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Supreme Court of India in Hindi: भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court): क्षेत्राधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन और जनहित याचिका

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Supreme Court of India in Hindi: भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court): क्षेत्राधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन और जनहित याचिका - संघ की कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका
  • • अवलोकन: Quick Answer: Supreme Court of India in Hindi: भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) देश की एकीकृत न्यायपालिका का शीर्ष न्यायालय और संविधान क...
Quick Answer: Supreme Court of India in Hindi: भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India) देश की एकीकृत न्यायपालिका का शीर्ष न्यायालय और संविधान का अंतिम व्याख्याकार है। संविधान के भाग 5 के अनुच्छेद 124 से 147 तक इसका वर्णन है। 2026 तक इसकी स्वीकृत संख्या 1 मुख्य न्यायाधीश और 37 अन्य न्यायाधीश (कुल 38) है। उच्चतम न्यायालय के पास मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction - अनु. 131), रिट क्षेत्राधिकार (अनु. 32), अपीलीय क्षेत्राधिकार (अनु. 132-136), सलाहकारी क्षेत्राधिकार (अनु. 143) और न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की व्यापक शक्तियां प्राप्त हैं।

उच्चतम न्यायालय का गठन, कोलेजियम और न्यायाधीशों की नियुक्ति

भारत में एकीकृत न्यायपालिका है, जिसके शीर्ष पर भारत का उच्चतम न्यायालय स्थित है। राज्यों में राजस्थान उच्च न्यायालय जैसे उच्च न्यायालय और उनके नीचे जिला व सत्र अदालतें (अधीनस्थ न्यायालय) हैं। अधीनस्थ अदालतों पर नियंत्रण उच्च न्यायालय का होता है (अनुच्छेद 235), जिला प्रशासन का नहीं। संविधान के भाग 5 में अनुच्छेद 124 से 147 तक इसका उल्लेख है।

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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्वीकृत संख्या

उच्चतम न्यायालय का उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ। इसने 1935 के अधिनियम वाले संघीय न्यायालय और प्रिवी काउंसिल का स्थान लिया।

  • आरंभिक संख्या: मूल संविधान में 1 मुख्य न्यायाधीश और 7 अन्य न्यायाधीश (कुल 8) थे।
  • संसद की शक्ति: अनुच्छेद 124(1) के अनुसार केवल संसद कानून से संख्या बढ़ा सकती है।
  • वर्तमान पद: Supreme Court (Number of Judges) Amendment Act 2026 से कुल 38 पद (1 CJI + 37 अन्य न्यायाधीश) स्वीकृत हैं; यह 16 मई 2026 के अध्यादेश की तारीख से लागू माना गया। इससे पहले 2019 के संशोधन से संख्या 34 (1 + 33) थी।

कोलेजियम व्यवस्था और न्यायिक नियुक्तियां (अनुच्छेद 124(2))

न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। यह व्यवस्था तीन वादों से बनी:

  • प्रथम वाद (1981): कार्यपालिका प्रधान रही; परामर्श का अर्थ सहमति नहीं माना गया।
  • द्वितीय वाद (1993): न्यायालय ने परामर्श को सहमति माना; CJI और 2 वरिष्ठ जजों का कोलेजियम बना।
  • तृतीय वाद (1998): कोलेजियम का विस्तार हुआ; शीर्ष अदालत में नियुक्ति के लिए CJI और 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों की बहु-सदस्यीय सलाह अनिवार्य बनी।
  • NJAC निरस्तीकरण (2015): 99वें संशोधन से बने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को शीर्ष अदालत ने रद्द कर कोलेजियम बहाल रखा।

योग्यताएं और कार्यकाल (अनुच्छेद 124(3) व 124(4))

  • योग्यताएं: भारत का नागरिक हो। किसी उच्च न्यायालय में 5 वर्ष जज रहा हो, या 10 वर्ष वकालत की हो, या राष्ट्रपति की दृष्टि में पारंगत विधिवेत्ता हो। कोई न्यूनतम आयु तय नहीं है।
  • कार्यकाल: 65 वर्ष की आयु तक। त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंपते हैं।
  • हटाने की महाभियोग रीति: केवल सिद्ध कदाचार या असमर्थता पर संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव पर राष्ट्रपति हटाते हैं। जांच 1968 के अधिनियम से 3 सदस्यीय समिति करती है।

स्वतंत्रता के संवैधानिक उपाय

  • वेतन व भत्ते (अनुच्छेद 125): वेतन संसद कानून से तय करती है; ये भारत की संचित निधि पर भारित हैं (अनु. 112(3)(d)), इसलिए संसद में इन पर मतदान नहीं होता।
  • आचरण पर बहस पर रोक (अनुच्छेद 121): संसद में न्यायाधीश के आचरण पर चर्चा नहीं हो सकती (महाभियोग प्रस्ताव को छोड़कर)। राज्य विधानमंडल के लिए यही रोक अनुच्छेद 211 में है।
  • वकालत पर रोक (अनुच्छेद 124(7)): सेवानिवृत्ति के बाद भारत में कहीं वकालत नहीं कर सकते।
  • अवमानना पर दंड (अनुच्छेद 129): अदालत अपनी अवमानना पर दंड दे सकती है।

उच्चतम न्यायालय का क्षेत्राधिकार और शक्तियां

उच्चतम न्यायालय का कार्यक्षेत्र बहुत बड़ा है। मूल अधिकारों के साथ आम कानूनी अधिकारों (जैसे RTI) की समझ के लिए देखें: कानूनी अधिकार (Legal Rights)। इसके मुख्य क्षेत्राधिकार ये हैं:

1. मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction - अनुच्छेद 131)

यह अनन्य अधिकार है, जिसमें मामले सीधे उच्चतम न्यायालय में ही आते हैं:

  • केंद्र और एक या अधिक राज्यों का विवाद।
  • एक तरफ केंद्र व राज्य और दूसरी तरफ अन्य राज्यों का विवाद।
  • दो या अधिक राज्यों के आपसी कानूनी विवाद।
  • अपवाद: अंतर-राज्यीय जल विवाद (अनुच्छेद 262), वित्त आयोग के संदर्भ, संविधान पूर्व की संधियां इसमें शामिल नहीं हैं।

2. रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 32)

मूल अधिकारों के हनन पर नागरिक सीधे यहां याचिका दायर कर सकते हैं। न्यायालय 5 रिटें निकालता है: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, और अधिकार पृच्छा।

उच्च न्यायालय से तुलना: अनुच्छेद 32 केवल मूल अधिकारों पर लागू है, जबकि उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 में कानूनी अधिकारों पर भी रिट निकालता है। अनुच्छेद 32 स्वयं मौलिक अधिकार होने से सर्वोच्च अदालत राहत देने से मना नहीं कर सकती।

3. अपीलीय क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 132-136)

  • संवैधानिक अपील (अनुच्छेद 132): संविधान की व्याख्या का सारवान प्रश्न होने पर।
  • दीवानी अपील (अनुच्छेद 133): व्यापक महत्व का कानूनी प्रश्न होने पर, उच्च न्यायालय के प्रमाणपत्र से।
  • आपराधिक अपील (अनुच्छेद 134): जब उच्च न्यायालय ने अपील में बरी करने का फैसला पलटकर मृत्युदंड दिया हो, या निचली अदालत से केस अपने पास लेकर मृत्युदंड दिया हो, या मामला अपील योग्य होने का प्रमाणपत्र दिया हो।
  • विशेष अनुमति याचिका (SLP - अनुच्छेद 136): किसी भी अदालत या ट्रिब्यूनल (सैनिक अदालत छोड़कर) के फैसले के विरुद्ध विशेष अपील की विवेकाधीन शक्ति।

4. सलाहकारी क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 143)

राष्ट्रपति दो प्रकार के मामलों में राय मांग सकते हैं:

  • सार्वजनिक महत्व के कानूनी प्रश्न पर (अदालत राय देने से मना कर सकती है, जैसे 1993 के अयोध्या संदर्भ को अदालत ने 1994 में बिना जवाब लौटा दिया)।
  • संविधान पूर्व की संधि या समझौते पर (राय देना अनिवार्य है)।
  • यह राय केवल सलाह है, राष्ट्रपति इसे मानने के लिए बाध्य नहीं हैं।

5. अन्य प्रमुख शक्तियां

  • अभिलेख न्यायालय (अनुच्छेद 129): निर्णयों का साक्ष्य मूल्य होता है और अवमानना पर दंड देने का हक है। Contempt of Courts Act 1971 (धारा 12) में 6 माह तक की साधारण कैद या ₹2,000 तक जुर्माना या दोनों तय हैं।
  • पूर्ण न्याय (अनुच्छेद 142): किसी लंबित मामले में पूर्ण न्याय के लिए आदेश जारी करने की असाधारण शक्ति।
  • पुनर्विलोकन (अनुच्छेद 137): अपने फैसलों और आदेशों पर पुनर्विचार का अधिकार।
  • बाध्यकारी विधि (अनुच्छेद 141): सर्वोच्च न्यायालय की घोषित विधि देश की सभी अदालतों पर बाध्यकारी है।

न्यायिक पुनरावलोकन, जनहित याचिका और न्यायिक सक्रियता

न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review)

विधायिका के कानूनों और कार्यपालिका के आदेशों की संवैधानिकता जांचने की शक्ति। असंवैधानिक होने पर अदालत उन्हें शून्य घोषित कर देती है।

  • उद्भव: यह विचार अमेरिका से आया, जहां 1803 में मार्बरी बनाम मैडिसन वाद में मुख्य न्यायाधीश जॉन मार्शल ने इसे प्रतिपादित किया।
  • संवैधानिक आधार: अनुच्छेद 13(2), 32, 136, 142 और 226 इसके मुख्य आधार हैं।
  • मूल स्वरूप (Basic Structure): केशवानंद भारती वाद (1973) ने मूल स्वरूप (Basic Structure) का सिद्धांत दिया। मिनर्वा मिल्स (1980) और एल. चंद्रकुमार (1997) वादों में न्यायिक पुनरावलोकन को मूल स्वरूप का हिस्सा माना गया।

जनहित याचिका (PIL - Public Interest Litigation)

परंपरागत वाद कारण (Locus Standi) के नियम को ढील देकर जनहित याचिका शुरू हुई, ताकि कोई भी जागरूक नागरिक गरीबों और शोषितों के हक में अदालत जा सके।

  • जनक: न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर ने इसकी नींव रखी।
  • प्रमुख वाद: हुसनआरा खातून वाद (1979 - विचाराधीन कैदी), सुनील बत्रा वाद (1980 - जेल सुधार), एस.पी. गुप्ता वाद (1981), और एम.सी. मेहता वाद (पर्यावरण संरक्षण)।

न्यायिक सक्रियता और न्यायिक अतिक्रमण

  • न्यायिक सक्रियता: कार्यपालिका या विधायिका के निष्क्रिय होने पर न्यायपालिका नागरिकों के हक में आगे बढ़कर कदम उठाती है।
  • न्यायिक अतिक्रमण: जब अदालतें नीति-निर्माण और प्रशासन के दैनिक काम में दखल देती हैं, तो शक्ति पृथक्करण का संतुलन बिगड़ता है। न्यायपालिका को आत्मसंयम का पालन करना आवश्यक है।

तुलनात्मक तालिकाएं और संवैधानिक उपबंध

तालिका 1: उच्चतम न्यायालय के मुख्य संवैधानिक अनुच्छेद

अनुच्छेद विषय मुख्य कानूनी नियम
अनुच्छेद 124 स्थापना व गठन गठन, संख्या, नियुक्ति व पदमुक्ति नियम।
अनुच्छेद 125 वेतन व भत्ते वेतन संचित निधि पर भारित, सेवा शर्तों की सुरक्षा।
अनुच्छेद 126 कार्यकारी CJI CJI अनुपस्थिति पर कार्यकारी CJI नियुक्ति।
अनुच्छेद 127 तदर्थ न्यायाधीश कोरम अभाव में तदर्थ जज की नियुक्ति।
अनुच्छेद 129 अभिलेख न्यायालय निर्णयों का साक्ष्य मूल्य व अवमानना दंड शक्ति।
अनुच्छेद 131 मूल क्षेत्राधिकार केंद्र-राज्य व अंतर-राज्यीय विवादों की अनन्य सुनवाई।
अनुच्छेद 132-134 अपीलीय अधिकार संवैधानिक, दीवानी व आपराधिक मामलों में अपील।
अनुच्छेद 136 विशेष अनुमति (SLP) किसी अदालत या अधिकरण के आदेश पर विशेष अपील।
अनुच्छेद 137 पुनर्विलोकन अपने पूर्व निर्णयों व आदेशों पर पुनर्विचार।
अनुच्छेद 141 बाध्यकारी विधि घोषित विधि सभी भारतीय अदालतों पर लागू।
अनुच्छेद 142 पूर्ण न्याय लंबित मामले में पूर्ण न्याय के लिए आदेश शक्ति।
अनुच्छेद 143 सलाहकारी अधिकार राष्ट्रपति को कानूनी प्रश्न पर परामर्श।

तालिका 2: रिट अधिकार - उच्चतम न्यायालय (अनु. 32) बनाम उच्च न्यायालय (अनु. 226)

तुलना का बिंदु उच्चतम न्यायालय (अनुच्छेद 32) उच्च न्यायालय (अनुच्छेद 226)
विषय क्षेत्र केवल मूल अधिकारों के हनन पर लागू। मूल अधिकारों के साथ अन्य कानूनी अधिकारों पर भी लागू।
क्षेत्रीय विस्तार संपूर्ण भारत के राज्यक्षेत्र पर लागू। अपने राज्य के राज्यक्षेत्र तक ही लागू।
उपचार का स्वरूप अनुच्छेद 32 स्वयं मौलिक अधिकार है। अनुच्छेद 226 एक विवेकाधीन उपचार है।
दायरा विधिक अधिकारों के मामले में संकरा। विधिक अधिकारों के मामले में अधिक विस्तृत।
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महत्वपूर्ण तथ्य

  • उद्घाटन: 28 जनवरी 1950 को संसद भवन में हुआ।
  • वर्तमान पद: 38 न्यायाधीश (1 CJI + 37 अन्य, 2026 का संशोधन अधिनियम; 2019 से मई 2026 तक 34 थे)।
  • कोलेजियम: CJI और 4 वरिष्ठतम न्यायाधीशों का निकाय।
  • सेवानिवृत्ति आयु: 65 वर्ष की आयु।
  • हटाने के आधार: सिद्ध कदाचार और असमर्थता पर विशेष बहुमत।
  • मूल क्षेत्राधिकार: अनुच्छेद 131 में अनन्य संघीय विवाद।
  • अभिलेख न्यायालय: अनुच्छेद 129 में साक्ष्य मूल्य और अवमानना दंड।
  • पूर्ण न्याय: अनुच्छेद 142 में अंतर्निहित शक्ति।
  • PIL के प्रणेता: न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और वी.आर. कृष्ण अय्यर।
  • न्यायिक पुनरावलोकन: अमेरिका से प्रेरित, मूल स्वरूप का भाग।

RAS Prelims MCQ: महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न

  1. भारत के उच्चतम न्यायालय का उद्घाटन किस दिन हुआ था?
    A) 26 जनवरी 1950
    B) 28 जनवरी 1950
    C) 15 अगस्त 1947
    D) 26 नवंबर 1949
    उत्तर: B) 28 जनवरी 1950
    कारण: 28 जनवरी 1950 को संघीय न्यायालय के स्थान पर उद्घाटन हुआ।
  2. 2026 तक उच्चतम न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर कुल कितने स्वीकृत पद हैं?
    A) 31
    B) 34
    C) 37
    D) 38
    उत्तर: D) 38
    कारण: 2026 के संशोधन अधिनियम (16 मई 2026 से लागू) से 1 CJI व 37 अन्य न्यायाधीश स्वीकृत हैं; 2019 से मई 2026 तक यह 34 थी।
  3. उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश नियुक्ति के कोलेजियम में CJI के अलावा कितने वरिष्ठ जज होते हैं?
    A) 2
    B) 3
    C) 4
    D) 5
    उत्तर: C) 4
    कारण: 1998 के तीसरे वाद से CJI और 4 वरिष्ठतम जज तय हुए।
  4. उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश बनने के लिए इनमें से कौन सी शर्त आवश्यक नहीं है?
    A) भारत का नागरिक होना
    B) उच्च न्यायालय में 5 वर्ष न्यायाधीश रहना
    C) उच्च न्यायालय में 10 वर्ष वकालत करना
    D) न्यूनतम 35 वर्ष की आयु होना
    उत्तर: D) न्यूनतम 35 वर्ष की आयु होना
    कारण: संविधान में कोई न्यूनतम आयु सीमा तय नहीं है।
  5. केंद्र और राज्यों के आपसी कानूनी विवाद उच्चतम न्यायालय के किस क्षेत्राधिकार में आते हैं?
    A) अपीलीय क्षेत्राधिकार
    B) मूल क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 131)
    C) सलाहकारी क्षेत्राधिकार
    D) रिट क्षेत्राधिकार
    उत्तर: B) मूल क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 131)
    कारण: अनुच्छेद 131 में संघीय विवाद केवल शीर्ष अदालत सुनती है।
  6. राष्ट्रपति किस अनुच्छेद के तहत उच्चतम न्यायालय से कानूनी विषय पर सलाह मांग सकते हैं?
    A) अनुच्छेद 137
    B) अनुच्छेद 141
    C) अनुच्छेद 142
    D) अनुच्छेद 143
    उत्तर: D) अनुच्छेद 143
    कारण: अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को विधिक प्रश्न पर परामर्श मांगने की शक्ति देता है।
  7. अनुच्छेद 136 के तहत विशेष अनुमति याचिका (SLP) किस पर लागू नहीं होती?
    A) उच्च न्यायालय
    B) अधिकरण
    C) सैन्य अदालत
    D) जिला अदालत
    उत्तर: C) सैन्य अदालत
    कारण: अनुच्छेद 136(2) से सशस्त्र बलों की अदालतें बाहर हैं।
  8. 'पूर्ण न्याय' करने की अंतर्निहित शक्ति उच्चतम न्यायालय को किस अनुच्छेद में प्राप्त है?
    A) अनुच्छेद 137
    B) अनुच्छेद 141
    C) अनुच्छेद 142
    D) अनुच्छेद 144
    उत्तर: C) अनुच्छेद 142
    कारण: अनुच्छेद 142 अदालत को पूर्ण न्याय के लिए आदेश जारी करने की शक्ति देता है।
  9. भारत में जनहित याचिका (PIL) का जनक किन्हें माना जाता है?
    A) न्यायमूर्ति एच.जे. कानिया
    B) न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती
    C) न्यायमूर्ति पतंजलि शास्त्री
    D) न्यायमूर्ति मेहर चंद महाजन
    उत्तर: B) न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती
    कारण: न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और वी.आर. कृष्ण अय्यर ने PIL शुरू की।
  10. अभिलेख न्यायालय के रूप में उच्चतम न्यायालय की शक्तियां किस अनुच्छेद में हैं?
    A) अनुच्छेद 124
    B) अनुच्छेद 126
    C) अनुच्छेद 129
    D) अनुच्छेद 131
    उत्तर: C) अनुच्छेद 129
    कारण: अनुच्छेद 129 न्यायालय को अभिलेख न्यायालय बनाता है और अवमानना पर दंड का अधिकार देता है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–5 marks)

  1. अभिलेख न्यायालय (अनुच्छेद 129) से क्या आशय है? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: इसके तहत उच्चतम न्यायालय के फैसलों का साक्ष्य मूल्य सुरक्षित रहता है और अदालत को अवमानना पर दंड देने का अधिकार मिलता है।
  2. विशेष अनुमति याचिका (अनुच्छेद 136) का महत्व बताइए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: यह विवेकाधीन शक्ति है, जिससे अदालत सैन्य अदालत को छोड़कर देश की किसी अदालत के आदेश पर विशेष अपील स्वीकार कर सकती है।
  3. सर्वोच्च न्यायालय के परामर्श क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 143) की दो श्रेणियों को स्पष्ट कीजिए। (5 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - श्रेणी 1: सार्वजनिक विधि प्रश्न पर राय मांगना (राय देने से इनकार संभव, जैसे 1993 का अयोध्या संदर्भ, 1994 में लौटाया)।
    - श्रेणी 2: संविधान पूर्व संधियों पर राय मांगना (राय देना बाध्यकारी)।
    - राय केवल सलाहकारी है, राष्ट्रपति पर बाध्यकारी नहीं।
  4. अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के रिट अधिकार में क्या अंतर है? (5 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - अनुच्छेद 32 केवल मूल अधिकारों पर है; अनुच्छेद 226 कानूनी अधिकारों पर भी लागू होता है।
    - अनुच्छेद 32 पूरे देश पर है; अनुच्छेद 226 अपने राज्य क्षेत्र तक रहता है।
    - अनुच्छेद 32 स्वयं मूल अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 226 विवेकाधीन उपचार है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. भारत में न्यायिक पुनरावलोकन के आधार, सीमाएं और न्यायिक सक्रियता के प्रभाव का मूल्यांकन कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - आधार: अनुच्छेद 13, 32, 136, 142, 226; मूल स्वरूप का अंग (केशवानंद 1973 का सिद्धांत, मिनर्वा मिल्स 1980, एल. चंद्रकुमार 1997)।
    - कार्यशैली: केंद्र व राज्य के कानूनों की वैधता जांचना, असंवैधानिक को शून्य करना।
    - सक्रियता का प्रभाव: PIL से कैदियों के अधिकार, पर्यावरण संरक्षण व जनहित की रक्षा हुई।
    - सीमाएं: नीतिगत मामलों में दखल से शक्ति पृथक्करण प्रभावित होता है। न्यायिक अतिक्रमण रोकने के लिए आत्मसंयम जरूरी है।
  2. उच्चतम न्यायालय के गठन, कोलेजियम व्यवस्था के विकास और स्वतंत्रता के उपायों का विश्लेषण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - गठन व पद: 1950 में 8 पद; 2019 में 34 और 2026 के संशोधन अधिनियम से कुल 38 पद (1 CJI + 37 जज)।
    - कोलेजियम विकास: प्रथम वाद (1981), द्वितीय वाद (1993 - सहमति), तृतीय वाद (1998 - CJI + 4 वरिष्ठ जज)। 2015 में NJAC निरस्त हुआ।
    - स्वतंत्रता उपाय: संचित निधि पर वेतन (अनु. 125), आचरण चर्चा पर रोक (अनु. 121), वकालत पर रोक (अनु. 124(7)), और महाभियोग रीति (अनु. 124(4))।

FAQs

उच्चतम न्यायालय में कुल कितने न्यायाधीश हैं और संख्या कौन बढ़ा सकता है?

2026 तक स्वीकृत संख्या 38 (1 मुख्य न्यायाधीश और 37 अन्य न्यायाधीश) है। अनुच्छेद 124(1) के तहत यह संख्या बढ़ाने की शक्ति केवल संसद के पास है।

कोलेजियम में कौन शामिल होते हैं?

उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम में भारत के मुख्य न्यायाधीश और 4 वरिष्ठतम न्यायाधीश शामिल होते हैं।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश की सेवानिवृत्ति आयु क्या है?

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं।

अनुच्छेद 142 क्या है?

अनुच्छेद 142 के तहत उच्चतम न्यायालय को किसी भी लंबित मामले में पूर्ण न्याय करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की विशेष शक्ति मिलती है।

भारत में जनहित याचिका की शुरुआत किसने की?

भारत में जनहित याचिका की शुरुआत 1970 व 1980 के दशक में न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर ने की।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • उद्घाटन: 28 जनवरी 1950; अनुच्छेद 124-147 (भाग 5)।
  • स्वीकृत संख्या 2026 तक: 38 (1 CJI + 37), 2026 का संशोधन अधिनियम; 1950 में 8 थी।
  • कोलेजियम: CJI + 4 वरिष्ठतम जज (तीसरा जज वाद 1998); NJAC 2015 में रद्द।
  • मूल क्षेत्राधिकार: अनु. 131; रिट: अनु. 32; SLP: अनु. 136; सलाह: अनु. 143।
  • अनु. 129 अभिलेख न्यायालय; अनु. 141 घोषित विधि सब अदालतों पर बाध्यकारी; अनु. 142 पूर्ण न्याय।
  • सेवानिवृत्ति 65 वर्ष; हटाने की जांच Judges (Inquiry) Act 1968 के तहत 3 सदस्यीय समिति।
  • PIL के प्रणेता: न्यायमूर्ति पी.एन. भगवती और वी.आर. कृष्ण अय्यर।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Supreme Court of India in Hindi: भारत।
भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में Supreme Court of India in Hindi: भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court): क्षेत्राधिकार, न्यायिक पुनरावलोकन और जनहित याचिका एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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