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DPSP और Fundamental Duties in Hindi: राज्य के नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 36-51A): वर्गीकरण, महत्व और अंतर

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: DPSP और Fundamental Duties in Hindi: राज्य के नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 36-51A): वर्गीकरण, महत्व और अंतर - संविधान: विशेषताएं, मूल अधिकार और कर्तव्य
  • • अवलोकन: Quick Answer: DPSP और Fundamental Duties in Hindi: राज्य के नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य (DPSP and Fundamental Duties) संविधान के भाग 4 (अनुच्छेद 36-...
Quick Answer: DPSP और Fundamental Duties in Hindi: राज्य के नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य (DPSP and Fundamental Duties) संविधान के भाग 4 (अनुच्छेद 36-51) और भाग 4A (अनुच्छेद 51A) में हैं। आयरलैंड से प्रेरित निदेशक तत्व भारत में सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना और कल्याणकारी राज्य (Welfare State) का निर्माण करते हैं, जो शासन में मूलभूत किंतु गैर-न्यायिक (Non-justiciable) हैं। पूर्व सोवियत संघ से प्रेरित मूल कर्तव्य 42वें संविधान संशोधन 1976 के तहत स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर जोड़े गए। मिनर्वा मिल्स वाद 1980 में मूल अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के संतुलन को संविधान का Basic Structure घोषित किया गया।

नीति निदेशक तत्वों की अवधारणा, उद्देश्य और संवैधानिक स्थिति

भारतीय संविधान के भाग 4 में अनुच्छेद 36 से 51 तक नीति निदेशक तत्व (DPSP) दर्ज हैं। यह विचार 1937 के आयरिश संविधान से लिया गया।

डॉ. भीमराव अंबेडकर ने इन्हें संविधान का अनोखा लक्षण (Novel Features) कहा। ग्रेनविल ऑस्टिन ने मूल अधिकारों व निदेशक तत्वों को मिलाकर "संविधान की अंतरात्मा" बताया। इनका लक्ष्य कल्याणकारी राज्य (Welfare State) और सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है।

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अनुच्छेद 36: राज्य की परिभाषा

अनुच्छेद 36 स्पष्ट करता है कि भाग 4 के लिए राज्य का वही अर्थ होगा जो भाग 3 के अनुच्छेद 12 में है। इसमें केंद्र व राज्य सरकारें, संसद, राज्य विधानमंडल और सभी स्थानीय प्राधिकारी शामिल हैं।

अनुच्छेद 37: अदालत से अप्रवर्तनीय किंतु शासन में मूलभूत

अनुच्छेद 37 के अनुसार ये तत्व अदालत से सीधे लागू (Non-justiciable) नहीं कराए जा सकते। इनके उल्लंघन पर अदालत में रिट नहीं लग सकती। किंतु ये शासन संचालन में आधारभूत हैं और नीतियां बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।

निदेशक तत्वों का वैचारिक त्रिवर्गीकरण

संविधान में स्पष्ट विभाजन न होते हुए भी वैचारिक आधार पर इन्हें तीन धाराओं में बांटा जाता है:

1. समाजवादी सिद्धांत (Socialistic Principles)

ये सिद्धांत लोकतांत्रिक समाजवाद की नींव रखते हैं और सामाजिक-आर्थिक विषमता मिटाने का लक्ष्य रखते हैं:

  • अनुच्छेद 38: सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक न्याय से लोक कल्याण बढ़ाना; 44वें संशोधन 1978 से असमानता घटाने का निर्देश।
  • अनुच्छेद 39: आजीविका के साधन (39a), भौतिक संसाधनों का जनहित में वितरण (39b), धन के संकेंद्रण पर रोक (39c), समान कार्य समान वेतन (39d), श्रमिकों के स्वास्थ्य की रक्षा (39e) और बालकों का स्वस्थ विकास (39f)।
  • अनुच्छेद 39A: समान न्याय और गरीबों को मुफ्त विधिक सहायता (42वां संशोधन 1976; इसी के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम (Legal Services Authorities Act) 1987 बना, जिसके तहत NALSA है)।
  • अनुच्छेद 41: काम, शिक्षा और बेकारी, बुढ़ापे व बीमारी में सहायता (मनरेगा व पेंशन)।
  • अनुच्छेद 42: काम की मानवीय दशाएं और महिलाओं को मातृत्व राहत (Maternity Relief)।
  • अनुच्छेद 43: कामगारों के लिए निर्वाह मजदूरी (Living Wage) और सभ्य जीवन स्तर।
  • अनुच्छेद 43A: उद्योगों के प्रबंधन में मजदूरों की भागीदारी (42वां संशोधन 1976)।
  • अनुच्छेद 47: पोषण स्तर, जीवन स्तर और जन स्वास्थ्य में सुधार का प्राथमिक कर्तव्य।

2. गांधीवादी सिद्धांत (Gandhian Principles)

ये सिद्धांत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और स्वदेशी दर्शन पर आधारित हैं:

  • अनुच्छेद 40: ग्राम पंचायतों का गठन और उन्हें स्वायत्त शासन की शक्तियां सौंपना (73वां संशोधन 1992; राजस्थान के लिए देखें राजस्थान में पंचायती राज)।
  • अनुच्छेद 43: ग्रामीण क्षेत्रों में कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना (KVIC)।
  • अनुच्छेद 43B: सहकारी समितियों के स्वैच्छिक गठन और स्वायत्त कामकाज को प्रोत्साहन (97वां संशोधन 2011)।
  • अनुच्छेद 46: SC, ST और कमजोर वर्गों के शैक्षिक व आर्थिक हितों को बढ़ावा और सामाजिक अन्याय से रक्षा।
  • अनुच्छेद 47: शराब, नशीली दवाओं और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह पदार्थों पर रोक (नशाबंदी)।
  • अनुच्छेद 48: गायों, बछड़ों और दुधारू मवेशियों के वध पर रोक और वैज्ञानिक पशुपालन।

3. उदार-बौद्धिक सिद्धांत (Liberal-Intellectual Principles)

ये सिद्धांत आधुनिक प्रगतिशील मूल्यों और विधि के शासन पर केंद्रित हैं:

  • अनुच्छेद 44: पूरे देश में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code - UCC) लागू करने का प्रयास।
  • अनुच्छेद 45: 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखरेख और पूर्व-प्राथमिक शिक्षा (86वें संशोधन 2002 से संशोधित)।
  • अनुच्छेद 48A: पर्यावरण की रक्षा, सुधार और वन व वन्यजीवों का संरक्षण (42वां संशोधन 1976)।
  • अनुच्छेद 49: राष्ट्रीय महत्व के ऐतिहासिक स्मारकों और स्थानों का संरक्षण।
  • अनुच्छेद 50: राज्य की लोक सेवाओं में कार्यपालिका से न्यायपालिका का पृथक्करण (CrPC 1973 ने इसे लागू किया; 1 जुलाई 2024 से CrPC की जगह BNSS 2023 है)।
  • अनुच्छेद 51: अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, न्यायपूर्ण संबंधों और अंतरराष्ट्रीय संधियों का सम्मान।

Table 1: नीति निदेशक तत्वों का वैचारिक वर्गीकरण और प्रमुख अनुच्छेद

विचारधारा वर्ग संबंधित अनुच्छेद मुख्य संवैधानिक विषय
समाजवादी सिद्धांत अनुच्छेद 38, 39, 39A, 41, 42, 43, 43A, 47 आय असमानता कम करना, समान वेतन, मुफ्त कानूनी मदद, मातृत्व सुरक्षा, पोषण सुधार।
गांधीवादी सिद्धांत अनुच्छेद 40, 43, 43B, 46, 47, 48 ग्राम पंचायतें, कुटीर उद्योग, सहकारी समितियां (97वां संशोधन), SC/ST हित, गोवध बंदी।
उदार-बौद्धिक सिद्धांत अनुच्छेद 44, 45, 48A, 49, 50, 51 समान नागरिक संहिता (UCC), बचपन की शिक्षा, पर्यावरण रक्षा, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, विश्व शांति।

मूल अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों में टकराव व संतुलन

संविधान लागू होने के बाद दोनों भागों की प्राथमिकता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई अहम फैसले आए:

  • चंपाकम दोराइराजन वाद (1951): कोर्ट ने माना कि टकराव होने पर मूल अधिकार प्रभावी होंगे और निदेशक तत्व उनके सहायक रहेंगे।
  • गोलकनाथ वाद (1967): सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संसद निदेशक तत्वों को लागू करने के लिए मूल अधिकारों को छीन नहीं सकती।
  • 25वां संशोधन 1971 व अनुच्छेद 31C: व्यवस्था दी गई कि अनुच्छेद 39(b) और 39(c) को लागू करने वाले कानून को अनुच्छेद 14, 19 (और तब के अनुच्छेद 31) के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकेगी।
  • केशवानंद भारती वाद (1973): कोर्ट ने 31C के संरक्षण को मान्य रखा, किंतु न्यायिक समीक्षा छीनने वाले अंश को रद्द किया।
  • मिनर्वा मिल्स वाद (1980): 42वें संशोधन के उस प्रावधान को रद्द किया जिसने सभी निदेशक तत्वों को मूल अधिकारों पर वरीयता दी थी। कोर्ट ने फैसला दिया कि दोनों का संतुलन संविधान का Basic Structure है। एक के बिना दूसरा अधूरा है।

Table 2: मूल अधिकार और नीति निदेशक तत्व में तुलना

तुलना बिंदु मूल अधिकार (भाग 3) नीति निदेशक तत्व (भाग 4)
प्रेरणा स्रोत अमेरिका (Bill of Rights) से प्रेरित। आयरलैंड के संविधान (1937) से प्रेरित।
अदालती स्थिति न्यायालय से प्रवर्तनीय (Justiciable) हैं। गैर-न्यायिक (Non-justiciable) हैं।
लोकतंत्र का रूप राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करते हैं। सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र बनाते हैं।
प्रकृति का भाव नकारात्मक भाव, राज्य की शक्ति रोकते हैं। सकारात्मक भाव, राज्य को जनहित के काम सौंपते हैं।
कल्याण क्षेत्र व्यक्तिगत नागरिक अधिकारों पर केंद्रित। पूरे समाज और जनकल्याण पर केंद्रित।
आपातकाल में स्थिति अनुच्छेद 20-21 छोड़कर स्थगित हो सकते हैं। अदालत से लागू ही नहीं होते, इसलिए स्थगन का सवाल नहीं उठता।

मूल कर्तव्य (भाग 4A - अनुच्छेद 51A): पृष्ठभूमि और 11 कर्तव्य

मूल संविधान में कर्तव्य शामिल नहीं थे। आपातकाल के समय 1976 में सरदार स्वर्ण सिंह समिति बनी। इसकी सिफारिश पर 42वें संशोधन 1976 से भाग 4A और अनुच्छेद 51A जोड़ा गया। यह विचार पूर्व सोवियत संघ (USSR) से लिया गया। समिति ने 8 कर्तव्यों की सिफारिश की थी, किंतु सरकार ने 10 कर्तव्य जोड़े। बाद में 86वें संशोधन 2002 से 11वां कर्तव्य (k) जोड़ा गया।

11 मूल कर्तव्यों की सूची (अनुच्छेद 51A)

प्रत्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य होगा कि वह:

  1. 51A(a): संविधान का पालन करे और राष्ट्रध्वज व राष्ट्रगान का सम्मान करे।
  2. 51A(b): स्वाधीनता आंदोलन के महान आदर्शों को संजोए रखे और पालन करे।
  3. 51A(c): भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे।
  4. 51A(d): देश की रक्षा करे और आह्वान पर राष्ट्रसेवा करे।
  5. 51A(e): भाईचारे की भावना बढ़ाए और स्त्रियों के सम्मान विरोधी रिवाजों का त्याग करे।
  6. 51A(f): देश की सामासिक संस्कृति (Composite Culture) की परंपरा का सम्मान करे।
  7. 51A(g): वन, झील, नदी और वन्यजीवों समेत पर्यावरण की रक्षा करे और जीवों पर दया रखे।
  8. 51A(h): वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper), मानववाद और सुधार की भावना बढ़ाए।
  9. 51A(i): सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करे और हिंसा से दूर रहे।
  10. 51A(j): सभी क्षेत्रों में उत्कृष्टता की ओर बढ़े ताकि राष्ट्र आगे बढ़े।
  11. 51A(k): माता-पिता या संरक्षक 6 से 14 वर्ष के अपने बच्चे को शिक्षा के अवसर दिलाए (86वां संशोधन 2002)।

न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति (रिपोर्ट 1999) ने इनके समर्थन में मौजूद कानूनों (जैसे राष्ट्र गौरव अपमान निवारण कानून 1971, वन्यजीव संरक्षण कानून 1972) की पहचान की। ये केवल भारतीय नागरिकों के लिए हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • स्रोत: नीति निदेशक तत्व आयरलैंड (1937) से और मूल कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ (USSR) से लिए गए।
  • संवैधानिक स्थान: निदेशक तत्व भाग 4 (अनुच्छेद 36-51) और मूल कर्तव्य भाग 4A (अनुच्छेद 51A) में हैं।
  • अदालती स्वरूप: DPSP और मूल कर्तव्य दोनों अदालत से सीधे लागू नहीं होते (Non-justiciable)।
  • संविधान की अंतरात्मा: ग्रेनविल ऑस्टिन ने मूल अधिकार और DPSP को संविधान की अंतरात्मा कहा।
  • स्वर्ण सिंह समिति: 1976 में सिफारिश दी, जिससे 42वें संशोधन से 10 मूल कर्तव्य जुड़े।
  • 11वां मूल कर्तव्य: 86वें संशोधन 2002 से अनुच्छेद 51A(k) के रूप में जुड़ा (6-14 वर्ष के बच्चों की शिक्षा)।
  • समान नागरिक संहिता: अनुच्छेद 44 पूरे देश के लिए समान नागरिक संहिता (UCC) का लक्ष्य तय करता है।
  • पंचायती राज: अनुच्छेद 40 ग्राम पंचायतों के गठन का गांधीवादी निर्देश देता है।
  • न्यायपालिका का अलगाव: अनुच्छेद 50 कार्यपालिका से न्यायपालिका को स्वतंत्र रखने का निर्देश देता है।
  • संतुलन का नियम: मिनर्वा मिल्स वाद 1980 में दोनों के संतुलन को Basic Structure माना गया।
  • केवल नागरिकों के लिए: मूल कर्तव्य सिर्फ भारत के नागरिकों के लिए हैं, विदेशियों के लिए नहीं।
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RAS Prelims MCQ

  1. भारतीय संविधान में राज्य के नीति निदेशक तत्व किस देश से लिए गए हैं?
    A) अमेरिका
    B) आयरलैंड
    C) सोवियत संघ
    D) ऑस्ट्रेलिया
    उत्तर: B) आयरलैंड
    कारण: संविधान के भाग 4 में नीति निदेशक तत्व 1937 के आयरिश संविधान से प्रेरित हैं।
  2. इनमें से कौन सा अनुच्छेद राज्य को ग्राम पंचायतों के गठन का निर्देश देता है?
    A) अनुच्छेद 39
    B) अनुच्छेद 40
    C) अनुच्छेद 44
    D) अनुच्छेद 50
    उत्तर: B) अनुच्छेद 40
    कारण: अनुच्छेद 40 गांधीवादी सोच से ग्राम पंचायतों के गठन का निर्देश देता है।
  3. समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) का उल्लेख किस अनुच्छेद में है?
    A) अनुच्छेद 42
    B) अनुच्छेद 44
    C) अनुच्छेद 46
    D) अनुच्छेद 48
    उत्तर: B) अनुच्छेद 44
    कारण: अनुच्छेद 44 पूरे देश में समान नागरिक संहिता लागू करने का लक्ष्य रखता है।
  4. कार्यपालिका से न्यायपालिका को अलग रखने की बात किस अनुच्छेद में कही गई है?
    A) अनुच्छेद 45
    B) अनुच्छेद 48A
    C) अनुच्छेद 50
    D) अनुच्छेद 51
    उत्तर: C) अनुच्छेद 50
    कारण: अनुच्छेद 50 लोक सेवाओं में कार्यपालिका से न्यायपालिका को अलग रखने का निर्देश देता है।
  5. किस वाद में सुप्रीम कोर्ट ने मूल अधिकारों और निदेशक तत्वों के संतुलन को Basic Structure माना?
    A) शंकरी प्रसाद वाद (1951)
    B) गोलकनाथ वाद (1967)
    C) केशवानंद भारती वाद (1973)
    D) मिनर्वा मिल्स वाद (1980)
    उत्तर: D) मिनर्वा मिल्स वाद (1980)
    कारण: मिनर्वा मिल्स फैसले में दोनों का संतुलन संविधान का बुनियादी लक्षण माना गया।
  6. भारतीय संविधान में मूल कर्तव्य किस समिति की सिफारिश पर शामिल किए गए?
    A) बलवंत राय मेहता समिति
    B) सरदार स्वर्ण सिंह समिति
    C) सरकारिया आयोग
    D) एल.एम. सिंघवी समिति
    उत्तर: B) सरदार स्वर्ण सिंह समिति
    कारण: 1976 में स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संशोधन से मूल कर्तव्य जुड़े।
  7. 42वें संविधान संशोधन 1976 से संविधान में कितने मूल कर्तव्य जोड़े गए थे?
    A) 8
    B) 10
    C) 11
    D) 12
    उत्तर: B) 10
    कारण: 42वें संशोधन से 10 कर्तव्य जुड़े थे, 11वां कर्तव्य 86वें संशोधन 2002 में जुड़ा।
  8. 11वां मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A-k) किस संविधान संशोधन से जोड़ा गया?
    A) 44वां संशोधन 1978
    B) 73वां संशोधन 1992
    C) 86वां संशोधन 2002
    D) 91वां संशोधन 2003
    उत्तर: C) 86वां संशोधन 2002
    कारण: 86वें संशोधन 2002 से 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा दिलाने का कर्तव्य जुड़ा।
  9. सहकारी समितियों के विकास से जुड़ा अनुच्छेद 43B किस संशोधन से जोड़ा गया?
    A) 42वां संशोधन 1976
    B) 44वां संशोधन 1978
    C) 86वां संशोधन 2002
    D) 97वां संशोधन 2011
    उत्तर: D) 97वां संशोधन 2011
    कारण: 97वें संशोधन 2011 से सहकारिता को बढ़ावा देने के लिए अनुच्छेद 43B जोड़ा गया।
  10. नीति निदेशक तत्वों के बारे में कौन सा कथन सही है?
    A) ये अदालत से लागू कराए जा सकते हैं
    B) ये मूल अधिकारों से हमेशा ऊपर हैं
    C) ये गैर-न्यायिक हैं पर शासन में मूलभूत हैं
    D) ये सिर्फ केंद्र सरकार पर लागू होते हैं
    उत्तर: C) ये गैर-न्यायिक हैं पर शासन में मूलभूत हैं
    कारण: अनुच्छेद 37 साफ करता है कि निदेशक तत्व अदालत से लागू नहीं होते पर शासन के आधार हैं।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 37 का मुख्य भाव क्या है? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: अनुच्छेद 37 साफ करता है कि भाग 4 के निदेशक तत्व अदालत से लागू नहीं कराए जा सकते, लेकिन देश के शासन में ये मूलभूत हैं और कानून बनाते समय इन्हें लागू करना राज्य का कर्तव्य है।
  2. समान नागरिक संहिता (अनुच्छेद 44) का अर्थ स्पष्ट कीजिए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: इसका अर्थ पूरे देश में सभी नागरिकों के लिए शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे निजी मामलों में एक समान कानून लागू करना है।
  3. 86वें संविधान संशोधन 2002 ने DPSP और मूल कर्तव्यों में क्या बदलाव किए? (3 marks)
    उत्तर रूपरेखा: (1) अनुच्छेद 45 को 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों की देखरेख और शिक्षा पर केंद्रित किया। (2) अनुच्छेद 51A(k) जोड़कर माता-पिता पर 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा दिलाने का 11वां मूल कर्तव्य सौंपा।
  4. न्यायमूर्ति जे.एस. वर्मा समिति (1999) किस विषय से जुड़ी थी? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: यह समिति मूल कर्तव्यों को प्रभावी बनाने वाले मौजूदा कानूनी प्रावधानों (जैसे राष्ट्र गौरव अपमान निवारण कानून, पर्यावरण कानून) की पहचान के लिए बनाई गई थी।

Long Questions (5–10 marks)

  1. राज्य के नीति निदेशक तत्वों का वैचारिक वर्गीकरण करते हुए उनके महत्व को समझाइए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - परिचय: भाग 4, अनुच्छेद 36-51, आयरलैंड से प्रेरित, कल्याणकारी राज्य का आधार।
    - समाजवादी: अनु. 38 (सामाजिक न्याय), 39 (संसाधन वितरण, समान वेतन), 39A (मुफ्त विधिक मदद), 41, 42, 43, 47।
    - गांधीवादी: अनु. 40 (ग्राम पंचायतें), 43 (कुटीर उद्योग), 43B (सहकारिता), 46 (SC/ST हित), 47 (नशाबंदी), 48 (गोवध बंदी)।
    - उदार-बौद्धिक: अनु. 44 (UCC), 45 (बाल शिक्षा), 48A (पर्यावरण), 50 (न्यायपालिका की स्वतंत्रता), 51 (विश्व शांति)।
    - महत्व: कानून निर्माण का मार्गदर्शन, सामाजिक-आर्थिक लोकतंत्र की नींव, सरकार की जवाबदेही।
    - सार: निदेशक तत्व भारत में समतामूलक समाज के निर्माण का आधार हैं।
  2. मूल अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के बीच टकराव और संतुलन के न्यायिक सफर की समीक्षा कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - टकराव: चंपाकम वाद 1951 (मूल अधिकार प्रभावी), गोलकनाथ 1967 (अधिकारों में कटौती पर रोक), 25वां संशोधन 1971 (अनु. 31C से 39b व 39c को वरीयता), केशवानंद भारती 1973 (31C मान्य, समीक्षा सुरक्षित), 42वां संशोधन 1976 (सभी DPSP को वरीयता)।
    - मिनर्वा मिल्स वाद 1980: 42वें संशोधन का प्रावधान रद्द; दोनों का संतुलन संविधान का Basic Structure घोषित।
    - सार: दोनों के समन्वय से ही वास्तविक न्याय संभव है।

FAQs

क्या नीति निदेशक तत्व लागू न होने पर अदालत जा सकते हैं?

नहीं, अनुच्छेद 37 के अनुसार नीति निदेशक तत्व गैर-न्यायिक हैं। सरकार के खिलाफ इन्हें लागू कराने के लिए अदालत में याचिका नहीं लगाई जा सकती।

मूल कर्तव्य किस देश से लिए गए और कब जोड़े गए?

मूल कर्तव्य पूर्व सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित हैं। इन्हें 42वें संविधान संशोधन 1976 के तहत स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर भाग 4A में जोड़ा गया।

समान नागरिक संहिता (UCC) किस अनुच्छेद में है और इसका क्या लाभ है?

यह अनुच्छेद 44 में है। इसका उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक और संपत्ति जैसे निजी मामलों में एक समान कानून बनाकर सामाजिक समानता लाना है।

क्या मूल कर्तव्य न मानने पर कानूनी सजा हो सकती है?

मूल कर्तव्य अपने आप में सीधे दंडनीय नहीं हैं। लेकिन यदि संसद ने किसी कर्तव्य के लिए कानून बनाया है (जैसे राष्ट्र गौरव अपमान निवारण कानून), तो उसके तहत सजा मिल सकती है।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • DPSP = भाग 4 (अनुच्छेद 36-51), आयरलैंड (1937) से; मूल कर्तव्य = भाग 4A (अनुच्छेद 51A), पूर्व USSR से।
  • अनुच्छेद 37: DPSP अदालत से लागू नहीं होते, पर शासन में मूलभूत हैं।
  • 42वें संशोधन 1976 से नए DPSP: 39A (मुफ्त कानूनी मदद), 43A (उद्योग प्रबंधन में मजदूर), 48A (पर्यावरण); 43B (सहकारिता) 97वें संशोधन 2011 से।
  • अनुच्छेद 40 = ग्राम पंचायत, 44 = UCC, 50 = न्यायपालिका का कार्यपालिका से अलगाव।
  • स्वर्ण सिंह समिति ने 8 कर्तव्य सुझाए, 42वें संशोधन ने 10 जोड़े; 11वां 51A(k) 86वें संशोधन 2002 से।
  • मिनर्वा मिल्स वाद 1980: मूल अधिकार और DPSP का संतुलन Basic Structure है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: DPSP और Fundamental Duties in Hindi: राज्य के नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य (DPSP and Fundamental Duties) संविधान के भाग 4 (अनुच्छेद 36-51) और भाग 4A (अनुच्छेद 51A) में हैं।
भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में DPSP और Fundamental Duties in Hindi: राज्य के नीति निदेशक तत्व और मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 36-51A): वर्गीकरण, महत्व और अंतर एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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