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राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court): स्थापना, क्षेत्राधिकार और न्यायाधीश

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान की राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court): स्थापना, क्षेत्राधिकार और न्यायाधीश - RAJASTHAN HIGH COURT
  • • अवलोकन: Quick Answer: राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court): स्थापना, क्षेत्राधिकार और न्यायाधीश से जुड़े मुख्य संवैधानिक नियम भारतीय संविधान के भाग 6 म...
Quick Answer: राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court): स्थापना, क्षेत्राधिकार और न्यायाधीश से जुड़े मुख्य संवैधानिक नियम भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 214 से 231 तक वर्णित हैं। राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय ने किया। इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कमल कांत वर्मा बने। पी. सत्यनारायण राव समिति (रिपोर्ट 1958) की सिफारिश पर मुख्य पीठ जोधपुर में ही रखी गई और 1958 में जयपुर पीठ समाप्त की गई; 31 जनवरी 1977 से जयपुर में स्थायी पीठ फिर कार्यरत है। 2025 तक राजस्थान उच्च न्यायालय में कुल 50 स्वीकृत पद (38 स्थायी + 12 अपर, मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर) हैं। अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार मूल अधिकारों के साथ अन्य कानूनी अधिकारों पर भी लागू होता है, जो सर्वोच्च न्यायालय के अनुच्छेद 32 से अधिक व्यापक है।
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राजस्थान उच्च न्यायालय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और स्थापना (1949 से 1977)

वर्ष 1949 से पहले जोधपुर, जयपुर, बीकानेर, उदयपुर और कोटा जैसी रियासतों में स्वतंत्र अदालतें थीं। राजस्थान संघ बनने पर पूरे राज्य के लिए एक समान उच्च न्यायालय स्थापित करने का निर्णय हुआ।

राजस्थान में सामंती दौर से लेकर जनता के अधिकारों और न्यायिक चेतना के विकास को जानने के लिए पढ़ें: Public Awakening and Freedom Struggle in Rajasthan।

1. राजस्थान उच्च न्यायालय अध्यादेश 1949 और उद्घाटन

  • अध्यादेश: 1949 में राजस्थान उच्च न्यायालय अध्यादेश लागू हुआ।
  • उद्घाटन: 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में राजप्रमुख सवाई मानसिंह द्वितीय ने उच्च न्यायालय का उद्घाटन किया।
  • प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति कमल कांत वर्मा पहले मुख्य न्यायाधीश बने। उनके साथ 11 न्यायाधीशों ने शपथ ली।
  • प्रारंभिक पीठें: मुख्य पीठ जोधपुर बनी। 1950 में बीकानेर, कोटा और उदयपुर पीठें बंद की गईं।

2. सत्यनारायण राव समिति (1958) और जयपुर पीठ

  • सत्यनारायण राव समिति (1957-58): जुलाई 1957 में बनी इस समिति ने 26 फरवरी 1958 की रिपोर्ट में राजधानी जयपुर, मुख्य पीठ जोधपुर रखने और जयपुर पीठ समाप्त करने की सिफारिश की।
  • जयपुर पीठ समाप्ति: सिफारिश पर सरकार ने 1958 में जयपुर पीठ समाप्त कर न्यायिक कार्य जोधपुर मुख्य पीठ को सौंपा।
  • जयपुर पीठ बहाली (31 जनवरी 1977): राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा 51(2) के तहत राष्ट्रपति के आदेश (8 दिसंबर 1976) से 31 जनवरी 1977 को जयपुर में स्थायी पीठ फिर शुरू हुई।

संवैधानिक उपबंध और राजस्थान उच्च न्यायालय का संगठन (अनुच्छेद 214-224)

संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 214 से 231 तक उच्च न्यायालय के गठन और अधिकारों का उल्लेख है।

1. उच्च न्यायालय गठन और न्यायाधीश संख्या (अनुच्छेद 214 व 216)

  • अनुच्छेद 214: प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय होगा। संसद साझा उच्च न्यायालय भी बना सकती है (अनुच्छेद 231)।
  • अनुच्छेद 216: उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रपति की ओर से नियुक्त अन्य न्यायाधीश होंगे।
  • स्वीकृत संख्या: राजस्थान उच्च न्यायालय में कुल 50 पद स्वीकृत हैं (मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर; 38 स्थायी + 12 अपर, 2025 तक)।

2. नियुक्ति, योग्यता और कार्यकाल (अनुच्छेद 217)

  • नियुक्ति: न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है। इसके लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश (कोलेजियम), राज्यपाल और उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श होता है।
  • योग्यता: भारत का नागरिक हो। 10 वर्ष तक न्यायिक पद पर रहा हो, या उच्च न्यायालय में 10 वर्ष वकालत की हो।
  • कार्यकाल: न्यायाधीश 62 वर्ष आयु तक पद पर रहते हैं। (15वें संशोधन 1963 से पहले सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष थी)।
  • हटाना: न्यायाधीश राष्ट्रपति को त्यागपत्र दे सकता है। संसद में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होने पर ही राष्ट्रपति हटा सकता है।

3. शपथ, वेतन और स्थानांतरण (अनुच्छेद 219, 221 व 222)

  • शपथ (अनुच्छेद 219): पद संभालने से पहले न्यायाधीश राज्यपाल या उसके प्रतिनिधि के सामने शपथ लेता है।
  • वेतन व पेंशन (अनुच्छेद 221): वेतन राज्य संचित निधि पर भारित है, पेंशन भारत की संचित निधि से मिलती है।
  • स्थानांतरण (अनुच्छेद 222): राष्ट्रपति भारत के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से न्यायाधीश का स्थानांतरण दूसरे उच्च न्यायालय में कर सकता है।
  • कार्यकारी व अपर न्यायाधीश (अनुच्छेद 223 व 224): मुख्य न्यायाधीश पद रिक्त होने पर कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश और कार्यभार पर 2 वर्ष के लिए अपर न्यायाधीश नियुक्त होते हैं।

राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court): स्थापना, क्षेत्राधिकार और न्यायाधीश

राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court): स्थापना, क्षेत्राधिकार और न्यायाधीश के विशेषाधिकार राज्य की जनता को त्वरित न्याय दिलाने का मुख्य संबल हैं:

1. प्रारंभिक और अपीलीय क्षेत्राधिकार

  • प्रारंभिक क्षेत्राधिकार: चुनाव विवाद, मूल अधिकार हनन, वसीयत, तलाक और अवमानना के मामले सीधे उच्च न्यायालय में सुने जाते हैं।
  • अपीलीय क्षेत्राधिकार: दीवानी मामलों पर अपील उच्च न्यायालय सुनता है। सत्र न्यायालय से 7 वर्ष से अधिक कारावास की सजा मिलने पर अपील उच्च न्यायालय में होती है। फांसी की सजा पर उच्च न्यायालय की संपुष्टि जरूरी है।

2. रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 226)

  • पांच रिटें: उच्च न्यायालय पांच रिटें जारी कर सकता है: बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण और अधिकार पृच्छा।
  • अनुच्छेद 32 से व्यापक: सर्वोच्च न्यायालय अनुच्छेद 32 में केवल मूल अधिकारों पर रिट निकालता है, जबकि उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 में मूल अधिकारों के साथ अन्य कानूनी अधिकारों पर भी रिट जारी कर सकता है।

विधिक अधिकारों, उपभोक्ता विवादों और विभिन्न मंचों पर नागरिकों के अधिकारों के संरक्षण के नियमों को समझने के लिए देखें: Consumer Protection COPRA।

3. अधीक्षण और अभिलेख संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 215 व 227)

  • अधीक्षण (अनुच्छेद 227): उच्च न्यायालय को राज्य की अधीनस्थ अदालतों और ट्रिब्यूनलों पर प्रशासनिक व न्यायिक अधीक्षण का अधिकार है (सैन्य अदालतें बाहर हैं)।
  • अभिलेख न्यायालय (अनुच्छेद 215): उच्च न्यायालय के फैसलों का साक्ष्य मूल्य होता है और इन्हें नजीर माना जाता है। इसे अवमानना पर दंड देने का पूरा हक है।
  • न्यायिक समीक्षा: अनुच्छेद 13 और 226 में उच्च न्यायालय संविधान से असंगत किसी कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है।

अधीनस्थ न्यायपालिका का स्वरूप और नियंत्रण (अनुच्छेद 233-237)

संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 233 से 237 तक अधीनस्थ न्यायालयों के नियम हैं।

1. जिला न्यायाधीश और अन्य न्यायिक पद (अनुच्छेद 233 व 234)

  • जिला न्यायाधीश नियुक्ति (अनुच्छेद 233): जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति और पदोन्नति राज्यपाल उच्च न्यायालय के परामर्श से करता है। सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम 7 वर्ष का वकालत अनुभव चाहिए।
  • अन्य न्यायिक पद (अनुच्छेद 234): सिविल जज और न्यायिक मजिस्ट्रेट पदों पर भर्ती राज्यपाल, RPSC और उच्च न्यायालय के परामर्श से बने नियमों से करता है।
  • उच्च न्यायालय नियंत्रण (अनुच्छेद 235): अधीनस्थ न्यायालयों के पदस्थापन, पदोन्नति, स्थानांतरण, अवकाश और अनुशासन पर पूरा प्रशासनिक नियंत्रण उच्च न्यायालय के पास होता है।

2. जिला स्तर पर अदालतों का क्रम

  • जिला व सत्र न्यायाधीश: जिले का सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी होता है। दीवानी में जिला न्यायाधीश और आपराधिक में सत्र न्यायाधीश कहते हैं। फांसी की सजा पर अमल उच्च न्यायालय की संपुष्टि के बाद ही संभव है।
  • अन्य स्तर: दीवानी में वरिष्ठ व कनिष्ठ सिविल जज और आपराधिक में CJM व JMFC कार्य करते हैं।
  • ग्राम न्यायालय: ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 (2 अक्टूबर 2009 से लागू) के तहत राज्य में ग्राम न्यायालय स्थापित किए गए हैं।

तालिका 1: राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद

अनुच्छेद विषय मुख्य कानूनी प्रावधान
अनुच्छेद 214 उच्च न्यायालय गठन प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की स्थापना।
अनुच्छेद 215 अभिलेख न्यायालय फैसलों का साक्ष्य मूल्य और अवमानना पर दंड।
अनुच्छेद 216 न्यायालय संरचना राष्ट्रपति की ओर से न्यायाधीश पदों की स्वीकृति।
अनुच्छेद 217 न्यायाधीश नियुक्ति राष्ट्रपति की ओर से नियुक्ति, 62 वर्ष सेवानिवृत्ति।
अनुच्छेद 219 शपथ ग्रहण राज्यपाल के सामने पद की शपथ।
अनुच्छेद 221 वेतन और भत्ते वेतन राज्य संचित निधि, पेंशन भारत संचित निधि।
अनुच्छेद 226 रिट क्षेत्राधिकार मूल व विधिक अधिकारों के लिए 5 रिटें।
अनुच्छेद 227 अधीक्षण शक्ति अधीनस्थ अदालतों पर प्रशासनिक व न्यायिक नियंत्रण।
अनुच्छेद 233 जिला न्यायाधीश नियुक्ति राज्यपाल की ओर से उच्च न्यायालय परामर्श से नियुक्ति।
अनुच्छेद 235 अधीनस्थ अदालत नियंत्रण निचली अदालतों के प्रशासनिक मामलों पर नियंत्रण।

तालिका 2: राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य ऐतिहासिक मील के पत्थर

वर्ष / दिनांक ऐतिहासिक घटना महत्वपूर्ण तथ्य
29 अगस्त 1949 उच्च न्यायालय उद्घाटन जोधपुर में उद्घाटन, कमल कांत वर्मा प्रथम मुख्य न्यायाधीश बने।
1950 अस्थायी पीठ समाप्ति उदयपुर, कोटा, बीकानेर पीठें बंद; जोधपुर व जयपुर कार्यरत रहीं।
1958 सत्यनारायण राव समिति रिपोर्ट (26 फरवरी 1958) पर जयपुर पीठ समाप्त; मुख्य पीठ जोधपुर में ही रही।
31 जनवरी 1977 जयपुर पीठ बहाली धारा 51(2) में जयपुर में स्थायी पीठ फिर शुरू हुई।
2 अक्टूबर 2009 ग्राम न्यायालय अधिनियम लागू ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 लागू हुआ, जिसके तहत राज्य में ग्राम न्यायालय बने।
2025 तक 50 स्वीकृत पद मुख्य पीठ जोधपुर और स्थायी पीठ जयपुर, कुल 50 पद।
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महत्वपूर्ण तथ्य: त्वरित रिविजन (Quick Revision)

  • स्थापना अध्यादेश: राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थापना अध्यादेश 1949 से हुई।
  • उद्घाटन तिथि व स्थान: औपचारिक उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में हुआ।
  • उद्घाटनकर्ता: राजप्रमुख महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय ने उद्घाटन किया।
  • प्रथम मुख्य न्यायाधीश: न्यायमूर्ति कमल कांत वर्मा पहले मुख्य न्यायाधीश बने।
  • सत्यनारायण राव समिति: 1958 की रिपोर्ट में मुख्य पीठ जोधपुर रखने और जयपुर पीठ समाप्त करने की सिफारिश की।
  • जयपुर पीठ बहाली: 31 जनवरी 1977 को जयपुर में स्थायी पीठ फिर शुरू हुई।
  • स्वीकृत पद संख्या: मुख्य न्यायाधीश मिलाकर कुल 50 पद स्वीकृत हैं (38 स्थायी + 12 अपर, 2025 तक)।
  • सेवानिवृत्ति आयु: न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु तक कार्य करते हैं।
  • शपथ ग्रहण: अनुच्छेद 219 में राज्यपाल के सामने शपथ ली जाती है।
  • वेतन व पेंशन: वेतन राज्य संचित निधि और पेंशन भारत संचित निधि से मिलती है।
  • रिट क्षेत्राधिकार: अनुच्छेद 226 सर्वोच्च न्यायालय के अनुच्छेद 32 से व्यापक है।
  • जिला न्यायाधीश नियुक्ति: अनुच्छेद 233 में राज्यपाल उच्च न्यायालय के परामर्श से करता है।
  • ग्राम न्यायालय: ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008, 2 अक्टूबर 2009 से लागू हुआ।

RAS Prelims MCQ: महत्वपूर्ण अभ्यास प्रश्न

  1. राजस्थान उच्च न्यायालय का उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को कहाँ हुआ था?
    A) जयपुर
    B) जोधपुर
    C) बीकानेर
    D) उदयपुर
    उत्तर: B) जोधपुर
    कारण: 29 अगस्त 1949 को सवाई मानसिंह द्वितीय ने जोधपुर में उद्घाटन किया।
  2. राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन बने थे?
    A) न्यायमूर्ति नवल किशोर
    B) न्यायमूर्ति के. एस. बापना
    C) न्यायमूर्ति कमल कांत वर्मा
    D) न्यायमूर्ति जवान सिंह राणावत
    उत्तर: C) न्यायमूर्ति कमल कांत वर्मा
    कारण: न्यायमूर्ति कमल कांत वर्मा 29 अगस्त 1949 को पहले मुख्य न्यायाधीश बने।
  3. किस समिति की सिफारिश पर 1958 में राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ समाप्त की गई?
    A) पी. सत्यनारायण राव समिति
    B) बी. आर. पटेल समिति
    C) जी. बी. पंत समिति
    D) हरिश्चंद्र माथुर समिति
    उत्तर: A) पी. सत्यनारायण राव समिति
    कारण: पी. सत्यनारायण राव समिति ने 1958 की रिपोर्ट में मुख्य पीठ जोधपुर रखने और जयपुर पीठ समाप्त करने की सिफारिश की।
  4. जयपुर स्थायी पीठ किस तिथि को फिर से स्थापित की गई थी?
    A) 1 नवंबर 1956
    B) 26 जनवरी 1950
    C) 31 जनवरी 1977
    D) 15 अगस्त 1980
    उत्तर: C) 31 जनवरी 1977
    कारण: 31 जनवरी 1977 को राष्ट्रपति आदेश से जयपुर पीठ फिर शुरू हुई।
  5. 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीशों के कुल कितने पद स्वीकृत हैं?
    A) 31 पद
    B) 40 पद
    C) 50 पद
    D) 55 पद
    उत्तर: C) 50 पद
    कारण: 38 स्थायी और 12 अपर पद मिलाकर कुल 50 पद (मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर) हैं।
  6. किस अनुच्छेद के तहत उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय का दर्जा प्राप्त है?
    A) अनुच्छेद 214
    B) अनुच्छेद 215
    C) अनुच्छेद 216
    D) अनुच्छेद 226
    उत्तर: B) अनुच्छेद 215
    कारण: अनुच्छेद 215 उच्च न्यायालय को अभिलेख न्यायालय बनाता है।
  7. उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु सीमा कितनी है?
    A) 60 वर्ष
    B) 62 वर्ष
    C) 65 वर्ष
    D) 70 वर्ष
    उत्तर: B) 62 वर्ष
    कारण: 15वें संशोधन 1963 से सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष तय हुई।
  8. अनुच्छेद 226 का रिट अधिकार अनुच्छेद 32 से व्यापक क्यों है?
    A) यह केवल केंद्र के विरुद्ध है
    B) यह केवल दीवानी मामलों में है
    C) यह कानूनी अधिकारों पर भी लागू होता है
    D) इसमें अपील नहीं हो सकती
    उत्तर: C) यह कानूनी अधिकारों पर भी लागू होता है
    कारण: अनुच्छेद 226 मूल अधिकारों के साथ अन्य विधिक अधिकारों पर भी लागू है।
  9. किस अनुच्छेद में राज्यपाल उच्च न्यायालय के परामर्श से जिला न्यायाधीश नियुक्त करता है?
    A) अनुच्छेद 227
    B) अनुच्छेद 231
    C) अनुच्छेद 233
    D) अनुच्छेद 235
    उत्तर: C) अनुच्छेद 233
    कारण: अनुच्छेद 233 में जिला न्यायाधीश नियुक्ति का नियम है।
  10. ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 किस तिथि से लागू हुआ?
    A) 26 जनवरी 2009
    B) 2 अक्टूबर 2009
    C) 15 अगस्त 2008
    D) 1 अप्रैल 2010
    उत्तर: B) 2 अक्टूबर 2009
    कारण: ग्राम न्यायालय अधिनियम 2008 को 2 अक्टूबर 2009 से लागू किया गया।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. सत्यनारायण राव समिति (1958) की सिफारिश क्या थी? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: राजधानी जयपुर और मुख्य पीठ जोधपुर रखने की सिफारिश की। इसके आधार पर 1958 में जयपुर पीठ समाप्त की गई।
  2. अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 में क्या अंतर है? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: अनुच्छेद 32 केवल मूल अधिकारों पर लागू है, जबकि अनुच्छेद 226 मूल अधिकारों के साथ अन्य कानूनी अधिकारों पर भी लागू होता है।
  3. अभिलेख न्यायालय के रूप में उच्च न्यायालय की दो शक्तियां बताइए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: 1. निर्णयों का साक्ष्य मूल्य सुरक्षित रहता है। 2. न्यायालय अवमानना पर दंड देने की शक्ति प्राप्त है।
  4. अनुच्छेद 233 के तहत जिला न्यायाधीश नियुक्ति नियम क्या हैं? (3 marks)
    उत्तर रूपरेखा: नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय के परामर्श से करता है। सीधी भर्ती के लिए न्यूनतम 7 वर्ष का वकालत अनुभव अनिवार्य है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. राजस्थान उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकारों का परीक्षण कीजिए। (5 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - प्रारंभिक क्षेत्राधिकार: चुनाव विवाद, मूल अधिकार हनन, वसीयत और अवमानना के मामले।
    - अपीलीय क्षेत्राधिकार: दीवानी व आपराधिक अपील। फांसी की सजा की संपुष्टि आवश्यक।
    - रिट शक्ति (अनुच्छेद 226): मूल व कानूनी अधिकारों के लिए पांच रिटें निकालना।
    - अधीक्षण शक्ति (अनुच्छेद 227): अधीनस्थ अदालतों का निरीक्षण व मार्गदर्शन।
  2. राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थापना, पीठ विवाद और अधीनस्थ अदालतों पर नियंत्रण स्पष्ट कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - स्थापना: अध्यादेश 1949 से 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में सवाई मानसिंह द्वितीय ने उद्घाटन किया। कमल कांत वर्मा पहले मुख्य न्यायाधीश बने।
    - पीठ विवाद: 1958 में सत्यनारायण राव समिति की रिपोर्ट पर मुख्य पीठ जोधपुर में रही और जयपुर पीठ बंद हुई। 31 जनवरी 1977 को जयपुर स्थायी पीठ फिर बनी।
    - स्वीकृत पद: मुख्य न्यायाधीश मिलाकर कुल 50 पद स्वीकृत हैं।
    - अधीनस्थ नियंत्रण: अनुच्छेद 233 में जिला जज नियुक्ति पर परामर्श। अनुच्छेद 235 में निचली अदालतों के पदस्थापन, पदोन्नति, स्थानांतरण पर पूर्ण नियंत्रण।

FAQs

राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थापना कब और कहाँ हुई थी?

स्थापना अध्यादेश 1949 के तहत हुई। उद्घाटन 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में सवाई मानसिंह द्वितीय ने किया। प्रथम मुख्य न्यायाधीश कमल कांत वर्मा बने।

राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ और स्थायी पीठ कहाँ हैं?

मुख्य पीठ जोधपुर में है और 31 जनवरी 1977 को जयपुर में स्थायी पीठ स्थापित की गई।

राजस्थान उच्च न्यायालय में कुल कितने पद स्वीकृत हैं?

2025 तक के आंकड़ों के अनुसार कुल 50 पद स्वीकृत हैं (मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर; 38 स्थायी + 12 अपर)।

अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 में क्या मुख्य अंतर है?

अनुच्छेद 32 केवल मूल अधिकारों पर लागू होता है, जबकि अनुच्छेद 226 मूल व अन्य कानूनी अधिकारों पर भी लागू होता है।

जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है?

अनुच्छेद 233 के अनुसार राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय के परामर्श से करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court): स्थापना, क्षेत्राधिकार और न्यायाधीश से जुड़े मुख्य संवैधानिक नियम भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 214 से 231 तक वर्णित।
राजस्थान की राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court): स्थापना, क्षेत्राधिकार और न्यायाधीश एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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