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UPSC in Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): कार्य, शक्तियां और संवैधानिक स्वतंत्रता

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: UPSC in Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): कार्य, शक्तियां और संवैधानिक स्वतंत्रता - संवैधानिक और वैधानिक संस्थाएं
  • • अवलोकन: Quick Answer: UPSC in Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भारत में केंद्रीय भर्ती संस्था और योग्यता व्यवस्था का मुख्य संरक्षक (Watchdog of Merit System) है।...
Quick Answer: UPSC in Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भारत में केंद्रीय भर्ती संस्था और योग्यता व्यवस्था का मुख्य संरक्षक (Watchdog of Merit System) है। संविधान के भाग 14 के अनुच्छेद 315 से 323 तक UPSC और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) का उपबंध है। आयोग में राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त अध्यक्ष और अन्य सदस्य होते हैं (संविधान संख्या तय नहीं करता, राष्ट्रपति तय करते हैं; आमतौर पर अध्यक्ष समेत 9-11), जिनका कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो भी पहले आए) तक होता है। UPSC अखिल भारतीय सेवाओं और केंद्रीय सेवाओं के लिए भर्ती परीक्षाएं कराता है और अनुशासनात्मक मामलों में सरकार को परामर्श देता है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): संवैधानिक पृष्ठभूमि और विकास

भारत में लोक सेवाओं की निष्पक्ष भर्ती के लिए एक स्वतंत्र संस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की गई थी। राज्य स्तर के आयोग के लिए अलग से पढ़ें: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)। RPSC की भर्ती से जिले में काम करने वाले अधिकारियों के लिए देखें: जिला प्रशासन राजस्थान।

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1. ऐतिहासिक विकास

  • 1919 का भारत शासन अधिनियम: इस अधिनियम की धारा 96C में पहली बार भारत में एक लोक सेवा आयोग के गठन का उपबंध किया गया।
  • ली आयोग (Lee Commission 1923-24): 1923 में गठित रॉयल कमीशन ऑन सुपीरियर सिविल सर्विसेज (ली आयोग) ने 1924 की अपनी रिपोर्ट में बिना देरी लोक सेवा आयोग गठित करने की जोरदार सिफारिश की।
  • 1 अक्टूबर 1926: भारत में पहला लोक सेवा आयोग स्थापित हुआ। इसके पहले अध्यक्ष सर रॉस बार्कर (Sir Ross Barker) थे।
  • 1935 का भारत शासन अधिनियम: केंद्र स्तर पर 'फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन' और प्रांतीय स्तर पर 'प्रांतीय लोक सेवा आयोग' बनाए गए।
  • 26 जनवरी 1950: संविधान लागू होने के साथ ही फेडरल आयोग का नाम बदलकर 'संघ लोक सेवा आयोग' (UPSC) कर दिया गया।

2. संवैधानिक उपबंध (अनुच्छेद 315 से 323)

संविधान के भाग 14 के अध्याय 2 में लोक सेवा आयोगों का विस्तृत विवरण दिया गया है:

  • अनुच्छेद 315: संघ के लिए एक संघ लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक राज्य लोक सेवा आयोग होगा। दो या अधिक राज्यों की सहमति से संसद कानून बनाकर संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) भी बना सकती है।
  • अनुच्छेद 316: आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं (राज्य आयोग में राज्यपाल)। जहां तक हो सके आधे सदस्य ऐसे होने चाहिए जिन्हें केंद्र या राज्य सरकार के अधीन न्यूनतम 10 वर्ष का प्रशासनिक अनुभव हो।
  • कार्यकाल: UPSC सदस्य का कार्यकाल पद ग्रहण करने से 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। राज्य आयोग में यह सीमा 6 वर्ष या 62 वर्ष है। वे कभी भी राष्ट्रपति को त्यागपत्र दे सकते हैं।
  • पुनर्नियुक्ति पर रोक: अनुच्छेद 316(3) के अनुसार कोई भी व्यक्ति कार्यकाल पूरा होने पर उसी पद पर फिर से नियुक्त नहीं हो सकता।

Table 1: लोक सेवा आयोगों से जुड़े प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद

अनुच्छेद संवैधानिक विषय मुख्य बिंदु
अनुच्छेद 315 संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग UPSC, SPSC और संयुक्त आयोग (JSPSC) का गठन
अनुच्छेद 316 सदस्यों की नियुक्ति और कार्यकाल UPSC: 6 वर्ष या 65 वर्ष आयु; 10 वर्ष सरकारी अनुभव नियम
अनुच्छेद 317 सदस्यों को हटाना और निलंबित करना कदाचार पर सुप्रीम कोर्ट की जांच बाध्यकारी
अनुच्छेद 319 पदमुक्ति के बाद अन्य पदों पर पाबंदी अध्यक्ष केंद्र या राज्य में कोई अन्य पद नहीं ले सकते
अनुच्छेद 320 लोक सेवा आयोगों के कार्य परीक्षाएं कराना और भर्ती नियमों पर परामर्श
अनुच्छेद 322 आयोग के खर्च भारत की संचित निधि पर भारित (गैर-मतदेय)
अनुच्छेद 323 वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को रिपोर्ट, जिसे संसद में रखा जाता है

UPSC की स्वतंत्रता के संवैधानिक सुरक्षा उपाय

संविधान निर्माताओं ने UPSC को राजनीतिक दबाव से मुक्त रखने के लिए विशेष व्यवस्थाएं की हैं:

1. पद से हटाने की कठोर पद्धति (अनुच्छेद 317)

UPSC के अध्यक्ष या किसी सदस्य को केवल राष्ट्रपति के आदेश से हटाया जा सकता है:

  • कदाचार (Misbehaviour) का आधार: यदि आरोप कदाचार का है, तो राष्ट्रपति मामले को जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय को भेजते हैं (अनुच्छेद 145 के तहत)। सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट और हटाने की सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी (Binding) होती है। जांच चलने के दौरान राष्ट्रपति सदस्य को निलंबित कर सकते हैं।
  • अन्य आधार: यदि सदस्य दिवालिया घोषित हो जाए, कार्यकाल में कहीं और सवेतन नौकरी करे, या मानसिक/शारीरिक रूप से असमर्थ हो जाए, तो राष्ट्रपति सीधे हटा सकते हैं।

2. भविष्य के पदों पर कड़े प्रतिबंध (अनुच्छेद 319)

  • UPSC का अध्यक्ष सेवानिवृत्ति के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन कोई अन्य सरकारी नौकरी नहीं कर सकता।
  • UPSC का कोई सदस्य पद छोड़ने के बाद केवल UPSC का अध्यक्ष या किसी राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का अध्यक्ष बन सकता है, अन्य कोई सरकारी पद नहीं।
  • राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) का अध्यक्ष केवल UPSC का अध्यक्ष/सदस्य या अन्य राज्य आयोग का अध्यक्ष बन सकता है।

3. संचित निधि पर भारित व्यय (अनुच्छेद 322)

UPSC के अध्यक्ष और सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं, जिन पर संसद में मतदान नहीं कराया जाता। इसके अलावा कार्यकाल के दौरान उनकी सेवा शर्तों में कोई अलाभकारी बदलाव नहीं किया जा सकता।

UPSC के प्रमुख कार्य और सीमाएं

अनुच्छेद 320 के अनुसार UPSC के मुख्य कार्य नीचे दिए गए हैं:

  • परीक्षाओं का आयोजन: अखिल भारतीय सेवाओं (IAS, IPS, IFS) और केंद्रीय सेवाओं (ग्रुप A और ग्रुप B) में सीधी भर्ती के लिए लिखित परीक्षाएं और साक्षात्कार आयोजित करना।
  • भर्ती नियमों पर सलाह: विभिन्न नागरिक सेवाओं में भर्ती के तरीकों, योग्यताओं और नियमों पर सरकार को परामर्श देना।
  • पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति: अधिकारियों की पदोन्नति (Promotion) और एक सेवा से दूसरी सेवा में तबादले के सिद्धांतों पर मार्गदर्शन देना।
  • अनुशासनात्मक मामले: लोक सेवकों पर लगने वाले बड़े आरोपों, बर्खास्तगी, पदावनति या पेंशन रोके जाने से जुड़े मामलों पर सलाह देना।
  • मुकदमे का खर्च: अपने आधिकारिक कर्तव्यों के पालन के दौरान कानूनी मुकदमों में फंसे अधिकारियों के कानूनी खर्चे की भरपाई पर राय देना।
  • वार्षिक रिपोर्ट (अनुच्छेद 323): आयोग हर वर्ष अपने काम की रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है। यदि सरकार आयोग की किसी सलाह को नहीं मानती, तो सरकार को संसद में ज्ञापन देकर कारण बताना पड़ता है।

UPSC का परामर्श किन मामलों में नहीं लिया जाता?

संविधान के अनुसार नीचे दिए गए मामलों में UPSC से सलाह लेना जरूरी नहीं है:

  • अनुच्छेद 16(4) और 335 के तहत अनुसूचित जातियों (SC), अनुसूचित जनजातियों (ST) और अन्य पिछड़े वर्गों (OBC) के लिए पदों के आरक्षण का निर्धारण।
  • आयोगों या उच्च स्तरीय समितियों के अध्यक्ष और सदस्यों के चयन के मामले।
  • अस्थायी नियुक्तियां जो एक वर्ष से कम समय के लिए की जाती हैं।

Table 2: UPSC बनाम राज्य लोक सेवा आयोग (RPSC) तुलना

मापदंड संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC / RPSC)
संवैधानिक प्रावधान भाग 14, अनुच्छेद 315-323 भाग 14, अनुच्छेद 315-323
नियुक्ति कर्ता राष्ट्रपति राज्यपाल
हटाने का अधिकार केवल राष्ट्रपति (सुप्रीम कोर्ट जांच पर) केवल राष्ट्रपति (राज्यपाल को हटाने का अधिकार नहीं)
कार्यकाल सीमा 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु
त्यागपत्र किसे राष्ट्रपति को राज्यपाल को
वार्षिक रिपोर्ट राष्ट्रपति को (संसद में प्रस्तुत) राज्यपाल को (राज्य विधानमंडल में प्रस्तुत)
खर्च वहन भारत की संचित निधि पर भारित राज्य की संचित निधि पर भारित

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • UPSC केवल भर्ती करने वाला आयोग है, सेवा शर्तों का निर्धारण या कैडर प्रबंधन कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) करता है।
  • UPSC की भूमिका सलाहकारी है, इसके सुझाव सरकार पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, लेकिन अनदेखी पर संसद में जवाब देना होता है।
  • राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC): इसका अध्यादेश 20 अगस्त 1949 को राजस्थान राजपत्र में छपा (यही तारीख आमतौर पर स्थापना की मानी जाती है) और 22 दिसंबर 1949 की अधिसूचना से आयोग ने काम शुरू किया। पहले मुख्यालय जयपुर था; 1958 में सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर अजमेर ले जाया गया।
  • नवंबर 2026 तक UPSC के अध्यक्ष अजय कुमार (पूर्व रक्षा सचिव) हैं, जिन्होंने 15 मई 2025 को पद संभाला।
  • संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) एक वैधानिक निकाय होता है, संवैधानिक नहीं, क्योंकि इसका गठन संसद के अधिनियम से होता है।
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RAS Prelims MCQ

  1. संविधान के किस अनुच्छेद में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) का गठन वर्णित है?
    A) अनुच्छेद 280
    B) अनुच्छेद 315
    C) अनुच्छेद 324
    D) अनुच्छेद 338
    उत्तर: B) अनुच्छेद 315
    कारण: अनुच्छेद 315 में संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का गठन बताया गया है।
  2. UPSC के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल कितना होता है?
    A) 5 वर्ष या 62 वर्ष
    B) 6 वर्ष या 62 वर्ष
    C) 6 वर्ष या 65 वर्ष
    D) 5 वर्ष या 65 वर्ष
    उत्तर: C) 6 वर्ष या 65 वर्ष
    कारण: अनुच्छेद 316(2) के तहत UPSC सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है।
  3. राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों को पद से हटाने का अधिकार किसे है?
    A) संबंधित राज्य के राज्यपाल को
    B) केवल भारत के राष्ट्रपति को
    C) राज्य के मुख्यमंत्री को
    D) उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को
    उत्तर: B) केवल भारत के राष्ट्रपति को
    कारण: राज्य आयोग के सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं लेकिन हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास है।
  4. कदाचार के आधार पर UPSC सदस्य को हटाने के मामले में किसकी सलाह बाध्यकारी होती है?
    A) केंद्रीय कानून मंत्री
    B) प्रधानमंत्री
    C) सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
    D) संसद की संयुक्त समिति
    उत्तर: C) सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court)
    कारण: अनुच्छेद 317(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट की जांच रिपोर्ट और सलाह राष्ट्रपति के लिए बाध्यकारी होती है।
  5. 1 अक्टूबर 1926 को बने भारत के पहले लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कौन थे?
    A) सर रॉस बार्कर
    B) एच. के. कृपलानी
    C) डॉ. बी. आर. अंबेडकर
    D) सुकुमार सेन
    उत्तर: A) सर रॉस बार्कर
    कारण: 1926 के लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष सर रॉस बार्कर थे। एच. के. कृपलानी 1950 में UPSC नाम पड़ने के समय अध्यक्ष थे, इसलिए प्रश्न में साल देखकर उत्तर दें।
  6. किन मामलों में सरकार के लिए UPSC से परामर्श लेना जरूरी नहीं है?
    A) सिविल सेवाओं में भर्ती के तरीके पर
    B) अनुशासनात्मक मामलों पर
    C) SC, ST और OBC के लिए आरक्षण तय करने पर
    D) एक सेवा से दूसरी सेवा में पदोन्नति पर
    उत्तर: C) SC, ST और OBC के लिए आरक्षण तय करने पर
    कारण: अनुच्छेद 335 और 16(4) के तहत आरक्षण संबंधी नीतियों में UPSC से सलाह नहीं ली जाती।
  7. UPSC के खर्चे किस निधि पर भारित होते हैं?
    A) भारत की आकस्मिकता निधि
    B) भारत का लोक लेखा
    C) भारत की संचित निधि
    D) प्रधानमंत्री राहत कोष
    उत्तर: C) भारत की संचित निधि
    कारण: अनुच्छेद 322 के अनुसार आयोग के सभी खर्च भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं।
  8. संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) का गठन कैसे होता है?
    A) राष्ट्रपति के सीधे आदेश से
    B) संबंधित राज्यों के विधानमंडलों के प्रस्ताव पर संसद के कानून के जरिए
    C) नीति आयोग की सिफारिश पर
    D) राज्यपालों की सहमति से
    उत्तर: B) संबंधित राज्यों के विधानमंडलों के प्रस्ताव पर संसद के कानून के जरिए
    कारण: अनुच्छेद 315(2) के अनुसार दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर संसद कानून बनाकर JSPSC गठित करती है।
  9. UPSC अपनी वार्षिक रिपोर्ट किसे सौंपता है?
    A) संसद को
    B) प्रधानमंत्री को
    C) राष्ट्रपति को
    D) कार्मिक मंत्रालय को
    उत्तर: C) राष्ट्रपति को
    कारण: अनुच्छेद 323(1) के अनुसार UPSC वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को देता है।
  10. UPSC सदस्य सेवानिवृत्ति के बाद कौन सा पद ग्रहण कर सकते हैं?
    A) किसी राज्य के राज्यपाल
    B) UPSC के अध्यक्ष या SPSC के अध्यक्ष
    C) किसी केंद्रीय मंत्रालय में सचिव
    D) नीति आयोग के उपाध्यक्ष
    उत्तर: B) UPSC के अध्यक्ष या SPSC के अध्यक्ष
    कारण: अनुच्छेद 319 के तहत सदस्य केवल UPSC या किसी राज्य आयोग के अध्यक्ष बन सकते हैं।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. UPSC को 'योग्यता व्यवस्था का पहरेदार' क्यों कहते हैं?
    उत्तर: UPSC बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के केवल योग्यता और खुली प्रतियोगी परीक्षाओं के आधार पर देश के योग्यतम युवाओं को लोक सेवाओं में चयनित करता है।
  2. संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) की प्रकृति क्या है?
    उत्तर: यह एक वैधानिक संस्था है जिसका गठन संबंधित राज्यों के अनुरोध पर संसद के अधिनियम से होता है। इसके सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।

Long Questions (5–10 marks)

  1. UPSC की स्वतंत्रता सुरक्षित रखने के लिए संविधान में कौन से तीन मुख्य उपबंध हैं?
    उत्तर: तीन प्रमुख उपबंध इस प्रकार हैं:
    1. कार्यकाल की सुरक्षा: केवल राष्ट्रपति की ओर से सुप्रीम कोर्ट की जांच के बाद ही कदाचार पर हटाया जा सकता है, जिसकी सलाह बाध्यकारी है।
    2. वित्तीय स्वायत्तता: सभी वेतन, भत्ते और पेंशन संचित निधि पर भारित हैं, जिन पर संसद में मतदान नहीं होता।
    3. भविष्य के रोजगार पर पाबंदी: सेवानिवृत्ति बाद केंद्र या राज्य सरकार में किसी अन्य पद पर जाने पर सख्त रोक है।
  2. UPSC की सलाहकारी भूमिका और उसकी सीमाओं का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा:
    - सलाहकारी अधिकार: भर्ती नियमों, पदोन्नति, स्थानांतरण और अनुशासनात्मक कार्यवाहियों पर परामर्श।
    - सीमाएं: सलाह सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं है; आरक्षण नीतियों, उच्च आयोगों के पदों और अस्थायी नियुक्तियों में परामर्श से बाहर रखा गया है।
    - सुरक्षा कवच: सरकार यदि सलाह खारिज करती है, तो संसद में दोनों सदनों के सामने इसका कारण बताना अनिवार्य है।

FAQs

Q1: क्या राज्यपाल SPSC के सदस्य को पद से हटा सकते हैं?
नहीं, राज्यपाल केवल नियुक्त कर सकते हैं, हटाने का अधिकार सिर्फ भारत के राष्ट्रपति के पास है।

Q2: क्या UPSC चयनित अधिकारियों को पद आवंटित करता है?
नहीं, आयोग केवल मेरिट लिस्ट बनाकर सरकार को देता है; कैडर वितरण और नियुक्ति कार्मिक मंत्रालय करता है।

Q3: क्या निजी क्षेत्र से लेटरल एंट्री में UPSC की भूमिका होती है?
हां, 2019 से केंद्र में संयुक्त सचिव, निदेशक और उप सचिव स्तर की लेटरल एंट्री भर्ती UPSC ने ही की। अगस्त 2024 में सरकार के कहने पर UPSC ने लेटरल एंट्री का नया विज्ञापन वापस ले लिया था।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • लोक सेवा आयोग: भाग 14, अनुच्छेद 315-323।
  • भारत में पहला लोक सेवा आयोग: 1 अक्टूबर 1926, अध्यक्ष सर रॉस बार्कर (ली आयोग की सिफारिश)।
  • कार्यकाल: UPSC 6 वर्ष या 65 वर्ष; SPSC 6 वर्ष या 62 वर्ष।
  • UPSC और SPSC दोनों के सदस्यों को केवल राष्ट्रपति हटा सकते हैं (अनु. 317); कदाचार पर सुप्रीम कोर्ट की जांच।
  • UPSC अध्यक्ष रिटायर होने के बाद कोई सरकारी पद नहीं ले सकता (अनु. 319)।
  • संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (JSPSC) संसद के कानून से बनता है, इसलिए वैधानिक निकाय है।
  • नवंबर 2026 तक UPSC अध्यक्ष: अजय कुमार (मई 2025 से)।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: UPSC in Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भारत।
भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में UPSC in Hindi: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC): कार्य, शक्तियां और संवैधानिक स्वतंत्रता एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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