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NHRC, CVC और Lokpal in Hindi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), CVC और लोकपाल: कार्य और शक्तियां

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: NHRC, CVC और Lokpal in Hindi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), CVC और लोकपाल: कार्य और शक्तियां - संवैधानिक और वैधानिक संस्थाएं
  • • अवलोकन: Quick Answer: NHRC, CVC और Lokpal in Hindi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और लोकपाल भारत में नागरिक अधिकारों के संरक्षण,...
Quick Answer: NHRC, CVC और Lokpal in Hindi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और लोकपाल भारत में नागरिक अधिकारों के संरक्षण, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने वाले तीन प्रमुख वैधानिक प्रहरी हैं। NHRC की स्थापना मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के तहत 12 अक्टूबर 1993 को हुई थी। CVC का गठन 1964 में संथानम समिति की सिफारिश पर हुआ जिसे 2003 में वैधानिक मान्यता मिली। वहीं लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013 के तहत लोकपाल का गठन किया गया, जो प्रधानमंत्री, मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करने वाली देश की शीर्ष संस्था है।

संवैधानिक और वैधानिक निगरानी संस्थाओं की आवश्यकता

लोकतांत्रिक शासन में केवल सरकार का होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पर नागरिक अधिकारों और ईमानदारी की निगरानी रखने वाली स्वतंत्र संस्थाओं की भी जरूरत होती है। राज्य स्तर की ऐसी संस्थाओं के लिए पढ़ें: राज्य मानवाधिकार आयोग और राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त।

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1. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission - NHRC) एक स्वायत्त वैधानिक संस्था है। इसका गठन 'मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993' के तहत 12 अक्टूबर 1993 को किया गया था। 2006 और 2019 में इस कानून में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए।

NHRC की बनावट (2019 संशोधन के बाद)

  • अध्यक्ष: कोई भी व्यक्ति जो भारत का मुख्य न्यायाधीश (CJI) या उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश रहा हो (2019 से पहले केवल पूर्व CJI ही बन सकते थे)।
  • सदस्य:
    • एक सदस्य जो सुप्रीम कोर्ट का जज है या रहा हो।
    • एक सदस्य जो किसी हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश है या रहा हो।
    • मानवाधिकार मामलों का व्यावहारिक ज्ञान रखने वाले तीन सदस्य, जिनमें कम से कम एक महिला का होना अनिवार्य है।
  • पदेन सदस्य (Ex-Officio Members): 7 राष्ट्रीय आयोगों के अध्यक्ष इसके पदेन सदस्य होते हैं — राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST), राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC), राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR), और दिव्यांगजनों के लिए मुख्य आयुक्त।

नियुक्ति और कार्यकाल

अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति एक उच्चस्तरीय 6 सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश पर करते हैं:

  1. प्रधानमंत्री (समिति के अध्यक्ष)
  2. लोकसभा अध्यक्ष
  3. केंद्रीय गृह मंत्री
  4. लोकसभा में विपक्ष के नेता
  5. राज्यसभा में विपक्ष के नेता
  6. राज्यसभा के उपसभापति (Deputy Chairman)

कार्यकाल: 2019 के संशोधन से कार्यकाल 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) कर दिया गया है। वे फिर से नियुक्ति के पात्र होते हैं।

NHRC की शक्तियां और कार्य

  • मानवाधिकारों के उल्लंघन की स्वतः संज्ञान लेकर या पीड़ित की शिकायत पर जांच करना।
  • जेलों और बंदीगृहों का दौरा कर कैदियों के जीवन स्तर का अध्ययन करना।
  • न्यायालयों में लंबित मानवाधिकार मामलों में कोर्ट की अनुमति से हस्तक्षेप करना।
  • नागरिक न्यायालय (Civil Court) की शक्तियां रखना: गवाहों को समन भेजना, दस्तावेज मंगाना।
  • सलाहकारी प्रकृति: आयोग की सिफारिशें केवल सलाहकारी होती हैं, यह किसी दोषी को सीधे सजा नहीं दे सकता, लेकिन पीड़ित को अंतरिम मुआवजा देने की सिफारिश सरकार से कर सकता है।
  • समय सीमा की पाबंदी: आयोग घटना की तारीख से एक वर्ष बीत जाने के बाद किसी मामले की जांच नहीं कर सकता।

2. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC)

केंद्रीय सतर्कता आयोग (Central Vigilance Commission - CVC) केंद्र सरकार में भ्रष्टाचार रोकने वाली सर्वोच्च सतर्कता संस्था है।

स्थापना और कानूनी स्थिति

  • स्थापना: फरवरी 1964 में के. संथानम समिति (1962-64) की सिफारिश पर एक कार्यकारी प्रस्ताव से इसकी स्थापना की गई।
  • वैधानिक दर्जा: सितंबर 2003 में संसद ने 'केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम 2003' पारित कर इसे स्वतंत्र वैधानिक दर्जा दिया।
  • यह संस्था किसी भी मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण से पूरी तरह स्वतंत्र है और केवल संसद के प्रति जवाबदेह है।

बनावट, नियुक्ति और कार्यकाल

  • बनावट: एक मुख्य सतर्कता आयुक्त (Central Vigilance Commissioner - Chairperson) और अधिकतम दो सतर्कता आयुक्त (Vigilance Commissioners)।
  • नियुक्ति समिति (3 सदस्यीय): राष्ट्रपति की ओर से 3 सदस्यीय समिति की सिफारिश पर नियुक्ति होती है:
    1. प्रधानमंत्री (अध्यक्ष)
    2. केंद्रीय गृह मंत्री
    3. लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता)
  • कार्यकाल: 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक।
  • भविष्य की नौकरी पर रोक: पदमुक्त होने के बाद वे केंद्र या राज्य सरकार के अधीन कोई अन्य सरकारी पद नहीं ले सकते।

CVC के मुख्य कार्य

  • भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत लोक सेवकों पर लगे आरोपों की जांच की निगरानी करना।
  • दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (CBI) के कामकाज का भ्रष्टाचार मामलों में अधीक्षण करना।
  • केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों (CVO) के काम की समीक्षा करना।
  • भारत सरकार के PIDPI प्रस्ताव (Public Interest Disclosure and Protection of Informers, 21 अप्रैल 2004) के तहत "Designated Agency" के रूप में whistleblower की शिकायतें लेना और शिकायतकर्ता की पहचान गुप्त रखना।

3. लोकपाल (Lokpal)

लोकपाल देश में सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाला सर्वोच्च वैधानिक लोकपाल निकाय है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और अधिनियम

  • 'लोकपाल' और 'लोकायुक्त' शब्द पहली बार 1963 में प्रसिद्ध न्यायविद डॉ. एल. एम. सिंघवी ने दिए थे।
  • 1966 के पहले प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC) ने मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में लोकपाल की स्थापना की स्पष्ट सिफारिश की थी।
  • लंबी कानूनी यात्रा और व्यापक जन आंदोलनों के बाद संसद ने 'लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013' पारित किया, जो 16 जनवरी 2014 से प्रभावी हुआ। भारत के पहले लोकपाल जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष (मार्च 2019) बने।

लोकपाल का स्वरूप और नियुक्ति

  • बनावट: एक अध्यक्ष (पूर्व CJI, पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज या प्रतिष्ठित व्यक्ति) और अधिकतम 8 सदस्य।
  • प्रतिनिधित्व: कुल सदस्यों में से 50% सदस्य न्यायिक पृष्ठभूमि (सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज) से होने चाहिए। इसके अलावा कम से कम 50% सदस्य SC, ST, OBC, अल्पसंख्यक और महिला वर्ग से होने अनिवार्य हैं।
  • चयन समिति (5 सदस्यीय): प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में विपक्ष के नेता, भारत के मुख्य न्यायाधीश (या उनके नामित सुप्रीम कोर्ट जज), और राष्ट्रपति की ओर से नामित एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता।
  • कार्यकाल: 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक।

लोकपाल का क्षेत्राधिकार

  • प्रधानमंत्री: प्रधानमंत्री इसके दायरे में आते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय संबंधों, बाह्य व आंतरिक सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से जुड़े मामलों पर छूट है। प्रधानमंत्री के विरुद्ध जांच के लिए लोकपाल की पूर्ण पीठ के दो-तिहाई बहुमत की मंजूरी आवश्यक होती है।
  • मंत्रिपरिषद और सांसद: सभी केंद्रीय मंत्री और संसद सदस्य (सांसदों के संसद के भीतर दिए गए भाषण या वोट को छोड़कर)।
  • अधिकारी वर्ग: केंद्र सरकार के ग्रुप A, B, C, D के सभी लोक सेवक और केंद्र से सहायता प्राप्त स्वायत्त संस्थानों के प्रमुख।
  • शक्तियां: लोकपाल के पास सीबीआई जैसी एजेंसियों को जांच सौंपने और उन पर अधीक्षण रखने, भ्रष्ट साधनों से जुटाई गई संपत्ति को जब्त करने और सिविल कोर्ट की शक्तियां होती हैं।

Table 1: NHRC, CVC और लोकपाल का तुलनात्मक अध्ययन

मापदंड राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) लोकपाल (Lokpal)
कानूनी आधार मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 CVC अधिनियम 2003 लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013
कुल सदस्य अध्यक्ष + 5 सदस्य (+ 7 पदेन सदस्य) अध्यक्ष + अधिकतम 2 आयुक्त अध्यक्ष + अधिकतम 8 सदस्य
चयन समिति 6 सदस्यीय (PM, गृह मंत्री, LS स्पीकर, RS उपसभापति, दोनों सदनों के LoP) 3 सदस्यीय (PM, गृह मंत्री, लोकसभा में LoP) 5 सदस्यीय (PM, LS स्पीकर, LoP, CJI प्रतिनिधि, प्रतिष्ठित विधिवेत्ता)
कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष (2019 संशोधन) 4 वर्ष या 65 वर्ष 5 वर्ष या 70 वर्ष
जांच का मुख्य क्षेत्र जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के अधिकार का हनन केंद्रीय लोक सेवकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार और सतर्कता प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद और ग्रुप A-D तक के अधिकारियों में भ्रष्टाचार

Table 2: तीनों संस्थाओं की जांच सीमाएं

संस्था जांच की सीमाएं व प्रतिबंध सजा देने का अधिकार
NHRC घटना के 1 वर्ष बाद जांच नहीं कर सकता; सेना के मामलों में दायरे में अधिकार सीधे दंड देने की शक्ति नहीं, केवल मुआवजे व कार्रवाई की सिफारिश
CVC केवल केंद्र सरकार के मामलों तक दायरे में; राज्यों के मामलों में अधिकार नहीं स्वयं सजा नहीं दे सकता; अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश करता है
लोकपाल संसद में दिए गए भाषण या वोट पर सांसदों के विरुद्ध जांच नहीं विशेष अदालतों के माध्यम से सजा दिलाने और संपत्ति जब्त करने का अधिकार

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है।
  • CVC, PIDPI प्रस्ताव 2004 के तहत whistleblower शिकायतों की "Designated Agency" है (Whistle Blowers Protection Act 2014 पास हुआ, पर पूरी तरह लागू नहीं हुआ)।
  • राजस्थान में लोकायुक्त संस्था राजस्थान लोकायुक्त और उप-लोकायुक्त अधिनियम 1973 से बनी, जो 3 फरवरी 1973 से लागू हुआ।
  • राजस्थान के पहले लोकायुक्त न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ (1973) थे।
  • पदधारी (नवंबर 2026 तक): NHRC अध्यक्ष जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यन (दिसंबर 2024 से); लोकपाल अध्यक्ष जस्टिस ए. एम. खानविलकर (मार्च 2024 से); CVC में प्रवीण कुमार श्रीवास्तव का कार्यकाल पूरा होने पर 3 अगस्त 2026 से ए. एस. राजीव कार्यवाहक CVC हैं।
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RAS Prelims MCQ

  1. मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2019 के अनुसार NHRC के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल कितना है?
    A) 5 वर्ष या 70 वर्ष
    B) 3 वर्ष या 70 वर्ष
    C) 4 वर्ष या 65 वर्ष
    D) 6 वर्ष या 65 वर्ष
    उत्तर: B) 3 वर्ष या 70 वर्ष
    कारण: 2019 के संशोधन से कार्यकाल 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु कर दिया गया।
  2. केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) की स्थापना किस समिति की सिफारिश पर हुई थी?
    A) बलवंत राय मेहता समिति
    B) के. संथानम समिति
    C) प्रशासनिक सुधार आयोग
    D) सरकारिया आयोग
    उत्तर: B) के. संथानम समिति
    कारण: भ्रष्टाचार निरोधक संथानम समिति (1962-64) की रिपोर्ट पर 1964 में CVC बना।
  3. NHRC के अध्यक्ष पद के लिए 2019 के बाद कौन योग्य है?
    A) केवल भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI)
    B) भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश
    C) उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
    D) भारत के महान्यायवादी
    उत्तर: B) भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश
    कारण: 2019 संशोधन से सुप्रीम कोर्ट के किसी भी पूर्व जज को भी अध्यक्ष बनने की पात्रता दी गई।
  4. भारत के प्रथम लोकपाल कौन नियुक्त किए गए थे?
    A) जस्टिस दीपक मिश्रा
    B) जस्टिस पी. एन. भगवती
    C) जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष
    D) जस्टिस रंजन गोगोई
    उत्तर: C) जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष
    कारण: मार्च 2019 में जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष भारत के पहले लोकपाल बने।
  5. CVC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति के लिए गठित समिति में कौन शामिल नहीं होता?
    A) प्रधानमंत्री
    B) केंद्रीय गृह मंत्री
    C) भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
    D) लोकसभा में विपक्ष के नेता
    उत्तर: C) भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
    कारण: CVC चयन समिति में केवल 3 सदस्य होते हैं: PM, गृह मंत्री और लोकसभा में LoP।
  6. लोकपाल के कुल सदस्यों में से कितने प्रतिशत सदस्यों का न्यायिक पृष्ठभूमि से होना जरूरी है?
    A) 25%
    B) 33%
    C) 50%
    D) 75%
    उत्तर: C) 50%
    कारण: लोकपाल अधिनियम 2013 के अनुसार 50% सदस्य अनिवार्य रूप से न्यायिक क्षेत्र से होने चाहिए।
  7. NHRC किसी घटना के कितने समय बाद उसकी जांच शुरू नहीं कर सकता?
    A) 6 माह
    B) 1 वर्ष
    C) 2 वर्ष
    D) 3 वर्ष
    उत्तर: B) 1 वर्ष
    कारण: अधिनियम के अनुसार घटना की तिथि से 1 वर्ष की समाप्ति के बाद आयोग जांच नहीं कर सकता।
  8. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त का कार्यकाल कितना होता है?
    A) 5 वर्ष या 65 वर्ष
    B) 4 वर्ष या 65 वर्ष
    C) 3 वर्ष या 70 वर्ष
    D) 6 वर्ष या 65 वर्ष
    उत्तर: B) 4 वर्ष या 65 वर्ष
    कारण: CVC अधिनियम 2003 के तहत कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है।
  9. लोकपाल की चयन समिति में 'प्रतिष्ठित विधिवेत्ता' का मनोनयन कौन करता है?
    A) प्रधानमंत्री
    B) राष्ट्रपति
    C) भारत के मुख्य न्यायाधीश
    D) लोकसभा अध्यक्ष
    उत्तर: B) राष्ट्रपति
    कारण: चयन समिति के अन्य चार सदस्यों की सिफारिश पर राष्ट्रपति की ओर से विधिवेत्ता का मनोनयन होता है।
  10. राजस्थान के प्रथम लोकायुक्त कौन थे?
    A) न्यायमूर्ति एम. एल. जोशी
    B) न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ
    C) न्यायमूर्ति के. एस. सिद्धू
    D) न्यायमूर्ति एम. बी. शर्मा
    उत्तर: B) न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ
    कारण: 1973 में गठित राजस्थान लोकायुक्त के पहले प्रमुख न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ थे।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम 2019 के दो प्रमुख बदलाव बताइए।
    उत्तर: 1. NHRC अध्यक्ष पद के लिए पूर्व CJI के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट के किसी भी पूर्व जज को पात्र बनाया गया। 2. कार्यकाल 5 वर्ष से घटाकर 3 वर्ष या 70 वर्ष की आयु किया गया।
  2. CVC को वैधानिक दर्जा किस वर्ष मिला और इसकी मुख्य जिम्मेदारी क्या है?
    उत्तर: CVC को 2003 में संसद के कानून के जरिए वैधानिक दर्जा मिला। यह केंद्र सरकार के अधीन सतर्कता प्रशासन और भ्रष्टाचार के मामलों की निगरानी करने वाला सर्वोच्च निकाय है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. लोकपाल के क्षेत्राधिकार में प्रधानमंत्री को शामिल करने के संबंध में क्या सुरक्षा उपाय रखे गए हैं?
    उत्तर: लोकपाल के अधीन प्रधानमंत्री को लाते समय नीचे दिए गए सावधानियां रखी गई हैं:
    1. अंतरराष्ट्रीय संबंध, बाह्य व आंतरिक सुरक्षा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के मामलों पर प्रधानमंत्री के विरुद्ध जांच नहीं हो सकती।
    2. किसी भी शिकायत पर जांच शुरू करने से पहले लोकपाल की पूर्ण पीठ के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की सहमति अनिवार्य है।
    3. जांच की सुनवाई गोपनीय (In-camera) होगी और शिकायत खारिज होने पर रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।
  2. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को एक 'दंतहीन बाघ' (Toothless Tiger) क्यों कहा जाता है? इसके सशक्तिकरण के उपाय सुझाइए।
    उत्तर रूपरेखा:
    - कमजोरियां: आयोग के पास दोषियों को सीधे दंडित करने की शक्ति नहीं है, केवल सिफारिश कर सकता है; घटना के एक वर्ष बाद जांच पर रोक है; सशस्त्र बलों के खिलाफ जांच का दायरा बहुत दायरे में है; वित्तीय व प्रशासनिक रूप से सरकार पर निर्भरता।
    - सुझाव: आयोग की सिफारिशों को सरकार के लिए समयबद्ध रूप से बाध्यकारी बनाना, स्वतंत्र जांच कैडर उपलब्ध कराना, और पीड़ित को सीधी राहत देने के लिए विशेष वित्तीय कोष बनाना।

FAQs

Q1: क्या NHRC राज्य मानवाधिकार आयोगों (SHRC) पर प्रशासनिक नियंत्रण रखता है?
नहीं, राज्य आयोग स्वतंत्र संस्थाएं हैं और वे NHRC के अधीनस्थ नहीं हैं।

Q2: क्या सांसद लोकपाल के जांच दायरे में आते हैं?
हां, संसद सदस्य लोकपाल के दायरे में आते हैं, लेकिन संसद के भीतर दिए गए भाषण या मतदान के संबंध में उन्हें छूट प्राप्त है।

Q3: क्या CVC किसी भ्रष्ट अधिकारी को सीधे निलंबित कर सकता है?
नहीं, CVC निलंबन या दंड की सिफारिश संबंधित मंत्रालय को भेजता है, सीधी सजा देने का अधिकार प्रशासनिक विभाग के पास होता है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • NHRC: मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993, गठन 12 अक्टूबर 1993; 2019 संशोधन से कार्यकाल 3 वर्ष या 70 वर्ष।
  • NHRC चयन समिति 6 सदस्यीय, अध्यक्ष प्रधानमंत्री; NHRC घटना के 1 वर्ष बाद जांच नहीं करता।
  • CVC: 1964 में संथानम समिति की सिफारिश पर बना, CVC Act 2003 से वैधानिक; कार्यकाल 4 वर्ष या 65 वर्ष।
  • CVC चयन समिति: PM, गृह मंत्री, लोकसभा में LoP।
  • लोकपाल: लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013, 16 जनवरी 2014 से लागू; अध्यक्ष + अधिकतम 8 सदस्य (50% न्यायिक)।
  • पहले लोकपाल जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष (मार्च 2019); नवंबर 2026 तक अध्यक्ष जस्टिस ए. एम. खानविलकर।
  • राजस्थान लोकायुक्त अधिनियम 1973; पहले लोकायुक्त न्यायमूर्ति आई. डी. दुआ।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: NHRC, CVC और Lokpal in Hindi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और लोकपाल भारत।
भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में NHRC, CVC और Lokpal in Hindi: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC), CVC और लोकपाल: कार्य और शक्तियां एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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