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राजस्थान विधानसभा और राज्य विधानमंडल: संगठन, शक्तियां और कार्य

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

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त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान की राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: राजस्थान विधानसभा और राज्य विधानमंडल: संगठन, शक्तियां और कार्य - STATE LEGISLATURE
  • • अवलोकन: Quick Answer: भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल के गठन, शक्तियों और कार्यपद्धति का उल्लेख है। राजस्थान में एकसदनीय व्यव...
Quick Answer: भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल के गठन, शक्तियों और कार्यपद्धति का उल्लेख है। राजस्थान में एकसदनीय व्यवस्था है, जिसमें केवल राज्यपाल और विधानसभा शामिल हैं; यहाँ विधान परिषद नहीं है। पहली राजस्थान विधानसभा की बैठक 29 मार्च 1952 को जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में हुई थी। 1952 में कुल 160 सीटें थीं, जो 1957 में बढ़कर 176, 1967 में 184 और 1977 से 200 सीटें हैं। 2008 के परिसीमन के बाद से 200 सीटों में से 34 सीटें अनुसूचित जाति (SC) और 25 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं, जबकि 141 सीटें सामान्य वर्ग के पास हैं। नरोत्तम लाल जोशी प्रथम अध्यक्ष और लाल सिंह शक्तावत प्रथम उपाध्यक्ष बने थे।

राज्य विधानमंडल का संवैधानिक स्वरूप और संगठन (अनुच्छेद 168-177)

संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल के गठन, योग्यताओं और शक्तियों के स्पष्ट नियम हैं। राजस्थान में जन चेतना और लोकतांत्रिक अधिकारों के संघर्ष के बारे में जानने के लिए देखें: Public Awakening and Freedom Struggle in Rajasthan।

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1. एकसदनीय और द्विसदनीय व्यवस्था (अनुच्छेद 168 व 169)

  • राजस्थान की स्थिति: अनुच्छेद 168 अनुसार राजस्थान में एकसदनीय व्यवस्था है। कानून निर्माण राज्यपाल और विधानसभा मिलकर करते हैं। राजस्थान में विधान परिषद नहीं है।
  • विधान परिषद सृजन व अंत (अनुच्छेद 169): राज्य विधानसभा कुल सदस्यों के बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वालों के दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करे, तो संसद कानून बनाकर विधान परिषद बना सकती है या समाप्त कर सकती है।

2. विधानसभा गठन और कार्यकाल (अनुच्छेद 170 व 172)

  • सदस्य संख्या (अनुच्छेद 170): विधानसभा में न्यूनतम 60 और अधिकतम 500 सदस्य हो सकते हैं। सदस्य प्रादेशिक क्षेत्रों से सीधे चुने जाते हैं।
  • कार्यकाल (अनुच्छेद 172): विधानसभा कार्यकाल प्रथम बैठक से 5 वर्ष होता है। राज्यपाल इसे पहले भी भंग कर सकता है। राष्ट्रीय आपातकाल में संसद विधि से कार्यकाल 1 वर्ष बढ़ा सकती है।

3. सदस्यों की योग्यता और सत्र (अनुच्छेद 173 व 174)

  • योग्यता (अनुच्छेद 173): प्रत्याशी भारत का नागरिक हो, न्यूनतम 25 वर्ष आयु हो, और लाभ के पद पर न हो।
  • सत्र (अनुच्छेद 174): राज्यपाल सत्र बुलाता और सत्रावसान करता है। दो सत्रों के बीच 6 माह से अधिक अंतर नहीं हो सकता।

राजस्थान विधानसभा का ऐतिहासिक सफर और सीटों की संख्या का विकास

रियासतों के विलय के बाद 1952 के प्रथम चुनाव से अब तक विधानसभा में सीटों का विकास इस प्रकार रहा है:

1. सीटों का क्रमिक विस्तार (1952 से वर्तमान)

  • प्रथम विधानसभा (1952): पहली बैठक 29 मार्च 1952 को जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में हुई। कुल 160 सीटें थीं।
  • द्वितीय विधानसभा (1957): 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन (अजमेर-मेरवाड़ा का विलय) और नए परिसीमन के बाद कुल सदस्य 160 से बढ़कर 176 हुए।
  • चतुर्थ विधानसभा (1967): परिसीमन से सीटें बढ़कर 184 हुईं। 1967 में राज्य में पहला राष्ट्रपति शासन लगा।
  • छठी विधानसभा (1977): नए परिसीमन से सीटें 200 हुईं। पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी।
  • वर्तमान स्थिति (16वीं विधानसभा): 1977 से अब तक 200 सीटें हैं। 84वें संशोधन 2001 के अनुसार 2026 के बाद होने वाली पहली Census (जनसंख्या गिनती) तक यह संख्या 200 ही रहेगी।

2. सीटों का आरक्षण और नया भवन

  • आरक्षण: 200 सीटों में SC के लिए 34 और ST के लिए 25 सीटें आरक्षित हैं। 141 सीटें सामान्य वर्ग के लिए हैं।
  • 104वां संशोधन 2019: SC-ST आरक्षण 2030 तक बढ़ाया गया, जबकि आंग्ल-भारतीय मनोनयन समाप्त कर दिया गया।
  • नया भवन: ज्योति नगर (जयपुर) में बने नए भवन का लोकार्पण 6 नवंबर 2001 को राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने किया था।

Table 1: राजस्थान विधानसभा में सीटों की संख्या और आरक्षण का ऐतिहासिक क्रम

विधानसभा क्रम और वर्ष कुल सीटें सीट बदलाव का कारण आरक्षण और राजनीतिक संदर्भ
प्रथम विधानसभा (1952) 160 प्रथम आम चुनाव टाउन हॉल जयपुर में पहली बैठक
द्वितीय विधानसभा (1957) 176 राज्य पुनर्गठन (अजमेर-मेरवाड़ा विलय) व परिसीमन सदस्य 160 से बढ़कर 176
चतुर्थ विधानसभा (1967) 184 परिसीमन सिफारिश सीटें 184 हुईं, पहला राष्ट्रपति शासन
छठी विधानसभा (1977) 200 नया परिसीमन लागू होना सीटें 200 हुईं, गैर-कांग्रेसी सरकार
16वीं विधानसभा (वर्तमान) 200 84वें संशोधन से स्थिर SC 34, ST 25, सामान्य 141

विधानसभा के प्रमुख पदाधिकारी और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व

सदन के संचालन और नियमों के पालन के लिए पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है।

1. विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष (अनुच्छेद 178)

  • चुनाव और त्यागपत्र: विधानसभा सदस्यों में से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष चुनती है। अध्यक्ष उपाध्यक्ष को और उपाध्यक्ष अध्यक्ष को त्यागपत्र देता है।
  • अध्यक्ष की शक्तियां: बैठकों की अध्यक्षता और शांति व्यवस्था बनाए रखना। मत बराबर होने पर अनुच्छेद 189 में निर्णायक मत (Casting Vote) देना। कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय अनुच्छेद 199(3) में अध्यक्ष करता है। दल-बदल (10वीं अनुसूची) पर फैसला अध्यक्ष का होता है।
  • पद से हटाना (अनुच्छेद 179): सदस्यों के बहुमत पारित संकल्प से हटा सकते हैं, 14 दिन पूर्व सूचना जरूरी है।
  • प्रोटेम स्पीकर: राज्यपाल सदन के वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर बनाता है, जो नए सदस्यों को शपथ दिलाता है।

2. राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक व्यक्तित्व

  • प्रथम अध्यक्ष: नरोत्तम लाल जोशी (31 मार्च 1952 को चुने गए)।
  • प्रथम उपाध्यक्ष: लाल सिंह शक्तावत।
  • प्रथम विपक्ष नेता: कुंवर जसवंत सिंह (बीकानेर)।
  • प्रथम महिला अध्यक्ष: श्रीमती सुमित्रा सिंह (12वीं विधानसभा, जनवरी 2004 से)।
  • प्रथम महिला विधायक: यशोदा देवी (1953, बांसवाड़ा उपचुनाव)।
  • सर्वाधिक समय अध्यक्ष: रामनिवास मिर्धा (1957 से 1967 तक 10 वर्ष अध्यक्ष रहे)।

राज्य विधानमंडल की विधायी कार्यपद्धति और वित्तीय शक्तियां

राज्य सूची और समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार विधानसभा को है। नागरिक अधिकारों और बाजार संबंधी कानूनों के लिए देखें: Consumer Protection and COPRA Act।

1. साधारण विधेयक पारित करने के नियम

साधारण विधेयक किसी भी सदस्य की ओर से लाया जा सकता है। यह तीन वाचनों से गुजरता है:

  • तीन वाचन: प्रथम वाचन में विधेयक पेश होता है। द्वितीय वाचन में खंडवार विचार और संशोधन होते हैं। तृतीय वाचन में संपूर्ण विधेयक पर मतदान होता है।
  • राज्यपाल की अनुमति (अनुच्छेद 200): विधेयक पास होने के बाद राज्यपाल के पास जाता है। राज्यपाल स्वीकृति दे सकता है, रोक सकता है, या पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है। यदि विधानसभा इसे फिर से पारित कर दे तो राज्यपाल स्वीकृति देने को बाध्य है। राज्यपाल विधेयक राष्ट्रपति के विचारार्थ सुरक्षित भी रख सकता है।

2. धन विधेयक और बजट (अनुच्छेद 198, 199, 202)

  • धन विधेयक (अनुच्छेद 198 व 199): यह केवल विधानसभा में पेश होता है। राज्यपाल की पूर्व अनुशंसा जरूरी है। अध्यक्ष का प्रमाण पत्र अंतिम होता है। इसे पुनर्विचार के लिए नहीं लौटाया जा सकता।
  • वार्षिक वित्तीय विवरण (अनुच्छेद 202): राज्यपाल हर वर्ष राज्य की अनुमानित आय-व्यय का बजट सदन में रखवाता है।
  • कोरम या गणपूर्ति (अनुच्छेद 189): सदन की बैठक के लिए कुल सदस्य संख्या का 1/10 भाग या 10 सदस्य (जो अधिक हो) जरूरी है। राजस्थान में 200 का 1/10 यानी कम से कम 20 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है।

Table 2: राज्य विधानमंडल से संबंधित प्रमुख संवैधानिक अनुच्छेद

अनुच्छेद संवैधानिक विषय मुख्य कानूनी नियम RAS परीक्षा बिंदु
अनुच्छेद 168 विधानमंडलों का गठन राज्यपाल और सदन मिलकर बनाते हैं राजस्थान में केवल विधानसभा है
अनुच्छेद 169 विधान परिषद गठन व अंत विधानसभा के दो-तिहाई प्रस्ताव पर संसद बनाती है दूसरी सभा बनाने की विधि
अनुच्छेद 170 विधानसभा सदस्य संख्या न्यूनतम 60, अधिकतम 500 निर्वाचित सदस्य सीटें परिसीमन से तय होती हैं
अनुच्छेद 172-173 कार्यकाल व सदस्यता योग्यता 5 वर्ष कार्यकाल, न्यूनतम 25 वर्ष आयु लाभ के पद पर न होने की शर्त
अनुच्छेद 174 सत्र और विघटन राज्यपाल सत्र बुलाता है, 6 माह से कम अंतर साल में दो बैठकें जरूरी
अनुच्छेद 178 अध्यक्ष व उपाध्यक्ष सदन अपने सदस्यों में से चुनता है त्यागपत्र परस्पर सौंपते हैं
अनुच्छेद 189 कोरम और मतदान कुल संख्या का 1/10 भाग या 10 सदस्य राजस्थान में न्यूनतम 20 सदस्य
अनुच्छेद 198-199 धन विधेयक नियम केवल विधानसभा में पेश, पूर्व अनुमति जरूरी अध्यक्ष का फैसला अंतिम
अनुच्छेद 200 राज्यपाल की अनुमति सहमति देना, रोकना या पुनर्विचार के लिए लौटाना राष्ट्रपति के लिए आरक्षित रखना
अनुच्छेद 202 वार्षिक वित्तीय विवरण राज्यपाल बजट सदन में पेश करवाता है सदन की वित्तीय शक्ति

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल का वर्णन है।
  • राजस्थान में एकसदनीय विधानमंडल है, जिसमें केवल राज्यपाल और विधानसभा शामिल हैं।
  • प्रथम राजस्थान विधानसभा की पहली बैठक 29 मार्च 1952 को सवाई मानसिंह टाउन हॉल, जयपुर में हुई।
  • प्रथम विधानसभा में 160 सीटें थीं, जो 1957 में अजमेर विलय के बाद 176 हुईं।
  • चतुर्थ विधानसभा (1967) में सीटें 184 और छठी विधानसभा (1977) में बढ़कर 200 हुईं।
  • वर्ष 1977 से वर्तमान 16वीं विधानसभा तक कुल सीटें 200 हैं, जो 2026 के बाद की पहली Census (जनसंख्या गिनती) तक स्थिर रहेंगी।
  • 200 सीटों में SC की 34 और ST की 25 सीटें आरक्षित हैं, जबकि 141 सामान्य सीटें हैं।
  • 104वें संविधान संशोधन 2019 ने SC-ST आरक्षण 2030 तक बढ़ाया और आंग्ल-भारतीय मनोनयन समाप्त किया।
  • नरोत्तम लाल जोशी प्रथम अध्यक्ष और लाल सिंह शक्तावत प्रथम उपाध्यक्ष बने।
  • कुंवर जसवंत सिंह विपक्ष के प्रथम नेता बने।
  • श्रीमती सुमित्रा सिंह 12वीं विधानसभा में राजस्थान की पहली महिला अध्यक्ष बनीं।
  • श्रीमती यशोदा देवी 1953 के बांसवाड़ा उपचुनाव में जीतकर पहली महिला विधायक बनी थीं।
  • अनुच्छेद 189(3) के अनुसार राजस्थान विधानसभा का कोरम कम से कम 20 सदस्य है।
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RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान विधानसभा में प्रथम आम चुनाव (1952) के समय कुल सदस्य संख्या कितनी थी?
    A) 160
    B) 176
    C) 184
    D) 200
    उत्तर: A) 160
    कारण: 1952 में प्रथम विधानसभा गठन के समय 160 सीटें थीं।
  2. राजस्थान विधानसभा में सीटों की संख्या किस वर्ष बढ़कर 200 हुई थी?
    A) 1967
    B) 1972
    C) 1977
    D) 1980
    उत्तर: C) 1977
    कारण: 1977 में छठी विधानसभा चुनाव के समय परिसीमन से 200 सीटें हुईं।
  3. 2008 के परिसीमन के अनुसार राजस्थान विधानसभा में SC और ST के लिए क्रमशः कितनी सीटें आरक्षित हैं?
    A) 32 और 24
    B) 34 और 25
    C) 36 और 26
    D) 30 और 25
    उत्तर: B) 34 और 25
    कारण: 200 सीटों में SC की 34 और ST की 25 सीटें आरक्षित हैं।
  4. राजस्थान विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष कौन चुने गए थे?
    A) रामनिवास मिर्धा
    B) लाल सिंह शक्तावत
    C) नरोत्तम लाल जोशी
    D) पूनमचंद विश्नोई
    उत्तर: C) नरोत्तम लाल जोशी
    कारण: नरोत्तम लाल जोशी 31 मार्च 1952 को प्रथम विधानसभा अध्यक्ष चुने गए।
  5. राजस्थान विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष कौन बनी थीं?
    A) कमला बेनीवाल
    B) सुमित्रा सिंह
    C) तारा भंडारी
    D) यशोदा देवी
    उत्तर: B) सुमित्रा सिंह
    कारण: श्रीमती सुमित्रा सिंह 12वीं विधानसभा में पहली महिला अध्यक्ष बनीं।
  6. विधानसभा अध्यक्ष किस अनुच्छेद के अनुसार धन विधेयक को प्रमाणित करता है?
    A) अनुच्छेद 178
    B) अनुच्छेद 189
    C) अनुच्छेद 199(3)
    D) अनुच्छेद 202
    उत्तर: C) अनुच्छेद 199(3)
    कारण: अनुच्छेद 199(3) में अध्यक्ष को धन विधेयक प्रमाणित करने का अधिकार है।
  7. राजस्थान विधानसभा की बैठक के लिए आवश्यक कोरम कितना है?
    A) 10 सदस्य
    B) 15 सदस्य
    C) 20 सदस्य
    D) 25 सदस्य
    उत्तर: C) 20 सदस्य
    कारण: अनुच्छेद 189 के अनुसार 200 का दसवां भाग 20 सदस्य अनिवार्य है।
  8. किस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल विधानसभा सत्र आहूत और सत्रावसान करता है?
    A) अनुच्छेद 170
    B) अनुच्छेद 174
    C) अनुच्छेद 180
    D) अनुच्छेद 188
    उत्तर: B) अनुच्छेद 174
    कारण: अनुच्छेद 174 के तहत राज्यपाल सत्र बुलाता और सत्रावसान करता है।
  9. 1953 में बांसवाड़ा उपचुनाव जीतकर पहली महिला विधायक कौन बनी थीं?
    A) यशोदा देवी
    B) कमला बेनीवाल
    C) नगेंद्र बाला
    D) प्रतिभा पाटिल
    उत्तर: A) यशोदा देवी
    कारण: श्रीमती यशोदा देवी उपचुनाव जीतकर पहली महिला विधायक बनी थीं।
  10. 104वें संविधान संशोधन 2019 ने विधानसभा में किस व्यवस्था को समाप्त किया?
    A) SC आरक्षण
    B) ST आरक्षण
    C) आंग्ल-भारतीय मनोनयन
    D) उपाध्यक्ष पद
    उत्तर: C) आंग्ल-भारतीय मनोनयन
    कारण: 104वें संशोधन ने आंग्ल-भारतीय मनोनयन को समाप्त कर दिया।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. संविधान के अनुच्छेद 174 के मुख्य नियम क्या हैं? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाता है, सत्रावसान करता है और सदन भंग कर सकता है। दो सत्रों की बैठकों के बीच 6 माह से अधिक अंतर नहीं हो सकता।
  2. राजस्थान विधानसभा में सीटों के विकास (1952-1977) को संक्षेप में लिखिए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: 1952 में 160 सीटें, 1957 में अजमेर विलय से 176 सीटें, 1967 में 184 और 1977 में 200 सीटें हो गईं, जो अब तक स्थिर हैं।
  3. विधानसभा अध्यक्ष के दो विशेष अधिकार लिखिए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: 1. अनुच्छेद 199(3) में धन विधेयक को प्रमाणित करना। 2. अनुच्छेद 189 में मत बराबर होने पर निर्णायक मत देना।
  4. राजस्थान विधानसभा में कोरम का नियम क्या है? (3 marks)
    उत्तर रूपरेखा: अनुच्छेद 189(3) अनुसार कोरम कुल सदस्य संख्या का 1/10 भाग होता है। राजस्थान में 200 सीटें होने से न्यूनतम 20 सदस्य जरूरी हैं।

Long Questions (5–10 marks)

  1. राज्य विधानसभा की शक्तियों और कार्यों का परीक्षण कीजिए। (5 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - विधायी शक्तियां: राज्य व समवर्ती सूची के विषयों पर कानून बनाने का अधिकार।
    - वित्तीय शक्तियां: बजट पारित करना और धन विधेयक (अनुच्छेद 198-199) पर पूर्ण नियंत्रण।
    - कार्यपालिका पर नियंत्रण: प्रश्नकाल, शून्यकाल और अविश्वास प्रस्ताव से जवाबदेही तय करना।
    - निर्वाचन कार्य: निर्वाचित विधायक राष्ट्रपति और राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में भाग लेते हैं।
  2. राजस्थान विधानसभा के गठन, सीटों के विकास और विधायी कार्यपद्धति पर प्रकाश डालिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - गठन और स्वरूप: एकसदनीय व्यवस्था (राज्यपाल और विधानसभा)। कुल 200 सीटें (SC 34, ST 25, सामान्य 141)।
    - सीटों का विकास: 1952 में 160, 1957 में 176, 1967 में 184 और 1977 से 200 सीटें स्थिर।
    - प्रमुख व्यक्तित्व: प्रथम अध्यक्ष नरोत्तम लाल जोशी, प्रथम उपाध्यक्ष लाल सिंह शक्तावत, प्रथम महिला अध्यक्ष सुमित्रा सिंह।
    - विधायी कार्यपद्धति: विधेयक के तीन वाचन, अनुच्छेद 200 में राज्यपाल की अनुमति, धन विधेयक पर विधानसभा की सर्वोच्चता और 20 सदस्यों का कोरम।

FAQs

राजस्थान में विधान परिषद क्यों नहीं है?

अनुच्छेद 168 राज्यों को एक या दो सदन रखने की व्यवस्था देता है। राजस्थान में आरंभ से ही एकसदनीय व्यवस्था रही है। विधानसभा ने 2012 में अनुच्छेद 169 के तहत विधान परिषद गठन का संकल्प पारित किया था, लेकिन संसद से इसका कानून पारित न होने के कारण अभी केवल विधानसभा ही कार्य कर रही है।

राजस्थान विधानसभा में कोरम कितना निर्धारित है?

अनुच्छेद 189 के अनुसार कोरम कुल संख्या का दसवां भाग (1/10) होता है। राजस्थान में 200 सदस्य होने के कारण बैठक चलाने के लिए कम से कम 20 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक है।

विधानसभा अध्यक्ष को पद से कैसे हटाया जा सकता है?

अनुच्छेद 179 के अनुसार विधानसभा के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित संकल्प से अध्यक्ष को पद से हटाया जा सकता है, जिसके लिए 14 दिन पूर्व सूचना जरूरी है।

राजस्थान विधानसभा की प्रथम बैठक कब और कहाँ हुई थी?

प्रथम राजस्थान विधानसभा का गठन 23 फरवरी 1952 को हुआ और पहली बैठक 29 मार्च 1952 को जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में हुई थी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: भारतीय संविधान के भाग 6 में अनुच्छेद 168 से 212 तक राज्य विधानमंडल के गठन, शक्तियों और कार्यपद्धति का उल्लेख है।
राजस्थान की राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में राजस्थान विधानसभा और राज्य विधानमंडल: संगठन, शक्तियां और कार्य एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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