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Indian National Movement in Hindi: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख चरण (1885-1919): उदारवादी, उग्रवादी और स्वदेशी आंदोलन

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय इतिहास (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Indian National Movement in Hindi: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख चरण (1885-1919): उदारवादी, उग्रवादी और स्वदेशी आंदोलन - आधुनिक भारत और स्वतंत्रता संग्राम
  • • अवलोकन: Quick Answer: Indian National Movement in Hindi: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Stages of Indian National Movement 1885-1919) का प्रारंभिक इतिहास दो प्रमुख वि...
Quick Answer: Indian National Movement in Hindi: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Stages of Indian National Movement 1885-1919) का प्रारंभिक इतिहास दो प्रमुख विचारधाराओं में विभाजित था। 28 दिसंबर 1885 को बॉम्बे में ए.ओ. ह्यूम की पहल पर व्योमेश चंद्र बनर्जी की अध्यक्षता में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना हुई। पहला चरण "उदारवादी चरण" (1885–1905) कहलाया, जिसमें दादाभाई नौरोजी, गोपाल कृष्ण गोखले और फिरोजशाह मेहता ने संवैधानिक दायरे में प्रार्थना, याचिका और विरोध (3P पद्धति) से सुधार मांगे और नौरोजी ने धन निष्कासन सिद्धांत दिया। दूसरा चरण "उग्रवादी चरण" (1905–1919) था, जिसमें बाल गंगाधर तिलक ("स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है"), लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल) और अरविंद घोष ने स्वराज्य, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा को हथियार बनाया। 1905 के बंगाल विभाजन ने स्वदेशी आंदोलन को जन्म दिया। 1907 में सूरत विभाजन में कांग्रेस टूट गई। 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधार में मुसलमानों को पृथक निर्वाचन मिला। 1916 में तिलक व एनी बेसेंट के होम रूल आंदोलन और ऐतिहासिक लखनऊ समझौते ने कांग्रेस के दोनों धड़ों और मुस्लिम लीग को एक मंच पर ला दिया।
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1. उदारवादी चरण (1885–1905): कांग्रेस की स्थापना और कार्यपद्धति (Moderate Phase)

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना (28 दिसंबर 1885): सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक ए.ओ. ह्यूम के प्रयासों से बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन हुआ। इसकी अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की और इसमें 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उस समय भारत के वायसराय लॉर्ड डफरिन थे।

उदारवादी नेताओं की विचारधारा और कार्यपद्धति:

  • प्रमुख नेता: दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता, दिनशा वाचा, गोपाल कृष्ण गोखले, सुरेंद्रनाथ बनर्जी और बदरुद्दीन तैयबजी।
  • कार्यपद्धति (3P Method): उदारवादी ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखते थे। उनकी कार्यपद्धति को 3P यानी Prayer (प्रार्थना), Petition (याचिका) और Protest (विरोध) कहा जाता था। वे परिषदों में भारतीयों के प्रतिनिधित्व, सिविल सेवा परीक्षा भारत में आयोजित कराने और सैन्य व्यय घटाने की मांग करते थे।
  • धन निष्कासन सिद्धांत (Drain of Wealth): दादाभाई नौरोजी ('ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया') ने अपनी पुस्तक 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (1901) में प्रमाणित किया कि ब्रिटिश शासन किस प्रकार भारतीय संपत्ति और राजस्व को बिना किसी आर्थिक प्रतिफल के ब्रिटेन भेज रहा है। रमेशचंद्र दत्त ने 'इकोनॉमिक हिस्ट्री ऑफ इंडिया' में इस लूट को उजागर किया।

2. उग्रवादी चरण (1905–1919): विचारधारा और प्रमुख नायक (Extremist Phase)

प्लेग, अकाल और लॉर्ड कर्जन की दमनकारी नीतियों (1904 विश्वविद्यालय कानून) ने युवाओं में असंतोष भर दिया। इथियोपिया के हाथों इटली (1896) और जापान के हाथों रूस (1905) की हार ने यूरोपीय अजेयता का भ्रम तोड़ा। इसलिए कांग्रेस में उग्रवादी धारा उभरी।

प्रमुख नेता: लाल-बाल-पाल और अरविंद घोष:

  • बाल गंगाधर तिलक: नारा—'स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा'। 1893 में गणपति उत्सव और 1895 में शिवाजी उत्सव प्रारंभ किया। मराठी में 'केसरी' और अंग्रेजी में 'द महराट्टा' समाचार पत्र निकाले। वैलेंटाइन शिरोल ने उन्हें 'भारतीय अशांति का जनक' कहा।
  • लाला लाजपत राय ('पंजाब केसरी'): अमेरिका में होम रूल लीग बनाई और 'यंग इंडिया' पुस्तक लिखी।
  • बिपिन चंद्र पाल और अरविंद घोष: अरविंद घोष ने 'वंदे मातरम' पत्र में निष्क्रिय प्रतिरोध का सिद्धांत दिया।
  • उग्रवादियों के चार सूत्र: स्वराज्य, स्वदेशी, बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा।

3. बंगाल विभाजन (1905), स्वदेशी आंदोलन और सूरत विभाजन (1907)

वायसराय लॉर्ड कर्जन की सरकार ने 19 जुलाई 1905 को बंगाल विभाजन की घोषणा की (कुछ किताबें 20 जुलाई लिखती हैं) और 16 अक्टूबर 1905 को यह लागू हुआ। इसका वास्तविक उद्देश्य बंगाली राष्ट्रवाद को तोड़ना था।

घटना / आंदोलन वर्ष और मुख्य नेतृत्वकर्ता ऐतिहासिक प्रभाव
स्वदेशी व बहिष्कार आंदोलन 7 अगस्त 1905 (कलकत्ता टाउन हॉल) विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का प्रस्ताव पारित। 16 अक्टूबर 1905 को पूरे बंगाल में शोक दिवस व राखी दिवस मनाया गया। रवींद्रनाथ टैगोर ने 'आमार शोनार बांला' रचा। आचार्य पी.सी. राय की 'बंगाल केमिकल' (1901 में बनी) जैसी भारतीय कंपनियों और स्वदेशी स्टोरों को बढ़ावा मिला।
कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन दिसंबर 1906 (अध्यक्ष: दादाभाई नौरोजी) कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज्य' को अपना लक्ष्य घोषित किया और स्वदेशी, बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा के प्रस्ताव पारित किए।
सूरत विभाजन (Surat Split) दिसंबर 1907 (अध्यक्ष: डॉ. रास बिहारी घोष) 23वें अधिवेशन में अध्यक्ष पद को लेकर नरमपंथियों और गरमपंथियों में टकराव हुआ। कांग्रेस विभाजित हो गई। 1908 में तिलक को 6 वर्ष के लिए मांडले जेल (बर्मा) भेजा गया, जहां उन्होंने 'गीता रहस्य' लिखी।

4. मॉर्ले-मिंटो सुधार (1909), होम रूल लीग और लखनऊ समझौता (1916)

ब्रिटिश हुकूमत ने राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर करने के लिए 'फूट डालो और राज करो' की नीति अपनाई:

घटना / सुधार वर्ष महत्वपूर्ण प्रावधान और प्रभाव
मुस्लिम लीग की स्थापना 30 दिसंबर 1906 (ढाका) नवाब सलीमुल्लाह की पहल पर ढाका में स्थापना हुई; आगा खान इसके पहले अध्यक्ष बने।
मॉर्ले-मिंटो सुधार (Act 1909) 1909 भारत सचिव मॉर्ले और वायसराय मिंटो का कानून। मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की व्यवस्था की। मिंटो को 'सांप्रदायिक निर्वाचन का जनक' कहा जाता है। सत्येंद्र प्रसाद सिन्हा वायसराय की कार्यपरिषद के पहले भारतीय सदस्य बने।
होम रूल लीग आंदोलन 1916 1. तिलक की लीग (अप्रैल 1916): बेलगाम में स्थापित। क्षेत्र: महाराष्ट्र (बंबई छोड़कर), कर्नाटक, मध्य प्रांत।
2. एनी बेसेंट की लीग (सितंबर 1916): अड्यार (मद्रास)। शेष भारत। पत्र: 'न्यू इंडिया' और 'कॉमनवील'।
लखनऊ समझौता (Lucknow Pact) दिसंबर 1916 (अध्यक्ष: ए.सी. मजूमदार) 1. नरम व गरम दल का पुनर्मिलन: तिलक व एनी बेसेंट के प्रयासों से एकता हुई।
2. कांग्रेस-लीग समझौता: दोनों ने संयुक्त संवैधानिक मांगें रखीं। कांग्रेस ने लीग की पृथक निर्वाचन की मांग स्वीकारी।

5. उदारवादी और उग्रवादी धाराओं की तुलना और मूल्यांकन

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का यह कालखंड परस्पर विरोधी पद्धतियों के बावजूद राष्ट्र निर्माण की नींव बना:

  • उदारवादी योगदान: इन्होंने औपनिवेशिक शासन के आर्थिक शोषण को उजागर किया और अखिल भारतीय राजनीतिक मंच तैयार किया। राजस्थान में इसी दौर की राजनीतिक जागृति के लिए राजस्थान में जन जागरण और स्वतंत्रता संग्राम देखें।
  • उग्रवादी योगदान: इन्होंने आंदोलन को ड्राइंग-रूम से निकालकर जनसाधारण, छात्रों और महिलाओं तक पहुंचाया।

महत्वपूर्ण तथ्य: राष्ट्रीय आंदोलन (1885-1919) Quick Revision Table

तथ्य बिंदु ऐतिहासिक विवरण
कांग्रेस के प्रथम मुस्लिम अध्यक्ष बदरुद्दीन तैयबजी (1887, मद्रास अधिवेशन)
कांग्रेस के प्रथम अंग्रेज अध्यक्ष जॉर्ज यूल (1888, इलाहाबाद अधिवेशन)
पहली बार 'वंदे मातरम' गान 1896 कलकत्ता अधिवेशन (अध्यक्ष: रहीमतुल्ला सयानी)
पहली बार 'जन गण मन' गान 1911 कलकत्ता अधिवेशन (अध्यक्ष: बिशन नारायण धर)
कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष श्रीमती एनी बेसेंट (1917, कलकत्ता अधिवेशन)
दिल्ली दरबार (1911) जॉर्ज पंचम के आगमन पर 12 दिसंबर 1911 को बंगाल विभाजन रद्द हुआ और राजधानी दिल्ली स्थानांतरित हुई।

RAS Prelims MCQ (10 बहुविकल्पीय प्रश्न)

  1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को किस कॉलेज में हुई थी?
    A) कलकत्ता प्रेसीडेंसी कॉलेज
    B) गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई
    C) मद्रास पचयप्पा कॉलेज
    D) पुणे फर्ग्यूसन कॉलेज
    उत्तर: B) गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई
    कारण: कांग्रेस का पहला अधिवेशन बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में 72 प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ।
  2. 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' पुस्तक में धन निष्कासन का सिद्धांत किसने दिया?
    A) गोपाल कृष्ण गोखले
    B) बाल गंगाधर तिलक
    C) दादाभाई नौरोजी
    D) सुरेंद्रनाथ बनर्जी
    उत्तर: C) दादाभाई नौरोजी
    कारण: दादाभाई नौरोजी ने आंकड़ों से दिखाया कि भारत का धन बिना बदले में कुछ मिले ब्रिटेन जा रहा है (drain of wealth)।
  3. वायसराय लॉर्ड कर्जन ने बंगाल विभाजन किस तारीख को आधिकारिक रूप से लागू किया था?
    A) 16 अक्टूबर 1905
    B) 20 जुलाई 1905
    C) 7 अगस्त 1905
    D) 15 अगस्त 1905
    उत्तर: A) 16 अक्टूबर 1905
    कारण: 19 जुलाई 1905 को घोषणा हुई और 16 अक्टूबर 1905 को विभाजन लागू हुआ, जिसे शोक दिवस के रूप में मनाया गया।
  4. कांग्रेस के किस अधिवेशन में नरमपंथियों और गरमपंथियों के बीच सूरत विभाजन हुआ?
    A) 1906 - कलकत्ता
    B) 1907 - सूरत (23वां अधिवेशन)
    C) 1908 - मद्रास
    D) 1916 - लखनऊ
    उत्तर: B) 1907 - सूरत (23वां अधिवेशन)
    कारण: ताप्ती नदी किनारे सूरत अधिवेशन में अध्यक्ष पद को लेकर विवाद हुआ और कांग्रेस विभाजित हो गई।
  5. 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम (मॉर्ले-मिंटो सुधार) की प्रमुख व्यवस्था कौन सी थी?
    A) प्रांतीय स्वायत्तता
    B) मुसलमानों के लिए पृथक सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल
    C) द्वैध शासन व्यवस्था
    D) संघीय न्यायालय की स्थापना
    उत्तर: B) मुसलमानों के लिए पृथक सांप्रदायिक निर्वाचन मंडल
    कारण: 1909 के एक्ट में मुसलमानों को अलग मतदाता सूची और पृथक प्रतिनिधित्व देकर सांप्रदायिकता को बढ़ावा दिया गया।
  6. बाल गंगाधर तिलक ने अप्रैल 1916 में अपनी होम रूल लीग की स्थापना कहां की थी?
    A) पुणे
    B) बेलगाम
    C) बंबई
    D) सतारा
    उत्तर: B) बेलगाम
    कारण: तिलक ने अप्रैल 1916 में बेलगाम (कर्नाटक) में होम रूल लीग की स्थापना की।
  7. कांग्रेस के 1916 के ऐतिहासिक लखनऊ अधिवेशन की अध्यक्षता किसने की थी?
    A) अंबिका चरण मजूमदार
    B) मदन मोहन मालवीय
    C) भूपेंद्र नाथ बसु
    D) मौलाना आजाद
    उत्तर: A) अंबिका चरण मजूमदार
    कारण: 1916 के लखनऊ अधिवेशन के अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार थे, जिसमें कांग्रेस-लीग समझौता हुआ।
  8. 'केसरी' (मराठी) और 'द महराट्टा' (अंग्रेजी) समाचार पत्रों का संपादन किसने किया था?
    A) गोपाल कृष्ण गोखले
    B) बाल गंगाधर तिलक
    C) बिपिन चंद्र पाल
    D) लाला लाजपत राय
    उत्तर: B) बाल गंगाधर तिलक
    कारण: लोकमान्य तिलक ने जनचेतना जगाने के लिए मराठी में केसरी और अंग्रेजी में महराट्टा का संपादन किया।
  9. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की प्रथम महिला अध्यक्ष बनने का गौरव किसे प्राप्त है?
    A) सरोजिनी नायडू
    B) एनी बेसेंट
    C) नेली सेनगुप्ता
    D) कस्तूरबा गांधी
    उत्तर: B) एनी बेसेंट
    कारण: एनी बेसेंट ने 1917 के कलकत्ता अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
  10. दिसंबर 1911 के दिल्ली दरबार में ब्रिटिश सम्राट ने क्या महत्वपूर्ण घोषणा की थी?
    A) भारत को पूर्ण स्वराज्य देना
    B) बंगाल विभाजन को रद्द करना और राजधानी दिल्ली स्थानांतरित करना
    C) कांग्रेस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना
    D) साइमन कमीशन भेजना
    उत्तर: B) बंगाल विभाजन को रद्द करना और राजधानी दिल्ली स्थानांतरित करना
    कारण: 1911 में जनविरोध के आगे झुकते हुए बंगाल विभाजन रद्द किया गया और भारत की राजधानी दिल्ली बनी।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. दादाभाई नौरोजी के 'धन निष्कासन सिद्धांत' का सार क्या था? (20 शब्द)
    उत्तर: भारत के राजस्व व संसाधनों का एकतरफा प्रवाह इंग्लैंड की ओर होना, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था खोखली हुई।
  2. 1907 के सूरत विभाजन के दो मुख्य कारण क्या थे? (20 शब्द)
    उत्तर: अध्यक्ष पद (रास बिहारी घोष बनाम लाला लाजपत राय) को लेकर विवाद और स्वदेशी-बहिष्कार के विस्तार पर मतभेद।
  3. 1916 के लखनऊ समझौते का ऐतिहासिक महत्व क्या था? (20 शब्द)
    उत्तर: नरम दल और गरम दल का पुनर्मिलन हुआ और कांग्रेस और मुस्लिम लीग ने मिलकर स्वशासन की संयुक्त मांग रखी।
  4. बाल गंगाधर तिलक ने कौन से दो प्रमुख सार्वजनिक उत्सव शुरू किए? (20 शब्द)
    उत्तर: राष्ट्रप्रेम और एकता जगाने के लिए 1893 में गणपति उत्सव और 1895 में शिवाजी उत्सव की शुरुआत की।
  5. 1909 के मॉर्ले-मिंटो सुधार का मुख्य दोष क्या था? (20 शब्द)
    उत्तर: इसने धर्म के आधार पर मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन क्षेत्र बनाकर समाज में सांप्रदायिक विभाजन की नींव डाली।

Long Questions (5–10 marks)

  1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उदारवादी और उग्रवादी चरणों की विचारधारा, कार्यपद्धति और सामाजिक आधार का तुलनात्मक परीक्षण कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: 1885 से 1919 के बीच कांग्रेस दो धाराओं से गुजरी:
    1. विचारधारा: उदारवादी ब्रिटिश न्यायप्रियता में आस्था रखते थे और क्रमिक सुधार चाहते थे। उग्रवादी मानते थे कि विदेशी शासन कल्याणकारी नहीं हो सकता; उनका लक्ष्य 'स्वराज्य' था।
    2. कार्यपद्धति: उदारवादियों ने प्रार्थना, याचिका और विरोध (3P पद्धति) का संवैधानिक मार्ग अपनाया। उग्रवादियों ने स्वदेशी, विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, राष्ट्रीय शिक्षा और निष्क्रिय प्रतिरोध चुना।
    3. सामाजिक आधार: उदारवादी शहरी वकीलों और उच्च मध्यम वर्ग तक ही रहे, जबकि उग्रवादियों ने आंदोलन को आम जनता, छात्रों और महिलाओं से जोड़ा। दोनों ने मिलकर स्वतंत्रता की आधारशिला रखी।
  2. 1905 के स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन के कारणों, प्रसार और प्रभाव की विवेचना कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: 1905 के बंगाल विभाजन ने स्वदेशी आंदोलन को जन्म दिया:
    1. कारण व प्रसार: कर्जन का उद्देश्य बंगाली राष्ट्रवाद को तोड़ना था। 7 अगस्त 1905 को बहिष्कार प्रस्ताव पारित हुआ। 16 अक्टूबर को शोक व राखी दिवस मनाया गया। विदेशी वस्त्रों की होली जली, स्वदेशी उद्योगों और स्टोरों को बढ़ावा मिला और 'आमार शोनार बांला' गाया गया।
    2. प्रभाव: यह पहला अखिल भारतीय जनआंदोलन बना जिसने राजनीति को जन-जन तक पहुंचाया। इसने स्वदेशी उद्योगों और राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा दिया और 1911 में सरकार को बंगाल विभाजन रद्द करने पर विवश किया।

FAQs

प्रश्न: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?
उत्तर: कांग्रेस के प्रथम अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी (W.C. Bonnerjee) थे जिन्होंने 1885 में बंबई अधिवेशन की अध्यक्षता की।

प्रश्न: लोकमान्य तिलक को 'भारतीय अशांति का जनक' किसने कहा था?
उत्तर: ब्रिटिश पत्रकार वैलेंटाइन शिरोल ने अपनी पुस्तक 'इंडियन अनरेस्ट' में तिलक को यह संज्ञा दी थी।

प्रश्न: एनी बेसेंट के दो प्रमुख पत्र कौन से थे?
उत्तर: एनी बेसेंट ने होम रूल लीग के प्रचार के लिए 'न्यू इंडिया' और 'कॉमनवील' का संपादन किया।

प्रश्न: सूरत अधिवेशन (1907) की अध्यक्षता किसने की थी?
उत्तर: डॉ. रास बिहारी घोष ने 1907 के सूरत अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।

प्रश्न: 'आमार शोनार बांला' गीत किसने और कब लिखा था?
उत्तर: रवींद्रनाथ टैगोर ने 1905 के स्वदेशी आंदोलन के समय यह गीत लिखा था, जो आज बांग्लादेश का राष्ट्रगान है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • कांग्रेस का पहला अधिवेशन: 28 दिसंबर 1885, गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बंबई; अध्यक्ष व्योमेश चंद्र बनर्जी; 72 प्रतिनिधि।
  • 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' (1901): दादाभाई नौरोजी, धन निष्कासन सिद्धांत।
  • बंगाल विभाजन: घोषणा 19 जुलाई 1905, लागू 16 अक्टूबर 1905; बहिष्कार प्रस्ताव 7 अगस्त 1905।
  • कलकत्ता 1906 (दादाभाई नौरोजी): पहली बार 'स्वराज' लक्ष्य; मुस्लिम लीग 30 दिसंबर 1906, ढाका।
  • सूरत विभाजन 1907, अध्यक्ष रास बिहारी घोष।
  • मॉर्ले-मिंटो सुधार 1909: मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन।
  • होम रूल लीग 1916: तिलक (अप्रैल, बेलगाम), एनी बेसेंट (सितंबर, अड्यार)।
  • लखनऊ समझौता 1916, अध्यक्ष अंबिका चरण मजूमदार; दिल्ली दरबार 12 दिसंबर 1911 में विभाजन रद्द।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Indian National Movement in Hindi: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (Stages of Indian National Movement 1885-1919) का प्रारंभिक इतिहास दो प्रमुख विचारधाराओं में विभाजित।
भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रम में Indian National Movement in Hindi: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख चरण (1885-1919): उदारवादी, उग्रवादी और स्वदेशी आंदोलन एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको Indian National Movement in Hindi: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रमुख चरण (1885-1919): उदारवादी, उग्रवादी और स्वदेशी आंदोलन के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
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