RAS (आरपीएससी) 5 min read

उपभोक्ता संरक्षण

अध्याय सार

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (COPRA) उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए 24 दिसम्बर 1986 को पारित किया गया। भारत में उपभोक्ता आंदोलन की शुरुआत 1904 में महाराष्ट्र से मानी जाती है और 1949 में मद्रास में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ने उपभोक्ता संरक्षण परिषद की स्थापना की थी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

  • 9 अप्रैल 1985: संयुक्त राष्ट्र महासभा ने उपभोक्ता संरक्षण के लिए दिशा-निर्देश मंजूर किए।
  • 24 दिसम्बर 1986: भारतीय संसद ने अधिनियम पारित किया। इसलिए 24 दिसम्बर को उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है।

उपभोक्ता के अधिकार

  • सुरक्षा का अधिकार
  • सूचना का अधिकार
  • चयन का अधिकार
  • सुनवाई का अधिकार
  • शिकायत निवारण का अधिकार
  • उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार

त्रि-स्तरीय निवारण तंत्र (पुस्तक/1986 एक्ट के अनुसार)

स्तर संरचना क्षेत्राधिकार (1986 एक्ट)
जिला मंच अध्यक्ष + 2 सदस्य (1 महिला अनिवार्य) 20 लाख रुपये तक के मामले।
राज्य आयोग अध्यक्ष (HC जज) + कम से कम 2 सदस्य 20 लाख से 1 करोड़ रुपये तक। जिला मंच के विरुद्ध अपील।
राष्ट्रीय आयोग अध्यक्ष (SC जज) + कम से कम 4 सदस्य 1 करोड़ रुपये से अधिक। राज्य आयोग के विरुद्ध अपील।
⚠️ RAS अपडेट (2019 अधिनियम):
1986 के अधिनियम को उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया है। वर्तमान सीमाएं (2021 संशोधन) हैं:
  • जिला आयोग: 50 लाख रुपये तक
  • राज्य आयोग: 50 लाख से 2 करोड़ रुपये तक
  • राष्ट्रीय आयोग: 2 करोड़ रुपये से अधिक

शिकायत प्रक्रिया

  • कौन दर्ज कर सकता है: उपभोक्ता, स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन, केंद्र/राज्य सरकार।
  • शुल्क (2004 नियम - पुस्तक अनुसार):
    • 1 लाख तक: 100 रु
    • 1 लाख से 5 लाख: 200 रु
    • 5 लाख से 10 लाख: 400 रु
    • 10 लाख से 20 लाख: 500 रु
  • विधि: सादे कागज पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। वकील की आवश्यकता नहीं होती है।

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