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Indus Valley Civilization in Hindi: सिंधु घाटी सभ्यता: प्रमुख स्थल, नगर नियोजन और शिल्प

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय इतिहास (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Indus Valley Civilization in Hindi: सिंधु घाटी सभ्यता: प्रमुख स्थल, नगर नियोजन और शिल्प - प्राचीन भारत: प्रमुख स्थल, कला और संस्कृति
  • • अवलोकन: Quick Answer: Indus Valley Civilization in Hindi: सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) भारतीय उपमहाद्वीप की प्रथम नगरीय क्रांति थी, जिसका परिपक्व काल लगभग...
Quick Answer: Indus Valley Civilization in Hindi: सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) भारतीय उपमहाद्वीप की प्रथम नगरीय क्रांति थी, जिसका परिपक्व काल लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व माना जाता है। दयाराम साहनी ने 1921 में हड़प्पा और राखालदास बनर्जी ने 1922 में मोहनजोदड़ो की खोज की। एक-दूसरे को समकोण पर काटती सड़कें (grid), तय अनुपात की ईंटों के मकान, ढकी हुई नालियां और ऊंचा दुर्ग टीला (citadel) इसकी पहचान हैं। राजस्थान के हनुमानगढ़ में घग्घर नदी के किनारे कालीबंगा से जूते हुए खेत और अग्निकुंडों की कतार मिली है, लोथल में गोदीवाड़ा (dockyard) और धोलावीरा में तीन हिस्सों वाला नगर और बड़े जलाशय मिले हैं।

1. सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार और कालक्रम (Origins and Extent)

भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम भाग में कांस्य युग में फली-फूली सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) को प्रथम नगरीय क्रांति कहा जाता है। चूंकि इस सभ्यता का पहला पुरातात्विक प्रमाण हड़प्पा से मिला, इसलिए इसे हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है। रेडियोकार्बन (C-14) तिथियों और उत्खननों के आधार पर इसका परिपक्व चरण 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व के बीच निर्धारित किया गया है।

यह सभ्यता उत्तर में मांडा (जम्मू और कश्मीर, चिनाब नदी) से लेकर दक्षिण में दैमाबाद (महाराष्ट्र, प्रवरा नदी) तक और पश्चिम में सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान, दाश्त नदी) से लेकर पूर्व में आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश, हिंडन नदी) तक लगभग 13 लाख वर्ग किलोमीटर के त्रिभुजाकार क्षेत्र में फैली हुई थी। मेसोपोटामियाई अभिलेखों में हड़प्पा क्षेत्र के लिए 'मेलुहा' शब्द का प्रयोग मिलता है।

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2. प्रमुख हड़प्पा कालीन स्थल और पुरातात्विक खोजें (Major Sites & Discoveries)

पुरातत्वविदों ने 1500 से अधिक बस्तियों की पहचान की है, जिनमें प्रमुख स्थल नीचे दिए गए हैं:

प्रमुख स्थल भौगोलिक स्थिति व नदी उत्खननकर्ता और वर्ष प्रमुख पुरातात्विक साक्ष्य
हड़प्पा साहीवाल (पंजाब, पाकिस्तान), रावी नदी दयाराम साहनी (1921) अन्नागार (दो कतारों में 6-6 कक्ष), लाल बलुआ पत्थर की पुरुष धड़ मूर्ति, R-37 कब्रिस्तान
मोहनजोदड़ो ('मृतकों का टीला') लरकाना (सिंध, पाकिस्तान), सिंधु नदी राखालदास बनर्जी (1922) विशाल स्नानागार (Great Bath), विशाल अन्नागार, कांस्य नर्तकी की मूर्ति, दाढ़ी वाले पुजारी की सेलखड़ी प्रतिमा, पशुपति मुहर
कालीबंगा ('काली चूड़ियां') हनुमानगढ़ (राजस्थान), घग्घर नदी एल.पी. टेस्सीटोरी ने पहले ध्यान दिलाया; अमलानंद घोष ने 1952 में हड़प्पा स्थल पहचाना; बी.बी. लाल व बी.के. थापर (1961-69 उत्खनन) प्राक-हड़प्पा स्तर से जूता हुआ खेत (आड़ी-तिरछी रेखाएं, माना जाता है कि दो फसलें साथ बोई जाती थीं), दुर्ग में एक कतार में सात अग्निकुंड, कच्ची ईंटों के मकान, भूकंप के शुरुआती प्रमाण, मेसोपोटामिया जैसी बेलनाकार मुहर
लोथल अहमदाबाद (गुजरात), भोगवा नदी एस.आर. राव (खोज 1954, उत्खनन 1955-60) ज्वारीय गोदीवाड़ा (Dockyard), मनके बनाने का कारखाना, चावल की भूसी, युगल शवाधान (Double Burial), फारस की खाड़ी की मुहर
धोलावीरा कच्छ (गुजरात), मनहर व मानसर नदी जे.पी. जोशी (खोज 1967-68), आर.एस. बिष्ट (उत्खनन 1990 से) तीन हिस्सों वाला नगर (दुर्ग, मध्यम नगर, निचला नगर), करीब 16 जलाशयों वाली जल संचय व्यवस्था, 10 बड़े चिह्नों वाला signboard; 2021 में UNESCO विश्व धरोहर (भारत की 40वीं)
राखीगढ़ी हिसार (हरियाणा), घग्घर बेसिन (सूखी दृषद्वती/चौतांग धारा) अमरेंद्र नाथ (ASI, 1997-2000), वसंत शिंदे (2013 से) भारत में सबसे बड़े हड़प्पा स्थलों में गिना जाता है; यहां के कंकाल से हड़प्पा काल का DNA अध्ययन (2019) हुआ
चन्हूदड़ो सिंध (पाकिस्तान), सिंधु नदी एन.जी. मजूमदार (1931), अर्नेस्ट मैके (1935-36) मनके बनाने का कारखाना (भट्टी, और कच्चे माल से तैयार मनके तक के नमूने), दुर्ग नहीं मिला, मैके ने श्रृंगार की वस्तुएं (लिपस्टिक जैसी) बताईं
बनावली फतेहाबाद (हरियाणा), रंगोई नदी आर.एस. बिष्ट (1973-74) मिट्टी का बना हल (खिलौना), अच्छे किस्म का जौ, यहां नालियों का अच्छा तंत्र नहीं मिला

3. अनोखी नगर नियोजन और जल निकास व्यवस्था (Town Planning & Drainage System)

हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी विशेषता इसका सुनियोजित और वैज्ञानिक नगर नियोजन था, जो समकालीन मिस्र और मेसोपोटामिया में भी नहीं दिखता:

  • ग्रिड पद्धति (Grid Pattern): नगर दो हिस्सों में विभाजित थे। मुख्य सड़कें उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम की ओर एक-दूसरे को समकोण (90 डिग्री) पर काटती थीं, जिससे नगर आयताकार खंडों (Blocks) में बंट जाता था।
  • द्वि-विभाजित नगर (Citadel & Lower Town):
    • पश्चिमी दुर्ग (Citadel): यह छोटा पर ऊंचा हिस्सा था, कच्ची ईंटों के चबूतरे पर बना और दीवार से घिरा। यहां बड़े सार्वजनिक भवन जैसे विशाल स्नानागार और अन्नागार थे।
    • पूर्वी निचला नगर (Lower Town): यह बड़ा पर नीचा हिस्सा था, जहां आम लोग, व्यापारी और शिल्पी रहते थे। (अपवाद: धोलावीरा तीन हिस्सों में बंटा था; लोथल में दुर्ग और निचला नगर एक ही दीवार के अंदर थे; चन्हूदड़ो में दुर्ग नहीं मिला)।
  • भवन निर्माण: मकानों में पक्की और धूप में सुखाई गई ईंटों का उपयोग 4:2:1 (लंबाई : चौड़ाई : मोटाई) के तय अनुपात में होता था (NCERT)। मकानों के दरवाजे और खिड़कियां आमतौर पर मुख्य सड़क की ओर नहीं, अंदर के आंगन या गली की ओर खुलते थे। सीढ़ियों के निशान बताते हैं कि कुछ घर दो मंजिल के थे।
  • जल निकासी व्यवस्था: घरों का गंदा पानी छोटी नालियों से होकर गली की बड़ी नाली में गिरता था। ये नालियां पक्की ईंटों की बनी थीं और ईंटों या पत्थर की पट्टियों से ढकी थीं; बीच-बीच में सफाई के लिए गड्ढे (sump) बने थे।
  • मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार: 11.88 मीटर लंबा, 7.01 मीटर चौड़ा और 2.43 मीटर गहरा यह जलाशय शायद किसी खास धार्मिक स्नान के लिए था। ईंटें जिप्सम के गारे से जोड़ी गई थीं और पानी रोकने के लिए बिटुमिन (डामर) की परत लगाई गई थी।

4. शिल्प, धातु विज्ञान और व्यापारिक network (Craft, Metallurgy and Trade)

हड़प्पावासी अत्यधिक कुशल शिल्पकार और व्यापारी थे:

कच्चा माल / वस्तु आयात का स्रोत / क्षेत्र उत्पादित वस्तुएं और उपयोग
तांबा (Copper) खेतड़ी की खानें (राजस्थान) व ओमान (मगन) कांसे के औजार, कुल्हाड़ी, भाले, बर्तन (लोहे का ज्ञान नहीं था)
लाजवर्द मणि (Lapis Lazuli) शोर्तुघई (बदख्शां, अफगानिस्तान) अति मूल्यवान नीले मनके व आभूषण
सेलखड़ी (Steatite) दक्षिण राजस्थान व उत्तरी गुजरात आयताकार मुहरें, मनके, पुजारियों की मूर्तियां
गोमेद व कार्नेलियन भड़ूच (गुजरात) चमकीले लाल मनके (चन्हूदड़ो व लोथल में कारखाने)
सोना (Gold) दक्षिण भारत (NCERT; आमतौर पर कर्नाटक की कोलार खानें मानी जाती हैं) हार, कंगन, कर्णफूल व आभूषण

हड़प्पा की मुहरें मुख्य रूप से सेलखड़ी की बनी चौकोर होती थीं जिन पर एक-सींग वाले कल्पित पशु (Unicorn), बैल, हाथी और बाघ के चित्र और भावचित्रात्मक (Pictographic) लिपि खुदी होती थी। लिपि में 375 से 400 के बीच चिह्न हैं और यह आमतौर पर दाएं से बाएं लिखी जाती थी (NCERT); कुछ विद्वान लंबे लेखों में एक लाइन दाएं से बाएं और अगली बाएं से दाएं (boustrophedon) मानते हैं। इसे आज तक पढ़ा नहीं जा सका है। माप-तोल के लिए चर्ट पत्थर के घनाकार बाट काम आते थे, जिनके छोटे बाट 1, 2, 4, 8, 16, 32 के द्विआधारी (Binary) क्रम में और बड़े बाट दशमलव क्रम में थे।

5. सामाजिक, धार्मिक जीवन और सभ्यता का पतन (Social, Religious Life and Decline)

बड़ी संख्या में मिट्टी की नारी मूर्तियां (Terracotta Figurines) मिली हैं, जिन्हें मातृदेवी माना जाता है; इसी आधार पर कुछ लेखक समाज को मातृसत्तात्मक बताते हैं, पर यह पक्का नहीं है। कब्रों और घरों के आकार में फर्क से पता चलता है कि समाज में अमीर-गरीब का भेद था।

धार्मिक रूप से वे पशुपति शिव (आद्य शिव), मातृदेवी, लिंग-योनि, पीपल वृक्ष, एक-शृंगी पशु और नाग की पूजा करते थे। मोहनजोदड़ो से मिली पशुपति मुहर पर एक योगी ध्यान मुद्रा में बैठे हैं, जिनके चारों ओर हाथी, बाघ, गैंडा और भैंसा और नीचे दो हिरण चित्रित हैं। अंत्येष्टि के तीन तरीके प्रचलित थे: पूर्ण समाधिकरण, आंशिक समाधिकरण और दाह संस्कार।

लगभग 1900 ईसा पूर्व के बाद इस महान सभ्यता का पतन शुरू हुआ। इसके प्रमुख कारणों में प्राकृतिक आपदाएं (घग्घर-हाकरा नदी का सूखना या मार्ग बदलना, भीषण बाढ़, जलवायु परिवर्तन, सूखा) और विदेशी आक्रमण का मत आता है। मॉर्टिमर व्हीलर ने आर्यों के आक्रमण (इंद्र को 'पुरंदर') को कारण बताया था, लेकिन अब यह मत नहीं माना जाता क्योंकि मोहनजोदड़ो के कंकाल एक ही समय के नहीं हैं। सभ्यता की उत्पत्ति पर भी मत अलग हैं: अमलानंद घोष ने इसे प्राक-हड़प्पा संस्कृति का विकसित रूप माना, जबकि व्हीलर ने पश्चिम एशिया से 'सभ्यता का विचार' आने की बात कही (RAS Pre 2013, Q12 इसी पर था)।

राजस्थान के कालीबंगा, आहड़, गणेश्वर और बैराठ जैसे स्थलों के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और बाद के स्थापत्य के लिए राजस्थान का स्थापत्य, मूर्तिशिल्प और चित्रशैलियां पढ़ें।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision Facts)

  • सिंधु सभ्यता का पहला खोजा गया नगर हड़प्पा (1921, दयाराम साहनी) था और दूसरा मोहनजोदड़ो (1922, आर.डी. बनर्जी)।
  • राजस्थान के कालीबंगा (हनुमानगढ़) से प्राक-हड़प्पा स्तर का जूता हुआ खेत मिला है, जिसे बी.बी. लाल ने खुदाई में मिला सबसे पुराना जुता खेत बताया; यहां दुर्ग में सात अग्निकुंडों की कतार भी मिली।
  • लोथल (गुजरात) में ईंटों से बना बड़ा बेसिन मिला, जिसे एस.आर. राव ने ज्वारीय गोदीवाड़ा (dockyard) माना; कुछ विद्वान इसे जलाशय मानते हैं।
  • धोलावीरा तीन हिस्सों (दुर्ग, मध्यम नगर, निचला नगर) में बंटा था, यहां करीब 16 जलाशय मिले और 2021 में यह UNESCO विश्व धरोहर बना।
  • हड़प्पावासियों को तांबा, कांसा, सोना, चांदी और सीसे का ज्ञान था, लेकिन वे लोहे (Iron) से पूरी तरह अनभिज्ञ थे।

RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान के किस पुरातात्विक स्थल से प्राक-हड़प्पा कालीन 'दोहरी जुताई' (Ploughed Field) के प्राचीनतम साक्ष्य प्राप्त हुए हैं?
    A) गणेश्वर (सीकर)
    B) कालीबंगा (हनुमानगढ़)
    C) आहड़ (उदयपुर)
    D) बैराठ (जयपुर)
    उत्तर: B) कालीबंगा (हनुमानगढ़)
    कारण: कालीबंगा के प्राक-हड़प्पा स्तर से आड़ी-तिरछी (grid) रेखाओं वाला जूता हुआ खेत मिला है, जिससे पता चलता है कि एक खेत में दो फसलें साथ बोई जाती थीं।
  2. हड़प्पा सभ्यता का कौन सा स्थल तीन साफ हिस्सों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में बंटा था?
    A) लोथल
    B) चन्हूदड़ो
    C) धोलावीरा
    D) बनावली
    उत्तर: C) धोलावीरा
    कारण: गुजरात के कच्छ में स्थित धोलावीरा दुर्ग, मध्यम नगर और निचले नगर के रूप में तीन हिस्सों में बंटा अनूठा शहर था।
  3. सिंधु घाटी सभ्यता के किस स्थल से पक्की ईंटों का 'गोदीवाड़ा' (Dockyard) मिला है?
    A) सुत्कागेंडोर
    B) लोथल
    C) रंगपुर
    D) सुरकोटदा
    उत्तर: B) लोथल
    कारण: भोगवा नदी के पास स्थित लोथल में पक्की ईंटों का बड़ा बेसिन (औसत करीब 214 x 36 मीटर, एस.आर. राव) मिला, जिसे जहाज ठहराने का गोदीवाड़ा माना जाता है।
  4. मोहनजोदड़ो से प्राप्त प्रसिद्ध 'कांस्य नर्तकी की मूर्ति' (Bronze Dancing Girl) किस तकनीक से बनाई गई थी?
    A) प्रस्तर नक्काशी
    B) लुप्त मोम तकनीक (Lost-Wax Technique)
    C) टेराकोटा सांचा
    D) रिवेटिंग तकनीक
    उत्तर: B) लुप्त मोम तकनीक (Lost-Wax Technique)
    कारण: हड़प्पावासी धातु ढलाई में 'लुप्त मोम' (Cire perdue) तकनीक का उत्कृष्ट प्रयोग जानते थे।
  5. सिंधु घाटी सभ्यता के संदर्भ में नीचे दिए गए में से कौन सा धातु हड़प्पावासियों को ज्ञात नहीं था?
    A) तांबा
    B) कांसा
    C) सोना
    D) लोहा
    उत्तर: D) लोहा
    कारण: हड़प्पा सभ्यता कांस्य युग की सभ्यता थी; उत्तर भारत में लोहे का बड़े पैमाने पर उपयोग उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व) से शुरू हुआ।
  6. हड़प्पा कालीन मुहरों पर सबसे सामान्य रूप से किस पशु का अंकन मिलता है?
    A) एक-शृंगी काल्पनिक पशु (Unicorn)
    B) कूबड़ वाला बैल
    C) हाथी
    D) सिंह (शेर)
    उत्तर: A) एक-शृंगी काल्पनिक पशु (Unicorn)
    कारण: अधिकांश चौकोर सेलखड़ी मुहरों पर एक सींग वाले काल्पनिक पशु का अंकन सर्वाधिक पाया गया है, जबकि घोड़े और सिंह का अंकन मुहरों पर नहीं है।
  7. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'पशुपति शिव' की मुहर पर नीचे दिए गए में से कौन सा पशु चित्रित नहीं है?
    A) हाथी
    B) बाघ
    C) सिंह (शेर)
    D) गैंडा
    उत्तर: C) सिंह (शेर)
    कारण: पशुपति मुहर पर दाईं ओर हाथी और बाघ, बाईं ओर गैंडा और भैंसा और नीचे दो हिरण चित्रित हैं; उस पर सिंह अनुपस्थित है।
  8. सिंध का वह हड़प्पा स्थल जहां दुर्ग (Citadel) नहीं मिला और जो मनके बनाने के कारखाने के लिए जाना जाता है:
    A) चन्हूदड़ो
    B) कोटदीजी
    C) रोपड़
    D) आलमगीरपुर
    उत्तर: A) चन्हूदड़ो
    कारण: चन्हूदड़ो में मनके बनाने की भट्टी और कच्चे माल से तैयार मनकों तक हर चरण के नमूने मिले हैं, और यहां दुर्ग नहीं मिला। कोटदीजी, रोपड़ और आलमगीरपुर इसके लिए नहीं जाने जाते।
  9. हड़प्पा कालीन तौल व्यवस्था में बाट मुख्य रूप से किस पत्थर से निर्मित होते थे और किस अनुपात का पालन करते थे?
    A) बलुआ पत्थर, दशमलव अनुपात
    B) चर्ट पत्थर, द्विआधारी (1, 2, 4, 8, 16...) अनुपात
    C) संगमरमर, त्रिआधारी अनुपात
    D) ग्रेनाइट, षोडश अनुपात
    उत्तर: B) चर्ट पत्थर, द्विआधारी (1, 2, 4, 8, 16...) अनुपात
    कारण: चर्ट पत्थर के घनाकार बाट निचले स्तरों में द्विआधारी और उच्च स्तरों में दशमलव व्यवस्था का पालन करते थे।
  10. मेसोपोटामियाई सुमेरियन अभिलेखों में सिंधु क्षेत्र के लिए किस शब्द का उल्लेख मिलता है?
    A) दिलमुन
    B) मगन
    C) मेलुहा
    D) उर
    उत्तर: C) मेलुहा
    कारण: मेसोपोटामिया के लेखों (जैसे अक्कड़ के राजा सारगोन, करीब 2350 ई.पू.) में मेलुहा से आने वाले जहाजों का जिक्र है; NCERT के अनुसार मेलुहा शायद हड़प्पा क्षेत्र था। दिलमुन = बहरीन, मगन = ओमान।
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RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. कालीबंगा की नगर योजना और प्रमुख खोजों का उल्लेख कीजिए। (20 शब्द)
    उत्तर: हनुमानगढ़ के कालीबंगा में दुर्ग और निचला नगर दोनों कच्ची ईंटों की दीवार से घिरे थे; यहां प्राक-हड़प्पा जूता हुआ खेत, अग्निकुंडों की कतार और भूकंप के शुरुआती प्रमाण मिले।
  2. हड़प्पा कालीन जल निकासी व्यवस्था की दो प्रमुख विशेषताएं लिखिए। (20 शब्द)
    उत्तर: 1. पक्की ईंटों की नालियां, जो ईंटों या पत्थर की पट्टियों से ढकी थीं। 2. कचरा रोकने और सफाई के लिए बीच-बीच में बने गड्ढे (sump)।
  3. धोलावीरा की जल प्रबंधन व्यवस्था क्यों विशिष्ट मानी जाती है? (20 शब्द)
    उत्तर: सूखे कच्छ क्षेत्र में धोलावीरा के लोगों ने मनहर और मानसर नालों पर बांध बनाकर बारिश का पानी करीब 16 जलाशयों में जमा किया, जिनमें कई चट्टान काटकर बने थे।
  4. हड़प्पा लिपि के स्वरूप की संक्षेप में विवेचना कीजिए। (20 शब्द)
    उत्तर: यह चित्र जैसे चिह्नों वाली (375-400 चिह्न) लिपि है, जो आमतौर पर दाएं से बाएं लिखी जाती थी; छोटे लेख मुहरों पर मिलते हैं और यह अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
  5. 'मेलुहा', 'दिलमुन' और 'मगन' का भौगोलिक समीकरण क्या है? (20 शब्द)
    उत्तर: मेसोपोटामियाई व्यापारिक संदर्भों में मेलुहा हड़प्पा क्षेत्र, दिलमुन बहरीन द्वीप और मगन ओमान/मकरान तट को इंगित करता है।

Long Questions (5–10 marks)

  1. सिंधु घाटी सभ्यता के नगर नियोजन और वास्तुकला की उन प्रमुख विशेषताओं का परीक्षण कीजिए जो आज के आधुनिक शहरी प्रबंधन के लिए भी प्रेरणादायी हैं। (100 शब्द)
    उत्तर: हड़प्पा नगर नियोजन आधुनिक शहरी नियोजन का पथ-प्रदर्शक है:
    1. ग्रिड पद्धति व सड़कें: सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, जिससे वायु प्रवाह प्राकृतिक रूप से गलियों को स्वच्छ रखता था।
    2. जल निकासी व स्वच्छता: घरों का मैला पानी सीधे भूमिगत ढकी नालियों में जाना, नियमित अंतराल पर सफाई के मैनहोल और सोखते गड्ढे तत्कालीन उच्च नागरिक स्वच्छता चेतना दर्शाते हैं।
    3. भवन निर्माण मानक: पक्की ईंटों का निश्चित अनुपात (4:2:1), दोमंजिला आवास और आवासीय व प्रशासनिक क्षेत्रों (दुर्ग व निचला नगर) का तार्किक पृथक्करण।
    4. जल संरक्षण: धोलावीरा में वर्षा जल के एक-एक बूंद को सहेजने वाले विशाल जलाशय आज के स्मार्ट शहरों के लिए जल सुरक्षा का आदर्श मॉडल हैं।
  2. हड़प्पा सभ्यता के आंतरिक और बाह्य व्यापारिक network की समीक्षा कीजिए और इसके पतन के प्रमुख कारणों पर प्रकाश डालिए। (100 शब्द)
    उत्तर: व्यापारिक network:
    - आंतरिक व्यापार: राजस्थान की खेतड़ी से तांबा, कर्नाटक (कोलार) से सोना, दक्षिण राजस्थान से सेलखड़ी और गुजरात से शंख व गोमेद जुटाए जाते थे।
    - अंतरराष्ट्रीय व्यापार: लोथल और सुत्कागेंडोर बंदरगाहों से ओमान, बहरीन और मेसोपोटामिया को सूती वस्त्र, हाथीदांत, मनके और लकड़ी का निर्यात होता था।
    पतन के कारण:
    1. पर्यावरणीय बदलाव: घग्घर-हाकरा (सरस्वती) नदी के सूखने से राजस्थान-हरियाणा पट्टी में जल संकट।
    2. बाढ़ व विवर्तनिक हलचल: सिंधु नदी के विनाशकारी मार्ग परिवर्तन और भूकंप।
    3. व्यापार में मंदी: मेसोपोटामिया के साथ विदेशी व्यापार टूटने से नगरीय अर्थव्यवस्था का ग्रामीण बस्तियों में रूपांतरण हुआ।

FAQs

प्रश्न: क्या हड़प्पा सभ्यता में मंदिरों के प्रमाण मिलते हैं?
उत्तर: नहीं, किसी भी हड़प्पा स्थल पर ऐसी इमारत नहीं मिली जिसे पक्के तौर पर मंदिर कहा जा सके। पूजा के संकेत मातृदेवी की मूर्तियों, पशुपति मुहर और अग्निकुंडों से मिलते हैं।

प्रश्न: क्या हड़प्पावासी घोड़े (Horse) से परिचित थे?
उत्तर: गुजरात के सुरकोटदा से घोड़े की अस्थियों और लोथल से घोड़े की छोटी मृण्मूर्ति के संदिग्ध अवशेष मिले हैं, लेकिन घोड़ा आम जीवन या मुहरों पर बिल्कुल नहीं पाया गया।

प्रश्न: हड़प्पा और मोहनजोदड़ो वर्तमान में किस देश में स्थित हैं?
उत्तर: दोनों प्रमुख स्थल वर्तमान में पाकिस्तान में हैं—हड़प्पा पंजाब प्रांत के साहीवाल जिले में और मोहनजोदड़ो सिंध प्रांत के लरकाना जिले में स्थित है।

प्रश्न: कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ क्या है और यह राजस्थान के किस जिले में है?
उत्तर: कालीबंगा का शाब्दिक अर्थ 'काली चूड़ियां' है और यह राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में प्राचीन घग्घर नदी के बाएं किनारे पर स्थित है।

प्रश्न: सिंधु घाटी सभ्यता को कांस्य युगीन सभ्यता क्यों कहते हैं?
उत्तर: क्योंकि इस काल के लोग तांबे में टिन (रांगा) मिलाकर कांसा (Bronze) बनाना जानते थे और औजार, बर्तन व मूर्तियां तांबे-कांसे की बनाते थे; लोहा उन्हें ज्ञात नहीं था।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • परिपक्व हड़प्पा काल: लगभग 2600-1900 ई.पू.; हड़प्पा (1921, दयाराम साहनी), मोहनजोदड़ो (1922, आर.डी. बनर्जी)।
  • कालीबंगा (हनुमानगढ़, घग्घर): अमलानंद घोष ने 1952 में पहचाना; बी.बी. लाल व बी.के. थापर ने 1961-69 में खुदाई की।
  • कालीबंगा: प्राक-हड़प्पा जूता खेत, अग्निकुंडों की कतार, भूकंप के शुरुआती प्रमाण, 'काली चूड़ियां' नाम का अर्थ।
  • लोथल (अहमदाबाद, भोगवा): एस.आर. राव, खोज 1954; गोदीवाड़ा, मनके कारखाना, चावल की भूसी।
  • धोलावीरा (कच्छ): तीन हिस्सों वाला नगर, करीब 16 जलाशय, 10 चिह्नों का signboard; UNESCO धरोहर 2021।
  • मोहनजोदड़ो: विशाल स्नानागार, कांस्य नर्तकी (लुप्त मोम तकनीक), पशुपति मुहर (सिंह नहीं), दाढ़ी वाला पुजारी।
  • मुहरें ज्यादातर सेलखड़ी की चौकोर; सबसे आम पशु एक-शृंगी (Unicorn); बाट चर्ट के, छोटे बाट द्विआधारी क्रम में।
  • मेलुहा = हड़प्पा क्षेत्र, दिलमुन = बहरीन, मगन = ओमान; तांबा खेतड़ी (राजस्थान) से।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Indus Valley Civilization in Hindi: सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) भारतीय उपमहाद्वीप की प्रथम नगरीय क्रांति थी, जिसका परिपक्व काल लगभग 2600 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व माना जाता है।
भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रम में Indus Valley Civilization in Hindi: सिंधु घाटी सभ्यता: प्रमुख स्थल, नगर नियोजन और शिल्प एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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