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RTI Act 2005 in Hindi: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) और RTI अधिनियम 2005: कार्य, शक्तियां और 2019 संशोधन

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: RTI Act 2005 in Hindi: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) और RTI अधिनियम 2005: कार्य, शक्तियां और 2019 संशोधन - संवैधानिक और वैधानिक संस्थाएं
  • • अवलोकन: Quick Answer: RTI Act 2005 in Hindi: केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission - CIC) और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (RTI Act 2005) सरकार के ...
Quick Answer: RTI Act 2005 in Hindi: केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission - CIC) और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (RTI Act 2005) सरकार के काम में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने वाले सबसे मजबूत साधन हैं। RTI कानून पर राष्ट्रपति ने 15 जून 2005 को मंजूरी दी और यह 12 अक्टूबर 2005 से पूरी तरह लागू हुआ। जानने का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की आजादी) का हिस्सा माना गया है। अधिनियम की धारा 12 के तहत केंद्रीय सूचना आयोग बना। 2019 के संशोधन के बाद आयुक्तों का कार्यकाल केंद्र सरकार नियमों से तय करती है (2019 के नियम: 3 वर्ष, और 65 वर्ष की आयु तक ही)। 2026 तक मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल हैं (शपथ 15 दिसंबर 2025)।

सूचना के अधिकार की संवैधानिक पृष्ठभूमि और राजस्थान का योगदान

सूचना का अधिकार आम नागरिक को सरकार से सवाल पूछने की कानूनी ताकत देता है। राज्य स्तर के आयोग के लिए पढ़ें: राज्य सूचना आयोग (राजस्थान), भ्रष्टाचार की शिकायत वाली दूसरी संस्था के लिए देखें: लोकायुक्त और उपलोकायुक्त और जमीनी प्रशासन के लिए पढ़ें: जिला प्रशासन राजस्थान।

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1. संवैधानिक आधार और न्यायिक फैसले

  • अनुच्छेद 19(1)(a): सर्वोच्च न्यायालय ने कई ऐतिहासिक वादों में यह माना है कि 'जानने का अधिकार' (Right to Know) संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) में वर्णित विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ही अभिन्न हिस्सा है।
  • उत्तर प्रदेश राज्य बनाम राज नारायण (1975): इस मामले में जस्टिस मैथ्यू ने व्यवस्था दी कि जनता को लोक सेवकों के किए गए सार्वजनिक कार्यों को जानने का बुनियादी हक है।
  • एस. पी. गुप्ता बनाम भारत संघ (1981): कोर्ट ने दोहराया कि एक खुली और पारदर्शी सरकार ही सच्ची जवाबदेह सरकार हो सकती है।

2. राजस्थान का ऐतिहासिक आंदोलन

देश में आरटीआई कानून की नींव राजस्थान की धरती पर पड़ी। अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह ने राजसमंद के देवडूंगरी गांव से काम शुरू किया और 1 मई 1990 को 'मजदूर किसान शक्ति संगठन' (MKSS) बना। पहली 'जन सुनवाई' (Public Hearing) 2 दिसंबर 1994 को पाली जिले के कोट किराना में हुई, जिसमें गांव के विकास कामों के खर्च का हिसाब लोगों के सामने पढ़ा गया। 1996 में ब्यावर (चांग गेट) में करीब 40 दिन का धरना हुआ। नारे थे: 'हमारा पैसा, हमारा हिसाब' और 'जानने का हक, जीने का हक'। राजस्थान ने 2000 में अपना राज्य सूचना अधिकार कानून बनाया और ऐसा करने वाले शुरुआती राज्यों में रहा।

सूचना का अधिकार अधिनियम 2005: मुख्य धाराएं

यह बिल लोकसभा ने 11 मई 2005 और राज्यसभा ने 12 मई 2005 को पास किया। राष्ट्रपति की मंजूरी 15 जून 2005 को मिली और कानून 12 अक्टूबर 2005 से पूरे देश में लागू हुआ (उसी दिन CIC भी बना)।

1. प्रमुख धाराएं और व्यवस्था

  • धारा 2(h) - लोक प्राधिकारी (Public Authority): संविधान, संसद या राज्य विधानमंडल के कानून या सरकारी अधिसूचना से बनी संस्थाएं, और सरकार से काफी हद तक (substantially) पैसा पाने वाले निकाय और NGO इसके दायरे में आते हैं।
  • धारा 4 - स्वतः प्रकटीकरण (Suo-Motu Disclosure): हर सरकारी विभाग को अपने काम, बजट, योजनाओं और अधिकारियों की शक्तियों की जानकारी खुद ही सार्वजनिक करनी होती है।
  • धारा 6 - आवेदन process: कोई भी नागरिक लिखित या ऑनलाइन रूप में लोक सूचना अधिकारी (PIO) को आवेदन कर सकता है। केंद्र के नियमों में फीस 10 रुपये है (राज्य अपनी फीस तय करते हैं) और BPL आवेदक से फीस नहीं ली जाती। सूचना मांगने का कारण बताना जरूरी नहीं है (धारा 6(2))।

2. सूचना उपलब्ध कराने की समय सीमा (धारा 7)

  • सामान्य मामले: आवेदन मिलने के 30 दिनों के भीतर सूचना उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
  • जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Life or Liberty): यदि मांगी गई सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ी है, तो 48 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है।
  • सहायक लोक सूचना अधिकारी (APIO) के जरिए: यदि आवेदन APIO के माध्यम से भेजा गया है, तो 5 दिन का extra समय (कुल 35 दिन) मिलता है।
  • निःशुल्क सूचना: यदि तय समय सीमा में सूचना नहीं दी जाती, तो आवेदक को सारी सूचना बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जाएगी।

3. सूचना देने से छूट (धारा 8)

राष्ट्रहित और सुरक्षा को ध्यान में रखकर कुछ मामलों में सूचना देने से छूट दी गई है:

  • भारत की संप्रभुता, सुरक्षा, सामरिक और वैज्ञानिक हितों को नुकसान पहुंचाने वाली सूचना।
  • अदालत ने जिसे छापने से रोका हो, या जिससे संसद/विधानमंडल के विशेषाधिकार का हनन हो।
  • व्यावसायिक गोपनीयता (Trade Secrets) और बौद्धिक संपदा।
  • मंत्रिमंडल के कागजात (कैबिनेट नोट्स): फैसला होने और मामला पूरा होने के बाद ही ये दिए जाते हैं।
  • धारा 8(1)(j) - निजी जानकारी: 2005 के मूल कानून में ऐसी निजी जानकारी रोकी जा सकती थी जिसका सार्वजनिक काम से संबंध न हो, लेकिन बड़ा जनहित हो तो देनी पड़ती थी। DPDP Act 2023 की धारा 44(3) ने यह clause बदलकर सिर्फ "निजी जानकारी (personal information) से जुड़ी सूचना" कर दिया है; जनहित वाला हिस्सा और "जो सूचना संसद को देने से मना नहीं की जा सकती, वह नागरिक को भी मिलेगी" वाला proviso हट गया। यह बदलाव 13 नवंबर 2025 से लागू है; इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है (2026 तक कोई फैसला या रोक नहीं)।

धारा 8(2) अब भी कहती है कि अगर जनहित, नुकसान से बड़ा हो तो छूट वाली सूचना भी दी जा सकती है। धारा 24 के तहत दूसरी अनुसूची में लिखे खुफिया और सुरक्षा संगठनों पर यह कानून लागू नहीं होता, लेकिन भ्रष्टाचार और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों से जुड़ी सूचना उनसे भी मांगी जा सकती है।

अपील व्यवस्था और दंड प्रावधान (धारा 19 और 20)

कानून में नागरिक को समय पर सही जानकारी दिलाने के लिए दो स्तर की अपील का प्रावधान है:

1. प्रथम अपील (First Appeal)

यदि PIO समय पर सूचना न दे या आवेदक निर्णय से असंतुष्ट हो, तो वह 30 दिनों के भीतर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी (प्रथम अपीलीय अधिकारी - FAA) के समक्ष प्रथम अपील कर सकता है। इसका निपटारा 30 दिन में करना होता है; कारण लिखकर इसे ज्यादा से ज्यादा 45 दिन तक बढ़ाया जा सकता है।

2. द्वितीय अपील (Second Appeal)

प्रथम अपीलीय अधिकारी के फैसले के खिलाफ आवेदक 90 दिनों के भीतर केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) या राज्य सूचना आयोग (SIC) में द्वितीय अपील कर सकता है (धारा 19(3))। आयोग का फैसला मानना जरूरी है (धारा 19(7)); इसके खिलाफ सिर्फ हाई कोर्ट में writ याचिका लगाई जा सकती है।

3. दंड का प्रावधान (धारा 20)

यदि लोक सूचना अधिकारी ने बिना उचित कारण आवेदन लेने से मना किया, जानबूझकर देरी की या गलत जानकारी दी, तो सूचना आयोग उस पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है। जुर्माना लगाने से पहले PIO को अपनी बात रखने का मौका देना होता है। आयोग उसके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकता है।

केंद्रीय सूचना आयोग (CIC): संगठन और 2019 का संशोधन

अधिनियम की धारा 12 के तहत 12 अक्टूबर 2005 को केंद्रीय सूचना आयोग की स्थापना की गई।

1. संगठन और नियुक्ति

  • सदस्य संख्या: एक मुख्य सूचना आयुक्त (Chief Information Commissioner) और अधिकतम 10 सूचना आयुक्त होते हैं।
  • नियुक्ति समिति (धारा 12(3)): राष्ट्रपति 3 सदस्यों की समिति की सिफारिश पर नियुक्ति करते हैं:
    1. प्रधानमंत्री (समिति के अध्यक्ष)
    2. लोकसभा में विपक्ष के नेता
    3. प्रधानमंत्री से मनोनीत एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री
    राज्य में यही व्यवस्था है (धारा 15(3)): राज्यपाल नियुक्ति करते हैं, समिति में मुख्यमंत्री (अध्यक्ष), विधानसभा में विपक्ष के नेता और मुख्यमंत्री से मनोनीत एक कैबिनेट मंत्री होते हैं। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इसमें नहीं होते (RAS Pre 2024, Q36 में यही पूछा गया)।
  • योग्यता: विधि, विज्ञान, समाज सेवा, प्रबंधन, पत्रकारिता या प्रशासन का व्यापक ज्ञान रखने वाले प्रतिष्ठित व्यक्ति। वे संसद या विधानसभा के सदस्य नहीं होने चाहिए और न ही कोई लाभ का पद धारण कर सकते हैं।
  • प्रथम आयुक्त: भारत के पहले मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह थे। पहली महिला मुख्य सूचना आयुक्त दीपक संधू (2013) थीं।
  • 2026 तक की स्थिति: हीरालाल सामरिया का कार्यकाल 13 सितंबर 2025 को पूरा हुआ। इसके बाद राज कुमार गोयल (पूर्व IAS, पूर्व न्याय सचिव) ने 15 दिसंबर 2025 को मुख्य सूचना आयुक्त की शपथ ली। उसी दिन 8 नए सूचना आयुक्तों की शपथ से आयोग करीब 9 साल बाद पूरी संख्या (1 + 10) में आया।

2. आरटीआई (संशोधन) अधिनियम 2019 के मुख्य बिंदु

जुलाई 2019 में संसद ने RTI अधिनियम की धारा 13 (केंद्रीय आयोग), 16 (राज्य आयोग) और 27 (नियम बनाने की शक्ति) में संशोधन किया:

  • कार्यकाल में बदलाव: 2005 के मूल कानून में कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु (जो पहले हो) था (RAS Pre 2016, Q39 में यही पूछा गया था)। 2019 संशोधन ने 5 वर्ष की जगह 'केंद्र सरकार जो अवधि तय करे' लिख दिया; 65 वर्ष की आयु सीमा बनी रही। 24 अक्टूबर 2019 के नियमों में कार्यकाल 3 वर्ष तय हुआ।
  • वेतन और सेवा शर्तें: पहले मुख्य सूचना आयुक्त का वेतन मुख्य चुनाव आयुक्त के बराबर और सूचना आयुक्तों का चुनाव आयुक्तों के बराबर था। अब वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें केंद्र सरकार तय करती है। 2019 के नियमों में CIC का वेतन 2.5 लाख और सूचना आयुक्त का 2.25 लाख रुपये महीना रखा गया।
  • आलोचना: आलोचकों का मानना है कि कार्यकाल और वेतन केंद्र सरकार के हाथ में जाने से आयोग की स्वतंत्रता और स्वायत्तता पर विपरीत प्रभाव पड़ा है।

Table 1: RTI अधिनियम के तहत अपील का क्रम

अपील स्तर प्राधिकारी समय सीमा फीस व निर्णय
मूल आवेदन लोक सूचना अधिकारी (PIO) 30 दिन (जीवन-स्वतंत्रता पर 48 घंटे) 10 रुपये फीस (केंद्र); BPL को छूट; देरी होने पर सूचना मुफ्त
प्रथम अपील प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA - विभाग का वरिष्ठ अधिकारी) PIO का जवाब मिलने या समय पूरा होने के 30 दिन के भीतर केंद्र में कोई फीस नहीं; निपटारा 30 दिन (अधिकतम 45 दिन) में
द्वितीय अपील केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) / राज्य सूचना आयोग (SIC) प्रथम अपील के 90 दिनों के भीतर केंद्र में कोई फीस नहीं; आयोग का फैसला मानना जरूरी (धारा 19(7))

Table 2: 2005 मूल अधिनियम बनाम 2019 संशोधन

मापदंड RTI अधिनियम 2005 (मूल) RTI संशोधन अधिनियम 2019
CIC व ICs का कार्यकाल निश्चित 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु केंद्र सरकार नियम से तय करती है (2019 के नियम: 3 वर्ष; 65 वर्ष की सीमा बनी रही)
वेतन व भत्ते CIC = मुख्य चुनाव आयुक्त, IC = चुनाव आयुक्त के बराबर केंद्र सरकार तय करती है (बराबरी खत्म)
राज्य सूचना आयोग (SIC) राज्य मुख्य सूचना आयुक्त = चुनाव आयुक्त, राज्य सूचना आयुक्त = राज्य के मुख्य सचिव के बराबर वेतन राज्य आयुक्तों का कार्यकाल, वेतन व सेवा शर्तें भी केंद्र सरकार तय करती है
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महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • RTI कानून: लोकसभा 11 मई 2005, राज्यसभा 12 मई 2005, राष्ट्रपति की मंजूरी 15 जून 2005, पूरी तरह लागू 12 अक्टूबर 2005।
  • RTI कानून जम्मू-कश्मीर में 31 अक्टूबर 2019 से (अनुच्छेद 370 हटने के बाद) लागू है।
  • राजस्थान राज्य सूचना आयोग का गठन 18 अप्रैल 2006 को हुआ (RAS Pre 2016, Q53)। इसके पहले मुख्य सूचना आयुक्त एम. डी. कौरानी थे।
  • CIC में 1 मुख्य सूचना आयुक्त + अधिकतम 10 सूचना आयुक्त; 2026 तक CIC राज कुमार गोयल।
  • 2019 संशोधन: धारा 13, 16, 27 बदलीं; 2019 के नियमों में कार्यकाल 3 वर्ष।
  • DPDP Act 2023 की धारा 44(3) ने धारा 8(1)(j) बदली (13 नवंबर 2025 से लागू)।
  • यदि किसी मांगी गई सूचना में तृतीय पक्ष (Third Party) का हित जुड़ा है, तो धारा 11 के तहत उसे 5 दिन में नोटिस देकर 10 दिन में राय ली जाती है और कुल समय 40 दिन हो जाता है।

RAS Prelims MCQ

  1. सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 पूरे देश में किस तिथि से प्रभावी हुआ था?
    A) 15 जून 2005
    B) 15 अगस्त 2005
    C) 12 अक्टूबर 2005
    D) 26 जनवरी 2006
    उत्तर: C) 12 अक्टूबर 2005
    कारण: 15 जून 2005 को कानून बना और 12 अक्टूबर 2005 से यह पूर्ण रूप से लागू हुआ।
  2. यदि मांगी गई सूचना किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से संबंधित हो, तो कितने समय में देनी होगी?
    A) 24 घंटे
    B) 48 घंटे
    C) 7 दिन
    D) 30 दिन
    उत्तर: B) 48 घंटे
    कारण: धारा 7(1) के अनुसार जीवन और स्वतंत्रता के मामले में 48 घंटे की समय सीमा तय है।
  3. केंद्रीय सूचना आयोग के मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति समिति में कौन शामिल नहीं होता?
    A) प्रधानमंत्री
    B) लोकसभा में विपक्ष के नेता
    C) भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
    D) प्रधानमंत्री की ओर से मनोनीत एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री
    उत्तर: C) भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI)
    कारण: धारा 12(3) के अनुसार चयन समिति में PM, LoP और एक कैबिनेट मंत्री होते हैं।
  4. RTI संशोधन 2019 के बाद बने नियमों (2019) के अनुसार मुख्य सूचना आयुक्त का कार्यकाल कितना है?
    A) 5 वर्ष या 65 वर्ष
    B) 3 वर्ष या 65 वर्ष
    C) 4 वर्ष या 65 वर्ष
    D) 6 वर्ष या 62 वर्ष
    उत्तर: B) 3 वर्ष या 65 वर्ष
    कारण: संशोधन ने कार्यकाल तय करने का अधिकार केंद्र को दिया; 24 अक्टूबर 2019 के नियमों में 3 वर्ष रखा गया, 65 वर्ष की आयु सीमा कानून में बनी रही। (पुराने कानून में A सही था।)
  5. भारत के प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त कौन थे?
    A) सत्येंद्र नाथ टैगोर
    B) वजाहत हबीबुल्लाह
    C) ए. एन. तिवारी
    D) दीपक संधू
    उत्तर: B) वजाहत हबीबुल्लाह
    कारण: अक्टूबर 2005 में भारत के पहले मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्लाह बने थे।
  6. RTI कानून की धारा 20 के तहत दोषी PIO पर अधिकतम कितना जुर्माना लगाया जा सकता है?
    A) 5,000 रुपये
    B) 10,000 रुपये
    C) 25,000 रुपये
    D) 50,000 रुपये
    उत्तर: C) 25,000 रुपये
    कारण: धारा 20 में 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से अधिकतम 25,000 रुपये जुर्माने का उपबंध है।
  7. द्वितीय अपील कितने दिनों के भीतर सूचना आयोग में दायर की जा सकती है?
    A) 30 दिन
    B) 60 दिन
    C) 90 दिन
    D) 120 दिन
    उत्तर: C) 90 दिन
    कारण: धारा 19(3) के अनुसार प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्णय के 90 दिनों के भीतर द्वितीय अपील होती है।
  8. भारत में RTI आंदोलन की शुरुआत करने वाले संगठन 'मजदूर किसान शक्ति संगठन' (MKSS) का संबंध किस राज्य से है?
    A) बिहार
    B) राजस्थान
    C) मध्य प्रदेश
    D) महाराष्ट्र
    उत्तर: B) राजस्थान
    कारण: MKSS का काम राजसमंद जिले के देवडूंगरी से शुरू हुआ (संगठन 1990) और पहली जन सुनवाई 1994 में पाली के कोट किराना में हुई।
  9. RTI कानून की किस धारा में सूचना प्रकटीकरण से छूट (Exemptions) दी गई है?
    A) धारा 4
    B) धारा 6
    C) धारा 8
    D) धारा 12
    उत्तर: C) धारा 8
    कारण: धारा 8 में संप्रभुता, सुरक्षा, व्यावसायिक गोपनीयता आदि के आधार पर छूट दी गई है।
  10. राजस्थान राज्य सूचना आयोग के प्रथम मुख्य सूचना आयुक्त कौन थे?
    A) एम. डी. कौरानी
    B) टी. श्रीनिवासन
    C) सुरेश चौधरी
    D) डी. बी. गुप्ता
    उत्तर: A) एम. डी. कौरानी
    कारण: अप्रैल 2006 में राजस्थान राज्य सूचना आयोग के पहले मुख्य सूचना आयुक्त एम. डी. कौरानी बने।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 का महत्व बताइए।
    उत्तर: धारा 4 सरकारी विभागों के लिए 'स्वतः प्रकटीकरण' (Suo-Motu Disclosure) अनिवार्य बनाती है, जिससे नागरिकों को बिना आवेदन किए ही बुनियादी प्रशासनिक जानकारी सुलभ हो जाती है।
  2. RTI कानून के तहत 'तृतीय पक्ष' (Third Party) सूचना से क्या आशय है?
    उत्तर: ऐसी सूचना जो आवेदक और सरकार के अलावा किसी तीसरे व्यक्ति या संस्था से जुड़ी हो और जिसे उसने गोपनीय माना हो; धारा 11 के तहत PIO 5 दिन में उसे नोटिस देता है, वह 10 दिन में अपनी बात रखता है और फैसला 40 दिन में होता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. RTI (संशोधन) अधिनियम 2019 के मुख्य प्रावधानों और उसकी आलोचना के बिंदुओं पर प्रकाश डालिए।
    उत्तर: मुख्य प्रावधान:
    1. 5 वर्ष के निश्चित कार्यकाल को समाप्त कर केंद्र सरकार की अधिसूचना पर छोड़ दिया गया (नियमों में 3 वर्ष तय)।
    2. वेतन और सेवा शर्तों को चुनाव आयोग के बराबर रखने की वैधानिक गारंटी समाप्त कर दी गई।
    आलोचना:
    - इससे सूचना आयोग की स्वायत्तता और स्वतंत्रता कमजोर हुई है।
    - केंद्र सरकार के प्रभाव के कारण सत्ता प्रतिष्ठान से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएं हासिल करना कठिन होने की आशंका जताई गई है।
  2. पारदर्शिता और सुशासन की स्थापना में सूचना के अधिकार की भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा:
    - भूमिका: भ्रष्टाचार पर अंकुश, सरकारी धन के खर्च की जन-निगरानी, राशन वितरण व मनरेगा में फर्जीवाड़े का खुलासा, और नागरिकों का सशक्तिकरण।
    - चुनौतियां: सूचना आयोगों में रिक्त पदों के कारण लाखों अपीलों का लंबित होना, आरटीआई कार्यकर्ताओं पर हमले, धारा 8 के तहत छूट का दुरुपयोग, और सरकारी विभागों में रिकॉर्ड का खराब रख-रखाव।
    - सुझाव: आयोगों में समय पर नियुक्तियां, कार्यकर्ताओं की सुरक्षा, और डिजिटल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आरटीआई को बढ़ावा देना।

FAQs

Q1: क्या बीपीएल (BPL) परिवारों के आवेदकों को भी आरटीआई फीस देनी होती है?
नहीं, गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवन यापन करने वाले नागरिकों के लिए आवेदन फीस और सूचना प्रतिलिपि पूरी तरह निशुल्क है।

Q2: यदि तय 30 दिनों में सूचना न मिले तो क्या करें?
आवेदक विभाग के प्रथम अपीलीय अधिकारी (FAA) के समक्ष 30 दिनों के भीतर प्रथम अपील दायर कर सकता है और बाद में सारी सूचना निशुल्क पाने का हकदार होता है।

Q3: क्या राजनीतिक दल आरटीआई के दायरे में आते हैं?
केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने जून 2013 में 6 राष्ट्रीय दलों (INC, BJP, CPI, CPI(M), NCP, BSP) को 'लोक प्राधिकारी' माना था, लेकिन दलों ने यह आदेश नहीं माना। इन्हें RTI में लाने की ADR (2015) और अश्विनी उपाध्याय (2017) की याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं; 2026 तक कोई फैसला नहीं आया है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • RTI Act 2005: मंजूरी 15 जून 2005, लागू 12 अक्टूबर 2005; CIC भी 12 अक्टूबर 2005 को बना।
  • 48 घंटे (जीवन-स्वतंत्रता), 30 दिन (सामान्य), 35 दिन (APIO से), 40 दिन (तृतीय पक्ष)।
  • प्रथम अपील 30 दिन, द्वितीय अपील 90 दिन; जुर्माना 250 रुपये/दिन, अधिकतम 25,000 रुपये।
  • CIC चयन समिति: PM, लोकसभा में विपक्ष के नेता, PM से मनोनीत कैबिनेट मंत्री (CJI नहीं)।
  • राज्य आयोग की समिति: CM, विधानसभा में विपक्ष के नेता, CM से मनोनीत कैबिनेट मंत्री; नियुक्ति राज्यपाल करते हैं।
  • 2019 के नियम: कार्यकाल 3 वर्ष (65 वर्ष की आयु सीमा कायम); पहले 5 वर्ष या 65 वर्ष।
  • राजस्थान सूचना आयोग: 18 अप्रैल 2006, पहले मुख्य सूचना आयुक्त एम. डी. कौरानी।
  • MKSS: 1 मई 1990, देवडूंगरी (राजसमंद); पहली जन सुनवाई कोट किराना (पाली), 1994।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: RTI Act 2005 in Hindi: केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission - CIC) और सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 (RTI Act 2005) सरकार के काम में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने वाले सबसे मजबूत।
भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में RTI Act 2005 in Hindi: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) और RTI अधिनियम 2005: कार्य, शक्तियां और 2019 संशोधन एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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