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Maurya Empire in Hindi: मौर्य साम्राज्य: प्रशासन, अशोक का धम्म और कला

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय इतिहास (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Maurya Empire in Hindi: मौर्य साम्राज्य: प्रशासन, अशोक का धम्म और कला - प्राचीन भारत: प्रमुख स्थल, कला और संस्कृति
  • • अवलोकन: Quick Answer: Maurya Empire in Hindi: मौर्य साम्राज्य (लगभग 321 ई.पू. से 185 ई.पू.) भारत का पहला बड़ा, लगभग पूरे उपमहाद्वीप में फैला केंद्रीकृत साम्राज्...
Quick Answer: Maurya Empire in Hindi: मौर्य साम्राज्य (लगभग 321 ई.पू. से 185 ई.पू.) भारत का पहला बड़ा, लगभग पूरे उपमहाद्वीप में फैला केंद्रीकृत साम्राज्य था, जिसे चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य (कौटिल्य) की मदद से नंद वंश को हटाकर बनाया। कौटिल्य का अर्थशास्त्र राज्य के सप्तांग सिद्धांत (स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड, मित्र) और नौकरशाही को समझाता है। मेगस्थनीज की इंडिका पाटलिपुत्र के नगर प्रशासन और समाज का वर्णन करती है। करीब 261 ई.पू. के कलिंग युद्ध (13वां शिलालेख) के बाद अशोक ने धम्म नीति अपनाई; उसके ब्राह्मी अभिलेख 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़े। सारनाथ का सिंह शीर्ष भारत का राष्ट्रीय प्रतीक है और राजस्थान के बैराठ से भाब्रू शिलालेख मिला है।

1. मौर्य साम्राज्य की स्थापना और प्रमुख साहित्यिक स्रोत (Origins & Literary Sources)

वर्ष 321 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने गुरु और प्रधानमंत्री चाणक्य (विष्णुगुप्त / कौटिल्य) के कुशल मार्गदर्शन में अंतिम नंद शासक धनानंद को पराजित कर मौर्य वंश की नींव रखी। 305 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त ने यूनानी सेनापति सेल्यूकस निकेटर को परास्त किया, और संधि के तहत काबुल, कंधार और मकरान (कुछ विद्वानों के अनुसार हेरात भी) के क्षेत्र मौर्य साम्राज्य में आए। इसके बाद यूनानी राजदूत मेगस्थनीज पाटलिपुत्र दरबार में आया।

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मौर्य इतिहास के दो सबसे जरूरी साहित्यिक स्रोत नीचे दिए गए हैं:

ग्रंथ और रचयिता विषय वस्तु और केंद्रीय विचार प्रशासनिक व सामाजिक विवरण
कौटिल्य का अर्थशास्त्र राजनीति, शासन कला, कूटनीति, युद्ध और अर्थव्यवस्था पर संस्कृत ग्रंथ (15 अधिकरण, 150 अध्याय, 180 प्रकरण)। राज्य का सप्तांग सिद्धांत, 18 तीर्थ, विभागों के अध्यक्ष (आमतौर पर 27 गिने जाते हैं), भूमि कर (उपज का आमतौर पर 1/6 भाग) और संस्था व संचारा नामक गुप्तचर व्यवस्था।
मेगस्थनीज की 'इंडिका' यूनानी राजदूत का आंखों देखा यात्रा वृत्तांत (एरियन व स्ट्रैबो के उद्धरणों में सुरक्षित)। पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन 5-5 सदस्यों वाली 6 समितियों के जरिए संचालित; सैन्य प्रशासन 30 सदस्यों के 6 बोर्डों के जरिए; 7 सामाजिक वर्ग।

कौटिल्य के अनुसार राज्य के सात अंग या 'प्रकृतियां' (सप्तांग सिद्धांत) हैं: 1. स्वामी (राजा), 2. अमात्य (मंत्री/अधिकारी), 3. जनपद (भूमि व जनता), 4. दुर्ग (किला), 5. कोष (खजाना), 6. दंड / बल (सेना), और 7. मित्र (मित्र राज्य)। कौटिल्य राज्य को एक जीवित शरीर जैसा मानते हैं; कुछ किताबों में हर अंग को शरीर के किसी हिस्से से जोड़ा जाता है, पर यह जोड़ अर्थशास्त्र के मूल पाठ में नहीं मिलता।

अर्थशास्त्र में नगर की सफाई के नियम भी हैं, जैसे सड़क पर कीचड़-पानी फैलाने पर जुर्माना ('पंकोदकसन्निरोधे'; RAS Pre 2013, Q14 में पूछा गया)।

2. मौर्यकालीन प्रशासनिक structure: केंद्रीय, प्रांतीय और स्थानीय (Mauryan Administration)

मौर्य शासन व्यवस्था प्राचीन विश्व की सबसे सुगठित और अत्यधिक केंद्रीयकृत नौकरशाही पर आधारित थी:

  • केंद्रीय प्रशासन: राजा सबसे बड़ा न्यायाधीश और सेनापति था। अर्थशास्त्र में सबसे ऊंचे 18 अधिकारियों को तीर्थ कहा गया है; अशोक के अभिलेखों में बड़े अधिकारियों को महामात्र कहा गया है:
    • समाहर्ता: साम्राज्य का सर्वोच्च कर और वित्त नियंत्रक, जो बजट तैयार करता था।
    • सन्निधाता: राजकीय कोषाध्यक्ष और मुख्य भंडारगृह का संरक्षक।
    • सीताध्यक्ष: राजकीय कृषि भूमि (सीता) का प्रबंध करने वाला अधिकारी।
    • संस्था व संचारा: गूढ़पुरुष (गुप्तचर) जो एक जगह टिककर (संस्था) या भ्रमणशील होकर (संचारा) राज्य पर नजर रखते थे।
  • प्रांतीय प्रशासन: अशोक के समय साम्राज्य के मुख्य प्रांत और उनकी राजधानियां: उत्तरापथ (तक्षशिला), दक्षिणापथ (सुवर्णगिरि), अवंति (उज्जयिनी), कलिंग (तोसली) और केंद्र का प्रांत मगध/प्राच्य (पाटलिपुत्र)। प्रांतों पर अक्सर राजकुमार (कुमार) शासन करते थे।
  • स्थानीय प्रशासन: अशोक के अभिलेखों में जिला स्तर के अधिकारी प्रादेशिक, राजुक और युक्त मिलते हैं (RAS Pre 2013, Q16 में पूछा गया कि 'अग्रहारिक' मौर्य अधिकारी नहीं था)। अर्थशास्त्र में 'स्थानिक' और 'गोप' जैसे अधिकारी हैं। गांव का मुखिया 'ग्रामिक' कहलाता था।

3. सम्राट अशोक का कलिंग युद्ध और धम्म नीति (Ashoka's Dhamma Policy)

सम्राट अशोक (268-232 ई.पू.) ने राज्याभिषेक के 8 साल बाद, यानी करीब 261 ईसा पूर्व में कलिंग पर आक्रमण किया। इसका विवरण अशोक के 13वें बड़े शिलालेख में है, जिसमें युद्ध में मारे गए और बंदी बनाए गए लोगों का दुख लिखा है। चौथे शिलालेख में अशोक कहता है कि अब 'भेरीघोष' (युद्ध के नगाड़े) की जगह 'धम्मघोष' होता है।

अशोक का धम्म: यह कोई संकीर्ण संप्रदाय नहीं बल्कि सार्वभौमिक नैतिक आचार संहिता थी:

  1. सभी जीवों के प्रति अहिंसा; यज्ञ में पशुबलि और कई जीवों के वध पर रोक (पहला शिलालेख)।
  2. माता-पिता, गुरुजनों और वृद्धों का आदर व आज्ञापालन।
  3. दासों, सेवकों और भृत्यों के प्रति मानवीय और दयालु व्यवहार।
  4. सर्वधर्म समभाव और वैचारिक सहिष्णुता (12वें शिलालेख में धार्मिक सहिष्णुता का मैसेज)।
  5. धम्म के प्रचार के लिए राज्याभिषेक के 13 साल बाद 'धम्म महामात्रों' की नियुक्ति (5वां शिलालेख)।

4. अशोक के अभिलेख और राजस्थान का भाब्रू-बैराठ अभिलेख (Inscriptions of Ashoka)

अशोक भारत का पहला ऐसा सम्राट था जिसने अभिलेखों के माध्यम से सीधे अपनी प्रजा से संवाद स्थापित किया। वर्ष 1837 में जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep) ने पहली बार अशोक के ब्राह्मी अभिलेखों को पढ़ा। अभिलेखों में अशोक को 'देवानांपिय पियदसि' कहा गया है। आमतौर पर चार अभिलेखों, मास्की (कर्नाटक), गुर्जरा (मध्य प्रदेश), नेत्तूर और उडेगोलम (कर्नाटक), में उसका नाम 'अशोक' मिलता है।

अभिलेख का वर्ग प्रयुक्त लिपियां व भाषाएं प्रमुख स्थल और ऐतिहासिक संदर्भ
14 वृहद शिलालेख ज्यादातर ब्राह्मी लिपि; खरोष्ठी (शाहबाजगढ़ी व मानसेहरा, पाकिस्तान); कंधार (अफगानिस्तान) के अभिलेख ग्रीक और अरामाइक में। भाषा ज्यादातर प्राकृत। गिरनार (गुजरात), कालसी (उत्तराखंड), धौली व जौगड़ (ओडिशा), सोपारा (महाराष्ट्र)।
7 पिलर लेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा; ज्यादातर चुनार के बलुआ पत्थर के एक ही टुकड़े से बने पिलर पर। सातों लेख सिर्फ टोपरा-दिल्ली पिलर पर हैं, बाकी पर छह। टोपरा-दिल्ली, मेरठ-दिल्ली, प्रयागराज, लौरिया अरराज, लौरिया नंदनगढ़, रामपुरवा।
लघु शिलालेख ब्राह्मी लिपि और प्राकृत भाषा। भाब्रू (कलकत्ता-बैराठ) अभिलेख (राजस्थान): 1840 में कैप्टन टी.एस. बर्ट ने बैराठ (विराटनगर) के पास पहाड़ी पर खोजा; नाम पास के पड़ाव भाब्रू से पड़ा। इसमें अशोक बुद्ध, धम्म और संघ में आस्था जताता है और संघ के लिए कुछ बौद्ध ग्रंथ पढ़ने को कहता है। यह कोलकाता ले जाया गया (एशियाटिक सोसाइटी)। बैराठ में अशोक का एक अलग लघु शिलालेख (भीमजी की डूंगरी) भी है।

5. मौर्यकालीन कला और स्थापत्य (Mauryan Art & Architecture)

मौर्य काल में कला लकड़ी से निकलकर पत्थर के भव्य और स्थायी माध्यम में रूपांतरित हुई:

  • राजकीय कला:
    • सारनाथ का सिंह शीर्ष: चुनार के एकाश्मक बलुआ पत्थर पर कांच जैसी चमकदार 'मौर्यकालीन ओप' (पॉलिश) की गई है। इसके शीर्ष पर चार एशियाई सिंह पीठ से पीठ सटाए बैठे हैं। नीचे गोल चौकी (abacus) पर चार पशु (हाथी, घोड़ा, बैल, सिंह) हैं, जिनके बीच-बीच में 24 तीलियों वाले चक्र बने हैं। भारत सरकार ने 26 जनवरी 1950 को इसे राष्ट्रीय प्रतीक स्वीकार किया।
    • सांची स्तूप: सांची (मध्य प्रदेश) का मूल ईंटों का स्तूप अशोक ने बनवाया; पत्थर का आवरण और तोरण बाद (शुंग-सातवाहन काल) में जुड़े।
  • लोक कला और गुहा स्थापत्य:
    • दीदारगंज की यक्षी: पटना के दीदारगंज से मिली, हाथ में चंवर लिए स्त्री की आदमकद पत्थर की चमकदार मूर्ति; इसे आमतौर पर मौर्य काल का माना जाता है (कुछ विद्वान बाद का मानते हैं)।
    • बराबर की गुफाएं: गया (बिहार) की बराबर पहाड़ी में सख्त ग्रेनाइट काटकर बनी गुफाएं (सुदामा, लोमश ऋषि आदि) अशोक ने आजीवक संन्यासियों को दीं; पास की नागार्जुनी पहाड़ी की गुफाएं उसके पौत्र दशरथ ने दीं। लोमश ऋषि गुफा का द्वार लकड़ी की झोपड़ी जैसा तराशा गया है।
    • राजस्थान में बैराठ का गोल मंदिर: विराटनगर (कोटपूतली-बहरोड़ जिला) की बीजक की पहाड़ी पर अशोक काल का गोल बौद्ध मंदिर (चैत्य) मिला है, जिसे भारत के सबसे पुराने बौद्ध मंदिरों में गिना जाता है (दयाराम साहनी की खुदाई, 1930 के दशक)।

बैराठ और राजस्थान के दूसरे प्राचीन स्थलों के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और राजस्थान के स्थापत्य के लिए राजस्थान का स्थापत्य, मूर्तिशिल्प और चित्रशैलियां पढ़ें।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • कौटिल्य के अर्थशास्त्र में राज्य के सप्तांग सिद्धांत के तहत स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड और मित्र का वर्णन है।
  • मेगस्थनीज की इंडिका के अनुसार पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन 5-5 सदस्यों की 6 प्रशासनिक समितियों के जरिए चलाया जाता था।
  • अशोक के 13वें वृहद शिलालेख में 261 ईसा पूर्व के भीषण कलिंग युद्ध और उसके हृदय परिवर्तन का ऐतिहासिक विवरण मिलता है।
  • ईस्ट इंडिया कंपनी के विद्वान जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में पहली बार अशोक के ब्राह्मी लिपि वाले शिलालेखों को सफलतापूर्वक पढ़ा था।
  • सारनाथ के अशोक पिलर के चार सिंहों वाले शीर्ष फलक को 26 जनवरी 1950 को स्वतंत्र भारत का राष्ट्रीय प्रतीक अंगीकार किया गया।

RAS Prelims MCQ

  1. कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत में नीचे दिए गए में से कौन सा राज्य का अंग नहीं है?
    A) स्वामी (राजा)
    B) अमात्य (मंत्री व अधिकारी)
    C) पुरोहित
    D) मित्र (मित्र राज्य)
    उत्तर: C) पुरोहित
    कारण: सात अंग हैं: स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड और मित्र; पुरोहित एक बड़ा अधिकारी (तीर्थ) था, पर सप्तांग में नहीं गिना जाता।
  2. मेगस्थनीज की पुस्तक 'इंडिका' के अनुसार मौर्य साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन कितनी समितियों के जरिए संचालित होता था?
    A) 4 समितियां
    B) 5 समितियां
    C) 6 समितियां (प्रत्येक में 5 सदस्य)
    D) 8 समितियां
    उत्तर: C) 6 समितियां (प्रत्येक में 5 सदस्य)
    कारण: मेगस्थनीज के अनुसार 30 सदस्यों का एक नगर निकाय 6 समितियों (शिल्प, विदेशी, जन्म-मरण, व्यापार, विनिर्माण व कर) में बंटकर कार्य करता था।
  3. सम्राट अशोक के लड़े गए भीषण 'कलिंग युद्ध' (261 ई.पू.) और उसके परिणामी हृदय परिवर्तन का साक्ष्य किस अभिलेख से मिलता है?
    A) प्रथम पिलर लेख
    B) 10वां शिलालेख
    C) 13वां वृहद शिलालेख
    D) भाब्रू लघु शिलालेख
    उत्तर: C) 13वां वृहद शिलालेख
    कारण: 13वें बड़े शिलालेख में कलिंग युद्ध में मारे गए और बंदी बने लोगों, अशोक के पछतावे और धम्म-विजय का जिक्र है। (भेरीघोष की जगह धम्मघोष वाली बात चौथे शिलालेख में है।)
  4. वर्ष 1837 में पहली बार सम्राट अशोक के ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण अभिलेखों को पढ़ने में सफलता किसने प्राप्त की थी?
    A) अलेक्जेंडर कनिंघम
    B) जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep)
    C) मैक्स मूलर
    D) विलियम जोन्स
    उत्तर: B) जेम्स प्रिंसेप (James Prinsep)
    कारण: ईस्ट इंडिया कंपनी की टकसाल के अधिकारी और एशियाटिक सोसाइटी के सचिव जेम्स प्रिंसेप ने 1837 में ब्राह्मी लिपि पढ़ ली, जिससे अशोक के अभिलेख पढ़े जा सके।
  5. कैप्टन बर्ट ने 1840 में अशोक का 'भाब्रू शिलालेख' राजस्थान के किस स्थल के पास खोजा था?
    A) बैराठ / विराटनगर
    B) आहड़ (उदयपुर)
    C) नगरी (चित्तौड़गढ़)
    D) बागोर (भीलवाड़ा)
    उत्तर: A) बैराठ / विराटनगर
    कारण: बैराठ के पास की पहाड़ी से कैप्टन बर्ट ने 1840 में यह शिलालेख खोजा, जिसमें अशोक ने बुद्ध, धम्म और संघ में आस्था जताई है। आहड़, नगरी और बागोर से अशोक का अभिलेख नहीं मिला।
  6. मौर्य प्रशासन में केंद्रीय स्तर पर राजस्व संग्रह और वार्षिक बजट तैयार करने वाले सर्वोच्च अधिकारी को क्या कहा जाता था?
    A) सन्निधाता
    B) समाहर्ता (Samaharta)
    C) सीताध्यक्ष
    D) प्रदेष्टा
    उत्तर: B) समाहर्ता (Samaharta)
    कारण: समाहर्ता वित्त व कर वसूली का प्रधान अधिकारी था, जबकि सन्निधाता राजकीय कोषाध्यक्ष और मालखाना प्रमुख था।
  7. बिहार के गया जिले में स्थित 'बराबर की पहाड़ियों' में अशोक और उसके पौत्र दशरथ ने किस धार्मिक संप्रदाय के संन्यासियों के लिए शैलकृत गुफाएं बनवाई थीं?
    A) बौद्ध भिक्षु
    B) आजीवक संप्रदाय (Ajivikas)
    C) जैन मुनि
    D) पाशुपत शैव
    उत्तर: B) आजीवक संप्रदाय (Ajivikas)
    कारण: बराबर पहाड़ी की गुफाएं (जैसे सुदामा) अशोक ने और नागार्जुनी पहाड़ी की गुफाएं दशरथ ने आजीवक संन्यासियों को दान कीं; यह गुफाओं के अभिलेखों में लिखा है।
  8. भारत का राष्ट्रीय प्रतीक 'सारनाथ सिंह शीर्ष' नीचे दिए गए में से किस पत्थर से तराशा गया है और इसकी प्रमुख शिल्पीय विशेषता क्या है?
    A) जैसलमेर का पीला पत्थर, अपरिष्कृत रूप
    B) चुनार का बलुआ पत्थर, चमकदार दर्पण जैसी ओप (पॉलिश)
    C) मकराना संगमरमर, पच्चीकारी
    D) ग्रेनाइट, खुरदुरी सतह
    उत्तर: B) चुनार का बलुआ पत्थर, चमकदार दर्पण जैसी ओप (पॉलिश)
    कारण: सारनाथ पिलर चुनार के एकाश्मक बलुआ पत्थर से बना है और इस पर कांच जैसी चमकदार मौर्यकालीन पॉलिश विद्यमान है।
  9. अशोक के केवल चार अभिलेखों में उसका व्यक्तिगत नाम 'अशोक' मिलता है; नीचे दिए गए में से कौन सा उन चारों में शामिल नहीं है?
    A) मास्की
    B) गुर्जरा
    C) नेतूर
    D) कालसी
    उत्तर: D) कालसी
    कारण: नाम 'अशोक' मास्की, गुर्जरा, नेत्तूर और उडेगोलम में मिलता है; कालसी (उत्तराखंड) के बड़े शिलालेखों में 'देवानांपिय पियदसि' उपाधि है।
  10. पटना के पास दीदारगंज से प्राप्त विख्यात आदमकद प्रस्तर मूर्ति 'दीदारगंज की यक्षी' किस काल की लोक कला का उत्कृष्ट उदाहरण है?
    A) सिंधु काल
    B) मौर्य काल (Mauryan Period)
    C) कुषाण काल
    D) गुप्त काल
    उत्तर: B) मौर्य काल (Mauryan Period)
    कारण: हाथ में चंवर लिए दीदारगंज यक्षी पर मौर्य जैसी चमकदार पॉलिश है, इसलिए इसे आमतौर पर मौर्य काल की लोक कला माना जाता है।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. कौटिल्य के सप्तांग सिद्धांत के सातों अंगों के नाम लिखिए। (20 शब्द)
    उत्तर: 1. स्वामी (राजा), 2. अमात्य (मंत्री), 3. जनपद (भूमि-जनता), 4. दुर्ग (किला), 5. कोष (राजकोष), 6. दंड/बल (सेना), 7. मित्र (सहयोगी राज्य)।
  2. अशोक के 'धम्म' की मूल दार्शनिक अवधारणा क्या थी? (20 शब्द)
    उत्तर: यह किसी विशिष्ट धर्म के स्थान पर सार्वभौमिक नैतिक संहिता थी, जिसमें अहिंसा, बड़ों का सम्मान, सेवकों पर दया और सर्वधर्म समभाव प्रमुख थे।
  3. भाब्रू-बैराठ शिलालेख का ऐतिहासिक महत्व स्पष्ट कीजिए। (20 शब्द)
    उत्तर: बैराठ के पास मिले इस अभिलेख में अशोक संघ को संबोधित करता है और बुद्ध, धम्म, संघ में आस्था जताता है; यह उसके बौद्ध होने का सबसे साफ प्रमाण माना जाता है।
  4. मौर्य प्रशासन में 'समाहर्ता' और 'सन्निधाता' के कार्यों में क्या अंतर था? (20 शब्द)
    उत्तर: समाहर्ता पूरे साम्राज्य के राजस्व संग्रह, कर निर्धारण और व्यय का नियंत्रक था, जबकि सन्निधाता राजकोष और अन्नागारों का प्रत्यक्ष संरक्षक था।
  5. सारनाथ के सिंह शीर्ष फलक पर उत्कीर्ण चार पशु कौन से हैं? (20 शब्द)
    उत्तर: गोल चौकी (abacus) पर हाथी, घोड़ा, बैल और सिंह बने हैं, और हर दो पशुओं के बीच 24 तीलियों वाला चक्र है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. मौर्यकालीन केंद्रीय और प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था की मुख्य विशेषताओं का परीक्षण कीजिए और स्पष्ट कीजिए कि यह शासन व्यवस्था आधुनिक लोक कल्याणकारी राज्य के कितने निकट थी। (100 शब्द)
    उत्तर: मौर्य प्रशासनिक स्वरूप बहुत सुव्यवस्थित और जनकल्याणकारी था:
    1. केंद्रीय नियंत्रण व नौकरशाही: राजा निरंकुश न होकर धर्म और प्रजा हित से बंधा था। 18 तीर्थों और 27 अध्यक्षों का विशाल अमला राजस्व, टकसाल, बाजार और कृषि का संचालन करता था।
    2. संतुलित प्रांतीय विभाजन: साम्राज्य बड़े प्रांतों (उत्तरापथ, दक्षिणापथ, अवंति, कलिंग और केंद्र) में बंटा था जहां अक्सर राजकुमार गवर्नर होते थे, जिससे स्थानीय विद्रोह रुके और केंद्र से सीधा संपर्क बना रहा।
    3. पारदर्शी नगर प्रशासन: मेगस्थनीज के अनुसार पाटलिपुत्र में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, स्वच्छता और बाजार नियंत्रण के लिए 6 नागरिक समितियां कार्यरत थीं।
    4. लोक कल्याणकारी आयाम: अशोक के प्रथम पृथक शिलालेख का उद्घोष 'सब्बे मुनिसे पजा ममा' (सभी मनुष्य मेरी संतान हैं) था। सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष, सराय, कुएं खुदवाना और मनुष्य व पशुओं दोनों के लिए औषधालय स्थापित करना इसे आधुनिक वेलफेयर स्टेट के समकक्ष रखता है।
  2. मौर्यकालीन कला की प्रमुख प्रवृत्तियों का 'राजकीय कला' और 'लोक कला' के तहत तुलनात्मक विश्लेषण कीजिए। (100 शब्द)
    उत्तर: मौर्य कला में पहली बार प्रस्तर शिल्प का उत्कृष्ट प्रयोग हुआ:
    1. राजकीय कला (Court Art):
    - सम्राटों के संरक्षण में बनी: अशोक के एकाश्मक पिलर, सारनाथ का चतुर्मुखी सिंह शीर्ष और सांची का स्तूप।
    - शिल्प कौशल: चुनार के बलुआ पत्थर की अखंड लाटों पर कांच जैसी चमकदार 'मौर्य पॉलिश' जो आज 2300 वर्ष बाद भी सुरक्षित है।
    - उद्देश्य: साम्राज्य की शक्ति, बौद्ध धर्म के सिद्धांतों और राजकीय मैसेज का प्रदर्शन।
    2. लोक कला (Folk Art):
    - जनसामान्य और स्थानीय मूर्तिकारों की बनाई: दीदारगंज की यक्षिणी, परखम का यक्ष और बेसनगर की मूर्तियां।
    - शिल्प सौंदर्य: इनमें मांसल देह, स्वाभाविक शारीरिक वलन, नारी सौंदर्य और लोक आस्थाओं का सजीव अंकन है।
    - गुहा स्थापत्य: बराबर और नागार्जुनी पहाड़ियों में आजीवक संन्यासियों के लिए चट्टान काटकर बनाए गए आवास भारत में रॉक-कट वास्तुशिल्प के प्रारंभिक प्रतिमान बने।

FAQs

प्रश्न: चंद्रगुप्त मौर्य ने अपने जीवन के अंतिम दिनों में किस धर्म को अपनाया था?
उत्तर: जैन परंपरा के अनुसार चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन गुरु भद्रबाहु से दीक्षा ली और कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में चंद्रगिरि पहाड़ी पर सल्लेखना (संथारा) से शरीर त्यागा।

प्रश्न: क्या अशोक के शिलालेखों में कलिंग युद्ध के बाद किसी अन्य सैन्य विजय का उल्लेख है?
उत्तर: नहीं, अभिलेखों में कलिंग के बाद किसी और युद्ध का जिक्र नहीं है। 13वें शिलालेख में अशोक 'धम्म-विजय' को सबसे बड़ी विजय बताता है, हालांकि वह जंगली जनजातियों को चेतावनी भी देता है।

प्रश्न: मौर्य काल में गुप्तचरों को किस नाम से पुकारा जाता था?
उत्तर: कौटिल्य के अर्थशास्त्र में गुप्तचरों को 'गूढ़पुरुष' कहा गया है, जो 'संस्था' (स्थाई केंद्र) और 'संचारा' (घूम-घूम कर जासूसी करने वाले) के रूप में काम करते थे।

प्रश्न: भाब्रू शिलालेख वर्तमान में किस संग्रहालय में रखा गया है?
उत्तर: खोज के बाद इसे कोलकाता की एशियाटिक सोसाइटी (बंगाल) ले जाया गया, इसलिए इसे 'कलकत्ता-बैराठ' अभिलेख भी कहते हैं।

प्रश्न: मौर्य वंश का अंतिम शासक कौन था और उसकी हत्या किसने की थी?
उत्तर: मौर्य वंश का अंतिम सम्राट 'बृहद्रथ' था। लगभग 185 ईसा पूर्व में उसके सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने उसकी हत्या कर शुंग वंश शुरू किया।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 321 ई.पू. में नंद वंश (धनानंद) को हटाया; 305 ई.पू. में सेल्यूकस से संधि, फिर मेगस्थनीज आया।
  • सप्तांग: स्वामी, अमात्य, जनपद, दुर्ग, कोष, दंड, मित्र; अर्थशास्त्र में 15 अधिकरण।
  • इंडिका: पाटलिपुत्र का नगर प्रशासन 5-5 सदस्यों की 6 समितियां (कुल 30); समाज के 7 वर्ग।
  • समाहर्ता = राजस्व वसूली, सन्निधाता = कोषाध्यक्ष; अशोक के जिला अधिकारी: प्रादेशिक, राजुक, युक्त।
  • कलिंग युद्ध करीब 261 ई.पू. (13वां शिलालेख); धम्म महामात्र (5वां शिलालेख); धार्मिक सहिष्णुता (12वां)।
  • ब्राह्मी लिपि 1837 में जेम्स प्रिंसेप ने पढ़ी; नाम 'अशोक' मास्की, गुर्जरा, नेत्तूर, उडेगोलम में।
  • भाब्रू शिलालेख: बैराठ के पास, 1840 में कैप्टन बर्ट ने खोजा; बुद्ध, धम्म, संघ में आस्था।
  • सारनाथ सिंह शीर्ष (चुनार बलुआ पत्थर, मौर्य पॉलिश) 26 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय प्रतीक बना।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Maurya Empire in Hindi: मौर्य साम्राज्य (लगभग 321 ई.पू.
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