RAS (आरपीएससी) 5 min read

Prajamandal Andolan Rajasthan: प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान, संस्थाएं, समाचार पत्र और प्रमुख जननायक

RK

लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान का इतिहास और संस्कृति (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Prajamandal Andolan Rajasthan: प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान, संस्थाएं, समाचार पत्र और प्रमुख जननायक - जन जागरण और स्वतंत्रता संग्राम (1857, प्रजामंडल)
  • • अवलोकन: Quick Answer: Prajamandal Andolan Rajasthan: प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान (Prajamandal Andolan Rajasthan) देशी रियासतों में सामंती शासन के खिलाफ जनता का सं...
Quick Answer: Prajamandal Andolan Rajasthan: प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान (Prajamandal Andolan Rajasthan) देशी रियासतों में सामंती शासन के खिलाफ जनता का संगठित राजनीतिक संघर्ष था। इसका मकसद राजा के अधीन उत्तरदायी शासन, बेगार और लाग-बाग का अंत और नागरिक अधिकार पाना था। ज्यादातर किताबें 1931 के जयपुर प्रजामंडल (कपूरचंद पाटनी) को पहला मानती हैं। 1938 के हरिपुरा कांग्रेस अधिवेशन के बाद मेवाड़, अलवर, भरतपुर, शाहपुरा, करौली (1938) और कोटा, सिरोही, किशनगढ़ (1939) में प्रजामंडल बने। राजस्थान केसरी, नवीन राजस्थान, तरुण राजस्थान, त्याग भूमि और आगीबाण जैसे पत्रों ने जन-चेतना फैलाई।

1818 की संधियों के बाद अंग्रेजों का संरक्षण पाकर राजा और जागीरदार मनमानी करने लगे। किसानों पर भारी लगान, बेगार और लाग-बाग लाद दी गई। बिजोलिया और बेगूं जैसे किसान आंदोलनों से जो चेतना बनी, वही आगे प्रजामंडलों का आधार बनी। किसान आंदोलनों की detail राजस्थान के किसान आंदोलन में और 1857 से 1947 तक का short overview राजस्थान में जन जागरण और स्वतंत्रता संग्राम में पढ़ें। यह note प्रजामंडल, शुरुआती संस्थाओं और समाचार पत्रों पर गहराई से बात करता है।

Advertisement

प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान (Prajamandal Andolan Rajasthan): पृष्ठभूमि और उद्देश्य

रियासतों में न बोलने की आजादी थी, न सभा करने की। गांधीजी के आंदोलनों से प्रेरणा लेकर लोगों ने अपनी-अपनी रियासत में "प्रजा का मंडल" यानी जनता का संगठन बनाया।

प्रजामंडल आंदोलनों के मुख्य उद्देश्य ये थे:

  • उत्तरदायी शासन: राजा के अधीन जनता के चुने प्रतिनिधियों की जिम्मेदार सरकार (Responsible Government) बनाना।
  • नागरिक अधिकार: भाषण, सभा, संगठन बनाने और अखबार निकालने की आजादी।
  • सामंती शोषण का अंत: किसानों से ली जाने वाली बेगार और अवैध लाग-बाग खत्म करना।
  • शिक्षा और समाज सुधार: दलितों और लड़कियों में शिक्षा, छुआछूत का विरोध और खादी का प्रचार।
  • राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़ाव: रियासती जनता को देश के स्वाधीनता संग्राम से जोड़ना।

दिसंबर 1927 में मुंबई में अखिल भारतीय देशी राज्य लोक परिषद (AISPC) बनी। विजय सिंह पथिक इसके उपाध्यक्ष और रामनारायण चौधरी राजपूताना व मध्य भारत के सचिव बने। 1938 के हरिपुरा अधिवेशन (अध्यक्ष: सुभाष चंद्र बोस) में कांग्रेस ने तय किया कि रियासतों की जनता अपने संगठन बनाकर आंदोलन चलाए और कांग्रेस उसे समर्थन देगी। इसके बाद राजस्थान में प्रजामंडल तेजी से बने।

राजनीतिक चेतना जगाने वाली शुरुआती संस्थाएं

RAS Pre में संस्थाओं के स्थापना वर्ष और संस्थापक बार-बार पूछे गए हैं। प्रजामंडलों से पहले की प्रमुख संस्थाएं:

संस्था वर्ष व स्थान संस्थापक / प्रेरक मुख्य बात
देश हितैषिणी सभा 2 जुलाई 1877, उदयपुर महाराणा सज्जन सिंह (अध्यक्ष) विवाह और दहेज के खर्च पर रोक, बहुविवाह पर रोक
मेयो कॉलेज 1875, अजमेर लॉर्ड मेयो की योजना; विचार कैप्टन वाल्टर का (1869) राजकुमारों और जागीरदारों के बेटों की अंग्रेजी शिक्षा
परोपकारिणी सभा 1883, उदयपुर स्वामी दयानंद सरस्वती आर्य समाज के विचारों का प्रचार
वाल्टरकृत राजपूत्र हितकारिणी सभा 1888, अजमेर AGG कर्नल सी.के.एम. वाल्टर राजपूतों और चारणों में फिजूलखर्ची रोकना, विवाह की उम्र तय करना
सर्वहितकारिणी सभा 1907, चूरू स्वामी गोपालदास, पं. कन्हैयालाल ढूंढ कबीर पाठशाला, पुत्री पाठशाला; "चूरू की कांग्रेस"
वीर भारत सभा 1910 केसरी सिंह बारहठ, राव गोपाल सिंह खरवा सशस्त्र क्रांति के लिए युवक तैयार करना
राजपूताना मध्य भारत सभा 1918 (कुछ स्रोत 1919), दिल्ली जमनालाल बजाज की अध्यक्षता में रियासती जनता की समस्याएं कांग्रेस तक पहुंचाना
राजस्थान सेवा संघ 1919, वर्धा (1920 में अजमेर) विजय सिंह पथिक, रामनारायण चौधरी, हरिभाई किंकर बिजोलिया, बेगूं और भील आंदोलनों का मार्गदर्शन
नरेंद्र मंडल (Chamber of Princes) 1921 अंग्रेज सरकार राजाओं का मंच; जनता की संस्था नहीं

मेयो कॉलेज और वाल्टर

राजकुमारों के लिए अलग शिक्षा संस्था का सुझाव सबसे पहले कैप्टन वाल्टर ने 1869 में दिया। वायसराय लॉर्ड मेयो ने इस योजना को आगे बढ़ाया और अक्टूबर 1875 में अजमेर में मेयो कॉलेज शुरू हुआ। पहले प्रिंसिपल कर्नल सर ओलिवर सेंट जॉन और पहले छात्र अलवर के महाराजा मंगल सिंह थे। (RAS Pre 2016 में अलग शिक्षा संस्था का सुझाव देने वाले अफसर पर सवाल आया।)

वाल्टरकृत राजपूत्र हितकारिणी सभा (1888)

AGG कर्नल सी.के.एम. वाल्टर की पहल पर 1888 में अजमेर में यह सभा बनी और इसकी पहली बैठक अजमेर में हुई। इसका मकसद राजपूत और चारण समाज में सुधार था: शादी और मृत्यु भोज पर फिजूलखर्ची घटाना, चारण-भाटों को दिया जाने वाला 'त्याग' घटाना और विवाह की कम से कम उम्र (लड़की 14, लड़का 18 वर्ष) तय करना। इसके लिए सभा ने सामाजिक नियम बनाए। दलितों से इसका कोई संबंध नहीं था। (RAS Pre 2024 में इसी सभा के कथनों पर सवाल आया।)

वीर भारत सभा और सर्वहितकारिणी सभा

केसरी सिंह बारहठ ने 1910 में राव गोपाल सिंह खरवा के साथ वीर भारत सभा बनाई (कुछ स्रोत विजय सिंह पथिक का नाम भी जोड़ते हैं)। RAS Pre 2013 में इसे "वीर भारत समाज, कोटा" कहकर पूछा गया और सही उत्तर केसरी सिंह था। चूरू की सर्वहितकारिणी सभा के स्वामी गोपालदास और चंदनमल बहड़ ने 26 जनवरी 1930 को चूरू के धर्म स्तूप पर तिरंगा फहराया।

मारवाड़ की शुरुआती संस्थाएं

1918 में चांदमल सुराणा के साथ मारवाड़ हितकारिणी सभा बनी। 1920 में मारवाड़ सेवा संघ बना, जिसने तौल आंदोलन चलाया (सेर का वजन 100 तोले से घटाकर 80 तोले करने के विरोध में)। बाद में जयनारायण व्यास ने हितकारिणी सभा को फिर से सक्रिय किया।

प्रमुख प्रजामंडल: स्थापना वर्ष, संस्थापक और जननायक

प्रजामंडल वर्ष कहां बना संस्थापक / अध्यक्ष खास बात
जयपुर 1931 जयपुर कपूरचंद पाटनी; 1936-38 में जमनालाल बजाज, हीरालाल शास्त्री ज्यादातर किताबों में पहला; 1942 जेंटलमैन एग्रीमेंट
बूंदी 1931 बूंदी कांतिलाल, नित्यानंद, ऋषिदत्त मेहता कुछ स्रोत इसे भी 1931 का बताते हैं
मारवाड़ 1934 जोधपुर जयनारायण व्यास; अध्यक्ष भंवरलाल सर्राफ 1938 में मारवाड़ लोक परिषद; 1947 डाबड़ा कांड
हाड़ौती 1934 कोटा पं. नयनूराम शर्मा बेगार विरोध
बीकानेर 4 अक्टूबर 1936 कोलकाता मघाराम वैद्य, लक्ष्मणदास स्वामी रियासत से बाहर बना; 1942 में प्रजा परिषद
धौलपुर 1936 धौलपुर कृष्णदत्त पालीवाल, ज्वाला प्रसाद जिज्ञासु, जौहरीलाल इंदु 11 अप्रैल 1947 तसीमो कांड
मेवाड़ 24 अप्रैल 1938 उदयपुर माणिक्य लाल वर्मा; अध्यक्ष बलवंत सिंह मेहता सराड़ा किला "मेवाड़ का काला पानी"
अलवर 1938 अलवर हरिनारायण शर्मा पहला अधिवेशन 1944
भरतपुर 1938 रेवाड़ी किशनलाल जोशी; अध्यक्ष गोपीलाल यादव रियासत से बाहर बना
शाहपुरा 1938 शाहपुरा रमेशचंद्र ओझा, लादूराम व्यास पूर्ण उत्तरदायी शासन देने वाली पहली रियासत (14 अगस्त 1947)
करौली 1938 करौली त्रिलोकचंद माथुर -
कोटा 1939 (कुछ स्रोत 1938) कोटा; पहला अधिवेशन मांगरोल पं. नयनूराम शर्मा, अभिन्न हरि 1942 में रामपुरा कोतवाली पर कब्जा
सिरोही 1934 मुंबई / 22 जनवरी 1939 सिरोही (मतभेद) मुंबई, फिर सिरोही वृद्धिशंकर त्रिवेदी, गोकुलभाई भट्ट (राजस्थान के गांधी) मुंबई में शुरुआत के कारण "बाहर बना" गिना जाता है
किशनगढ़ 1939 किशनगढ़ कांतिलाल चौथाणी, जमाल शाह -
कुशलगढ़ 1942 कुशलगढ़ भंवरलाल निगम -
बांसवाड़ा 1943 बांसवाड़ा भूपेंद्रनाथ त्रिवेदी, धूलजीभाई भावसार, मणिशंकर नागर -
डूंगरपुर 1 अगस्त 1944 डूंगरपुर भोगीलाल पंड्या (वागड़ के गांधी), हरिदेव जोशी 1947 रास्तापाल कांड
जैसलमेर 1945 जोधपुर मीठालाल व्यास सागरमल गोपा का बलिदान (1946)
प्रतापगढ़ 1945 प्रतापगढ़ अमृतलाल पायक, चुन्नीलाल प्रभाकर -
झालावाड़ 1946 झालावाड़ मांगीलाल भव्य, कन्हैयालाल मित्तल सबसे आखिरी प्रजामंडल

प्रजामंडलों का संघर्ष और प्रमुख घटनाएं

1. जयपुर: जेंटलमैन एग्रीमेंट और आजाद मोर्चा (1942)

1931 में कपूरचंद पाटनी ने जयपुर प्रजामंडल बनाया और 1936-38 में जमनालाल बजाज और हीरालाल शास्त्री ने इसे फिर से खड़ा किया। सितंबर 1942 में हीरालाल शास्त्री और जयपुर के प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल के बीच जेंटलमैन एग्रीमेंट हुआ। राज्य ने उत्तरदायी शासन की ओर बढ़ने, शांतिपूर्ण आंदोलन की छूट देने और युद्ध में अंग्रेजों को जन-धन की मदद न देने की बात मानी। बदले में प्रजामंडल भारत छोड़ो आंदोलन से अलग रहा। इसके विरोध में बाबा हरिश्चंद्र, रामकरण जोशी और दौलतमल भंडारी ने आजाद मोर्चा बनाकर भारत छोड़ो आंदोलन चलाया। 1945 में नेहरू जी की सलाह पर आजाद मोर्चा प्रजामंडल में मिल गया।

2. मेवाड़: काला पानी और AISPC अधिवेशन

24 अप्रैल 1938 को उदयपुर में बलवंत सिंह मेहता के घर माणिक्य लाल वर्मा ने मेवाड़ प्रजामंडल बनाया और मेहता जी अध्यक्ष बने। रियासत ने वर्मा जी को निकाल दिया तो उन्होंने अजमेर से 'मेवाड़ का वर्तमान शासन' पुस्तिका निकाली। उपाध्यक्ष भूरेलाल बयां को सराड़ा किले (मेवाड़ का काला पानी) में कैद रखा गया। नवंबर 1941 में पहले अधिवेशन का उद्घाटन जे.बी. कृपलानी ने किया। 31 दिसंबर 1945 से 1 जनवरी 1946 तक उदयपुर में नेहरू जी की अध्यक्षता में AISPC का सातवां अधिवेशन हुआ।

3. मारवाड़: बालमुकुंद बिस्सा और डाबड़ा कांड

1934 में जयनारायण व्यास की प्रेरणा से मारवाड़ प्रजामंडल बना और भंवरलाल सर्राफ अध्यक्ष बने। 1938 में रणछोड़दास गट्टानी की अध्यक्षता में मारवाड़ लोक परिषद बनी। जोधपुर जेल में भूख हड़ताल के बाद 19 जून 1942 को बालमुकुंद बिस्सा शहीद हुए, उन्हें "राजस्थान का जतिन दास" कहते हैं। 13 मार्च 1947 को डीडवाना के पास डाबड़ा गांव में मारवाड़ लोक परिषद और किसान सभा के सम्मेलन पर जागीरदारों ने हमला किया। इस डाबड़ा कांड में कई किसान शहीद हुए और मथुरादास माथुर घायल हुए।

4. बीकानेर: रायसिंहनगर कांड

4 अक्टूबर 1936 को मघाराम वैद्य ने कोलकाता में बीकानेर प्रजामंडल बनाया। 1942 में रघुवर दयाल गोयल ने बीकानेर राज्य प्रजा परिषद बनाई। 1 जुलाई 1946 को रायसिंहनगर में तिरंगे के साथ जुलूस पर गोली चली और बीरबल सिंह ढालिया शहीद हुए। 17 जुलाई 1946 को 'बीरबल दिवस' मनाया गया।

5. शाहपुरा का उत्तरदायी शासन

शाहपुरा के राजा सुदर्शन देव ने 14 अगस्त 1947 को गोकुल लाल असावा के नेतृत्व में पूर्ण उत्तरदायी मंत्रिमंडल बनाया। यही असावा 25 मार्च 1948 को बने संयुक्त राजस्थान के प्रधानमंत्री बने। एकीकरण के सभी चरण राजस्थान का एकीकरण note में देखें।

6. वागड़, जैसलमेर और धौलपुर

डूंगरपुर में भोगीलाल पंड्या ने 1944 में प्रजामंडल बनाया। 19 जून 1947 को रास्तापाल गांव में पुलिस ने स्कूल बंद कराने के लिए नानाभाई खांट और शिक्षक सेंगाभाई पर हमला किया। सेंगाभाई को बचाते हुए करीब 13 वर्ष की भील बालिका कालीबाई शहीद हुईं। जैसलमेर में सागरमल गोपा ने 'जैसलमेर का गुंडाराज' पुस्तक लिखी; 1946 में जेल में उन्हें जलाकर मार दिया गया। धौलपुर के तसीमो गांव में 11 अप्रैल 1947 को तिरंगे की रक्षा में छतर सिंह और पंचम सिंह शहीद हुए।

स्वतंत्रता संग्राम में समाचार पत्र और पत्रकारिता

रियासतों में प्रेस पर कड़ा नियंत्रण था, इसलिए ज्यादातर पत्र ब्रिटिश इलाके अजमेर-ब्यावर से या रियासत के बाहर से निकले।

समाचार पत्र वर्ष व स्थान संपादक / संचालक खास बात
देश हितैषी 1882, अजमेर मुंशी मुन्नालाल शर्मा आर्य समाज के विचारों का प्रचारक
राजपूताना गजट 1882/1885 (मतभेद), अजमेर मौलवी मुरादअली हिंदी-उर्दू साप्ताहिक; आर्य समाज का पत्र नहीं
राजस्थान समाचार 1889, अजमेर मुंशी समर्थदान राजस्थान का पहला हिंदी दैनिक माना जाता है
राजस्थान केसरी 1920, वर्धा विजय सिंह पथिक (रामनारायण चौधरी सहयोगी) जमनालाल बजाज की मदद से; किसान आंदोलनों की खबरें
नवीन राजस्थान 1922, अजमेर विजय सिंह पथिक (राजस्थान सेवा संघ) 1923 में पाबंदी लगी
तरुण राजस्थान 1923, अजमेर/ब्यावर (मतभेद) रामनारायण चौधरी, जयनारायण व्यास (स्रोतों में अलग नाम) नवीन राजस्थान पर रोक के बाद नए नाम से
राजस्थान (साप्ताहिक) 1923, ब्यावर ऋषिदत्त मेहता रियासतों के जुल्म छापे; उदयपुर में पाबंदी
त्याग भूमि 1927, अजमेर हरिभाऊ उपाध्याय गांधीवादी विचार, महिला शिक्षा और समाज सुधार
आगीबाण 1932, ब्यावर जयनारायण व्यास राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक पत्र
नवज्योति 1936, अजमेर रामनारायण चौधरी, दुर्गाप्रसाद चौधरी बाद में दैनिक बना
अखंड भारत 1936 (कुछ स्रोत 1938), मुंबई जयनारायण व्यास हिंदी पत्र
पीप (Peep) दिल्ली जयनारायण व्यास अंग्रेजी पत्र
लोकवाणी 1943, जयपुर देवीशंकर तिवारी जमनालाल बजाज की याद में शुरू
रियासती 1940 का दशक, जोधपुर सुमनेश जोशी जोधपुर-भोपाल के गुप्त समझौते (पाकिस्तान में मिलने की कोशिश) को उजागर किया

जयनारायण व्यास (लोकनायक) ने तीन भाषाओं में पत्रकारिता की: राजस्थानी में 'आगीबाण', हिंदी में 'अखंड भारत' और अंग्रेजी में 'पीप'। RPSC की final key (RAS Pre 2016) के अनुसार देश हितैषी, जनहितकारक और परोपकारक आर्य समाज के विचार फैलाने वाले पत्र थे, जबकि राजपूताना गजट नहीं। बिजोलिया आंदोलन की खबरें कानपुर के 'प्रताप', प्रयाग के 'अभ्युदय' और कलकत्ता के 'भारत मित्र' ने भी छापीं (RAS Pre 2024)।

Advertisement

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • पहला प्रजामंडल (ज्यादातर किताबें): जयपुर 1931, कपूरचंद पाटनी; बूंदी प्रजामंडल भी 1931 का बताया जाता है।
  • AISPC: दिसंबर 1927, मुंबई; हरिपुरा अधिवेशन 1938 (सुभाष चंद्र बोस)।
  • जेंटलमैन एग्रीमेंट (1942): हीरालाल शास्त्री और मिर्जा इस्माइल; विरोध में बाबा हरिश्चंद्र का आजाद मोर्चा।
  • मेवाड़ प्रजामंडल (24 अप्रैल 1938): माणिक्य लाल वर्मा संस्थापक, बलवंत सिंह मेहता अध्यक्ष, भूरेलाल बयां सराड़ा किले में कैद।
  • बाहर बने प्रजामंडल: बीकानेर (कोलकाता), सिरोही (मुंबई), भरतपुर (रेवाड़ी), जैसलमेर (जोधपुर)।
  • पूर्ण उत्तरदायी शासन देने वाली पहली रियासत: शाहपुरा (14 अगस्त 1947, गोकुल लाल असावा)।
  • वाल्टरकृत राजपूत्र हितकारिणी सभा: 1888 अजमेर, कर्नल सी.के.एम. वाल्टर; राजपूत-चारण समाज में सुधार।
  • मेयो कॉलेज: 1875 अजमेर; विचार कैप्टन वाल्टर (1869), पहले छात्र अलवर के मंगल सिंह।
  • आगीबाण (1932, ब्यावर): जयनारायण व्यास का राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक पत्र।
  • राजस्थान का जतिन दास: बालमुकुंद बिस्सा (जोधपुर जेल, 1942)।

RAS Prelims MCQ

  1. ज्यादातर किताबों के अनुसार राजस्थान का पहला प्रजामंडल कौन सा था?
    A) मेवाड़ (1938)
    B) जयपुर (1931)
    C) मारवाड़ (1934)
    D) बीकानेर (1936)
    उत्तर: B) जयपुर (1931)
    कारण: 1931 में कपूरचंद पाटनी ने जयपुर प्रजामंडल बनाया; बाकी तीनों बाद में बने।
  2. 1942 का 'जेंटलमैन एग्रीमेंट' किनके बीच हुआ था?
    A) माणिक्य लाल वर्मा और महाराणा भूपाल सिंह
    B) जयनारायण व्यास और महाराजा उम्मेद सिंह
    C) हीरालाल शास्त्री और सर मिर्जा इस्माइल
    D) नयनूराम शर्मा और महाराव भीम सिंह
    उत्तर: C) हीरालाल शास्त्री और सर मिर्जा इस्माइल
    कारण: जयपुर के प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल और प्रजामंडल के हीरालाल शास्त्री के बीच यह समझौता हुआ।
  3. राजकुमारों के लिए अलग शिक्षा संस्था का सुझाव सबसे पहले किसने दिया था, जिसके बाद मेयो कॉलेज बना?
    A) लॉर्ड लैंसडाउन
    B) कैप्टन वाल्टर
    C) कर्नल टॉड
    D) लॉर्ड कर्जन
    उत्तर: B) कैप्टन वाल्टर
    कारण: वाल्टर ने 1869 में सुझाव दिया; लॉर्ड मेयो के समय 1875 में अजमेर में मेयो कॉलेज शुरू हुआ।
  4. 24 अप्रैल 1938 को बने मेवाड़ प्रजामंडल के पहले अध्यक्ष कौन थे?
    A) माणिक्य लाल वर्मा
    B) बलवंत सिंह मेहता
    C) भूरेलाल बयां
    D) मोतीलाल तेजावत
    उत्तर: B) बलवंत सिंह मेहता
    कारण: वर्मा जी संस्थापक थे, पर अध्यक्ष बलवंत सिंह मेहता बने।
  5. 'देश हितैषिणी सभा' (1877) किस रियासत में बनी थी?
    A) जोधपुर
    B) जयपुर
    C) उदयपुर
    D) बीकानेर
    उत्तर: C) उदयपुर
    कारण: 2 जुलाई 1877 को महाराणा सज्जन सिंह की अध्यक्षता में उदयपुर में यह सभा बनी।
  6. बीकानेर प्रजामंडल की स्थापना 1936 में किस शहर में हुई थी?
    A) बीकानेर
    B) दिल्ली
    C) कोलकाता
    D) मुंबई
    उत्तर: C) कोलकाता
    कारण: मघाराम वैद्य ने 4 अक्टूबर 1936 को कोलकाता में बीकानेर प्रजामंडल बनाया।
  7. वाल्टरकृत राजपूत्र हितकारिणी सभा का मुख्य मकसद क्या था?
    A) उत्तरदायी शासन की मांग
    B) राजपूत और चारण समाज में विवाह व मृत्यु भोज की फिजूलखर्ची रोकना
    C) किसानों से लाग-बाग हटवाना
    D) भीलों को संगठित करना
    उत्तर: B) राजपूत और चारण समाज में विवाह व मृत्यु भोज की फिजूलखर्ची रोकना
    कारण: 1888 में कर्नल वाल्टर की पहल पर बनी सभा ने त्याग, मृत्यु भोज का खर्च और विवाह की उम्र तय करने के नियम बनाए।
  8. 19 जून 1947 का रास्तापाल कांड किस रियासत से जुड़ा है?
    A) बांसवाड़ा
    B) डूंगरपुर
    C) प्रतापगढ़
    D) सिरोही
    उत्तर: B) डूंगरपुर
    कारण: डूंगरपुर के रास्तापाल में शिक्षक सेंगाभाई को बचाते हुए कालीबाई शहीद हुईं।
  9. राजस्थानी भाषा का पहला राजनीतिक पत्र 'आगीबाण' 1932 में ब्यावर से किसने शुरू किया?
    A) विजय सिंह पथिक
    B) रामनारायण चौधरी
    C) जयनारायण व्यास
    D) हरिभाऊ उपाध्याय
    उत्तर: C) जयनारायण व्यास
    कारण: व्यास जी ने राजस्थानी में 'आगीबाण', हिंदी में 'अखंड भारत' और अंग्रेजी में 'पीप' निकाले।
  10. 13 मार्च 1947 का 'डाबड़ा कांड' किस संगठन के सम्मेलन से जुड़ा था?
    A) मेवाड़ प्रजामंडल
    B) मारवाड़ लोक परिषद
    C) बीकानेर प्रजा परिषद
    D) आजाद मोर्चा
    उत्तर: B) मारवाड़ लोक परिषद
    कारण: डाबड़ा (डीडवाना) में मारवाड़ लोक परिषद और किसान सभा के सम्मेलन पर जागीरदारों ने हमला किया।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. प्रश्न: 1942 के 'जेंटलमैन एग्रीमेंट' की दो मुख्य शर्तें क्या थीं? (20 शब्द)
    उत्तर: जयपुर राज्य युद्ध में अंग्रेजों को जन-धन की मदद नहीं देगा और उत्तरदायी शासन की ओर बढ़ेगा; प्रजामंडल भारत छोड़ो आंदोलन से अलग रहेगा।
  2. प्रश्न: वाल्टरकृत राजपूत्र हितकारिणी सभा क्या थी? (20 शब्द)
    उत्तर: 1888 में अजमेर में कर्नल वाल्टर की पहल पर बनी सभा, जिसने राजपूत-चारण समाज में विवाह और मृत्यु भोज की फिजूलखर्ची घटाने के नियम बनाए।
  3. प्रश्न: रियासत से बाहर बने चार प्रजामंडल कौन से थे? (20 शब्द)
    उत्तर: बीकानेर (कोलकाता), सिरोही (मुंबई), भरतपुर (रेवाड़ी) और जैसलमेर (जोधपुर)।
  4. प्रश्न: रास्तापाल कांड (1947) का क्या महत्व है? (20 शब्द)
    उत्तर: 19 जून 1947 को डूंगरपुर में शिक्षक सेंगाभाई को बचाते हुए भील बालिका कालीबाई शहीद हुईं; यह आदिवासी शिक्षा के संघर्ष का प्रतीक है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. प्रश्न: राजस्थान में प्रजामंडल आंदोलनों के उद्देश्यों और उपलब्धियों का मूल्यांकन कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: उद्देश्य: राजा के अधीन उत्तरदायी शासन, नागरिक अधिकार, बेगार और लाग-बाग का अंत। 1938 के हरिपुरा अधिवेशन के बाद इन्हें गति मिली। उपलब्धियां:
    1. सामंती दमन के सामने आम जनता में डर खत्म हुआ और राजनीतिक संगठन बना।
    2. शाहपुरा ने 1947 में पूर्ण उत्तरदायी शासन दिया; कई रियासतों में लोकप्रिय मंत्री शामिल हुए।
    3. प्रजामंडल नेता (शास्त्री, व्यास, वर्मा, असावा) एकीकरण (1948-1956) के बाद राज्य के नेतृत्व में आए।
  2. प्रश्न: राजस्थान में राजनीतिक जागरण में समाचार पत्रों और संस्थाओं की भूमिका बताइए। (100 शब्द)
    उत्तर: 1. देश हितैषिणी सभा (1877) और वाल्टरकृत सभा (1888) ने समाज सुधार की शुरुआत की; आर्य समाज के पत्रों (देश हितैषी) ने सुधार के विचार फैलाए।
    2. राजस्थान सेवा संघ (1919) ने राजस्थान केसरी, नवीन राजस्थान और तरुण राजस्थान से किसान आंदोलनों को आवाज दी।
    3. त्याग भूमि, आगीबाण, 'राजस्थान' और रियासती जैसे पत्रों ने रियासती जुल्म उजागर किए; अजमेर-ब्यावर प्रेस का केंद्र बना।

FAQs

प्रश्न: प्रजामंडल का शाब्दिक अर्थ और मूल उद्देश्य क्या था?
उत्तर: प्रजामंडल का अर्थ है प्रजा का संगठन। मूल उद्देश्य राजा के अधीन उत्तरदायी शासन और नागरिक अधिकार पाना था।

प्रश्न: देश हितैषिणी सभा और वाल्टरकृत हितकारिणी सभा में क्या फर्क है?
उत्तर: देश हितैषिणी सभा 1877 में उदयपुर में महाराणा सज्जन सिंह ने बनाई। वाल्टरकृत सभा 1888 में अजमेर में AGG कर्नल वाल्टर की पहल पर पूरे राजपूताना के लिए बनी।

प्रश्न: सागरमल गोपा का संबंध किस रियासत से था?
उत्तर: जैसलमेर से। उन्होंने 'जैसलमेर का गुंडाराज' और 'आजादी के दीवाने' पुस्तकें लिखीं; 1946 में जेल में उनकी हत्या हुई।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • जयपुर प्रजामंडल 1931 (कपूरचंद पाटनी), झालावाड़ 1946 सबसे आखिरी।
  • मेवाड़ प्रजामंडल 24 अप्रैल 1938: वर्मा संस्थापक, बलवंत सिंह मेहता अध्यक्ष।
  • शाहपुरा: 14 अगस्त 1947, पहला पूर्ण उत्तरदायी शासन (गोकुल लाल असावा)।
  • देश हितैषिणी सभा 1877 उदयपुर; वाल्टरकृत राजपूत्र हितकारिणी सभा 1888 अजमेर।
  • मेयो कॉलेज 1875 अजमेर; अलग संस्था का पहला सुझाव कैप्टन वाल्टर का।
  • वीर भारत सभा 1910: केसरी सिंह बारहठ।
  • 'राजस्थान' साप्ताहिक 1923 ब्यावर: ऋषिदत्त मेहता; आगीबाण 1932 ब्यावर: जयनारायण व्यास।
  • राजस्थान सेवा संघ 1919 वर्धा; AISPC 1927 मुंबई; नरेंद्र मंडल 1921।

RAS Pre का revision मोबाइल पर

NotesMedia app में यही RAS notes और 362 RAS flashcards हैं, जिनसे जल्दी revision कर सकते हैं।

Google Play से app लें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Prajamandal Andolan Rajasthan: प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान (Prajamandal Andolan Rajasthan) देशी रियासतों में सामंती शासन के खिलाफ जनता का संगठित।
राजस्थान का इतिहास और संस्कृति के पाठ्यक्रम में Prajamandal Andolan Rajasthan: प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान, संस्थाएं, समाचार पत्र और प्रमुख जननायक एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको Prajamandal Andolan Rajasthan: प्रजामंडल आंदोलन राजस्थान, संस्थाएं, समाचार पत्र और प्रमुख जननायक के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
Advertisement