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Rajasthan ke Kisan Andolan: राजस्थान के किसान और जनजाति आंदोलन, बिजोलिया, बेगूं, बूंदी, शेखावाटी और भगत आंदोलन

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Rajasthan ke Kisan Andolan: राजस्थान के किसान और जनजाति आंदोलन, बिजोलिया, बेगूं, बूंदी, शेखावाटी और भगत आंदोलन - जन जागरण और स्वतंत्रता संग्राम (1857, प्रजामंडल)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Rajasthan ke Kisan Andolan: राजस्थान के किसान आंदोलन (Rajasthan Ke Kisan Andolan) सामंती जागीरदारों के जुल्म, 84 तरह की लाग-बाग, बेगार और ...
Quick Answer: Rajasthan ke Kisan Andolan: राजस्थान के किसान आंदोलन (Rajasthan Ke Kisan Andolan) सामंती जागीरदारों के जुल्म, 84 तरह की लाग-बाग, बेगार और लाटा-कून्ता कर पद्धतियों के विरोध में उपजे जन आंदोलन थे। भीलवाड़ा का बिजोलिया आंदोलन (1897-1941) करीब 44 वर्ष चला और इसे भारत का सबसे लंबा चलने वाला अहिंसक किसान आंदोलन माना जाता है। इसके साथ ही बेगूं, बूंदी और शेखावाटी में भी बड़े किसान संघर्ष हुए। गोविंद गिरि का भगत आंदोलन और मोतीलाल तेजावत का एकी आंदोलन भीलों और गरासिया आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के मुख्य आधार बने।

राजस्थान के किसान आंदोलन (Rajasthan Ke Kisan Andolan) की पृष्ठभूमि और कारण

1818 में ईस्ट इंडिया कंपनी से सहायक संधियां होने के बाद राजपूत शासक अपनी रक्षा के लिए जनता पर निर्भर नहीं रहे। अंग्रेजों के संरक्षण में जागीरदारों ने किसानों पर 84 प्रकार की लाग-बाग (सेस), बेगार और मनमाने टैक्स लाद दिए। लगान निर्धारण में लाटा (कटी फसल बंटवारा) और कून्ता (खड़ी फसल का कयास) से किसानों का भारी शोषण होता था। जागीर की अनुमानित (आकलित) सालाना आय को पट्टा रेख कहते थे। राज्य जागीरदार से जो 'रेख' कर लेता था, वह इसी आधार पर तय होता था।

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वर्तमान 41 जिलों और 7 संभागों की व्यवस्था में मेवाड़ (भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़), हाड़ौती (बूंदी) और शेखावाटी (सीकर, झुंझुनू) किसान चेतना के प्रमुख केंद्र रहे। RPSC की RAS परीक्षाओं में इन पर प्रश्न आते रहे हैं। RAS Pre 2016 (Q8) में किसान आंदोलन और उनके नेताओं के युग्म मिलान पर, RAS Pre 2016 (Q9) में 'पट्टा रेख' के अर्थ पर और RAS Pre 2024 (Q124) में बिजोलिया आंदोलन की खबरें छापने वाले समाचार पत्रों पर सवाल आया। 1857, प्रजामंडल और पूरे स्वतंत्रता संग्राम का short overview राजस्थान में जन जागरण और स्वतंत्रता संग्राम और राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी पढ़ें।

किसान आंदोलन स्थान (जिला) अवधि प्रमुख नेता शहादत और मुख्य घटना
बिजोलिया किसान आंदोलन बिजोलिया (भीलवाड़ा) 1897-1941 साधु सीताराम दास, विजय सिंह पथिक, माणिक्य लाल वर्मा 44 वर्ष तक चला अहिंसक आंदोलन, हॉलैंड समझौता (1922)
बेगूं किसान आंदोलन बेगूं (चित्तौड़गढ़) 1921-1923 रामनारायण चौधरी, विजय सिंह पथिक रूपा जी और कृपा जी धाकड़ शहीद (गोविंदपुरा कांड, 1923)
बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन बरड़ (बूंदी) 1922 से (1926 के बाद फिर तेज) पंडित नयनूराम शर्मा नानक जी भील और देवी लाल गुर्जर शहीद (डाबी कांड, 1923)
शेखावाटी किसान आंदोलन सीकर, पंचपाना (झुंझुनू) 1922-1946 सरदार हरलाल सिंह, मास्टर प्यारेलाल गुप्ता कटराथल महिला सम्मेलन (1934), कूदन गोलीकांड (1935)

बिजोलिया किसान आंदोलन: पृष्ठभूमि, तीन चरण और समझौते

बिजोलिया मेवाड़ रियासत का प्रथम श्रेणी (सोलह उमराव) ठिकाना था, जिसे ऊपरमाल भी कहते थे। खानवा युद्ध (1527) में वीरता पर महाराणा सांगा ने जगनेर के अशोक परमार को ऊपरमाल की जागीर दी थी। यहाँ के ज्यादातर किसान धाकड़ जाति के थे। 1894 में राव कृष्ण सिंह ने किसानों पर 84 प्रकार की लाग-बाग लगा दी।

प्रथम चरण (1897-1915): स्थानीय नेतृत्व

1897 में गिरधरपुरा गाँव में गंगाराम धाकड़ के पिता के मृत्युभोज पर किसान जुटे। साधु सीताराम दास की सलाह पर नानजी पटेल और ठाकरी पटेल महाराणा फतेह सिंह से मिलने उदयपुर गए। महाराणा ने राजस्व अधिकारी हामिद हुसैन को जांच के लिए भेजा, पर कोई राहत नहीं मिली। उल्टे राव कृष्ण सिंह ने दोनों पटेलों को ऊपरमाल से निकाल दिया। 1903 में कृष्ण सिंह ने ₹5 का 'चंवरी कर' (बेटी के विवाह पर) लगाया। किसानों ने दो वर्ष तक शादियां रोकीं। 1906 में नए राव पृथ्वी सिंह ने 'तलवार बंधाई कर' (उत्तराधिकार शुल्क) भी किसानों पर लाद दिया। साधु सीताराम दास, फतेह करण चारण और ब्रह्मदेव ने किसानों को संगठित किया।

द्वितीय चरण (1916-1923): विजय सिंह पथिक का नेतृत्व

1916 में साधु सीताराम दास के आग्रह पर विजय सिंह पथिक (मूल नाम भूप सिंह, बुलंदशहर यूपी) ने नेतृत्व संभाला। 1917 में हरियाली अमावस्या पर पथिक ने बेरीसाल में 'ऊपरमाल पंच बोर्ड' बनाया और मन्ना पटेल सरपंच बने। प्रचार के लिए 'ऊपरमाल का डंका' पत्र निकाला गया और माणिक्य लाल वर्मा ने 'पंछीड़ा' गीत रचा। गणेश शंकर विद्यार्थी ने कानपुर के पत्र 'प्रताप' में बिजोलिया की खबरें लगातार छापीं। प्रयाग (इलाहाबाद) के 'अभ्युदय' और कलकत्ता के 'भारत मित्र' ने भी आंदोलन के समाचार नियमित छापे (RAS Pre 2024 में यही पूछा गया)। 1919 में बिंदुलाल भट्टाचार्य आयोग बना। 1922 में एजीजी (AGG) रॉबर्ट हॉलैंड की मौजूदगी में समझौता हुआ, जिसमें 84 में से 35 लाग-बाग माफ हुईं। बाद में ठिकाने ने इस समझौते का ठीक से पालन नहीं किया।

तृतीय चरण (1923-1941): अंतिम समझौता और विजय

तीसरे चरण में माणिक्य लाल वर्मा, जमनालाल बजाज, हरिभाऊ उपाध्याय और रामनारायण चौधरी ने नेतृत्व किया। 1927 में पथिक की सलाह पर किसानों ने जमीनें छोड़ीं, जिन्हें ठिकाने ने दूसरों को दे दिया। इसके बाद पथिक आंदोलन से अलग हो गए। 1941 में मेवाड़ के प्रधानमंत्री सर टी. विजयाराघवाचार्य ने राजस्व मंत्री डॉ. मोहन सिंह मेहता को भेजा। उन्होंने माणिक्य लाल वर्मा से बात की और किसानों को जमीनें वापस मिलीं। यहीं आंदोलन खत्म हुआ।

चरण समय मुख्य नेतृत्व मुख्य घटना
प्रथम चरण 1897-1915 साधु सीताराम दास, फतेह करण चारण, ब्रह्मदेव गिरधरपुरा बैठक, नानजी-ठाकरी पटेल का उदयपुर जाना, चंवरी कर का विरोध
द्वितीय चरण 1916-1923 विजय सिंह पथिक, माणिक्य लाल वर्मा, मन्ना पटेल ऊपरमाल पंच बोर्ड (1917), 'पंछीड़ा' गीत, हॉलैंड समझौता (35 कर माफ)
तृतीय चरण 1923-1941 माणिक्य लाल वर्मा, जमनालाल बजाज, हरिभाऊ उपाध्याय 1927 में जमीन त्याग, 1941 में विजयाराघवाचार्य-मेहता समझौता और जीत

बेगूं और बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन: शहादत और परिणाम

बेगूं किसान आंदोलन (चित्तौड़गढ़)

चित्तौड़गढ़ के बेगूं ठिकाने में धाकड़ किसानों पर 53 लाग-बाग थीं। 1921 में मेनाल के भैरवकुंड से रामनारायण चौधरी के नेतृत्व में आंदोलन शुरू हुआ। रावत अनूप सिंह से हुए समझौते को सरकार ने 'बोल्शेविक समझौता' कहकर रद्द किया और अनूप सिंह को नजरबंद कर दिया। जून 1923 में जी.सी. ट्रेंच की अध्यक्षता में आयोग बना, जिसका किसानों ने बहिष्कार किया। 13 जुलाई 1923 को गोविंदपुरा गाँव में सभा पर ट्रेंच के आदेश से गोलीबारी हुई, जिसमें रूपा जी धाकड़ और कृपा जी धाकड़ शहीद हो गए। बाद में विजय सिंह पथिक ने कमान संभाली। दिसंबर 1923 के समझौते में लगान की दरें तय हुईं, कई लाग हटीं और बेगार खत्म हुई। संस्कृति के लिए देखें राजस्थान के प्रमुख दुर्ग, मंदिर और मेले।

बूंदी (बरड़) किसान आंदोलन

बूंदी के बरड़ में 1922 में गुर्जर किसानों ने 25 लाग-बाग और बेगार के विरोध में पंडित नयनूराम शर्मा के नेतृत्व में आंदोलन किया। 2 अप्रैल 1923 को डाबी गाँव में सभा पर पुलिस ने गोली चलाई। झंडा गीत गाते नानक जी भील और देवी लाल गुर्जर शहीद हो गए। नानक जी भील की याद में माणिक्य लाल वर्मा ने 'अर्ज़ी' गीत लिखा। 1926 के बाद यह आंदोलन फिर तेज हुआ और लंबे समय तक चलता रहा।

RAS Pre 2016 के युग्म वाले सवाल में बेगूं–रामनारायण चौधरी, बूंदी–नयनूराम शर्मा और बिजोलिया–विजय सिंह पथिक सही जोड़े थे। इन तीनों जोड़ों को याद रखें।

शेखावाटी किसान आंदोलन: पंचपाना, कटराथल और कूदन कांड

शेखावाटी के पंचपाना ठिकानों (झुंझुनू क्षेत्र में शार्दूल सिंह के पांच बेटों में बंटे इलाके, जैसे नवलगढ़, डूंडलोद, मंडावा, बिसाऊ, मुकुंदगढ़) और सीकर ठिकाने में जाट किसानों ने संघर्ष किया। 1922 में राव राजा कल्याण सिंह ने लगान बढ़ाया। 1931 में राजस्थान जाट क्षेत्रीय सभा बनी। सरदार हरलाल सिंह, राम सिंह और मास्टर प्यारेलाल गुप्ता (चिड़ावा के गांधी) ने नेतृत्व किया।

सीहोट के ठाकुर मानसिंह के दुर्व्यवहार के विरोध में 25 अप्रैल 1934 को कटराथल (सीकर) में सम्मेलन हुआ। सरदार हरलाल सिंह की पत्नी श्रीमती किशोरी देवी के नेतृत्व में करीब 10,000 ग्रामीण महिलाओं ने भाग लिया (कुछ स्रोत संख्या कम बताते हैं)। 25 अप्रैल 1935 को कूदन (सीकर) गाँव में नए लगान बंदोबस्त के विरोध पर पुलिस ने गोली चलाई। इसमें चेतराम, टीकूराम, तुलछाराम समेत कई किसान शहीद हुए। इस कांड की चर्चा ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में हुई। 1946 में हीरालाल शास्त्री की कोशिशों से शेखावाटी आंदोलन शांत हुआ।

राजस्थान के प्रमुख जनजाति आंदोलन: भगत आंदोलन और एकी आंदोलन

दक्षिणी राजस्थान के भील और गरासिया आदिवासियों को जागीरदारों और अंग्रेजों के शोषण से बचाने के लिए दो बड़े आंदोलन चले।

जनजाति आंदोलन स्थान आरंभ वर्ष मुख्य प्रणेता ऐतिहासिक घटना
भगत आंदोलन डूंगरपुर, बांसवाड़ा, मानगढ़ 1883 गोविंद गिरि (बांसिया/बेड़सा गाँव, डूंगरपुर) मानगढ़ धाम हत्याकांड (17 नवंबर 1913), करीब 1,500 भील शहीद
एकी आंदोलन मातृकुंडिया (चित्तौड़गढ़), झाड़ोल 1921 मोतीलाल तेजावत (कोलियरी) 'मेवाड़ पुकार' (21 सूत्री मांग पत्र), नीमड़ा / पाल-दढ़वाव गोलीकांड (7 मार्च 1922)

गोविंद गिरि और मानगढ़ धाम नरसंहार

डूंगरपुर के बांसिया (बेड़सा) गाँव के बंजारा परिवार में जन्मे गोविंद गिरि (गोविंद गुरु) स्वामी दयानंद सरस्वती से प्रेरित थे। 1883 में उन्होंने भीलों में नशा छोड़ने और सदाचार सिखाने के लिए 'सम्प सभा' बनाई। 17 नवंबर 1913 (मार्गशीर्ष पूर्णिमा) को बांसवाड़ा की मानगढ़ पहाड़ी पर जुटे भीलों पर अंग्रेजी सेना ने गोलियां चलाईं, जिसमें मेवाड़ भील कोर (MBC) भी शामिल थी। लोक परंपरा और ज्यादातर किताबों के अनुसार करीब 1,500 भील शहीद हुए। इसे 'राजस्थान का जलियांवाला बाग' कहा जाता है। गोविंद गिरि ने अंतिम समय कंबोई (गुजरात) में बिताया।

मोतीलाल तेजावत और एकी आंदोलन

उदयपुर के कोलियरी गाँव में जन्मे मोतीलाल तेजावत (ओसवाल) को आदिवासी 'बावजी' कहते थे। 1921 में वैशाख पूर्णिमा पर मातृकुंडिया (चित्तौड़गढ़) से उन्होंने एकी आंदोलन शुरू किया। उन्होंने 21 सूत्री मांग पत्र तैयार किया जिसे 'मेवाड़ पुकार' कहते हैं। महाराणा ने 18 मांगें मानीं, पर 3 मुख्य मांगें खारिज कर दीं। 7 मार्च 1922 को नीमड़ा गाँव (ईडर रियासत; गुजरात में इसे पाल-दढ़वाव हत्याकांड कहते हैं, आज साबरकांठा जिला) में सभा पर मेजर सटन के नेतृत्व में एमबीसी ने गोलीबारी की। आदिवासी परंपरा करीब 1,200 मौतें बताती है, जबकि अंग्रेजी रिकॉर्ड में संख्या बहुत कम (22) दिखाई गई। तेजावत घायल होकर बच निकले और कई साल भूमिगत रहे। 1929 में उन्होंने आत्मसमर्पण किया।

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महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • बिजोलिया आंदोलन 1897 से 1941 तक करीब 44 वर्ष चला; इसे भारत का सबसे लंबा अहिंसक किसान आंदोलन माना जाता है।
  • 'प्रताप' (कानपुर), 'अभ्युदय' (प्रयाग) और 'भारत मित्र' (कलकत्ता) ने बिजोलिया की खबरें नियमित छापीं।
  • पट्टा रेख = जागीर की अनुमानित (आकलित) सालाना आय।
  • बिजोलिया में धाकड़ किसानों पर 84 लाग-बाग और लाटा-कून्ता व्यवस्था लागू थी।
  • 1903 में कृष्ण सिंह ने चंवरी कर (₹5) और 1906 में पृथ्वी सिंह ने तलवार बंधाई कर लगाया।
  • 1916 में पथिक ने कमान संभाली और 1917 में ऊपरमाल पंच बोर्ड बनाया।
  • माणिक्य लाल वर्मा ने 'पंछीड़ा' गीत रचा और विद्यार्थी जी ने 'प्रताप' में खबरें छापीं।
  • बेगूं आंदोलन में 13 जुलाई 1923 को गोविंदपुरा में रूपा जी और कृपा जी धाकड़ शहीद हुए।
  • डाबी कांड (1923) में झंडा गीत गाते नानक जी भील और देवी लाल गुर्जर शहीद हुए।
  • 25 अप्रैल 1934 को कटराथल में किशोरी देवी के नेतृत्व में 10,000 महिलाओं का सम्मेलन हुआ।
  • 1883 में गोविंद गिरि ने सम्प सभा बनाई; 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पर 1,500 भील शहीद हुए।
  • 1921 में मोतीलाल तेजावत ने मातृकुंडिया से एकी आंदोलन शुरू कर 'मेवाड़ पुकार' सौंपी।
  • राजस्थान में वर्तमान 41 जिले और 7 संभाग हैं।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • बिजोलिया के प्रथम चरण के नेता: साधु सीताराम दास, फतेह करण चारण, ब्रह्मदेव।
  • रावत अनूप सिंह के समझौते को सरकार ने 'बोल्शेविक समझौता' कहा था।
  • नानक जी भील की याद में वर्मा ने 'अर्ज़ी' गीत लिखा।
  • सीकर के कूदन गोलीकांड (1935) की चर्चा ब्रिटिश संसद में हुई थी।
  • मानगढ़ हत्याकांड (1913) को राजस्थान का जलियांवाला बाग कहते हैं।
  • नीमड़ा (पाल-दढ़वाव) गोलीकांड 7 मार्च 1922 को एकी आंदोलन के दौरान हुआ।
  • 1941 में विजयाराघवाचार्य और डॉ. मेहता के प्रयासों से बिजोलिया आंदोलन समाप्त हुआ।

RAS Prelims MCQ

  1. प्रश्न: बिजोलिया आंदोलन में 'ऊपरमाल पंच बोर्ड' किस वर्ष बना?
    A) 1915
    B) 1916
    C) 1917
    D) 1919
    उत्तर: C | कारण: पथिक ने 1917 में ऊपरमाल पंच बोर्ड बनाया।
  2. प्रश्न: 1903 में बिजोलिया के राव कृष्ण सिंह ने कौन सा कर लगाया था?
    A) तलवार बंधाई
    B) चंवरी कर
    C) लाटा कर
    D) जरायम कर
    उत्तर: B | कारण: कृष्ण सिंह ने लड़की के विवाह पर ₹5 का चंवरी कर लगाया।
  3. प्रश्न: 13 जुलाई 1923 को बेगूं के गोविंदपुरा में कौन से दो किसान शहीद हुए?
    A) नानक जी और देवी लाल
    B) रूपा जी और कृपा जी धाकड़
    C) चेतराम और टिकूराम
    D) नानजी और ठाकरी पटेल
    उत्तर: B | कारण: ट्रेंच की गोलीबारी में रूपा जी और कृपा जी धाकड़ शहीद हुए।
  4. प्रश्न: 25 अप्रैल 1934 को कटराथल में 10,000 महिलाओं के सम्मेलन की अध्यक्ष कौन थीं?
    A) दुर्गादेवी शर्मा
    B) अंजना देवी
    C) किशोरी देवी
    D) जानकी देवी बजाज
    उत्तर: C | कारण: सरदार हरलाल सिंह की पत्नी किशोरी देवी ने अध्यक्षता की।
  5. प्रश्न: बूंदी के डाबी गाँव में 2 अप्रैल 1923 को झंडा गीत गाते समय कौन शहीद हुए?
    A) नानक जी भील
    B) रूपा जी धाकड़
    C) मोतीलाल तेजावत
    D) गोविंद गिरि
    उत्तर: A | कारण: डाबी में गोलीबारी में नानक जी भील शहीद हुए।
  6. प्रश्न: गोविंद गिरि ने आदिवासियों के सुधार के लिए 'सम्प सभा' कब बनाई?
    A) 1880
    B) 1883
    C) 1903
    D) 1913
    उत्तर: B | कारण: गोविंद गिरि ने 1883 में सम्प सभा बनाई।
  7. प्रश्न: मोतीलाल तेजावत का 21 सूत्री मांग पत्र किस नाम से जाना जाता है?
    A) ऊपरमाल का डंका
    B) मेवाड़ पुकार
    C) राजस्थान केसरी
    D) अर्ज़ी
    उत्तर: B | कारण: 1921 में तेजावत ने 'मेवाड़ पुकार' महाराणा को सौंपी।
  8. प्रश्न: कानपुर के किस समाचार पत्र ने बिजोलिया आंदोलन को राष्ट्रीय पहचान दी?
    A) मराठा
    B) केसरी
    C) प्रताप
    D) कर्मवीर
    उत्तर: C | कारण: गणेश शंकर विद्यार्थी ने 'प्रताप' में बिजोलिया के समाचार छापे।
  9. प्रश्न: 1919 में मेवाड़ सरकार ने बिजोलिया जांच के लिए कौन सा आयोग बनाया?
    A) ट्रेंच आयोग
    B) बिंदुलाल भट्टाचार्य आयोग
    C) रॉबर्ट हॉलैंड समिति
    D) हामिद हुसैन आयोग
    उत्तर: B | कारण: बिंदुलाल भट्टाचार्य की अध्यक्षता में आयोग बना था।
  10. प्रश्न: सीकर के किस गाँव में 1935 के गोलीकांड की चर्चा ब्रिटिश संसद में हुई?
    A) कटराथल
    B) जयसिंहपुरा
    C) कूदन
    D) पलथाना
    उत्तर: C | कारण: कूदन गाँव में गोलीबारी का मामला ब्रिटिश संसद में गूंजा।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. प्रश्न: बिजोलिया आंदोलन में 'चंवरी कर' और 'तलवार बंधाई कर' क्या थे?
    उत्तर रूपरेखा: 1903 में कृष्ण सिंह ने बेटी के विवाह पर ₹5 का चंवरी कर लगाया। 1906 में पृथ्वी सिंह ने उत्तराधिकार शुल्क (तलवार बंधाई) किसानों पर डाला।
  2. प्रश्न: ऊपरमाल पंच बोर्ड का गठन कब और क्यों किया गया?
    उत्तर रूपरेखा: पथिक ने 1917 में हरियाली अमावस्या पर बेरीसाल में ऊपरमाल पंच बोर्ड बनाया। मन्ना पटेल सरपंच बने। इसका उद्देश्य आंदोलन को संगठित रखना था।
  3. प्रश्न: बेगूं समझौते को 'बोल्शेविक समझौता' क्यों कहा गया?
    उत्तर रूपरेखा: 1922 में रावत अनूप सिंह और किसानों में समझौता हुआ। महाराणा और ब्रिटिश रेजिडेंट ने इसे रूसी साम्यवादी क्रांति जैसी रियायत मानकर रद्द किया।
  4. प्रश्न: मानगढ़ धाम हत्याकांड (1913) की ऐतिहासिक महत्ता बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर सेना ने गोलीबारी कर 1,500 भीलों को शहीद किया। इसे राजस्थान का जलियांवाला बाग कहते हैं।
  5. प्रश्न: कटराथल महिला सम्मेलन (1934) का क्या महत्व है?
    उत्तर रूपरेखा: सीहोट ठाकुर के दुर्व्यवहार के विरोध में 25 अप्रैल 1934 को कटराथल में किशोरी देवी के नेतृत्व में 10,000 महिलाओं ने भाग लिया।

Long Questions (5–10 marks)

  1. प्रश्न: बिजोलिया किसान आंदोलन के विभिन्न चरणों और प्रभाव का वर्णन कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: प्रथम चरण (1897-1915): साधु सीताराम दास के नेतृत्व में स्थानीय विरोध, चंवरी व तलवार बंधाई कर का सामना। द्वितीय चरण (1916-1923): विजय सिंह पथिक का नेतृत्व, ऊपरमाल पंच बोर्ड (1917), 'प्रताप' में राष्ट्रीय प्रचार, हॉलैंड समझौता (1922)। तृतीय चरण (1923-1941): जमनालाल बजाज और वर्मा का नेतृत्व, 1941 में विजयाराघवाचार्य व डॉ. मेहता के प्रयासों से किसानों को जमीनें वापसी और जीत।
  2. प्रश्न: भगत आंदोलन और एकी आंदोलन के स्वरूप और परिणामों की तुलना कीजिए।
    उत्तर रूपरेखा: गोविंद गिरि का भगत आंदोलन (1883, सम्प सभा) सामाजिक-नैतिक सुधार और मानगढ़ बलिदान (1913, 1,500 शहीद) से जुड़ा था। मोतीलाल तेजावत का एकी आंदोलन (1921, मातृकुंडिया) 'मेवाड़ पुकार' (21 सूत्री मांग), नीमड़ा कांड (1922) और सामंती शोषण से मुक्ति पर केंद्रित था। दोनों आंदोलनों ने आदिवासियों में स्वाभिमान जगाया।

FAQs

1. बिजोलिया किसान आंदोलन कितने वर्ष चला और इसका स्वरूप कैसा था?

यह आंदोलन 1897 से 1941 तक कुल 44 वर्ष चला। यह अहिंसक और संगठित जन आंदोलन था, जिसे भारत का सबसे लंबा अहिंसक किसान आंदोलन माना जाता है।

2. ऊपरमाल का डंका क्या था?

यह विजय सिंह पथिक का निकाला हुआ हस्तलिखित प्रचार पत्र था, जिसने किसानों को जागरूक और एकजुट रखा।

3. राजस्थान का जलियांवाला बाग किसे कहा जाता है?

17 नवंबर 1913 को बांसवाड़ा की मानगढ़ पहाड़ी पर हुए नरसंहार को राजस्थान का जलियांवाला बाग कहते हैं, जहाँ 1,500 भील शहीद हुए।

4. मोतीलाल तेजावत की 'मेवाड़ पुकार' क्या थी?

यह मोतीलाल तेजावत का तैयार किया 21 सूत्री मांग पत्र था, जिसमें जागीरदारों के करों और बेगार को खत्म करने की मांग थी।

5. राजस्थान में किसान आंदोलन की शुरुआत कहाँ से हुई थी?

राजस्थान में व्यवस्थित किसान आंदोलन की शुरुआत 1897 में भीलवाड़ा के बिजोलिया ठिकाने से हुई थी।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Rajasthan ke Kisan Andolan: राजस्थान के किसान आंदोलन (Rajasthan Ke Kisan Andolan) सामंती जागीरदारों के जुल्म, 84 तरह की लाग-बाग, बेगार और लाटा-कून्ता कर पद्धतियों के विरोध में उपजे जन आंदोलन थे।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Rajasthan ke Kisan Andolan: राजस्थान के किसान और जनजाति आंदोलन, बिजोलिया, बेगूं, बूंदी, शेखावाटी और भगत आंदोलन एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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