RAS (आरपीएससी) 5 min read

राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय - 73वां संविधान संशोधन, त्रिस्तरीय व्यवस्था, विकास यात्रा और वित्तीय संसाधन

RK

लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: राजस्थान की राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय - 73वां संविधान संशोधन, त्रिस्तरीय व्यवस्था, विकास यात्रा और वित्तीय संसाधन - LOCAL BODIES
  • • अवलोकन: Quick Answer: राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को नागौर के बगदरी गांव से हुई थी, जब प्रधानमंत्री पंडित जवाहरला...
Quick Answer: राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को नागौर के बगदरी गांव से हुई थी, जब प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश में पहली बार त्रिस्तरीय पंचायती राज का उद्घाटन किया था। 73वें संविधान संशोधन 1992 के बाद राज्य में 'राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994' 23 अप्रैल 1994 से लागू हुआ। राज्य में त्रिस्तरीय व्यवस्था (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) कार्य करती है। राजस्थान ने वर्ष 2008 में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया। अनुच्छेद 243K के तहत राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कराता है और अनुच्छेद 243-I के तहत राज्य वित्त आयोग वित्तीय संसाधनों के वितरण की सिफारिश करता है।

राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय का ऐतिहासिक विकास

भारत में लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण (Democratic Decentralization) की शुरुआत करने का गौरव राजस्थान को प्राप्त है। स्वतंत्रता संग्राम के समय राजस्थान में स्थानीय स्वशासन की मांग उठी थी, जिसे समझने के लिए पढ़ें: Public Awakening & Freedom Struggle in Rajasthan। स्वतंत्रता से पूर्व बीकानेर (1928) समेत कई रियासतों ने ग्राम पंचायत कानून बनाए थे।

वर्ष 1953 में 'राजस्थान ग्राम पंचायत अधिनियम' लागू हुआ। वर्ष 1957 में बलवंत राय मेहता समिति ने त्रिस्तरीय मॉडल की सिफारिश की, जिसे मानकर राजस्थान ने 'राजस्थान पंचायत समिति और जिला परिषद अधिनियम 1959' बनाया। 2 अक्टूबर 1959 को जवाहरलाल नेहरू ने नागौर के बगदरी गांव में देश के पहले त्रिस्तरीय पंचायती राज का उद्घाटन किया। इसके बाद 11 अक्टूबर 1959 को आंध्र प्रदेश के शादनगर में यह व्यवस्था शुरू हुई।

Advertisement

राजस्थान में मुख्य अध्ययन समितियां

  • सादिक अली समिति (1964): प्रधान और जिला प्रमुख के चुनाव के लिए व्यापक निर्वाचक मंडल की सिफारिश की।
  • गिरधारी लाल व्यास समिति (1973): प्रत्येक पंचायत में ग्राम सेवक (सचिव) की नियुक्ति और ग्राम सभा को मजबूत करने का सुझाव दिया।
  • हरलाल सिंह खर्रा समिति (1990): राज्य में पंचायती राज ढांचे की समीक्षा कर सुधार सुझाए।
  • एल. एम. सिंघवी समिति (1986, केंद्र स्तर): पंचायतों को संवैधानिक दर्जा देने की सिफारिश की।

73वां संविधान संशोधन 1992 और राजस्थान अधिनियम 1994

पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा देने के लिए संसद ने 73वां संविधान संशोधन अधिनियम 1992 पारित किया, जो 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में लागू हुआ। इस दिन राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।

  • भाग IX और अनुसूची: संविधान में भाग 9 (अनुच्छेद 243 से 243-O) और 11वीं अनुसूची (29 विषय) जोड़े गए।
  • राजस्थान अधिनियम 1994: राजस्थान विधानसभा ने राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 पारित किया, जो 23 अप्रैल 1994 से लागू हुआ।
  • महिला आरक्षण: वर्ष 2008 में संशोधन कर महिलाओं के लिए आरक्षण 33% से बढ़ाकर 50% किया गया।

Table 1: 73वें संविधान संशोधन के मुख्य अनुच्छेद और संवैधानिक प्रावधान

RAS परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण अनुच्छेद नीचे दी गई table में दिए गए हैं:

अनुच्छेद संवैधानिक विषय मुख्य कानूनी प्रावधान राजस्थान संदर्भ
अनुच्छेद 243 परिभाषाएं ग्राम सभा और पंचायत की कानूनी परिभाषा। राजस्थान अधिनियम 1994 में लागू।
अनुच्छेद 243A ग्राम सभा पंजीकृत मतदाताओं की सभा। वर्ष में कम से कम 2 बैठकें (धारा 8A)।
अनुच्छेद 243B पंचायतों का गठन त्रिस्तरीय व्यवस्था की स्थापना। तीनों स्तर कार्यरत हैं।
अनुच्छेद 243C पंचायतों की बनावट प्रादेशिक क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव। सदस्य सीधे चुने जाते हैं।
अनुच्छेद 243D आरक्षण व्यवस्था SC/ST अनुपात और महिला आरक्षण। महिलाओं को 50% आरक्षण लागू है।
अनुच्छेद 243E कार्यकाल प्रथम बैठक से 5 वर्ष की अवधि। भंग होने पर 6 माह में चुनाव।
अनुच्छेद 243F अयोग्यताएं न्यूनतम आयु 21 वर्ष होना जरूरी। कानून अनुसार निरर्हताएं लागू।
अनुच्छेद 243G शक्तियां और कार्य 11वीं अनुसूची के 29 विकास विषय। कृषि, पेयजल और सड़कें शामिल।
अनुच्छेद 243H कर लगाने की शक्ति स्थानीय कर और शुल्क लगाना। राज्य कानून से कर व शुल्क लगाने का अधिकार।
अनुच्छेद 243-I राज्य वित्त आयोग वित्तीय स्थिति की 5 वर्ष में समीक्षा। छठे आयोग (2021) के अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह थे।
अनुच्छेद 243K पंचायतों के चुनाव स्वतंत्र राज्य निर्वाचन आयोग। जुलाई 1994 में राजस्थान में गठन।
अनुच्छेद 243M लागू न होना 5वीं अनुसूची क्षेत्रों को छूट। इन क्षेत्रों में PESA कानून लागू।
अनुच्छेद 243O अदालती रोक चुनाव मामलों में अदालती रोक। विवाद केवल चुनाव याचिका से।

त्रिस्तरीय ग्रामीण स्थानीय निकायों का संगठन और पदाधिकारी

राजस्थान में पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों पर कार्यरत है:

1. ग्राम पंचायत (Gram Panchayat) - ग्राम स्तर

यह प्राथमिक स्तर है। ग्राम पंचायत में वार्डों की संख्या आबादी के आधार पर राज्य सरकार नियमों से तय करती है (धारा 12)। सरपंच का चुनाव मतदाता सीधे करते हैं और उप-सरपंच का चुनाव वार्ड पंच करते हैं। प्रशासनिक सचिव ग्राम विकास अधिकारी (VDO) होता है। सरपंच, उप-सरपंच और पंच त्यागपत्र विकास अधिकारी (BDO) को सौंपते हैं।

2. पंचायत समिति (Panchayat Samiti) - ब्लॉक स्तर

यह मध्यवर्ती स्तर है। 1 लाख तक की आबादी वाली पंचायत समिति में 15 निर्वाचन क्षेत्र होते हैं, और उसके बाद हर 15 हजार (या उसके भाग) पर 2 बढ़ जाते हैं। प्रधान और उप-प्रधान का चुनाव चुने गए सदस्यों में से होता है। क्षेत्रीय विधायक और क्षेत्र के सभी सरपंच पदेन सदस्य होते हैं। खंड विकास अधिकारी (BDO) इसका प्रशासनिक प्रमुख होता है। प्रधान अपना त्यागपत्र जिला प्रमुख को सौंपते हैं।

3. जिला परिषद (Zila Parishad) - जिला स्तर

यह शीर्ष स्तर है। 4 लाख तक की आबादी वाली जिला परिषद में 17 निर्वाचन क्षेत्र होते हैं, और उसके बाद हर 1 लाख (या उसके भाग) पर 2 बढ़ जाते हैं। जिला प्रमुख और उप-जिला प्रमुख का चुनाव सदस्यों में से होता है। सांसद और विधायक पदेन सदस्य होते हैं। मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) इसका प्रशासनिक प्रमुख होता है। जिला प्रमुख अपना त्यागपत्र संभागीय आयुक्त को सौंपते हैं।

Table 2: राजस्थान पंचायती राज के तीनों स्तरों का तुलनात्मक विवरण

तीनों स्तरों के मुख्य पदों का तुलनात्मक विवरण नीचे दी गई table में दिया गया है:

स्तर का नाम राजनीतिक प्रमुख प्रशासनिक प्रमुख चुनाव पद्धति त्यागपत्र किसे देते हैं
ग्राम पंचायत सरपंच ग्राम विकास अधिकारी (VDO) सरपंच प्रत्यक्ष, उप-सरपंच अप्रत्यक्ष सरपंच BDO को त्यागपत्र देते हैं
पंचायत समिति प्रधान खंड विकास अधिकारी (BDO) सदस्य प्रत्यक्ष, प्रधान अप्रत्यक्ष प्रधान जिला प्रमुख को त्यागपत्र देते हैं
जिला परिषद जिला प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सदस्य प्रत्यक्ष, जिला प्रमुख अप्रत्यक्ष जिला प्रमुख संभागीय आयुक्त को देते हैं

ग्राम सभा और पंचायती राज में जनसहभागिता

अनुच्छेद 243A के तहत ग्राम सभा पंचायती राज का मूल आधार है। पंचायत क्षेत्र की मतदाता सूची में पंजीकृत सभी वयस्क इसके सदस्य होते हैं। यह प्रत्यक्ष लोकतंत्र का उदाहरण है।

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 8A के अनुसार ग्राम सभा की वर्ष में कम से कम 2 बैठकें जरूरी हैं:

  • पहली बैठक: वित्त वर्ष की पहली तिमाही में (पिछले साल का हिसाब, ऑडिट रिपोर्ट और नए कार्यक्रम रखे जाते हैं)।
  • दूसरी बैठक: वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में (साल भर का खर्च, बजट और कर प्रस्ताव रखे जाते हैं)।
  • विशेष बैठक: 1/10 से अधिक सदस्यों की लिखित मांग या सरकार के कहने पर 15 दिन में बैठक बुलानी होती है।

बैठक के लिए कोरम कुल सदस्यों का 1/10 भाग होना जरूरी है (धारा 8B)। ग्राम सभा विकास योजनाओं को मंजूरी देती है, बजट की समीक्षा करती है, लाभार्थियों का चयन करती है और सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) करती है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक अधिकारों और सेवाओं के संरक्षण के लिए पढ़ें: Consumer Protection and Rights।

राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य वित्त आयोग के कार्य

73वें संविधान संशोधन ने दो स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं का गठन अनिवार्य किया:

1. राज्य निर्वाचन आयोग (अनुच्छेद 243K)

राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग जुलाई 1994 में बना। यह एक सदस्यीय आयोग है। राज्यपाल राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करते हैं, जिनका कार्यकाल 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है। इन्हें हाई कोर्ट जज की तरह ही हटाया जा सकता है। प्रथम आयुक्त श्री अमर सिंह राठौड़ थे। आयोग स्थानीय निकायों के चुनाव कराता है और मतदाता सूची बनाता है।

2. राज्य वित्त आयोग (अनुच्छेद 243-I)

राज्यपाल हर 5 वर्ष में वित्त आयोग बनाते हैं, जो कर राजस्व में से स्थानीय निकायों के हिस्से की सिफारिश करता है। पहले से पांचवें आयोग के अध्यक्ष क्रमशः के. के. गोयल, हीरालाल देवपुरा, माणिक चंद सुराणा, डॉ. बी. डी. कल्ला और डॉ. ज्योति किरण थे। छठे राज्य वित्त आयोग (गठन 12 अप्रैल 2021, अवधि 2020-25) के अध्यक्ष श्री प्रद्युम्न सिंह थे।

अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून (PESA Act 1996) और जनजातीय स्वशासन

संविधान का भाग 9 पांचवीं अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों पर सीधे लागू नहीं होता था। इसलिए संसद ने दिलीप सिंह भूरिया समिति की सिफारिश पर वर्ष 1996 में PESA Act बनाया। राजस्थान के टीएसपी (TSP) क्षेत्रों (बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, पाली के कुछ ब्लॉक) में यह कानून प्रभावी है।

  • गौण वनोपज: महुआ, गोंद और तेंदूपत्ता जैसी लघु वनोपज पर ग्राम सभा का मालिकाना अधिकार।
  • जमीन का संरक्षण: जनजातीय जमीन के अवैध हस्तांतरण को रोकना और जमीन वापस दिलाना।
  • खनिज पट्टे: लघु खनिजों के खनन पट्टे देने से पहले ग्राम सभा की सहमति आवश्यक।
  • परंपरागत व्यवस्था: जनजातीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार विवादों को सुलझाना।
Advertisement

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • प्रथम शुरुआत: 2 अक्टूबर 1959 को नागौर के बगदरी में नेहरू जी ने त्रिस्तरीय पंचायती राज का उद्घाटन किया।
  • सिफारिश: त्रिस्तरीय व्यवस्था की सिफारिश 1957 में बलवंत राय मेहता समिति ने की थी।
  • संवैधानिक संशोधन: 73वां संविधान संशोधन 24 अप्रैल 1993 से लागू हुआ।
  • भाग और अनुसूची: संविधान में भाग IX और 11वीं अनुसूची (29 विषय) जोड़े गए।
  • राजस्थान का कानून: राजस्थान अधिनियम 1994 राज्य में 23 अप्रैल 1994 से लागू हुआ।
  • महिला आरक्षण: राजस्थान ने वर्ष 2008 में महिलाओं के लिए आरक्षण 50 प्रतिशत किया।
  • चुनाव आयु: चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष है (अनुच्छेद 243F)।
  • ग्राम सभा बैठकें: धारा 8A के अनुसार वर्ष में कम से कम 2 बैठकें (वित्त वर्ष की पहली और अंतिम तिमाही में) जरूरी हैं; कोरम 1/10।
  • राज्य निर्वाचन आयोग: जुलाई 1994 में गठित हुआ, प्रथम आयुक्त श्री अमर सिंह राठौड़ थे।
  • छठा वित्त आयोग: 12 अप्रैल 2021 को गठित इस आयोग के अध्यक्ष श्री प्रद्युम्न सिंह थे।
  • त्यागपत्र: सरपंच BDO को, प्रधान जिला प्रमुख को और जिला प्रमुख संभागीय आयुक्त को त्यागपत्र देते हैं।
  • पेसा कानून: भूरिया समिति की सिफारिश पर बना PESA कानून जनजातीय क्षेत्रों में ग्राम सभा को विशेष अधिकार देता है।

RAS Prelims MCQ

  1. राजस्थान में पंचायती राज का उद्घाटन किस स्थान पर हुआ था?
    A) बगदरी गांव, नागौर
    B) सांगानेर, जयपुर
    C) देशनोक, बीकानेर
    D) पुष्कर, अजमेर
    उत्तर: A) बगदरी गांव, नागौर
    कारण: 2 अक्टूबर 1959 को नेहरू जी ने बगदरी में इसका उद्घाटन किया था।
  2. 73वें संविधान संशोधन से संविधान में कौन सी अनुसूची जोड़ी गई?
    A) 9वीं अनुसूची
    B) 10वीं अनुसूची
    C) 11वीं अनुसूची
    D) 12वीं अनुसूची
    उत्तर: C) 11वीं अनुसूची
    कारण: 73वें संशोधन से 11वीं अनुसूची जोड़ी गई, जिसमें 29 विषय हैं।
  3. राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 किस तारीख से लागू हुआ?
    A) 24 अप्रैल 1993
    B) 23 अप्रैल 1994
    C) 2 अक्टूबर 1959
    D) 1 मई 1994
    उत्तर: B) 23 अप्रैल 1994
    कारण: यह अधिनियम 23 अप्रैल 1994 से राज्य में प्रभावी हुआ था।
  4. राजस्थान में पंचायती राज में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण कब लागू हुआ?
    A) वर्ष 1994
    B) वर्ष 2000
    C) वर्ष 2008
    D) वर्ष 2015
    उत्तर: C) वर्ष 2008
    कारण: वर्ष 2008 में संशोधन कर महिला आरक्षण 50 प्रतिशत किया गया।
  5. राजस्थान के प्रथम राज्य निर्वाचन आयुक्त कौन थे?
    A) श्री अमर सिंह राठौड़
    B) श्री एन. आर. भसीन
    C) श्री इंद्रजीत खन्ना
    D) श्री ए. के. पांडे
    उत्तर: A) श्री अमर सिंह राठौड़
    कारण: जुलाई 1994 में गठित आयोग के प्रथम आयुक्त श्री अमर सिंह राठौड़ बने थे।
  6. वर्ष 2021 में गठित राजस्थान के छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन थे?
    A) डॉ. ज्योति किरण
    B) श्री प्रद्युम्न सिंह
    C) डॉ. बी. डी. कल्ला
    D) श्री हीरालाल देवपुरा
    उत्तर: B) श्री प्रद्युम्न सिंह
    कारण: 12 अप्रैल 2021 को गठित छठे वित्त आयोग के अध्यक्ष श्री प्रद्युम्न सिंह थे; ज्योति किरण पांचवें और बी. डी. कल्ला चौथे आयोग के अध्यक्ष थे।
  7. राजस्थान में ग्राम पंचायत का सरपंच त्यागपत्र किसे सौंपता है?
    A) उप-सरपंच को
    B) जिला कलेक्टर को
    C) खंड विकास अधिकारी (BDO) को
    D) संभागीय आयुक्त को
    उत्तर: C) खंड विकास अधिकारी (BDO) को
    कारण: धारा 36(1) के अनुसार सरपंच, उप-सरपंच और पंच लिखित त्यागपत्र विकास अधिकारी (BDO) को सौंपते हैं।
  8. राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 के अनुसार ग्राम सभा की वर्ष में कम से कम कितनी बैठकें होना जरूरी है?
    A) 2 बैठकें
    B) 3 बैठकें
    C) 6 बैठकें
    D) 12 बैठकें
    उत्तर: A) 2 बैठकें
    कारण: धारा 8A के अनुसार वित्त वर्ष की पहली और अंतिम तिमाही में कम से कम एक-एक बैठक जरूरी है।
  9. पंचायती राज का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम आयु सीमा कितनी है?
    A) 18 वर्ष
    B) 21 वर्ष
    C) 25 वर्ष
    D) 30 वर्ष
    उत्तर: B) 21 वर्ष
    कारण: अनुच्छेद 243F के अनुसार न्यूनतम आयु 21 वर्ष जरूरी है।
  10. अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा कानून किस समिति की सिफारिश पर बना था?
    A) बलवंत राय मेहता समिति
    B) अशोक मेहता समिति
    C) दिलीप सिंह भूरिया समिति
    D) सादिक अली समिति
    उत्तर: C) दिलीप सिंह भूरिया समिति
    कारण: भूरिया समिति की सिफारिश पर PESA अधिनियम 1996 बना था।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. संविधान के अनुच्छेद 243A के तहत ग्राम सभा का क्या अर्थ है?
    उत्तर रूपरेखा: ग्राम सभा पंचायत के पंजीकृत मतदाताओं की सभा है, जो बजट, सामाजिक अंकेक्षण और लाभार्थियों के चयन का कार्य करती है।
  2. राजस्थान में पंचायती राज के तीनों स्तरों के प्रशासनिक अधिकारियों के नाम लिखिए।
    उत्तर रूपरेखा: ग्राम पंचायत में VDO, पंचायत समिति में BDO और जिला परिषद में CEO।
  3. पेसा अधिनियम 1996 के तहत ग्राम सभा के दो मुख्य अधिकार बताइए।
    उत्तर रूपरेखा: 1. गौण वनोपज पर मालिकाना हक। 2. जनजातीय जमीन के हस्तांतरण पर रोक और खनिज पट्टों पर सहमति।
  4. राजस्थान राज्य वित्त आयोग के मुख्य कार्य क्या हैं?
    उत्तर रूपरेखा: अनुच्छेद 243-I के तहत कर राजस्व में से स्थानीय निकायों के हिस्से और वित्तीय संसाधनों की सिफारिश करना।

Long Questions (5–10 marks)

  1. 73वें संविधान संशोधन के मुख्य प्रावधानों और राजस्थान पर इसके प्रभाव का परीक्षण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - प्रावधान: भाग 9, अनुच्छेद 243 से 243-O, 11वीं अनुसूची के 29 विषय, त्रिस्तरीय रूपरेखा, 5 वर्षीय कार्यकाल और 21 वर्ष आयु।
    - संस्थाएं: अनुच्छेद 243K में राज्य निर्वाचन आयोग और 243-I में राज्य वित्त आयोग।
    - राजस्थान पर प्रभाव: राजस्थान अधिनियम 1994 लागू हुआ और 2008 में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिला।
  2. राजस्थान में 1959 से लेकर अब तक पंचायती राज की विकास यात्रा का विश्लेषण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - शुरुआत: 2 अक्टूबर 1959 को नागौर के बगदरी में नेहरू जी ने त्रिस्तरीय व्यवस्था का उद्घाटन किया।
    - समितियां: सादिक अली समिति (1964) ने चुनाव सुधार, गिरधारी लाल व्यास समिति (1973) ने हर पंचायत में ग्राम सेवक की सिफारिश की और हरलाल सिंह खर्रा समिति (1990) ने ढांचे की समीक्षा की।
    - संवैधानिक दर्जा: 73वें संशोधन के बाद 1994 अधिनियम बना और 2008 में 50% महिला आरक्षण लागू हुआ।

FAQs

राजस्थान में पंचायती राज की शुरुआत कब और कहां हुई थी?

राजस्थान में पंचायती राज की शुरुआत 2 अक्टूबर 1959 को नागौर जिले के बगदरी गांव में प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए कितना आरक्षण है?

राजस्थान में वर्ष 2008 से महिलाओं के लिए पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण लागू है।

ग्राम पंचायत का सरपंच अपना त्यागपत्र किसे सौंपता है?

राजस्थान पंचायती राज नियमों के अनुसार सरपंच और उप-सरपंच अपना लिखित त्यागपत्र खंड विकास अधिकारी (BDO) को सौंपते हैं।

राजस्थान के छठे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष कौन थे?

12 अप्रैल 2021 को गठित राजस्थान के छठे राज्य वित्त आयोग (अवधि 2020-25) के अध्यक्ष श्री प्रद्युम्न सिंह थे। नया आयोग बनने पर अध्यक्ष बदलता है, इसलिए परीक्षा से पहले ताजा जानकारी देख लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय की शुरुआत।
राजस्थान की राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय - 73वां संविधान संशोधन, त्रिस्तरीय व्यवस्था, विकास यात्रा और वित्तीय संसाधन एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
हाँ, NotesMedia पर आपको राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय - 73वां संविधान संशोधन, त्रिस्तरीय व्यवस्था, विकास यात्रा और वित्तीय संसाधन के महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर, हल किए गए उदाहरण और नोट्स बिल्कुल मुफ्त मिलेंगे। अधिक अभ्यास के लिए आप हमारा ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
Advertisement

In this Chapter

राजस्थान में पंचायती राज और ग्रामीण स्थानीय निकाय - 73वां संविधान संशोधन, त्रिस्तरीय व्यवस्था, विकास यात्रा और वित्तीय संसाधन
No other notes in this chapter.