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Centre State Relations in Hindi: भारतीय संघवाद: केंद्र-राज्य संबंध (विधायी, प्रशासनिक, वित्तीय) और आपातकालीन प्रावधान

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Centre State Relations in Hindi: भारतीय संघवाद: केंद्र-राज्य संबंध (विधायी, प्रशासनिक, वित्तीय) और आपातकालीन प्रावधान - संघ की कार्यपालिका, संसद और न्यायपालिका
  • • अवलोकन: Quick Answer: Centre State Relations in Hindi: भारतीय संघवाद (Indian Federalism) संविधान के अनुच्छेद 1 में 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है...
Quick Answer: Centre State Relations in Hindi: भारतीय संघवाद (Indian Federalism) संविधान के अनुच्छेद 1 में 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है। यह कनाडा के मॉडल पर आधारित है जहां केंद्र को राज्यों की तुलना में अधिक सशक्त बनाया गया है। संविधान के भाग 11 (अनुच्छेद 245-263) और भाग 12 में केंद्र-राज्य संबंधों का उल्लेख है, जिन्हें विधायी, प्रशासनिक और वित्तीय श्रेणियों में बांटा गया है। आपातकाल (अनुच्छेद 352, 356, 360) के दौरान भारतीय संघीय व्यवस्था बिना किसी औपचारिक संशोधन के एकात्मक (Unitary) रूप ले लेती है।

भारतीय संघवाद का स्वरूप और संवैधानिक स्थिति

संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है। डॉ. भीमराव अंबेडकर के अनुसार, भारतीय परिसंघ राज्यों के समझौते का परिणाम नहीं है और राज्यों को अलग होने की छूट नहीं है। राज्यों की सीमा और नाम संसद अनुच्छेद 3 से बदल सकती है, इसलिए भारत को अक्सर 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' कहा जाता है। राज्य कार्यपालिका के कामकाज के लिए पढ़ें: राजस्थान मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद, विधायी शक्तियों के लिए देखें: राजस्थान विधानसभा और केंद्र-राज्य की कड़ी राज्यपाल के लिए पढ़ें: राज्यपाल (Governor)।

विद्वानों के विचार:

  • के.सी. व्हीयर (K.C. Wheare): इसे 'अर्ध-संघीय' (Quasi-Federal) कहा।
  • ग्रैनविले ऑस्टिन (Granville Austin): इसे 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) माना।
  • मॉरिस जोन्स (Morris Jones): इसे 'सौदाकारी संघवाद' (Bargaining Federalism) कहा।
  • एस.आर. बोम्मई वाद (1994): संघवाद को संविधान का मूल स्वरूप (Basic Structure) घोषित किया गया।

संविधान में लिखित संविधान और स्वतंत्र न्यायपालिका जैसे संघीय लक्षण हैं, तो एकल नागरिकता और आपात उपबंध जैसे एकात्मक लक्षण भी हैं।

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केंद्र-राज्य विधायी संबंध (अनुच्छेद 245 से 255)

संविधान के भाग 11 में विधायी शक्तियों का बंटवारा क्षेत्रीय और विषयवार आधार पर है। अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद पूरे देश के लिए और राज्य विधानमंडल अपने राज्य के लिए कानून बनाता है।

7वीं अनुसूची की तीन सूचियां (वर्तमान संख्या पर स्रोतों में मतभेद है: संघ 98 या 100, राज्य 59 या 61; यह फर्क हटाई गई प्रविष्टियों को गिनने के तरीके से है। मूल संख्या 97, 66, 47 और समवर्ती सूची के 52 विषय पर सब एकमत हैं):

  • संघ सूची: लगभग 98-100 विषय (मूलतः 97)। रक्षा, विदेश, रेलवे, परमाणु ऊर्जा और बैंकिंग पर संसद कानून बनाती है।
  • राज्य सूची: लगभग 59-61 विषय (मूलतः 66)। पुलिस, स्वास्थ्य, जेल, कृषि और स्थानीय शासन पर राज्य कानून बनाते हैं।
  • समवर्ती सूची: 52 विषय (मूलतः 47)। केंद्र व राज्य दोनों कानून बना सकते हैं। 42वें संशोधन 1976 से 5 विषय (शिक्षा, वन, नाप-तौल, वन्य जीव, न्याय प्रशासन) इसमें डाले गए।
  • अवशिष्ट शक्तियां (अनुच्छेद 248): नए विषयों पर कानून बनाने की शक्ति संसद में है (कनाडा मॉडल)।
  • गतिरोध का नियम (अनुच्छेद 254): समवर्ती सूची पर टकराव में संसद का कानून मान्य होता है, जब तक कि राज्य कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी न मिली हो।

Table 1: 7वीं अनुसूची की तीनों सूचियों की तुलना

सूची मूल संख्या वर्तमान संख्या कानून बनाने का अधिकार प्रमुख विषय
संघ सूची 97 98-100 (स्रोतों में मतभेद) संसद (Union Parliament) रक्षा, परमाणु ऊर्जा, विदेश मामले, रेलवे, बैंकिंग
राज्य सूची 66 59-61 (स्रोतों में मतभेद) राज्य विधानमंडल पुलिस, लोक स्वास्थ्य, कृषि, जेल, स्थानीय स्वशासन
समवर्ती सूची 47 52 संसद और राज्य दोनों शिक्षा, वन, विवाह-तलाक, आपराधिक कानून, वन्य जीव
अवशिष्ट विषय (अनु. 248) - नए अनिर्दिष्ट विषय केवल संसद (कनाडा मॉडल) जो विषय किसी सूची में नहीं; जैसे सेवा कर (service tax) पहले इसी शक्ति (संघ सूची प्रविष्टि 97) से लगा था

संसद की राज्य सूची पर विधि निर्माण की शक्तियां

विशेष परिस्थितियों में संसद राज्य सूची के विषयों पर कानून बना सकती है:

  1. राष्ट्रीय हित में (अनुच्छेद 249): राज्यसभा 2/3 उपस्थित व मतदान के बहुमत से प्रस्ताव पारित करे, तो संसद 1 वर्ष के लिए कानून बना सकती है।
  2. राष्ट्रीय आपातकाल में (अनुच्छेद 250): अनुच्छेद 352 लागू होने पर संसद राज्य सूची पर कानून बनाती है, जो आपातकाल के 6 माह बाद समाप्त होता है।
  3. राज्यों के अनुरोध पर (अनुच्छेद 252): दो या अधिक राज्यों के संकल्प पारित करने पर संसद कानून बनाती है, जो केवल उन राज्यों पर लागू होता है।
  4. अंतरराष्ट्रीय समझौतों के लिए (अनुच्छेद 253): विदेशी संधियों को लागू करने के लिए संसद बिना राज्यों की सहमति के कानून बना सकती है।
  5. राष्ट्रपति शासन में (अनुच्छेद 356 व 357): राज्य की विधायी शक्तियां संसद के पास आ जाती हैं।

केंद्र-राज्य प्रशासनिक संबंध (अनुच्छेद 256 से 263)

संविधान के भाग 11 के अध्याय 2 में प्रशासनिक समन्वय के प्रमुख उपबंध हैं:

  • अनुच्छेद 256 व 257: राज्य कार्यपालिका संसद के कानूनों का पालन करेगी। केंद्र सामरिक संचार और रेलवे सुरक्षा के निर्देश दे सकता है।
  • अनुच्छेद 365: केंद्र के वैध निर्देशों की अनदेखी पर राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल माना जा सकता है।
  • अखिल भारतीय सेवाएं (अनुच्छेद 312): आईएएस और आईपीएस केंद्र-राज्य की प्रशासनिक कड़ी हैं। नई सेवा बनाने का अधिकार राज्यसभा को (2/3 बहुमत) है।
  • अंतर-राज्य नदी जल विवाद (अनुच्छेद 262): संसद कानून बनाकर जल विवादों के लिए ट्रिब्यूनल बना सकती है।
  • अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263): 28 मई 1990 को राष्ट्रपति के आदेश से गठित। प्रधानमंत्री अध्यक्ष; सभी राज्यों और विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, बाकी UT के प्रशासक और प्रधानमंत्री से नामित 6 कैबिनेट मंत्री (गृह मंत्री समेत) सदस्य होते हैं।
  • पूर्ण विश्वास और साख (अनुच्छेद 261): सार्वजनिक कृत्यों, अभिलेखों और न्यायिक कार्यवाहियों को पूरे देश में पूरी मान्यता मिलती है।

केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध (अनुच्छेद 264 से 293)

संविधान के भाग 12 में वित्तीय संबंधों का प्रबंधन है:

  • वस्तु व सेवा कर (GST - 101वां संशोधन 2016): अनुच्छेद 246A से समवर्ती कर शक्ति मिली। अनुच्छेद 279A के तहत बनी जीएसटी परिषद में केंद्रीय वित्त मंत्री अध्यक्ष होते हैं।
  • वित्त आयोग (अनुच्छेद 280): राष्ट्रपति हर 5 वर्ष में वित्त आयोग बनाते हैं। यह करों के बंटवारे (अनुच्छेद 270) और सहायता अनुदान (अनुच्छेद 275) की सिफारिश करता है।
  • सहायता अनुदान: अनुच्छेद 275 के तहत संचित निधि से सांविधिक अनुदान और अनुच्छेद 282 के तहत विवेकाधीन अनुदान मिलते हैं।
  • ऋण लेने के अधिकार: केंद्र सरकार (अनुच्छेद 292) आंतरिक व बाह्य ऋण ले सकती है, जबकि राज्य (अनुच्छेद 293) केवल आंतरिक ऋण ले सकते हैं।

आपातकालीन प्रावधान (अनुच्छेद 352 से 360)

संविधान के भाग 18 के आपात उपबंध संकट में देश को एकात्मक बना देते हैं:

  • राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352): युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह पर। 44वें संशोधन 1978 ने 'सशस्त्र विद्रोह' जोड़ा और कैबिनेट की लिखित सलाह अनिवार्य की। 1 माह में संसद के विशेष बहुमत (2/3) से पारित होना जरूरी है। अनुच्छेद 358 से अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित होता है, पर 44वें संशोधन के बाद केवल तब जब आपातकाल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर लगा हो (सशस्त्र विद्रोह पर नहीं)। अन्य मूल अधिकार राष्ट्रपति के आदेश से निलंबित हो सकते हैं, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 कभी निलंबित नहीं होते (अनुच्छेद 359)।
  • राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356 व 365): संवैधानिक तंत्र की विफलता पर। 2 माह में साधारण बहुमत से पारित होना जरूरी है। अधिकतम 3 वर्ष तक रह सकता है। एस.आर. बोम्मई वाद (1994) के अनुसार इसकी न्यायिक समीक्षा हो सकती है और बहुमत परीक्षण विधानसभा पटल पर होगा।
  • वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360): वित्तीय साख पर संकट होने पर। 2 माह में साधारण बहुमत से पारित होना जरूरी है। यह भारत में कभी नहीं लगा।

Table 2: तीनों आपातकालों का तुलनात्मक विवरण

प्रावधान राष्ट्रीय आपातकाल (अनु. 352) राष्ट्रपति शासन (अनु. 356) वित्तीय आपातकाल (अनु. 360)
घोषणा का आधार युद्ध, बाह्य आक्रमण, सशस्त्र विद्रोह संवैधानिक तंत्र की विफलता वित्तीय स्थिरता व साख संकट
संसदीय अनुमोदन 1 माह (विशेष बहुमत) 2 माह (साधारण बहुमत) 2 माह (साधारण बहुमत)
अधिकतम अवधि अनिश्चित (हर 6 माह में मंजूरी) 3 वर्ष (शर्तों के साथ) अनिश्चित काल
मूल अधिकारों पर असर अनु. 19 निलंबित (केवल युद्ध/बाह्य आक्रमण पर); अनु. 20 व 21 सुरक्षित कोई प्रभाव नहीं कोई प्रभाव नहीं
लागू होने की स्थिति 3 बार (1962, 1971, 1975) 125 से अधिक बार लागू अब तक कभी नहीं लगा

केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रमुख आयोग और समितियां

संघीय तालमेल के लिए बनी मुख्य समितियां:

  • प्रशासनिक सुधार आयोग (ARC 1966): मोरारजी देसाई की अध्यक्षता में गठित (1967 में उनके उप-प्रधानमंत्री बनने पर के. हनुमंतैया अध्यक्ष बने)। अंतर-राज्य परिषद बनाने की बात कही।
  • राजमन्नार समिति (1969): तमिलनाडु सरकार ने बनाई। अनुच्छेद 356 और अखिल भारतीय सेवाएं हटाने की मांग की।
  • आनंदपुर साहिब प्रस्ताव (1973): अकाली दल ने केंद्र को केवल 4 विषय देने की मांग रखी।
  • सरकारिया आयोग (1983-1988): न्यायमूर्ति आर.एस. सरकारिया की अध्यक्षता में गठित। सिफारिशें: अनुच्छेद 356 अंतिम विकल्प हो, अंतर-राज्य परिषद बने और राज्यपाल नियुक्ति में मुख्यमंत्री से सलाह ली जाए।
  • पुंछी आयोग (2007-2010): न्यायमूर्ति एम.एम. पुंछी की अध्यक्षता में गठित। सिफारिशें: स्थानीयकृत आपातकाल की व्यवस्था हो, राज्यपालों का 5 वर्ष कार्यकाल हो और महाभियोग का अधिकार विधानसभा को मिले।
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भारतीय संघवाद और केंद्र-राज्य संबंध: महत्वपूर्ण तथ्य

  • संविधान के अनुच्छेद 1 में भारत को 'राज्यों का संघ' घोषित किया गया है।
  • अवशिष्ट शक्तियां (अनुच्छेद 248) संसद के पास हैं (कनाडा मॉडल)।
  • 42वें संशोधन 1976 ने 5 विषयों को राज्य से समवर्ती सूची में भेजा।
  • अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा 2/3 बहुमत से 1 वर्ष के लिए राज्य सूची पर संसद को अधिकृत कर सकती है।
  • अनुच्छेद 262 के तहत संसद नदी जल विवादों के लिए ट्रिब्यूनल बना सकती है।
  • मई 1990 में सरकारिया आयोग की सिफारिश पर अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263) बनी।
  • अनुच्छेद 280 के तहत राष्ट्रपति हर 5 वर्ष में वित्त आयोग बनाते हैं।
  • राष्ट्रीय आपातकाल में अनुच्छेद 20 और 21 कभी निलंबित नहीं होते (44वां संशोधन 1978)।
  • एस.आर. बोम्मई वाद (1994) में संघवाद को संविधान का मूल स्वरूप माना गया।
  • पुंछी आयोग (2007) ने राज्यपाल पर राज्य विधानमंडल से महाभियोग की सिफारिश की।

RAS Prelims MCQ

  1. संविधान के किस अनुच्छेद में भारत को 'राज्यों का संघ' कहा गया है?
    A) अनुच्छेद 1
    B) अनुच्छेद 2
    C) अनुच्छेद 3
    D) अनुच्छेद 4
    उत्तर: A) अनुच्छेद 1
    कारण: अनुच्छेद 1(1) के अनुसार भारत राज्यों का संघ (Union of States) है।
  2. 42वें संशोधन 1976 से कौन सा विषय समवर्ती सूची में नहीं डाला गया था?
    A) शिक्षा
    B) वन
    C) पुलिस
    D) नाप-तौल
    उत्तर: C) पुलिस
    कारण: पुलिस राज्य सूची में है, जबकि अन्य समवर्ती सूची में जोड़े गए।
  3. अवशिष्ट शक्तियां (अनुच्छेद 248) किसमें निहित हैं?
    A) राज्य विधानमंडल
    B) संसद
    C) राष्ट्रपति
    D) उच्चतम न्यायालय
    उत्तर: B) संसद
    कारण: अनुच्छेद 248 के तहत अवशिष्ट शक्तियां संसद के पास हैं (कनाडा मॉडल)।
  4. अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा का संकल्प एक बार में कितनी अवधि तक मान्य रहता है?
    A) 6 माह
    B) 1 वर्ष
    C) 2 वर्ष
    D) 3 वर्ष
    उत्तर: B) 1 वर्ष
    कारण: 2/3 बहुमत से पारित यह संकल्प 1 वर्ष तक मान्य रहता है।
  5. केंद्र व राज्यों में कर बंटवारे की सिफारिश कौन सा निकाय करता है?
    A) नीति आयोग
    B) वित्त आयोग
    C) अंतर-राज्य परिषद
    D) जीएसटी परिषद
    उत्तर: B) वित्त आयोग
    कारण: अनुच्छेद 280 के तहत गठित वित्त आयोग कर बंटवारे की सिफारिश करता है।
  6. अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263) की स्थापना किस आयोग की सिफारिश पर हुई थी?
    A) राजमन्नार समिति
    B) सरकारिया आयोग
    C) पुंछी आयोग
    D) प्रशासनिक सुधार आयोग
    उत्तर: B) सरकारिया आयोग
    कारण: सरकारिया आयोग की सिफारिश पर मई 1990 में यह परिषद बनी।
  7. राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) में कौन से मूल अधिकार कभी निलंबित नहीं होते?
    A) अनुच्छेद 14 व 19
    B) अनुच्छेद 19 व 20
    C) अनुच्छेद 20 व 21
    D) अनुच्छेद 21 व 22
    उत्तर: C) अनुच्छेद 20 व 21
    कारण: 44वें संशोधन 1978 के तहत अनुच्छेद 20 व 21 कभी निलंबित नहीं होते।
  8. किस वाद में उच्चतम न्यायालय ने संघवाद को संविधान का 'मूल स्वरूप' माना?
    A) केशवानंद भारती वाद 1973
    B) एस.आर. बोम्मई वाद 1994
    C) मिनर्वा मिल्स वाद 1980
    D) मेनका गांधी वाद 1978
    उत्तर: B) एस.आर. बोम्मई वाद 1994
    कारण: एस.आर. बोम्मई वाद (1994) में संघवाद को संविधान का मूल स्वरूप घोषित किया गया।
  9. पुंछी आयोग (2007) ने राज्यपालों के लिए कौन सा प्रमुख सुझाव दिया था?
    A) पद समाप्त करना
    B) 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल व महाभियोग
    C) केंद्र की इच्छा पर पद
    D) सीधा चुनाव
    उत्तर: B) 5 वर्ष का निश्चित कार्यकाल व महाभियोग
    कारण: पुंछी आयोग ने 5 वर्ष का कार्यकाल और विधानसभा से महाभियोग का सुझाव दिया।
  10. अंतर-राज्य नदी जल विवादों के निपटारे के लिए कानून बनाने की शक्ति किस अनुच्छेद में है?
    A) अनुच्छेद 261
    B) अनुच्छेद 262
    C) अनुच्छेद 263
    D) अनुच्छेद 264
    उत्तर: B) अनुच्छेद 262
    कारण: अनुच्छेद 262 संसद को जल विवादों के निपटारे के लिए विधि बनाने की शक्ति देता है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. भारतीय संविधान को 'अर्ध-संघीय' क्यों कहते हैं? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: सशक्त केंद्र, एकल नागरिकता, आपात उपबंध और राज्यपाल पद जैसे एकात्मक लक्षणों के कारण के.सी. व्हीयर ने इसे अर्ध-संघीय कहा।
  2. अनुच्छेद 249 के तहत संसद की शक्ति क्या है? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: राज्यसभा 2/3 बहुमत से राज्य सूची के विषय को राष्ट्रीय महत्व का घोषित करे, तो संसद उस पर 1 वर्ष के लिए कानून बना सकती है।
  3. अंतर-राज्य परिषद (अनुच्छेद 263) के कार्य क्या हैं? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली यह परिषद केंद्र-राज्य विवादों पर सलाह देने और नीतियों में समन्वय लाने का कार्य करती है।
  4. एस.आर. बोम्मई वाद (1994) के दो निर्देश लिखिए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: (1) राष्ट्रपति शासन की न्यायिक समीक्षा संभव है। (2) बहुमत परीक्षण केवल विधानसभा पटल (Floor Test) पर होना चाहिए।

Long Questions (5–10 marks)

  1. संसद किन परिस्थितियों में राज्य सूची पर कानून बना सकती है? (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - 7वीं अनुसूची में सामान्यतः राज्य कानून बनाते हैं, किंतु 5 विशेष स्थितियों में संसद विधि बनाती है:
    1. अनुच्छेद 249: राज्यसभा के 2/3 बहुमत से पारित प्रस्ताव पर (1 वर्ष मान्य)।
    2. अनुच्छेद 250: राष्ट्रीय आपातकाल लागू होने पर।
    3. अनुच्छेद 252: दो या अधिक राज्यों के अनुरोध पर।
    4. अनुच्छेद 253: अंतरराष्ट्रीय संधियों को लागू करने के लिए।
    5. अनुच्छेद 356: राष्ट्रपति शासन लागू होने पर।
    - संक्षेप: यह व्यवस्था संकट में देश की एकता बनाए रखने के लिए केंद्र को जरूरी शक्ति सौंपती है।
  2. आपातकालीन प्रावधानों (अनुच्छेद 352, 356, 360) का परीक्षण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - भाग 18 के प्रावधान संकट में देश की सुरक्षा के लिए केंद्र को विशेष अधिकार देते हैं:
    * राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352): युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह पर 1 माह में विशेष बहुमत से मंजूरी। अनुच्छेद 20 व 21 सुरक्षित।
    * राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356): संवैधानिक तंत्र विफल होने पर 2 माह में साधारण बहुमत से मंजूरी। अधिकतम 3 वर्ष।
    * वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360): साख संकट पर 2 माह में साधारण बहुमत से मंजूरी। भारत में कभी लागू नहीं हुआ।
    - प्रभाव: बिना किसी संशोधन के देश एकात्मक रूप ले लेता है और केंद्र का राज्यों पर सीधा नियंत्रण हो जाता है।

FAQs

क्या संसद राज्य सूची के विषयों पर कभी भी कानून बना सकती है?

नहीं, केवल अनुच्छेद 249, अनुच्छेद 250, अनुच्छेद 252, अनुच्छेद 253 और अनुच्छेद 356 जैसी विशेष परिस्थितियों में ही यह संभव है।

समवर्ती सूची पर केंद्र और राज्य कानून में टकराव पर क्या नियम है?

अनुच्छेद 254 के अनुसार केंद्र का कानून मान्य होता है। यदि राज्य कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी हो, तो वह राज्य में प्रभावी रहेगा।

क्या राष्ट्रीय आपातकाल में सभी मूल अधिकार निलंबित होते हैं?

नहीं, 44वें संशोधन 1978 के बाद अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 को किसी भी आपातकाल में निलंबित नहीं किया जा सकता।

सरकारिया आयोग की सबसे प्रमुख सिफारिश क्या थी?

सरकारिया आयोग की सबसे प्रमुख सिफारिश अनुच्छेद 263 के तहत स्थायी अंतर-राज्य परिषद का गठन और अनुच्छेद 356 का प्रयोग अंतिम विकल्प के रूप में करना थी।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • अनुच्छेद 1: भारत 'राज्यों का संघ'; अवशिष्ट शक्ति संसद के पास (अनु. 248)।
  • 42वां संशोधन 1976: शिक्षा, वन, नाप-तौल, वन्य जीव, न्याय प्रशासन समवर्ती सूची में।
  • अनु. 249: राज्यसभा 2/3 बहुमत से, 1 वर्ष के लिए राज्य सूची पर संसद को अधिकार।
  • अंतर-राज्य परिषद (अनु. 263): 28 मई 1990, सरकारिया आयोग की सिफारिश, अध्यक्ष PM।
  • राष्ट्रीय आपातकाल: 1 माह में विशेष बहुमत; 3 बार (1962, 1971, 1975)।
  • वित्तीय आपातकाल (अनु. 360) अब तक कभी नहीं लगा।
  • एस.आर. बोम्मई (1994): संघवाद मूल स्वरूप (Basic Structure), बहुमत की जांच सदन में।
  • सरकारिया आयोग 1983-88; पुंछी आयोग 2007-10।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Centre State Relations in Hindi: भारतीय संघवाद (Indian Federalism) संविधान के अनुच्छेद 1 में 'राज्यों का संघ' (Union of States) कहा गया है।
भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में Centre State Relations in Hindi: भारतीय संघवाद: केंद्र-राज्य संबंध (विधायी, प्रशासनिक, वित्तीय) और आपातकालीन प्रावधान एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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