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Article 368 और Constitutional Amendment in Hindi: संविधान संशोधन का तरीका (अनुच्छेद 368): प्रकार, सीमाएं और प्रमुख ऐतिहासिक संशोधन

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लेखक Ratan Kumawat · संस्थापक, NotesMedia

प्रकाशित:

त्वरित सारांश और मुख्य बिंदु

  • • विषय फोकस: भारतीय संविधान और राजव्यवस्था (RAS (आरपीएससी) Syllabus)
  • • मुख्य विषय: Article 368 और Constitutional Amendment in Hindi: संविधान संशोधन का तरीका (अनुच्छेद 368): प्रकार, सीमाएं और प्रमुख ऐतिहासिक संशोधन - संविधान: विशेषताएं, मूल अधिकार और कर्तव्य
  • • अवलोकन: Quick Answer: Article 368 और Constitutional Amendment in Hindi: संविधान संशोधन (Constitutional Amendment Process) का तरीका संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद...
Quick Answer: Article 368 और Constitutional Amendment in Hindi: संविधान संशोधन (Constitutional Amendment Process) का तरीका संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद 368 में दक्षिण अफ्रीका से जोड़ी गई है। भारतीय संविधान न तो ब्रिटेन की तरह बहुत लचीला है और न ही अमेरिका की तरह बहुत कठोर, बल्कि दोनों का अनूठा मिश्रण है। संशोधन केवल संसद के किसी भी सदन में विधेयक पेश करके किया जा सकता है। 24 अप्रैल 1973 के ऐतिहासिक केशवानंद भारती वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने मूल स्वरूप (Basic Structure) का सिद्धांत सामने रखा, जिसके तहत संसद संविधान के मूल ढांचे को नष्ट नहीं कर सकती।

संविधान संशोधन की संवैधानिक स्थिति और मुख्य नियम

संविधान के भाग 20 का अनुच्छेद 368 संसद को संविधान में संशोधन की शक्ति सौंपता है। निर्माताओं ने जरूरतों के अनुसार लचीलापन रखा और दुरुपयोग रोकने के लिए सीमाएं भी तय कीं।

अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन से जुड़े प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:

  • संसद में शुरुआत: विधेयक संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश हो सकता है, विधानमंडलों में नहीं।
  • कौन पेश करे: मंत्री या गैर-सरकारी सदस्य दोनों पेश कर सकते हैं; राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी जरूरी नहीं।
  • अलग-अलग विशेष बहुमत: विधेयक दोनों सदनों में अलग-अलग पास होना अनिवार्य है; संयुक्त बैठक का कोई नियम नहीं।
  • राष्ट्रपति की बाध्यकारी अनुमति: 24वें संशोधन 1971 से राष्ट्रपति हस्ताक्षर के लिए बाध्य हैं; वे इसे रोक या लौटा नहीं सकते।
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संविधान संशोधन के 3 प्रकार: बहुमत की पद्धतियां

संविधान में संशोधन के तीन प्रमुख तरीके हैं:

1. संसद के साधारण बहुमत से संशोधन (अनुच्छेद 368 के बाहर)

उपस्थित और वोट देने वालों के साधारण बहुमत से होने वाले बदलाव अनुच्छेद 368 से बाहर हैं:

  • नए राज्यों का निर्माण, सीमा और नामों में बदलाव (अनुच्छेद 3)।
  • राज्यों में विधान परिषद का गठन या समाप्ति (अनुच्छेद 169)।
  • नागरिकता की प्राप्ति और समाप्ति के नियम (अनुच्छेद 11)।
  • संसद में गणपूर्ति (Quorum) और सांसदों के वेतन-भत्ते।
  • 5वीं व 6वीं अनुसूची के जनजातीय क्षेत्रों का प्रशासन और संसद में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग।

2. संसद के विशेष बहुमत से संशोधन (अनुच्छेद 368 के तहत)

इसके लिए दोहरी शर्त पूरी होना अनिवार्य है:

  • सदन की कुल सदस्य संख्या का >50% बहुमत।
  • उपस्थित व मतदान करने वालों का 2/3 बहुमत।

इसमें मुख्य रूप से मूल अधिकार (भाग 3) और राज्य के नीति निर्देशक तत्व (भाग 4) आते हैं।

3. विशेष बहुमत और आधे राज्यों का अनुमोदन (संघीय व्यवस्था)

संघीय व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों को बदलने के लिए संसद के विशेष बहुमत के साथ कम से कम 50% राज्यों के विधानमंडलों का साधारण अनुमोदन जरूरी है:

  • राष्ट्रपति का निर्वाचन व पद्धति (अनु. 54 व 55)।
  • संघ व राज्यों की कार्यपालिका शक्ति की सीमा (अनु. 73 व 162)।
  • उच्चतम न्यायालय (SC) और उच्च न्यायालयों (HC) की शक्तियां।
  • 7वीं अनुसूची की सूचियां, GST परिषद (अनु. 279A) और संसद में राज्यों का प्रतिनिधित्व।
  • स्वयं अनुच्छेद 368 की संशोधन शक्ति।

Table 1: संविधान संशोधन के तीनों प्रकारों की तुलना

प्रकार संसद में आवश्यक बहुमत राज्यों की सहमति अनुच्छेद 368 में स्थिति प्रमुख विषय
साधारण बहुमत उपस्थित व वोट देने वालों का बहुमत (>50%) आवश्यक नहीं अनुच्छेद 368 से बाहर नए राज्य, विधान परिषद, नागरिकता
विशेष बहुमत कुल संख्या का >50% + उपस्थित का 2/3 आवश्यक नहीं अनुच्छेद 368 के अधीन मूल अधिकार, नीति निर्देशक तत्व
विशेष बहुमत + राज्य अनुमोदन संसद में विशेष बहुमत + 50% राज्यों का साधारण बहुमत न्यूनतम आधे राज्यों की स्वीकृति अनुच्छेद 368 के अधीन राष्ट्रपति चुनाव, 7वीं सूची, SC/HC, अनु. 368

मूल ढांचे का सिद्धांत: न्यायिक विकास और प्रमुख वाद

संसद की संशोधन शक्ति पर सीमाएं तय करने वाले प्रमुख वाद इस प्रकार हैं:

  • शंकरी प्रसाद वाद (1951): प्रथम संशोधन वैध; संसद अनुच्छेद 368 के तहत मूल अधिकारों में भी बदलाव कर सकती है।
  • सज्जन सिंह वाद (1965): राजस्थान के इस वाद में शंकरी प्रसाद फैसले को सही ठहराया गया।
  • गोलकनाथ वाद (1967): 11 जजों की पीठ ने 6-5 से फैसला दिया कि संसद मूल अधिकारों में कटौती नहीं कर सकती; अनु. 13(2) की 'विधि' में संशोधन भी शामिल है।
  • 24वां संशोधन (1971): संसद ने अनु. 13 व 368 बदलकर मूल अधिकारों में संशोधन की शक्ति ली और राष्ट्रपति की सहमति अनिवार्य बनाई।
  • केशवानंद भारती वाद (24 अप्रैल 1973): 13 जजों की पीठ ने 7-6 से मूल स्वरूप (Basic Structure) का सिद्धांत दिया; संसद संविधान बदल सकती है मगर मूल ढांचे को नष्ट नहीं कर सकती।
  • इंदिरा गांधी बनाम राज नारायण वाद (7 नवंबर 1975): 39वें संशोधन से जोड़े गए अनु. 329A के खंड (4) को रद्द किया और निष्पक्ष चुनाव व न्यायिक समीक्षा को मूल स्वरूप का हिस्सा माना।
  • मिनर्वा मिल्स वाद (1980): 42वें संशोधन की धारा 4 व 55 को निरस्त किया; मूल स्वरूप संसद की शक्ति पर वैध रोक है।
  • वामन राव वाद (फैसला 9 मई 1980, रिपोर्ट 1981): 24 अप्रैल 1973 के बाद 9वीं अनुसूची में डाले गए कानूनों की मूल ढांचे के आधार पर न्यायिक समीक्षा हो सकती है।

ऐतिहासिक प्रमुख संविधान संशोधन: 1st से 106th तक का सफर

प्रमुख ऐतिहासिक संशोधन इस प्रकार हैं:

  • 1st (1951): भूमि सुधारों के संरक्षण के लिए 9वीं अनुसूची जोड़ी और विचार अभिव्यक्ति (अनु. 19) पर उचित पाबंदियां लगाईं।
  • 7th (1956): भाषाई आधार पर 14 राज्य व 6 UT बने; राज्यों की A, B, C, D श्रेणियां समाप्त की गईं।
  • 24th (1971): संसद को मूल अधिकारों में संशोधन का अधिकार मिला; राष्ट्रपति की सहमति अनिवार्य बनी।
  • 42nd (1976): लघु संविधान; प्रस्तावना में तीन शब्द जुड़े; भाग 4A (मूल कर्तव्य) और 5 विषय समवर्ती सूची में डाले।
  • 44th (1978): आंतरिक अशांति की जगह सशस्त्र विद्रोह शब्द; अनु. 20 व 21 सुरक्षित; संपत्ति का अधिकार विधिक हक (अनु. 300A) बना।
  • 52nd (1985): दलबदल विरोधी कानून लागू कर संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़ी।
  • 61st (1988, लागू 28 मार्च 1989): मतदान की न्यूनतम उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की (अनुच्छेद 326)।
  • 73rd व 74th (1992, लागू 1993): पंचायती राज (राजस्थान में पंचायती राज) (11वीं अनुसूची, 29 विषय) और नगर पालिकाओं (12वीं अनुसूची, 18 विषय) को संवैधानिक दर्जा दिया।
  • 86th (2002): 6-14 वर्ष के बच्चों के लिए शिक्षा मूल अधिकार (अनु. 21A) और 11वां मूल कर्तव्य जुड़ा।
  • 91st (2003): मंत्रिपरिषद (प्रधानमंत्री/मुख्यमंत्री समेत) का आकार लोकसभा/विधानसभा की कुल संख्या के अधिकतम 15% पर तय किया (राजस्थान में 200 का 15% = 30 मंत्री)।
  • 99th (2014): राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) बना, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2015 में निरस्त किया।
  • 101st (2016): GST कर व्यवस्था लागू हुई और अनु. 279A के तहत GST परिषद बनी।
  • 102nd (2018): राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) को संवैधानिक मान्यता (अनु. 338B) मिली।
  • 103rd (2019): सामान्य वर्ग के कमजोर नागरिकों (EWS) को 10% आरक्षण (अनु. 15(6), 16(6)) मिला।
  • 104th (2020): लोकसभा व विधानसभाओं में SC/ST सीटों का आरक्षण 25 जनवरी 2030 तक बढ़ाया और एंग्लो-इंडियन मनोनयन समाप्त हुआ।
  • 105th (2021): राज्यों को सामाजिक पिछड़े वर्गों (OBC) की सूची तैयार करने का अधिकार फिर मिला।
  • 106th (2023): नारी शक्ति वंदन अधिनियम से लोकसभा, विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए एक-तिहाई (33%) सीटों का प्रावधान (अनु. 330A, 332A)। यह Act 16 अप्रैल 2026 से लागू (notified) है, पर सीटों का आरक्षण अगली Census के बाद होने वाले परिसीमन (delimitation) से ही चालू होगा; नवंबर 2026 तक आरक्षण शुरू नहीं हुआ है।
  • 131वां संशोधन विधेयक (2026): लोकसभा सीटें बढ़ाकर जल्दी आरक्षण लागू करने का यह विधेयक 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में जरूरी 2/3 बहुमत न मिलने से गिर गया (298 पक्ष में; जरूरी 352)। यह विशेष बहुमत की शर्त का ताजा उदाहरण है।

Table 2: प्रमुख ऐतिहासिक संविधान संशोधनों का सार संग्रह

संशोधन व वर्ष प्रभावित भाग मुख्य बदलाव परीक्षा तथ्य
1st, 1951 9वीं अनुसूची भूमि सुधार संरक्षण अंतरिम संसद ने पास किया
7th, 1956 अनुच्छेद 1 14 राज्य व 6 UT बने A, B, C, D श्रेणियां खत्म
24th, 1971 अनु. 13 व 368 राष्ट्रपति अनुमति बाध्यकारी गोलकनाथ वाद के बाद आया
42nd, 1976 प्रस्तावना, 4A लघु संविधान, मूल कर्तव्य स्वर्ण सिंह समिति आधार
44th, 1978 अनु. 300A, 352 सशस्त्र विद्रोह, संपत्ति विधिक अनु. 20 व 21 सुरक्षित
52nd, 1985 10वीं अनुसूची दलबदल विरोधी कानून फैसला स्पीकर/सभापति करते हैं, पर न्यायिक समीक्षा संभव (किहोतो होलोहन वाद 1992)
61st, 1988 (लागू 1989) अनुच्छेद 326 मतदान आयु 18 वर्ष मताधिकार का विस्तार
73rd-74th, 1992 भाग 9 व 9A पंचायत व नगर पालिका स्थानीय स्वशासन मजबूत
86th, 2002 अनुच्छेद 21A शिक्षा मूल अधिकार 6-14 वर्ष के बच्चे
91st, 2003 अनु. 75 व 164 मंत्रिपरिषद अधिकतम 15% राजस्थान में 30 मंत्री
101st, 2016 अनुच्छेद 279A GST व्यवस्था लागू एक देश, एक कर
103rd, 2019 अनु. 15(6), 16(6) EWS वर्ग को 10% कोटा आर्थिक आधार पर कोटा
104th, 2020 अनुच्छेद 334 SC/ST कोटा 2030 तक एंग्लो-इंडियन खत्म
106th, 2023 अनु. 330A, 332A महिलाओं के लिए 33% सीटें परिसीमन के बाद चालू होगा

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Revision)

  • संविधान संशोधन भाग 20 के अनु. 368 में दक्षिण अफ्रीका से लिया गया है।
  • संशोधन विधेयक केवल संसद में पेश हो सकता है, विधानमंडलों में नहीं।
  • संशोधन विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी जरूरी नहीं है।
  • संशोधन विधेयक पर संसद की संयुक्त बैठक नहीं हो सकती।
  • 24वें संशोधन 1971 से राष्ट्रपति की अनुमति अनिवार्य है।
  • अनुच्छेद 3 से नए राज्यों का निर्माण साधारण बहुमत से होता है (अनु. 368 से बाहर)।
  • अनुच्छेद 169 से विधान परिषद गठन/समाप्ति साधारण बहुमत से होती है।
  • 24 अप्रैल 1973 को केशवानंद भारती वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने मूल स्वरूप का सिद्धांत दिया।
  • 42वें संशोधन 1976 (लघु संविधान) से प्रस्तावना में 3 नए शब्द जुड़े।
  • 44वें संशोधन 1978 से संपत्ति का अधिकार कानूनी हक (अनु. 300A) बना।
  • 91वें संशोधन 2003 से मंत्रिपरिषद अधिकतम सदन की कुल संख्या के 15% तक रह गई।
  • 106वें संशोधन 2023 से लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटों का प्रावधान है; यह Census के बाद परिसीमन से चालू होगा।
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RAS Prelims MCQ

  1. भारतीय संविधान के किस भाग व अनुच्छेद में संशोधन का उल्लेख है?
    A) भाग 18, अनु. 352
    B) भाग 20, अनु. 368
    C) भाग 17, अनु. 343
    D) भाग 21, अनु. 370
    उत्तर: B) भाग 20, अनु. 368
    कारण: भाग 20 के अनुच्छेद 368 में संविधान संशोधन का उल्लेख है।
  2. संविधान संशोधन विधेयक के संबंध में गलत कथन पहचानिए:
    A) यह केवल संसद में पेश हो सकता है
    B) राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी आवश्यक है
    C) संयुक्त बैठक का प्रावधान नहीं है
    D) राष्ट्रपति अनुमति देने के लिए बाध्य हैं
    उत्तर: B) राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी आवश्यक है
    कारण: संविधान संशोधन विधेयक पेश करने के लिए राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी जरूरी नहीं होती।
  3. संघीय विषयों में संशोधन के लिए कितने राज्यों की सहमति जरूरी है?
    A) एक-तिहाई राज्य
    B) कम से कम आधे (50%) राज्य
    C) दो-तिहाई राज्य
    D) सभी राज्य
    उत्तर: B) कम से कम आधे (50%) राज्य
    कारण: संघीय प्रावधानों में संशोधन के लिए न्यूनतम 50% राज्यों के विधानमंडलों का साधारण बहुमत आवश्यक है।
  4. सर्वोच्च न्यायालय ने किस वाद में 'मूल स्वरूप' (Basic Structure) का सिद्धांत दिया?
    A) शंकरी प्रसाद (1951)
    B) गोलकनाथ (1967)
    C) केशवानंद भारती (1973)
    D) मिनर्वा मिल्स (1980)
    उत्तर: C) केशवानंद भारती (1973)
    कारण: 24 अप्रैल 1973 को 13 जजों की पीठ ने 7-6 से मूल संरचना का सिद्धांत दिया।
  5. किस संशोधन से राष्ट्रपति की अनुमति संशोधन विधेयक पर बाध्यकारी बनी?
    A) 24वां संशोधन 1971
    B) 42वां संशोधन 1976
    C) 44वां संशोधन 1978
    D) 1st संशोधन 1951
    उत्तर: A) 24वां संशोधन 1971
    कारण: 24वें संविधान संशोधन 1971 से राष्ट्रपति की सहमति बाध्यकारी बनाई गई।
  6. संपत्ति के अधिकार को किस संशोधन से विधिक हक में बदला गया?
    A) 42वां संशोधन 1976
    B) 44वां संशोधन 1978
    C) 52वां संशोधन 1985
    D) 86वां संशोधन 2002
    उत्तर: B) 44वां संशोधन 1978
    कारण: 44वें संशोधन 1978 ने संपत्ति के अधिकार को हटाकर अनुच्छेद 300A में विधिक हक बनाया।
  7. मतदान की न्यूनतम आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष किस संशोधन से हुई?
    A) 52वां संशोधन 1985
    B) 61वां संशोधन 1988
    C) 69वां संशोधन 1991
    D) 73वां संशोधन 1992
    उत्तर: B) 61वां संशोधन 1988
    कारण: 61वें संशोधन 1988 (लागू 1989) से मतदान की न्यूनतम आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष की गई।
  8. 91वें संशोधन 2003 के अनुसार राजस्थान में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम कितने मंत्री हो सकते हैं?
    A) 25
    B) 30
    C) 35
    D) 40
    उत्तर: B) 30
    कारण: 200 विधानसभा सीटों का अधिकतम 15% यानी राजस्थान में मुख्यमंत्री समेत 30 मंत्री हो सकते हैं।
  9. संविधान की 9वीं अनुसूची किस संशोधन से जोड़ी गई थी?
    A) 1st संशोधन 1951
    B) 7th संशोधन 1956
    C) 42nd संशोधन 1976
    D) 44th संशोधन 1978
    उत्तर: A) 1st संशोधन 1951
    कारण: प्रथम संविधान संशोधन 1951 से भूमि सुधारों की रक्षा के लिए 9वीं अनुसूची जोड़ी गई।
  10. 106वां संविधान संशोधन अधिनियम 2023 किससे संबंधित है?
    A) GST कर व्यवस्था
    B) राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
    C) महिलाओं को संसद व विधानसभाओं में 33% आरक्षण
    D) EWS आरक्षण
    उत्तर: C) महिलाओं को संसद व विधानसभाओं में 33% आरक्षण
    कारण: नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संशोधन) में लोकसभा व विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटों का प्रावधान है।

RAS Mains Questions

Exam के लिए Important Questions नीचे दिए गए हैं:

Short Questions (2–3 marks)

  1. भारतीय संविधान संशोधन में संसद के 'विशेष बहुमत' को स्पष्ट कीजिए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: अनुच्छेद 368 में विशेष बहुमत का अर्थ दोहरी शर्त है- सदन की कुल सदस्य संख्या का 50% से अधिक समर्थन और मतदान करने वालों का न्यूनतम दो-तिहाई (2/3) बहुमत। मूल अधिकार और नीति निर्देशक तत्व इसी से बदलते हैं।
  2. संविधान संशोधन में किन मामलों में आधे राज्यों की सहमति जरूरी होती है? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: जब संशोधन संघीय व्यवस्था (राष्ट्रपति चुनाव, 7वीं अनुसूची, SC व HC शक्तियां, अनु. 368) पर असर डाले, तब कम से कम आधे राज्यों का साधारण अनुमोदन जरूरी है।
  3. 24वें संविधान संशोधन 1971 के दो मुख्य प्रभाव बताइए। (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: (1) गोलकनाथ फैसले को पलटकर संसद को मूल अधिकारों में संशोधन की शक्ति मिली। (2) राष्ट्रपति के लिए संशोधन विधेयक पर हस्ताक्षर करना कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया गया।
  4. वामन राव वाद (1981) का मुख्य न्यायिक फैसला क्या था? (2 marks)
    उत्तर रूपरेखा: सर्वोच्च न्यायालय ने तय किया कि 24 अप्रैल 1973 के बाद 9वीं अनुसूची में शामिल सभी कानूनों की न्यायिक समीक्षा हो सकती है, ताकि मूल स्वरूप की रक्षा बनी रहे।

Long Questions (5–10 marks)

  1. केशवानंद भारती वाद (1973) में दिए गए 'मूल स्वरूप के सिद्धांत' को समझाइए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - पृष्ठभूमि: शंकरी प्रसाद (1951) में संसद को शक्ति मिली, गोलकनाथ (1967) में रोक लगी, फिर 24वां संशोधन आया।
    - 24 अप्रैल 1973: 13 जजों की पीठ ने 7-6 से माना कि संसद संविधान बदल सकती है, पर मूल ढांचे को नहीं मिटा सकती।
    - मूल स्वरूप के तत्व: संविधान की सर्वोच्चता, लोकतांत्रिक गणराज्य, पंथनिरपेक्षता, स्वतंत्र न्यायपालिका और न्यायिक समीक्षा।
    - महत्व: संसद व न्यायपालिका में संतुलन बना और निरंकुशता पर रोक लगी।
  2. स्वतंत्रता के बाद हुए किन्हीं पांच प्रमुख संविधान संशोधनों के महत्व का विश्लेषण कीजिए। (10 marks)
    उत्तर रूपरेखा:
    - 42nd संशोधन 1976: प्रस्तावना में 3 शब्द, मूल कर्तव्य, 5 विषय समवर्ती सूची में (लघु संविधान)।
    - 44th संशोधन 1978: सशस्त्र विद्रोह शब्द, अनु. 20 व 21 सुरक्षा, संपत्ति विधिक हक बना।
    - 73rd व 74th संशोधन 1992: पंचायती राज व नगर पालिकाओं से सत्ता का वास्तविक विकेंद्रीकरण।
    - 86th संशोधन 2002: शिक्षा का अधिकार (अनुच्छेद 21A) मूल अधिकार बना।
    - 106th संशोधन 2023: महिलाओं को 33% आरक्षण देकर राजनीतिक भागीदारी मजबूत की।
    - सार: यह साबित करता है कि भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है।

FAQs

क्या संसद संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है?

संसद मूल अधिकारों समेत कई भागों को बदल सकती है, लेकिन केशवानंद भारती वाद (1973) के अनुसार मूल स्वरूप को नष्ट नहीं कर सकती।

क्या संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है?

नहीं, संविधान संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का कोई प्रावधान नहीं है। दोनों सदनों में अलग पास होना जरूरी है।

क्या राज्य विधानमंडल संविधान संशोधन विधेयक पेश कर सकते हैं?

नहीं, संविधान संशोधन विधेयक केवल संसद के किसी भी सदन में पेश हो सकता है, राज्य विधानमंडलों को यह अधिकार नहीं है।

क्या राष्ट्रपति संविधान संशोधन विधेयक को लौटा सकते हैं?

नहीं, 24वें संशोधन 1971 के बाद राष्ट्रपति संशोधन विधेयक पर अनुमति देने के लिए बाध्य हैं, वे इसे पुनर्विचार के लिए नहीं लौटा सकते।

परीक्षा के लिए याद रखें

  • संशोधन = भाग 20, अनुच्छेद 368; तरीका दक्षिण अफ्रीका से लिया गया।
  • विधेयक सिर्फ संसद (किसी भी सदन) में; संयुक्त बैठक नहीं; राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी जरूरी नहीं।
  • विशेष बहुमत = सदन की कुल संख्या का बहुमत + उपस्थित और मतदान करने वालों का 2/3।
  • संघीय विषयों (54-55, 7वीं अनुसूची, SC/HC, 368 खुद) में आधे राज्यों का अनुमोदन भी जरूरी।
  • 24वें संशोधन 1971 से राष्ट्रपति संशोधन विधेयक पर सहमति देने को बाध्य।
  • केशवानंद भारती (24 अप्रैल 1973, 13 जज, 7-6) = मूल ढांचे का सिद्धांत।
  • 61वां संशोधन 1988 (लागू 1989) = मतदान आयु 18; 106वां 2023 = महिलाओं के लिए 33% सीटें (परिसीमन के बाद)।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Quick Answer: Article 368 और Constitutional Amendment in Hindi: संविधान संशोधन (Constitutional Amendment Process) का तरीका संविधान के भाग 20 के अनुच्छेद 368 में दक्षिण अफ्रीका से जोड़ी गई है।
भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के पाठ्यक्रम में Article 368 और Constitutional Amendment in Hindi: संविधान संशोधन का तरीका (अनुच्छेद 368): प्रकार, सीमाएं और प्रमुख ऐतिहासिक संशोधन एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह मुख्य सिद्धांतों, परीक्षा प्रश्नों और सूत्रों को समझने के लिए अत्यधिक आवश्यक है।
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