋणग्रस्तता के चक्र में फंसते गए।

FAQs

प्रश्न: मुगल काल में सबसे बड़ा मनसब किस हिंदू सेनापति को प्राप्त था?
उत्तर: आमेर (जयपुर) के राजा मानसिंह प्रथम को अकबर के अंतिम वर्षों में 7,000 का मनसब मिला (मिर्जा अजीज कोका के साथ)। तब 5,000 से ऊपर के मनसब आमतौर पर शाही राजकुमारों के लिए होते थे।

प्रश्न: क्या मनसबदार की मृत्यु के बाद उसका पद उसके बेटे को मिल जाता था?
उत्तर: नहीं, मनसब वंशानुगत नहीं था। मनसबदार की मृत्यु पर जागीर वापस ले ली जाती थी और उसकी संपत्ति से सरकारी बकाया वसूला जाता था (इसे 'जब्त' / escheat कहते हैं; यह भू-राजस्व की 'जब्ती व्यवस्था' से अलग चीज है)। बेटे को बादशाह की मर्जी से नया, आमतौर पर छोटा मनसब मिल सकता था।

प्रश्न: 'मदद-ए-माश' या 'सुयूरगल' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: धार्मिक विद्वानों, उलेमाओं और संतों को भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली कर-मुक्त भूमि के अनुदान को मदद-ए-माश कहा जाता था।

प्रश्न: मुगल काल में 'करोड़ी' नामक अधिकारी की नियुक्ति क्यों की गई थी?
उत्तर: अकबर ने 1573-74 ई. के आसपास उत्तर भारत के ऐसे क्षेत्रों में करोड़ी अधिकारी नियुक्त किए, जिनसे सालाना 1 करोड़ दाम (40 दाम = 1 रुपया, यानी 2.5 लाख रुपये) भू-राजस्व आता था।

प्रश्न: 'नकदी' और 'जागीरदार' मनसबदार में क्या अंतर था?
उत्तर: जिन मनसबदारों को राजकोष से नकद वेतन मिलता था वे 'नकदी' कहलाते थे, और जिन्हें वेतन के बदले किसी क्षेत्र का लगान वसूलने का अधिकार मिलता था वे 'जागीरदार' कहलाते थे।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • मीर बख्शी: सैन्य विभाग, मनसबदारों का रिकॉर्ड, सरखत जारी करना।
  • 1580 ई.: साम्राज्य 12 सूबों में बंटा और आईन-ए-दहशाला लागू हुई।
  • जात-सवार दोहरा पद: 1595-96 ई.; दाग व्यवस्था: 1573-74 ई.।
  • दु-अस्पा सिह-अस्पा: जहांगीर।
  • दहबिस्ती: 10 सवार पर 20 घोड़े।
  • भूमि वर्ग: पोलज (हर साल), परौती (1-2 साल परती), चाचर (3-4 साल), बंजर (5+ साल)।
  • सरकार में फौजदार (कानून-व्यवस्था) और अमलगुजार (राजस्व); परगना में शिकदार, आमिल, कानूनगो।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Mughal Administration और Mansabdari System in Hindi: मुगल प्रशासनिक व्यवस्था की ठोस नींव सम्राट अकबर (1556-1605 ई.) ने रखी।
भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रम में Mughal Administration और Mansabdari System in Hindi: मुगल प्रशासन, मनसबदारी व्यवस्था और भू-राजस्व व्यवस्था एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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