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Social Religious Reform Movement in Hindi: 19वीं-20वीं सदी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय इतिहास (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Social Religious Reform Movement in Hindi: 19वीं-20वीं सदी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन - आधुनिक भारत और स्वतंत्रता संग्राम
  • • अवलोकन: Quick Answer: Social Religious Reform Movement in Hindi: 19वीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा और आधुनिक विचारों के संपर्क से भारतीय समाज में नवजागरण का आरंभ ह...
Quick Answer: Social Religious Reform Movement in Hindi: 19वीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा और आधुनिक विचारों के संपर्क से भारतीय समाज में नवजागरण का आरंभ हुआ। राजा राममोहन राय ("भारतीय पुनर्जागरण के जनक") ने 1828 में ब्रह्म समाज की स्थापना की और उनके प्रयासों से 1829 में सती प्रथा निषेध कानून बना। ईश्वरचंद्र विद्यासागर के प्रयासों से 1856 में हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित हुआ। स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में बंबई में आर्य समाज की स्थापना की और "वेदों की ओर लौटो" का उद्घोष किया; उनके ग्रंथ "सत्यार्थ प्रकाश" के संशोधित संस्करण का काम राजस्थान के उदयपुर से जुड़ा है। स्वामी विवेकानंद ने 1893 के शिकागो सम्मेलन में वेदांत का डंका बजाया और 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की। ज्योतिराव फुले ने 1873 में सत्यशोधक समाज बनाया।
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1. 19वीं सदी का भारतीय नवजागरण: पृष्ठभूमि और कारण (Genesis of Indian Renaissance)

ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की स्थापना के साथ भारत में वैज्ञानिक तर्कवाद, मानवतावाद और पाश्चात्य शिक्षा का प्रभाव पड़ा। भारतीय विचारकों ने अनुभव किया कि सामाजिक कुरीतियों—जैसे सती प्रथा, बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या, अस्पृश्यता और बहुविवाह—के रहते देश प्रगति नहीं कर सकता। इस प्रकार 19वीं सदी के आरंभ में सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों की शुरुआत हुई, जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन की नींव रखी।

2. राजा राममोहन राय, ब्रह्म समाज और ईश्वरचंद्र विद्यासागर (Brahmo Samaj & Reformers)

राजा राममोहन राय (1772–1833 ई.): इन्हें 'भारतीय पुनर्जागरण का जनक', 'आधुनिक भारत का अग्रदूत' और 'नवप्रभात का तारा' कहा जाता है:

  • संगठन: 1815 में कलकत्ता में 'आत्मीय सभा' और 20 अगस्त 1828 को 'ब्रह्म समाज' की स्थापना की। उन्होंने एकेश्वरवाद का प्रचार किया और मूर्ति पूजा, कर्मकांड व पुरोहितवाद का कड़ा विरोध किया।
  • सती प्रथा उन्मूलन: उनके अथक प्रयासों से गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने 4 दिसंबर 1829 को नियम 17 (Regulation XVII) के तहत सती प्रथा को गैर-कानूनी घोषित कर आपराधिक हत्या घोषित किया।
  • पत्रकारिता और रचनाएं: बंगाली में 'संवाद कौमुदी' (1821) और फारसी में 'मिरात-उल-अखबार' (1822) निकाला। 'तुहफत-उल-मुवाहिदीन' (एकेश्वरवादियों को उपहार) और 'प्रीसेप्ट्स ऑफ जीसस' लिखी। मुगल सम्राट अकबर द्वितीय ने उन्हें 'राजा' की उपाधि दी थी। 1833 में ब्रिस्टल (इंग्लैंड) में उनका निधन हुआ।
  • तत्वबोधिनी सभा: 1839 में देवेंद्रनाथ टैगोर ने तत्वबोधिनी सभा बनाई और बाद में ब्रह्म समाज का नेतृत्व संभाला। केशवचंद्र सेन के प्रयासों से ब्रह्म समाज अखिल भारतीय आंदोलन बना।

ईश्वरचंद्र विद्यासागर (1820–1891 ई.): संस्कृत कॉलेज कलकत्ता के प्राचार्य, जिन्होंने गैर-ब्राह्मणों के लिए संस्कृत की शिक्षा खोली। उनके गंभीर प्रयासों से लॉर्ड कैनिंग के समय 1856 में 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV of 1856) पारित हुआ। उन्होंने 1857-58 में बंगाल में करीब 35 बालिका विद्यालय खुलवाए और बेथ्यून स्कूल से जुड़े रहे।

3. स्वामी दयानंद सरस्वती और आर्य समाज: राजस्थान से संबंध (Arya Samaj & Rajasthan)

स्वामी दयानंद सरस्वती (1824–1883 ई.): मूल नाम 'मूलशंकर', गुजरात के टंकारा में जन्मे। मथुरा के स्वामी विरजानंद से वैदिक शिक्षा प्राप्त की:

आयाम ऐतिहासिक तथ्य और सिद्धांत राजस्थान से विशिष्ट संबंध
आर्य समाज की स्थापना 10 अप्रैल 1875 को बंबई में स्थापना; 1877 में लाहौर में आर्य समाज बना और उसके 10 नियम तय हुए, जिसके बाद पंजाब इसका सबसे मजबूत केंद्र बना। राजस्थान के देशी नरेशों (उदयपुर, जोधपुर, शाहपुरा, करौली) को वैदिक सिद्धांतों से जोड़ा।
'सत्यार्थ प्रकाश' ग्रंथ हिंदी भाषा में रचित कालजयी ग्रंथ; 14 समुल्लासों में वैदिक धर्म की व्याख्या। पहला संस्करण 1875 में छपा। संशोधित (दूसरा) संस्करण 1882-83 में तैयार हुआ, और उसी दौरान स्वामी जी उदयपुर (राजस्थान) के नवलखा महल में महाराणा सज्जन सिंह के अतिथि रहे; राजस्थान की परंपरा इसका लेखन यहीं मानती है।
प्रमुख सिद्धांत व नारे 'वेदों की ओर लौटो' (Go Back to the Vedas); शुद्धि आंदोलन (फिर से हिंदू धर्म में प्रवेश); मूर्ति पूजा व अवतारवाद का खंडन; जन्मजात जाति प्रथा का विरोध। दयानंद ने 'स्वदेशी', 'स्वभाषा' और 'स्वराज्य' पर जोर दिया; 'स्वराज्य' शब्द का शुरुआती प्रयोग करने वालों में उन्हें गिना जाता है।
शिक्षा और देहावसान डी.ए.वी. कॉलेज (1886 लाहौर - लाला हंसराज) और गुरुकुल कांगड़ी (1902 हरिद्वार - स्वामी श्रद्धानंद)। जोधपुर प्रवास के दौरान उन्हें विष दिए जाने की बात मानी जाती है (परंपरा नर्तकी नन्हीं जान का नाम लेती है); इसके बाद 30 अक्टूबर 1883 (दीपावली) को अजमेर में उनका निधन हुआ।

4. स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण मिशन: शिकागो भाषण (Swami Vivekananda & Ramakrishna Mission)

स्वामी विवेकानंद (1863–1902 ई.): मूल नाम नरेंद्रनाथ दत्त, दक्षिणेश्वर (कलकत्ता) के संत रामकृष्ण परमहंस के शिष्य थे:

  • शिकागो विश्व धर्म संसद (1893): 11 सितंबर 1893 को शिकागो (अमेरिका) में आयोजित विश्व धर्म संसद में उनके संबोधन 'अमेरिका के भाइयो और बहनो' ने पश्चिमी जगत को भारतीय वेदांत और सहिष्णुता से मुग्ध कर दिया। खेतड़ी (राजस्थान) के राजा अजीत सिंह ने उन्हें 'विवेकानंद' नाम सुझाया माना जाता है और उनकी शिकागो यात्रा (टिकट आदि) में आर्थिक मदद की।
  • रामकृष्ण मिशन की स्थापना: 1 मई 1897 को कलकत्ता (बागबाजार में बलराम बोस के घर) में स्थापना की; बाद में (1898-99) बेलूर मठ इसका मुख्यालय बना। इसका मूल मंत्र था—'आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च' (अपनी मुक्ति और संसार के कल्याण के लिए) और 'नर सेवा ही नारायण सेवा है'। उन्होंने कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग पर बल दिया। नवंबर 1894 में न्यूयॉर्क में वेदांत सोसाइटी की स्थापना की।

5. पश्चिमी और दक्षिणी भारत के सुधार आंदोलन (Western, Southern & Other Movements)

सामाजिक न्याय और जातिवाद विरोधी आंदोलनों की विस्तृत श्रृंखला ने भारतीय जनमानस को झकझोरा:

सुधार संस्था / आंदोलन संस्थापक और वर्ष मुख्य उद्देश्य, कार्य और पुस्तकें
सत्यशोधक समाज महात्मा ज्योतिराव फुले (1873 ई., महाराष्ट्र) ब्राह्मणवादी वर्चस्व, छुआछूत और पुरोहितवाद का विरोध; शूद्रों व स्त्रियों की शिक्षा। 1848 में पुणे में पहली बालिका शाला खोली (सावित्रीबाई फुले के साथ)। प्रसिद्ध पुस्तक: 'गुलामगिरी' (1873, अमेरिकी दासता विरोधी आंदोलन को समर्पित) और 'शेतकऱ्याचा आसूड'।
प्रार्थना समाज डॉ. आत्माराम पांडुरंग (1867 ई., बंबई) केशवचंद्र सेन की प्रेरणा से स्थापना; महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर इसके प्रमुख नेता बने। जाति प्रथा का विरोध और विधवा विवाह का समर्थन।
थियोसोफिकल सोसाइटी मैडम ब्लावत्सकी व कर्नल अल्काट (1875 न्यूयॉर्क, 1882 अड्यार मद्रास मुख्यालय) श्रीमती एनी बेसेंट 1889 में सोसाइटी से जुड़ीं, 1893 में भारत आईं और 1907 में इसकी अध्यक्ष बनीं। हिंदू धर्म व प्राचीन दर्शन का गौरव पुनर्जीवित किया। 1898 में वाराणसी में 'सेंट्रल हिंदू कॉलेज' खोला जो 1916 में मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से 'बनारस हिंदू विश्वविद्यालय' (BHU) बना।
अलीगढ़ आंदोलन सर सैयद अहमद खान (1875 ई. से) मुस्लिम समाज में आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा का प्रसार; 24 मई 1875 को अलीगढ़ में MAO स्कूल खुला, जो 1877 में 'मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेज' बना (1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बना)। पत्रिका: 'तहजीब-उल-अखलाक'।

राजस्थान में स्वतंत्रता पूर्व सामाजिक चेतना के लिए राजस्थान में स्वतंत्रता पूर्व सामाजिक सुधार पढ़ें। आगे की राजनीतिक जागृति के लिए जन जागरण और स्वतंत्रता संग्राम और शिक्षा के प्रसार के लिए स्वतंत्रता पूर्व शैक्षिक परिदृश्य देखें।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • राजा राममोहन राय के प्रयासों से 4 दिसंबर 1829 को लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने सती प्रथा को पूर्णतः अवैध घोषित किया।
  • ईश्वरचंद्र विद्यासागर के सतत आंदोलन से 1856 में 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Act XV) पारित हुआ।
  • स्वामी दयानंद सरस्वती ने 1875 में बंबई में आर्य समाज की स्थापना की; 'सत्यार्थ प्रकाश' का संशोधित संस्करण उदयपुर प्रवास (1882-83) से जुड़ा है।
  • स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को शिकागो विश्व धर्म संसद में ऐतिहासिक भाषण दिया और 1897 में रामकृष्ण मिशन की स्थापना की।
  • महात्मा ज्योतिराव फुले ने 1873 में महाराष्ट्र में 'सत्यशोधक समाज' बनाया और वंचितों की मुक्ति के लिए 'गुलामगिरी' पुस्तक लिखी।

RAS Prelims MCQ

  1. 'सत्यार्थ प्रकाश' के संशोधित (दूसरे) संस्करण के लेखन से राजस्थान का कौन सा नगर जुड़ा है, जहां दयानंद नवलखा महल में ठहरे थे?
    A) जयपुर
    B) अजमेर
    C) उदयपुर (Udaipur)
    D) जोधपुर
    उत्तर: C) उदयपुर (Udaipur)
    कारण: 1882-83 में स्वामी दयानंद महाराणा सज्जन सिंह के अतिथि बनकर उदयपुर के नवलखा महल में रहे; परंपरा संशोधित सत्यार्थ प्रकाश का लेखन यहीं मानती है।
  2. राजा राममोहन राय के प्रयासों से ब्रिटिश सरकार ने सती प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध किस वर्ष और किस गवर्नर-जनरल के समय लगाया?
    A) 1813, लॉर्ड हेस्टिंग्स
    B) 1829, लॉर्ड विलियम बेंटिंक (Lord William Bentinck)
    C) 1856, लॉर्ड कैनिंग
    D) 1835, लॉर्ड मेटकाफ
    उत्तर: B) 1829, लॉर्ड विलियम बेंटिंक (Lord William Bentinck)
    कारण: 4 दिसंबर 1829 को बंगाल सती नियमन (Regulation XVII) पारित कर सती प्रथा को गैर-कानूनी और दंडनीय घोषित किया गया।
  3. 11 सितंबर 1893 को शिकागो (अमेरिका) में आयोजित 'विश्व धर्म संसद' में स्वामी विवेकानंद को भेजने और वित्तीय सहयोग देने में राजस्थान के किस शासक की निर्णायक भूमिका थी?
    A) महाराजा गंगा सिंह (बीकानेर)
    B) महाराजा अजीत सिंह (खेतड़ी)
    C) महाराणा सज्जन सिंह (उदयपुर)
    D) महाराजा मानसिंह द्वितीय (जयपुर)
    उत्तर: B) महाराजा अजीत सिंह (खेतड़ी)
    कारण: खेतड़ी के राजा अजीत सिंह ने स्वामी जी को 'विवेकानंद' नाम सुझाया माना जाता है और उनकी शिकागो यात्रा के टिकट व खर्च में मदद की।
  4. ईश्वरचंद्र विद्यासागर के अथक प्रयासों से ब्रिटिश सरकार ने किस वर्ष 'हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम' (Hindu Widows' Remarriage Act) पारित किया?
    A) 1829 ई.
    B) 1856 ई.
    C) 1875 ई.
    D) 1891 ई.
    उत्तर: B) 1856 ई.
    कारण: लॉर्ड कैनिंग के कार्यकाल में 26 जुलाई 1856 को अधिनियम XV के रूप में विधवा पुनर्विवाह को वैधानिक मान्यता मिली।
  5. दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के अधिकारों के लिए 1873 में महाराष्ट्र में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना किसने की थी?
    A) डॉ. बी.आर. आंबेडकर
    B) महात्मा ज्योतिराव फुले (Jyotirao Phule)
    C) गोपाल कृष्ण गोखले
    D) महादेव गोविंद रानाडे
    उत्तर: B) महात्मा ज्योतिराव फुले (Jyotirao Phule)
    कारण: ज्योतिराव फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की और 'गुलामगिरी' नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी।
  6. 'वेदों की ओर लौटो' (Go Back to the Vedas) का प्रसिद्ध उद्घोष किसने दिया था?
    A) स्वामी विवेकानंद
    B) स्वामी दयानंद सरस्वती (Dayanand Saraswati)
    C) राजा राममोहन राय
    D) रामकृष्ण परमहंस
    उत्तर: B) स्वामी दयानंद सरस्वती (Dayanand Saraswati)
    कारण: आर्य समाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती ने वैदिक धर्म को विशुद्ध और त्रुटिहीन मानते हुए वेदों की ओर लौटने का आह्वान किया।
  7. स्वामी विवेकानंद ने 'रामकृष्ण मिशन' की स्थापना किस वर्ष की थी?
    A) 1886
    B) 1893
    C) 1897
    D) 1902
    उत्तर: C) 1897
    कारण: 1 मई 1897 को कलकत्ता (बागबाजार, बलराम बोस का घर) में मिशन बना; बेलूर मठ 1898-99 में बना और बाद में मुख्यालय बना। 1893 शिकागो भाषण का वर्ष है।
  8. राजा राममोहन राय को 'राजा' की उपाधि किस मुगल सम्राट ने दी थी?
    A) शाहआलम द्वितीय
    B) अकबर द्वितीय (Akbar II)
    C) बहादुर शाह जफर
    D) मोहम्मद शाह
    उत्तर: B) अकबर द्वितीय (Akbar II)
    कारण: मुगल सम्राट अकबर द्वितीय ने अपनी पेंशन बढ़वाने के लिए उन्हें अपना दूत बनाकर ब्रिटिश सम्राट विलियम चतुर्थ के दरबार भेजा और राजा की पदवी दी।
  9. थियोसोफिस्ट एनी बेसेंट ने 1898 में वाराणसी में जो 'सेंट्रल हिंदू कॉलेज' खोला, वह आगे चलकर किस विश्वविद्यालय का आधार बना?
    A) इलाहाबाद विश्वविद्यालय
    B) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)
    C) अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय
    D) दिल्ली विश्वविद्यालय
    उत्तर: B) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU)
    कारण: 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से 'काशी हिंदू विश्वविद्यालय' (BHU) बना और सेंट्रल हिंदू कॉलेज उसका पहला कॉलेज बना।
  10. आर्य समाज के संस्थापक स्वामी दयानंद सरस्वती का निर्वाण (देहावसान) 30 अक्टूबर 1883 को राजस्थान के किस शहर में हुआ था?
    A) उदयपुर
    B) जोधपुर
    C) अजमेर (Ajmer)
    D) जयपुर
    उत्तर: C) अजमेर (Ajmer)
    कारण: जोधपुर में विष दिए जाने के बाद उपचार के लिए अजमेर लाए गए स्वामी जी ने 30 अक्टूबर 1883 (दीपावली के दिन) को अजमेर में अंतिम सांस ली।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. राजा राममोहन राय को 'भारतीय पुनर्जागरण का अग्रदूत' क्यों कहा जाता है? (20 शब्द)
    उत्तर: उन्होंने आधुनिक वैज्ञानिक शिक्षा का समर्थन किया, सती प्रथा व बाल विवाह के विरुद्ध संघर्ष किया और स्वतंत्र भारतीय पत्रकारिता की नींव रखी।
  2. स्वामी दयानंद सरस्वती के 'सत्यार्थ प्रकाश' का केंद्रीय message क्या है? (20 शब्द)
    उत्तर: वेदों की प्रामाणिकता, सामाजिक कुरीतियों का खंडन, एकेश्वरवाद और स्वदेशी व स्वराज्य के आधार पर नैतिक और चरित्रवान समाज का निर्माण।
  3. स्वामी विवेकानंद के शिकागो भाषण (1893) का क्या ऐतिहासिक महत्व था? (20 शब्द)
    उत्तर: इसने पाश्चात्य जगत में भारतीय दर्शन, सहिष्णुता और सनातन धर्म की श्रेष्ठता को स्थापित कर भारतीयों में राष्ट्रीय आत्मगौरव का संचार किया।
  4. महात्मा ज्योतिराव फुले के 'सत्यशोधक समाज' के मुख्य उद्देश्य क्या थे? (20 शब्द)
    उत्तर: शूद्रों और महिलाओं को पुरोहिती शोषण व अशिक्षा से मुक्त कराना, कन्या शिक्षा को बढ़ावा देना और सामाजिक समानता स्थापित करना।
  5. राजस्थान के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के क्या संबंध थे? (20 शब्द)
    उत्तर: खेतड़ी नरेश अजीत सिंह उनके शिष्य और मित्र थे; माना जाता है कि उन्होंने 'विवेकानंद' नाम सुझाया और अमेरिका यात्रा के टिकट व खर्च में मदद की।

Long Questions (5–10 marks)

  1. 19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों (ब्रह्म समाज, आर्य समाज और रामकृष्ण मिशन) की प्रवृत्तियों का तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए और भारत में राष्ट्रीय चेतना के उदय में इनकी भूमिका का परीक्षण कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: 19वीं सदी के सुधार आंदोलनों ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की वैचारिक जमीन तैयार की:
    1. सुधारों के दृष्टिकोण:
    - ब्रह्म समाज (बौद्धिक व सुधारवादी): पश्चिमी तर्कवाद और उपनिषदों का समन्वय; सती प्रथा निषेध और स्त्री शिक्षा पर बल।
    - आर्य समाज (पुनरुत्थानवादी व आक्रामक): वेदों को अकाट्य मानकर सामाजिक समानता, जातिभेद का खंडन और स्वराज्य व स्वदेशी का उद्घोष।
    - रामकृष्ण मिशन (समन्वयवादी व सेवाभावी): वेदांत दर्शन को लोक-कल्याण ('नर सेवा ही नारायण सेवा') से जोड़ा; सभी धर्मों की सत्यता स्वीकारी।
    2. राष्ट्रीय चेतना में योगदान: इन आंदोलनों ने भारतीयों की औपनिवेशिक हीनभावना को समाप्त कर सांस्कृतिक आत्मगौरव जगाया। तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने इन संतों से राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा ली।
  2. स्वामी दयानंद सरस्वती और आर्य समाज के सामाजिक-धार्मिक सिद्धांतों का विवेचन करते हुए राजस्थान में इनके प्रभाव और योगदान की समीक्षा कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: स्वामी दयानंद सरस्वती के सिद्धांत और राजस्थान में प्रभाव:
    1. मूल सिद्धांत: वैदिक धर्म की पुनर्स्थापना, मूर्ति पूजा व अंधविश्वास का विरोध, बाल विवाह पर रोक, विधवा विवाह का समर्थन और शूद्रों व स्त्रियों को वेदों के अध्ययन का अधिकार दिलाना।
    2. राजस्थान में प्रभाव:
    - सत्यार्थ प्रकाश का संशोधन: 1882-83 में उदयपुर में महाराणा सज्जन सिंह के अतिथि रहे; परंपरा संशोधित सत्यार्थ प्रकाश का लेखन नवलखा महल में मानती है।
    - परोपकारिणी सभा: 1883 में उदयपुर में सामाजिक व शैक्षणिक कार्यों के लिए परोपकारिणी सभा बनाई, जिसके अध्यक्ष महाराणा सज्जन सिंह थे।
    - देशी शासकों का मार्गदर्शन: शाहपुरा, जोधपुर, करौली के शासकों को प्रशासनिक सुधारों, गो-संवर्धन और मदिरा त्यागने की प्रेरणा दी।
    - शिक्षा का प्रसार: राजस्थान में डी.ए.वी. शिक्षण संस्थानों और आर्य समाज अनाथालयों (अजमेर) की श्रृंखला ने स्वतंत्रता सेनानियों की नई पीढ़ी तैयार की।

FAQs

प्रश्न: 'शारदा एक्ट' (Sharda Act 1929) का संबंध किससे था और इसके निर्माता कौन थे?
उत्तर: बाल विवाह रोकथाम से संबंधित शारदा एक्ट 1929 अजमेर (राजस्थान) के प्रसिद्ध समाज सुधारक 'हरविलास शारदा' के प्रयासों से बना, जिसमें विवाह की न्यूनतम आयु लड़की के लिए 14 वर्ष और लड़के के लिए 18 वर्ष तय की गई।

प्रश्न: 'आत्मीय सभा' की स्थापना कब और किसने की थी?
उत्तर: आत्मीय सभा की स्थापना 1815 ईस्वी में राजा राममोहन राय ने कलकत्ता में एकेश्वरवादी विचारों के प्रचार के लिए की थी।

प्रश्न: स्वामी विवेकानंद की शिष्या भगिनी निवेदिता का मूल नाम क्या था?
उत्तर: स्वामी विवेकानंद की आयरिश शिष्या सिस्टर निवेदिता का मूल नाम 'मार्गरेट एलिजाबेथ नोबल' था।

प्रश्न: स्वामी दयानंद सरस्वती के बचपन का मूल नाम क्या था?
उत्तर: स्वामी दयानंद सरस्वती के बचपन का नाम 'मूलशंकर' था।

प्रश्न: 'गुलामगिरी' पुस्तक महात्मा ज्योतिराव फुले ने किस देश के आंदोलन को समर्पित की थी?
उत्तर: ज्योतिराव फुले ने अपनी पुस्तक गुलामगिरी को अमेरिका के नीग्रो (अश्वेत) दासों को मुक्त कराने वाले अमेरिकी दासता विरोधी आंदोलनकारियों को समर्पित किया था।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • आत्मीय सभा 1815, ब्रह्म समाज 20 अगस्त 1828: राजा राममोहन राय।
  • सती प्रथा पर रोक: Regulation XVII, 4 दिसंबर 1829, लॉर्ड विलियम बेंटिंक।
  • हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम (Act XV): 26 जुलाई 1856, लॉर्ड कैनिंग; प्रेरणा विद्यासागर।
  • आर्य समाज: 10 अप्रैल 1875, बंबई; दयानंद का निधन 30 अक्टूबर 1883, अजमेर।
  • सत्यशोधक समाज 1873 (ज्योतिराव फुले); पुस्तक 'गुलामगिरी' 1873।
  • रामकृष्ण मिशन: 1 मई 1897, कलकत्ता; मुख्यालय बाद में बेलूर मठ।
  • थियोसोफिकल सोसाइटी: 1875 न्यूयॉर्क, 1882 से अड्यार (मद्रास); एनी बेसेंट 1907 में अध्यक्ष।
  • शारदा एक्ट 1929 (हरविलास शारदा, अजमेर): लड़की 14, लड़का 18 वर्ष।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Social Religious Reform Movement in Hindi: 19वीं सदी में पाश्चात्य शिक्षा और आधुनिक विचारों के संपर्क से भारतीय समाज में नवजागरण का आरंभ हुआ।
भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रम में Social Religious Reform Movement in Hindi: 19वीं-20वीं सदी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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